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लखनऊ-दम्माम इंडिगो फ्लाइट में बम की धमकी, अहमदाबाद में कराई इमरजेंसी लैंडिंग

अहमदाबाद। लखनऊ से सऊदी अरब के दम्माम जा रही इंडिगो की फ्लाइट में गुरुवार को बम की धमकी मिलने से हड़कंप मच गया। उड़ान के दौरान क्रू मेंबर को विमान के टॉयलेट में एक टिश्यू पेपर मिला, जिस पर अंग्रेजी में ‘बम’ लिखा हुआ था। इसके बाद विमान की अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। विमान में 133 यात्री सवार थे। लैंडिंग के बाद सभी यात्रियों को सुरक्षित विमान से उतारकर टर्मिनल-2 ले जाया गया। आइसोलेशन एरिया में ले जाकर विमान की जांच विमान को सामान्य पार्किंग बे के बजाय आइसोलेशन एरिया में ले जाया गया। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने विमान की गहन जांच शुरू की। सुरक्षा टीमों ने विमान के केबिन, सीटों, कार्गो और यात्रियों के सामान की जांच की। शुरुआती जांच में विमान से कोई संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक बरामद नहीं हुआ है। विमान ने लखनऊ से गुरुवार शाम करीब 4:17 बजे उड़ान भरी थी। इसके बाद सुरक्षा कारणों के चलते इसे अहमदाबाद में सुरक्षित उतारा गया। 10 दिन पहले भी मिली थी धमकी इसी रूट की फ्लाइट को करीब 10 दिन पहले भी बम की धमकी मिलने की जानकारी सामने आई थी। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बाद एयरपोर्ट और सुरक्षा एजेंसियां विशेष सतर्कता बरत रही हैं। बम की धमकी मिलने पर क्या होता है प्रोटोकॉल? विमान में बम या विस्फोटक की धमकी मिलने पर सुरक्षा एजेंसियां निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत कार्रवाई करती हैं। फिलहाल शुरुआती जांच में कोई विस्फोटक या संदिग्ध वस्तु नहीं मिलने की जानकारी है। सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं।
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Bihar

Bihar Bridge Construction Accident: लालगंज में अचानक गिरा Launcher, 2 मजदूरों की हालत नाजुक

बिहार (Bihar) के वैशाली जिले के लालगंज में गुरुवार को निर्माणाधीन पुल पर अचानक बड़ा हादसा हो गया। पुल बनाने के काम में इस्तेमाल किया जा रहा भारी Launcher अचानक नीचे गिर गया। हादसे के समय वहां मजदूर काम कर रहे थे, जिनमें कई इसकी चपेट में आ गए। शुरुआती जानकारी के मुताबिक हादसे में 8 मजदूर घायल हुए हैं। इनमें से 2 मजदूरों की हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। आसपास मौजूद लोगों और निर्माण स्थल पर काम कर रहे कर्मचारियों ने घायलों को बाहर निकालने में मदद की। भारतमाला Project के तहत चल रहा था काम लालगंज में जिस जगह यह हादसा हुआ, वहां भारत माला परियोजना के तहत NH-139W फोरलेन का निर्माण चल रहा है। इसी परियोजना के तहत पुल का काम भी किया जा रहा है। निर्माण के दौरान इस्तेमाल होने वाला लॉन्चर अचानक गिरने से यह दुर्घटना हुई। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। राहत और बचाव का काम शुरू किया गया और घायलों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। दो मजदूरों की हालत गंभीर हादसे में घायल मजदूरों में दो की स्थिति गंभीर बताई जा रही है। उन्हें बेहतर इलाज के लिए रेफर किए जाने की जानकारी सामने आई है। बाकी घायलों का भी अस्पताल में इलाज चल रहा है। घटना के बाद प्रशासन ने मौके का जायजा लिया और हादसे की वजह पता करने के लिए जानकारी जुटाई जा रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि लॉन्चर गिरने के पीछे तकनीकी खराबी थी, मशीनरी में कोई समस्या आई या निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा में चूक हुई। Construction Site की Safety पर फिर उठे सवाल निर्माणाधीन पुल पर भारी मशीनरी के इस्तेमाल के दौरान सुरक्षा बेहद जरूरी होती है। ऐसे हादसे में सिर्फ मशीन या निर्माण कार्य को नुकसान नहीं पहुंचता, बल्कि वहां काम कर रहे मजदूरों की जान भी खतरे में पड़ जाती है। लालगंज की घटना के बाद निर्माण स्थल पर Safety Measures और मशीनरी की तकनीकी जांच को लेकर सवाल उठ रहे हैं। प्रशासन की जांच पूरी होने के बाद ही हादसे की वास्तविक वजह सामने आएगी। फिलहाल घायल मजदूरों का इलाज जारी है। सभी की नजर अब गंभीर रूप से घायल दो मजदूरों की हालत पर बनी हुई है।
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Nepal

India-Nepal Relief: बाढ़ से तबाह Nepal के लिए भारत ने भेजी 8वीं बड़ी मदद

Nepal में अगस्त के आखिर में आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। कई इलाकों में घर, सड़कें और पुल बह गए, जबकि हजारों परिवारों की जिंदगी पूरी तरह बदल गई। इस मुश्किल वक्त में भारत लगातार नेपाल के साथ खड़ा है। भारत ने अब 35 टन राहत सामग्री लेकर 8वीं खेप नेपाल भेजी है, जो काठमांडू पहुंच गई है। इस मदद के जरिए बाढ़ प्रभावित लोगों तक जरूरी सामान और Rescue Equipment पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। Nepal Flood में 1367 से ज्यादा लोगों की मौत नेपाल में 26 अगस्त को शुरू हुई इस भीषण आपदा के बाद मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। Reuters के मुताबिक कम से कम 1,367 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 5,000 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। राहत और बचाव टीमें लगातार प्रभावित इलाकों में Search Operation चला रही हैं। इस आपदा की वजह हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर के टूटने से आई भारी बाढ़ बताई जा रही है। तेज बहाव के साथ पानी, मलबा और चट्टानें नीचे की ओर आईं और रास्ते में आने वाले कई गांवों तथा Infrastructure को भारी नुकसान पहुंचा। India ने भेजी 8वीं राहत खेप भारत ने मानवीय सहायता के तहत भारतीय वायुसेना के विमान से 35 टन राहत और बचाव सामग्री नेपाल भेजी है। यह नेपाल के लिए भेजी गई भारत की आठवीं राहत खेप है। इससे पहले भी भारत कई चरणों में राहत सामग्री और विशेषज्ञ टीम नेपाल भेज चुका है। भारत की मदद सिर्फ राहत सामग्री तक सीमित नहीं है। भारतीय विशेषज्ञ नेपाल में Rescue और Forensic Operations में भी सहयोग कर रहे हैं। इससे प्रभावित लोगों की तलाश और आपदा में जान गंवाने वालों की पहचान के प्रयासों को मजबूती मिल रही है। सड़कें और पुल टूटे, Rescue Operation में बड़ी चुनौती बाढ़ ने नेपाल के कई हिस्सों में सड़क और पुलों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया है। यही वजह है कि राहत टीमों के लिए दूरदराज के इलाकों तक पहुंचना आसान नहीं है। कई जगह Helicopter पहले से Search and Rescue Mission में लगे हैं। ऐसे में नेपाल की सेना अब Drones की मदद से राहत सामग्री प्रभावित इलाकों तक पहुंचा रही है। इन ड्रोन के जरिए भोजन, दवाइयां, ईंधन और दूसरी जरूरी चीजें उन जगहों तक भेजी जा रही हैं, जहां सामान्य वाहनों का पहुंचना मुश्किल है। हजारों लोग अभी भी Missing बाढ़ के कई दिन बाद भी हजारों लोगों का पता नहीं चल पाया है। लापता लोगों के परिवार लगातार अपने प्रियजनों की तलाश कर रहे हैं। कई मामलों में शवों की पहचान भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। भारत ने पहले ही Forensic Experts और अन्य विशेषज्ञों को नेपाल भेजा है। जरूरत पड़ने पर DNA आधारित पहचान की प्रक्रिया भी मददगार साबित हो रही है। भारत में भी कुछ परिवार अपने लापता रिश्तेदारों की पहचान के लिए DNA Samples जमा कर रहे हैं। Infrastructure को भी भारी नुकसान नेपाल में इस आपदा से सिर्फ लोगों की जान नहीं गई, बल्कि बड़े पैमाने पर Infrastructure को नुकसान पहुंचा है। सड़कें, पुल, घर और Hydropower Projects प्रभावित हुए हैं। नेपाल अब राहत के साथ-साथ आने वाले समय में Reconstruction की तैयारी भी कर रहा है। सरकार ने शुरुआती Recovery और Reconstruction के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद की जरूरत बताई है। इसका मकसद प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी व्यवस्था करने के साथ जरूरी Infrastructure को दोबारा खड़ा करना है। भारत की मदद से बढ़ी उम्मीद नेपाल इस समय अपने हाल के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। हजारों परिवार अपनों की तलाश में हैं और कई इलाकों में सामान्य जिंदगी वापस लाने की कोशिश जारी है। ऐसे समय में भारत की लगातार राहत सहायता पड़ोसी देश के लिए महत्वपूर्ण है। 35 टन की 8वीं राहत खेप के काठमांडू पहुंचने से Search, Rescue और राहत अभियान को जरूरी सामान मिलने की उम्मीद है। फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक मदद पहुंचाना और नेपाल में धीरे-धीरे सामान्य हालात बहाल करना है।
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BRICS Summit 2026

