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Mitra Vibhushan

PM Modi को मिला Sri Lanka का ‘Mitra Vibhushan’, कहा– पड़ोसी ही नहीं, सच्चा दोस्त है श्रीलंका

भारत और श्रीलंका के बीच गहरे और ऐतिहासिक संबंधों की एक और मिसाल उस वक्त सामने आई जब श्रीलंका सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सर्वोच्च विदेशी सम्मान “मित्र विभूषण” से नवाजा। इस सम्मान के जरिए श्रीलंका ने पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत द्वारा दिए गए सहयोग, विशेष रूप से आर्थिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक क्षेत्रों में किए गए योगदान की सराहना की। PM Modi बोले – श्रीलंका भारत का सिर्फ पड़ोसी नहीं, बल्कि भरोसेमंद मित्र है सम्मान प्राप्त करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “यह सिर्फ एक सम्मान नहीं बल्कि दोनों देशों के बीच गहरे विश्वास और मित्रता का प्रतीक है। श्रीलंका सिर्फ भारत का पड़ोसी नहीं, बल्कि एक ऐसा मित्र है जो हर परिस्थिति में साथ खड़ा रहता है।” क्या है ‘मित्र विभूषण’ सम्मान? ‘मित्र विभूषण’ श्रीलंका का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है जो किसी विदेशी नेता को दिया जाता है। अब तक यह सम्मान केवल तीन बार दिया गया है, जिससे इसकी विशेषता का अंदाजा लगाया जा सकता है। द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा पीएम मोदी की यह यात्रा श्रीलंका के नए राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के न्योते पर हुई। दोनों देशों ने कई प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को विस्तार देने पर सहमति जताई, जिनमें प्रमुख हैं: चीन के प्रभाव को संतुलित करने की रणनीति भारत और श्रीलंका के इस सहयोग को चीन के बढ़ते प्रभाव के मुकाबले में एक अहम रणनीतिक कदम माना जा रहा है। हंबनटोटा बंदरगाह पर चीन की उपस्थिति को देखते हुए भारत की यह साझेदारी श्रीलंका के लिए भी संतुलन का काम करेगी। सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों का ज़िक्र पीएम मोदी ने कहा कि भारत और श्रीलंका के संबंध केवल राजनीतिक या आर्थिक नहीं हैं, बल्कि ये सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत से गहराई से जुड़े हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में यह साझेदारी पूरे दक्षिण एशिया में शांति, स्थिरता और विकास का रास्ता खोलेगी।
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China ने USA पर 34% जवाबी टैरिफ लगाया, राष्ट्रपति ट्रम्प बोले – ‘वो डर गए हैं, ये कदम उन्हें भारी पड़ेगा’

