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मध्यप्रदेश की जेलों में अब बंदियों की होगी साइको-सोशल काउंसलिंग, भोपाल सेंट्रल जेल में खुलेगा पहला सेंटर

मध्यप्रदेश की जेलों में बंद कैदियों के मानसिक स्वास्थ्य और व्यवहार में सुधार के लिए नई पहल शुरू की जा रही है। अब बंदियों को केवल सजा काटने तक सीमित रखने के बजाय उनके मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन और सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए जेल विभाग की ओर से भोपाल केंद्रीय जेल में पहला साइको-सोशल काउंसलिंग सेंटर स्थापित किया जाएगा। इसके परिणामों के आधार पर इस व्यवस्था को प्रदेश की अन्य जेलों में भी चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। जेल विभाग और RRU के बीच हुआ MOU इस पहल के लिए मध्यप्रदेश जेल विभाग और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (RRU), गांधीनगर, गुजरात के बीच साइको-सोशल काउंसलिंग के क्षेत्र में सहयोग के लिए एमओयू हुआ है। जेल महानिदेशक डॉ. वरुण कपूर की पहल पर जेल मुख्यालय में हुए एमओयू कार्यक्रम में विशेष महानिदेशक जी. अखेतो सेमा, उप महानिरीक्षक (कल्याण) एमआर पटेल सहित जेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। RRU की ओर से डॉ. नूरिन चौधरी, डॉ. गीतेश कुमार सिंह, प्रदीप रूसिया, तनु पी चंदेल और शुभम जैन सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। 28 जेल अधिकारी-कर्मचारियों को दिया गया प्रशिक्षण जेल महानिदेशक डॉ. वरुण कपूर ने बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर RRU की साइको-सोशल काउंसलिंग योजना का अध्ययन किया। इसके बाद विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों को भोपाल बुलाकर 6 से 12 जुलाई तक सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान प्रदेश की अलग-अलग जेलों के 28 अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया। इनमें मेल नर्स, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, मुख्य प्रहरी और प्रहरी शामिल रहे। प्रशिक्षण में मानसिक तनाव से गुजर रहे बंदियों की पहचान करने और उनकी काउंसलिंग करने के तरीके बताए गए। प्रशिक्षण के बाद बंदियों की काउंसलिंग शुरू प्रशिक्षण प्राप्त अधिकारियों और कर्मचारियों ने संबंधित जेलों में जाकर तनावग्रस्त बंदियों की काउंसलिंग की। जेल महानिदेशक ने काउंसलिंग से मिले फीडबैक और परिणामों की समीक्षा की। जेल विभाग के अनुसार, शुरुआती स्तर पर बंदियों के मानसिक सुधार की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आए। इसके बाद इस व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए RRU के साथ एमओयू की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। गुजरात में मास्टर ट्रेनर तैयार होंगे एमओयू के तहत जेल विभाग के चयनित अधिकारी और कर्मचारी राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, गांधीनगर जाकर मास्टर ट्रेनर कोर्स करेंगे। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद ये अधिकारी जेल विभाग में मास्टर ट्रेनर के रूप में काम करेंगे और प्रदेश की अन्य जेलों के अधिकारियों-कर्मचारियों को साइको-सोशल काउंसलिंग का प्रशिक्षण देंगे। इससे जेलों में मानसिक तनाव से जूझ रहे बंदियों की पहचान, उनकी जरूरतों को समझने और उन्हें जरूरी मनो-सामाजिक सहयोग देने के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार किया जा सकेगा। भोपाल केंद्रीय जेल से होगी शुरुआत जेल विभाग की इस योजना का पहला चरण केंद्रीय जेल भोपाल से शुरू होगा। यहां साइको-सोशल काउंसलिंग सेंटर स्थापित किया जाएगा। इसके अनुभव और परिणामों के आधार पर सेंटर और काउंसलिंग व्यवस्था को प्रदेश की अन्य जेलों में भी चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। जेल विभाग का उद्देश्य बंदियों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने, भावनात्मक संतुलन कायम करने और सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन की दिशा में सहयोग देना है, ताकि जेल से बाहर आने के बाद वे बेहतर जीवन की ओर आगे बढ़ सकें।
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बड़वानी में बीईओ को हटाने की मांग पर प्रदर्शन, सेंधवा विधायक को डेढ़ घंटे कार्यालय में रोका

बड़वानी जिले के निवाली में विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) मनोज मराठे को पद से हटाने और निलंबित करने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच सेंधवा विधायक मोंटू सोलंकी को पुलिस ने उनके कार्यालय में करीब डेढ़ घंटे तक रोककर रखा। विधायक अपने समर्थकों के साथ निवाली में चल रहे प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे थे। प्रशासनिक अधिकारियों से चर्चा और कार्रवाई का लिखित आदेश नहीं मिलने के बाद वे 300 से अधिक समर्थकों के साथ प्रदर्शन में शामिल होने के लिए रवाना हो गए। बीईओ को निलंबित करने की मांग जयस की ओर से बीईओ मनोज मराठे को हटाने की मांग को लेकर पिछले चार दिनों से निवाली में धरना दिया जा रहा है। बताया गया है कि बीईओ के खिलाफ सेंधवा ग्रामीण थाने में आपराधिक प्रकरण दर्ज है और उन पर एक शिक्षक को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है। इसी मामले को लेकर विधायक मोंटू सोलंकी भी आंदोलन में शामिल होने जा रहे थे। उन्होंने बीईओ के वित्तीय अधिकार तत्काल वापस लेने और उन्हें निलंबित करने की मांग की। अधिकारियों ने दिया कार्रवाई का आश्वासन विधायक को कार्यालय में रोके जाने के दौरान सेंधवा एसडीओपी अजय वाघमारे ने उनसे चर्चा की। पुलिस और प्रशासन की ओर से कार्रवाई का मौखिक आश्वासन दिया गया, लेकिन विधायक को निलंबन से संबंधित कोई लिखित आदेश नहीं दिया गया। करीब डेढ़ घंटे तक इंतजार करने के बाद विधायक अपने समर्थकों के साथ निवाली के लिए रवाना हो गए। विधायक ने प्रशासन पर लगाए संरक्षण के आरोप विधायक मोंटू सोलंकी ने आरोप लगाया कि आपराधिक मामले में आरोपी अधिकारी को शासन और प्रशासन का संरक्षण मिल रहा है। उन्होंने कहा कि बीईओ के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। विधायक ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की और आंदोलन को दबाने की कोशिश की गई तो प्रदर्शन को और उग्र किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
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मध्यप्रदेश में IAS अफसरों की बड़ी प्रशासनिक सर्जरी, 10 जिला पंचायत CEO समेत नगर निगम आयुक्त बदले

