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Shiv Sena

Shiv Sena –BJP Rift सुरक्षा कवर कटौती और सीट शेयरिंग पर तेज हुआ टकराव

महाराष्ट्र की राजनीति में Maharashtra Politics Rift एक बार फिर सुर्खियों में है। महायुति गठबंधन की दो मुख्य पार्टियों — शिंदे गुट की शिवसेना (Shiv Sena) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) — के बीच खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। हाल ही में हुई घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि सत्ता में साझेदारी के बावजूद दोनों दलों के बीच विश्वास की कमी लगातार बढ़ रही है। Cabinet Meeting से शिवसेना मंत्रियों की दूरी – क्या है मामला? हाल ही में आयोजित महाराष्ट्र कैबिनेट की एक अहम बैठक में शिंदे गुट के कई मंत्री शामिल नहीं हुए। यह बहिष्कार बताता है कि गठबंधन के भीतर संवाद और भरोसा दोनों कमजोर हो रहे हैं। फडनवीस–शिंदे असहमति पर विपक्ष का वार शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत ने बड़ा दावा किया है कि: सुरक्षा कवर में कटौती से बढ़ी दरार शिंदे गुट के कई नेताओं की Y-Category Security में कटौती किए जाने पर विवाद और गहरा गया। यह मुद्दा महायुति में अविश्वास की एक और परत जोड़ रहा है। Local Body Elections: Seat-Sharing पर टकराव निकट भविष्य में होने वाले नगर निगम और नगर परिषद चुनावों के लिए सीट शेयरिंग पर भी जोरदार मतभेद हैं। थाणे जैसे संवेदनशील क्षेत्र में यह टकराव और गंभीर माना जा रहा है। विकास और स्थानीय मुद्दों पर भी विवाद रत्नागिरी जिले में अनधिकृत निर्माण को लेकर विधान परिषद में दोनों दलों में जोरदार बहस हुई।यह स्पष्ट संकेत है कि विवाद केवल सत्ता और सीटों तक सीमित नहीं — स्थानीय विकास के मुद्दे भी संघर्ष का कारण बन रहे हैं। गठबंधन में दरार के बावजूद चुनावी रणनीति जारी नंदगांव नगर परिषद के चुनाव में शिवसेना-BJP ने मिलकर लड़ने का फैसला किया है।हालांकि यह गठबंधन है, लेकिन राजनीतिक पंडित मानते हैं कि यह सिर्फ मजबूरी का साथ है, न कि स्थायी भरोसे का संकेत। शिवसेना (शिंदे गुट) और BJP के बीच लगातार सामने आ रहे विवाद यह दिखाते हैं कि: महाराष्ट्र की राजनीति अब एक ऐसे मोड़ पर है जहां Alliance Stability, Political Trust और Power Balance तीनों बड़े सवाल बने हुए हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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गृहमंत्री अमित शाह ने दी थी Hidma को खत्म करने की डेडलाइन, 12 दिन पहले ही ढेर

गृहमंत्री अमित शाह ने दी थी Hidma को खत्म करने की डेडलाइन, 12 दिन पहले ही ढेर

भारत सरकार की कड़ी कार्रवाई और मजबूत इंटेलिजेंस ऑपरेशन के बाद देश के सबसे खतरनाक नक्सली कमांडर Hidma को आखिरकार सुरक्षा बलों ने मार गिराया। कहा जाता है कि गृहमंत्री अमित शाह ने हिड़मा को खत्म करने की एक समयसीमा (Deadline) तय की थी, और उससे 12 दिन पहले ही यह बड़ी सफलता मिल गई। हिड़मा वही नाम है, जिसके नाम से जंगल का बच्चा-बच्चा डरता था। वह 2010 में दांतेवाड़ा में हुए हमले का मुख्य आरोपी था, जिसमें 76 CRPF जवान शहीद हो गए थे। इस हमले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था और सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े हुए थे। यही वजह थी कि हिड़मा नक्सली दुनिया का सबसे वांछित चेहरा बन गया। सरकार, सुरक्षा एजेंसियां और स्पेशल फोर्सेज लगातार हिड़मा का पीछा कर रही थीं। कई सालों तक वह घने जंगलों, पहाड़ी इलाकों और स्थानीय नेटवर्क की मदद से बचता रहा। लेकिन इस बार केंद्रीय एजेंसियों ने सटीक जानकारी जुटाई और संयुक्त ऑपरेशन में उसे ढेर कर दिया। इस सफलता के बाद सुरक्षा बलों का मनोबल और भी मजबूत हुआ है और नक्सल समस्या पर एक ऐतिहासिक प्रहार माना जा रहा है। अब सरकार का लक्ष्य बचे हुए नेटवर्क को भी पूरी तरह खत्म करना है ताकि बस्तर, छत्तीसगढ़ और आस-पास के इलाकों में शांति और विकास का रास्ता तेज हो सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bihar

