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BNP

PM Modi की बधाई के बाद BNP का पहला Reaction India के साथ क्या होगी नई Strategy

बांग्लादेश में हुए ताज़ा आम चुनावों के नतीजों ने देश की राजनीति में बड़ा बदलाव ला दिया है। भारी बहुमत के साथ जीत दर्ज करने वाली Bangladesh Nationalist Party (BNP) अब नई सरकार के गठन की तैयारी में जुट गई है। चुनाव परिणाम सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें ढाका पर टिक गईं, खासकर भारत की प्रतिक्रिया को लेकर उत्सुकता रही। भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने चुनावी जीत पर बधाई देते हुए दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत बनाने की इच्छा जताई। उनके संदेश के बाद BNP की ओर से भारत-बांग्लादेश संबंधों पर पहला आधिकारिक बयान सामने आया है, जिसने आने वाले समय की कूटनीतिक दिशा का संकेत दे दिया है। PM Modi की बधाई, क्षेत्रीय सहयोग पर जोर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में बांग्लादेश की जनता को शांतिपूर्ण और सफल चुनाव के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध बेहद खास हैं, और दोनों देशों को मिलकर क्षेत्रीय शांति और विकास के लिए काम करना चाहिए। यह संदेश सिर्फ औपचारिक बधाई नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया में स्थिरता और साझेदारी की एक मजबूत झलक भी माना जा रहा है। BNP का जवाब: “समानता और राष्ट्रीय हित सर्वोपरि” बधाई संदेश के जवाब में BNP ने भारत का आभार जताया और साफ किया कि उसकी सरकार पड़ोसी देशों के साथ “आपसी सम्मान, समानता और राष्ट्रीय हित” के आधार पर रिश्ते आगे बढ़ाएगी। पार्टी के बयान में कहा गया कि नई सरकार संतुलित और स्वतंत्र विदेश नीति अपनाएगी। भारत के साथ व्यापार, सीमा सुरक्षा, कनेक्टिविटी और जल बंटवारे जैसे मुद्दों पर रचनात्मक बातचीत जारी रहेगी, लेकिन राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं किया जाएगा। इस बयान से यह साफ है कि BNP टकराव की बजाय संवाद और संतुलन की नीति अपनाना चाहती है। India-Bangladesh Relations का भविष्य भारत और बांग्लादेश के बीच पिछले कुछ वर्षों में व्यापार, ऊर्जा, ट्रांजिट और सुरक्षा सहयोग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। दोनों देशों के बीच सीमा प्रबंधन और कनेक्टिविटी परियोजनाएं भी क्षेत्रीय विकास में अहम भूमिका निभा रही हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नई सरकार के आने के बाद कुछ नीतिगत प्राथमिकताएं बदल सकती हैं, लेकिन रणनीतिक साझेदारी बरकरार रहने की संभावना अधिक है। आम लोगों की उम्मीदें भी जुड़ी सिर्फ राजनीतिक स्तर पर ही नहीं, बल्कि दोनों देशों के आम नागरिक भी स्थिर और मजबूत रिश्तों की उम्मीद रखते हैं। सीमा से जुड़े क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए बेहतर व्यापार और आवाजाही के अवसर सीधे तौर पर उनकी रोज़मर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं। बंपर जीत के बाद BNP का पहला बयान यह संकेत देता है कि ढाका और नई दिल्ली के बीच संवाद की डोर बनी रहेगी। आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि नई सरकार अपने वादों को किस तरह नीतियों में बदलती है और भारत के साथ संबंध किस दिशा में आगे बढ़ते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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BJP

BJP vs Congress Clash हरदीप पुरी विवाद पर संसद में टकराव, 9 मार्च तक स्थगन

संसद का माहौल एक बार फिर गरमा गया जब लोकसभा में विपक्षी सदस्यों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए “हरदीप पुरी इस्तीफा दो” की मांग उठाई। लगातार हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल सकी और अंततः इसे 9 मार्च तक स्थगित कर दिया गया। क्यों उठा इस्तीफे का मुद्दा? विपक्ष का आरोप है कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय से जुड़े अहम सवालों पर सरकार संतोषजनक जवाब नहीं दे रही। इसी को लेकर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के इस्तीफे की मांग तेज हुई। जैसे ही कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसद वेल में आ गए और नारेबाजी करने लगे, जिससे सदन में शोर-शराबा बढ़ता गया। संसद में मौजूद कई सदस्यों का कहना था कि महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए, लेकिन हंगामे के कारण यह संभव नहीं हो सका। माहौल ऐसा था कि बार-बार अपील के बावजूद व्यवस्था बहाल नहीं हो पाई। BJP का पलटवार: राहुल गांधी पर आरोप इस घटनाक्रम के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। पार्टी का कहना है कि संसद में जानबूझकर गतिरोध पैदा किया जा रहा है। BJP नेताओं ने आरोप लगाया कि सत्ता हासिल करने की राजनीति के तहत देश को बांटने वाली भाषा और रणनीति अपनाई जा रही है। दूसरी ओर, कांग्रेस का कहना है कि वह जनता से जुड़े मुद्दों को उठा रही है और जवाबदेही तय करना उसका कर्तव्य है। आम लोगों पर क्या असर? संसद में गतिरोध का सीधा असर विधायी कामकाज पर पड़ता है। कई अहम बिल और नीतिगत फैसले चर्चा के इंतजार में हैं। जब सदन नहीं चलता, तो जनता से जुड़े फैसले भी टल जाते हैं। यही वजह है कि राजनीतिक टकराव के बीच आम नागरिक उम्मीद करते हैं कि पक्ष-विपक्ष संवाद का रास्ता निकालें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Kanpur