मोहन सरकार ने मध्यप्रदेश में IAS अधिकारियों की बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी तबादला आदेश में 2016 से 2024 बैच तक के कई IAS अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। इस फेरबदल में 10 जिलों के जिला पंचायत CEO बदले गए हैं। इसके अलावा ग्वालियर और सतना नगर निगम के आयुक्तों का भी तबादला किया गया है। तबादला सूची में अधिकारियों को जिला पंचायत CEO, अपर कलेक्टर और SDM के साथ-साथ राज्य शासन के विभिन्न विभागों में उप सचिव की जिम्मेदारी दी गई है। कई अधिकारियों को नगर निगमों में आयुक्त और अपर आयुक्त के पद पर भी भेजा गया है। ग्वालियर और सतना नगर निगम आयुक्त बदले 2018 बैच के अभिषेक चौधरी को जिला पंचायत धार के CEO पद से हटाकर नगर पालिक निगम ग्वालियर का आयुक्त बनाया गया है। वहीं ग्वालियर नगर निगम के आयुक्त संघ प्रिय को जिला पंचायत सिंगरौली का CEO नियुक्त किया गया है। 2019 बैच के डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा को जिला पंचायत खंडवा के CEO पद से नगर निगम सतना का आयुक्त बनाया गया है। उन्हें CEO स्मार्ट सिटी सतना का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। 2016 से 2018 बैच के प्रमुख तबादले 2019 से 2021 बैच में भी बदलाव 2019 से 2021 बैच के अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से: 2022 बैच के अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारी 2022 बैच के अधिकारियों में भी बड़े स्तर पर फेरबदल किया गया है। ईश्वर्य वर्मा को CEO जिला पंचायत खंडवा और आशीष को अपर आयुक्त, नगर निगम इंदौर बनाया गया है। वहीं कार्तिकेय जायसवाल को CEO जिला पंचायत श्योपुर और विशाल धाकड़ को CEO जिला पंचायत टीकमगढ़ की जिम्मेदारी मिली है। इसके अलावा: 2024 बैच के सहायक कलेक्टरों को SDM की जिम्मेदारी तबादला आदेश में 2024 बैच के कई सहायक कलेक्टरों को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) यानी SDM की जिम्मेदारी दी गई है। श्रद्धा शुक्ला की भी पदस्थापना आदेश में श्रद्धा शुक्ला (2022) को अपर कलेक्टर, जिला खंडवा के पद पर पदस्थ किया गया है। आदेश में उनके लिए फिलहाल पदस्थापना की प्रतीक्षा और कनिष्ठ वेतनमान से संबंधित उल्लेख भी किया गया है। इस प्रशासनिक फेरबदल के बाद प्रदेश के कई जिलों में जिला पंचायत, नगरीय प्रशासन और राजस्व स्तर पर अधिकारियों की नई टीम के साथ कामकाज शुरू होगा।
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छिंदवाड़ा में गर्भवती महिला को 8 किमी डोली में ले गए ग्रामीण, अस्पताल में गर्भस्थ शिशु की मौत

छिंदवाड़ा के जुन्नारदेव ब्लॉक के चीटीपाठा जामुनडोंग टोले में सड़क की बदहाल स्थिति ने एक गर्भवती महिला के परिवार की मुश्किलें बढ़ा दीं। प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद गांव तक 108 एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी। ऐसे में परिजनों और ग्रामीणों ने महिला को डोली में बैठाकर करीब 8 किलोमीटर तक दुर्गम रास्ते से पैदल पहुंचाया। गांव से बाहर एंबुलेंस मिलने के बाद महिला को अस्पताल ले जाया गया। वहां जांच के दौरान डॉक्टरों ने गर्भस्थ शिशु की मौत की पुष्टि की। महिला की हालत गंभीर होने पर उसे ICU में भर्ती किया गया है। 8 किलोमीटर तक डोली में लेकर चले ग्रामीण जानकारी के मुताबिक, चीटीपाठा जामुनडोंग निवासी सोनू मलगाम की पत्नी कुस्तरिया को गुरुवार सुबह अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने 108 एंबुलेंस को सूचना दी, लेकिन ग्रामीणों के मुताबिक, टोले तक पक्की सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी। इसके बाद सरपंच, परिजनों और ग्रामीणों ने लकड़ी और कपड़े की मदद से डोली तैयार की। महिला को डोली में बैठाकर ग्रामीण पैदल ही गांव से बाहर की ओर निकल पड़े। करीब 8 किलोमीटर का पथरीला और कठिन रास्ता तय करने के बाद महिला को गोप गांव तक पहुंचाया गया। यहां से 108 एंबुलेंस की मदद से उसे दमुआ स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने महिला को जिला अस्पताल रेफर कर दिया। अस्पताल पहुंचने पर गर्भस्थ शिशु की मौत की पुष्टि परिजनों के मुताबिक, महिला को अस्पताल पहुंचाने से पहले काफी दूरी तक दुर्गम रास्ते पर डोली के सहारे ले जाना पड़ा। अस्पताल में जांच के बाद डॉक्टरों ने गर्भ में ही शिशु की मौत की पुष्टि की। महिला की गंभीर हालत को देखते हुए उसे ICU में भर्ती किया गया है, जहां उसका इलाज जारी है। 125 परिवार, लेकिन पक्की सड़क का इंतजार ग्रामीणों का कहना है कि चीटीपाठा जामुनडोंग टोले में करीब 125 परिवार रहते हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, यहां लंबे समय से पक्की सड़क सहित कई बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। ग्रामीणों का दावा है कि सड़क निर्माण के लिए वर्ष 2016 से प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने प्रस्ताव रखे जा रहे हैं, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हुआ है। स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क की सुविधा नहीं होने के कारण आपात स्थिति में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों ने दावा किया कि पहले भी तीन गर्भवती महिलाओं की मौत समय पर स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिलने के कारण हुई है। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से गांव तक पक्की सड़क बनाने और आपात स्थिति में एंबुलेंस की पहुंच सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी मरीज को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
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भोपाल के रेस्टोरेंट-बार में नगर निगम की बड़ी कार्रवाई, एक्सपायर कोल्ड्रिंक्स और खराब खाद्य सामग्री मिली

