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इंदौर में कमजोर मानसून से जल संकट का खतरा, महापौर ने मांगा 50 करोड़ का पैकेज

इंदौर। मध्य प्रदेश में कमजोर मानसून के कारण आने वाले महीनों में जल संकट की आशंका बढ़ गई है। प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में सामान्य तौर पर करीब 37 इंच बारिश होती है, लेकिन इस बार अब तक केवल 23 इंच वर्षा दर्ज की गई है। हालात को देखते हुए महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से जल प्रबंधन के लिए 50 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज देने की मांग की है। जल संकट से निपटने की रणनीति तैयार करने के लिए नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट और इंदौर नगर निगम सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की जा रही है। 40 लाख आबादी, रोजाना 750 से 800 एमएलडी पानी की मांग इंदौर की आबादी करीब 40 लाख है। शहर में घरेलू जरूरतों के लिए प्रतिदिन लगभग 620 एमएलडी पानी की आवश्यकता होती है। औद्योगिक, व्यावसायिक, संस्थागत और अन्य उपयोगों को शामिल करने पर कुल मांग बढ़कर 750 से 800 एमएलडी तक पहुंच जाती है। वर्ष 2008 में भी शहर में करीब 20 इंच बारिश हुई थी, जिसके कारण जल संकट की स्थिति बनी थी। अब 18 साल बाद कम बारिश ने एक बार फिर गर्मियों में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ा दी है। डीमार्ट के पास नर्मदा की पाइपलाइन फूटी, अंडरपास बंद कम बारिश के बीच पानी की बर्बादी से जुड़ी समस्या भी सामने आई है। गुरुवार सुबह बंगाली चौराहे से बायपास के बीच डीमार्ट के पास नर्मदा जलापूर्ति की पाइपलाइन फूट गई। पाइपलाइन से तेज दबाव के साथ पानी निकलने लगा, जिससे सड़क पर जाम लग गया। पानी भरने के कारण अंडरपास भी बंद करना पड़ा। भूजल दोहन 90 प्रतिशत के करीब विशेषज्ञों के मुताबिक, इंदौर की बड़ी आबादी नर्मदा जलापूर्ति पर निर्भर है। इसके जरिए शहर को प्रतिदिन करीब 440 एमएलडी पानी मिलता है। हालांकि, लीकेज और अन्य कारणों से लगभग 22 प्रतिशत पानी बर्बाद हो जाता है। शहर में एक लाख से अधिक निजी बोरवेल हैं। इसके अलावा नगर निगम के करीब 6,500 बोरवेल और हाइड्रेंट भी हैं। केंद्रीय भूजल बोर्ड की 2025 की रिपोर्ट में शहर और ग्रामीण क्षेत्रों को क्रिटिकल जोन में रखे जाने का उल्लेख है। रिपोर्ट के मुताबिक, भूजल दोहन का स्तर करीब 90 प्रतिशत है। इसमें और वृद्धि होने पर जल संकट की स्थिति गंभीर हो सकती है। पिछली गर्मियों में 700 टैंकरों से पहुंचाना पड़ा था पानी पिछली गर्मियों में बोरवेल पर निर्भर आबादी के करीब 40 प्रतिशत हिस्से को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ा था। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लगभग 700 टैंकरों के जरिए पानी की आपूर्ति करनी पड़ी थी। इस बार तालाबों में कम जलभराव, भूजल का लगातार दोहन और जलापूर्ति नेटवर्क में पानी की बर्बादी प्रशासन के सामने बड़ी चुनौतियां बन सकती हैं। ऐसे में शहर की जल जरूरतों को पूरा करने के लिए बेहतर जल प्रबंधन, लीकेज पर नियंत्रण और उपलब्ध जल स्रोतों का प्रभावी उपयोग अहम होगा।
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लिव-इन पार्टनर की हत्या कर दर्ज कराई गुमशुदगी, पुलिस पूछताछ में खुला राज

मध्यप्रदेश के भिंड में लिव-इन पार्टनर की हत्या का मामला सामने आया है। आरोप है कि भिंड निवासी सत्यप्रकाश उर्फ बादशाह जाटव ने बिहार निवासी नर्सिंग ऑफिसर स्नेहलता की हत्या कर शव उत्तर प्रदेश के पचनदा में नदी में फेंक दिया। इसके बाद उसने पुलिस को गुमशुदगी का आवेदन देकर मामले को छिपाने की कोशिश की। पुलिस की पूछताछ में उसने हत्या की बात कबूल कर ली। फिलहाल पुलिस टीम नदी में शव की तलाश कर रही है। कॉलेज में हुई थी पहचान, लिव-इन में रहने लगे दोनों जानकारी के मुताबिक, सत्यप्रकाश पहले से शादीशुदा था और उसकी कोई संतान नहीं थी। कॉलेज में पढ़ाई के दौरान उसका संपर्क स्नेहलता से हुआ। बाद में दोनों लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगे। इस दौरान उनका एक बेटा भी हुआ। बताया जा रहा है कि सत्यप्रकाश का अपनी पत्नी से विवाद चल रहा था। इसी के चलते उसने स्नेहलता की हत्या की साजिश रची। 8 अक्टूबर को उसने अपने बेटे को पत्नी के हवाले कर दिया। कानपुर घुमाने के बहाने ले गया, रास्ते में हत्या का आरोप आरोप है कि बेटे को पत्नी को सौंपने के बाद सत्यप्रकाश स्नेहलता को कानपुर घुमाने के बहाने अपने साथ ले गया। इस दौरान एंबुलेंस चालक राजवीर खन्ना और एक अन्य साथी भी उसके साथ थे। पुलिस के मुताबिक, रास्ते में स्नेहलता की हत्या कर दी गई और शव उत्तर प्रदेश के पचनदा में नदी में फेंक दिया गया। गुमशुदगी का आवेदन देकर छिपाने की कोशिश हत्या के बाद सत्यप्रकाश ने सिटी कोतवाली पुलिस को लिखित आवेदन देकर स्नेहलता के लापता होने की सूचना दी। बताया गया है कि उसने गुमशुदगी को लेकर पर्चे भी छपवाए थे, ताकि किसी को उस पर शक न हो। हालांकि, पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और पूछताछ के दौरान सत्यप्रकाश ने हत्या की बात कबूल कर ली। अब पुलिस नदी में शव की तलाश कर रही है। मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका और घटना से जुड़े पहलुओं की जांच जारी है। पुलिस ने क्या कहा? सिटी कोतवाली थाना प्रभारी मुकेश शाक्य के मुताबिक, लापता युवती की हत्या किए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस टीम शव की तलाश कर रही है और मामले में आगे की कार्रवाई जारी है।
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भोपाल न्यू मार्केट आग मामले में छोले-भटूरे दुकान संचालक पर FIR, आज से हॉकर्स की शिफ्टिंग