BRICS Summit 2026: Xi Jinping आएंगे India, PM Modi के साथ Bilateral Talks पर सबकी नजर

नई दिल्ली में होने वाले BRICS Summit 2026 से पहले भारत और चीन के रिश्तों को लेकर हलचल बढ़ गई है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग BRICS बैठक में हिस्सा लेने के लिए भारत आ रहे हैं। उनका यह दौरा इसलिए भी अहम है क्योंकि 2019 के बाद यह उनका पहला India Visit होगा। सबसे ज्यादा नजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और Xi Jinping की Bilateral Meeting पर है। 2019 के बाद पहली बार भारत आएंगे Xi Jinping शी जिनपिंग आखिरी बार 2019 में भारत आए थे। तब प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी मुलाकात तमिलनाडु के मामल्लपुरम में हुई थी। इसके बाद 2020 में गलवान घाटी की हिंसक झड़प ने दोनों देशों के रिश्तों को बड़ा झटका दिया। सीमा पर तनाव के बाद भारत और चीन के बीच लंबे समय तक रिश्ते मुश्किल दौर से गुजरे। राजनीतिक बातचीत, कारोबार और निवेश पर भी इसका असर दिखाई दिया। हालांकि, पिछले कुछ समय से दोनों देशों ने संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य करने की कोशिश की है। Modi-Xi Meeting पर क्यों टिकी हैं निगाहें? BRICS Summit के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात को सिर्फ एक सामान्य कूटनीतिक बैठक के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। दोनों देशों के बीच LAC, Border Peace, Trade और Economic Relations जैसे कई अहम मुद्दे हैं। अगर दोनों नेताओं के बीच विस्तृत बातचीत होती है, तो सीमा पर शांति बनाए रखने और आपसी रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। हालिया रिपोर्टों में भी इस बैठक में LAC की स्थिति और तनाव कम करने के प्रयासों पर चर्चा की संभावना जताई गई है। Galwan Clash के बाद बदले भारत-चीन के रिश्ते 2020 की गलवान झड़प भारत-चीन संबंधों के लिए एक बड़ा turning point साबित हुई थी। इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर कई दौर की बातचीत हुई। समय के साथ सीमा पर स्थिति को संभालने के लिए दोनों पक्षों ने बातचीत का रास्ता बनाए रखा। अब BRICS जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर मोदी और जिनपिंग की आमने-सामने बातचीत को इसी प्रक्रिया की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। Trade और Business Relations भी बड़ा मुद्दा भारत और चीन के बीच सिर्फ सीमा विवाद ही चुनौती नहीं है। दोनों देशों के बीच व्यापार काफी बड़ा है, लेकिन इसके साथ कई तरह की चिंताएं भी जुड़ी हुई हैं। चीनी कंपनियों के निवेश, वीजा, तकनीक और संवेदनशील क्षेत्रों में कारोबार को लेकर भारत सतर्क रहा है। वहीं कुछ भारतीय कारोबारी भी चीन के साथ व्यापार करते समय अलग-अलग व्यावसायिक और नियामकीय अड़चनों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में दोनों नेताओं की बातचीत से Economic Relations को लेकर भी कोई सकारात्मक संकेत मिलने की उम्मीद की जा रही है। BRICS Summit में बड़े नेताओं का जमावड़ा 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में BRICS Summit आयोजित हो रहा है। भारत इस बार BRICS की मेजबानी कर रहा है। सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, आपदा से निपटने और महत्वपूर्ण Supply Chains जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अलावा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन समेत कई प्रमुख नेताओं की मौजूदगी से यह Summit काफी महत्वपूर्ण हो गया है। क्या India-China Relations में आएगा नया मोड़? सबसे बड़ा सवाल यही है कि Modi-Xi Meeting से भारत और चीन के रिश्तों को कितनी नई दिशा मिलती है। दोनों देशों के बीच अभी भी कई मतभेद हैं, लेकिन हाल के महीनों में संवाद और संपर्क बढ़ाने की कोशिशें दिखाई दी हैं। अगर बातचीत सकारात्मक रहती है तो इससे सीमा पर शांति, व्यापार और दोनों देशों के बीच व्यापक संबंधों को आगे बढ़ाने का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक केवल एक बैठक से वर्षों से चले आ रहे मतभेद खत्म नहीं होंगे। फिलहाल दुनिया की नजर BRICS Summit पर है और खासतौर पर इस बात पर कि PM Modi और Xi Jinping की मुलाकात में क्या बातचीत होती है और भारत-चीन रिश्तों के लिए इससे क्या संदेश निकलता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Abu Salem