भोपाल में नगर निगम की म्युनिसिपल कोर्ट ने शुक्रवार को बंसल वन स्थित रेस्टोरेंट और बार में बड़ी कार्रवाई की। चलित न्यायालय की टीम ने कई प्रतिष्ठानों के किचन और खाद्य सामग्री की जांच की। इस दौरान कुछ जगहों पर एक्सपायर कोल्ड्रिंक्स मिलीं, जबकि फ्रीज में शाकाहारी और मांसाहारी खाना एक साथ रखा हुआ पाया गया। टीम ने मौके पर ही जुर्माने की कार्रवाई की। चलित न्यायालय की कार्रवाई दोपहर करीब 1:30 बजे शुरू हुई और लगभग दो घंटे तक चली। इस दौरान टीम ने फर्जी कैफे, रोमियो लेन, फ्लाइंग सॉसर, रास्ता, माय बार, आयबरी, कव्वाली और संकल्प रेस्टोरेंट एंड बार सहित कई प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। किचन में पहुंचकर खुद जांची खाद्य सामग्री मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) तरुणेंद्र प्रताप सिंह ने रेस्टोरेंट और बार के किचन में जाकर वहां रखी खाद्य सामग्री और ग्राहकों को परोसे जाने वाले भोजन की स्थिति देखी। जांच के दौरान कुछ स्थानों पर एक्सपायर कोल्ड्रिंक्स मिलीं। वहीं फ्रीज में वेज और नॉनवेज खाद्य सामग्री को एक साथ रखा गया था। किचन में साफ-सफाई की स्थिति भी जांची गई। नगर निगम की टीम ने खाद्य पदार्थों की शुद्धता और गुणवत्ता के साथ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 तथा मध्यप्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम के तहत जरूरी व्यवस्थाओं की जांच की। 30 से ज्यादा वाहनों के काफिले के साथ पहुंची टीम नगर निगम की विशेष टीम 30 से ज्यादा वाहनों के काफिले के साथ बंसल वन पहुंची। अचानक हुई इस कार्रवाई से रेस्टोरेंट और बार संचालकों में हड़कंप मच गया। कार्रवाई के दौरान निगम के जोन और वार्ड प्रभारी समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे। टीम ने एक-एक कर कई प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए, स्टाफ को लगाई फटकार जांच के दौरान टीम ने भोजन और कोल्ड्रिंक्स के सैंपल भी लिए। किचन में गंदगी और खाद्य सामग्री के रखरखाव में लापरवाही मिलने पर संबंधित स्टाफ को फटकार लगाई गई। नगर निगम की ओर से मौके पर ही जुर्माने की कार्रवाई भी की गई। अधिकारियों ने साफ-सफाई और खाद्य सामग्री को निर्धारित मानकों के अनुसार रखने के निर्देश दिए।
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बिलासपुर में तालाब में डूबे दो सगे भाई, छोटे को बचाने के लिए बड़े भाई ने लगाई छलांग

बिलासपुर के पचपेड़ी थाना क्षेत्र में गुरुवार शाम एक दर्दनाक हादसे में दो सगे भाइयों की तालाब में डूबने से मौत हो गई। दोनों बच्चे अपने पिता के साथ तालाब के पास गए थे। इसी दौरान छोटा भाई पानी में फिसलकर गहरे हिस्से में चला गया। उसे बचाने के लिए बड़ा भाई भी तालाब में कूद गया, लेकिन गहराई अधिक होने के कारण दोनों डूब गए। घटना के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है। एक साथ दो बेटों की मौत से परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। पिता से कुछ दूर जाते ही हुआ हादसा जानकारी के मुताबिक, चिल्हाटी निवासी भक्त प्रहलाद पैकरा किसान हैं। गुरुवार शाम वह अपने दोनों बेटों दीपू पैकरा (7) और चींटू पैकरा (4) को लेकर तालाब के पास गए थे। बताया जा रहा है कि पिता बच्चों को तालाब किनारे छोड़कर कुछ दूर चले गए और मोबाइल पर बात करने लगे। इसी दौरान तालाब के पास खेल रहा चार वर्षीय चींटू अचानक फिसलकर पानी में गिर गया और गहरे हिस्से में चला गया। छोटे भाई को बचाने तालाब में कूदा बड़ा भाई छोटे भाई को पानी में डूबता देखकर सात वर्षीय दीपू उसे बचाने के लिए तालाब में कूद गया। बताया जा रहा है कि तालाब की गहराई अधिक थी और बच्चों को इसका अंदाजा नहीं था। देखते ही देखते दोनों बच्चे पानी में डूब गए। युवक ने देखा तो ग्रामीणों को बुलाया हादसे के दौरान एक युवक की नजर तालाब में डूब रहे दोनों बच्चों पर पड़ी। उसने तुरंत शोर मचाकर आसपास के लोगों को बुलाया। आवाज सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और तालाब में उतरकर दोनों बच्चों को बाहर निकाला। परिजन और ग्रामीण दोनों बच्चों को लेकर तत्काल पचपेड़ी अस्पताल पहुंचे। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उन्हें मस्तूरी अस्पताल रेफर कर दिया। डॉक्टरों ने दोनों बच्चों को मृत घोषित किया मस्तूरी अस्पताल में जांच के बाद डॉक्टरों ने दोनों बच्चों को मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही पचपेड़ी पुलिस भी मौके पर पहुंची। पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। एक साथ दो मासूम बेटों की मौत से परिवार में गम का माहौल है। गांव में भी इस हादसे के बाद शोक की लहर है।
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इंदौर में कार की किस्त को लेकर विवाद, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के समर्थक के ऑफिस में तोड़फोड़