भोपाल। न्यू मार्केट में 8 अक्टूबर को लगी भीषण आग के मामले में पुलिस ने बालाजी छोले-भटूरे दुकान के संचालक दीप उर्फ दीपू अग्रवाल के खिलाफ FIR दर्ज की है। पुलिस की जांच में सामने आया कि दुकान में भट्टी के पास रखे कपड़े में आग लगी थी, जिसके बाद लपटें फैल गईं। हादसे में आसपास की चार अन्य दुकानों और 12 से ज्यादा रेहड़ियों को नुकसान पहुंचा था। आग से करोड़ों रुपये के नुकसान का अनुमान है। घटना के बाद नगर निगम ने न्यू मार्केट को नो-हॉकर्स जोन बनाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। गुरुवार से हॉकर्स को टीटी नगर स्टेडियम के पास हाट बाजार में शिफ्ट करने की तैयारी है। निगम ने चेतावनी दी है कि तय स्थान पर नहीं जाने वाले हॉकर्स का सामान जब्त किया जा सकता है। भट्टी के पास रखे कपड़े में लगी थी आग पुलिस की जांच के मुताबिक, बालाजी छोले-भटूरे दुकान में भट्टी जल रही थी। इसके पास रखे कपड़े में आग लगने के बाद लपटें फैल गईं और आसपास की दुकानें भी इसकी चपेट में आ गईं। हादसे में आम्रपाली रेस्टोरेंट, विजय स्टोर, एक कैफे और मोबाइल दुकान को नुकसान पहुंचा था। घटना के बाद आम्रपाली रेस्टोरेंट के संचालक पवन अग्रवाल ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। इसी शिकायत के आधार पर टीटी नगर पुलिस ने दुकान संचालक के खिलाफ लापरवाही और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। टीटी नगर थाना प्रभारी गौरव सिंह दोहर के मुताबिक, आग भट्टी के पास रखे कपड़े से शुरू हुई थी। वहीं, दुकान में अग्नि सुरक्षा के जरूरी इंतजाम मौजूद थे या नहीं, इसकी जांच नगर निगम कर रहा है। न्यू मार्केट में दमकल की पहुंच जांचने के लिए मॉकड्रिल आग की घटना के बाद नगर निगम ने न्यू मार्केट में दमकल की पहुंच और रास्तों में आने वाली बाधाओं की जांच शुरू की है। बुधवार को करीब तीन घंटे तक मॉकड्रिल की गई। इस दौरान दो दमकल वाहनों को पूरे मार्केट में घुमाया गया। जहां दमकल को रुकना पड़ा, वहां से निगम ने सामान जब्त किया। 8 अक्टूबर को आग लगने के दौरान दुकानों के सामने रखा सामान दमकल वाहनों के रास्ते में बाधा बना था। इसी को देखते हुए निगम ने बाजार में अतिक्रमण हटाने और रास्ते खाली रखने की कार्रवाई तेज की है। टीटी नगर स्टेडियम के पास शिफ्ट होंगे हॉकर्स नगर निगम ने बुधवार को पूरे दिन मुनादी कराकर हॉकर्स को गुरुवार से निर्धारित स्थान पर जाने की सूचना दी। अतिक्रमण अधिकारी शैलेंद्र सिंह भदौरिया के मुताबिक, न्यू मार्केट के नो-व्हीकल जोन में रेहड़ी लगाकर व्यवसाय करने वाले हॉकर्स को टीटी नगर स्टेडियम के पास स्थित हाट बाजार में विस्थापित किया जाएगा। निगम की योजना न्यू मार्केट को नो-हॉकर्स जोन बनाने की है, ताकि बाजार के रास्ते खुले रहें और आपात स्थिति में दमकल वाहनों को पहुंचने में परेशानी न हो। दुकानों के सामने पीली लाइन की दोबारा मार्किंग नगर निगम दुकानों के सामने पीली लाइन की दोबारा मार्किंग भी कर रहा है। बुधवार से यह प्रक्रिया शुरू की गई। दुकानदारों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि पीली लाइन से आगे सामान रखने पर जब्ती की कार्रवाई की जाएगी। निगम का उद्देश्य दुकानों के सामने का रास्ता खाली रखना है, ताकि आग या किसी अन्य आपात स्थिति में बचाव कार्य प्रभावित न हो। आग वाली जगह से 100 फीट दूर भी जलती हैं भट्टियां आग लगने वाली जगह से करीब 100 फीट की दूरी पर छोले-भटूरे की दो अन्य दुकानें भी संचालित हो रही हैं। आसपास दो से तीन नमकीन की दुकानें भी हैं, जहां सुबह से रात तक भट्टियां जलती हैं। ऐसे में आग से बचाव के इंतजामों और भट्टियों के आसपास रखे सामान की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। दुकानों में अग्नि सुरक्षा के नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी नियमित जांच जरूरी मानी जा रही है। चौक बाजार में 22 लाख का फायर हाइड्रेंट सिस्टम भी सवालों में शहर के पुराने बाजारों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंताएं सामने आई हैं। जानकारी के मुताबिक, चौक बाजार और इब्राहिमपुरा की 10 से 12 फीट चौड़ी गलियों में आग बुझाने के लिए नगर निगम ने करीब 22 लाख रुपये की लागत से अंडरग्राउंड फायर हाइड्रेंट सिस्टम लगाया था। जुलाई 2026 में नेमा डिजाइनर स्टूडियो में आग लगने के दौरान इस सिस्टम के काम नहीं करने की बात सामने आई थी। इसके बाद सिस्टम की प्रेशर टेस्टिंग और रखरखाव को लेकर सवाल उठे। जुमेराती, इब्राहिमपुरा, नदीम रोड और घोड़ा नक्कास समेत शहर के आठ प्रमुख बाजारों में भी अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की नियमित जांच और रखरखाव की जरूरत बताई जा रही है। बैरागढ़ के फायर सेफ्टी सिस्टम के रखरखाव पर भी सवाल 17 दिसंबर 2017 को बैरागढ़ के संत हिरदाराम शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में भीषण आग लगी थी, जिसमें 100 से ज्यादा कपड़े की दुकानें जलकर खाक हो गई थीं। घटना के बाद होज-रील पाइप, ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर और फायर वाटर पंप लगाने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सिस्टम लगाने के बाद उसके रखरखाव में कमी और उपकरणों पर जंग लगने जैसी समस्याएं सामने आई हैं। मेन कॉरिडोर में अतिक्रमण और मॉकड्रिल नहीं होने की बात भी कही गई है। न्यू मार्केट की आग के बाद अब सवाल केवल अतिक्रमण हटाने का नहीं, बल्कि बाजारों में अग्नि सुरक्षा उपकरणों की नियमित जांच, रखरखाव और आपातकालीन रास्ते खुले रखने का भी है।
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बिलासपुर में 7-8 मिनट में हो रही वाहनों की फिटनेस जांच पर सवाल, 800 की फीस के बदले 5 हजार मांगने का आरोप