Kanpur Lamborghini Accident नकली ड्राइवर पेश करने की कोशिश नाकाम, आरोपी गिरफ्तार

कानपुर (Kanpur) में हुए चर्चित Lamborghini Accident ने पूरे देश को झकझोर दिया है। रफ्तार, रसूख और जिम्मेदारी—इन तीन शब्दों के बीच फंसा यह मामला अब कानूनी मोड़ ले चुका है। वायरल वीडियो, नकली ड्राइवर पेश करने का आरोप और आखिरकार गिरफ्तारी… कानपुर लैंबोर्गिनी कांड लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। क्या है Kanpur Lamborghini Accident पूरा मामला? 8 फरवरी 2026 को कानपुर की वीआईपी रोड पर एक लग्जरी Lamborghini सुपरकार तेज रफ्तार में अनियंत्रित होकर कई वाहनों और राहगीरों से टकरा गई। हादसे में कम से कम छह लोग घायल हुए। स्थानीय लोगों के मुताबिक कार की रफ्तार बेहद तेज थी और टक्कर इतनी अचानक हुई कि संभलने का मौका ही नहीं मिला। घायलों में कुछ लोग काम से लौट रहे थे, तो कुछ सड़क किनारे खड़े थे। इस हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया कि शहर की सड़कों पर रफ्तार का रोमांच किस कीमत पर लिया जा रहा है? वीडियो वायरल: कहानी ने लिया नया मोड़ हादसे के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो तेजी से वायरल हुए। इन फुटेज में देखा गया कि: इन वीडियो के सामने आने के बाद मामला सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं रहा, बल्कि जांच और जवाबदेही का मुद्दा बन गया। अरबपति का बेटा गिरफ्तार जांच के दौरान सामने आया कि कार एक बड़े कारोबारी परिवार से जुड़ी है। आरोप है कि हादसे के समय कारोबारी का बेटा शिवम मिश्रा खुद गाड़ी चला रहा था। घटना के बाद वह सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आया, जिससे कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। करीब चार दिन बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। मेडिकल जांच के बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया। पुलिस ने उसके खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने और लोगों को नुकसान पहुंचाने जैसी धाराओं में मामला दर्ज किया है। नकली ड्राइवर पेश करने का आरोप मामले में सबसे बड़ा विवाद तब सामने आया जब परिवार की ओर से कहा गया कि हादसे के समय कार शिवम नहीं, बल्कि उनका ड्राइवर चला रहा था। एक व्यक्ति ने खुद को ड्राइवर बताते हुए जिम्मेदारी लेने की बात भी कही। हालांकि पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूतों के आधार पर इस दावे को खारिज कर दिया। जांच एजेंसियों का कहना है कि उपलब्ध प्रमाणों के अनुसार ड्राइविंग सीट पर शिवम ही था। बीमारी का दावा भी चर्चा में परिवार की ओर से यह भी कहा गया कि शिवम को मिर्गी (Epilepsy) की समस्या है और संभव है कि अचानक तबीयत बिगड़ने के कारण हादसा हुआ हो। पुलिस ने इस दावे की भी जांच शुरू की है, लेकिन अभी तक इसे हादसे का आधिकारिक कारण नहीं माना गया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rahul Gandhi

Membership Controversy in Parliament BJP का Rahul Gandhi पर एक्शन, रिजिजू के Video से मचा हंगामा

संसद के बजट सत्र 2026 में सियासी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। लोकसभा में हंगामे, आरोप-प्रत्यारोप और संवैधानिक प्रक्रियाओं पर उठे सवालों के बीच अब मामला सीधे Rahul Gandhi की सदस्यता (Membership) और स्पीकर चैंबर विवाद (Speaker Chamber Row) तक पहुंच गया है। सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं, और संसद का माहौल असाधारण रूप से तनावपूर्ण बना हुआ है। BJP MP का नोटिस: राहुल गांधी की सदस्यता खत्म करने की मांग बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा में एक नोटिस देकर राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की सदस्यता समाप्त करने की मांग की है। उनका आरोप है कि राहुल गांधी ने सदन के भीतर ऐसे बयान दिए जो तथ्यों पर आधारित नहीं थे और जिनसे देश की छवि प्रभावित होती है। दुबे का कहना है कि संसद की गरिमा बनाए रखना हर सदस्य की जिम्मेदारी है, और अगर कोई सदस्य भ्रामक जानकारी देता है तो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए। इस नोटिस के सामने आते ही सदन में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। कांग्रेस सांसदों ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया, जबकि बीजेपी इसे संसदीय अनुशासन का मामला बता रही है। Speaker Chamber Video: रिजिजू ने जारी किया क्लिप विवाद उस समय और गहरा गया जब केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो क्लिप साझा की। इस वीडियो में कथित तौर पर कुछ विपक्षी सांसद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के चैंबर में मौजूद दिखाई दे रहे हैं। रिजिजू ने दावा किया कि कुछ कांग्रेस सांसद स्पीकर के कक्ष में पहुंचे और वहां अनुचित व्यवहार किया। उन्होंने इसे संसदीय परंपराओं के खिलाफ बताया। वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई। विपक्ष का जवाब: लोकतांत्रिक अधिकारों का सवाल कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि उनके नेताओं को बोलने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया जा रहा था, जिसके चलते विरोध दर्ज कराया गया। उनका आरोप है कि सदन की कार्यवाही निष्पक्ष नहीं चल रही। कुछ विपक्षी नेताओं ने यह भी कहा कि स्पीकर की भूमिका पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकारों के दायरे में आता है। संसद में बढ़ता टकराव लगातार हंगामे के कारण कार्यवाही कई बार बाधित हुई। नारेबाजी, वेल में आना और विरोध प्रदर्शन के चलते प्रश्नकाल और अन्य कामकाज प्रभावित हुआ। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल एक बयान या वीडियो तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकार और विपक्ष के बीच गहरे अविश्वास को दर्शाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi

