भोपाल: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में इस साल गणेश चतुर्थी और नवरात्रि (Ganesh Chaturthi & Navratri 2025) के दौरान झीलों (Upper & Lower Lakes) में मूर्ति विसर्जन नहीं किया जा सकेगा। NGT (National Green Tribunal) के सख्त आदेश के बाद BMC (Bhopal Municipal Corporation) ने वैकल्पिक विसर्जन घाट (Alternate Immersion Ghats) तैयार करने की योजना शुरू कर दी है।
NGT ने क्यों लगाया Visarjan Ban?
NGT ने पर्यावरण संरक्षण (environmental protection) को प्राथमिकता देते हुए यह आदेश दिया है कि अब भोपाल की झीलों में किसी भी प्रकार की मूर्ति का विसर्जन (idol immersion) नहीं किया जाएगा। इससे झीलों में प्रदूषण (water pollution) की समस्या कम होगी और जलजीवों को भी राहत मिलेगी।
BMC की तैयारी: 6 जगह बनेंगे Alternate Visarjan Ghats
BMC ने कहा है कि वो श्रद्धालुओं को सुचारू और सुरक्षित विसर्जन सुविधा देने के लिए झीलों से दूर वैकल्पिक विसर्जन घाट (Alternate Ghats) तैयार कर रहा है। इन जगहों पर विसर्जन की सुविधा उपलब्ध होगी:
- मालखेड़ी घाट: मौजूदा घाट को और बड़ा व बेहतर बनाया जा रहा है।
- संजीव नगर: लगभग फाइनल किया गया नया विसर्जन स्थल।
- नीलबड़ और BU (Barkatullah University) कैंपस: इन दोनों जगहों पर घाट बनाए जाने की योजना है।
- बैरागढ़ घाट: पहले से तैयार घाट, झीलों से अलग है और उपयोग में रहेगा।
- प्रेमपुरा: अंतिम मंजूरी बाकी है, लेकिन प्रस्तावित घाट में शामिल है।
Mayor Malti Rai ने क्या कहा?
भोपाल की महापौर माला राय ने कहा:
“हमारी झीलें भोपाल की शान हैं। उन्हें बचाने के लिए यह ज़रूरी कदम है। हम श्रद्धालुओं को बेहतर विकल्प देने के लिए पूरी तैयारी कर रहे हैं।”
पहले किन जगहों पर होता था Visarjan?
परंपरागत रूप से प्रेमपुरा, खटलापुरा, हथाईखेड़ा डैम, आर्च ब्रिज, बैरागढ़ और मालखेड़ी घाटों पर मूर्ति विसर्जन होता था, जो अब झीलों के समीप होने की वजह से प्रतिबंधित हो गए हैं।
कब तक तैयार होंगे नए घाट?
गणेश चतुर्थी (सितंबर 2025) और नवरात्रि (अक्टूबर 2025) से पहले इन सभी घाटों को पूरी तरह तैयार कर लेने का लक्ष्य रखा गया है। यहाँ साफ-सफाई, ट्रैफिक कंट्रोल, सुरक्षा और रौशनी जैसी सुविधाएं भी रहेंगी।
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