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JPSC Protest: 4 दिन बाद देवेंद्र महतो ने तोड़ा जल उपवास, Sonam Wangchuk से हुई Live बातचीत

झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे छात्रों का गुस्सा एक बार फिर सड़कों पर दिखाई दे रहा है। JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर रांची में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच प्रदर्शनकारी नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अपना Water Fast तोड़ दिया। करीब चार दिन तक बिना अन्न और जल के अनशन पर रहने के बाद सोनम वांगचुक से Live बातचीत हुई। इसके बाद उनकी अपील मानते हुए महतो ने पानी ग्रहण किया। हालांकि, Water Fast खत्म होने का मतलब आंदोलन खत्म होना नहीं है। छात्रों की मांगें अभी भी बरकरार हैं और देवेंद्र महतो भी परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच और कार्रवाई की मांग पर कायम हैं। Sonam Wangchuk से बातचीत के बाद बदला फैसला देवेंद्र महतो के लगातार जल उपवास को लेकर समर्थकों और छात्रों में चिंता बढ़ रही थी। इसी बीच सोनम वांगचुक ने उनसे वीडियो कॉल के जरिए बातचीत की। बातचीत के दौरान वांगचुक ने महतो से अपनी सेहत का ध्यान रखने और Water Fast समाप्त करने की अपील की। सोनम वांगचुक की बात सुनने के बाद देवेंद्र महतो ने पानी पीकर अपना जल उपवास समाप्त किया। इस दौरान आंदोलन स्थल पर मौजूद छात्रों और समर्थकों ने भी राहत की सांस ली। लेकिन महतो ने साफ किया कि छात्रों की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। उनका विरोध JPSC-JSSC परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को लेकर जारी है। JPSC परीक्षा को लेकर क्यों नाराज हैं छात्र? रांची में चल रहे इस आंदोलन की मुख्य वजह 14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को लेकर उठे सवाल हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ियां हुई हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। छात्रों की मांग है कि अगर जांच में अनियमितताएं सामने आती हैं तो जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और अभ्यर्थियों के हित में स्पष्ट व्यवस्था तैयार करने की मांग भी उठ रही है। JSSC की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं को लेकर भी छात्रों के बीच नाराजगी है। यही वजह है कि आंदोलन अब केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रह गया है। CBI जांच की मांग ने बढ़ाई हलचल प्रदर्शनकारी छात्र मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं। आंदोलन से जुड़े कई लोगों की ओर से CBI जैसी केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग भी उठाई गई है। छात्रों का कहना है कि सरकारी नौकरियों के लिए होने वाली परीक्षाओं में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। युवाओं का भविष्य इन परीक्षाओं पर निर्भर करता है, इसलिए किसी भी तरह की कथित गड़बड़ी को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। CID जांच भी बनी चर्चा का विषय इस मामले में राज्य की जांच एजेंसी CID की कार्रवाई भी सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, जांच के दौरान पूछताछ और छापेमारी जैसी कार्रवाई की गई है। मामले से जुड़े कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी या दोष तय होना जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संभव है। फिलहाल छात्रों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और सच्चाई सामने लाई जाए। कौन हैं देवेंद्र नाथ महतो? देवेंद्र नाथ महतो झारखंड के छात्र आंदोलनों में सक्रिय नाम रहे हैं। भर्ती परीक्षाओं, छात्रों की समस्याओं और रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर वह पहले भी आवाज उठाते रहे हैं। मौजूदा JPSC-JSSC आंदोलन में भी उनकी भूमिका प्रमुख रही है। लंबे Water Fast के कारण वह इस प्रदर्शन का एक प्रमुख चेहरा बन गए थे। सोनम वांगचुक से उनकी बातचीत के बाद जल उपवास खत्म करने का फैसला भी आंदोलन के बीच काफी चर्चा में रहा। रांची में जारी है छात्रों का आंदोलन रांची में छात्रों का प्रदर्शन लगातार जारी है। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर सरकार से ठोस कदम उठाने की उम्मीद कर रहे हैं। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और समय पर नियुक्ति युवाओं के लिए सबसे अहम मुद्दों में से है। देवेंद्र महतो के Water Fast खत्म करने के बाद अब आंदोलन की अगली रणनीति पर सबकी नजर है। एक तरफ महतो ने स्वास्थ्य को देखते हुए जल उपवास खत्म किया है, वहीं दूसरी तरफ छात्रों की मुख्य मांगें अभी भी जस की तस हैं। आगे क्या होगा? फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाती है। अगर जांच को लेकर कोई ठोस फैसला होता है तो आंदोलन की दिशा बदल सकती है। वहीं, मांगों पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं होने पर प्रदर्शन आगे भी जारी रहने की संभावना है। एक बात फिलहाल साफ है—देवेंद्र महतो का Water Fast भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन JPSC-JSSC को लेकर छात्रों की नाराजगी अभी खत्म नहीं हुई है। अब नजर सरकार के अगले कदम और जांच की दिशा पर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Meta