UNSC Report on Delhi Blast Jaish-e-Mohammed Link से Pakistan की मुश्किलें बढ़ीं

Delhi के ऐतिहासिक लाल किले (Red Fort) के पास हुए आतंकी हमले को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की ताज़ा रिपोर्ट ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था को झकझोर दिया है। रिपोर्ट में पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammed) का नाम सामने आने के बाद इस मामले ने वैश्विक स्तर पर गंभीर रूप ले लिया है। क्या हुआ था Delhi Red Fort के पास? 10 नवंबर 2025 को लाल किले के नजदीक कार बम विस्फोट हुआ था। यह इलाका देश की ऐतिहासिक और रणनीतिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील जगहों में गिना जाता है। धमाके में कई लोगों की मौत हुई और कई घायल हुए। घटना के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसियों ने इसे सुनियोजित आतंकी हमला बताया था। शुरुआती जांच में सीमा पार आतंकी नेटवर्क की भूमिका की आशंका जताई गई थी। UN Report में क्या बड़ा खुलासा हुआ? संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध निगरानी समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस हमले के तार जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े नेटवर्क तक जाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार: रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुछ सदस्य देशों का मानना है कि यह संगठन अब भी खतरा बना हुआ है, जबकि कुछ इसे कमजोर बता रहे हैं। यही मतभेद अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा का विषय बने हुए हैं। पाकिस्तान पर क्या असर? UNSC की रिपोर्ट में नाम आने के बाद पाकिस्तान की स्थिति असहज मानी जा रही है। पाकिस्तान लंबे समय से दावा करता रहा है कि उसने आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई की है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय दस्तावेज में Jaish-e-Mohammed का जिक्र होने से पाकिस्तान पर जवाबदेही का दबाव बढ़ गया है। कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण Diplomatic Win हो सकता है। भारत के लिए क्यों अहम है यह रिपोर्ट? भारत वर्षों से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाता रहा है। ऐसे में UN Report में संगठन का नाम आना भारत के रुख को मजबूती देता है। इसके अलावा, यह रिपोर्ट सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी अहम संकेत देती है कि आतंकी संगठन अपनी रणनीति और संरचना में बदलाव कर रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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BNP

BNP vs Jamaat Clash Bangladesh Election 2026 में किसके हाथ जाएगी सत्ता?

ढाका से लेकर चिटगांव और खुलना तक आज माहौल अलग है। सड़कों पर सुरक्षा बलों की मौजूदगी है, मतदान केंद्रों के बाहर कतारें हैं और लोगों के चेहरों पर उम्मीद भी। Bangladesh Election 2026 के तहत देश में 13वें संसदीय चुनाव के लिए मतदान जारी है। करीब 12 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि पिछले कुछ वर्षों की राजनीतिक उथल-पुथल के बाद देश के भविष्य की दिशा तय करने का दिन माना जा रहा है। BNP vs Jamaat: किसके हाथ में जाएगी सत्ता? इस बार मुकाबला मुख्य रूप से Bangladesh Nationalist Party (BNP) और Jamaat-e-Islami के बीच देखा जा रहा है। देशभर में 50 से ज्यादा दलों और बड़ी संख्या में निर्दलीय उम्मीदवारों सहित लगभग दो हजार से अधिक प्रत्याशी मैदान में हैं। कई सीटों पर कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। अवामी लीग की गैरमौजूदगी पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी Awami League इस चुनाव में हिस्सा नहीं ले रही है। 2024 के छात्र आंदोलन और उसके बाद बने राजनीतिक हालात ने देश की राजनीति को नई दिशा दी। उसी पृष्ठभूमि में अंतरिम सरकार के तहत ये चुनाव कराए जा रहे हैं। “आजादी जैसा दिन” — Yunus का भावनात्मक संदेश अंतरिम सरकार के प्रमुख Muhammad Yunus ने मतदान के दिन को “आजादी जैसा दिन” बताया। उन्होंने कहा कि यह मौका है जब देश एक नया Bangladesh बनाने की ओर कदम बढ़ा सकता है। मतदान केंद्रों के बाहर लंबी कतारों में खड़े युवाओं और बुजुर्गों से बात करने पर एक बात साफ दिखती है—लोग बदलाव चाहते हैं, लेकिन स्थिरता भी। कई पहली बार वोट डालने वाले युवाओं ने इसे “फ्यूचर तय करने वाला दिन” बताया। कड़ी सुरक्षा, शांतिपूर्ण मतदान चुनाव के मद्देनज़र देशभर में सुरक्षा के व्यापक इंतज़ाम किए गए हैं। सेना और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। अधिकांश इलाकों में मतदान शांतिपूर्ण ढंग से जारी है, हालांकि कुछ जगहों से हल्की तनाव की खबरें भी आई हैं। अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक भी चुनाव प्रक्रिया पर नजर रखे हुए हैं। कब आएंगे नतीजे? मतदान समाप्त होने के बाद मतगणना शुरू होगी। शुरुआती रुझान देर रात या अगले दिन सामने आ सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव के परिणाम न केवल देश की आंतरिक राजनीति बल्कि उसकी क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय नीति को भी प्रभावित करेंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rahul Gandhi

US Trade Agreement Controversy “देश को बेच दिया” – Lok Sabha में Rahul Gandhi का बड़ा बयान