1993 Mumbai Blast: Abu Salem की Early Release पर Supreme Court ने लगाई रोक, नहीं मिली राहत

1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट केस में उम्रकैद की सजा काट रहे गैंगस्टर अबू सलेम (Abu Salem) को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। सलेम ने जेल से समय से पहले रिहाई यानी Premature Release की मांग की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को भी बरकरार रखा गया है। अबू सलेम ने अपनी याचिका में भारत और पुर्तगाल के बीच हुए प्रत्यर्पण समझौते का हवाला देते हुए कहा था कि भारत सरकार ने उसे 25 साल से ज्यादा जेल में नहीं रखने का आश्वासन दिया था। सलेम का दावा था कि यह अवधि पूरी होने के करीब है और जेल में बिताई गई अवधि तथा मिली रिमिशन को भी गणना में शामिल किया जाना चाहिए। Supreme Court ने क्यों खारिज की याचिका? अबू सलेम की याचिका पर जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई की। कोर्ट के सामने मुख्य मुद्दा यह था कि क्या जेल में मिली Remission को भारत की ओर से पुर्तगाल को दिए गए 25 साल के आश्वासन में शामिल करके सलेम को समय से पहले रिहा किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने उसकी दलील को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया। यानी सलेम को फिलहाल इस आधार पर जेल से बाहर आने का रास्ता नहीं मिला। 25 साल की अवधि को लेकर क्या है पूरा मामला? अबू सलेम को 11 नवंबर 2005 को पुर्तगाल से भारत प्रत्यर्पित किया गया था। प्रत्यर्पण के दौरान भारत की ओर से आश्वासन दिया गया था कि उसे मौत की सजा नहीं दी जाएगी और उसकी कैद 25 साल से अधिक नहीं होगी। इसी आश्वासन को आधार बनाकर सलेम ने अपनी रिहाई की मांग की थी। उसका कहना था कि उसने जेल में लंबा समय बिताया है और अच्छे आचरण के कारण मिलने वाली रिमिशन को भी उसकी सजा की अवधि में जोड़ा जाना चाहिए। हालांकि, अदालत ने इस दलील को राहत देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं माना। नवंबर 2030 क्यों है अहम? अबू सलेम को भारत लाए जाने की तारीख 11 नवंबर 2005 से 25 साल की अवधि की गणना की जाती है। इस हिसाब से यह अवधि नवंबर 2030 में पूरी होगी। यही वजह है कि सलेम की मौजूदा कानूनी स्थिति में 2030 की तारीख महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि प्रत्यर्पण के दौरान पुर्तगाल को दिए गए आश्वासन का भारत को सम्मान करना होगा। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सलेम को 25 साल पूरे होने से पहले अपने आप रिहा किया जा सकता है। रिहाई से जुड़ी प्रक्रिया और कानूनी शर्तें अपनी जगह लागू रहेंगी। 1993 Mumbai Blast Case में मिली थी उम्रकैद अबू सलेम का नाम 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट केस से जुड़ा है। 12 मार्च 1993 को मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस मामले में लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद सितंबर 2017 में अबू सलेम को दोषी ठहराया गया और उम्रकैद की सजा सुनाई गई। इसके अलावा मुंबई के बिल्डर प्रदीप जैन की हत्या के मामले में भी सलेम को उम्रकैद की सजा मिल चुकी है। अभी जेल से बाहर नहीं आएगा अबू सलेम सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद अबू सलेम की Early Release की उम्मीदों को फिलहाल झटका लगा है। कोर्ट ने समय से पहले रिहाई की उसकी मांग को स्वीकार नहीं किया है। अब इस मामले में नवंबर 2030 की अवधि और उससे जुड़ी कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल सलेम को सुप्रीम कोर्ट से तत्काल रिहाई की राहत नहीं मिली है। क्या है मामला एक नजर में? हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Vijay Mallya

Kingfisher Case: Vijay Mallya ने कहा- भारत लौटना चाहता हूं, लेकिन UK की Legal पाबंदी बनी रोड़ा

करीब एक दशक से भारत से बाहर रह रहे कारोबारी Vijay Mallya एक बार फिर चर्चा में हैं। किंगफिशर एयरलाइंस से जुड़े हजारों करोड़ रुपये के बैंक कर्ज और कानूनी मामलों के बीच माल्या ने ब्रिटेन में अपनी स्थिति को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि वह ब्रिटेन से बाहर नहीं जा सकते, ऐसे में भारत लौटने का सवाल ही कैसे हल हो सकता है। माल्या ने सोशल मीडिया पर अपने खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई और उन्हें ‘भगोड़ा’ कहे जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि ब्रिटेन की अदालतों के आदेशों के कारण उनकी आवाजाही पर पाबंदी है। ‘जब UK छोड़ नहीं सकता तो भारत कैसे लौटूं?’ विजय माल्या का कहना है कि लोग उनसे अक्सर पूछते हैं कि वह भारत कब लौटेंगे। लेकिन उनके मुताबिक यह फैसला केवल उनकी इच्छा पर निर्भर नहीं है। ब्रिटेन में चल रही कानूनी प्रक्रिया के कारण उनके लिए देश छोड़ना आसान नहीं है। माल्या ने इसी स्थिति को लेकर सवाल किया कि अगर उन्हें UK से बाहर जाने की कानूनी अनुमति नहीं है, तो फिर भारत नहीं लौटने के लिए उन्हें ‘भगोड़ा’ कहना कितना सही है। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत में माल्या के खिलाफ लंबे समय से कानूनी कार्रवाई चल रही है और उन्हें भारत वापस लाने की कोशिशें भी जारी रही हैं। ‘सोचता हूं कॉकरोच बन जाऊं’ अपने बयान में माल्या ने व्यंग्य के अंदाज में कहा कि कभी-कभी उन्हें लगता है कि शायद कॉकरोच बन जाना ही बेहतर होगा। उनका यह बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर काफी चर्चा होने लगी। माल्या ने अपने खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर ‘अन्याय’ की बात कही। उनका कहना है कि मामले को जिस तरह पेश किया जाता है, उसमें उनकी ओर से किए गए भुगतान और संपत्तियों से हुई Recovery को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। Kingfisher Airlines और ₹9,000 करोड़ का कर्ज विजय माल्या का नाम सबसे ज्यादा Kingfisher Airlines से जुड़े बैंक कर्ज के मामले में सामने आया। एयरलाइन के बंद होने के बाद भारतीय बैंकों का हजारों करोड़ रुपये का कर्ज बकाया रह गया। मीडिया रिपोर्टों में यह रकम करीब ₹9,000 करोड़ बताई जाती रही है। इसी विवाद के बीच माल्या मार्च 2016 में भारत से ब्रिटेन चले गए थे। इसके बाद भारत सरकार ने उनकी वापसी के लिए कानूनी रास्ता अपनाया। माल्या को भारत में Fugitive Economic Offender भी घोषित किया जा चुका है। माल्या का ₹14,131 करोड़ Recovery को लेकर दावा हालिया बयान में माल्या ने Recovery के आंकड़े का भी जिक्र किया। उनका दावा है कि उनकी संपत्तियों से करीब ₹14,131.60 करोड़ की रकम बरामद की जा चुकी है। हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है। करीब ₹9,000 करोड़ का आंकड़ा मुख्य रूप से बैंकों के कर्ज से जुड़े मामले के संदर्भ में सामने आता है, जबकि ₹14,131.60 करोड़ का आंकड़ा माल्या द्वारा बताई गई Recovery से संबंधित है। इसलिए दोनों आंकड़ों को एक ही चीज समझना सही नहीं होगा। भारत वापसी पर अभी भी कानूनी पेंच विजय माल्या की भारत वापसी का मामला केवल उनकी इच्छा से तय होने वाला नहीं है। भारत और ब्रिटेन में उनके खिलाफ चल रही अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाओं का इसमें बड़ा रोल है। एक तरफ भारतीय एजेंसियां और अदालतें मामले को आगे बढ़ा रही हैं, वहीं माल्या ब्रिटेन में अपने खिलाफ हुई कार्रवाई और वहां की कानूनी पाबंदियों का हवाला देते रहे हैं। करीब 10 साल बाद भी विजय माल्या की भारत वापसी का मुद्दा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। उनके ताजा बयान ने एक बार फिर Kingfisher Airlines, ₹9,000 करोड़ के बैंक कर्ज, Recovery और Extradition से जुड़े पुराने विवाद को सुर्खियों में ला दिया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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BSP