“देश हरपल” विशेष रिपोर्ट 📅 दिनांक: 4 अप्रैल 2025✍🏻 देश हरपल ब्यूरो अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक जंग ने एक बार फिर तगड़ा मोड़ ले लिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, जो 2024 में दोबारा अमेरिका के राष्ट्रपति बने हैं, अब चीन को आर्थिक मोर्चे पर घेरने में पूरी आक्रामकता दिखा रहे हैं। अमेरिका ने लगाया 34% टैरिफ, चीन ने दिया जवाब हाल ही में राष्ट्रपति ट्रम्प ने 60 देशों पर नए टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, जिसमें चीन पर 34% अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया। इससे पहले ट्रम्प प्रशासन ने एक महीने में दो बार चीन पर 10-10% टैरिफ लगाया था। अब चीन पर कुल मिलाकर 54% आयात शुल्क लागू हो चुका है।इसके जवाब में चीन ने भी अमेरिका पर 34% का जवाबी टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी है, जो 10 अप्रैल 2025 से लागू होगा। ट्रम्प ने इस मुद्दे पर ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए लिखा: “चीन ने गलत कदम उठाया है। वे घबरा गए हैं। यह एक ऐसी चीज है जिसे वे बर्दाश्त नहीं कर सकते। चीन का जवाबी टैरिफ उन्हें बहुत भारी पड़ेगा।” चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, “अमेरिका का यह कदम WTO नियमों का उल्लंघन है। इससे चीन के कानूनी व्यापारिक अधिकारों का हनन हो रहा है। हम अपने अधिकारों की रक्षा करेंगे।” ट्रम्प की नीति: ‘अमेरिका फर्स्ट’ 2.0 ट्रम्प के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद से ही उन्होंने व्यापारिक मोर्चे पर ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को और तेज़ कर दिया है। ट्रम्प का मानना है कि चीन वर्षों से अमेरिकी व्यापार और टेक्नोलॉजी का शोषण करता आया है और अब समय आ गया है कि अमेरिका मजबूत जवाब दे। ट्रम्प प्रशासन का दावा है कि नए टैरिफ से चीन की अर्थव्यवस्था पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा और अमेरिकी उद्योगों को फायदा होगा। वैश्विक बाजारों पर असर इस व्यापार युद्ध के कारण वैश्विक बाजारों में हलचल देखने को मिल रही है। एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट आई है, वहीं डॉलर में मजबूती देखी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह टकराव लंबा चला, तो इससे वैश्विक सप्लाई चेन और आर्थिक स्थिरता पर बुरा असर पड़ सकता है। भारत के लिए अवसर या चुनौती? भारत के लिए यह परिस्थिति दोधारी तलवार की तरह है। एक ओर जहां अमेरिका-चीन के बीच बढ़ते तनाव से भारत को वैकल्पिक सप्लायर बनने का मौका मिल सकता है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता का असर भारत की निर्यात नीति पर भी पड़ सकता है। निष्कर्ष:डोनाल्ड ट्रम्प की चीन को लेकर आक्रामक नीति एक बार फिर वैश्विक व्यापार जगत को नई दिशा दे रही है। आने वाले हफ्तों में इस व्यापार युद्ध का असर न केवल अमेरिका और चीन, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिखेगा। 👉 देश-विदेश से जुड़ी ऐसी ही बड़ी खबरों के लिए पढ़ते रहिए देश हरपल – हरपल आपके साथ।
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बैंकॉक में पीएम मोदी और मोहम्मद यूनुस की अहम मुलाकात: बांग्लादेश ने किया था बैठक का अनुरोध

रिपोर्ट: देश हरपल न्यूज | दिनांक: 4 अप्रैल 2025 बैंकॉक में पीएम मोदी और मोहम्मद यूनुस की अहम मुलाकात, बांग्लादेश ने खुद रखा था अनुरोध – दक्षिण एशिया में बदलते समीकरणों के बीच बड़ी कूटनीतिक बातचीत बैंकॉक में BIMSTEC सम्मेलन के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश के नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के बीच एक विशेष मुलाकात हुई। यह मुलाकात अपने आप में कई राजनीतिक और कूटनीतिक संकेतों से भरी हुई मानी जा रही है, खासकर ऐसे समय में जब बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार सत्ता से बाहर हो चुकी है और देश में अल्पसंख्यकों पर हमलों की खबरें अंतरराष्ट्रीय मंच पर चिंता का विषय बनी हुई हैं। बांग्लादेश की तरफ से हुआ था मुलाकात का अनुरोधमीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बैठक की पहल बांग्लादेश की ओर से की गई थी। मोहम्मद यूनुस जो कि एक प्रसिद्ध सामाजिक उद्यमी और ‘ग्रामीण बैंक’ के संस्थापक हैं, उन्होंने खुद पीएम मोदी से भेंट करने की इच्छा जताई थी। बांग्लादेश की मौजूदा सत्ता परिवर्तन के बीच यह कदम कई मायनों में महत्वपूर्ण है। राजनीतिक संदेशों से भरी बातचीतमाना जा रहा है कि यह मुलाकात सिर्फ एक शिष्टाचार भेंट नहीं थी, बल्कि इसके जरिए बांग्लादेश की राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर भारत को एक भरोसा दिलाने की कोशिश की गई है। भारत, जो कि बांग्लादेश का सबसे करीबी और बड़ा पड़ोसी है, वहां के हालिया घटनाक्रमों पर नजर बनाए हुए है। मोहम्मद यूनुस की पीएम मोदी से मुलाकात को वहां की नई राजनीतिक व्यवस्था के संभावित संकेत के रूप में देखा जा रहा है। अल्पसंख्यकों पर हमलों की पृष्ठभूमि में मुलाकात पिछले कुछ महीनों में बांग्लादेश में हिंदू, बौद्ध और ईसाई समुदायों पर हुए हमलों की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे वहां की सामाजिक स्थिति पर सवाल उठने लगे हैं। भारत इन मुद्दों को लेकर लगातार सतर्क रहा है। ऐसे में मोहम्मद यूनुस की यह मुलाकात यह संकेत भी देती है कि बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद, नई सरकार या उसके समर्थक भारत से रिश्तों को और बेहतर करना चाहते हैं। यूनुस को लेकर बांग्लादेश में भी उथल-पुथलयह भी ध्यान देने योग्य है कि मोहम्मद यूनुस खुद भी बांग्लादेश की राजनीति में एक विवादित शख्सियत रहे हैं। शेख हसीना की सरकार के कार्यकाल में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले भी दर्ज हुए थे। लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उनकी छवि एक विचारशील और परिवर्तनकारी नेता की रही है। भारत-बांग्लादेश रिश्तों में नया अध्याय?बैंकॉक में हुई इस मुलाकात को भारत और बांग्लादेश के रिश्तों के संभावित नए अध्याय की शुरुआत के तौर पर देखा जा सकता है। पीएम मोदी और मोहम्मद यूनुस की यह बातचीत केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि रणनीतिक भी हो सकती है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के संबंध किस दिशा में बढ़ते हैं, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा। देश और विदेश की ऐसी ही अहम खबरों के लिए जुड़े रहिए — देश हरपल न्यूज़ के साथ।
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Donald Trump के 26% टैरिफ

