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Mathura Yamuna Expressway पर भीषण हादसा: कोहरे में 8 बसें और 3 कारें टकराईं

Mathura Yamuna Expressway पर भीषण हादसा: कोहरे में 8 बसें और 3 कारें टकराईं

घने कोहरे के कारण Mathura Yamuna Expressway पर 8 बसें और 3 कारें आपस में टकरा गईं। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कई वाहनों में आग लग गई और 13 लोगों की मौके पर ही जलकर मौत हो गई। हादसे के बाद एक्सप्रेस-वे पर चीख-पुकार मच गई। जले हुए शवों की हालत इतनी खराब थी कि उन्हें 17 पॉलिथीन में भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेजना पड़ा। इस दर्दनाक दुर्घटना में करीब 70 लोग घायल हुए हैं, जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस की टीमें मौके पर पहुंचीं। आग पर काबू पाने और घायलों को बाहर निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। घायलों को मथुरा और आगरा के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कोहरा इतना घना था कि आगे कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। एक वाहन के अचानक ब्रेक लगाने से पीछे से आ रहे वाहन आपस में भिड़ते चले गए और हादसा बड़ा रूप ले गया। प्रशासन ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं और मृतकों के परिजनों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। यह हादसा एक बार फिर कोहरे में तेज रफ्तार और लापरवाही से गाड़ी चलाने के खतरे की याद दिलाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरे Dr Ram Vilas Vedanti का निधन

राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरे Dr Ram Vilas Vedanti का निधन

राम मंदिर आंदोलन से जुड़े वरिष्ठ संत और विचारक Dr Ram Vilas Vedanti  का निधन हो गया। उनके निधन से राम मंदिर आंदोलन से जुड़े लोगों और समर्थकों में शोक की लहर है। डॉ. वेदांती लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। बताया गया कि जब उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ी, तब उन्हें बेहतर इलाज के लिए एयर एंबुलेंस से रीवा लाने की तैयारी की गई। एयर एंबुलेंस रीवा तक तो पहुंच गई, लेकिन घने कोहरे के कारण लैंड नहीं कर पाई। इस वजह से समय पर इलाज संभव नहीं हो सका और उनका निधन हो गया। डॉ. रामविलास वेदांती राम मंदिर आंदोलन के दौरान एक मुखर और समर्पित संत के रूप में जाने जाते थे। उन्होंने जीवनभर राम मंदिर के पक्ष में आवाज बुलंद की और समाज में धार्मिक चेतना जगाने का कार्य किया। उनके निधन को राम मंदिर आंदोलन के एक युग का अंत माना जा रहा है। उनके समर्थक और अनुयायी उन्हें एक सरल, स्पष्ट वक्ता और रामभक्त संत के रूप में याद कर रहे हैं। देशभर से संत समाज और राजनीतिक-सामाजिक संगठनों ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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BJP

Assembly Elections 2026 BJP ने Piyush Goyal और Baijayant Panda को बनाया चुनाव प्रभारी

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आगामी Assembly Elections 2026 को लेकर अपनी तैयारी तेज कर दी है। पार्टी ने तमिलनाडु और असम विधानसभा चुनावों के लिए महत्वपूर्ण चुनाव प्रभारी (Election In-Charge) नियुक्त किए हैं, जो राज्य में अभियान और संगठनात्मक रणनीति की जिम्मेदारी संभालेंगे। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री Piyush Goyal को तमिलनाडु विधानसभा चुनाव का मुख्य प्रभारी (Chief Election In-Charge) नियुक्त किया है। उन्हें पार्टी के चुनाव अभियान की योजना बनाने और स्थानीय संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी दी गई है।सह-प्रभारी के रूप में Arjun Ram Meghwal और Murlidhar Mohol भी नियुक्त किए गए हैं।तमिलनाडु में लंबे समय से द्रविड़ीय पार्टियों का दबदबा रहा है, इसलिए BJP के लिए यह चुनौतीपूर्ण राज्य है। इस कदम से यह संकेत मिलता है कि पार्टी यहाँ अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी तैयारी में है। असम विधानसभा चुनाव 2026 असम के लिए BJP ने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और सांसद Baijayant Panda को मुख्य चुनाव प्रभारी बनाया है। वे राज्य में पार्टी के चुनाव अभियान और संगठनात्मक गतिविधियों का नेतृत्व करेंगे।सह-प्रभारी के रूप में Sunil Kumar Sharma और Darshana Jardosh को भी जिम्मेदारी दी गई है।हालांकि असम में BJP सत्ता में है, लेकिन विपक्षी दलों की चुनौती लगातार बढ़ रही है। Baijayant Panda की नियुक्ति से यह स्पष्ट होता है कि पार्टी चुनावी रणनीति को और मजबूत करने का प्रयास कर रही है। क्यों महत्वपूर्ण हैं ये नियुक्तियां BJP की यह रणनीति बताती है कि पार्टी आगामी चुनावों के लिए संगठन और रणनीति दोनों को लेकर गंभीर है। इन नियुक्तियों से साफ है कि BJP अपने प्रमुख नेताओं के अनुभव और नेतृत्व का फायदा उठाकर चुनावों में पूरी ताकत के साथ उतरना चाहती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Congress

Congress Rally में पीएम मोदी के खिलाफ विवादित नारा “Modi Your Grave Will Be Dug”

दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित Congress Rally में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) के खिलाफ विवादित नारे लगे। इस रैली में सबसे ज्यादा चर्चा में रहा नारा: “मोदी तेरी कब्र खुदेगी, आज नहीं तो कल खुदेगी”(“Modi, your grave will be dug, if not today then tomorrow”)। वीडियो फुटेज में यह नारा कई बार दोहराया गया, जिसमें स्थानीय कांग्रेस नेता मंजु लता मीणा की भी मौजूदगी देखी गई। BJP की तीखी प्रतिक्रिया (BJP Reaction) भाजपा नेताओं और मंत्रियों ने इस नारे की कड़ी निंदा की। उनका कहना है कि यह प्रधानमंत्री के प्रति अपमानजनक और अस्वीकार्य है। बीजेपी ने कांग्रेस नेतृत्व, विशेषकर सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे, से माफी मांगने की मांग की। इस विवाद के कारण संसद के लोकसभा और राज्यसभा दोनों में हंगामा हुआ और सत्र अस्थायी रूप से स्थगित करना पड़ा। Congress की जवाबी प्रतिक्रिया (Congress Response) स्थानीय कांग्रेस नेता मंजु लता मीणा ने अपने बयान पर कायम रहने की पुष्टि की। उनका कहना था कि यह नारा “vote chori” और चुनाव में कथित अनियमितताओं के विरोध में लगाया गया था। उन्होंने कोई खेद नहीं व्यक्त किया और इसे राजनीतिक विरोध का हिस्सा बताया। कांग्रेस का कहना है कि रैली का उद्देश्य जनता में चुनावी निष्पक्षता और वोट की सुरक्षा के मुद्दे को उजागर करना था। व्यापक परिप्रेक्ष्य (Political Context) यह रैली 2025 में कांग्रेस की राजनीतिक मुहिम का हिस्सा थी, जहां पार्टी लगातार election irregularities और vote manipulation के खिलाफ आवाज उठा रही है। इस विवाद ने राजनीतिक दलों के बीच तनाव बढ़ाया और संसद में गंभीर बहस का विषय बन गया। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi NCR

Delhi NCR Air Pollution Crisis दिल्ली-NCR में अदृश्य महामारी, जहरीली हवा से घुटती सांसें

सुबह की शुरुआत अगर साफ हवा और खुली सांस से हो, तो दिन अपने आप बेहतर लगता है। लेकिन Delhi NCR में आज हालात बिल्कुल उलट हैं। यहां लोग सुबह उठते ही सबसे पहले AQI चेक करते हैं—क्योंकि बाहर की हवा अब भरोसे के लायक नहीं रही। सर्दियों के साथ लौट आई है वही पुरानी समस्या, जिसे अब लोग “अदृश्य महामारी (Invisible Epidemic)” कहने लगे हैं—Air Pollution। Delhi NCR AQI Today: जब हवा बन जाए ज़हर दिसंबर में Delhi NCR के कई इलाकों में AQI 450 से 500 तक पहुंच चुका है। यह स्तर ‘Severe’ और ‘Hazardous’ माना जाता है।घना smog और fog इतना बढ़ गया है कि: सरकार को मजबूरन GRAP Stage-4 जैसे सख्त कदम उठाने पड़े, लेकिन सवाल यह है—क्या ये कदम काफी हैं? Why Delhi Pollution Gets Worse in Winter? हर साल यही कहानी दोहराई जाती है। सर्दियों में temperature inversion की वजह से जहरीली हवा ऊपर नहीं उठ पाती और शहर के ऊपर एक मोटी परत बनाकर अटक जाती है।इसके साथ जुड़ जाते हैं: इन सबका असर एक साथ पड़ता है—और दिल्ली-NCR गैस चैंबर जैसा महसूस होने लगता है। PM2.5: दिखाई नहीं देता, लेकिन नुकसान गहरा प्रदूषण का सबसे खतरनाक हिस्सा है PM2.5। ये इतने बारीक कण होते हैं कि: डॉक्टर बताते हैं कि यही वजह है कि आज कम उम्र में अस्थमा, एलर्जी, हार्ट प्रॉब्लम और सांस की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। Health Impact: कोविड से भी ज्यादा खामोश खतरा कोविड ने डराया था, लेकिन एयर पॉल्यूशन रोज़-रोज़ शरीर को नुकसान पहुंचा रहा है—बिना शोर के।लंबे समय तक जहरीली हवा में रहने से: यही कारण है कि कई हेल्थ एक्सपर्ट इसे Silent Killer कहते हैं। रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर असर आज Delhi NCR में: यह सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं है, यह हर उस इंसान की कहानी है जो यहां सांस ले रहा है। Delhi NCR का एयर पॉल्यूशन अब मौसमी परेशानी नहीं रहा। यह एक गंभीर Health Emergency बन चुका है।जब तक साफ हवा को सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा मानते रहेंगे, तब तक हालात नहीं बदलेंगे। इसे जीने के अधिकार से जोड़कर देखना होगा। क्योंकि साफ हवा कोई सुविधा नहीं—यह हर इंसान की बुनियादी ज़रूरत है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मोदी सरकार MGNREGA को खत्म करने की तैयारी में? ‘विकसित भारत–जी राम जी’ बिल को लेकर सियासी हलचल तेज

मोदी सरकार MGNREGA को खत्म करने की तैयारी में? ‘विकसित भारत–जी राम जी’ बिल को लेकर सियासी हलचल तेज