Mayawati vs Akash Anand: BSP से बाहर हुए आकाश, ससुर अशोक सिद्धार्थ के संन्यास से जुड़ा मामला

बहुजन समाज पार्टी (BSP) में एक बार फिर बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिला है। पार्टी प्रमुख मायावती (Mayawati) ने अपने भतीजे आकाश आनंद (Akash Anand) को BSP से बाहर कर दिया है। कभी मायावती के उत्तराधिकारी के तौर पर देखे जाने वाले आकाश आनंद को लेकर पिछले कुछ समय से पार्टी के भीतर लगातार उठापटक चल रही थी। अब उनके निष्कासन के बाद BSP की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर चर्चा में आ गई है। आकाश आनंद को पार्टी से निकालने का फैसला ऐसे समय आया है, जब उनके ससुर और BSP के पूर्व नेता अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान किया। यही वजह है कि पूरे घटनाक्रम में परिवार और पार्टी के बीच चल रहा विवाद सबसे ज्यादा चर्चा में है। आकाश आनंद को लेकर मायावती का बड़ा फैसला मायावती ने आकाश आनंद को लेकर अपना रुख पहले ही काफी स्पष्ट कर दिया था। उन्होंने संकेत दिया था कि पार्टी में आकाश की भूमिका तय करने से पहले उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से पूरी तरह अलग होना होगा। अशोक सिद्धार्थ के संन्यास की घोषणा के बाद माना जा रहा था कि आकाश आनंद के लिए पार्टी में दोबारा रास्ता साफ हो सकता है। लेकिन घटनाक्रम ने अचानक दूसरा मोड़ ले लिया। मायावती ने आकाश आनंद को ही पार्टी से बाहर करने का फैसला सुना दिया। इस फैसले ने BSP समर्थकों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश की राजनीति पर नजर रखने वालों को भी चौंका दिया है। ‘ससुर’ को लेकर क्यों शुरू हुआ था विवाद? आकाश आनंद की राजनीतिक सक्रियता में उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ की भूमिका लंबे समय से चर्चा में रही है। मायावती ने आरोप लगाया था कि पार्टी में पारिवारिक और निजी हितों को संगठन के हित से ऊपर नहीं रखा जा सकता। मायावती का मानना रहा है कि BSP का संगठन और बहुजन आंदोलन किसी एक परिवार के इर्द-गिर्द नहीं चल सकता। इसी वजह से आकाश आनंद की राजनीतिक जिम्मेदारियों को लेकर भी कई बार सवाल उठे। अशोक सिद्धार्थ ने अब राजनीति से संन्यास लेने का फैसला कर लिया है। उन्होंने BSP और बहुजन आंदोलन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए यह कदम उठाया। हालांकि, उनके इस फैसले के बावजूद आकाश आनंद की पार्टी में वापसी नहीं हो सकी। पहले भी आकाश आनंद को हटाया जा चुका है आकाश आनंद का BSP में राजनीतिक सफर शुरू से ही आसान नहीं रहा है। मायावती ने उन्हें पार्टी में आगे बढ़ाया और युवा नेतृत्व के तौर पर बड़ी जिम्मेदारी दी थी। एक समय उन्हें मायावती के संभावित राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में भी देखा जाने लगा था। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान उनके बयानों और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर विवाद हुआ। इसके बाद मायावती ने उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से हटा दिया था। बाद में आकाश आनंद की पार्टी में वापसी हुई और उन्हें फिर से संगठन में अहम भूमिका मिली। इससे लगा कि BSP में युवा नेतृत्व को लेकर तस्वीर साफ हो गई है। लेकिन कुछ समय बाद ही परिस्थितियां दोबारा बदल गईं। मायावती के फैसले से उठे कई सवाल आकाश आनंद को BSP से बाहर किए जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि पार्टी अब युवा नेतृत्व को किस तरह आगे बढ़ाएगी। आकाश को लंबे समय तक पार्टी की नई पीढ़ी का चेहरा माना जाता रहा है। ऐसे में उनका निष्कासन केवल संगठनात्मक फैसला नहीं, बल्कि BSP की भविष्य की राजनीति के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। खासकर UP Election 2027 को देखते हुए यह घटनाक्रम काफी महत्वपूर्ण है। उत्तर प्रदेश में BSP को अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की चुनौती पहले से ही है। ऐसे में पार्टी के एक चर्चित युवा चेहरे का बाहर होना चुनावी रणनीति पर भी असर डाल सकता है। अब ईशान आनंद की भूमिका पर नजर आकाश आनंद के बाद अब मायावती के छोटे भाई आनंद कुमार के बेटे ईशान आनंद का नाम भी राजनीतिक चर्चाओं में आने लगा है। पार्टी की भविष्य की रणनीति में ईशान को कितनी जिम्मेदारी मिलती है, यह आने वाले समय में साफ होगा। हालांकि, फिलहाल BSP की ओर से भविष्य के नेतृत्व को लेकर कोई अंतिम तस्वीर सामने नहीं आई है। लेकिन जिस तरह से पिछले कुछ समय में पार्टी के भीतर बदलाव हुए हैं, उससे साफ है कि मायावती संगठन को अपने तरीके से नए सिरे से तैयार करने में जुटी हैं। 2027 चुनाव से पहले BSP में नई रणनीति? उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। ऐसे में BSP में आकाश आनंद का निष्कासन पार्टी की चुनावी रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है। मायावती लंबे समय से BSP के संगठन और नेतृत्व पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए हुए हैं। अब आकाश आनंद के बाहर होने के बाद पार्टी किस चेहरे को आगे करती है और युवाओं के बीच अपनी पकड़ कैसे मजबूत करती है, यह देखने वाली बात होगी। फिलहाल एक बात तय है—आकाश आनंद और उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब BSP के भीतर बड़े राजनीतिक फैसले तक पहुंच चुका है। 2027 के UP Election से पहले मायावती के इस फैसले ने उत्तर प्रदेश की सियासत में एक नई चर्चा जरूर छेड़ दी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bihar