इंदौर के आजाद नगर इलाके में कार लोन की किस्त को लेकर विवाद का मामला सामने आया है। आरोप है कि चार युवक किस्त की वसूली के लिए एक ऑफिस पहुंचे और परिवार से विवाद के बाद वहां तोड़फोड़ कर दी। पूरी घटना ऑफिस में लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर कुछ युवकों को हिरासत में लिया है और घटना की जांच शुरू कर दी है। दो किस्तें बाउंस होने पर पहुंचे थे युवक आजाद नगर पुलिस के मुताबिक, पालदा निवासी शिव पाटिल कैटरिंग का काम करते हैं। वे मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से जुड़े हुए बताए जा रहे हैं और उनके आयोजनों में रसोई व्यवस्था का काम भी करते हैं। पुलिस को दी शिकायत में शिव पाटिल की बेटी संस्कृति ने बताया कि 20 अगस्त को दोपहर करीब 2 से 2:10 बजे के बीच प्रणय, आयुष, सुनील और शशिकांत नाम के चार युवक उनके ऑफिस पहुंचे। युवकों ने खुद को पिरामल फाइनेंस एनबीएफसी की ओर से कार लोन की वसूली के लिए आने वाला बताया। उन्होंने कहा कि कार नंबर MP09ZX7814 की दो किस्तें बाउंस हो गई हैं और बकाया किस्त की राशि जमा करनी होगी। शिव पाटिल ने युवकों से कहा कि बैंक की गलती के कारण किस्त बाउंस हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि कार बेचकर लोन फोरक्लोज करने की प्रक्रिया चल रही है। बातचीत के बाद बढ़ा विवाद शिकायत के मुताबिक, युवक इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुए और शिव पाटिल, उनकी बेटी संस्कृति और बेटे यशवंत से विवाद करने लगे। आरोप है कि बातचीत के दौरान युवकों ने परिवार के सदस्यों के साथ अपशब्दों का इस्तेमाल किया और मारपीट की। इसके बाद युवक दोबारा ऑफिस में पहुंचे और वहां गेट, कंप्यूटर सहित अन्य सामान में तोड़फोड़ कर दी। घटना के बाद संस्कृति ने पुलिस को सूचना दी। CCTV में कैद हुई तोड़फोड़ सूचना मिलने पर आजाद नगर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने ऑफिस में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जब्त कर ली है। फुटेज में ऑफिस के अंदर हुए विवाद और तोड़फोड़ की घटना रिकॉर्ड होने की बात सामने आई है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर कुछ युवकों को हिरासत में लिया है। अब पुलिस सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की जांच कर रही है।
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सागर में ऑनलाइन बेटिंग के बड़े नेटवर्क का खुलासा, भोपाल से मुख्य आरोपी गिरफ्तार; 2.69 करोड़ कैश जब्त

सागर पुलिस ने ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस ने भोपाल से मुख्य आरोपी ऋषभ पटेल को गिरफ्तार किया है। उसके घर की तलाशी में 2 करोड़ 69 लाख 42 हजार 700 रुपए नकद और करीब 30 लाख रुपए के सोने के जेवर मिले। पुलिस ने नोट गिनने की मशीन और कई दस्तावेज भी जब्त किए हैं। पुलिस के मुताबिक, यह नेटवर्क टेलीग्राम चैनल और वेबसाइट के जरिए क्रिकेट समेत दूसरे मैचों पर ऑनलाइन बेटिंग कराता था। बेटिंग से आने वाली रकम को अलग-अलग बैंक खातों में घुमाने और कैश कराने के लिए करीब 30 फर्जी फर्में बनाई गई थीं। शुरुआती जांच में इन फर्मों से जुड़े खातों में 5.50 करोड़ रुपए से ज्यादा का लेन-देन सामने आया है। पति-पत्नी के विवाद और पंचर बनाने वाले की शिकायत से खुला नेटवर्क इस पूरे मामले की शुरुआत एक घरेलू विवाद और बाद में सामने आई एक बैंक खाता शिकायत से हुई। 9 अगस्त को एक महिला ने थाने पहुंचकर अपने पति पर प्रताड़ना का आरोप लगाया था। उसने पुलिस को बताया कि पति के पास काफी रुपए हैं और उसके कई लड़कियों से संबंध हैं। पुलिस ने पति को थाने बुलाकर पूछताछ की। इसके कुछ दिन बाद 13 अगस्त को मकरोनिया थाने में पंचर बनाने वाले रोहित पटेल ने शिकायत की। उसने बताया कि उसके दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर उसके नाम पर ग्लैमर इंटरप्राइजेस नाम से फर्म बनाई गई है। इसी फर्म के नाम से फेडरल बैंक की मकरोनिया शाखा में करंट अकाउंट भी खोला गया था। पुलिस ने खाते की जांच की तो फरवरी 2026 से अब तक करीब 90 लाख रुपए का लेन-देन सामने आया। इसके बाद पुलिस ने फर्म और उससे जुड़े बैंक खातों की जांच शुरू की। 5 से 7 हजार रुपए देकर लिए जाते थे दस्तावेज जांच के दौरान पुलिस ने धर्मेंद्र नाहर और सोनू दांगी को गिरफ्तार किया। पूछताछ में फर्जी फर्मों और बैंक खातों के नेटवर्क की जानकारी सामने आई। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने बेरोजगार और जरूरतमंद लोगों को 5 से 7 हजार रुपए कमीशन देने का लालच देकर उनके दस्तावेज लिए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर अलग-अलग नामों से फर्म बनाई गईं और बैंक में करंट अकाउंट खुलवाए गए। इन खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन बेटिंग से आने वाली रकम के लेन-देन और उसे कैश कराने के लिए किया जाता था। पुलिस को आशंका है कि सागर और बुंदेलखंड के दूसरे इलाकों में भी कई लोगों के दस्तावेज इस नेटवर्क में इस्तेमाल किए गए हैं। टेलीग्राम चैनल से 100 से 150 लोगों को खिलाते थे बेटिंग पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी ऋषभ पटेल ने 2019-20 में भोपाल के एक कॉलेज से बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई के दौरान ऑनलाइन गेमिंग शुरू की थी। बाद में उसने ऑनलाइन बेटिंग के कारोबार में कदम रखा। शुरुआत में वह ऑनलाइन सट्‌टे की टिप देता था। इसके बाद उसने दो ऑनलाइन बेटिंग वेबसाइट के एडमिन राइट्स लिए और टेलीग्राम चैनल बनाया। पुलिस के मुताबिक, इस चैनल के जरिए एक समय में 100 से 150 लोगों को ऑनलाइन बेटिंग कराई जाती थी। आरोपी मुख्य रूप से क्रिकेट मैचों और आईपीएल पर बेटिंग कराते थे। पुलिस के अनुसार, अमित विश्वकर्मा वेबसाइट के जरिए इस नेटवर्क में उसकी मदद करता था। बैंक से ऑनलाइन रकम, बदले में लेते थे कैश पुलिस की जांच में सामने आया कि बेटिंग से आने वाली रकम को कैश कराने के लिए भी अलग नेटवर्क बनाया गया था। अंडा कारोबारियों के बैंक खातों में ऑनलाइन रकम ट्रांसफर की जाती थी और बदले में उनसे नकद पैसा लिया जाता था। पुलिस को इस रकम को रियल एस्टेट में लगाने के संकेत भी मिले हैं। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क से कितनी रकम अलग-अलग कारोबारों में लगाई गई। 30 फर्जी फर्मों का सामने आया नेटवर्क जांच में करीब 30 फर्जी फर्मों के दस्तावेज मिले हैं। इनमें बिल्डिंग मटेरियल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ट्रेडिंग, टूर एंड ट्रैवल्स और खाद्य कारोबार जैसे अलग-अलग कामों के नाम पर फर्म बनाई गई थीं। इन फर्मों से जुड़े बैंक खातों की शुरुआती जांच में 5.50 करोड़ रुपए से ज्यादा का ट्रांजैक्शन सामने आया है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इन फर्मों के रजिस्ट्रेशन और बैंक खाते खुलवाने में दस्तावेजों का सत्यापन किस तरह किया गया। घर में मिले नोटों से भरे बैग सागर पुलिस ने भोपाल पुलिस की मदद से ऋषभ पटेल के घर पर दबिश दी। तलाशी के दौरान एक कमरे में नोटों से भरे कई बैग मिले। वहीं नोट गिनने की मशीन भी रखी हुई थी। पुलिस ने मौके से 2 करोड़ 69 लाख 42 हजार 700 रुपए नकद और करीब 30 लाख रुपए के सोने के जेवर जब्त किए। पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में जेवर ऑनलाइन बेटिंग से हुई कमाई से खरीदे जाने की बात सामने आई है। 6 आरोपी गिरफ्तार, दो की तलाश जारी पुलिस ने अब तक धर्मेंद्र नाहर, सोनू दांगी, अमित विश्वकर्मा, विपिन गिरि, स्वर्णेंद्र पांडे और ऋषभ पटेल को गिरफ्तार किया है। वहीं सरमन उर्फ शुभम अहिरवार और ऋषिकेशव चौहान की तलाश की जा रही है। एसपी अनुराग सुजानिया के मुताबिक, अमित विश्वकर्मा और ऋषभ पटेल को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से दोनों को 8 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। जांच में छत्तीसगढ़ में भी नेटवर्क से जुड़े कुछ लोगों के बारे में जानकारी मिली है। पुलिस अब फर्जी फर्मों, बैंक खातों और दस्तावेजों की जांच के साथ इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और पैसों के पूरे लेन-देन का पता लगाने में जुटी है।
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इंदौर में सड़क की बदहाली पर पार्षद का अनोखा प्रदर्शन, कीचड़ में बैठकर दिया धरना