Bihar राजनीति चुनावी हार पर Prashant Kishor का मौन व्रत ऐलान जनता से मांगी माफी

Bihar विधानसभा चुनाव 2025 में करारी हार के बाद जन सुराज पार्टी (JSP) के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) ने बड़ा बयान दिया है। चुनाव में पार्टी के एक भी सीट न जीत पाने के बाद PK ने कहा कि वे 100% Responsibility लेते हैं और इसके लिए बिहार की जनता से माफी मांगते हैं। उन्होंने आत्ममंथन के लिए Maun Vrat (मौन व्रत) रखने का भी ऐलान किया है। जनता का भरोसा नहीं जीत पाए, यह मेरी गलती”—PK का स्वीकारोक्ति प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रशांत किशोर ने कहा:“जन सुराज पार्टी जनता का विश्वास नहीं जीत सकी। पूरी जिम्मेदारी मेरी है। मैं इसके लिए Bihar की जनता से माफी मांगता हूं।” PK ने स्वीकार किया कि पहली बड़ी चुनावी परीक्षा में JSP का प्रदर्शन उम्मीदों के बिल्कुल उलट रहा। उन्होंने बताया कि वे चुनाव मैदान में नहीं थे और पूरा फोकस संगठन निर्माण पर रखा गया था। Maun Vrat का ऐलान: आत्ममंथन की शुरुआत PK ने घोषणा की कि वे चुनावी हार के बाद एक दिन का मौन व्रत रखेंगे।उन्होंने कहा—“हम introspection करेंगे कि कहां कमी रह गई, मौन व्रत इसी दिशा में पहला कदम है।” भारतीय राजनीति में किसी नेता द्वारा इतनी ईमानदारी से हार स्वीकार करना और आत्म-विश्लेषण करना एक दुर्लभ कदम माना जा रहा है। Bihar Election 2025: JSP का Complete Wipeout प्रशांत किशोर ने पहले ही ऐलान कर दिया था कि वे खुद चुनाव नहीं लड़ेंगे, क्योंकि उनकी प्राथमिकता जनता के बीच नई राजनीतिक सोच और मॉडल खड़ा करना है। PK ने क्यों लिया था चुनाव न लड़ने का फैसला? अपने अभियान के दौरान PK ने कई बार कहा कि: लेकिन नतीजे बताते हैं कि JSP जनता को अपनी ओर आकर्षित नहीं कर पाई। Political Impact: हार के बाद PK की रणनीति पर नज़र राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि— 2025 के चुनाव में जन सुराज पार्टी भले ही परफॉर्म नहीं कर पाई, लेकिन Prashant Kishor की हार स्वीकारोक्ति, Responsibility लेना, और Maun Vrat का फैसला आने वाले समय में Bihar की राजनीति में नया अध्याय लिख सकता है। JSP अब जन-आधार को दोबारा मजबूत करने की तैयारी में जुट गई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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कड़ाके की ठंड ने तोड़ा रिकॉर्ड : Mount Abu में पारा शून्य, बद्रीनाथ में झीलें-जमे झरने

कड़ाके की ठंड ने तोड़ा रिकॉर्ड : Mount Abu में पारा शून्य, बद्रीनाथ में झीलें-जमे झरने