Bihar Flood Crisis: लाखों लोग प्रभावित, UP में सरयू के तेज बहाव से कई घर बहे

Bihar में बाढ़ की स्थिति ने एक बार फिर लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। राज्य के 14 जिलों में 40 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। कई गांवों और निचले इलाकों में पानी भरा हुआ है। कहीं सड़कें डूबी हैं तो कहीं लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है। हालांकि कुछ इलाकों में नदियों का पानी अब धीरे-धीरे कम होने लगा है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। बिहार के बाद अब उत्तर प्रदेश में भी नदियों का बढ़ता जलस्तर चिंता बढ़ा रहा है। रामगंगा नदी के कटाव की वजह से एक मंदिर के नदी में समाने की खबर है, जबकि सरयू के तेज बहाव से कई घरों को नुकसान पहुंचा है। दूसरी तरफ मध्य प्रदेश और राजस्थान के कई हिस्से अब भी अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। Bihar Flood: 14 जिलों में बाढ़, 40 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित बिहार में गंगा समेत कई नदियों के बढ़े जलस्तर ने बड़ी आबादी को प्रभावित किया है। बाढ़ का पानी खेतों, सड़कों और रिहायशी इलाकों तक पहुंच गया है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित परिवारों तक भोजन, पीने का पानी और दूसरी जरूरी चीजें पहुंचाना है। कई जगह लोगों को नावों के सहारे सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है। राहत शिविरों में भी लोगों के रहने और खाने की व्यवस्था की गई है। ग्रामीण इलाकों में बाढ़ का असर ज्यादा दिखाई दे रहा है, जहां लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह प्रभावित हुई है। Ganga का जलस्तर बढ़ने से बढ़ी चिंता बिहार में गंगा का बढ़ता जलस्तर बाढ़ की स्थिति को और गंभीर बना रहा है। कई स्थानों पर नदी खतरे के निशान के आसपास या उससे ऊपर बह रही है। भागलपुर समेत गंगा किनारे के इलाकों में लोगों को खास सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। हालांकि कुछ जगहों पर पानी में कमी आने लगी है। इससे प्रशासन और स्थानीय लोगों को थोड़ी राहत मिली है, लेकिन नदियों के जलस्तर में दोबारा बढ़ोतरी की संभावना को देखते हुए निगरानी जारी है। UP Flood: रामगंगा के कटाव में नदी में समाया मंदिर उत्तर प्रदेश में भी बाढ़ और नदी कटाव ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। रामगंगा नदी के तेज बहाव और कटाव की वजह से एक मंदिर के नदी में समाने की खबर सामने आई है। नदी के किनारे रहने वाले लोगों के लिए यह स्थिति लगातार खतरा पैदा कर रही है। वहीं सरयू नदी के बढ़े जलस्तर से कई इलाकों में पानी पहुंच गया है। कुछ जगहों पर घरों को नुकसान हुआ है और लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा है। नदी किनारे बसे गांवों में प्रशासन की टीम हालात पर नजर बनाए हुए है। राहत और Rescue Operations जारी बिहार और उत्तर प्रदेश के बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव अभियान जारी है। प्रशासन के साथ SDRF और NDRF की टीमें भी जरूरत के मुताबिक तैनात हैं। बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए नावों का इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाने के साथ सामुदायिक रसोई के जरिए भोजन उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। सबसे ज्यादा चिंता उन परिवारों को लेकर है, जिनके घर पानी की चपेट में आ गए हैं। ऐसे लोगों के लिए राहत शिविर फिलहाल सबसे बड़ा सहारा बने हुए हैं। MP और Rajasthan में बारिश का इंतजार जहां बिहार और यूपी में ज्यादा बारिश और नदियों के उफान ने मुश्किलें बढ़ा रखी हैं, वहीं मध्य प्रदेश और राजस्थान के कई इलाकों में लोग अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। मानसून का असर हर राज्य में एक जैसा नहीं दिखाई दे रहा है। कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश से बाढ़ जैसे हालात हैं, तो कुछ जगह बारिश की कमी लोगों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। किसानों की नजर भी अब आने वाले दिनों के मौसम पर टिकी है। अभी खतरा टला नहीं बिहार में पानी कुछ इलाकों में कम जरूर हुआ है, लेकिन लाखों लोगों के प्रभावित होने के कारण स्थिति को सामान्य नहीं कहा जा सकता। उत्तर प्रदेश में भी नदी कटाव और बढ़ते जलस्तर ने खतरा कायम रखा है। आने वाले दिनों में बारिश और नदियों के जलस्तर पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा। प्रशासन की कोशिश है कि बाढ़ प्रभावित लोगों तक समय पर मदद पहुंचे और किसी भी आपात स्थिति में उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके। फिलहाल तस्वीर साफ है—बिहार और यूपी में बाढ़ ने लोगों की मुश्किलें बढ़ाई हैं, जबकि MP और Rajasthan में आसमान से राहत की उम्मीद बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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गांधीनगर में बड़ा हादसा: निर्माणाधीन इमारत पर गिरी क्रेन, 10-15 मजदूरों के दबे होने की आशंका

गांधीनगर। गुजरात के गांधीनगर के पास कुडासन इलाके में बुधवार को एक बड़ा हादसा हो गया। निर्माणाधीन इमारत पर अचानक भारी क्रेन गिर गई। हादसे के समय नीचे काम कर रहे करीब 10 से 15 मजदूरों के मलबे और क्रेन के भारी हिस्सों के नीचे दबे होने की आशंका है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंच गईं। मलबे में फंसे मजदूरों को बाहर निकालने के लिए राहत और बचाव अभियान शुरू कर दिया गया है। मलबा हटाने के लिए दूसरी क्रेन बुलाई गई क्रेन और निर्माण सामग्री के भारी मलबे को हटाने के लिए मौके पर एक और क्रेन बुलाई गई है। बचाव दल मलबे के नीचे दबे मजदूरों तक पहुंचने का प्रयास कर रहा है। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। दमकल की चार से ज्यादा गाड़ियां मौके पर पहुंचकर राहत कार्य में जुटी हैं। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस भी घटनास्थल पर तैनात की गई हैं। फिलहाल हादसे में कितने लोग घायल हुए हैं या किसी की मौत हुई है, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। नगर आयुक्त और डिप्टी CM मौके पर पहुंचे हादसे की गंभीरता को देखते हुए गांधीनगर नगर आयुक्त और गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी भी घटनास्थल पर पहुंचे। अधिकारियों की निगरानी में राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन की प्राथमिकता मलबे में फंसे मजदूरों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकालना है। फिलहाल बचाव अभियान जारी है और हादसे से जुड़ी विस्तृत जानकारी का इंतजार है।
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Apple iPhone 18 Pro और Pro Max लॉन्च, A20 Pro चिप और 45 घंटे तक की बैटरी; पहली बार फोल्डेबल iPhone भी