केंद्र की मोदी सरकार एक बार फिर मनरेगा (MGNREGA) को लेकर विपक्ष के निशाने पर है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार मनरेगा को धीरे-धीरे खत्म करने की तैयारी कर रही है। संसद में ‘विकसित भारत–जी राम जी’ नाम से एक नया बिल लाए जाने की चर्चा के बाद यह बहस और तेज हो गई है। विपक्षी सांसदों का कहना है कि इस बिल की कॉपी संसद में सांसदों को बांटी गई है, जिससे यह संकेत मिलते हैं कि सरकार मनरेगा की जगह कोई नई योजना लाने की सोच रही है। विपक्ष का दावा है कि अगर ऐसा हुआ तो इसका सीधा असर ग्रामीण गरीबों, मजदूरों और जरूरतमंद परिवारों पर पड़ेगा। मनरेगा की शुरुआत साल 2005 में हुई थी। इस योजना का मकसद गांवों में रहने वाले लोगों को साल में कम से कम 100 दिन का रोजगार देना था। करोड़ों परिवारों के लिए यह योजना मुश्किल समय में सहारा बनी है। खेतों में काम न मिलने पर मनरेगा मजदूरी कई परिवारों के लिए रोजी-रोटी का जरिया रही है। हालांकि सरकार की ओर से अब तक मनरेगा खत्म करने को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। सरकार पहले भी कह चुकी है कि वह योजनाओं को ज्यादा प्रभावी और परिणामकारी बनाने पर काम कर रही है। वहीं विपक्ष इसे गरीब विरोधी कदम बता रहा है। अब देखना यह होगा कि सरकार मनरेगा को लेकर क्या फैसला लेती है और ‘विकसित भारत–जी राम जी’ बिल का असली मकसद क्या है। फिलहाल यह मुद्दा संसद से लेकर सियासत तक चर्चा का केंद्र बना हुआ है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मेसी 22 मिनट में स्टेडियम से निकले;फैंस नाराज, कुर्सी-बोतलें फेंकीं:कोलकाता में एक झलक के लिए लोगों ने ₹12 हजार तक दिए

अर्जेंटीना के दिग्गज फुटबॉलर लियोनल मेसी करीब 14 साल बाद भारत पहुंचे हैं। उनके साथ उरुग्वे के स्टार स्ट्राइकर लुईस सुआरेज और अर्जेंटीना के मिडफील्डर रोड्रिगो डी पॉल भी भारत आए हैं। तीनों खिलाड़ी देर रात करीब 2:30 बजे कोलकाता एयरपोर्ट पर उतरे, जहां फैंस ने उनका जोरदार स्वागत किया। आज सुबह 11 बजे कोलकाता में 70 फीट ऊंचे मेसी स्टैच्यू का वर्चुअल उद्घाटन किया गया। इस खास मौके पर बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान भी मौजूद रहे। कार्यक्रम के बाद मेसी, सुआरेज और डी पॉल सॉल्ट लेक स्टेडियम पहुंचे, लेकिन वहां महज करीब 22 मिनट रुकने के बाद ही रवाना हो गए। इससे नाराज़ फैंस ने स्टेडियम में हंगामा किया और कुछ जगहों पर बोतलें व कुर्सियां फेंके जाने की खबर सामने आई। 3 दिन में 4 शहरों का दौरा लियोनल मेसी UNICEF (United Nations Children’s Fund) के ब्रांड एम्बेसडर हैं। इसी के तहत वे भारत में ‘GOAT India Tour’ पर आए हैं। यह दौरा 15 दिसंबर तक चलेगा, जिसमें वे 3 दिन में 4 शहरों—कोलकाता के अलावा हैदराबाद, मुंबई और नई दिल्ली—का दौरा करेंगे। कोलकाता में मेसी की पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान सौरव गांगुली से मुलाकात प्रस्तावित है। वहीं, मुंबई में उनकी सचिन तेंदुलकर से भी मुलाकात तय मानी जा रही है। 15 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भेंट के साथ मेसी का भारत दौरा समाप्त होगा। टिकटों की कीमत पर विवाद, राज्यपाल ने मांगी रिपोर्ट इस इवेंट से पहले पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी. वी. आनंद बोस ने तैयारियों को लेकर राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की थी। फैंस की ओर से लोक भवन में शिकायत दी गई थी कि टिकटों की कीमत बहुत ज्यादा है, जिससे आम लोग अपने पसंदीदा खिलाड़ी को देखने से वंचित रह जाएंगे। राज्यपाल को इस मामले में कई फोन कॉल और ई-मेल भी मिले थे। इन्हीं शिकायतों के बाद राज्यपाल ने पूरे मामले पर रिपोर्ट मांगी। 👉 More updates, breaking news aur exclusive details ke liye Deshharpal site visit karein deshharpal.com
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Shivraj Patil