Donald Trump के 26% टैरिफ से भारत को नुकसान या फायदा? सरकार कर रही है असर का विश्लेषण

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में 26% अतिरिक्त टैरिफ (टैक्स) लगाने का ऐलान किया है। इस फैसले का असर भारत सहित कई देशों पर पड़ सकता है। भारत सरकार इस टैरिफ के प्रभाव का विश्लेषण कर रही है और इसका हल निकालने की कोशिश कर रही है। टैरिफ कब लागू होगा? टैरिफ दो चरणों में लागू होगा: भारत सरकार की रणनीति भारत सरकार ने पहले से ही इस स्थिति से निपटने की तैयारी कर रखी थी। वाणिज्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस पर नजर बनाए रखने के लिए एक कंट्रोल रूम बनाया था। सरकार का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह नुकसानदायक नहीं है, क्योंकि अभी बातचीत की गुंजाइश बाकी है। ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिया है कि अगर कोई देश अमेरिका की व्यापारिक चिंताओं को दूर करता है, तो टैरिफ में राहत मिल सकती है। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की कोशिशें भारत ने इस टैरिफ से छूट पाने के लिए पहले ही अमेरिका से बातचीत शुरू कर दी थी। इसी सिलसिले में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल पिछले महीने अमेरिका गए थे। दोनों देशों के बीच एक व्यापार समझौते पर बातचीत चल रही है, जिसका पहला चरण सितंबर-अक्टूबर तक पूरा करने की योजना है। इसके अलावा, भारत पहले ही कुछ कदम उठा चुका है: डोनाल्ड ट्रंप का बयान और भारत पर असर 2 अप्रैल को ट्रंप ने इस टैरिफ की घोषणा की और इसे “लिबरेशन डे” (मुक्ति दिवस) करार दिया। उन्होंने कहा कि यह अमेरिकी उद्योग को फिर से मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। ट्रंप ने भारत की व्यापार नीतियों की आलोचना करते हुए कहा, “भारत हमसे 52% टैक्स लेता है, जो बहुत ज्यादा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेरे अच्छे दोस्त हैं, लेकिन मैंने उनसे कहा कि यह सही नहीं है।” उन्होंने बताया कि अमेरिका ने भारत पर “डिस्काउंटेड” यानी रियायती टैरिफ लगाया है, जो 26% है। भारत पर क्या असर पड़ेगा? भारत सरकार इस टैरिफ के प्रभाव का विश्लेषण कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत और अमेरिका के व्यापारिक संबंधों को प्रभावित कर सकता है। क्या होगा आगे?
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Trump

ट्रंप का ‘डर्टी-15’ लिस्ट: किन देशों पर गिरेगी भारी टैरिफ की गाज?