संसद के बजट सत्र में भारत-अमेरिका (India-US) Trade Deal को लेकर सियासत तेज हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “US की शर्तों पर डील करना शर्मनाक है” और सरकार ने देश के हितों से समझौता किया है। उनके इस बयान के बाद सदन में जोरदार बहस छिड़ गई। क्या है पूरा मामला? हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते (Trade Agreement) को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। Rahul Gandhi ने अपने भाषण में कहा कि यह डील भारत की आर्थिक और रणनीतिक स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बातचीत में सख्त रुख नहीं अपनाया। राहुल गांधी ने खास तौर पर ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security), कृषि क्षेत्र (Agriculture Sector) और डेटा संप्रभुता (Data Sovereignty) का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि अगर किसी समझौते से यह स्थिति बनती है कि भारत की तेल खरीद नीति या डिजिटल डेटा पर बाहरी दबाव बढ़े, तो यह देश के भविष्य के लिए चिंता की बात है। डेटा और तेल नीति पर सवाल अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने भारतीय डेटा को देश की “सबसे बड़ी संपत्ति” बताया। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में डेटा ही नई ताकत है और भारत को इसे किसी भी वैश्विक दबाव में नहीं छोड़ना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर अमेरिका यह तय करने लगे कि भारत किस देश से तेल खरीदेगा, तो यह स्वतंत्र विदेश नीति के सिद्धांत के खिलाफ होगा। टैरिफ और व्यापारिक असर विपक्ष का दावा है कि इस डील के बाद कुछ क्षेत्रों में टैरिफ (Tariff) संरचना में ऐसे बदलाव हुए हैं, जिससे भारतीय उद्योग और निर्यातकों पर असर पड़ सकता है। राहुल गांधी ने कहा कि सरकार को व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए अधिक मजबूत बातचीत करनी चाहिए थी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर विपक्षी गठबंधन सत्ता में होता, तो वह भारत के हितों को प्राथमिकता देते हुए अलग तरीके से बातचीत करता। सरकार का जवाब सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। केंद्रीय मंत्रियों का कहना है कि India-US Trade Deal भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और वैश्विक बाजार में नई संभावनाएं खोलने की दिशा में बड़ा कदम है। सरकार के मुताबिक, यह समझौता भारतीय उद्योग, निवेश और रोजगार के लिए फायदेमंद साबित होगा। क्यों अहम है यह बहस? भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रणनीतिक रिश्तों के बीच यह व्यापार समझौता महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लेकिन संसद में जिस तरह से इस पर सवाल उठे हैं, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक और आर्थिक दोनों स्तर पर चर्चा में रहेगा। आखिरकार सवाल सिर्फ एक डील का नहीं है, बल्कि उस भरोसे का है जो देश की जनता अपनी सरकार से करती है—कि हर समझौता भारत के हित में हो। यही वजह है कि लोकसभा में हुई यह बहस आम लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बन गई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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UP Budget

UP Budget 2026 ₹9,12,696 करोड़ से Industrial Development और MSME को नई रफ्तार

उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹9,12,696 करोड़ का ऐतिहासिक बजट पेश किया है। यह राज्य का अब तक का सबसे बड़ा बजट है, जिसमें Industrial Development, Infrastructure Expansion और MSME Growth को प्राथमिकता दी गई है। सरकार का स्पष्ट संदेश है—उत्तर प्रदेश को निवेश, रोजगार और उत्पादन के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाना। UP Budget केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं है, बल्कि प्रदेश के युवाओं, उद्यमियों, कारीगरों और छोटे व्यापारियों के लिए नई उम्मीदों का खाका भी है। Industrial Development: इंफ्रास्ट्रक्चर से उद्योग को ताकत इस बार बजट में सड़क, एक्सप्रेसवे, लॉजिस्टिक्स हब और औद्योगिक कॉरिडोर के विस्तार पर विशेष जोर दिया गया है। बेहतर कनेक्टिविटी का सीधा फायदा उद्योगों को मिलेगा—माल ढुलाई सस्ती होगी, समय की बचत होगी और उत्पादन लागत कम होगी। बुंदेलखंड समेत कई क्षेत्रों में औद्योगिक पार्क विकसित करने की योजना से पिछड़े इलाकों में भी निवेश का रास्ता खुलेगा। इससे स्थानीय युवाओं को अपने ही जिले में रोजगार मिलने की संभावना बढ़ेगी। Investment और Employment: निवेश से रोजगार तक सरकार ने निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारने की प्रतिबद्धता दोहराई है। बड़े पैमाने पर हुए निवेश समझौतों (MoUs) से लाखों रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। सिंगल विंडो सिस्टम को मजबूत करने और प्रक्रियाओं को आसान बनाने की पहल से उद्योग स्थापित करना पहले से सरल होगा। यह कदम खासकर नए उद्यमियों के लिए राहत भरा साबित हो सकता है। MSME Sector: छोटे उद्योग, बड़ी ताकत उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में MSME सेक्टर की भूमिका बेहद अहम है। लाखों लोग सीधे या परोक्ष रूप से इससे जुड़े हैं। बजट में इस क्षेत्र के लिए कई अहम प्रावधान किए गए हैं— 1. आसान वित्तीय सहायता छोटे और मध्यम उद्योगों को ऋण और कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है, ताकि वे विस्तार कर सकें। 2. TReDS प्लेटफॉर्म का विस्तार MSME को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए TReDS को बढ़ावा मिलेगा, जिससे कैश फ्लो की समस्या कम होगी। 3. पारंपरिक उद्योगों को सपोर्ट हथकरघा, हस्तशिल्प, टेक्सटाइल और ग्रामीण उद्योगों के लिए विशेष योजनाएं लागू की जाएंगी। इससे कारीगरों को बाजार और आधुनिक तकनीक से जोड़ने में मदद मिलेगी। 4. टेक्नोलॉजी और डिजिटल कनेक्ट छोटे उद्योगों को डिजिटल प्लेटफॉर्म और ई-मार्केट से जोड़ने की पहल से उनके उत्पाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच सकेंगे। क्यों खास है यह बजट? UP Budget केवल बड़े उद्योगपतियों के लिए नहीं, बल्कि छोटे दुकानदार, कारीगर, स्टार्टअप फाउंडर और ग्रामीण उद्यमियों के लिए भी अवसर लेकर आया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Lok Sabha

No-Confidence Motion Drama Lok Sabha में हंगामा, Kiren Rijiju ने कांग्रेस पर लगाए गंभीर आरोप