Shivraj Patil Passes Away पूर्व गृह मंत्री शिवराज पाटिल का निधन

भारत की राजनीति के संयमित और सादगी-भरे चेहरों में से एक, पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल (Shivraj Patil) अब हमारे बीच नहीं रहे। 12 दिसंबर 2025 की सुबह, महाराष्ट्र के लातूर स्थित उनके आवास पर उनका 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। पिछले कुछ समय से वे अस्वस्थ थे और परिवार के साथ ही रह रहे थे। उनके निधन के साथ भारतीय राजनीति ने एक ऐसा नेता खो दिया, जिसकी पहचान शांति, मर्यादा और धैर्य थी। पाटिल अपने पीछे बेटे शैलेश पाटिल, बहू अर्चना और दो पोतियों को छोड़ गए। Shivraj Patil: एक विनम्र नेता की लंबी राजनीतिक यात्र Shivraj Patil का करियर लगभग चार दशकों में फैला रहा।उनका सफर एक नगरपालिका अध्यक्ष के रूप में शुरू हुआ, फिर वे महाराष्ट्र विधानसभा पहुंचे और उसके बाद राष्ट्रीय राजनीति के शीर्ष पर पहुंच गए। मुख्य पद जिनसे वे देश की राजनीति में पहचान बने: उनकी छवि एक ऐसे नेता की थी जो कानून, संविधान और संसदीय परंपराओं के प्रति बेहद संवेदनशील थे। संसद में उनकी भाषा और संयम आज भी उदाहरण के रूप में याद किया जाता है। 26/11 के बाद दिया था नैतिक जिम्मेदारी का उदाहरण गृह मंत्री के रूप में पाटिल का कार्यकाल चुनौतियों भरा रहा।26/11 मुंबई आतंकी हमले के बाद देशभर में सुरक्षा पर उठे सवालों के बीच उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया। उस समय उनका निर्णय कई लोगों के लिए राजनीतिक ईमानदारी का प्रतीक बना। देशभर से श्रद्धांजलि, PM–President ने जताया शोक उनके निधन पर राजनीतिक जगत में गहरा दुख व्यक्त किया गया। एक सादा और शांत व्यक्तित्व – जनता के लिए समर्पित जीवन Shivraj Patil को उनके समर्थक हमेशा याद रखेंगे—उनकी सादगी,उनकी शांत भाषा,और जनता के प्रति उनका कर्तव्यबोध। वे उन नेताओं में से थे जो कम बोलते थे, लेकिन जिस काम को हाथ में लेते थे, उसे पूरी गंभीरता से निभाते थे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Goa

Goa Club Tragedy एक ही Delhi पते से चल रहीं 42 कंपनियाँ, जांच में बड़ा खुलासा

गोवा (Goa) के लोकप्रिय नाइटलाइफ़ सर्किट को हिला देने वाली Goa Nightclub Fire Tragedy के बाद अब जांच कई नए मोड़ ले चुकी है। 6 दिसंबर 2025 को “Birch by Romeo Lane” क्लब में लगी भीषण आग में दर्जनों लोगों की जान चली गई। हादसे की गूंज कम नहीं हुई थी कि जांच एजेंसियों ने क्लब के सह–मालिक सौरभ और गौरव लूथरा की कारोबारी दुनिया में एक चौंकाने वाला नेटवर्क खोज निकाला—42 कंपनियों का विशाल सेट-अप, वो भी एक ही दिल्ली पते पर रजिस्टर्ड। यह खुलासा न सिर्फ जांच को नई दिशा देता है, बल्कि लोगों में यह सवाल भी बढ़ा रहा है कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर एक ही पते से कंपनियाँ क्यों चल रही थीं। एक ही Delhi Address पर 42 Companies—जांच में बड़ा Surprise जांच रिकॉर्ड दिखाते हैं कि लूथरा बंधुओं से जुड़ी सभी कंपनियाँ 2590, Ground Floor, Hudson Line, Delhi पर रजिस्टर हैं।इतनी बड़ी संख्या में कंपनियों का एक ही पते पर दर्ज होना बेहद असामान्य माना जाता है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थिति आमतौर पर Shell Companies, paper-based entities या layered business structures की ओर इशारा करती है। इन कंपनियों में कई नाम हॉस्पिटैलिटी और फूड सेक्टर से प्रेरित लगते हैं—जैसे Being GS Hospitality, G3S Foodshala, Azizaa Food Studio LLP आदि।लेकिन कई फर्मों में ऑफिस, टीम या बिज़नेस एक्टिविटी के ठोस सबूत न मिलने से एजेंसियाँ इनके वास्तविक उद्देश्य को लेकर सतर्क हुई हैं। जांच एजेंसियों को Shell Company Pattern का शक कई रिपोर्टों के अनुसार शुरुआती जांच में निम्न बातें सामने आई हैं: हालाँकि यह सब अभी जांच का हिस्सा है। किसी भी वित्तीय गड़बड़ी या अवैध गतिविधि की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए सभी निष्कर्ष फिलहाल प्रारंभिक संकेत माने जा रहे हैं। थाईलैंड में हिरासत से बढ़ा मामला, भारत कर रहा प्रत्यर्पण की तैयारी हादसे के बाद लूथरा बंधु भारत से बाहर चले गए थे। इंटरपोल और भारतीय एजेंसियों की कार्रवाई के बाद दोनों को Phuket, Thailand में हिरासत में लिया गया।अब भारत सरकार उनकी कानूनी वापसी (extradition) की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है ताकि जांच पूरी की जा सके। आग, अव्यवस्थाएँ और अब आर्थिक जांच—कहानी हुई और जटिल क्लब में हुई मौतों के बाद सुरक्षा मानकों, अवैध निर्माण और लाइसेंस संबंधित चूक की जांच पहले से ही जारी थी।लेकिन 42 कंपनियों के इस नेटवर्क के सामने आने से अब पूरा मामला business background checks, financial scrutiny और corporate compliance के कोण से भी देखा जा रहा है। जांच एजेंसियाँ यह स्पष्ट करना चाहती हैं कि: आगे की राह अधिकारियों ने सभी कंपनियों के documents, transactions, partners, GST records, audit reports और operation trail की जांच शुरू कर दी है।जैसे-जैसे जानकारी सामने आएगी, यह समझा जा सकेगा कि यह पूरी संरचना एक सामान्य कारोबारी नेटवर्क था या कुछ और जटिल। फिलहाल जनता, उद्योग जगत और गोवा टूरिज़्म सभी की नज़रें इस जांच पर टिकी हैं—क्योंकि यह मामला केवल एक हादसा नहीं, बल्कि भारत के nightlife sector में safety और transparency पर बड़ा सवाल भी खड़ा करता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Modi

Modi-Putin Car Photo अमेरिका में कांग्रेस में क्यों बनी चर्चा?