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति और 2024 के चुनावी दौड़ में फिर से मैदान में उतरे डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संभावित आर्थिक एजेंडे का एक बड़ा खुलासा किया है। ट्रंप ने ‘डर्टी-15’ नाम से उन 15 देशों की सूची तैयार की है, जिन पर वह भारी टैरिफ लगाने की योजना बना रहे हैं। उनका कहना है कि ये देश अमेरिका के साथ व्यापार में “अनुचित लाभ” उठा रहे हैं और इसलिए इन्हें ‘रिसिप्रोकल टैरिफ’ (पारस्परिक शुल्क) देना होगा। क्या है ट्रंप की ‘डर्टी-15’ लिस्ट? ट्रंप ने अमेरिका के व्यापारिक हितों को ध्यान में रखते हुए उन देशों की पहचान की है, जिन पर नए टैरिफ लगाए जाएंगे। इनमें चीन, भारत, मैक्सिको, जर्मनी, वियतनाम, जापान, कनाडा और कई अन्य देश शामिल हैं। ट्रंप के मुताबिक, ये देश अमेरिका के बाजारों से फायदा उठाते हैं लेकिन बदले में समान अवसर नहीं देते। किन देशों को झेलनी पड़ेगी टैरिफ की मार? इस लिस्ट में प्रमुख रूप से वे देश हैं जो अमेरिका को बड़े पैमाने पर निर्यात करते हैं, लेकिन बदले में अमेरिकी सामान पर ऊंचे शुल्क लगाते हैं या व्यापार में असंतुलन बनाए रखते हैं। भारत और चीन खासतौर पर इस नीति से प्रभावित हो सकते हैं क्योंकि दोनों देश अमेरिका को बड़े पैमाने पर टेक्सटाइल, फार्मा, ऑटोमोबाइल और आईटी सेक्टर में सेवाएं और उत्पाद निर्यात करते हैं। ट्रंप की व्यापार नीति और प्रभाव ट्रंप का यह कदम उनकी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का हिस्सा माना जा रहा है। इससे अमेरिका में कुछ उद्योगों को फायदा हो सकता है, लेकिन कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों और निर्यात पर निर्भर देशों को बड़ा झटका लग सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ट्रंप 2024 का चुनाव जीतते हैं, तो उनकी टैरिफ नीति वैश्विक व्यापार को अस्थिर कर सकती है और चीन, भारत जैसे देशों के साथ आर्थिक संबंधों को प्रभावित कर सकती है। भारत पर असर? भारत, जो अमेरिका के लिए एक प्रमुख व्यापारिक भागीदार है, ट्रंप की इस नई नीति से प्रभावित हो सकता है। अगर ट्रंप भारी टैरिफ लगाते हैं, तो भारत के टेक्सटाइल, आईटी और फार्मास्युटिकल उद्योगों को नुकसान हो सकता है। क्या ट्रंप का यह फैसला वाकई अमेरिका के हित में होगा या वैश्विक व्यापार के लिए एक नई चुनौती खड़ी करेगा? यह आने वाले समय में साफ होगा।
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नेपाल में पूर्व राजा ज्ञानेन्द्र शाह नजरबंद, मुकदमा चलाने की तैयारी, राजा समर्थक बड़े नेता गिरफ्तार

नेपाल में हाल ही में पूर्व राजा ज्ञानेन्द्र शाह के समर्थकों द्वारा राजशाही की बहाली की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए हैं। इन प्रदर्शनों के बीच, प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और अन्य प्रमुख नेताओं ने स्पष्ट रूप से कहा है कि नेपाल में राजशाही की वापसी संभव नहीं है। प्रधानमंत्री ओली ने सुझाव दिया कि यदि पूर्व राजा को अपनी लोकप्रियता पर विश्वास है, तो उन्हें संविधान के अनुसार अपनी पार्टी बनाकर चुनाव लड़ना चाहिए नेपाल में राजशाही समर्थक गतिविधियों में वृद्धि देखी गई है, जिसमें पूर्व राजा ज्ञानेन्द्र शाह की सक्रिय भूमिका की चर्चा हो रही है। राजशाही समर्थक पार्टी ‘राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी’ भी देश के विभिन्न हिस्सों में राजशाही की बहाली के समर्थन में कार्यक्रम आयोजित कर रही है प्रधानमंत्री ओली ने इन गतिविधियों के पीछे भारत की भूमिका का आरोप लगाया है और संसद में इस मुद्दे को उठाने की बात कही है। उन्होंने पूर्व राजा ज्ञानेन्द्र शाह को गिरफ्तार कराने की भी कसम खाई है इन घटनाओं के बीच, नेपाल की राजनीतिक स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। पूर्व राजा के समर्थकों की बढ़ती सक्रियता और सरकार की सख्त प्रतिक्रिया से देश में अस्थिरता बढ़ने की आशंका है। आने वाले दिनों में नेपाल की राजनीति में और भी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है।
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भूकंप से म्यांमार और थाईलैंड में भारी तबाही, 10 हजार से ज्यादा मौतों की आशंका