Meta पर बढ़ा Pressure: PM मोदी का Video हटाने पर संसदीय पैनल सख्त, Zuckerberg से जवाब तलब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ा एक Facebook Video कुछ समय के लिए हटाए जाने का मामला अब Meta के लिए मुश्किलें बढ़ाता नजर आ रहा है। वीडियो दोबारा बहाल किए जाने के बावजूद विवाद खत्म नहीं हुआ। संसदीय समिति ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए Meta से जवाब मांगा है और कंपनी के CEO मार्क जुकरबर्ग (Mark Zuckerberg) से माफी की मांग भी सामने आई है। मामला केवल एक वीडियो के हटने तक सीमित नहीं रह गया है। अब सवाल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, Content Moderation Policy और भारत में मिलने वाली Safe Harbour Protection को लेकर भी उठ रहे हैं। आखिर क्या है पूरा मामला? दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ा एक वीडियो Facebook पर पोस्ट किया गया था। यह वीडियो छात्रों और युवाओं से जुड़े एक अहम मुद्दे के संदर्भ में था। कुछ समय बाद यह वीडियो भारतीय यूजर्स के लिए Facebook पर उपलब्ध नहीं रहा। वीडियो के हटने की जानकारी सामने आने के बाद सरकार और संसदीय स्तर पर Meta से जवाब मांगा गया। मामला बढ़ने पर कंपनी ने सफाई दी कि वीडियो को गलती से हटा दिया गया था। बाद में इसे प्लेटफॉर्म पर बहाल कर दिया गया। Meta की ओर से इसे किसी जानबूझकर की गई कार्रवाई के बजाय एक तकनीकी या मॉडरेशन संबंधी गलती बताया गया। लेकिन समिति इस जवाब से पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आई। Zuckerberg से माफी की मांग क्यों? वीडियो हटाए जाने के मामले को लेकर संसदीय समिति ने Meta के कामकाज और उसकी जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं। समिति की ओर से मार्क जुकरबर्ग से व्यक्तिगत रूप से माफी मांगने की बात कही गई है। समिति का तर्क है कि किसी बड़े सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति से जुड़ा कंटेंट अगर प्लेटफॉर्म से हटता है, तो इसे महज एक सामान्य तकनीकी गलती मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह जानना जरूरी है कि वीडियो किस वजह से हटाया गया और इस फैसले के पीछे कौन-सी प्रक्रिया काम कर रही थी। यही वजह है कि अब Meta से सिर्फ सफाई नहीं, बल्कि Accountability की भी मांग की जा रही है। Safe Harbour Protection पर क्यों उठे सवाल? इस विवाद का सबसे अहम पहलू Meta को मिलने वाली Safe Harbour Protection है। भारत में Information Technology कानून के तहत सोशल मीडिया इंटरमीडियरी को कुछ परिस्थितियों में यूजर्स द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए कानूनी सुरक्षा मिलती है। लेकिन इस सुरक्षा के साथ प्लेटफॉर्म की कुछ जिम्मेदारियां भी जुड़ी हैं। ऐसे में अगर किसी प्लेटफॉर्म की Content Moderation प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठते हैं, तो उसकी जवाबदेही पर बहस होना स्वाभाविक है। संसदीय समिति की ओर से संकेत दिया गया है कि Meta को इस पूरे मामले पर गंभीरता से जवाब देना होगा। यही वजह है कि Safe Harbour को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। सरकार भी Meta से मांग सकती है जवाब मामले की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार की ओर से Meta के वरिष्ठ अधिकारियों से जवाब लेने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ी है। बातचीत में प्रधानमंत्री के वीडियो के अलावा प्लेटफॉर्म की Content Moderation व्यवस्था और अन्य डिजिटल कंटेंट से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है। सरकार यह जानना चाहती है कि Meta के प्लेटफॉर्म पर किसी महत्वपूर्ण पोस्ट को हटाने का फैसला किस स्तर पर लिया जाता है और ऐसी गलती दोबारा न हो, इसके लिए कंपनी की तरफ से क्या कदम उठाए जा रहे हैं। Meta के सामने अब सबसे बड़ा सवाल Meta के लिए चुनौती सिर्फ इस विवाद को खत्म करना नहीं है। कंपनी को यह भी स्पष्ट करना होगा कि आखिर ऐसा कौन-सा सिस्टम था जिसकी वजह से प्रधानमंत्री से जुड़ा वीडियो हट गया। अगर कंपनी इसे तकनीकी गलती बता रही है, तो यह सवाल भी उठता है कि भविष्य में ऐसी गलती रोकने के लिए क्या व्यवस्था बदली जाएगी। सोशल मीडिया आज केवल मनोरंजन या बातचीत का माध्यम नहीं रह गया है। राजनीतिक बयान, सरकारी घोषणाएं और सार्वजनिक बहस का बड़ा हिस्सा भी इन्हीं प्लेटफॉर्म पर होता है। ऐसे में किसी महत्वपूर्ण पोस्ट के हटने पर सवाल उठना स्वाभाविक है। आगे क्या होगा? फिलहाल वीडियो वापस Facebook पर आ चुका है, लेकिन विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। संसदीय समिति की सख्ती और सरकार की ओर से Meta के अधिकारियों से जवाब मांगने के बाद आने वाले दिनों में यह मुद्दा और चर्चा में रह सकता है। अब नजर इस बात पर है कि Meta इस पूरे मामले पर आगे क्या जवाब देता है और क्या कंपनी की ओर से इस घटना को लेकर औपचारिक रूप से जिम्मेदारी तय करने या माफी की दिशा में कोई कदम उठाया जाता है। कुल मिलाकर, PM Modi Video Removal Case ने एक बार फिर भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और Content Moderation Policy को बहस के केंद्र में ला दिया है। मामला भले एक वीडियो से शुरू हुआ हो, लेकिन अब चर्चा इससे कहीं आगे पहुंच चुकी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Repo Rate

RBI का बड़ा फैसला: Repo Rate नहीं बदला, Home Loan और EMI पर राहत के लिए करना होगा इंतजार

RBI Repo Rate को लेकर आम लोगों को इस बार भी राहत नहीं मिली है। भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में Repo Rate को 5.25% पर बरकरार रखने का फैसला किया है। यानी फिलहाल Home Loan, Car Loan और दूसरे Floating Rate Loans की EMI कम होने की उम्मीद पर ब्रेक लग गया है। बैंक से लोन लेने वाले ग्राहकों के लिए यह फैसला इसलिए अहम है, क्योंकि Repo Rate में कटौती होने पर बैंकों के लिए कर्ज की लागत कम होने की संभावना रहती है। इसका फायदा आगे चलकर ग्राहकों को कम ब्याज दर और कम EMI के रूप में मिल सकता है। लेकिन इस बार दरों में बदलाव नहीं होने से ऐसी राहत तत्काल नहीं मिलने वाली। Loan की EMI पर क्या पड़ेगा असर? अगर आपने पहले से Floating Rate पर Home Loan या कोई दूसरा कर्ज लिया हुआ है, तो RBI के इस फैसले के बाद EMI में तुरंत कमी की उम्मीद नहीं है। इसी तरह नया Loan लेने वालों को भी ब्याज दरों में बड़ी कटौती का फायदा फिलहाल नहीं मिलेगा। हालांकि, Loan की EMI केवल RBI के Repo Rate पर ही निर्भर नहीं करती। बैंक अपनी lending rates, loan की अवधि, ग्राहक की प्रोफाइल और अन्य परिस्थितियों के आधार पर ब्याज दर तय करते हैं। इसलिए अलग-अलग ग्राहकों पर इसका असर अलग हो सकता है। RBI ने Rate Cut से क्यों बनाई दूरी? RBI के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती महंगाई और Global Market में जारी अस्थिरता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव और बाहरी आर्थिक परिस्थितियों का असर घरेलू अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। वैश्विक परिस्थितियों को लेकर सावधानी बरतने का संकेत दिया है। केंद्रीय बैंक के लिए आर्थिक विकास को गति देने के साथ-साथ महंगाई को नियंत्रण में रखना भी जरूरी है। ऐसे माहौल में Repo Rate को स्थिर रखना एक संतुलित कदम माना जा रहा है। महंगाई पर RBI की नजर ब्याज दरों से जुड़े फैसले में Inflation की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है। अगर महंगाई बढ़ती है तो केंद्रीय बैंक के लिए ब्याज दरों में जल्द कटौती करना मुश्किल हो सकता है। दूसरी तरफ, अगर महंगाई नियंत्रण में रहती है और आर्थिक गतिविधियों को सहारे की जरूरत महसूस होती है, तो आगे चलकर Rate Cut की गुंजाइश बन सकती है। इसलिए आने वाले महीनों के आर्थिक आंकड़े RBI के अगले फैसले के लिए महत्वपूर्ण होंगे। Home Loan लेने वालों को क्या करना चाहिए? RBI के फैसले के बाद मौजूदा Loan ग्राहकों को अपनी EMI और ब्याज दर की समीक्षा करनी चाहिए। अगर बैंक की ब्याज दर में भविष्य में कमी आती है तो ग्राहक अपने Loan की शर्तों के अनुसार इसका लाभ ले सकते हैं। नया Home Loan लेने की योजना बना रहे लोगों के लिए भी सिर्फ Repo Rate देखकर फैसला करना सही नहीं होगा। अलग-अलग बैंकों की Interest Rate, Processing Fee, Loan Tenure और अन्य शुल्कों की तुलना करना ज्यादा महत्वपूर्ण है। आगे क्या उम्मीद? फिलहाल RBI ने ब्याज दरों को स्थिर रखकर इंतजार और निगरानी की रणनीति अपनाई है। अब बाजार की नजर महंगाई, आर्थिक विकास और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति पर रहेगी। अगर आने वाले समय में महंगाई का दबाव कम होता है और वैश्विक परिस्थितियां बेहतर होती हैं, तो भविष्य में Repo Rate में कटौती की संभावना पर चर्चा फिर तेज हो सकती है। फिलहाल बैंक ग्राहकों को सस्ती EMI के लिए थोड़ा और इंतजार करना होगा। RBI का फैसला एक नजर में हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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केंद्र का दावा: सात वर्षों में 36 देशों से 274 भगोड़े भारत लाए गए, ₹17,874 करोड़ की संपत्ति अटैच