इंदौर के वार्ड 75 के भावना नगर-पालदा नाका क्षेत्र में सड़क की बदहाली को लेकर पार्षद और रहवासियों ने नगर निगम के खिलाफ अनोखा प्रदर्शन किया। सड़क का निर्माण पूरा नहीं होने से नाराज पार्षद कुणाल सोलंकी रहवासियों के साथ सड़क पर जमा कीचड़ में बैठ गए और धरना दिया। उन्होंने जल्द से जल्द सड़क निर्माण पूरा कराने की मांग की। रहवासियों के मुताबिक, यह सड़क लंबे समय से खराब हालत में है। बारिश होते ही सड़क पर पानी, कीचड़ और गड्ढों की स्थिति बन जाती है। इससे पैदल चलने वालों के साथ दोपहिया वाहन चालकों को भी काफी परेशानी होती है। लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। चार साल से अधूरा पड़ा है सड़क निर्माण पार्षद कुणाल सोलंकी ने कहा कि जब तक सड़क की समस्या का समाधान नहीं होता, तब तक धरना जारी रहेगा। उन्होंने नगर निगम कमिश्नर और एडिशनल कमिश्नर से मुलाकात कर जल्द कार्रवाई की मांग की है। सोलंकी के मुताबिक, सड़क निर्माण का काम करीब चार साल पहले शुरू हुआ था, लेकिन अभी तक पूरा नहीं किया गया। यह सड़क वार्ड 75 और 77 के बीच आती है। अधूरे निर्माण के कारण आसपास रहने वाले लोगों को लंबे समय से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बारिश में बढ़ जाती है परेशानी बारिश के दौरान सड़क की स्थिति और खराब हो जाती है। जगह-जगह गड्ढों में पानी भरने और कीचड़ जमा होने से वाहन चालकों के लिए रास्ता मुश्किल हो जाता है। पैदल राहगीरों को भी आवाजाही में परेशानी होती है। रहवासियों ने नगर निगम से मांग की है कि सड़क का निर्माण जल्द पूरा कराया जाए, ताकि बारिश के दौरान होने वाली परेशानी से राहत मिल सके। वहीं, पार्षद ने भी चेतावनी दी है कि मांग पूरी होने तक उनका विरोध जारी रहेगा।
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: बीमार सास-ससुर को छोड़ने का दबाव बनाना मानसिक क्रूरता, तलाक बरकरार