भूकंप से म्यांमार और थाईलैंड में भारी तबाही, 10 हजार से ज्यादा मौतों की आशंका

म्यांमार और थाईलैंड में शुक्रवार को आए भीषण भूकंप ने भारी तबाही मचाई। यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के मुताबिक, इस भूकंप में मरने वालों की संख्या 10 हजार से ज्यादा हो सकती है। भूकंप की तीव्रता 7.7 थी और इसके झटके भारत, बांग्लादेश और चीन तक महसूस किए गए। बैंकॉक में गिरी 30 मंजिला इमारत थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में इस भूकंप के कारण एक 30 मंजिला इमारत गिर गई। इस हादसे में 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि 110 लोग मलबे में दब गए। स्थानीय प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया है। म्यांमार में 1,000 से ज्यादा लोगों की मौत रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, म्यांमार की सैन्य सरकार ने बताया कि अब तक 1,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 2,300 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। इस आपदा के कारण म्यांमार के 6 राज्यों में और पूरे थाईलैंड में इमरजेंसी लागू कर दी गई है। https://twitter.com/Top_Disaster/status/1905545455364194747 200 साल का सबसे बड़ा भूकंप विशेषज्ञों का कहना है कि यह म्यांमार और थाईलैंड में पिछले 200 साल का सबसे बड़ा भूकंप है। लोग डर के कारण घरों से बाहर आ गए और कई जगहों पर सड़कें फट गईं। भारत ने भेजी राहत सामग्री भूकंप के तुरंत बाद भारत ने मदद का हाथ बढ़ाया है। भारत सरकार ने म्यांमार को 15 टन राहत सामग्री की पहली खेप भेजी है। इस मिशन को ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ नाम दिया गया है। राहत सामग्री में दवाइयां, भोजन और अन्य जरूरी सामान शामिल हैं। प्रत्यक्षदर्शियों ने सुनाई आपबीती बैंकॉक में रह रहे भारतीय नागरिकों ने इस भूकंप के अनुभव साझा किए। एक व्यक्ति ने कहा, ‘हमने अपनी आंखों के सामने बिल्डिंग गिरते देखी, यह बहुत डरावना था। ऐसा पहले कभी नहीं देखा।’ अभी भी जारी हैं राहत कार्य मलबे में फंसे लोगों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां और स्थानीय प्रशासन मिलकर लोगों की मदद कर रहे हैं।
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ट्रंप से नाराज कनाडा ने अमेरिका से तोड़े रिश्ते

ट्रंप से नाराज कनाडा ने अमेरिका से तोड़े रिश्ते? जानिए इस विवाद का सच

अमेरिका और कनाडा के रिश्तों में हाल ही में तनाव बढ़ गया है। इसकी वजह अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान हैं, जिनमें उन्होंने कनाडा को अमेरिका में मिलाने का सुझाव दिया। इसके बाद कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने इस प्रस्ताव को सख्ती से खारिज कर दिया। इस बयानबाजी के बाद दोनों देशों के संबंधों में कड़वाहट देखने को मिल रही है। आइए जानते हैं कि इस विवाद का क्या असर हो सकता है। ट्रंप ने दिया कनाडा को अमेरिका में शामिल करने का सुझाव डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया कि अमेरिका हर साल कनाडा को 100 अरब डॉलर से अधिक की सब्सिडी देता है। इस आधार पर उन्होंने सुझाव दिया कि कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बना देना चाहिए। ट्रंप ने कहा कि इससे दोनों देशों को आर्थिक और सुरक्षा लाभ होंगे। ट्रूडो ने दिया करारा जवाब कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने ट्रंप के इस प्रस्ताव को सख्ती से नकार दिया। उन्होंने कहा कि कनाडा हमेशा स्वतंत्र और संप्रभु रहेगा। ट्रूडो ने स्पष्ट किया कि उनका देश अमेरिका के अधीन नहीं जाएगा और अपनी स्वतंत्रता से कोई समझौता नहीं करेगा। क्या कनाडा ने अमेरिका से तोड़ दिए रिश्ते? हालांकि, इस बयानबाजी के बाद भी कनाडा और अमेरिका के बीच राजनयिक और व्यापारिक रिश्ते यथावत हैं। अभी तक दोनों देशों ने अपने कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया है। हालांकि, इस मुद्दे को लेकर दोनों देशों में तनाव जरूर बढ़ गया है। इस विवाद का असर क्या होगा? इस तरह के बयानों से दोनों देशों के व्यापारिक और राजनीतिक संबंधों पर असर पड़ सकता है। अमेरिका और कनाडा एक-दूसरे के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार हैं, ऐसे में अगर तनाव बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक बाजार पर भी पड़ सकता है। फिलहाल, ट्रूडो सरकार अमेरिका के साथ अपने संबंधों को संतुलित बनाए रखने की कोशिश कर रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में यह विवाद और कितना गहराता है या फिर दोनों देश इसे सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ते हैं।
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Vladimir Putin India Visit Update; PM Narendra Modi