संसद का बजट सत्र इस बार सामान्य बहसों से आगे बढ़कर तीखे राजनीतिक टकराव का मंच बन गया है। Lok Sabha में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ते तनाव ने हालात को ऐसा मोड़ दे दिया है, जहाँ आरोप-प्रत्यारोप, अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) और संसदीय गरिमा पर सवाल एक साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं। स्पीकर के चैंबर में क्या हुआ? केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू (Kiren Rijiju) ने कांग्रेस सांसदों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि लगभग 20–25 कांग्रेस सांसद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला (Om Birla) के चैंबर में गए और वहां अनुचित व्यवहार किया। रिजिजू के अनुसार इस दौरान ऐसी भाषा का इस्तेमाल हुआ, जिससे स्पीकर आहत हुए। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ वरिष्ठ नेता, जिनमें प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य प्रमुख चेहरे शामिल थे, उस समय मौजूद थे। रिजिजू ने इस पूरे घटनाक्रम को “संसदीय मर्यादा के खिलाफ” बताया और कहा कि लोकतंत्र में असहमति ज़रूरी है, लेकिन गरिमा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। बोलने की अनुमति पर विवाद मामला यहीं तक सीमित नहीं रहा। रिजिजू ने आरोप लगाया कि विपक्ष के कुछ नेताओं ने यह कहा कि उन्हें सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकसभा के नियमों के अनुसार, बिना अध्यक्ष की अनुमति कोई भी सदस्य बोल नहीं सकता, चाहे वह किसी भी दल से हो। सत्ता पक्ष का कहना है कि नियमों की अनदेखी से संसद की कार्यवाही प्रभावित होती है और इससे जनता के मुद्दे पीछे छूट जाते हैं। No-Confidence Motion क्यों? दूसरी ओर, विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion against Speaker) पेश किया है। विपक्ष का आरोप है कि सदन की कार्यवाही के दौरान उन्हें पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया और कुछ मामलों में पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया गया। करीब 118 सांसदों के हस्ताक्षर के साथ यह प्रस्ताव लोकसभा सचिवालय को सौंपा गया है। हालांकि, इस पर कुछ बड़े नेताओं के हस्ताक्षर न होने को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा जारी है। BJP MPs की प्रतिक्रिया भाजपा की कुछ महिला सांसदों ने भी स्पीकर को पत्र लिखकर विपक्ष के व्यवहार पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि सदन के अंदर और बाहर विरोध का तरीका ऐसा होना चाहिए जिससे लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा हो। संसद में बढ़ता गतिरोध लगातार हो रहे हंगामे और आरोपों के कारण सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह टकराव आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है, खासकर यदि अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। लोकतंत्र की असली कसौटी संसद सिर्फ बहस का मंच नहीं, बल्कि देश की जनता की आवाज़ है। ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि क्या राजनीतिक मतभेदों को संवाद से सुलझाया जा सकता है? लोकतंत्र में विरोध और सवाल उठाना ज़रूरी है, लेकिन उसकी भाषा और तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। फिलहाल देश की निगाहें लोकसभा पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह विवाद सिर्फ बयानबाज़ी तक सीमित रहेगा या संसद की कार्यप्रणाली पर गहरा असर डालेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Vande Mataram

नई गाइडलाइन 2026 Vande Mataram पहले, Jana Gana Mana बाद में गाया जाएगा

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने वन्दे मातरम् (Vande Mataram) को लेकर नई ऑफिशियल गाइडलाइन 2026 जारी की है। अब स्कूलों और सरकारी कार्यक्रमों में वन्दे मातरम् राष्ट्रीय गीत जन‑गण‑मन (Jana Gana Mana) से पहले गाया जाएगा। गाइडलाइन के अनुसार, सभी 6 पैरे गाए जाएंगे और सुनने वाले खड़े होकर सम्मान करेंगे। सभी 6 पैरे अब होंगे ऑफिशियल इस गाइडलाइन में वन्दे मातरम् (Vande Mataram) के पूरे छह पैरों को गाने की बात कही गई है। इनमें वे पैरे भी शामिल हैं जो पहले आधिकारिक कार्यक्रमों में नहीं गाए जाते थे। प्रत्येक पैरा मातृभूमि के प्रति सम्मान और देशभक्ति की भावना को जगाता है। स्कूलों और सरकारी कार्यक्रमों में नया नियम ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्व Vande Mataram को बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था और यह गीत स्वतंत्रता संग्राम का एक प्रतीक बन गया। पहले इसे केवल दो पैरों तक सीमित रखा गया था, लेकिन अब सभी छह पैरे गाने का निर्देश है। यह बदलाव बच्चों और नागरिकों के बीच देशभक्ति और राष्ट्रीय सम्मान की भावना को और मजबूत करेगा। सरकार का उद्देश्य सरकार का लक्ष्य वन्दे मातरम् को केवल गीत के रूप में नहीं बल्कि राष्ट्रीय सम्मान का प्रतीक बनाना है। इससे बच्चों और नागरिकों में देशभक्ति की भावना को जागरूक करने में मदद मिलेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sugar

Sugar Rate Hike: त्योहारों से पहले चीनी के दाम बढ़े, Blinkit-Swiggy पर खरीदना हुआ Limited