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने मंगलवार को कहा कि पिछले सात वर्षों में 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाया गया है। सरकार के अनुसार, यह आंकड़ा वर्ष 2004 से 2013 के दौरान हुए प्रत्यर्पण की तुलना में करीब 10 गुना अधिक है। सरकार ने यह भी बताया कि इस अवधि में भगोड़ों की 17,874 करोड़ रुपये की संपत्ति भी अटैच की गई है। कई तरह के गंभीर मामलों में थे वांछित सरकार के मुताबिक, 2019 से जुलाई 2026 के बीच भारत लाए गए 274 भगोड़ों में विभिन्न गंभीर अपराधों के आरोपी शामिल हैं। इनमें 9 आर्थिक अपराध, 17 आतंकवाद, 42 संगठित अपराध, 62 हत्या, लूट और अन्य हिंसक अपराध, 53 यौन अपराध और बच्चों के खिलाफ यौन अपराध, 16 मादक पदार्थों की तस्करी, 12 नकली मुद्रा तस्करी, 18 मानव तस्करी और 45 अन्य मामलों में वांछित आरोपी शामिल थे। इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस में भी बढ़ोतरी केंद्र सरकार ने बताया कि हाल के वर्षों में इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में 40, 2023 में 100, 2024 में 107, 2025 में 112 और 2026 में अब तक 182 रेड नोटिस जारी किए जा चुके हैं। पिछले तीन वर्षों में कुल 401 भगोड़े अपराधियों के खिलाफ रेड नोटिस जारी किए गए। प्रत्यर्पण प्रक्रिया को बनाया गया अधिक प्रभावी गृह मंत्रालय के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री के मार्गदर्शन में प्रत्यर्पण संबंधी अनुरोधों को अब अधिक पेशेवर तरीके से तैयार किया जा रहा है। संबंधित देशों की कानूनी आवश्यकताओं के अनुरूप दस्तावेज, साक्ष्य और आवश्यक लिखित आश्वासन भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे प्रत्यर्पण प्रक्रिया को मजबूती मिली है। पुराने ढांचे पर भी सरकार का बयान सरकार ने दावा किया कि 2004-13 के दौरान भारत का प्रत्यर्पण तंत्र अपेक्षाकृत कमजोर था। उस समय केवल 37 देशों के साथ प्रत्यर्पण संधियां थीं और आर्थिक भगोड़ों से निपटने के लिए अलग कानून भी उपलब्ध नहीं था। सरकार के अनुसार, जटिल कागजी प्रक्रिया के कारण कई मामलों में विदेशी अदालतों ने भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध स्वीकार नहीं किए थे। केंद्र ने यह भी कहा कि वर्ष 2018 में Fugitive Economic Offenders Act लागू किया गया, जबकि 2019 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) में संशोधन कर कार्रवाई के दायरे को और मजबूत किया गया। देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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राहुल गांधी बोले- छात्रों को माफी नहीं, सरकार के कामों का जवाब चाहिए; RSS पर भी साधा निशाना

नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को छात्रों के मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश के छात्र कठिन दौर से गुजर रहे हैं और उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माफी नहीं, बल्कि सरकार की नीतियों और कामकाज पर जवाब चाहिए। राहुल गांधी ने यह बातें पूर्व कांग्रेस सांसद वाइको की पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम के दौरान कहीं। “छात्र रोजगार और निष्पक्ष परीक्षा चाहते हैं” राहुल गांधी ने कहा कि देशभर के छात्र रोजगार, पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था और बेहतर शिक्षा प्रणाली की मांग को लेकर सड़कों पर हैं। उनके अनुसार, युवाओं की प्रमुख चिंता रोजगार के अवसर और निष्पक्ष प्रतियोगी परीक्षाएं हैं। उन्होंने कहा कि यह समझ से परे है कि प्रधानमंत्री छात्रों को माफ करने जैसी बात क्यों कर रहे हैं, जबकि छात्र अपनी समस्याओं के समाधान की अपेक्षा कर रहे हैं। RSS पर इतिहास बदलने का आरोप कांग्रेस नेता ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि संगठन देश के इतिहास को बदलने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत के लोग अपने इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ स्वीकार नहीं करेंगे। राज्यों के सम्मान की भी उठाई बात राहुल गांधी ने कहा कि संविधान भारत को राज्यों का एक संघ मानता है और प्रत्येक राज्य देश की विविधता तथा पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने दावा किया कि हर राज्य, उसकी भाषा और संस्कृति के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग भारत की विभिन्न भाषाओं और सांस्कृतिक परंपराओं के महत्व को कम करके आंकने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि देश की ताकत उसकी विविधता में निहित है। देश और राजनीति से जुड़ी हर बड़ी खबर के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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जालोर में तेज रफ्तार डंपर की चपेट में आया ढाई साल का मासूम, मौके पर मौत; चालक हिरासत में