वाशिंगटन: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Modi) और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की हालिया कार यात्रा की तस्वीर ने अमेरिकी कांग्रेस में हलचल मचा दी। डेमोक्रेट सांसद सिडनी कामलाजर-डोव ने इस फोटो को “हजार शब्दों के बराबर पोस्टर” बताते हुए चेतावनी दी कि अमेरिका की हालिया नीतियों से भारत रूस के और करीब जा सकता है। सांसद ने कहा कि ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए उच्च टैरिफ और व्यापार प्रतिबंध न केवल भारत-यूएस संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं, बल्कि वैश्विक रणनीति में भी बदलाव ला सकते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका को भारत के साथ मजबूत और भरोसेमंद रिश्ते बनाए रखने चाहिए। तस्वीर में क्या है खास? कार में Modi और Putin आराम से बैठे दिख रहे हैं, जो उनके गहरे और गर्म संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है। अमेरिकी कांग्रेस में इस तस्वीर का इस्तेमाल एक चेतावनी के रूप में किया गया कि अगर अमेरिका भारत के साथ सहयोग में कठिनाइयाँ पैदा करता है, तो भारत रूस के करीब हो सकता है। व्यापार और रणनीतिक असर हाल ही में अमेरिका ने भारत पर कई निर्यात वस्तुओं पर 50% तक के टैरिफ लगाए हैं। इस कदम को कुछ विशेषज्ञ “अमेरिका द्वारा भारत को दबाव में लाने की कोशिश” कहते हैं। इसके चलते दोनों देशों के बीच ट्रेड तनाव बढ़ा है और रणनीतिक साझेदारी पर असर पड़ सकता है। भारत अपनी विदेश नीति में स्ट्रैटेजिक ऑटोमॉमी को महत्व देता है। रूस के साथ करीबी रिश्ते बनाए रखना उसकी वैश्विक रणनीति का हिस्सा है। लेकिन अमेरिका की कड़ी नीतियों से भारत रूस के और करीब जा सकता है, यह चिंता अमेरिकी नेताओं को है। अमेरिकी संसद की चेतावनी सांसद कामलाजर-डोव ने कहा कि ट्रंप प्रशासन की यह रणनीति “कान काटने जैसा” है — यानी अमेरिका खुद को नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि अमेरिका को भारत के साथ सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम करना चाहिए, क्योंकि मजबूत US-India रिलेशनशिप दोनों देशों के लिए फायदेमंद है। यह घटना दिखाती है कि वैश्विक राजनीति में संकेत और प्रतीकों का महत्व बहुत बड़ा है। कभी-कभी एक तस्वीर भी देशों के रिश्तों और रणनीति पर गहरा प्रभाव डाल सकती है। Modi-Putin कार फोटो ने सिर्फ मीडिया में चर्चा नहीं बनाई, बल्कि यह दुनिया को संकेत दे गया कि भारत अपनी विदेश नीति में संतुलन बनाये रखने में गंभीर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gold Mining: ऑस्ट्रेलिया में सोने की नई खोज से बदलेगी तस्वीर, भारत को मिल सकता है नया सप्लायर