चीनी (Sugar), जो हर घर की रसोई की रोजमर्रा की जरूरत है, इन दिनों लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है। पिछले कुछ हफ्तों में चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसी बीच Blinkit, Swiggy Instamart, BigBasket और D-Mart जैसे रिटेल और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर चीनी की खरीद को लेकर लिमिट लगाई गई है। कई जगहों पर ग्राहक एक बार में 3 से 5 किलो तक ही चीनी खरीद पा रहे हैं। यानी अगर घर में ज्यादा मात्रा में चीनी खरीदने की जरूरत है, तो एक साथ बड़ी खरीदारी करना अब आसान नहीं है। Sugar Price: एक महीने में तेजी से बढ़े दाम Sugar की कीमतों में हालिया तेजी ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब ₹48 प्रति किलो के आसपास थी, जो अगस्त में बढ़कर ₹55 से ऊपर पहुंच गई। इसके बाद कुछ बाजारों में कीमतें और ऊपर गई हैं। शहर और बाजार के हिसाब से कीमतों में अंतर जरूर है, लेकिन जिस रफ्तार से दाम बढ़े हैं, उसका असर घर के मासिक बजट पर साफ दिखाई दे रहा है। Online Grocery पर क्यों लगाई गई खरीद Limit? Blinkit और Swiggy Instamart जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर खरीदारी की लिमिट लगाए जाने के पीछे मुख्य वजह उपलब्ध स्टॉक को संतुलित रखना मानी जा रही है। त्योहारी सीजन में चीनी की मांग अचानक बढ़ जाती है। मिठाइयों से लेकर घर में बनने वाले पकवानों तक, इस दौरान चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसे में कंपनियां ज्यादा मात्रा में खरीदारी को रोककर स्टॉक को ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, यह लिमिट हर जगह एक जैसी नहीं है। कुछ स्थानों पर 5 किलो तक की खरीद की अनुमति है, जबकि कुछ जगहों पर इससे कम मात्रा की सीमा दिखाई दे रही है। चीनी महंगी होने की क्या है वजह? चीनी के दाम बढ़ने के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। घरेलू उत्पादन में कमी, मौसम से जुड़ी परेशानियां, बढ़ती मांग और बाजार में स्टॉक को लेकर गतिविधियां कीमतों पर दबाव बना रही हैं। त्योहारी सीजन भी इस समय एक बड़ा फैक्टर है। रक्षाबंधन के बाद अब आने वाले त्योहारों में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने की उम्मीद है। इसका सीधा असर चीनी की खपत पर पड़ सकता है। सरकार ने Duty-Free Sugar Import को दी मंजूरी बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने और घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के Duty-Free Import की अनुमति दी है। सरकार का लक्ष्य बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों पर दबाव कम करना है। इसके अलावा बड़े थोक खरीदारों के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा में भी बदलाव किया गया है। इससे बाजार में जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करने की गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है। आम लोगों के लिए क्या मतलब? फिलहाल इसका सबसे सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो महीने का राशन एक साथ खरीदते हैं। जहां दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खरीद सीमा लागू है, वहां लोगों को जरूरत के हिसाब से छोटी मात्रा में चीनी खरीदनी पड़ सकती है। दूसरी तरफ, सरकार की ओर से सप्लाई बढ़ाने के कदमों के बाद बाजार में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। अगर नई चीनी समय पर बाजार में पहुंचती है और त्योहारी मांग के मुताबिक स्टॉक उपलब्ध रहता है, तो कीमतों में आगे राहत मिल सकती है। Sugar Price पर आगे रहेगी नजर चीनी के बढ़ते दाम इस समय सिर्फ घरेलू बजट का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि आने वाले त्योहारी सीजन के लिए भी अहम हैं। सरकार, मिलों और रिटेल कंपनियों के फैसलों पर अब बाजार की नजर रहेगी। फिलहाल ग्राहकों के लिए बेहतर यही है कि जरूरत के मुताबिक ही खरीदारी करें और अलग-अलग दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कीमतों की तुलना कर लें। आने वाले दिनों में सप्लाई की स्थिति साफ होने के साथ चीनी के दाम में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
Gold-Silver

Gold-Silver Price: त्योहार से पहले मिली राहत, सोना-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट

Gold-Silver Price Today: रक्षाबंधन की खरीदारी के बीच सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए बाजार से राहत वाली खबर आई है। 27 अगस्त 2026 को सोने और चांदी दोनों के भाव में गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम सस्ता होकर ₹1,58,477 पर आ गया। वहीं, 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 घटकर करीब ₹2,40,168 रह गया। त्योहार से ठीक पहले कीमतों में आई इस कमी से उन लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है, जो राखी के मौके पर बहन या परिवार के लिए सोने-चांदी की ज्वेलरी खरीदने का मन बना रहे हैं। Gold Price Today: सोने के भाव में ₹2,860 की गिरावट 27 अगस्त को 24 कैरेट सोने की कीमत में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली। IBJA आधारित आंकड़ों के अनुसार, सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम टूटकर ₹1,58,477 पर पहुंच गया। वहीं, 23 कैरेट सोना करीब ₹1,57,842, 22 कैरेट सोना लगभग ₹1,45,165 और 18 कैरेट सोना करीब ₹1,18,858 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर रहा। हालांकि, यहां एक बात ध्यान रखना जरूरी है कि शहर और ज्वेलर के हिसाब से Gold Rate थोड़ा अलग हो सकता है। ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और दूसरे शुल्क भी जुड़ते हैं। Silver Price Today: चांदी भी हुई ₹2,791 सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट आई है। 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 कम होकर करीब ₹2,40,168 पर आ गया। चांदी में पिछले दिनों तेजी देखने को मिली थी, इसलिए मौजूदा गिरावट के बावजूद इसका भाव काफी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में चांदी की मांग बढ़ने से इसकी कीमत पर भी असर पड़ सकता है। Raksha Bandhan से पहले क्यों खास है Gold-Silver Price? रक्षाबंधन के मौके पर लोग सिर्फ राखी और मिठाई ही नहीं खरीदते, बल्कि कई परिवार इस दिन सोने या चांदी की छोटी ज्वेलरी खरीदना भी पसंद करते हैं। ऐसे में त्योहार से एक दिन पहले Gold और Silver के दाम में आई गिरावट खरीदारों के लिए अच्छी खबर मानी जा रही है। अगर आप भी खरीदारी की तैयारी कर रहे हैं तो बाजार में जाने से पहले अपने शहर का ताजा रेट जरूर देख लें। ऑनलाइन दिखने वाला IBJA या बुलियन रेट और ज्वेलरी शॉप का अंतिम बिल एक जैसा होना जरूरी नहीं है। सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान सोने की ज्वेलरी खरीदते समय केवल Gold Rate देखना काफी नहीं है। बिल बनते समय मेकिंग चार्ज, GST और अन्य शुल्क जुड़ सकते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले ज्वेलर से पूरी कीमत का ब्रेकअप मांगना बेहतर रहेगा। साथ ही, सोने की शुद्धता के लिए BIS Hallmark जरूर जांचें। इससे आपको खरीदे जा रहे सोने की शुद्धता के बारे में भरोसा मिलता है। आगे क्या हो सकता है Gold और Silver का भाव? सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, ब्याज दरों की उम्मीद और निवेशकों की खरीदारी जैसे कई फैक्टर कीमती धातुओं के भाव को प्रभावित करते हैं। इसलिए आज आई गिरावट को देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि आने वाले दिनों में कीमतें लगातार नीचे जाएंगी। बाजार की चाल बदलने में ज्यादा समय नहीं लगता। Gold-Silver Price Today का सीधा अपडेट रक्षाबंधन से पहले 24 कैरेट Gold करीब ₹2,860 सस्ता होकर ₹1,58,477 प्रति 10 ग्राम और Silver करीब ₹2,791 गिरकर ₹2,40,168 प्रति किलो पर आ गई है। अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने जा रहे हैं, तो अंतिम खरीदारी से पहले अपने स्थानीय बाजार का लेटेस्ट रेट जरूर जांचें।
Raksha Bandhan