बिलासपुर। मटियारी-बेलतरा बाईपास स्थित निजी वाहन फिटनेस सेंटर में व्यावसायिक वाहनों की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। मौके पर एक वाहन की फिटनेस जांच महज 7 से 8 मिनट में पूरी होती दिखाई दी। जांच के बाद बाहर निकली एक बस गेट पर दस्तावेज लेते समय ही बंद हो गई। चालक ने दोबारा इंजन स्टार्ट करने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। आखिरकार लोगों को धक्का लगाकर बस को हटाना पड़ा। घटना ने फिटनेस जांच की गुणवत्ता और प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। सेंटर के बाहर सुबह से ही बसों और ट्रकों की कतार लगी थी। कई वाहन मालिक जांच से पहले इंडिकेटर, हेडलाइट और दूसरी लाइटों की खराबियां ठीक कराते नजर आए। कुछ वाहनों पर रेडियम पट्टियां भी लगाई जा रही थीं। कमियां दूर करने के बाद वाहनों को जांच के लिए अंदर भेजा जा रहा था। ढाई साल पहले निजी संस्था को सौंपी गई व्यवस्था करीब ढाई साल पहले तक व्यावसायिक वाहनों की फिटनेस जांच आरटीओ परिसर में होती थी। बाद में यह व्यवस्था निजी संस्था रोविंग आई सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड को सौंप दी गई। इसके बाद फिटनेस सेंटर को मटियारी-बेलतरा बाईपास पर स्थानांतरित कर दिया गया। अब वाहन मालिकों को लगरा स्थित आरटीओ कार्यालय से करीब पांच किलोमीटर दूर इस सेंटर तक जाना पड़ता है। व्यवस्था निजी हाथों में जाने के बाद जांच प्रक्रिया, समय और खर्च को लेकर वाहन मालिकों की शिकायतें सामने आ रही हैं। 29 बिंदुओं की जांच 7-8 मिनट में कैसे? बिलासपुर बस मालिक परिवहन संघ के महासचिव नितिन जुनेजा ने कहा कि फिटनेस जांच निजी हाथों में जाने के बाद वाहन मालिकों की परेशानियां बढ़ी हैं। उनके मुताबिक, कुछ लोग संपर्कों के जरिए जल्दी काम करा लेते हैं, जबकि अन्य वाहन मालिकों को चार-चार घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। इससे उनका समय और पैसा दोनों प्रभावित होते हैं। जुनेजा के अनुसार, फिटनेस जांच के दौरान करीब 29 बिंदुओं की जांच की जानी होती है। इसमें ब्रेक, सस्पेंशन, स्टीयरिंग, लाइट, टायर, उत्सर्जन मानक और अन्य सुरक्षा उपकरणों की स्थिति शामिल है। संबंधित वाहन श्रेणियों में स्पीड गवर्नर और जीपीएस उपकरणों की जांच भी जरूरी हो सकती है। ऐसे में मौके पर 7 से 8 मिनट में जांच पूरी होते दिखाई देने से यह सवाल उठ रहा है कि सभी जरूरी तकनीकी बिंदुओं की जांच किस तरह की जा रही है। हालांकि, जांच की गुणवत्ता और नियमों के पालन की वास्तविक स्थिति रिकॉर्ड और प्रक्रिया की विस्तृत पड़ताल के बाद ही स्पष्ट होगी। 800 रुपये की फीस के बदले 5 हजार मांगने का आरोप कुछ वाहन मालिकों ने आरोप लगाया कि करीब 800 रुपये की निर्धारित सरकारी फीस वाले काम के लिए उनसे 5 हजार रुपये तक मांगे जाते हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वाहन मालिकों के मुताबिक, सेंटर के बाहर एजेंट सक्रिय रहते हैं। उनका दावा है कि आरटीओ कार्यालय के पास एजेंटों से बातचीत के बाद उन्हें फिटनेस सेंटर भेजा जाता है। वहीं, सेंटर में दलालों के प्रवेश पर प्रतिबंध होने की बात भी कही जा रही है। इन आरोपों के संबंध में शुल्क का आधिकारिक विवरण, भुगतान की रसीदें और संबंधित रिकॉर्ड सामने आने पर ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। सेंटर प्रबंधन का दावा- जांच प्रक्रिया सही फिटनेस सेंटर के मैनेजर नवीन ने बताया कि एक वाहन की जांच में 7 से 8 मिनट लगते हैं। उनके मुताबिक, वाहनों की फिटनेस जांच सही तरीके से की जाती है और जांच क्षेत्र में किसी को प्रवेश नहीं दिया जाता। उन्होंने बताया कि सेंटर में निगरानी के लिए 36 कैमरे लगाए गए हैं। इसके अलावा, वाहन चालकों के लिए पीने के पानी और बैठने की व्यवस्था भी की गई है। फिलहाल, कम समय में फिटनेस जांच पूरी होने और अतिरिक्त रकम मांगे जाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच से ही व्यवस्था की पारदर्शिता और सुरक्षा मानकों के पालन की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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DAVV में शुरू होगा गर्भ संस्कार पर PG डिप्लोमा कोर्स, पहले बैच में 30 विद्यार्थियों को मिलेगा प्रवेश

इंदौर। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) गर्भावस्था और मां-बच्चे के स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर नया पाठ्यक्रम शुरू करने की तैयारी कर रहा है। विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ फिजिकल एजुकेशन के अंतर्गत स्कूल ऑफ योगा में गर्भ संस्कार पर पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा (PG Diploma) कोर्स शुरू करने की योजना है। इसे शैक्षणिक सत्र 2026-27 से शुरू करने का प्रस्ताव है। पहले बैच में 30 विद्यार्थियों को प्रवेश देने की योजना बनाई गई है। इस पाठ्यक्रम में भारतीय परंपरा में प्रचलित गर्भ संस्कार की अवधारणा को आधुनिक गर्भावस्था देखभाल से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। विद्यार्थियों को गर्भधारण से लेकर प्रसव तक महिला के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी जाएगी। गर्भावस्था से प्रसव तक की देखभाल की पढ़ाई प्रस्तावित कोर्स में गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में होने वाले बदलाव, भ्रूण का विकास, संतुलित पोषण और मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषय शामिल होंगे। इसके अलावा योग, प्राणायाम, ध्यान और मां तथा गर्भस्थ शिशु के बीच भावनात्मक जुड़ाव से जुड़े पहलुओं को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की योजना है। विद्यार्थियों को गर्भावस्था के अलग-अलग चरणों में सुरक्षित शारीरिक गतिविधियों और तनाव प्रबंधन के बारे में भी पढ़ाया जाएगा। इसका उद्देश्य गर्भावस्था के दौरान देखभाल से संबंधित विषयों की व्यवस्थित जानकारी देना है। सैद्धांतिक पढ़ाई के साथ अस्पतालों में प्रशिक्षण गर्भ संस्कार के पीजी डिप्लोमा में कक्षा में पढ़ाई के साथ अस्पतालों में व्यावहारिक प्रशिक्षण देने की भी योजना है। इससे विद्यार्थियों को गर्भावस्था देखभाल से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं को समझने का अवसर मिल सकेगा। हालांकि, गर्भावस्था के दौरान योग, व्यायाम, पोषण और अन्य स्वास्थ्य संबंधी उपायों को अपनाने से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह जरूरी है। यह पाठ्यक्रम चिकित्सा विशेषज्ञों की देखरेख और निर्धारित स्वास्थ्य मानकों के अनुरूप तैयार किया जाना महत्वपूर्ण होगा। योग से जुड़े तीन सर्टिफिकेट कोर्स भी प्रस्तावित DAVV के स्कूल ऑफ योगा में पीजी डिप्लोमा के साथ तीन सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने की भी तैयारी है। इनमें शामिल हैं: इन पाठ्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को योग, पोषण, प्राकृतिक स्वास्थ्य पद्धतियों और एक्यूप्रेशर से जुड़े विषयों की बुनियादी जानकारी देने की योजना है। विश्वविद्यालय की इस पहल के तहत योग और स्वास्थ्य से जुड़े नए शैक्षणिक विकल्प उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। पाठ्यक्रमों के प्रवेश और संचालन से संबंधित विस्तृत जानकारी विश्वविद्यालय की आधिकारिक घोषणा के बाद स्पष्ट होगी।
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बिलासपुर एयरपोर्ट को 4C श्रेणी में अपग्रेड करने पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से 3 सप्ताह में मांगा जवाब