देश के कई हिस्सों में ठंड ने इस बार समय से पहले दस्तक दे दी है। राजस्थान के Mount Abu में तापमान 0 डिग्री तक पहुंच गया, जिससे ओस भी बर्फ में बदल गई। सुबह-सुबह पेड़ों, गाड़ियों और खेतों पर जमी सफेद परत देखने पर लोगों को कश्मीर जैसी ठंड का अहसास हुआ। वहीं उत्तराखंड के बद्रीनाथ में भी झीलें और झरने जमने लगे हैं, जिससे लोगों को आवाजाही और रोज़मर्रा के कामों में दिक्कत होने लगी है। MP में शीतलहर अलर्ट – स्कूलों के टाइम बदले मध्य प्रदेश के 26 जिलों में शीतलहर का अलर्ट जारी किया गया है। कड़ाके की ठंड और तेज हवा को देखते हुए कई जिलों में स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है ताकि बच्चे सुरक्षित रहें और उन्हें ठंड से बचाया जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Tejashwi Yadav

Tejashwi Yadav विवाद: रोहिणी आचार्य ने तोड़े रिश्ते, लालू परिवार का संकट गहराया

राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के परिवार में लगातार बढ़ रही खींचतान अब एक बड़े राजनीतिक विवाद में बदल गई है। बेटी रोहिणी आचार्य के तेजस्वी यादव और उनके करीबियों पर लगाए गए आरोपों ने न सिर्फ परिवार के भीतर की परेशानियों को बाहर ला दिया है, बल्कि राजद की राजनीतिक छवि पर भी बड़ा असर डाल दिया है। Rohini vs Tejashwi: क्यों शुरू हुआ Family Feud? बिहार चुनाव में राजद की हार के बाद रोहिणी आचार्य ने सार्वजनिक रूप से अपने भाई तेजस्वी यादव, उनके सलाहकार संजय यादव, और सहयोगी रमीज़ नमत खान पर कई आरोप लगाए।उनके अनुसार पार्टी का संचालन गलत ढंग से हुआ और राजद की रणनीतियों को गलत दिशा दी गई। रोहिणी के मुख्य आरोप: इन बयानों के बाद विवाद और भी गहरा हो गया। परिवार की तीन और बेटियाँ घर छोड़ गईं कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि रोहिणी के आरोपों के बाद लालू परिवार की तीन और बेटियाँ भी तनाव के कारण घर से बाहर चली गईं।हालाँकि रोहिणी का कहना है कि: उन्हें सपोर्ट कर रही हैं, लेकिन उनका विवाद सिर्फ तेजस्वी से है। इसी बीच BJP सहित विपक्ष ने इस मामले को उठाते हुए लालू परिवार पर “महिलाओं के प्रति गलत रवैये” का आरोप लगाया। Net Worth Clash: किसके पास ज्यादा संपत्ति? इस फैमिली फ्यूड के बीच रोहिणी और तेजस्वी की नेट वर्थ तुलना भी सुर्खियों में है। Tejashwi Yadav Net Worth: Rohini Acharya Net Worth: आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, नेट वर्थ की यह तुलना भी विवाद को और गरमाने का बड़ा कारण बन रही है। Political Impact: राजद पर क्या असर पड़ेगा? राजद की मौजूदा राजनीतिक स्थिति को देखते हुए यह विवाद पार्टी के लिए नुकसानदायक माना जा रहा है। लालू प्रसाद यादव का परिवार फिलहाल गंभीर मतभेदों से गुजर रहा है।रोहिणी के आरोप, सोशल मीडिया पर बयान, तेजस्वी की प्रतिक्रिया, और परिवार के बाकी सदस्यों की नाराज़गी — ये सभी संकेत देते हैं कि यह विवाद जल्दी ठंडा नहीं पड़ने वाला। राजद के लिए यह समय बेहद संवेदनशील है, क्योंकि नेतृत्व और एकता दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Saudi Arabia में ही दफनाए जाएंगे 45 भारतीयों के शव, उमरा के लिए जा रहे लोगों की बस हादसे में दर्दनाक मौत

Saudi Arabia में ही दफनाए जाएंगे 45 भारतीयों के शव, उमरा के लिए जा रहे लोगों की बस हादसे में दर्दनाक मौत