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पारिवारिक विवाद और तलाक से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस एनके चंद्रवंशी ने कहा कि शादी के बाद भले ही नया परिवार बनता है, लेकिन इससे बुजुर्ग और बीमार माता-पिता के प्रति संतान की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारियां खत्म नहीं होतीं। कोर्ट ने कहा कि यदि पत्नी बिना किसी ठोस और उचित वजह के बीमार सास-ससुर को छोड़कर अलग रहने के लिए पति पर लगातार दबाव बनाती है, तो ऐसा व्यवहार पति के प्रति मानसिक क्रूरता माना जा सकता है। हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट से मिले तलाक के आदेश को बरकरार रखते हुए पत्नी की अपील खारिज कर दी। शादी के एक साल बाद शुरू हुआ विवाद मामला राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ निवासी एक सिख युवक और पत्थलगांव निवासी महिला से जुड़ा है। दोनों की शादी 8 मार्च 2007 को हुई थी। पति के मुताबिक शादी के करीब एक साल बाद से ही दोनों के बीच पारिवारिक विवाद शुरू हो गया था। पति ने बताया कि उसके पिता गंभीर हृदय रोग से पीड़ित हैं और उनकी तीन बार हार्ट सर्जरी हो चुकी है। इसके बावजूद पत्नी लगातार उन पर माता-पिता को छोड़कर अलग रहने का दबाव बनाती रही। बच्चे को लेकर मायके चली जाती थी पत्नी पति का आरोप था कि उसके मना करने पर पत्नी सास-ससुर से दुर्व्यवहार करती थी और कई बार बिना बताए छोटे बेटे को लेकर मायके चली जाती थी। वर्ष 2018 में दोनों परिवारों के रिश्तेदारों के बीच सामाजिक स्तर पर समझौता कराने की कोशिश हुई। इस दौरान पत्नी ने लिखित माफीनामा भी दिया था। हालांकि, पति के अनुसार इसके बाद भी विवाद और व्यवहार में कोई खास बदलाव नहीं आया। फैमिली कोर्ट ने दिया था तलाक का आदेश लगातार विवाद से परेशान पति ने डोंगरगढ़ फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल की। मामले की सुनवाई के बाद फैमिली कोर्ट ने 11 नवंबर 2024 को मानसिक क्रूरता के आधार पर पति के पक्ष में तलाक का फैसला सुनाया। इस फैसले के खिलाफ पत्नी ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। पत्नी ने लगाए थे 50 लाख रुपए मांगने के आरोप हाईकोर्ट में पत्नी ने आरोप लगाया कि सास के उकसाने पर पति उसे प्रताड़ित करता था। उसने यह भी दावा किया कि पेट्रोल पंप खोलने के लिए उसके मायके से 50 लाख रुपए की मांग की गई थी। पत्नी ने माफीनामे को लेकर भी आरोप लगाया कि उस पर दबाव डालकर हस्ताक्षर कराए गए थे। हाईकोर्ट ने आरोपों को बताया निराधार हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े दस्तावेजों, गवाहों और बयानों की जांच की। कोर्ट ने पत्नी के आरोपों को साबित करने वाला पर्याप्त आधार नहीं पाया। मामले में पत्नी के भाई और मामा ने भी गवाही दी और स्वीकार किया कि उन्होंने माफीनामा बिना किसी दबाव के पढ़ने के बाद हस्ताक्षर किया था। माता-पिता की देखभाल करना संतान की जिम्मेदारी हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि माता-पिता की सेवा और उनका भरण-पोषण करना संतान का दायित्व है। शादी के बाद यह जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती। कोर्ट ने माना कि पति का अपने गंभीर रूप से बीमार पिता की देखभाल के लिए माता-पिता से अलग रहने से इनकार करना स्वाभाविक और उचित था। वहीं, पत्नी द्वारा बिना उचित कारण लगातार अलग रहने का दबाव बनाना पति के लिए मानसिक प्रताड़ना और मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के तलाक के आदेश को सही ठहराते हुए पत्नी की अपील खारिज कर दी।
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Vishwas Sarang

Vishwas Sarang को बहनों का बेशुमार प्यार, Narela Rakshabandhan Mahotsav में बना नया उत्साह

नरेला विधानसभा क्षेत्र में चल रहे Rakshabandhan Mahotsav 2026 में रविवार को भाई-बहन के रिश्ते की खूबसूरत तस्वीर देखने को मिली। वार्ड नंबर 36, 37 और 70 में आयोजित कार्यक्रम के पांचवें दिन 24 हजार 604 बहनों ने मंत्री Vishwas Sarang को रक्षासूत्र बांधा। बहनों ने राखी बांधकर उनके प्रति स्नेह और आशीर्वाद जताया। कार्यक्रम में पहुंचते ही मंत्री विश्वास सारंग का स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया। ढोल-ताशों और DJ की गूंज के बीच उन्हें बग्गी से मुख्य कार्यक्रम स्थल तक ले जाया गया। इस दौरान आतिशबाजी भी हुई। मंच पर पहुंचने के बाद सारंग ने बहनों पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। बहनों के प्यार को बताया अपनी ताकत रक्षाबंधन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्वास सारंग ने कहा कि रक्षाबंधन केवल राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच विश्वास, स्नेह और अपनत्व का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हर साल बड़ी संख्या में बहनों का प्यार और आशीर्वाद मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। कार्यक्रम में पहुंचीं बहनों से उन्होंने राखी बंधवाई और उनका आशीर्वाद लिया। सारंग ने कहा कि लाखों बहनों का स्नेह और विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। चौथे दिन भी उमड़ा था बहनों का सैलाब नरेला रक्षाबंधन महोत्सव के चौथे दिन भी बड़ी संख्या में बहनें कार्यक्रम में पहुंची थीं। उस दिन 31,117 बहनों ने मंत्री विश्वास सारंग को रक्षासूत्र बांधा था। आयोजकों के अनुसार, पिछले साल के महोत्सव में कुल 1 लाख 84 हजार 632 बहनों ने रक्षासूत्र बांधा था। इस बार भी लगातार बढ़ रही भागीदारी को देखते हुए पिछले साल का आंकड़ा पार होने की उम्मीद जताई जा रही है। 7 सितंबर को इन दो वार्डों में होगा आयोजन नरेला रक्षाबंधन महोत्सव का अगला चरण 7 सितंबर 2026 को होगा। इस दिन दो वार्डों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में भी बड़ी संख्या में बहनों के शामिल होने की उम्मीद है। महोत्सव के जरिए रक्षाबंधन के पारंपरिक रिश्ते को सामाजिक जुड़ाव और भाईचारे के भाव से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। नरेला क्षेत्र में लगातार कई दिनों से चल रहे इस आयोजन में बहनों की बड़ी भागीदारी देखने को मिल रही है। पांचवें दिन 24,604 रक्षासूत्र बांधे जाने के साथ महोत्सव का उत्साह और बढ़ गया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CM रेखा गुप्ता

Satya Niketan हादसे पर CM रेखा गुप्ता का बड़ा फैसला, Deputy Commissioner समेत 5 Suspend

दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक बिल्डिंग हादसे ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। पांच मंजिला इमारत के अचानक गिरने से अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है। हादसे के बाद CM रेखा गुप्ता ने जिम्मेदारी तय करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। MCD के साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर समेत 5 अधिकारियों को Suspend कर दिया गया है। सरकार के इस एक्शन के बाद नगर निगम के कामकाज और इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए अधिकारियों को लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। हादसे के बाद MCD में बड़ा Action सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद MCD ने पांच अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की है। इनमें साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर सहित इंजीनियरिंग विभाग से जुड़े अधिकारी शामिल हैं। जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि इमारत की हालत को लेकर पहले कोई शिकायत या नोटिस जारी हुआ था या नहीं और निर्माण या मरम्मत के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा था या नहीं। PG के तौर पर इस्तेमाल हो रही थी इमारत बताया जा रहा है कि जिस बिल्डिंग का हिस्सा ढहा, उसका इस्तेमाल PG accommodation के तौर पर किया जा रहा था। हादसे के समय वहां कई लोग मौजूद थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इमारत गिरते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई। धूल का गुबार उठ गया और लोग मदद के लिए मौके पर पहुंचने लगे। इसके बाद दिल्ली फायर सर्विस, NDRF और अन्य बचाव दलों ने मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने का काम शुरू किया। 7 लोगों की मौत, कई घायल रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान मलबे से कई लोगों को बाहर निकाला गया। हादसे में अब तक 7 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। हादसे के बाद आसपास के लोगों में भी डर का माहौल है। स्थानीय स्तर पर दूसरी पुरानी और कमजोर इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। Building Owner भी पुलिस की गिरफ्त में मामले में पुलिस ने बिल्डिंग के मालिक हरिराम के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस ने उसकी तलाश के लिए कई टीमें लगाई थीं। बाद में उसे भिवाड़ी से गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई। पुलिस अब हादसे से जुड़े दस्तावेज, बिल्डिंग की स्थिति और निर्माण या मरम्मत से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। जांच के आधार पर आगे और लोगों पर कार्रवाई हो सकती है। आसपास की इमारतों की भी जांच सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD ने आसपास की इमारतों की स्थिति को लेकर भी जांच शुरू की है। अधिकारियों की नजर खास तौर पर उन भवनों पर है जो पुराने हैं या जिनमें निर्माण और मरम्मत का काम चल रहा है। इस घटना ने दिल्ली में old buildings, PG और construction safety को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर इमारत में पहले से कोई खामी थी, तो उसे समय रहते क्यों नहीं रोका गया? सरकार के Action से उठे कई सवाल MCD के पांच अधिकारियों का निलंबन सरकार की ओर से उठाया गया बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि, असली तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी। सत्य निकेतन की इस घटना ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि जांच में हादसे की असली वजह क्या सामने आती है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CM House

CM House March पर Police का पहरा, Hamidia में Intern Doctors से धक्का-मुक्की

अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे इंटर्न डॉक्टर सोमवार को मुख्यमंत्री आवास (CM House) की ओर बढ़ रहे थे। लेकिन हमीदिया अस्पताल के पास पुलिस ने उनका रास्ता रोक दिया। डॉक्टरों को आगे जाने से रोकने के लिए पुलिस ने आसपास के रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी। इस दौरान डॉक्टरों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। प्रदर्शन को देखते हुए हमीदिया अस्पताल परिसर और आसपास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। हालात बिगड़ने की आशंका को देखते हुए मौके पर Water Cannon भी तैयार रखा गया। CM House की तरफ मार्च करना चाहते थे डॉक्टर इंटर्न डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। इसी सिलसिले में डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री आवास तक मार्च करने का फैसला किया। डॉक्टरों का समूह हमीदिया अस्पताल से आगे बढ़ने लगा तो पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। पुलिस की Barricading के बाद डॉक्टरों ने मौके पर नारेबाजी शुरू कर दी। आगे बढ़ने की कोशिश के दौरान दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। पुलिस लगातार प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थान से आगे नहीं जाने के लिए समझाती रही। चारों तरफ से रास्ते किए गए बंद प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने हमीदिया के आसपास कई रास्तों को बंद कर दिया। बैरिकेड लगाकर आवाजाही को नियंत्रित किया गया। मौके पर अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की भी तैनाती की गई, ताकि भीड़ को संभाला जा सके। Water Cannon की मौजूदगी से साफ था कि प्रशासन किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी में था। हालांकि, डॉक्टरों का प्रदर्शन अपनी मांगों को लेकर जारी रहा। मांगों पर सरकार से जवाब चाहते हैं Intern Doctors प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि वे अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं। CM House तक मार्च के जरिए उनका उद्देश्य सीधे सरकार का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर खींचना था। फिलहाल पुलिस ने डॉक्टरों को मुख्यमंत्री आवास की ओर जाने से रोक दिया है। हमीदिया अस्पताल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है और स्थिति पर पुलिस लगातार नजर बनाए हुए है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे ज्यादा चर्चा डॉक्टरों की मांगों और सरकार की ओर से संभावित बातचीत को लेकर है। अब देखना होगा कि प्रदर्शन के बाद प्रशासन और इंटर्न डॉक्टरों के बीच क्या समाधान निकलता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gold

Gold Rate Today: सोने की कीमत ₹2409 गिरी, चांदी भी ₹3967 सस्ती

सोना खरीदने वालों के लिए सोमवार को बाजार से थोड़ी राहत की खबर आई। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोने (Gold) और चांदी (Silver) दोनों के भाव में गिरावट दर्ज की गई। आपके दिए बाजार आंकड़ों के मुताबिक सोना करीब ₹2,409 और चांदी करीब ₹3,967 सस्ती हुई है। इसके बाद 10 ग्राम सोने का भाव करीब ₹1.52 लाख, जबकि एक किलो चांदी करीब ₹2.35 लाख के आसपास पहुंच गई। हालांकि, अलग-अलग बाजार, शुद्धता और कारोबार के समय के हिसाब से रेट में अंतर हो सकता है। सोमवार को एक अन्य बाजार रिपोर्ट में 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,52,590 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2,36,240 प्रति किलो बताया गया। सोने के भाव में फिर आई नरमी पिछले कुछ समय से रिकॉर्ड ऊंचाई के आसपास कारोबार कर रहा Gold सोमवार को दबाव में नजर आया। घरेलू बाजार में भी इसकी कीमत में कमजोरी देखने को मिली। MCX पर अक्टूबर गोल्ड फ्यूचर्स में भी गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोने का भाव करीब ₹1.52 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास बना हुआ है। वहीं 22 कैरेट सोने की कीमत इससे कम है। अगर आप ज्वेलरी खरीदने का मन बना रहे हैं तो ध्यान रखें कि दुकान पर मिलने वाला अंतिम रेट बाजार भाव से अलग हो सकता है। Silver Price Today: चांदी भी हुई सस्ती सोने के साथ चांदी में भी कमजोरी रही। चांदी करीब ₹3,967 प्रति किलो सस्ती होने के बाद लगभग ₹2.35 लाख प्रति किलो के स्तर पर आ गई है। हालांकि, सोमवार के अलग-अलग बाजार अपडेट में चांदी का भाव करीब ₹2.36 लाख प्रति किलो भी बताया गया है। इससे साफ है कि कारोबार के समय के साथ कीमतों में बदलाव हो रहा है। आखिर क्यों गिर रहे हैं सोना और चांदी? कीमती धातुओं में इस गिरावट का कनेक्शन सीधे ग्लोबल मार्केट से जुड़ा है। अमेरिका के रोजगार आंकड़े उम्मीद से मजबूत रहने के बाद वहां Federal Reserve की ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें बदली हैं। मजबूत अमेरिकी जॉब डेटा के बाद सितंबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना को लेकर दांव बढ़े हैं। इसका असर सोने पर पड़ा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में Spot Gold करीब 0.7% नीचे आया। वहीं Silver में भी लगभग 1% की गिरावट दर्ज की गई। अब आगे क्या होगा? अब बाजार की नजर अमेरिका से आने वाले महंगाई के आंकड़ों पर है। इस सप्ताह PPI और CPI जैसे महत्वपूर्ण आंकड़े जारी होने हैं। इनसे Federal Reserve की अगली ब्याज दर नीति को लेकर तस्वीर और साफ हो सकती है। यही वजह है कि आने वाले दिनों में Gold और Silver में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है। निवेशकों के साथ-साथ शादी या त्योहार के लिए खरीदारी करने वाले लोगों की भी बाजार पर नजर बनी हुई है। Gold खरीदते समय सिर्फ भाव न देखें अगर आप आज सोना खरीदने की तैयारी कर रहे हैं तो सिर्फ 10 ग्राम का बाजार भाव देखकर फैसला न लें। 22K या 24K purity, GST, making charges और ज्वेलर के अन्य शुल्क अंतिम कीमत को बदल सकते हैं। अलग-अलग शहरों और ज्वेलर्स के बीच भी रेट में अंतर हो सकता है। इसलिए खरीदारी से पहले अपने स्थानीय ज्वेलर से उसी समय का ताजा रेट जरूर पता करें। बाजार में तेजी से बदलाव होने के कारण सुबह और शाम के भाव में भी अंतर देखने को मिल सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Sagar