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासा देवी केवट एयरपोर्ट के रनवे विस्तार और हवाई सुविधाओं में बढ़ोतरी को लेकर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) से जवाब मांगा है। मंगलवार को हुई सुनवाई में चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र और जस्टिस संतोष शर्मा की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि बिलासपुर एयरपोर्ट को 4C श्रेणी में अपग्रेड करने के लिए अब तक किए गए प्रयासों की विस्तृत जानकारी तीन सप्ताह के भीतर शपथ पत्र के जरिए पेश की जाए। कोर्ट ने AAI से भी एयरपोर्ट के प्रबंधन, संचालन और विकास की जिम्मेदारी संभालने के संबंध में अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी। पत्राचार से नहीं चलेगा काम, ठोस कदम उठाने की जरूरत सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि बिलासपुर एयरपोर्ट और हवाई सुविधाओं के विस्तार के लिए केंद्र और राज्य सरकार से ठोस कदमों की अपेक्षा है। केवल आपस में पत्राचार करते हुए समय नहीं गंवाया जाना चाहिए। राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि बिलासपुर एयरपोर्ट वर्तमान में 3C श्रेणी में एटीआर विमानों के संचालन के लिए उपयुक्त है। साथ ही, इसे 4C श्रेणी में अपग्रेड करने के लिए राज्य सरकार तैयार है। AAI के जवाब पर याचिकाकर्ताओं ने उठाए सवाल पिछली सुनवाई 29 सितंबर को हुई थी। उस दौरान हाईकोर्ट ने AAI के वरिष्ठ और सक्षम अधिकारी को शपथ पत्र दाखिल कर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया था कि बिलासपुर एयरपोर्ट के प्रबंधन, विकास और संचालन की जिम्मेदारी AAI को सौंपने के राज्य सरकार के प्रस्ताव पर क्या कार्रवाई की गई है। मंगलवार को याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि AAI की ओर से दाखिल शपथ पत्र ऐसे वरिष्ठ और सक्षम अधिकारी का नहीं है, जैसा कोर्ट ने निर्देश दिया था। याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, दस्तावेजों से यह भी सामने आया है कि राज्य सरकार बिलासपुर के साथ अंबिकापुर और जगदलपुर एयरपोर्ट को भी AAI को सौंपने पर विचार कर रही है। जमीन और सुविधाओं की जानकारी मांगने में उलझा मामला याचिकाकर्ताओं ने बताया कि राज्य सरकार के प्रस्ताव पर AAI ने स्पष्ट सहमति या असहमति देने के बजाय एयरपोर्ट की उपलब्ध जमीन, कुल क्षेत्रफल, खसरा-वार विवरण, स्वामित्व और मौजूदा सुविधाओं से जुड़ी जानकारी मांगी है। उनका कहना है कि इस तरह के पत्राचार से एयरपोर्ट को समयबद्ध तरीके से AAI को सौंपने की प्रक्रिया आगे बढ़ती नहीं दिख रही है। बिलासपुर का रनवे अंबिकापुर और जगदलपुर से छोटा याचिकाकर्ताओं के अनुसार, बिलासपुर एयरपोर्ट का रनवे करीब 1,495 मीटर लंबा है। वहीं, अंबिकापुर एयरपोर्ट का रनवे 1,900 मीटर और जगदलपुर का रनवे 1,707 मीटर लंबा बताया गया है। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि गर्मियों में तापमान बढ़ने के कारण विमान की क्षमता के अनुसार सभी यात्रियों को ले जाना संभव नहीं हो पाता। उनके मुताबिक, 72 यात्रियों की क्षमता वाले विमान में यात्रियों की संख्या घटाकर करीब 52 करनी पड़ती है। इसी वजह से अब तक कोई निजी विमानन कंपनी बिलासपुर से अपना संचालन शुरू नहीं कर पाई है। रनवे विस्तार और नए ATC टावर के प्रस्ताव अटके याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि रनवे विस्तार के लिए 63 करोड़ रुपये और नए एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) टावर के निर्माण के लिए 41 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बिलासपुर एयरपोर्ट प्रबंधन की ओर से मंत्रालय भेजा जा चुका है। हालांकि, इन कार्यों को AAI करेगी या राज्य सरकार, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसी असमंजस के कारण काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। तीन सप्ताह में शपथ पत्र, 23 नवंबर को अगली सुनवाई हाईकोर्ट ने विमानन विभाग के सचिव को निर्देश दिया है कि बिलासपुर एयरपोर्ट को 4C श्रेणी में अपग्रेड करने के लिए अब तक किए गए प्रयासों का विस्तृत ब्यौरा तीन सप्ताह के भीतर शपथ पत्र के माध्यम से पेश किया जाए। AAI को भी मामले की अद्यतन स्थिति बताते हुए शपथ पत्र दाखिल करना होगा। अब अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी। इस मामले में केंद्र और राज्य सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर एयरपोर्ट के विस्तार और बेहतर हवाई कनेक्टिविटी की दिशा तय हो सकती है।
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इंदौर में प्लॉट बेचने के नाम पर 7.80 लाख की ठगी का आरोप, ब्रोकर समेत दो पर FIR

शहर के एरोड्रम थाना क्षेत्र में प्लॉट बेचने के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि प्लॉट का सौदा करने के बाद ब्रोकर और प्लॉट मालिक ने फरियादी से 7 लाख 80 हजार रुपये ले लिए, लेकिन न तो प्लॉट की रजिस्ट्री कराई और न ही कब्जा दिया। शिकायत की जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। 9.30 लाख में तय हुआ था प्लॉट का सौदा पुलिस के मुताबिक, नंदबाग कॉलोनी निवासी विजय चौहान ने शिकायत में बताया कि उन्होंने नंदबाग में एक प्लॉट का सौदा 9 लाख 30 हजार रुपये में तय किया था। इस संबंध में एग्रीमेंट भी किया गया था। फरियादी ने आरोप लगाया कि उन्होंने नकद और ऑनलाइन माध्यम से कुल 7 लाख 80 हजार रुपये का भुगतान कर दिया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें प्लॉट का कब्जा नहीं मिला और रजिस्ट्री भी नहीं कराई गई। ब्रोकर ने परिचित बताकर कराया था सौदा विजय चौहान के अनुसार, धर्मेंद्र ठाकुर ने उन्हें बताया था कि नंदकिशोर मनावत उसका परिचित है और वह अपना प्लॉट बेचना चाहता है। इसके बाद धर्मेंद्र ने सौदे में ब्रोकर की भूमिका निभाई और इसके बदले 10 हजार रुपये लिए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि भुगतान के बाद जब उन्होंने रजिस्ट्री कराने और प्लॉट का कब्जा देने की मांग की, तो उन्हें लगातार टालमटोल का सामना करना पड़ा। 25 से ज्यादा केस होने की धमकी देने का आरोप फरियादी ने आरोप लगाया कि रजिस्ट्री और कब्जे के लिए दबाव बनाने पर धर्मेंद्र ठाकुर ने धमकी दी। शिकायत के मुताबिक, उसने कहा कि उसके खिलाफ 25 से ज्यादा मामले चल रहे हैं। साथ ही, उसके या नंदकिशोर मनावत के पास दोबारा आने पर अंजाम भुगतने की चेतावनी भी दी। 2.80 लाख रुपये लौटाए, 5 लाख बाकी होने का दावा विजय चौहान के मुताबिक, पुलिस में शिकायत करने की बात कहने के बाद नंदकिशोर मनावत ने 2 लाख 50 हजार रुपये नकद और 30 हजार रुपये ऑनलाइन वापस किए। हालांकि, फरियादी का आरोप है कि बाकी 5 लाख रुपये लौटाने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद विजय चौहान ने पुलिस अधिकारियों से शिकायत की। जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी बाकी है।
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कैंसर की दवाओं की कीमतों में बड़ा अंतर: ₹538 का इंजेक्शन बाजार में ₹1,500 तक, एक ही दवा की MRP में 16 गुना तक फर्क