Raksha Bandhan 2026: राखी बांधने से पहले जान लें Bhadra का समय, ये है शुभ Muhurat

Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन के रिश्ते में प्यार, अपनापन और थोड़ी-सी नोकझोंक हमेशा बनी रहती है। इन्हीं खूबसूरत रिश्तों को सेलिब्रेट करने वाला रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। राखी को लेकर इस बार एक सवाल काफी लोगों के मन में है—27 अगस्त या 28 अगस्त, आखिर किस दिन भाई की कलाई पर राखी बांधना शुभ रहेगा? पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। Raksha Bandhan 2026 Date: 27 या 28 अगस्त? रक्षाबंधन सावन मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे के बाद शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे तक रहेगी। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए इसी दिन रक्षाबंधन मनाने की परंपरा रहेगी। यानी बहनें 28 अगस्त को भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। Rakhi Shubh Muhurat 2026: इस समय बांधें राखी 28 अगस्त को राखी बांधने के लिए सुबह का समय शुभ माना जा रहा है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार सुबह करीब 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का समय बताया गया है। हालांकि, शुभ मुहूर्त में शहर के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए अगर आप किसी खास शहर में हैं, तो वहां के पंचांग से समय जरूर मिला लें। Bhadra Kaal: इस बार नहीं होगी बड़ी परेशानी रक्षाबंधन पर भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता। यही वजह है कि हर साल राखी बांधने से पहले लोग भद्रा समाप्त होने का इंतजार करते हैं। इस बार राहत की बात यह है कि 28 अगस्त को राखी बांधने के प्रमुख समय में भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। ऐसे में बहनों को राखी बांधने के लिए भद्रा खत्म होने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। Raksha Bandhan 2026: एक नजर में पूरी जानकारी जानकारी विवरण रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार पर्व सावन पूर्णिमा पूर्णिमा शुरुआत 27 अगस्त की सुबह पूर्णिमा समाप्त 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे राखी बांधने का शुभ समय सुबह करीब 5:57 से 9:48 बजे तक भद्रा 28 अगस्त के प्रमुख राखी मुहूर्त में नहीं Rakhi बांधने की पूजा विधि रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करके भगवान का ध्यान करें और पूजा की तैयारी करें। राखी की थाली में रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, फूल, मिठाई और राखी रखें। भाई को आसन पर बैठाकर पहले तिलक लगाएं। इसके बाद अक्षत लगाकर आरती करें और शुभ मुहूर्त में उसकी कलाई पर राखी बांधें। फिर मिठाई खिलाकर भाई के सुखी और खुशहाल जीवन की कामना करें। भाई भी बहन को प्यार और सम्मान के साथ उपहार देता है और हर परिस्थिति में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प करता है। Raksha Bandhan का असली मतलब क्या है? राखी का धागा देखने में भले ही छोटा हो, लेकिन इसके पीछे छिपी भावना बहुत बड़ी है। बचपन में एक-दूसरे से लड़ने वाले भाई-बहन जब बड़े होते हैं तो यही रिश्ता सबसे मजबूत सहारा बन जाता है। रक्षाबंधन इसी भरोसे और अपनापन को फिर से महसूस करने का दिन है। इसलिए इस बार राखी बांधते समय सिर्फ मुहूर्त ही नहीं, बल्कि उस रिश्ते की मिठास को भी याद रखें, जो जिंदगी के हर पड़ाव पर साथ चलती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Kanpur