कैलिफोर्निया। Apple ने अपने नए iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max को लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने दोनों प्रीमियम मॉडल्स में नए डिजाइन, A20 Pro चिप, बेहतर AI फीचर्स और लंबी बैटरी लाइफ पर खास जोर दिया है। लॉन्च इवेंट नए CEO जॉन टर्नस के नेतृत्व में Apple का पहला बड़ा प्रोडक्ट प्रेजेंटेशन भी रहा। दोनों मॉडल चार कलर ऑप्शन में पेश किए गए हैं—डीप ब्लैक, सिल्वर, ग्लेशियर और बरगंडी। iPhone 18 Pro की शुरुआती कीमत 1,199 डॉलर और iPhone 18 Pro Max की 1,299 डॉलर रखी गई है। दोनों के बेस मॉडल में 256GB स्टोरेज दी गई है। A20 Pro चिप से मिलेगा तेज परफॉर्मेंस iPhone 18 Pro सीरीज में नया A20 Pro प्रोसेसर दिया गया है। Apple के मुताबिक यह 2nm टेक्नोलॉजी पर आधारित नई आर्किटेक्चर वाली चिप है। इसमें 6-कोर CPU और नया GPU दिया गया है, जबकि कंपनी ने GPU परफॉर्मेंस में करीब 40 फीसदी तक सुधार का दावा किया है। Apple Intelligence और Siri को भी नए हार्डवेयर के साथ ज्यादा सक्षम बनाया गया है। Siri में AI क्षमताओं और अधिक नैचुरल वॉइस अनुभव पर जोर दिया गया है। कंपनी का कहना है कि डिवाइस पर AI प्रोसेसिंग के साथ प्राइवेसी को भी प्राथमिकता दी गई है। बैटरी लाइफ में बड़ा अपग्रेड iPhone 18 Pro और Pro Max में अब तक की सबसे लंबी iPhone बैटरी लाइफ में से एक मिलने का दावा किया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक iPhone 18 Pro करीब 24 घंटे और Pro Max करीब 30 घंटे तक सामान्य उपयोग में चल सकता है। वहीं वीडियो प्लेबैक में Pro मॉडल करीब 36 घंटे और Pro Max करीब 45 घंटे तक का बैकअप दे सकता है। Pro Max का 45 घंटे का वीडियो प्लेबैक इस सीरीज की सबसे बड़ी बैटरी उपलब्धियों में से एक है। नई फास्ट चार्जिंग तकनीक भी दी गई है। कंपनी के अनुसार फोन करीब 15 मिनट की चार्जिंग में 50 फीसदी तक चार्ज हो सकता है। कैमरा सिस्टम में भी बड़ा बदलाव iPhone 18 Pro सीरीज में कैमरा सिस्टम को भी अपग्रेड किया गया है। मुख्य कैमरे में 48MP सेंसर के साथ डायनेमिक/वेरिएबल अपर्चर दिया गया है, जिससे अलग-अलग रोशनी की परिस्थितियों में फोटो क्वालिटी और लो-लाइट परफॉर्मेंस बेहतर करने में मदद मिलेगी। वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए भी नए प्रो कंट्रोल और 4K Dolby Vision HDR टाइम-लैप्स जैसे फीचर्स जोड़े गए हैं। Apple का पहला फोल्डेबल iPhone भी लॉन्च Apple के इस इवेंट की सबसे बड़ी खासियत कंपनी का पहला फोल्डेबल iPhone भी रहा। यह Apple के स्मार्टफोन डिजाइन में लंबे समय बाद सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है। Reuters के मुताबिक फोल्डेबल iPhone की कीमत 2,000 डॉलर से ज्यादा हो सकती है और कंपनी ने इसे लंबे समय तक इंजीनियरिंग चुनौतियों पर काम करने के बाद पेश किया है। इस साल Apple का फोकस प्रीमियम iPhone मॉडल्स और फोल्डेबल डिवाइस पर ज्यादा रहा है। बेस iPhone मॉडल के लॉन्च शेड्यूल में भी बदलाव किया गया है। नए CEO जॉन टर्नस का पहला बड़ा प्रेजेंटेशन 1 सितंबर को Tim Cook के बाद Apple के CEO बने John Ternus के लिए यह पहला बड़ा प्रोडक्ट लॉन्च प्रेजेंटेशन रहा। Ternus इससे पहले Apple के हार्डवेयर प्रमुख के तौर पर काम कर चुके हैं। Apple के इस इवेंट में iPhone के अलावा नए वियरेबल्स और अन्य प्रोडक्ट्स की घोषणाएं भी की गईं। कंपनी के लिए यह लॉन्च नए CEO के नेतृत्व में उसकी अगली प्रोडक्ट रणनीति की शुरुआत के तौर पर भी अहम माना जा रहा है।
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मां कूष्मांडा

Navratri 2026: चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा, जानें कथा, भोग और मंत्र

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं में उन्हें सृष्टि की रचनात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है। माना जाता है कि उनकी आराधना से भक्तों को उत्साह, सकारात्मकता और नई शुरुआत की प्रेरणा मिलती है। मां कूष्मांडा की पौराणिक कथा पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब चारों ओर अंधकार था, तब मां कूष्मांडा ने अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की। इसी कारण उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति के रूप में पूजा जाता है। यह कथा सृजन और ऊर्जा के महत्त्व को दर्शाती है। मां का स्वरूप और महत्त्व पूजा विधि मंत्र: ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः। भोग: मां को मालपुआ या मीठे फल अर्पित करने की परंपरा कुछ क्षेत्रों में प्रचलित है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gandhinagar

Gandhinagar Municipal Election: भाजपा को बहुमत, कांग्रेस को फायदा; AAP को एक भी सीट नहीं

Gandhinagar Municipal Election गुजरात की राजधानी गांधीनगर के नगर निगम चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर अपना दबदबा कायम रखा है। 44 सीटों वाले नगर निगम में भाजपा ने 38 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया। वहीं, कांग्रेस 5 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर रही, जबकि आम आदमी पार्टी (AAP) इस बार अपना खाता भी नहीं खोल पाई। एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की। 13 अक्टूबर को सामने आए चुनाव परिणामों में भाजपा के लिए राहत की बात यह रही कि नगर निगम की सत्ता उसके पास बनी रही। हालांकि, पिछली बार के मुकाबले पार्टी की सीटें कम हुई हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस ने अपनी सीटों की संख्या बढ़ाकर स्थानीय राजनीति में अपनी मौजूदगी मजबूत की है। Gandhinagar Election Result: BJP को 38, कांग्रेस को मिलीं 5 सीटें गांधीनगर नगर निगम की 44 सीटों के लिए 11 अक्टूबर को मतदान हुआ था। चुनाव में अलग-अलग राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई। मतगणना के बाद भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई। पार्टीवार नतीजे इस प्रकार रहे: इन आंकड़ों से साफ है कि भाजपा ने नगर निगम में बहुमत बनाए रखा है। वहीं, कांग्रेस को मिली पांच सीटें और AAP का खाता नहीं खुलना इस चुनाव के प्रमुख नतीजे रहे। पिछली बार से BJP की सीटें घटीं, कांग्रेस ने बढ़ाई ताकत गांधीनगर नगर निगम के पिछले चुनाव अक्टूबर 2021 में हुए थे। उस समय भाजपा ने 44 में से 41 सीटों पर जीत दर्ज की थी। कांग्रेस को दो सीटें मिली थीं, जबकि आम आदमी पार्टी ने भी एक सीट हासिल की थी। इस बार तस्वीर में कुछ बदलाव देखने को मिला। भाजपा की सीटें 41 से घटकर 38 रह गईं, जबकि कांग्रेस दो से बढ़कर पांच सीटों तक पहुंच गई। AAP पिछले चुनाव में मिली अपनी एकमात्र सीट भी नहीं बचा सकी। यानी भाजपा ने अपनी सत्ता कायम रखी, लेकिन कांग्रेस ने पिछली बार के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया। इन नतीजों ने गांधीनगर की स्थानीय राजनीति में दोनों प्रमुख दलों की स्थिति को फिर चर्चा में ला दिया है। Ward No. 6 Result: कांग्रेस ने चारों सीटों पर दर्ज की जीत गांधीनगर नगर निगम चुनाव में वार्ड नंबर 6 का परिणाम भी खास रहा। यहां कांग्रेस ने सभी चार सीटों पर जीत दर्ज की। वार्ड नंबर 7 में भी कांग्रेस को एक सीट मिली, जबकि बाकी तीन सीटों पर भाजपा के उम्मीदवार विजयी रहे। इसके अलावा, वार्ड नंबर 2 में निर्दलीय उम्मीदवार दीपिका वाघेला ने जीत हासिल की। यह परिणाम दिखाता है कि भाजपा को कुल मिलाकर स्पष्ट बहुमत मिलने के बावजूद कुछ वार्डों में मुकाबला अलग रहा। Gandhinagar Municipal Election: कितना रहा मतदान? गांधीनगर नगर निगम चुनाव में 59.25 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। चुनाव के लिए 11 वार्डों की 44 सीटों पर कुल 130 उम्मीदवार मैदान में थे। 11 अक्टूबर को मतदान के बाद 13 अक्टूबर को मतगणना हुई। नतीजे सामने आने के साथ ही यह स्पष्ट हो गया कि भाजपा नगर निगम में अपना बहुमत बरकरार रखने में सफल रही है। Gujarat Civic Polls: थारा और ओखा में भी BJP को बढ़त गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में गांधीनगर के अलावा थारा और ओखा नगरपालिका के नतीजे भी चर्चा में रहे। थारा नगरपालिका की 24 सीटों में भाजपा ने 19 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस को पांच सीटें मिलीं। वहीं, ओखा नगरपालिका में मतदान वाली 32 सीटों में भाजपा ने 29 और कांग्रेस ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की। ओखा में चार अन्य सीटें भाजपा पहले ही निर्विरोध जीत चुकी थी। इस तरह गांधीनगर, थारा और ओखा के चुनाव परिणामों में भाजपा ने अपनी स्थिति बनाए रखी। हालांकि, गांधीनगर में कांग्रेस की सीटें बढ़ना भी इन नतीजों का एक अहम पहलू रहा। Gandhinagar Election Result 2026: आगे किस पर रहेगी नजर? चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद अब गांधीनगर नगर निगम में नई परिषद के गठन और महापौर के चयन की प्रक्रिया पर नजर रहेगी। महापौर पद को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल, चुनाव का सबसे बड़ा नतीजा यही है कि भाजपा ने 38 सीटों के साथ नगर निगम में अपना बहुमत बरकरार रखा है। कांग्रेस को पिछले चुनाव के मुकाबले तीन सीटों का फायदा हुआ, जबकि AAP इस बार एक भी सीट हासिल नहीं कर सकी। गांधीनगर के ये नतीजे स्थानीय निकाय की राजनीति में भाजपा की स्थिति और कांग्रेस की बढ़ी हुई सीटों, दोनों को सामने रखते हैं। आने वाले समय में नगर निगम के फैसलों और नई परिषद के कामकाज पर लोगों की नजर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
UPI