रायपुर। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों और उनके परिजनों पर इलाज के खर्च का भारी बोझ पड़ रहा है। दवाओं की कीमतों में बड़े अंतर ने इस परेशानी को और बढ़ा दिया है। एक ही दवा अलग-अलग कंपनियों के ब्रांड में अलग कीमत पर बेची जा रही है। वहीं, सरकारी खरीद दर और बाजार में मिलने वाली कीमत के बीच भी काफी अंतर सामने आया है। कैंसर की दवाओं की कीमतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी सवाल उठाया है। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए पूछा कि 2,700 रुपये की दवा 27,000 रुपये की कैसे हो सकती है? इसी मुद्दे पर दैनिक भास्कर की पड़ताल में दवाओं की एमआरपी, बाजार में उपलब्ध कीमत और सरकारी खरीद दरों के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। ₹538 का इंजेक्शन बाजार में 1,500 रुपये तक पड़ताल के मुताबिक, एज़ासिटिडाइन (Azacitidine) 100 एमजी इंजेक्शन सरकारी खरीद में 538 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि बाजार में इसकी कीमत करीब 1,200 से 1,500 रुपये तक बताई गई है। एक ही दवा के अलग-अलग ब्रांड की एमआरपी और वास्तविक बिक्री कीमत में भी बड़ा अंतर मिला। एक ब्रांड के इंजेक्शन की एमआरपी 8,888 रुपये दर्ज है, लेकिन कुछ मेडिकल स्टोर पर यह 1,890 रुपये में मिल रहा है। दूसरे ब्रांड की एमआरपी 6,337 रुपये है, जबकि इसकी कीमत 1,100 रुपये बताई गई। वहीं, तीसरे ब्रांड की एमआरपी 5,964.70 रुपये होने के बावजूद यह 800 रुपये में बिक रहा है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि केवल एमआरपी देखकर मरीज के लिए दवा की वास्तविक कीमत का अंदाजा लगाना मुश्किल हो सकता है। 10 में से 8 दवाओं की कीमतों में बड़ा अंतर दैनिक भास्कर की पड़ताल में कैंसर की 10 आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली दवाओं की कीमतों की सरकारी खरीद दरों से तुलना की गई। इसके लिए रायपुर के थोक दवा बाजार, मेडिकल स्टोर, निजी अस्पतालों की फार्मेसी, एम्स की फार्मेसी और सरकारी खरीद के आंकड़े जुटाए गए। कैंसर विशेषज्ञों की मदद से इन कीमतों का विश्लेषण भी किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, 10 में से 2 दवाओं की कीमतों में सरकारी खरीद दर की तुलना में 12 से 16 गुना तक अंतर मिला। वहीं, 6 अन्य दवाओं की कीमतें 2 से 8 गुना तक अधिक पाई गईं। पड़ताल में यह भी सामने आया कि कई दवाओं की एमआरपी काफी ऊंची दर्ज है। ऐसे में मेडिकल स्टोर पर मरीजों को वास्तविक कीमत और उपलब्ध विकल्पों की जानकारी न होने पर अधिक खर्च करना पड़ सकता है। सरकारी अस्पताल में मुफ्त दवा, बिल आयुष्मान कार्ड से रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल स्थित कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट की फार्मेसी में सरकारी दरों पर खरीदी गई दवाओं पर 12 प्रतिशत टैक्स लगाए जाने की जानकारी भी पड़ताल में सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, यहां मरीजों को ये दवाएं मुफ्त दी जाती हैं, जबकि इनका बिल आयुष्मान कार्ड के माध्यम से समायोजित किया जाता है। मरीजों के लिए कीमतों में पारदर्शिता जरूरी कैंसर का इलाज अक्सर लंबे समय तक चलता है और मरीजों को कई महंगी दवाओं की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में सरकारी खरीद दर, दवा की एमआरपी और वास्तविक बिक्री मूल्य के बीच बड़ा अंतर मरीजों के लिए आर्थिक परेशानी बढ़ा सकता है। दवाओं की कीमतों में पारदर्शिता, अलग-अलग ब्रांड की कीमतों की स्पष्ट जानकारी और निर्धारित दरों की निगरानी से मरीजों को राहत मिल सकती है। हालांकि, किसी दवा की वास्तविक कीमत उसके ब्रांड, पैकिंग, उपलब्धता और खरीद की शर्तों के आधार पर अलग हो सकती है।
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भोपाल के केरवा डैम के अतिक्रमणों की होगी जांच, NGT ने कमेटी को दिए निरीक्षण के निर्देश

भोपाल के केरवा डैम की सीमा और उसके आसपास हुए अतिक्रमणों को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सख्ती दिखाई है। ट्रिब्यूनल ने संबंधित कमेटी को डैम के फुल टैंक लेवल (FTL) और बफर एरिया का अंतिम निर्धारण करने के लिए निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इस प्रक्रिया में सरकारी रिकॉर्ड, जल संसाधन विभाग के कंटूर और टोपोग्राफिकल मैप, ड्रोन सर्वे, सैटेलाइट इमेजरी और मौके पर किए जाने वाले भौतिक सत्यापन को आधार बनाया जाएगा। बुधवार को प्रस्तावित ग्राउंड ट्रूथिंग अंतिम समय पर स्थगित कर दी गई। अब गुरुवार को टीम के निरीक्षण करने की संभावना है। NGT ने FTL और बफर एरिया तय करने के दिए निर्देश केरवा डैम के आसपास अतिक्रमणों को लेकर हाल ही में हुई सुनवाई में NGT ने कमेटी को उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर जलाशय की वास्तविक सीमा का निरीक्षण करने को कहा था। ट्रिब्यूनल के निर्देशों के अनुसार, FTL और बफर एरिया का अंतिम निर्धारण ड्रोन सर्वे, सैटेलाइट तस्वीरों, ग्राउंड ट्रूथिंग और सरकारी दस्तावेजों के मिलान के बाद किया जाएगा। कमेटी को इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट अगली सुनवाई में पेश करनी है। मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को निर्धारित है। 108 सीमा-चिह्नों की भी होगी जांच उपलब्ध पुराने रिकॉर्ड के अनुसार, केरवा डैम का जलमग्न क्षेत्र लगभग 462.150 हेक्टेयर है। पहले इसकी सीमा को 1,080 कंक्रीट ब्लॉकों और खंभों से चिह्नित किया गया था। अब भौतिक सत्यापन के दौरान यह भी देखा जाएगा कि इनमें से कितने सीमा-चिह्न मौके पर मौजूद हैं और क्या उनकी स्थिति पुराने रिकॉर्ड से मेल खाती है। इससे जलाशय की वास्तविक सीमा निर्धारित करने में मदद मिलेगी। पहले की जांच में मिले थे 33 अतिक्रमण पूर्व में हुई जांच के दौरान केरवा जलाशय क्षेत्र में कुल 33 अतिक्रमण चिह्नित किए गए थे। इनमें 18 संरचनाएं सरकारी भूमि और 15 निजी भूमि से संबंधित बताई गई थीं। अब ड्रोन सर्वे और जमीनी निरीक्षण के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि पहले चिह्नित अतिक्रमणों में से कितने अभी भी मौके पर मौजूद हैं। साथ ही, उनकी वास्तविक स्थिति और निर्धारित जलाशय सीमा से उनकी दूरी का सत्यापन भी किया जाएगा। तीन सप्ताह में रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश NGT ने कमेटी को FTL और उसके बफर एरिया के अंतिम निर्धारण की प्रक्रिया तीन सप्ताह में पूरी करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत टीम को उपलब्ध सरकारी दस्तावेजों और मौके की स्थिति का मिलान करना होगा। निरीक्षण के बाद तैयार रिपोर्ट से केरवा डैम की सीमा और आसपास मौजूद अतिक्रमणों की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। हालांकि, अतिक्रमणों को लेकर आगे क्या कार्रवाई होगी, यह निरीक्षण और संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगा।
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छत्तीसगढ़ में बस किराया 75% तक बढ़ा, रायपुर-बिलासपुर सफर के लिए अब देने होंगे ₹228