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत दौरे पर आएंगे, तैयारियां शुरू

मॉस्को: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस साल भारत की यात्रा करेंगे। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि राष्ट्रपति पुतिन के दौरे की तैयारियां की जा रही हैं। हालांकि, उन्होंने इस यात्रा की सटीक तारीख या महीने के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। लावरोव ने यह बयान ‘रूस और भारत: एक नए द्विपक्षीय एजेंडे की ओर’ समिट के दौरान दिया। इस बैठक का आयोजन रूसी अंतरराष्ट्रीय मामलों की परिषद (RIAC) द्वारा किया गया था। मोदी के रूस दौरे के बाद पुतिन भारत आएंगे रूसी विदेश मंत्री लावरोव ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार तीसरी बार भारत का प्रधानमंत्री बनने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा रूस की थी। अब हमारी बारी है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत सरकार का निमंत्रण स्वीकार कर लिया है।” गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने साल 2024 में दो बार रूस की यात्रा की थी। वह 22 अक्टूबर को BRICS समिट के लिए रूस गए थे। इससे पहले, जुलाई में भी उन्होंने रूस का दौरा किया था और इस दौरान राष्ट्रपति पुतिन को भारत आने का आमंत्रण दिया था। 2021 में आखिरी बार भारत आए थे पुतिन रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने पिछली बार 6 दिसंबर 2021 को भारत का दौरा किया था। वह केवल चार घंटे के लिए भारत आए थे और इस दौरान दोनों देशों के बीच 28 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए थे, जिनमें सैन्य और तकनीकी समझौते भी शामिल थे। यूक्रेन युद्ध के बाद पहली भारत यात्रा फरवरी 2022 में यूक्रेन-रूस युद्ध शुरू होने के बाद यह राष्ट्रपति पुतिन की पहली भारत यात्रा होगी। इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच 2030 तक के आर्थिक रोडमैप को आगे बढ़ाने पर चर्चा होने की उम्मीद है। भारत और रूस अपने द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करते हुए इसे 100 अरब डॉलर से अधिक करने पर सहमत हुए हैं। फिलहाल, दोनों देशों के बीच करीब 60 अरब डॉलर का व्यापार हो रहा है। अरेस्ट वारंट के बाद अंतरराष्ट्रीय दौरे से बचते रहे पुतिन मार्च 2023 में इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) ने व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी किया था। उन पर यूक्रेन में बच्चों के अपहरण और जबरन डिपोर्टेशन के आरोप लगे थे। यह पहली बार था जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के किसी स्थायी सदस्य देश के शीर्ष नेता के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी किया गया। इस वारंट के बाद से पुतिन विदेश यात्राओं से बचते रहे हैं। वह 2023 में भारत में हुए G20 समिट में शामिल नहीं हुए थे और इस साल ब्राजील में हो रहे G20 समिट में भी हिस्सा नहीं लिया है। उनकी जगह दोनों सम्मेलनों में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भाग लिया। राष्ट्रपति पुतिन की आगामी भारत यात्रा दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की