UPI Charges Update: ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर 0.4% फीस, दिवाली तक टला फैसला

UPI Transaction Charges में डिजिटल पेमेंट करने वाले दुकानदारों और कारोबारियों के लिए UPI चार्ज से जुड़ा अहम अपडेट सामने आया है। ₹2,000 से ज्यादा के चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% फीस लगाने की व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होनी थी, लेकिन त्योहारी सीजन को देखते हुए इसे दिवाली तक टालने की जानकारी सामने आई है। इससे त्योहारों के दौरान डिजिटल पेमेंट करने वाले कारोबारियों को फिलहाल राहत मिल सकती है। हालांकि, इस फैसले से जुड़ी नई तारीख और लागू होने वाली शर्तों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। इसलिए ग्राहकों और दुकानदारों को किसी भी बदलाव से पहले संबंधित दिशानिर्देशों पर ध्यान देना चाहिए। UPI Payment Charges: क्या है पूरा मामला? आज देश में छोटी दुकानों से लेकर बड़े शोरूम तक UPI के जरिए भुगतान किया जाता है। सब्जी खरीदने से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग और बड़े बिलों का भुगतान करने तक, QR कोड स्कैन करना लोगों की रोजमर्रा की आदत बन चुका है। इसी बीच ₹2,000 से ज्यादा के कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने की चर्चा है। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होने वाली थी, लेकिन दिवाली के दौरान बाजार में बढ़ने वाली खरीदारी और डिजिटल लेनदेन को देखते हुए इसे आगे बढ़ाने की बात कही गई है। यहां समझना जरूरी है कि MDR का संबंध कारोबारी भुगतान से है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर UPI यूजर को पैसे भेजने या प्राप्त करने पर अतिरिक्त फीस देनी होगी। क्या PhonePe और Google Pay से पेमेंट करना होगा महंगा? UPI चार्ज की खबर सामने आने के बाद कई लोगों के मन में सवाल है कि क्या PhonePe, Google Pay और दूसरे UPI ऐप से भुगतान करने पर अब अतिरिक्त पैसे देने होंगे। फिलहाल आम ग्राहकों को यह समझना चाहिए कि प्रस्तावित मर्चेंट चार्ज और व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले UPI ट्रांसफर अलग-अलग हैं। सामान्य P2P ट्रांजैक्शन पर इस तरह का MDR लागू नहीं होता। इसी तरह, निर्धारित नियमों के तहत आने वाले छोटे मूल्य के मर्चेंट ट्रांजैक्शन भी इस चार्ज से बाहर रह सकते हैं। इसलिए यह मान लेना सही नहीं होगा कि ₹2,000 से अधिक का हर UPI पेमेंट महंगा हो जाएगा। दुकानदारों को क्यों मिल सकती है राहत? दिवाली के समय बाजारों में ग्राहकों की भीड़ बढ़ जाती है। कपड़े, मिठाई, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल और घरेलू सामान की दुकानों पर डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ता है। ऐसे में ट्रांजैक्शन चार्ज से जुड़े फैसले को आगे बढ़ाने से कारोबारियों को त्योहार के दौरान भुगतान व्यवस्था में बदलाव के लिए अतिरिक्त समय मिल सकता है। खासकर छोटे दुकानदारों के लिए यह मुद्दा महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनके कारोबार में UPI पेमेंट की बड़ी भूमिका होती है। हालांकि, चार्ज किस पर और किन शर्तों के तहत लागू होगा, यह संबंधित आधिकारिक नियमों पर निर्भर करेगा। UPI Transaction Fee: कब लागू होगा नया नियम? ₹2,000 से अधिक के पात्र मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% फीस से जुड़े फैसले को दिवाली तक टालने की खबर सामने आई है। लेकिन नई लागू तारीख और अंतिम नियमों की पुष्टि आधिकारिक घोषणा से ही की जानी चाहिए। इसलिए ग्राहकों और कारोबारियों को फिलहाल किसी भी अपुष्ट जानकारी के आधार पर यह नहीं मानना चाहिए कि सभी UPI पेमेंट पर चार्ज लगने वाला है। UPI यूजर्स के लिए जरूरी सलाह UPI ने देश में डिजिटल भुगतान को आसान और तेज बनाया है। ऐसे में चार्ज से जुड़ी किसी भी नई व्यवस्था का असर समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि नियम किस प्रकार के ट्रांजैक्शन पर लागू होता है। आम यूजर्स को अपने सामान्य डिजिटल पेमेंट को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। वहीं, दुकानदारों को किसी भी संभावित चार्ज के बारे में अपने बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर से जानकारी लेनी चाहिए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
SIR

Patna SIR Protest: पटना में छात्रों का हंगामा, बैरिकेडिंग तोड़ी; छात्राओं को खींचकर ले जाने का आरोप