छत्तीसगढ़ में यात्री बसों का किराया करीब एक साल के भीतर दूसरी बार बढ़ा दिया गया है। परिवहन विभाग ने 8 अक्टूबर को नई किराया दरों की अधिसूचना जारी की है। इस बार सबसे ज्यादा असर साधारण बसों में सफर करने वाले यात्रियों पर पड़ेगा। साधारण बसों का प्रति किलोमीटर किराया 1 रुपये से बढ़ाकर 1.75 रुपये कर दिया गया है। यानी प्रति किलोमीटर दर में 75 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा शुरुआती 5 किलोमीटर का किराया भी 8 रुपये से बढ़ाकर 10 रुपये कर दिया गया है। नई दरें साधारण बसों के साथ डीलक्स, लग्जरी और एसी स्लीपर बसों पर भी लागू होंगी। रायपुर से बिलासपुर और जगदलपुर का सफर होगा महंगा नई किराया दरों के कारण प्रदेश के प्रमुख शहरों के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को अब अधिक पैसे खर्च करने होंगे। इस बढ़ोतरी का असर रोजाना और नियमित रूप से बसों में यात्रा करने वाले लोगों के मासिक खर्च पर भी पड़ सकता है। पिछले साल किराया घटने से मिली राहत अब खत्म साल 2025 में सरकार ने साधारण बसों का शुरुआती किराया 7.50 रुपये से बढ़ाकर 8 रुपये किया था। हालांकि, उस समय प्रति किलोमीटर किराया 1.25 रुपये से घटाकर 1 रुपये कर दिया गया था। अब नई दरों में प्रति किलोमीटर किराया 1 रुपये से बढ़ाकर 1.75 रुपये कर दिया गया है। इससे पिछले साल प्रति किलोमीटर दर में कटौती से यात्रियों को मिली राहत खत्म हो गई है और उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। प्रदेश में 13 हजार से ज्यादा यात्री बसें छत्तीसगढ़ में 13 हजार से अधिक यात्री बसें पंजीकृत हैं। इनमें करीब 5 हजार साधारण बसें हैं। बाकी बसें स्लीपर, एसी, सेमी स्लीपर, डीलक्स और लग्जरी श्रेणियों में आती हैं। साधारण बसों का इस्तेमाल मुख्य रूप से मध्यम और कम आय वर्ग के यात्री करते हैं। ऐसे में किराया बढ़ने का सीधा असर इन यात्रियों के परिवहन खर्च पर पड़ने की संभावना है। बस ऑपरेटरों की मांग के बाद बढ़ाया गया किराया बस ऑपरेटर पिछले कई दिनों से किराया बढ़ाने की मांग कर रहे थे। उनका कहना था कि ईंधन, टायर, कल-पुर्जों और वाहनों के रखरखाव का खर्च बढ़ने के कारण पुरानी दरों पर बसों का संचालन मुश्किल हो रहा है। ऑपरेटरों ने मांग पूरी नहीं होने पर हड़ताल करने और बसों का संचालन बंद करने की चेतावनी भी दी थी। इसके बाद किराया बढ़ाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया, जिस पर परिवहन विभाग ने नई दरों की अधिसूचना जारी की।
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IND vs NZ