Kanpur Plane Crash: अचानक नीचे गिरा Training Plane, दो पायलटों की मौत

उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur) से गुरुवार को एक बेहद दुखद खबर सामने आई। गंगा बैराज के पास नत्थूपुरवा गांव के नजदीक एक Twin-Engine Training Aircraft खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में सवार इंस्ट्रक्टर पायलट और ट्रेनी पायलट की मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने इलाके को घेरकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। Training Flight के दौरान हुआ हादसा मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विमान ट्रेनिंग उड़ान पर था और इसी दौरान हादसे का शिकार हो गया। यह चार सीटों वाला ट्विन-इंजन विमान था। शुरुआती जानकारी में बताया गया कि विमान नीचे गिरने से पहले आसपास के लोगों ने तेज आवाज सुनी थी। हालांकि, उस आवाज की वजह क्या थी, इसे लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि विमान गंगा बैराज के करीब नत्थूपुरवा गांव के पास खुले खेत में गिरा। हादसा आबादी वाले इलाके से कुछ दूरी पर हुआ, जिसके बाद स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। हादसे के बाद मची अफरा-तफरी विमान के खेत में गिरने की सूचना मिलते ही पुलिस और इमरजेंसी टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। दुर्घटनाग्रस्त विमान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था और उसका मलबा खेत में बिखरा मिला। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित किया और दोनों पायलटों को मलबे से बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। शुरुआती रिपोर्टों में एक पायलट की मौत और दूसरे के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई थी। बाद में पुलिस अधिकारियों के हवाले से दोनों पायलटों की मौत की पुष्टि हुई। Crash की असली वजह अभी सामने नहीं आई कानपुर Plane Crash की वजह फिलहाल साफ नहीं है। शुरुआती स्तर पर विमान के अचानक नियंत्रण खोने और नीचे गिरने की बात सामने आई है, लेकिन तकनीकी खराबी, इंजन से जुड़ी समस्या या किसी अन्य कारण की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अधिकारियों की ओर से दुर्घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। विमान के मलबे, उड़ान से जुड़ी जानकारी और घटनास्थल से मिले सबूतों की जांच के बाद ही Crash की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी। Aviation Safety पर फिर उठे सवाल कानपुर में हुआ यह हादसा Flight Training के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल खड़े करता है। हालांकि, अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसा किस वजह से हुआ और क्या इसके पीछे कोई तकनीकी या संचालन संबंधी कारण था। फिलहाल प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर मौजूद हैं और मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। कानपुर विमान हादसे से जुड़ी नई जानकारी जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी। Kanpur Plane Crash Latest Update: गंगा बैराज के पास Training Aircraft के क्रैश होने से दो पायलटों की मौत ने इलाके में शोक का माहौल पैदा कर दिया है। हादसे की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही साफ होगी।
Share Market

Share Market Today: Sensex 77,250 के करीब, Nifty भी टूटा; जानें बाजार में क्यों आई गिरावट

भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) में गुरुवार, 27 अगस्त को कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty बढ़त के साथ खुले, लेकिन कुछ ही देर बाद बाजार की चाल बदल गई। बिकवाली बढ़ने से दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में पहुंच गए। सुबह 10:30 बजे Sensex 123.89 अंक की गिरावट के साथ 77,349.05 पर था, जबकि Nifty 24.60 अंक टूटकर 24,183.15 पर कारोबार कर रहा था। Sensex-Nifty पर बढ़ा दबाव गुरुवार की शुरुआत बाजार के लिए सकारात्मक रही। Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से निवेशकों को कुछ राहत मिली, लेकिन यह बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं पाई। Nifty 24,200 के स्तर के नीचे चला गया, वहीं Sensex भी शुरुआती बढ़त गंवाकर कमजोर हो गया। इससे पहले सुबह 10:13 बजे Reuters के आंकड़ों में Sensex 77,379.50 और Nifty 24,191.85 पर था। यानी उस समय दोनों इंडेक्स में हल्की गिरावट दर्ज की जा रही थी। FMCG और Media Shares में बिकवाली सेक्टोरल कारोबार की बात करें तो FMCG शेयरों पर दबाव नजर आया। शुरुआती कारोबार में Nifty FMCG इंडेक्स भी लाल निशान में था। इसके साथ ही Media शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। सुबह 10:30 बजे Nifty Media करीब 0.60 फीसदी नीचे 1,601.30 पर कारोबार कर रहा था। Media इंडेक्स इससे पहले लगातार दो कारोबारी सत्रों में बढ़त दर्ज कर चुका था। ऐसे में आज की गिरावट को कुछ हद तक मुनाफावसूली से भी जोड़कर देखा जा रहा है। HDFC Bank बना बाजार पर दबाव का बड़ा कारण आज बाजार में HDFC Bank का प्रदर्शन भी निवेशकों के रडार पर रहा। शेयर में करीब 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। Reuters के मुताबिक, अमेरिका में बैंक और उसके दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ दायर एक securities lawsuit की खबर के बाद शेयर पर दबाव बढ़ा। Upstox के अनुसार, HDFC Bank में बिकवाली के चलते Sensex दिन के ऊपरी स्तर से करीब 300 अंक नीचे आया, जबकि Nifty 24,200 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे फिसल गया। Global Market से मिले-जुले संकेत भारतीय बाजार को एक तरफ Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से सहारा मिला। Brent crude करीब 87.4 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया था। ईरान और ओमान के बीच Strait of Hormuz को लेकर बातचीत आगे बढ़ने की खबरों से तेल आपूर्ति को लेकर चिंता कुछ कम हुई है। दूसरी ओर, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों को लेकर बनी चिंता ने निवेशकों को थोड़ा सतर्क रखा। यही वजह रही कि एशियाई बाजारों में मजबूती के बावजूद भारतीय बाजार में तेजी टिक नहीं सकी। निवेशकों की नजर अब बाजार की अगली चाल पर फिलहाल घरेलू बाजार में तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। एक तरफ कच्चे तेल में नरमी और मजबूत ग्लोबल टेक्नोलॉजी संकेत सकारात्मक हैं, तो दूसरी तरफ HDFC Bank जैसे बड़े शेयरों में कमजोरी और सेक्टोरल बिकवाली बाजार पर दबाव बना रही है। ऐसे माहौल में Sensex और Nifty की आगे की दिशा, 24,200 के आसपास Nifty की चाल और प्रमुख सेक्टर्स में खरीदारी-बिकवाली पर निवेशकों की नजर रहेगी। बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय लेना बेहतर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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