जालोर। राजस्थान के जालोर जिले में मंगलवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे में ढाई साल के मासूम की जान चली गई। बागोड़ा थाना क्षेत्र के छाजाला गांव में घर के बाहर खेल रहे बच्चे को तेज रफ्तार डंपर ने कुचल दिया। हादसे के बाद चालक मौके से भागने का प्रयास करने लगा, लेकिन ग्रामीणों ने उसका पीछा कर पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। घर के बाहर खेल रहा था मासूम जानकारी के अनुसार, यह हादसा मंगलवार सुबह करीब 9:30 बजे हुआ। मासूम मोहम्मद, पिता बिलाल खान, अपने घर के बाहर खेल रहा था। इसी दौरान तेज गति से आए डंपर ने उसे अपनी चपेट में ले लिया। हादसा इतना गंभीर था कि बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई। ग्रामीणों ने पीछा कर चालक को पकड़ा प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के बाद आसपास मौजूद लोगों ने डंपर चालक को रुकने का इशारा किया, लेकिन वह वाहन लेकर भागने लगा। इस पर ग्रामीणों ने उसका पीछा किया और कुछ दूरी पर पकड़कर पुलिस को सौंप दिया। इकलौता बेटा था मासूम छाजाला गांव के पूर्व सरपंच शरीफ खान ने बताया कि मृतक उनका भांजा था। उन्होंने बताया कि मासूम परिवार का इकलौता बेटा था और उसकी तीन बड़ी बहनें हैं। बच्चे के पिता बिलाल खान मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। हादसे के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है। पुलिस ने डंपर जब्त कर शुरू की जांच बागोड़ा थाना प्रभारी बलदेव राम ने बताया कि परिजनों की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है। डंपर को जब्त कर लिया गया है और चालक को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। राजस्थान और देश की ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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Bihar

Bihar Politics में बड़ा सियासी ट्विस्ट, Bankipur हार के बाद PM Modi से मिले Nitish Kumar

Bihar की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा सीट के नतीजे के बाद हलचल बढ़ गई है। बीजेपी को मिली हार के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दोनों नेताओं की यह मुलाकात संसद भवन में हुई। इसके बाद बिहार की सियासत में इस बैठक को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। बांकीपुर का चुनाव परिणाम बीजेपी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। ऐसे समय में नीतीश कुमार का पीएम मोदी से मिलना राजनीतिक नजरिए से अहम माना जा रहा है। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच किन मुद्दों पर बातचीत हुई, इसकी पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। Bankipur Result के बाद हुई अहम मुलाकात बांकीपुर सीट का नतीजा सामने आने के बाद बीजेपी और एनडीए के राजनीतिक प्रदर्शन को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। इसी बीच नीतीश कुमार की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात ने सियासी चर्चाओं को और तेज कर दिया। संसद भवन में हुई इस मुलाकात को बिहार के मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों की नजर अब इस बात पर है कि चुनावी नतीजों के बाद एनडीए की आगे की रणनीति क्या रहती है। BJP की हार ने खड़े किए कई सवाल बांकीपुर को पटना की अहम विधानसभा सीटों में माना जाता है। यहां बीजेपी की हार के बाद पार्टी के प्रदर्शन पर सवाल उठ रहे हैं। चुनाव परिणाम को लेकर विपक्ष भी एनडीए पर निशाना साध रहा है और इसे बिहार की राजनीति में बदलते माहौल का संकेत बता रहा है। हालांकि, किसी एक सीट के परिणाम को पूरे राज्य की राजनीति का सीधा संकेत मानना सही नहीं होगा। फिर भी बांकीपुर का नतीजा बीजेपी के लिए राजनीतिक रूप से चर्चा का विषय जरूर बन गया है। Nitish Kumar और PM Modi की बैठक पर टिकी नजरें नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी की मुलाकात ऐसे समय हुई है जब बिहार में चुनावी नतीजों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत को लेकर आधिकारिक तौर पर ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में यह कहना जल्दबाजी होगी कि बैठक में किसी बड़े राजनीतिक फैसले पर चर्चा हुई। फिलहाल इतना जरूर है कि बांकीपुर के नतीजे के बाद हुई इस मुलाकात ने बिहार की Politics को लेकर नई अटकलों को जन्म दे दिया है। आगे क्या होगी NDA की रणनीति? बिहार की राजनीति में बीजेपी और जेडीयू लंबे समय से महत्वपूर्ण सहयोगी रहे हैं। चुनावी नतीजों के बाद दोनों दलों के लिए आगे की रणनीति तय करना अहम होगा। खासकर उन सीटों पर पार्टी संगठन और चुनावी प्रदर्शन की समीक्षा की जा सकती है जहां उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं आए। अब सबकी नजरें आने वाले राजनीतिक बयानों और एनडीए की अगली गतिविधियों पर हैं। बांकीपुर का नतीजा और उसके बाद नीतीश कुमार की पीएम मोदी से मुलाकात फिलहाल बिहार की सियासत में चर्चा का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Air India