IND vs NZ 1st T20I: संजू सैमसन-नमन धीर का धमाका, भारत ने रचा रिकॉर्ड

भारत और न्यूजीलैंड (IND vs NZ) के बीच पहले T20 इंटरनेशनल मुकाबले में टीम इंडिया ने शानदार जीत दर्ज की। 226 रन के बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय बल्लेबाजों ने ऐसा खेल दिखाया कि न्यूजीलैंड के गेंदबाज दबाव में आ गए। संजू सैमसन की तूफानी पारी और नमन धीर की आखिरी ओवरों में विस्फोटक बल्लेबाजी ने मैच का रुख भारत की ओर मोड़ दिया। मुकाबले में भारत ने 19.4 ओवर में 6 विकेट खोकर 230 रन बनाए और 4 विकेट से जीत हासिल की। इस जीत के साथ भारतीय टीम ने पांच मैचों की T20 सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली। 226 रन का लक्ष्य हासिल करना भारत के लिए T20 इंटरनेशनल क्रिकेट में नया रिकॉर्ड भी रहा। NZ vs IND: न्यूजीलैंड ने खड़ा किया 225 रन का बड़ा स्कोर पहले बल्लेबाजी करने उतरी न्यूजीलैंड की टीम ने निर्धारित 20 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर 225 रन बनाए। मेजबान टीम के बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बनाने की कोशिश की। ग्लेन फिलिप्स ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 40 गेंदों पर नाबाद 82 रन बनाए। उनकी पारी में 8 चौके और 3 छक्के शामिल रहे। वहीं, फिन एलन ने 24 गेंदों पर 45 रन बनाकर टीम को तेज शुरुआत दी। बेवॉन जैकब्स ने भी 16 गेंदों पर 31 रन की अहम पारी खेली। न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों ने तेजी से रन बनाए और भारत के सामने 226 रन का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रख दिया। उस समय लग रहा था कि भारतीय टीम के लिए इस स्कोर तक पहुंचना आसान नहीं होगा। Sanju Samson ने खेली तूफानी पारी लक्ष्य का पीछा करने उतरी टीम इंडिया को संजू सैमसन ने शानदार शुरुआत दिलाई। उन्होंने न्यूजीलैंड के गेंदबाजों के खिलाफ आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए मैदान के चारों ओर शॉट लगाए। संजू ने 33 गेंदों पर 67 रन बनाए। उनकी पारी में 8 चौके और 4 छक्के शामिल रहे। उन्होंने केवल 23 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा कर भारतीय टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। दूसरी ओर, अभिषेक शर्मा ने भी तेजी से रन बनाए। उन्होंने 12 गेंदों पर 29 रन की पारी खेली। दोनों बल्लेबाजों की आक्रामक शुरुआत से भारत को बड़े लक्ष्य का पीछा करने में काफी मदद मिली। हालांकि, शुरुआती विकेट गिरने के बाद भारतीय टीम की रफ्तार कुछ धीमी हुई। न्यूजीलैंड ने वापसी करने की कोशिश की, लेकिन भारत के बल्लेबाजों ने मैच को हाथ से निकलने नहीं दिया। Shreyas Iyer ने संभाली जिम्मेदारी मध्यक्रम में विकेट गिरने के बाद श्रेयस अय्यर ने पारी को संभाला। उन्होंने 28 गेंदों पर 42 रन बनाकर टीम को लक्ष्य के करीब पहुंचाया। ऐसे मुकाबलों में सिर्फ तेजी से रन बनाना ही जरूरी नहीं होता, बल्कि सही समय पर पारी को संभालना भी अहम होता है। अय्यर ने यही भूमिका निभाई और भारत की उम्मीदों को बनाए रखा। इसके बाद नमन धीर ने आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड की जीत की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। Naman Dhir बने भारत की जीत के हीरो मैच के आखिरी ओवरों में नमन धीर की बल्लेबाजी ने भारतीय प्रशंसकों का उत्साह बढ़ा दिया। उन्होंने महज 15 गेंदों पर नाबाद 42 रन बनाए। उनकी पारी में 5 चौके और 2 छक्के शामिल रहे। नमन ने तेजी से रन बनाकर न्यूजीलैंड के गेंदबाजों पर दबाव बढ़ाया। भारतीय टीम को जब जीत के लिए तेज रन बनाने की जरूरत थी, तब उनकी आक्रामक बल्लेबाजी सबसे ज्यादा काम आई। भारत ने 19.4 ओवर में 230 रन बनाकर मुकाबला अपने नाम कर लिया। संजू सैमसन की शुरुआत और नमन धीर की शानदार फिनिशिंग इस ऐतिहासिक रनचेज की सबसे बड़ी वजह बनी। IND vs NZ 1st T20I Scorecard: एक नजर में पूरा मैच न्यूजीलैंड: 225/4 (20 ओवर) भारत: 230/6 (19.4 ओवर) नतीजा: भारत 4 विकेट से जीता। न्यूजीलैंड के टॉप स्कोरर: ग्लेन फिलिप्स – 82* रन भारत के टॉप स्कोरर: संजू सैमसन – 67 रन मैच के अहम बल्लेबाज: नमन धीर – 15 गेंदों पर नाबाद 42 रन भारत ने अपने नाम किया बड़ा रिकॉर्ड इस जीत की सबसे खास बात भारत का रिकॉर्ड रनचेज रहा। 226 रन जैसे बड़े लक्ष्य को हासिल करके टीम इंडिया ने T20 इंटरनेशनल क्रिकेट में अपना सबसे बड़ा सफल रनचेज दर्ज किया। संजू सैमसन ने तेज शुरुआत देकर टीम को मजबूत आधार दिया, श्रेयस अय्यर ने मध्यक्रम में पारी संभाली और नमन धीर ने अंतिम ओवरों में तेजी से रन बनाकर जीत सुनिश्चित की। इस प्रदर्शन ने एक बार फिर दिखाया कि भारतीय टीम बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए भी दबाव में संयम बनाए रख सकती है। दूसरे T20I में भी रहेगी जीत की उम्मीद पहले मुकाबले में जीत के बाद भारतीय टीम सीरीज में अपनी बढ़त मजबूत करना चाहेगी। वहीं, न्यूजीलैंड की टीम अगले मैच में वापसी करने के इरादे से मैदान पर उतरेगी। पहले मैच में दोनों टीमों के बल्लेबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया। ऐसे में अगले मुकाबले में भी क्रिकेट प्रशंसकों को एक रोमांचक भिड़ंत देखने की उम्मीद रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
India vs New Zealand

India vs New Zealand: आखिरी 3 ओवर में 29 रन की जरूरत, रोमांचक मोड़ पर मैच

भारत और न्यूजीलैंड (India vs New Zealand) के बीच T20 मुकाबला अब बेहद रोमांचक मोड़ पर पहुंच गया है। न्यूजीलैंड के 226 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम ने 5 विकेट के नुकसान पर 197 रन बना लिए हैं। अब जीत के लिए भारत को 18 गेंदों में 29 रन बनाने हैं। क्रीज पर श्रेयस अय्यर और नमन धीर मौजूद हैं। ऐसे में भारतीय फैंस की नजरें दोनों बल्लेबाजों पर टिकी हैं। मैच के इस मोड़ पर एक छोटी-सी गलती भी टीम की मुश्किल बढ़ा सकती है। वहीं, अगर भारतीय बल्लेबाजों ने तेजी से रन बनाए और विकेट बचाए रखे, तो जीत हासिल करने का मौका बना हुआ है। IND vs NZ: न्यूजीलैंड ने खड़ा किया 225 रन का स्कोर पहले बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड ने 20 ओवर में 4 विकेट खोकर 225 रन बनाए। टीम की ओर से ग्लेन फिलिप्स ने शानदार बल्लेबाजी की और 40 गेंदों पर नाबाद 82 रन बनाए। उनकी आक्रामक पारी ने न्यूजीलैंड को बड़े स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। कीवी बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा। बड़े शॉट खेलने के साथ-साथ उन्होंने रन गति को भी धीमा नहीं पड़ने दिया। इसी वजह से भारत के सामने 226 रन का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य आया। India vs New Zealand: लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत की स्थिति 226 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम को तेजी से रन बनाने थे। टीम ने स्कोर आगे बढ़ाया, लेकिन पांच विकेट गिरने के बाद मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। अब श्रेयस अय्यर और नमन धीर के सामने दोहरी चुनौती है। उन्हें एक तरफ जरूरी रन बनाने हैं, तो दूसरी तरफ विकेट भी बचाकर रखना है। दोनों के बीच अच्छी साझेदारी भारत को जीत के करीब पहुंचा सकती है। आखिरी 18 गेंदों का खेल होगा निर्णायक भारत को 18 गेंदों में 29 रन चाहिए। इसका मतलब है कि टीम को बचे हुए तीन ओवरों में लगातार रन बनाने होंगे। T20 क्रिकेट में यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है, लेकिन न्यूजीलैंड के गेंदबाज भी इस मौके को आसानी से हाथ से जाने नहीं देना चाहेंगे। अगर भारतीय बल्लेबाज शुरुआती गेंदों पर बाउंड्री लगाने में सफल रहते हैं, तो आखिरी ओवर का दबाव कम हो सकता है। वहीं, विकेट गिरने की स्थिति में भारत की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। क्या Team India हासिल कर पाएगी जीत? मैच का रुख अब काफी हद तक श्रेयस अय्यर और नमन धीर की बल्लेबाजी पर निर्भर करेगा। भारतीय टीम को जीत के लिए बड़े शॉट खेलने के साथ समझदारी से स्ट्राइक भी बदलनी होगी। न्यूजीलैंड की टीम अपने स्कोर का बचाव करने की पूरी कोशिश करेगी। ऐसे में अंतिम तीन ओवर में गेंदबाजों और बल्लेबाजों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। फिलहाल मुकाबला रोमांचक स्थिति में है और भारत के पास लक्ष्य हासिल करने का मौका मौजूद है। अब देखना होगा कि भारतीय बल्लेबाज आखिरी गेंदों में टीम को जीत दिला पाते हैं या न्यूजीलैंड मुकाबले पर कब्जा जमा लेता है। IND vs NZ Live Score: मैच की ताजा स्थिति हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