ज़ेलेंस्की को उम्मीद – अमेरिका रूसी मांगों के सामने मज़बूती से खड़ा रहेगा

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने उम्मीद जताई है कि अमेरिका रूस की शर्तों के सामने झुकेगा नहीं और मजबूती से खड़ा रहेगा। रूस ने काला सागर में युद्धविराम के लिए शर्त रखी है कि पश्चिमी देश उस पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंध हटाएं। रूस की नई शर्तें और ज़ेलेंस्की की प्रतिक्रिया मंगलवार को रूस ने घोषणा की कि वह काला सागर में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए युद्धविराम के लिए तैयार है। लेकिन उसने शर्त रखी कि पश्चिमी देश रूस के खाद्य और उर्वरक व्यापार से जुड़े आर्थिक प्रतिबंध हटाएं। ज़ेलेंस्की ने पेरिस में यूरोप के कई पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिका रूसी दबाव के आगे नहीं झुकेगा। जब बीबीसी ने उनसे पूछा कि क्या अमेरिका रूस की इन मांगों को मान सकता है, तो उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है कि ऐसा नहीं होगा। भगवान करे, वे मजबूती से खड़े रहें। लेकिन देखना होगा कि आगे क्या होता है।” अमेरिका और यूरोप का जवाब व्हाइट हाउस ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका, रूस और यूक्रेन के प्रतिनिधियों के बीच सऊदी अरब में तीन दिन की बातचीत के बाद युद्धविराम पर सहमति बनी है। लेकिन कुछ ही घंटे बाद क्रेमलिन ने बयान जारी कर कुछ शर्तें रख दीं। रूस ने मांग की है कि उसके कृषि व्यापार से जुड़े वित्तीय संस्थानों पर लगे प्रतिबंध हटाए जाएं और उन्हें अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग सिस्टम SWIFT तक दोबारा पहुंच दी जाए। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सरकार इस अनुरोध पर विचार कर रही है। लेकिन यूरोपीय संघ (EU) ने साफ कर दिया कि जब तक रूसी सेना पूरी तरह यूक्रेनी सीमा से पीछे नहीं हटती, तब तक प्रतिबंधों को हटाने का सवाल ही नहीं उठता। अमेरिका में रूस के प्रभाव की चिंता ज़ेलेंस्की ने कहा कि वे अमेरिकी समर्थन के लिए आभारी हैं, लेकिन उन्हें चिंता है कि कुछ लोग “रूसी प्रचार” के प्रभाव में आ सकते हैं। उन्होंने कहा, “हम रूस के इन झूठे नैरेटिव्स को स्वीकार नहीं कर सकते।” जब उनसे पूछा गया कि क्या डोनाल्ड ट्रंप का रिश्ता उनके साथ ज्यादा अच्छा है या पुतिन के साथ, तो उन्होंने जवाब दिया, “मुझे नहीं पता। यह कहना मुश्किल है। मैं नहीं जानता कि उनकी कितनी बार किससे बातचीत हुई है।” यूरोप की भूमिका और ट्रंप के दूत की टिप्पणी पिछले हफ्ते ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ़ ने कहा था कि यूरोप द्वारा यूक्रेन की मदद के लिए “कोएलिशन ऑफ द विलिंग” (इच्छुक देशों का गठबंधन) बनाने का प्रयास बेकार है। इस पर ज़ेलेंस्की ने कहा कि वह इस पर जल्दबाज़ी में निष्कर्ष नहीं निकालेंगे। उन्होंने कहा, “जहां तक मैं जानता हूं, विटकॉफ़ को रियल एस्टेट खरीदने और बेचने का अच्छा अनुभव है, लेकिन यह मामला अलग है।” इतिहास में ज़ेलेंस्की की पहचान? बीबीसी ने ज़ेलेंस्की से पूछा कि भविष्य में इतिहास उन्हें कैसे याद करेगा – यूक्रेन को बचाने वाले नेता के रूप में या इसे गिरते देखने वाले व्यक्ति के रूप में? इस पर ज़ेलेंस्की ने भावुक होते हुए कहा, “मुझे नहीं पता कि इतिहास की किताबों में मेरे बारे में क्या लिखा जाएगा। लेकिन मेरा मकसद यह नहीं है। मेरा लक्ष्य है – अपने देश की रक्षा करना और यह देखना कि मेरे बच्चे बिना किसी डर के अपनी सड़कों पर चल सकें।“ उन्होंने आगे कहा, “मैं अपनी आखिरी सांस तक यूक्रेन की रक्षा करने के लिए हर संभव कोशिश करूंगा।” नाटो में यूक्रेन की एंट्री का मुद्दा ज़ेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन का नाटो में शामिल होना गठबंधन को और मजबूत करेगा। हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने साफ कर दिया है कि फिलहाल यूक्रेन को नाटो में शामिल नहीं किया जाएगा। निष्कर्ष यूक्रेन और रूस के बीच जंग अब भी जारी है, और ज़ेलेंस्की को उम्मीद है कि अमेरिका रूस की शर्तों को नहीं मानेगा। हालांकि, रूस का दबाव बढ़ता जा रहा है, और अमेरिका की नीति पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। Deshharpal पर ताज़ा ख़बरों के लिए जुड़े रहें!
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LPG Price Hike: घरेलू गैस सिलेंडर के दाम बढ़े, आम लोगों पर बढ़ा बोझ