Air India Flight Turbulence: फुकेट-दिल्ली फ्लाइट में जोरदार झटके, 12 यात्री घायल

फुकेट से दिल्ली आ रही Air India की फ्लाइट उस वक्त मुश्किल में फंस गई, जब उड़ान के दौरान विमान को अचानक तेज टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा। हवा में लगे जोरदार झटकों से विमान के अंदर बैठे यात्रियों के बीच कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इस घटना में करीब 12 यात्रियों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। टर्बुलेंस के दौरान विमान को कई बार तेज झटके महसूस हुए। स्थिति इतनी गंभीर थी कि विमान के अंदर की सीलिंग में भी दरारें आने की बात सामने आई है। हालांकि, पायलट ने हालात को संभालते हुए फ्लाइट को सुरक्षित तरीके से दिल्ली एयरपोर्ट पर लैंड कराया। अचानक लगे झटकों से घबराए यात्री फुकेट से दिल्ली के लिए उड़ान भरने के बाद फ्लाइट सामान्य रूप से अपने सफर पर थी। इसी दौरान रास्ते में विमान अचानक तेज हवा के प्रभाव में आ गया। देखते ही देखते विमान में जोरदार झटके महसूस होने लगे। अचानक हुए इस घटनाक्रम से यात्रियों में घबराहट बढ़ गई। जिन यात्रियों को चोटें आईं, उन्हें दिल्ली पहुंचने के बाद मेडिकल सहायता उपलब्ध कराई गई। घटना के बाद एयरपोर्ट पर यात्रियों की स्थिति को लेकर जरूरी इंतजाम किए गए। विमान की सीलिंग में आई दरार इस घटना में सबसे ज्यादा ध्यान विमान के अंदर हुए नुकसान ने खींचा है। तेज टर्बुलेंस के बाद विमान की सीलिंग में दरार आने की जानकारी सामने आई। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उड़ान के दौरान हवा के झटके कितने तेज रहे होंगे। दिल्ली में लैंडिंग के बाद विमान की तकनीकी स्थिति की जांच की जा रही है। जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि टर्बुलेंस के कारण विमान के किन हिस्सों को नुकसान पहुंचा और उसकी गंभीरता कितनी थी। पायलट ने संभाली स्थिति, दिल्ली में सुरक्षित Landing तेज टर्बुलेंस के बावजूद फ्लाइट के पायलट और क्रू ने स्थिति को संभाले रखा। विमान को सुरक्षित तरीके से दिल्ली एयरपोर्ट पर उतारा गया। लैंडिंग के बाद घायल यात्रियों को आवश्यक चिकित्सा सहायता दी गई। यात्रियों के लिए विमान में सीट बेल्ट बांधकर रखना ऐसे हालात में बेहद महत्वपूर्ण होता है। टर्बुलेंस कब और कितनी तेजी से आएगा, इसका हमेशा सटीक अनुमान लगाना संभव नहीं होता। क्या होता है Turbulence? टर्बुलेंस दरअसल हवा के प्रवाह में अचानक होने वाला बदलाव है। जब विमान अलग-अलग गति या दिशा से चल रही हवा के क्षेत्र से गुजरता है, तो यात्रियों को विमान में झटके महसूस हो सकते हैं। हल्का टर्बुलेंस आमतौर पर सामान्य माना जाता है, लेकिन तेज टर्बुलेंस में यात्रियों को चोट लगने की आशंका बढ़ जाती है। यही वजह है कि उड़ान के दौरान सीट बेल्ट बांधे रखने की सलाह दी जाती है। Air India Flight Incident पर नजर फुकेट-दिल्ली फ्लाइट में हुई इस घटना ने एक बार फिर विमान यात्रा के दौरान Turbulence Safety को लेकर चर्चा बढ़ा दी है। फिलहाल यात्रियों के घायल होने और विमान को हुए नुकसान से जुड़ी जानकारी सामने आ रही है। घटना की विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही पूरी तस्वीर साफ होगी। फिलहाल राहत की बात यह रही कि तेज झटकों के बावजूद फ्लाइट दिल्ली एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंड कर गई। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Priyanka Gandhi

Bihar Politics में घमासान, Bankipur पर Priyanka का BJP पर वार; Giriraj बोले- ज्यादा खुश न हों

बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा सीट को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। सीट पर सामने आए राजनीतिक समीकरणों के बीच कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि लोग अब भाजपा से थक चुके हैं। प्रियंका के इस बयान के बाद केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी पलटवार किया और विपक्ष को ज्यादा खुश नहीं होने की नसीहत दे दी। बांकीपुर को लेकर नेताओं के बीच जुबानी जंग ने बिहार की राजनीति का माहौल और गर्म कर दिया है। एक तरफ विपक्ष इसे बीजेपी के खिलाफ जनता के बदलते मूड के तौर पर देख रहा है, तो दूसरी ओर बीजेपी नेता इन दावों को लेकर सावधानी बरतने की बात कह रहे हैं। प्रियंका गांधी ने BJP पर साधा निशाना प्रियंका गांधी ने बांकीपुर के राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा कि जनता अब भाजपा से थक चुकी है। उनके बयान को विपक्ष की ओर से बीजेपी के खिलाफ माहौल बनने के दावे के तौर पर देखा जा रहा है। बांकीपुर जैसी चर्चित सीट पर इस तरह की राजनीतिक टिप्पणी इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि यहां का चुनावी मुकाबला लंबे समय से बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय रहा है। कांग्रेस और विपक्षी दल लगातार सरकार और बीजेपी की नीतियों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। Giriraj Singh का Priyanka Gandhi को जवाब प्रियंका गांधी के बयान पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने पलटवार किया। उन्होंने विपक्ष को बांकीपुर के राजनीतिक समीकरणों को लेकर जल्दबाजी में उत्साहित नहीं होने की सलाह दी। गिरिराज सिंह का कहना है कि चुनावी राजनीति में किसी एक घटनाक्रम या बयान के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालना ठीक नहीं है। उन्होंने विपक्ष को संकेत दिया कि अभी ज्यादा खुश होने की जरूरत नहीं है और तस्वीर आगे और साफ होगी। Bankipur में बढ़ी Political हलचल बांकीपुर की राजनीति में इस बयानबाजी के बाद हलचल बढ़ गई है। एक ओर प्रियंका गांधी का बयान कांग्रेस और विपक्ष के लिए उत्साह बढ़ाने वाला माना जा रहा है, वहीं गिरिराज सिंह की प्रतिक्रिया बीजेपी के आत्मविश्वास को दिखाती है। दरअसल, बिहार की राजनीति में हर चुनावी सीट का अपना महत्व है, लेकिन बांकीपुर पर होने वाली राजनीतिक गतिविधियों पर खास नजर रहती है। यही वजह है कि यहां से जुड़े नेताओं के बयान भी तेजी से चर्चा में आ जाते हैं। जनता के मूड पर टिकी निगाहें फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि बांकीपुर में जनता का मूड किस ओर है। राजनीतिक दल अपने-अपने दावे कर रहे हैं, लेकिन अंतिम फैसला मतदाताओं के हाथ में होगा। प्रियंका गांधी के ‘लोग BJP से थक चुके हैं’ वाले बयान और गिरिराज सिंह के ‘ज्यादा खुश न हों’ वाले पलटवार ने बिहार की सियासत में नया राजनीतिक वार-पलटवार जरूर शुरू कर दिया है। आने वाले दिनों में इस सीट को लेकर और बयान सामने आने की संभावना है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Kejriwal