बिहार की राजधानी पटना (Patna) में SIR (Special Intensive Revision) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के विरोध में सड़क पर उतरे छात्रों और प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़ दी। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की खबर सामने आई। वहीं, पुलिस की गाड़ी की चाबी लेकर भागने और प्रदर्शन कर रही छात्राओं को खींचकर ले जाने के आरोपों ने भी इस मामले को चर्चा में ला दिया है। प्रदर्शन की इन घटनाओं के बीच अब पुलिस की कार्रवाई और SIR की प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों पर सबकी नजर है। Patna में SIR के खिलाफ प्रदर्शन, सड़क पर उतरे छात्र पटना में SIR के विरोध में छात्रों और विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों की नाराजगी मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर है। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है, ताकि किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलती से मतदाता सूची से न हटे। SIR यानी Special Intensive Revision का उद्देश्य मतदाता सूची की विशेष जांच और उसे अपडेट करना है। हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों और कुछ संगठनों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए। Protest के दौरान टूटी बैरिकेडिंग, पुलिस से टकराव प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी। रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़ दी। इसके बाद मौके पर तनाव बढ़ गया और पुलिस के साथ टकराव की स्थिति बन गई। इसी दौरान पुलिस की गाड़ी की चाबी लेकर भागने की घटना भी सामने आई है। हालांकि, इस घटना की परिस्थितियों और इसमें शामिल लोगों के बारे में आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। छात्राओं को खींचकर ले जाने का आरोप पटना में हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि प्रदर्शन कर रही कुछ छात्राओं को पुलिसकर्मी खींचकर वहां से ले गए। इस घटना को लेकर प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस के व्यवहार पर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, छात्राओं की संख्या, उन्हें हिरासत में लिए जाने की स्थिति और इस मामले में पुलिस का पक्ष स्पष्ट होने के बाद ही घटनाक्रम की पूरी जानकारी सामने आएगी। क्या है SIR और क्यों हो रहा है इसका विरोध? SIR का पूरा नाम Special Intensive Revision है। यह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है, जिसके तहत मतदाताओं के विवरण की जांच की जाती है और सूची को अपडेट किया जाता है। इस प्रक्रिया का विरोध कर रहे संगठनों की प्रमुख चिंता यह है कि जांच के दौरान किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से नहीं हटना चाहिए। उनका जोर पारदर्शिता, सही दस्तावेजों और मतदाताओं को अपनी शिकायत दर्ज कराने का उचित अवसर देने पर है। वहीं, मतदाता सूची को अपडेट करना चुनावी प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। ऐसे में इस मुद्दे पर स्पष्ट दिशा-निर्देश और शिकायतों का समय पर समाधान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Patna Protest के बाद पुलिस की कार्रवाई पर नजर पटना में SIR के खिलाफ हुए इस प्रदर्शन के बाद अब पुलिस की कार्रवाई और घटनास्थल से सामने आने वाले तथ्यों पर नजर रहेगी। बैरिकेडिंग तोड़ने, पुलिस की गाड़ी की चाबी लेकर भागने और छात्राओं को खींचकर ले जाने के आरोपों की पुष्टि के लिए आधिकारिक बयान और उपलब्ध वीडियो अहम होंगे। फिलहाल, इस घटना से जुड़ी सभी जानकारियों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। मामले में पुलिस का आधिकारिक पक्ष और हिरासत से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Stock Market

Stock Market Today: सेंसेक्स 600 अंक उछला, Nifty में 200 अंकों की तेजी; IT और Banking Stocks में खरीदारी

भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में मंगलवार, 13 अक्टूबर को कारोबार के दौरान अच्छी तेजी देखने को मिली। शुरुआती उतार-चढ़ाव के बाद सेंसेक्स ने जोरदार वापसी की और 600 अंकों से ज्यादा की बढ़त दर्ज की। वहीं, निफ्टी भी करीब 200 अंक चढ़ गया। IT और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी बढ़ने से बाजार को सहारा मिला। सुबह करीब 10 बजे BSE Sensex 72,500 के ऊपर कारोबार कर रहा था, जबकि NSE Nifty 50 भी 22,500 के पार पहुंच गया। बाजार में आई इस तेजी से निवेशकों को राहत मिली। हालांकि, कई शेयरों में बिकवाली जारी रहने से बाजार की तस्वीर पूरी तरह एक जैसी नहीं रही। Sensex-Nifty में तेजी, निवेशकों को मिली राहत शेयर बाजार में मंगलवार को खरीदारी का माहौल मजबूत होता दिखाई दिया। सेंसेक्स करीब 660 अंक चढ़कर 72,585 के आसपास पहुंच गया। दूसरी ओर, निफ्टी में लगभग 202 अंकों की बढ़त दर्ज की गई और यह 22,565 के स्तर के करीब कारोबार करता नजर आया। पिछले सत्रों में बाजार पर दबाव देखने को मिला था। ऐसे में प्रमुख सूचकांकों में आई इस तेजी ने निवेशकों को कुछ राहत दी। हालांकि, बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। IT Stocks में सबसे ज्यादा हलचल मंगलवार को IT सेक्टर के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। HCL Technologies और Tata Consultancy Services (TCS) के शेयरों में मजबूत बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा Infosys और Tech Mahindra के शेयरों पर भी निवेशकों की नजर रही। IT कंपनियों के तिमाही नतीजों और कारोबार से जुड़े अपडेट का असर शेयरों पर दिखाई दिया। खासकर HCLTech के नतीजों से जुड़ी सकारात्मक खबरों ने सेक्टर में खरीदारी को बढ़ावा दिया। IT शेयरों में आई तेजी ने सेंसेक्स और निफ्टी को ऊपर ले जाने में अहम भूमिका निभाई। Banking Stocks ने भी दिया बाजार का साथ IT शेयरों के साथ बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में भी निवेशकों ने दिलचस्पी दिखाई। HDFC Bank, State Bank of India (SBI), Bajaj Finance और Bajaj Finserv जैसे शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। बैंकिंग शेयरों में बढ़त का असर बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर भी पड़ा। हालांकि, सभी सेक्टरों में एक जैसी तेजी नहीं रही। कुछ शेयरों में कमजोरी बनी रही, जिससे पता चलता है कि निवेशक चुनिंदा कंपनियों में ही पैसा लगा रहे थे। रुपये की मजबूती से बाजार को सहारा शेयर बाजार के अलावा मुद्रा बाजार में भी हलचल देखने को मिली। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती से निवेशकों की धारणा को कुछ समर्थन मिला। रुपये की चाल पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के कदमों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और डॉलर की वैश्विक स्थिति का असर पड़ता है। हालांकि, आने वाले दिनों में रुपये की दिशा काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक हालात पर निर्भर करेगी। महंगाई और कच्चे तेल पर भी रहेगी नजर बाजार में तेजी के बावजूद निवेशकों की चिंताएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। खुदरा महंगाई, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और अंतरराष्ट्रीय बाजारों का रुख आने वाले दिनों में शेयर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे समय में कंपनियों के तिमाही नतीजे भी महत्वपूर्ण हैं। बेहतर नतीजे पेश करने वाली कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ सकती है, जबकि कमजोर प्रदर्शन करने वाले शेयरों पर दबाव बना रह सकता है। निवेशकों के लिए क्या है संकेत? सेंसेक्स और निफ्टी में आई तेजी बाजार के लिए राहत की खबर है, लेकिन इसे लगातार तेजी की गारंटी नहीं माना जा सकता। बाजार में निवेश करने से पहले कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, शेयर की कीमत और उससे जुड़े जोखिमों को समझना जरूरी है। कुल मिलाकर, 13 अक्टूबर को IT और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी के दम पर भारतीय शेयर बाजार ने मजबूती दिखाई। अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि बाजार अपनी बढ़त को कितना बरकरार रखता है और आने वाले कारोबारी सत्रों में वैश्विक संकेत किस तरह असर डालते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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