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LPG Price Hike: देश में एक बार फिर महंगाई का असर रसोई गैस पर देखने को मिला है। घरेलू LPG सिलेंडर (14.2 किलोग्राम) के दामों में ₹29 की बढ़ोतरी की गई है। इस बढ़ोतरी के बाद अब उपभोक्ताओं को सिलेंडर के लिए ज्यादा पैसे चुकाने होंगे, जिससे आम परिवारों का बजट और बिगड़ सकता है। कितना हुआ LPG सिलेंडर महंगा? नई कीमतों के अनुसार 14.2 किलोग्राम वाला घरेलू LPG सिलेंडर अब पहले से ₹29 महंगा हो गया है। यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर घरेलू रसोई खर्च को प्रभावित करेगी। आम लोगों पर असर LPG के दाम बढ़ने से मध्यम और गरीब वर्ग के परिवारों पर सीधा आर्थिक बोझ बढ़ेगा। पहले से ही महंगाई से परेशान लोगों के लिए यह एक और झटका माना जा रहा है। सरकारी तेल कंपनियों का फैसला तेल विपणन कंपनियां (OMCs) हर महीने अंतरराष्ट्रीय बाजार के आधार पर LPG कीमतों की समीक्षा करती हैं। इसी बदलाव के तहत यह नई कीमतें लागू की गई हैं। आगे क्या हो सकता है? विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतें बढ़ती रहीं, तो आने वाले महीनों में LPG के दामों में और बदलाव देखने को मिल सकता है।
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Delhi के मालवीय नगर इलाके में हुए होटल अग्निकांड मामले में पुलिस ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 21 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। जांच के दौरान सामने आया है कि होटल में काम करने वाले रसोइये की लापरवाही इस हादसे की एक बड़ी वजह हो सकती है। इसी आधार पर पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। क्या है पूरा मामला? यह हादसा कुछ दिन पहले उस समय हुआ जब होटल में अचानक आग लग गई। शुरुआती जांच में पता चला कि सुरक्षा इंतजामों की भारी कमी थी। आग तेजी से फैली और कई लोग बाहर नहीं निकल पाए। लापरवाही की ओर इशारा पुलिस और फायर विभाग की जांच में यह बात सामने आई है कि रसोइये की ओर से बरती गई लापरवाही ने हालात को और गंभीर बना दिया। हालांकि, पूरे मामले की गहराई से जांच जारी है। जांच जारी, और गिरफ्तारी संभव अधिकारियों का कहना है कि इस केस में और भी लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। लोगों में गुस्सा और दुख इस हादसे के बाद इलाके में शोक और गुस्से का माहौल है। स्थानीय लोग प्रशासन से सख्त कार्रवाई और बेहतर सुरक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।
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Himachal में भूकंप के तीन झटकों से दहशत, कई मकान क्षतिग्रस्त; पालमपुर में अस्पताल की छत गिरी

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Himachal Pradesh में शुक्रवार देर रात और शनिवार सुबह भूकंप के तीन तेज झटकों ने लोगों में दहशत फैला दी। लगातार आए झटकों से लोग डरकर अपने घरों से बाहर निकल आए। कई इलाकों में मकानों में दरारें आ गईं, जबकि कुछ जगहों पर दीवारें और छतें भी क्षतिग्रस्त हो गईं। सबसे ज्यादा असर कांगड़ा और पालमपुर इलाके में देखने को मिला। पालमपुर के एक सरकारी अस्पताल की छत का हिस्सा अचानक गिर गया। हादसे के समय अस्पताल में मरीज और स्टाफ मौजूद थे। गनीमत रही कि किसी की जान नहीं गई, लेकिन लोगों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि पहला झटका महसूस होते ही घरों में रखे सामान हिलने लगे। कई लोग डर के कारण पूरी रात घरों के बाहर खुले मैदानों और सड़कों पर बिताने को मजबूर हुए। बच्चों और बुजुर्गों में खासा डर देखने को मिला। प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और प्रभावित इलाकों का निरीक्षण शुरू किया। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और सतर्क रहें। जिन मकानों में दरारें आई हैं, वहां रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है। भूकंप के झटकों के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। लोग लगातार प्रशासन से अपडेट ले रहे हैं और किसी बड़े नुकसान की आशंका को लेकर चिंतित हैं। मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग हालात पर नजर बनाए हुए हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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