भारत में सोना सिर्फ गहना नहीं, बल्कि लोगों की बचत और निवेश का भी अहम हिस्सा है। शादी का सीजन हो या दिवाली-धनतेरस, सोने की खरीदारी को लेकर बाजार में हमेशा हलचल रहती है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया से आई सोने की खोज और बढ़ते निवेश की खबर भारत के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऑस्ट्रेलिया में सोने की नई खोज के लिए कंपनियां बड़े स्तर पर खर्च कर रही हैं। इससे आने वाले समय में सोने की वैश्विक सप्लाई बढ़ने की संभावना है। भारत जैसे देश के लिए यह एक अहम घटनाक्रम है, क्योंकि अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा पूरा करने के लिए भारत को दूसरे देशों से सोना आयात करना पड़ता है। Australia में Gold Exploration पर कितना खर्च हुआ? ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज से जुड़ा निवेश जून 2026 की तिमाही में बढ़कर लगभग 565.6 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पहुंच गया। ऑस्ट्रेलियाई सांख्यिकी ब्यूरो (ABS) के आंकड़ों के अनुसार, पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें 23.6% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह खर्च जमीन के नीचे मौजूद सोने के संभावित भंडार का पता लगाने, ड्रिलिंग और खनन की संभावनाओं का आकलन करने जैसे कामों पर किया जाता है। हालांकि, खोज पर खर्च बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि हर जगह सोने का नया भंडार मिल गया है। किसी जगह सोना मिलने के बाद भी यह देखना पड़ता है कि वहां से उसे निकालना आर्थिक रूप से कितना व्यावहारिक होगा। ऑस्ट्रेलिया में कितना Gold Reserve मौजूद है? ऑस्ट्रेलिया दुनिया के प्रमुख सोना उत्पादक देशों में शामिल है। सरकारी संस्था Geoscience Australia के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2024 तक देश के अनुमानित Ore Reserves करीब 4,785 टन थे। वहीं, पहचाने गए कुल Gold Resources का आंकड़ा इससे काफी ज्यादा था। यहां एक बात समझना जरूरी है। Gold Resources में सोने के संभावित और पहचाने गए संसाधन शामिल होते हैं, जबकि Ore Reserves उस सोने को दर्शाते हैं जिसे मौजूदा तकनीकी और आर्थिक परिस्थितियों में निकालना व्यावहारिक माना जाता है। इसीलिए ऑस्ट्रेलिया में सोने के बड़े भंडार होने और किसी नई खोज को दुनिया का सबसे बड़ा भंडार बताने में अंतर है। किसी खास नई खोज के बारे में ऐसा दावा करने से पहले उसके आधिकारिक आंकड़ों की पुष्टि जरूरी है। भारत को कैसे मिल सकता है फायदा? भारत में सोने की मांग काफी बड़ी है और घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अगर ऑस्ट्रेलिया में आने वाले वर्षों में सोने का उत्पादन बढ़ता है, तो भारतीय आयातकों के लिए सप्लाई का एक अतिरिक्त विकल्प तैयार हो सकता है। इसके तीन संभावित फायदे हो सकते हैं: हालांकि, ऑस्ट्रेलिया में निकाला गया सोना अपने आप भारत नहीं पहुंचेगा। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि उत्पादन कितना बढ़ता है, कंपनियां किस देश को निर्यात करती हैं और भारतीय आयातकों के साथ किस तरह के व्यापारिक समझौते होते हैं। क्या भारत में सस्ता हो जाएगा सोना? सोने की नई खोज की खबर सुनकर खरीदारों के मन में सबसे पहले यही सवाल आता है कि क्या अब Gold Price कम होगा? फिलहाल ऐसा कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत केवल उत्पादन पर निर्भर नहीं करती। निवेशकों की मांग, केंद्रीय बैंकों की खरीद, डॉलर की चाल और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी भाव को प्रभावित करती हैं। भारत में इसके अलावा रुपये और डॉलर की विनिमय दर, आयात शुल्क, टैक्स और घरेलू मांग का भी असर पड़ता है। इसलिए ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज बढ़ने के बावजूद भारतीय बाजार में कीमतें तुरंत कम होंगी, इसकी गारंटी नहीं है। ₹13,000 करोड़ के निवेश की खबर कितनी सही है? ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज पर खर्च बढ़ने के आंकड़े सामने आए हैं। लेकिन ₹13,000 करोड़ के निवेश को किसी खास नई खोज या दुनिया के सबसे बड़े सोना भंडार से जोड़ने के लिए संबंधित कंपनी और परियोजना के आधिकारिक दस्तावेजों की जरूरत है। इसलिए इस रकम को किसी एक नए गोल्ड रिजर्व की खोज पर खर्च हुई राशि बताने से पहले इसकी पुष्टि करना जरूरी है। खोज पर किया गया खर्च, जमीन में मौजूद कुल सोने का मूल्य और खनन परियोजना में कुल निवेश तीन अलग-अलग बातें हैं। आगे क्या होगा? ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज पर बढ़ता खर्च वैश्विक गोल्ड इंडस्ट्री के लिए अहम है। अगर आने वाले वर्षों में नए भंडार की पहचान होती है और उनसे व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो पाता है, तो इससे अंतरराष्ट्रीय सप्लाई के विकल्प बढ़ सकते हैं। भारत के लिए भी यह एक संभावित अवसर है। लेकिन नए सप्लायर की भूमिका, आयात पर असर और सोने की कीमतों में बदलाव का पता तभी चलेगा, जब वास्तविक उत्पादन और निर्यात के आंकड़े सामने आएंगे। फिलहाल, ऑस्ट्रेलिया की गोल्ड इंडस्ट्री पर नजर रखना जरूरी है, लेकिन नई खोज के नाम पर सोना सस्ता होने की उम्मीद करना अभी जल्दबाजी होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

इंदौर में 175 डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के अटैचमेंट खत्म, मूल पदस्थापना पर जॉइनिंग के बाद ही मिलेगा अक्टूबर का वेतन

स्वास्थ्य विभाग में मूल पदस्थापना के बजाय दूसरी जगह काम कर रहे 175 डॉक्टरों, नर्सों और अन्य कर्मचारियों के अटैचमेंट समाप्त कर दिए गए हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने 16 अक्टूबर को आदेश जारी कर सभी अटैचमेंट तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए। आदेश के बाद संबंधित कर्मचारियों को अपने मूल पदस्थापना स्थल पर वापस जाकर जॉइनिंग देनी होगी। ऐसा करने के बाद ही उन्हें अक्टूबर महीने का वेतन मिल सकेगा। स्वास्थ्य विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को आदेश का तत्काल पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। तत्काल कार्यमुक्त कर मूल पदस्थापना पर भेजने के निर्देश CMHO के आदेश के मुताबिक, संबंधित अधिकारियों को अटैचमेंट पर काम कर रहे कर्मचारियों को उसी दिन कार्यमुक्त कर उनके मूल पदस्थापना स्थल पर भेजना होगा। इसकी जानकारी CMHO कार्यालय को भी उपलब्ध करानी होगी। वेतन आहरण केंद्रों को निर्देश दिए गए हैं कि कर्मचारियों की मूल पदस्थापना पर उपस्थिति सुनिश्चित होने के बाद ही अक्टूबर का वेतन जारी किया जाए। इससे कर्मचारियों को अपने निर्धारित कार्यस्थल पर लौटना अनिवार्य होगा। अटैचमेंट जारी मिला तो जिम्मेदार अधिकारी पर होगी कार्रवाई स्वास्थ्य विभाग ने आदेश के पालन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। CMHO ने स्पष्ट किया है कि आदेश जारी होने के बाद भी कोई कर्मचारी या अधिकारी अटैचमेंट पर काम करता पाया गया, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसकी जिम्मेदारी संबंधित संस्था के प्रभारी की होगी। विभाग ने अधिकारियों को निर्देशों का पालन कराने और इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थाओं को भेजा गया आदेश यह आदेश सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक, देपालपुर, मानपुर, सांवेर और हातोद के खंड चिकित्सा अधिकारियों, महू सहित विभिन्न अस्पतालों के प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों, शहरी स्वास्थ्य संस्थाओं और मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक के प्रभारियों को भेजा गया है। आदेश में भोपाल में हुई बैठकों और 16 अक्टूबर को मुख्यालय स्तर से मिले निर्देशों का भी हवाला दिया गया है। सभी संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से आदेश लागू कराने के निर्देश दिए गए हैं।