Sagar में जहरीली शराब का कहर: 19 मौत, 112 मरीज भर्ती; Liquor Network पर पुलिस का शिकंजा

मध्य प्रदेश के सागर (Sagar) जिले में जहरीली शराब ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। शराब पीने के बाद लोगों की तबीयत बिगड़ने का सिलसिला शुरू हुआ और देखते ही देखते अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ती चली गई। अब तक 19 लोगों की मौत की बात सामने आई है, जबकि 112 मरीज अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती बताए जा रहे हैं। मृतकों में पिता-पुत्र के शामिल होने की जानकारी ने इस घटना को और दर्दनाक बना दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने जांच तेज कर दी है। पुलिस ने लाइसेंसी शराब ठेकेदारों समेत 30 लोगों को नामजद आरोपी बनाया है। इनमें से 10 आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। अधिकारियों की नजर अब उस पूरे नेटवर्क पर है, जिसके जरिए कथित तौर पर मिलावटी या जहरीली शराब लोगों तक पहुंची। शराब पीने के बाद बिगड़ी लोगों की तबीयत जानकारी के मुताबिक, सागर जिले के बंडा क्षेत्र में कई लोगों ने शराब का सेवन किया था। इसके बाद एक के बाद एक लोगों की तबीयत खराब होने लगी। कुछ लोगों को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया। स्थानीय स्तर पर इलाज के बाद गंभीर मरीजों को बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया। अस्पतालों में अचानक मरीजों की संख्या बढ़ने से स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट हो गया। प्रभावित इलाकों में मेडिकल टीमों को भेजकर लोगों की जांच की जा रही है। प्रशासन यह भी पता लगाने में जुटा है कि कितने लोगों ने संदिग्ध शराब का सेवन किया था। 112 मरीजों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज जहरीली शराब की आशंका के बाद अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या लगातार चिंता बढ़ा रही है। 112 लोगों के इलाज की जानकारी सामने आई है। इनमें कुछ मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित गांवों में पहुंचकर स्थिति पर नजर रख रही हैं। अधिकारियों का फोकस इस बात पर है कि संदिग्ध शराब पीने वाले किसी व्यक्ति की हालत बिगड़ने पर उसे समय रहते अस्पताल पहुंचाया जा सके। पिता-पुत्र की मौत से परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ इस हादसे में पिता-पुत्र की मौत की खबर ने स्थानीय लोगों को झकझोर दिया है। एक ही परिवार के दो सदस्यों की जान जाने से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। घटना के बाद प्रभावित इलाकों में मातम का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें अंदाजा नहीं था कि शराब की एक बोतल इतनी बड़ी त्रासदी का कारण बन सकती है। अब लोगों में अवैध और संदिग्ध शराब की बिक्री को लेकर डर भी है और गुस्सा भी। 30 नामजद आरोपियों पर FIR, 10 गिरफ्तार पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए 30 लोगों को नामजद आरोपी बनाया है। इनमें लाइसेंसी शराब कारोबार से जुड़े लोगों के नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शराब की सप्लाई कहां से हुई और इसे किन लोगों तक पहुंचाया गया। अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी है। पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में लगी है। जांच में जिस किसी की भूमिका सामने आएगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई है। लाइसेंसी ठेकेदारों की भूमिका भी जांच के घेरे में मामले में लाइसेंसी शराब ठेकेदारों के नाम सामने आने के बाद आबकारी विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। जांच एजेंसियां यह पता कर रही हैं कि यदि शराब की बिक्री वैध दुकानों से हुई थी, तो उसमें मिलावट कैसे पहुंची। अधिकारियों की जिम्मेदारी और संभावित लापरवाही की भी जांच की जा रही है। प्रशासन की कोशिश है कि शराब के स्रोत से लेकर इसकी बिक्री तक पूरी चेन का पता लगाया जाए। जहरीली शराब की सप्लाई का नेटवर्क खंगाल रही पुलिस पुलिस को शक है कि इस मामले के पीछे सिर्फ कुछ स्थानीय लोगों का हाथ नहीं, बल्कि शराब की सप्लाई से जुड़ा बड़ा नेटवर्क भी हो सकता है। जांच एजेंसियां शराब की बोतल, लेबल और सप्लाई चैन से जुड़े हर पहलू की जांच कर रही हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जहरीली शराब लोगों तक कैसे पहुंची और इस लापरवाही के पीछे कौन जिम्मेदार है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना है। प्रशासन की नजर अब हर कड़ी पर सागर की इस घटना ने अवैध और मिलावटी शराब के कारोबार को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग भी प्रभावित लोगों की निगरानी कर रहा है। प्रशासन का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल परिवार अपनों को खोने के दर्द में हैं और अस्पतालों में भर्ती मरीजों के परिजन उनके जल्द ठीक होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही साफ हो पाएगा कि इस जहरीली शराब की असली सप्लाई कहां से हुई और इस पूरे मामले में किसकी कितनी भूमिका थी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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