दिल्ली-NCR में GRAP-1 लागू, प्रदूषण से निपटने के लिए 334 टीमें करेंगी निगरानी; 1 नवंबर से सख्ती

दिल्ली की वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में पहुंचने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पूरे दिल्ली-NCR में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का पहला चरण लागू कर दिया है। इस बीच दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने दावा किया कि सरकार के प्रयासों और जनभागीदारी के कारण इस बार पिछले वर्षों की तुलना में GRAP-1 देर से लागू हुआ है। सिरसा के मुताबिक, सर्दियों में प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार 11 सूत्रीय एक्शन प्लान पर काम कर रही है। इसमें करीब 30 एजेंसियां शामिल हैं। प्रदूषण नियंत्रण के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक, दोनों तरह के उपाय किए जा रहे हैं। 334 टीमें करेंगी निगरानी, मॉनिटरिंग स्टेशन बढ़कर होंगे 60 पर्यावरण मंत्री ने बताया कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता की निगरानी करने वाले स्टेशनों की संख्या 47 से बढ़ाकर 60 की जाएगी। नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए 334 प्रवर्तन टीमें तैनात की जाएंगी। सिरसा ने दावा किया कि दिल्ली के प्रदूषण में स्थानीय स्रोतों की हिस्सेदारी करीब 30% है, जबकि आसपास के राज्यों और क्षेत्रों से 60 से 65% प्रदूषण आता है। ऐसे में प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए पूरे NCR में समन्वित कार्रवाई जरूरी है। 1 नवंबर से प्रदूषण रोकने के लिए प्रस्तावित सख्त कदम सरकार की ओर से साझा की गई योजना के मुताबिक, प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई उपाय किए जाने हैं। 1. वैध PUC प्रमाणपत्र के बिना नहीं मिलेगा ईंधन ‘नो पीयूसीसी, नो फ्यूल’ व्यवस्था के तहत वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) के बिना वाहनों को पेट्रोल या डीजल नहीं देने का प्रावधान है। 2. बाहरी राज्यों के वाहनों पर प्रतिबंध योजना के अनुसार, 1 नवंबर से 31 जनवरी तक दिल्ली के बाहर पंजीकृत गैर-BS-VI वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। इलेक्ट्रिक और CNG वाहनों को इससे छूट देने की बात कही गई है। 3. सरकारी और निजी दफ्तरों में 50% वर्क फ्रॉम होम प्रदूषण कम करने के लिए सरकारी और निजी कार्यालयों के आधे कर्मचारियों से घर से काम कराने की योजना भी शामिल है। 4. सरकारी दफ्तरों के समय में बदलाव योजना के मुताबिक, नगर निगम (MCD) के कार्यालय सुबह 8:30 बजे से शाम 5 बजे तक और दिल्ली सरकार के कार्यालय सुबह 10 बजे से शाम 6:30 बजे तक संचालित किए जाने का प्रस्ताव है। 5. पार्किंग शुल्क दोगुना करने की योजना निजी वाहनों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने के लिए 1 नवंबर से पार्किंग शुल्क दोगुना करने की योजना है। मेट्रो पार्किंग को इससे छूट देने की बात कही गई है। 6. निर्माण और तोड़फोड़ के काम पर रोक धूल से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए 1 नवंबर से 31 जनवरी तक धूल फैलाने वाले निर्माण और तोड़फोड़ कार्यों पर रोक लगाने का प्रावधान है। इसके अलावा, 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक निर्माण गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध की योजना भी बताई गई है।

दिवाली से पहले दिल्ली में रात को भी होगी सफाई, CM रेखा गुप्ता ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

दीपावली और अन्य त्योहारों को देखते हुए दिल्ली के रिहायशी इलाकों और प्रमुख बाजारों में अब रात के समय भी सफाई कराई जाएगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को दिल्ली सचिवालय में उच्चस्तरीय बैठक कर राजधानी की सफाई व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सफाई में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां भी कूड़े के ढेर लगे हैं, उन्हें तत्काल हटाया जाए और नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने अधिकारियों से सफाई व्यवस्था में सुधार के लिए तेजी से काम करने को कहा। कूड़ा नहीं उठने की शिकायतों पर CM नाराज मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली के कई इलाकों से समय पर कूड़ा नहीं उठने और जगह-जगह गंदगी की शिकायतें मिल रही हैं। कुछ जोन में सफाई व्यवस्था को लेकर लापरवाही भी सामने आई है। उन्होंने कहा कि सफाई के प्रयासों के बावजूद जमीन पर अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लोगों की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की जाए। साथ ही, सफाई व्यवस्था में किए जा रहे सुधार सड़कों और बाजारों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने चाहिए। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कर्मचारी होंगे तैनात मुख्यमंत्री ने मेयर प्रवेश वाही और नगर निगम आयुक्त संजीव खिरवार को पूरी दिल्ली में सफाई अभियान तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में सफाई कर्मचारियों की कमी है, वहां अतिरिक्त स्टाफ लगाया जाए। जरूरत पड़ने पर रात में सफाई के लिए नए कर्मचारियों की नियुक्ति भी की जाए। रात में सफाई से दिन में नहीं होगी परेशानी मुख्यमंत्री के मुताबिक, बाजारों और रिहायशी कॉलोनियों में रात के समय सफाई कराने से दिन में लोगों की आवाजाही प्रभावित नहीं होगी। इससे त्योहारों के दौरान भीड़भाड़ वाले इलाकों में स्वच्छता बनाए रखने में मदद मिलेगी। बैठक में शहरी विकास मंत्री आशीष सूद, मेयर प्रवेश वाही, मुख्य सचिव राजीव वर्मा, नगर निगम आयुक्त संजीव खिरवार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे

छत्तीसगढ़ में 11 डॉक्टरों के तबादले, डॉ. संजय कुमार बने रायपुर जिला अस्पताल के प्रभारी सिविल सर्जन

छत्तीसगढ़ सरकार के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने 11 डॉक्टरों का तबादला किया है। प्रशासनिक आधार पर चिकित्सा अधिकारियों और विशेषज्ञों की नई पदस्थापना के आदेश जारी किए गए हैं। सभी संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नई जगह पर कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं। मंत्रालय महानदी भवन से अवर सचिव दिव्या वैष्णव की ओर से जारी आदेश के तहत यह फेरबदल किया गया है। डॉ. संजय कुमार को मिली रायपुर जिला अस्पताल की जिम्मेदारी तबादला आदेश के अनुसार, ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. संजय कुमार को जिला चिकित्सालय रायपुर (पंडरी) में प्रभारी सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक नियुक्त किया गया है। वहीं, जिला चिकित्सालय रायपुर में अब तक प्रभारी सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक की जिम्मेदारी संभाल रहे डॉ. भेनुज कुमार सिन्हा को स्वास्थ्य सेवाएं संचालनालय में प्रभारी उप संचालक के पद पर पदस्थ किया गया है। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए प्रशासनिक फेरबदल विभाग के अनुसार, स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से यह प्रशासनिक बदलाव किया गया है। इसके तहत दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों के साथ शहरी अस्पतालों में भी स्वास्थ्य सुविधाओं को सुचारु बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है। तबादला आदेश में सभी संबंधित डॉक्टरों को बिना देरी किए अपने नए पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।

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