नवरात्रि पर रायपुर सेंट्रल जेल में सेवा की मिसाल, काली माता सेवा समिति ने 1300 बंदियों को बांटे फल

नवरात्रि के अवसर पर काली माता सेवा समिति ने रायपुर सेंट्रल जेल में करीब 1300 बंदियों को फल वितरित किए। समिति ने यह पहल उन बंदियों के लिए की, जो नवरात्रि में उपवास रखकर माता रानी की आराधना कर रहे हैं। इस आयोजन के जरिए समिति ने सेवा, करुणा और मानवीय संवेदना का संदेश दिया। समिति के अध्यक्ष दीपक भारद्वाज (पोल्ले) ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य बंदियों के प्रति संवेदनशीलता और सेवा भाव को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की गलती या अपराध से उसके सुधरने और बेहतर जीवन जीने की संभावनाएं समाप्त नहीं हो जातीं। बंदियों के सुधार और पुनर्वास पर दिया जोर दीपक भारद्वाज ने कहा कि समाज को न्याय के प्रति सम्मान बनाए रखने के साथ-साथ सुधार और पुनर्वास की भावना को भी महत्व देना चाहिए। बंदियों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने से समाज में मानवीय मूल्यों को मजबूती मिलती है। समिति का मानना है कि जेल में बंद लोगों के साथ भी सम्मानजनक और मानवीय व्यवहार होना चाहिए, ताकि उनमें सकारात्मक बदलाव की भावना विकसित हो सके। पहले भी जेल में कर चुके हैं फल वितरण काली माता सेवा समिति के अनुसार, वह पहले भी कई बार जेल में बंदियों को फल वितरित कर चुकी है। समिति का कहना है कि नवरात्रि केवल पूजा-पाठ और उपवास तक सीमित पर्व नहीं है, बल्कि यह सेवा, करुणा और सद्भावना को जीवन में अपनाने का अवसर भी है। इसी भावना के साथ समिति के सदस्यों ने उपवास रखने वाले बंदियों तक फल पहुंचाए। आगे भी जारी रहेंगे सेवा कार्य समिति ने समाज में सेवा, सद्भावना और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए ऐसे आयोजन आगे भी जारी रखने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में अशोक त्रिपाठी, गुड्डू, सुनील प्रमुख, राजू भाई तारवानी और रामकृष्ण धीवर सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
वैभव सूर्यवंशी

IND vs WI T20: वैभव सूर्यवंशी का भरोसा कायम, 4 दिन में दूसरी पोस्ट; अब भी मौके का इंतजार

भारत और वेस्टइंडीज (IND vs WI) के बीच T-20 सीरीज के निर्णायक मुकाबले से पहले युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी एक बार फिर चर्चा में हैं। सीरीज में अब तक खेलने का मौका नहीं मिलने के बावजूद वैभव ने उम्मीद नहीं छोड़ी है। चार दिन के भीतर उनकी दूसरी सोशल मीडिया पोस्ट सामने आई है, जिसमें भरोसे का संदेश देखने को मिला। वैभव को इस सीरीज में अब तक मैदान पर उतरने का मौका नहीं मिला है। ऐसे में क्रिकेट फैंस के मन में एक ही सवाल है—क्या पांचवें टी-20 में उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा? Vaibhav Sooryavanshi की दूसरी पोस्ट ने खींचा ध्यान वैभव सूर्यवंशी की सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर फैंस के बीच चर्चा हो रही है। चार दिन में दूसरी पोस्ट आने के बाद उनके संदेश पर लोगों की नजरें टिकी हैं। हालांकि, पोस्ट को टीम में चयन या किसी खास फैसले से जोड़कर देखना सही नहीं होगा, क्योंकि प्लेइंग-11 में किसे मौका मिलेगा, इसका फैसला टीम मैनेजमेंट करता है। कम उम्र में अपनी बल्लेबाजी से पहचान बनाने वाले वैभव के लिए टीम के साथ रहना और मौके का इंतजार करना भी अनुभव का हिस्सा है। अब देखना होगा कि उन्हें इस सीरीज में खेलने का मौका मिलता है या नहीं। IND vs WI 5th T20: निर्णायक मुकाबले पर नजर भारत और वेस्टइंडीज की टी-20 सीरीज का पांचवां मुकाबला दोनों टीमों के लिए अहम है। सीरीज के आखिरी मैच में जीत हासिल करने वाली टीम खिताब अपने नाम करेगी। ऐसे में भारतीय टीम की प्लेइंग-11 को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। फैंस यह जानना चाहते हैं कि क्या टीम मैनेजमेंट इस मुकाबले में युवा खिलाड़ियों को मौका देगा। वैभव सूर्यवंशी का नाम भी इसी चर्चा में शामिल है। हालांकि, उनके खेलने को लेकर आधिकारिक पुष्टि के बिना किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। क्या वैभव सूर्यवंशी को मिलेगा डेब्यू का मौका? वैभव को लेकर उत्सुकता की एक बड़ी वजह उनकी कम उम्र और क्रिकेट में तेजी से बनी पहचान है। फैंस उन्हें भारतीय टीम की जर्सी में खेलते देखना चाहते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौका मिलना टीम की जरूरत और चयन रणनीति पर निर्भर करता है। फिलहाल वैभव के लिए इंतजार जारी है। पांचवें टी-20 में उनका नाम प्लेइंग-11 में शामिल होता है या नहीं, इसका पता टीम की आधिकारिक घोषणा के बाद ही चलेगा। क्रिकेट में हर खिलाड़ी को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। वैभव के समर्थकों को उम्मीद है कि उन्हें जल्द ही मैदान पर अपनी काबिलियत दिखाने का अवसर मिलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
लालकृष्ण आडवाणी