Delhi Politics में फिर हलचल, Kejriwal का PM House की ओर March; Police हुई Alert

दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च शुरू किया। केजरीवाल के इस कदम के बाद दिल्ली पुलिस भी अलर्ट नजर आई और उन्हें प्रधानमंत्री आवास की ओर आगे बढ़ने से रोकने की तैयारी शुरू कर दी गई। मार्च के दौरान बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक उनके साथ नजर आए। जैसे-जैसे काफिला आगे बढ़ा, सुरक्षा व्यवस्था भी सख्त कर दी गई। पुलिस ने फिरोज शाह रोड के आसपास बैरिकेडिंग कर रास्ता रोकने की तैयारी की, ताकि प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका जा सके। PM House की ओर मार्च से बढ़ा राजनीतिक तनाव Kejriwal के प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च ने राजधानी में राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। आम आदमी पार्टी का कहना है कि वह अपनी मांगों और मुद्दों को लेकर सरकार के सामने आवाज उठा रही है। वहीं, पुलिस की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए प्रदर्शन को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है। फिरोज शाह रोड पर पुलिस की मौजूदगी बढ़ने के साथ ही प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच तनाव की स्थिति बनने लगी। पुलिस ने एहतियात के तौर पर बैरिकेड्स लगाए और मार्च के संभावित रास्ते पर सुरक्षा बढ़ाई। दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था सख्त PM House की ओर मार्च को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा इंतजाम कड़े किए हैं। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। अधिकारियों की कोशिश है कि प्रदर्शन के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था न हो और यातायात भी प्रभावित न हो। केजरीवाल के इस मार्च को लेकर आम आदमी पार्टी और बीजेपी के बीच सियासी बयानबाजी तेज होने की संभावना है। राजधानी की राजनीति में यह घटनाक्रम आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। समर्थकों में दिखा उत्साह मार्च के दौरान AAP कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिला। समर्थक नारेबाजी करते हुए केजरीवाल के साथ आगे बढ़ते नजर आए। पार्टी नेताओं का कहना है कि जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर उनकी लड़ाई जारी रहेगी। फिलहाल सबकी नजर इस बात पर है कि पुलिस के बैरिकेड्स के बाद मार्च किस दिशा में जाता है और क्या अरविंद केजरीवाल प्रधानमंत्री आवास तक पहुंच पाते हैं या पुलिस उन्हें रास्ते में ही रोक देती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sugar

Sugar Rate Hike: त्योहारों से पहले चीनी के दाम बढ़े, Blinkit-Swiggy पर खरीदना हुआ Limited

चीनी (Sugar), जो हर घर की रसोई की रोजमर्रा की जरूरत है, इन दिनों लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है। पिछले कुछ हफ्तों में चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसी बीच Blinkit, Swiggy Instamart, BigBasket और D-Mart जैसे रिटेल और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर चीनी की खरीद को लेकर लिमिट लगाई गई है। कई जगहों पर ग्राहक एक बार में 3 से 5 किलो तक ही चीनी खरीद पा रहे हैं। यानी अगर घर में ज्यादा मात्रा में चीनी खरीदने की जरूरत है, तो एक साथ बड़ी खरीदारी करना अब आसान नहीं है। Sugar Price: एक महीने में तेजी से बढ़े दाम Sugar की कीमतों में हालिया तेजी ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब ₹48 प्रति किलो के आसपास थी, जो अगस्त में बढ़कर ₹55 से ऊपर पहुंच गई। इसके बाद कुछ बाजारों में कीमतें और ऊपर गई हैं। शहर और बाजार के हिसाब से कीमतों में अंतर जरूर है, लेकिन जिस रफ्तार से दाम बढ़े हैं, उसका असर घर के मासिक बजट पर साफ दिखाई दे रहा है। Online Grocery पर क्यों लगाई गई खरीद Limit? Blinkit और Swiggy Instamart जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर खरीदारी की लिमिट लगाए जाने के पीछे मुख्य वजह उपलब्ध स्टॉक को संतुलित रखना मानी जा रही है। त्योहारी सीजन में चीनी की मांग अचानक बढ़ जाती है। मिठाइयों से लेकर घर में बनने वाले पकवानों तक, इस दौरान चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसे में कंपनियां ज्यादा मात्रा में खरीदारी को रोककर स्टॉक को ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, यह लिमिट हर जगह एक जैसी नहीं है। कुछ स्थानों पर 5 किलो तक की खरीद की अनुमति है, जबकि कुछ जगहों पर इससे कम मात्रा की सीमा दिखाई दे रही है। चीनी महंगी होने की क्या है वजह? चीनी के दाम बढ़ने के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। घरेलू उत्पादन में कमी, मौसम से जुड़ी परेशानियां, बढ़ती मांग और बाजार में स्टॉक को लेकर गतिविधियां कीमतों पर दबाव बना रही हैं। त्योहारी सीजन भी इस समय एक बड़ा फैक्टर है। रक्षाबंधन के बाद अब आने वाले त्योहारों में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने की उम्मीद है। इसका सीधा असर चीनी की खपत पर पड़ सकता है। सरकार ने Duty-Free Sugar Import को दी मंजूरी बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने और घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के Duty-Free Import की अनुमति दी है। सरकार का लक्ष्य बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों पर दबाव कम करना है। इसके अलावा बड़े थोक खरीदारों के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा में भी बदलाव किया गया है। इससे बाजार में जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करने की गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है। आम लोगों के लिए क्या मतलब? फिलहाल इसका सबसे सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो महीने का राशन एक साथ खरीदते हैं। जहां दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खरीद सीमा लागू है, वहां लोगों को जरूरत के हिसाब से छोटी मात्रा में चीनी खरीदनी पड़ सकती है। दूसरी तरफ, सरकार की ओर से सप्लाई बढ़ाने के कदमों के बाद बाजार में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। अगर नई चीनी समय पर बाजार में पहुंचती है और त्योहारी मांग के मुताबिक स्टॉक उपलब्ध रहता है, तो कीमतों में आगे राहत मिल सकती है। Sugar Price पर आगे रहेगी नजर चीनी के बढ़ते दाम इस समय सिर्फ घरेलू बजट का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि आने वाले त्योहारी सीजन के लिए भी अहम हैं। सरकार, मिलों और रिटेल कंपनियों के फैसलों पर अब बाजार की नजर रहेगी। फिलहाल ग्राहकों के लिए बेहतर यही है कि जरूरत के मुताबिक ही खरीदारी करें और अलग-अलग दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कीमतों की तुलना कर लें। आने वाले दिनों में सप्लाई की स्थिति साफ होने के साथ चीनी के दाम में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
Gold-Silver

Gold-Silver Price: त्योहार से पहले मिली राहत, सोना-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट

Gold-Silver Price Today: रक्षाबंधन की खरीदारी के बीच सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए बाजार से राहत वाली खबर आई है। 27 अगस्त 2026 को सोने और चांदी दोनों के भाव में गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम सस्ता होकर ₹1,58,477 पर आ गया। वहीं, 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 घटकर करीब ₹2,40,168 रह गया। त्योहार से ठीक पहले कीमतों में आई इस कमी से उन लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है, जो राखी के मौके पर बहन या परिवार के लिए सोने-चांदी की ज्वेलरी खरीदने का मन बना रहे हैं। Gold Price Today: सोने के भाव में ₹2,860 की गिरावट 27 अगस्त को 24 कैरेट सोने की कीमत में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली। IBJA आधारित आंकड़ों के अनुसार, सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम टूटकर ₹1,58,477 पर पहुंच गया। वहीं, 23 कैरेट सोना करीब ₹1,57,842, 22 कैरेट सोना लगभग ₹1,45,165 और 18 कैरेट सोना करीब ₹1,18,858 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर रहा। हालांकि, यहां एक बात ध्यान रखना जरूरी है कि शहर और ज्वेलर के हिसाब से Gold Rate थोड़ा अलग हो सकता है। ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और दूसरे शुल्क भी जुड़ते हैं। Silver Price Today: चांदी भी हुई ₹2,791 सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट आई है। 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 कम होकर करीब ₹2,40,168 पर आ गया। चांदी में पिछले दिनों तेजी देखने को मिली थी, इसलिए मौजूदा गिरावट के बावजूद इसका भाव काफी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में चांदी की मांग बढ़ने से इसकी कीमत पर भी असर पड़ सकता है। Raksha Bandhan से पहले क्यों खास है Gold-Silver Price? रक्षाबंधन के मौके पर लोग सिर्फ राखी और मिठाई ही नहीं खरीदते, बल्कि कई परिवार इस दिन सोने या चांदी की छोटी ज्वेलरी खरीदना भी पसंद करते हैं। ऐसे में त्योहार से एक दिन पहले Gold और Silver के दाम में आई गिरावट खरीदारों के लिए अच्छी खबर मानी जा रही है। अगर आप भी खरीदारी की तैयारी कर रहे हैं तो बाजार में जाने से पहले अपने शहर का ताजा रेट जरूर देख लें। ऑनलाइन दिखने वाला IBJA या बुलियन रेट और ज्वेलरी शॉप का अंतिम बिल एक जैसा होना जरूरी नहीं है। सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान सोने की ज्वेलरी खरीदते समय केवल Gold Rate देखना काफी नहीं है। बिल बनते समय मेकिंग चार्ज, GST और अन्य शुल्क जुड़ सकते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले ज्वेलर से पूरी कीमत का ब्रेकअप मांगना बेहतर रहेगा। साथ ही, सोने की शुद्धता के लिए BIS Hallmark जरूर जांचें। इससे आपको खरीदे जा रहे सोने की शुद्धता के बारे में भरोसा मिलता है। आगे क्या हो सकता है Gold और Silver का भाव? सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, ब्याज दरों की उम्मीद और निवेशकों की खरीदारी जैसे कई फैक्टर कीमती धातुओं के भाव को प्रभावित करते हैं। इसलिए आज आई गिरावट को देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि आने वाले दिनों में कीमतें लगातार नीचे जाएंगी। बाजार की चाल बदलने में ज्यादा समय नहीं लगता। Gold-Silver Price Today का सीधा अपडेट रक्षाबंधन से पहले 24 कैरेट Gold करीब ₹2,860 सस्ता होकर ₹1,58,477 प्रति 10 ग्राम और Silver करीब ₹2,791 गिरकर ₹2,40,168 प्रति किलो पर आ गई है। अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने जा रहे हैं, तो अंतिम खरीदारी से पहले अपने स्थानीय बाजार का लेटेस्ट रेट जरूर जांचें।
Raksha Bandhan

Raksha Bandhan 2026: राखी बांधने से पहले जान लें Bhadra का समय, ये है शुभ Muhurat

Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन के रिश्ते में प्यार, अपनापन और थोड़ी-सी नोकझोंक हमेशा बनी रहती है। इन्हीं खूबसूरत रिश्तों को सेलिब्रेट करने वाला रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। राखी को लेकर इस बार एक सवाल काफी लोगों के मन में है—27 अगस्त या 28 अगस्त, आखिर किस दिन भाई की कलाई पर राखी बांधना शुभ रहेगा? पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। Raksha Bandhan 2026 Date: 27 या 28 अगस्त? रक्षाबंधन सावन मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे के बाद शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे तक रहेगी। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए इसी दिन रक्षाबंधन मनाने की परंपरा रहेगी। यानी बहनें 28 अगस्त को भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। Rakhi Shubh Muhurat 2026: इस समय बांधें राखी 28 अगस्त को राखी बांधने के लिए सुबह का समय शुभ माना जा रहा है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार सुबह करीब 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का समय बताया गया है। हालांकि, शुभ मुहूर्त में शहर के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए अगर आप किसी खास शहर में हैं, तो वहां के पंचांग से समय जरूर मिला लें। Bhadra Kaal: इस बार नहीं होगी बड़ी परेशानी रक्षाबंधन पर भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता। यही वजह है कि हर साल राखी बांधने से पहले लोग भद्रा समाप्त होने का इंतजार करते हैं। इस बार राहत की बात यह है कि 28 अगस्त को राखी बांधने के प्रमुख समय में भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। ऐसे में बहनों को राखी बांधने के लिए भद्रा खत्म होने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। Raksha Bandhan 2026: एक नजर में पूरी जानकारी जानकारी विवरण रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार पर्व सावन पूर्णिमा पूर्णिमा शुरुआत 27 अगस्त की सुबह पूर्णिमा समाप्त 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे राखी बांधने का शुभ समय सुबह करीब 5:57 से 9:48 बजे तक भद्रा 28 अगस्त के प्रमुख राखी मुहूर्त में नहीं Rakhi बांधने की पूजा विधि रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करके भगवान का ध्यान करें और पूजा की तैयारी करें। राखी की थाली में रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, फूल, मिठाई और राखी रखें। भाई को आसन पर बैठाकर पहले तिलक लगाएं। इसके बाद अक्षत लगाकर आरती करें और शुभ मुहूर्त में उसकी कलाई पर राखी बांधें। फिर मिठाई खिलाकर भाई के सुखी और खुशहाल जीवन की कामना करें। भाई भी बहन को प्यार और सम्मान के साथ उपहार देता है और हर परिस्थिति में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प करता है। Raksha Bandhan का असली मतलब क्या है? राखी का धागा देखने में भले ही छोटा हो, लेकिन इसके पीछे छिपी भावना बहुत बड़ी है। बचपन में एक-दूसरे से लड़ने वाले भाई-बहन जब बड़े होते हैं तो यही रिश्ता सबसे मजबूत सहारा बन जाता है। रक्षाबंधन इसी भरोसे और अपनापन को फिर से महसूस करने का दिन है। इसलिए इस बार राखी बांधते समय सिर्फ मुहूर्त ही नहीं, बल्कि उस रिश्ते की मिठास को भी याद रखें, जो जिंदगी के हर पड़ाव पर साथ चलती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Kanpur