LK Advani Hospitalised ICU में भर्ती लालकृष्ण आडवाणी की सेहत कैसी? जानें ताजा अपडेट

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की सेहत को लेकर 17 अक्टूबर को ताजा जानकारी सामने आई है। 98 वर्षीय आडवाणी को सीने में संक्रमण (Chest Infection) की शिकायत के बाद दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है और डॉक्टरों की टीम उनकी निगरानी कर रही है। परिवार और समर्थकों के लिए यह खबर चिंता बढ़ाने वाली जरूर है, लेकिन फिलहाल राहत की बात यह है कि अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक उनकी स्थिति स्थिर है। डॉक्टर उनकी सेहत से जुड़ी जरूरी जांच कर रहे हैं और इलाज जारी है। LK Advani Health Update: अस्पताल में क्या चल रहा है इलाज? लालकृष्ण आडवाणी को शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 की शाम करीब 7:30 बजे अस्पताल लाया गया था। उन्हें सीने में संक्रमण की शिकायत के बाद पल्मोनरी विभाग में भर्ती किया गया। यहां डॉक्टरों की एक टीम उनकी सेहत पर नजर रख रही है और जरूरी मेडिकल जांच की जा रही है। 17 अक्टूबर तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनकी हालत स्थिर है। हालांकि, उनकी सेहत में आगे कितना सुधार हुआ है और अस्पताल से छुट्टी कब मिलेगी, इस बारे में अभी कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। पहले भी अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं लालकृष्ण आडवाणी लालकृष्ण आडवाणी को इससे पहले मई 2026 में भी उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई थी। दिसंबर 2024 में भी उन्हें अपोलो अस्पताल की ICU में रखा गया था। उस समय डॉक्टरों ने उनकी मेडिकल जांच और इलाज किया था। जून और जुलाई 2024 में भी उन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बढ़ती उम्र को देखते हुए उनकी सेहत पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मौजूदा समय में डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार जारी है। PM Modi ने हाल ही में की थी लालकृष्ण आडवाणी से मुलाकात लालकृष्ण आडवाणी के अस्पताल में भर्ती होने से कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2026 को उनके दिल्ली स्थित आवास पर मुलाकात की थी। इस दौरान प्रधानमंत्री ने उनसे आशीर्वाद लिया और सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान की सराहना की थी। आडवाणी लंबे समय तक बीजेपी के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं। पार्टी को राष्ट्रीय राजनीति में स्थापित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यही वजह है कि उनकी सेहत से जुड़ी खबर पर राजनीतिक जगत और उनके समर्थकों की नजर बनी हुई है। राम रथ यात्रा से उपप्रधानमंत्री तक का सफर लालकृष्ण आडवाणी का राजनीतिक सफर कई दशकों तक फैला रहा है। वह भारतीय जनता पार्टी के तीन बार राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे और पार्टी के विस्तार में अहम भूमिका निभाई। साल 1990 में निकाली गई उनकी राम रथ यात्रा ने राष्ट्रीय राजनीति में व्यापक चर्चा पैदा की थी। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद 2002 से 2004 तक वह भारत के उपप्रधानमंत्री रहे। देश की राजनीति में उनके लंबे योगदान को देखते हुए वर्ष 2024 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। LK Advani अब अगले हेल्थ अपडेट का इंतजार लालकृष्ण आडवाणी फिलहाल दिल्ली के अपोलो अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में हैं। 17 अक्टूबर तक सामने आई जानकारी के मुताबिक, उनकी हालत स्थिर है और सीने में संक्रमण के लिए इलाज चल रहा है। अब सभी की नजर अस्पताल की ओर से जारी होने वाले अगले हेल्थ अपडेट पर है। उनकी सेहत में सुधार, इलाज की स्थिति और डिस्चार्ज को लेकर नई जानकारी मिलने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल सबसे अहम बात यही है कि लालकृष्ण आडवाणी की हालत स्थिर बताई गई है और उनका इलाज जारी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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