Kanpur Plane Crash: अचानक नीचे गिरा Training Plane, दो पायलटों की मौत

उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur) से गुरुवार को एक बेहद दुखद खबर सामने आई। गंगा बैराज के पास नत्थूपुरवा गांव के नजदीक एक Twin-Engine Training Aircraft खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में सवार इंस्ट्रक्टर पायलट और ट्रेनी पायलट की मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने इलाके को घेरकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। Training Flight के दौरान हुआ हादसा मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विमान ट्रेनिंग उड़ान पर था और इसी दौरान हादसे का शिकार हो गया। यह चार सीटों वाला ट्विन-इंजन विमान था। शुरुआती जानकारी में बताया गया कि विमान नीचे गिरने से पहले आसपास के लोगों ने तेज आवाज सुनी थी। हालांकि, उस आवाज की वजह क्या थी, इसे लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि विमान गंगा बैराज के करीब नत्थूपुरवा गांव के पास खुले खेत में गिरा। हादसा आबादी वाले इलाके से कुछ दूरी पर हुआ, जिसके बाद स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। हादसे के बाद मची अफरा-तफरी विमान के खेत में गिरने की सूचना मिलते ही पुलिस और इमरजेंसी टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। दुर्घटनाग्रस्त विमान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था और उसका मलबा खेत में बिखरा मिला। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित किया और दोनों पायलटों को मलबे से बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। शुरुआती रिपोर्टों में एक पायलट की मौत और दूसरे के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई थी। बाद में पुलिस अधिकारियों के हवाले से दोनों पायलटों की मौत की पुष्टि हुई। Crash की असली वजह अभी सामने नहीं आई कानपुर Plane Crash की वजह फिलहाल साफ नहीं है। शुरुआती स्तर पर विमान के अचानक नियंत्रण खोने और नीचे गिरने की बात सामने आई है, लेकिन तकनीकी खराबी, इंजन से जुड़ी समस्या या किसी अन्य कारण की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अधिकारियों की ओर से दुर्घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। विमान के मलबे, उड़ान से जुड़ी जानकारी और घटनास्थल से मिले सबूतों की जांच के बाद ही Crash की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी। Aviation Safety पर फिर उठे सवाल कानपुर में हुआ यह हादसा Flight Training के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल खड़े करता है। हालांकि, अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसा किस वजह से हुआ और क्या इसके पीछे कोई तकनीकी या संचालन संबंधी कारण था। फिलहाल प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर मौजूद हैं और मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। कानपुर विमान हादसे से जुड़ी नई जानकारी जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी। Kanpur Plane Crash Latest Update: गंगा बैराज के पास Training Aircraft के क्रैश होने से दो पायलटों की मौत ने इलाके में शोक का माहौल पैदा कर दिया है। हादसे की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही साफ होगी।
Share Market

Share Market Today: Sensex 77,250 के करीब, Nifty भी टूटा; जानें बाजार में क्यों आई गिरावट

भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) में गुरुवार, 27 अगस्त को कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty बढ़त के साथ खुले, लेकिन कुछ ही देर बाद बाजार की चाल बदल गई। बिकवाली बढ़ने से दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में पहुंच गए। सुबह 10:30 बजे Sensex 123.89 अंक की गिरावट के साथ 77,349.05 पर था, जबकि Nifty 24.60 अंक टूटकर 24,183.15 पर कारोबार कर रहा था। Sensex-Nifty पर बढ़ा दबाव गुरुवार की शुरुआत बाजार के लिए सकारात्मक रही। Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से निवेशकों को कुछ राहत मिली, लेकिन यह बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं पाई। Nifty 24,200 के स्तर के नीचे चला गया, वहीं Sensex भी शुरुआती बढ़त गंवाकर कमजोर हो गया। इससे पहले सुबह 10:13 बजे Reuters के आंकड़ों में Sensex 77,379.50 और Nifty 24,191.85 पर था। यानी उस समय दोनों इंडेक्स में हल्की गिरावट दर्ज की जा रही थी। FMCG और Media Shares में बिकवाली सेक्टोरल कारोबार की बात करें तो FMCG शेयरों पर दबाव नजर आया। शुरुआती कारोबार में Nifty FMCG इंडेक्स भी लाल निशान में था। इसके साथ ही Media शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। सुबह 10:30 बजे Nifty Media करीब 0.60 फीसदी नीचे 1,601.30 पर कारोबार कर रहा था। Media इंडेक्स इससे पहले लगातार दो कारोबारी सत्रों में बढ़त दर्ज कर चुका था। ऐसे में आज की गिरावट को कुछ हद तक मुनाफावसूली से भी जोड़कर देखा जा रहा है। HDFC Bank बना बाजार पर दबाव का बड़ा कारण आज बाजार में HDFC Bank का प्रदर्शन भी निवेशकों के रडार पर रहा। शेयर में करीब 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। Reuters के मुताबिक, अमेरिका में बैंक और उसके दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ दायर एक securities lawsuit की खबर के बाद शेयर पर दबाव बढ़ा। Upstox के अनुसार, HDFC Bank में बिकवाली के चलते Sensex दिन के ऊपरी स्तर से करीब 300 अंक नीचे आया, जबकि Nifty 24,200 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे फिसल गया। Global Market से मिले-जुले संकेत भारतीय बाजार को एक तरफ Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से सहारा मिला। Brent crude करीब 87.4 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया था। ईरान और ओमान के बीच Strait of Hormuz को लेकर बातचीत आगे बढ़ने की खबरों से तेल आपूर्ति को लेकर चिंता कुछ कम हुई है। दूसरी ओर, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों को लेकर बनी चिंता ने निवेशकों को थोड़ा सतर्क रखा। यही वजह रही कि एशियाई बाजारों में मजबूती के बावजूद भारतीय बाजार में तेजी टिक नहीं सकी। निवेशकों की नजर अब बाजार की अगली चाल पर फिलहाल घरेलू बाजार में तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। एक तरफ कच्चे तेल में नरमी और मजबूत ग्लोबल टेक्नोलॉजी संकेत सकारात्मक हैं, तो दूसरी तरफ HDFC Bank जैसे बड़े शेयरों में कमजोरी और सेक्टोरल बिकवाली बाजार पर दबाव बना रही है। ऐसे माहौल में Sensex और Nifty की आगे की दिशा, 24,200 के आसपास Nifty की चाल और प्रमुख सेक्टर्स में खरीदारी-बिकवाली पर निवेशकों की नजर रहेगी। बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय लेना बेहतर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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