Saudi Arabia में हुए भयानक सड़क हादसे ने भारत के 45 परिवारों की खुशियाँ हमेशा के लिए छीन लीं। उमरा यात्रा के लिए जा रहे भारतीयों से भरी बस एक टैंकर से टकरा गई, जिसमें 45 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसा इतना भीषण था कि शवों की पहचान करना मुश्किल हो गया। जानकारी के मुताबिक, इन सभी शवों को अब सऊदी अरब में ही दफनाया जाएगा क्योंकि उनकी बॉडी को भारत लाना काफी जटिल और महंगा है। साथ ही, मुआवजा मिलने की भी संभावना बेहद कम बताई जा रही है। जो लोग अपने परिवार वालों को आखिरी बार देखना चाहते थे, अब वे सिर्फ उनकी यादों के सहारे रह गए हैं। भारत और विदेश मंत्रालय इस मामले पर लगातार वहां के अधिकारियों से संपर्क में हैं, ताकि पीड़ित परिवारों को जल्द से जल्द सहायता और सही जानकारी मिल सके। यह हादसा उन परिवारों के लिए गहरा दर्द बन गया है जो अपने प्रियजनों को इबादत और दुआओं के सफर पर भेज रहे थे। उम्मीद है कि सरकार और एजेंसियां इस मामले में पीड़ितों के परिवारों को न्याय और मदद दिलाएंगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Chhattisgarh

Chhattisgarh नक्सल हमला बीजापुर–सुकमा में सुरक्षा बलों की कड़ी कार्रवाई जारी

Chhattisgarh के बस्तर संभाग में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। पिछले कुछ दिनों में बीजापुर, कांकेर और सुकमा जिलों में कई बड़ी मुठभेड़ हुई हैं, जिनमें कई नक्सलियों के मारे जाने और कुछ के घायल होने की खबर है। लगातार चल रहे Search Operation से जंगल क्षेत्रों में सुरक्षा बलों का दबदबा बढ़ता दिख रहा है। बीजापुर में Security Forces का बड़ा ऑपरेशन—कई नक्सली ढेर बस्तर के बीजापुर क्षेत्र में सुरक्षा बलों ने एक बड़े ऑपरेशन के दौरान कई नक्सलियों को मार गिराया। पिछले 48 घंटों में कम से कम 3 नक्सली ढेर हुए और कुछ के घायल होने की जानकारी मिली है। ग्राउंड इनपुट के आधार पर माना जा रहा है कि सुरक्षा बलों की भारी कार्रवाई के कारण नक्सली गहरे जंगलों में छिपे हुए हैं और उनकी मूवमेंट सीमित हो गई है। कांकेर–सुकमा बेल्ट में भी मुठभेड़ तेज, कई Naxal Camps नष्ट कांकेर और सुकमा जिलों में भी पिछले कुछ हफ्तों से लगातार कॉम्बिंग ऑपरेशन चल रहा है। जंगलों में नक्सलियों की गतिविधि को पहचानने के लिए ड्रोन्स और हाई-टेक साधनों का उपयोग किया जा रहा है। 113 से ज्यादा नक्सली मारे जा चुके—बस्तर में Naxal Network कमजोर बीते लगभग 80 दिनों में सुरक्षा बलों द्वारा 113 से अधिक नक्सलियों को खत्म किया जा चुका है, जिनमें से अधिकांश घटनाएँ बस्तर क्षेत्र में हुईं। सरेंडर बढ़े — कई Naxalites ने हथियार डाले ऑपरेशन के साथ-साथ सरकार की पुनर्वास नीति भी असर दिखा रही है। इससे जंगल क्षेत्रों में नक्सलियों की नई भर्ती पर भी रोक लगी है। सरकार की रणनीति — Security + Development दोनों पर फोकस मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों ने बस्तर के गांवों का दौरा किया और सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ाया। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bihar

Bihar सरकार मंत्रिमंडल समाचार 2 Deputy CM Model Final 36 मंत्रियों की टीम तैयार

Bihar की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आखिरकार नया मंत्रिमंडल विस्तार (Cabinet Expansion) कर दिया है। इस नए फॉर्मूले के तहत राज्य में दो Deputy Chief Ministers और कुल 36 मंत्रियों की टीम को अंतिम मंजूरी मिल गई है। यह विस्तार गठबंधन के राजनीतिक संतुलन और प्रशासनिक मजबूती को ध्यान में रखते हुए किया गया है। 2 Deputy CM का बड़ा राजनीतिक संतुलन नीतीश सरकार में दो उपमुख्यमंत्रियों को जगह देकर राजनीतिक संदेश साफ है कि NDA सरकार सत्ता साझेदारी को बराबर और प्रभावी बनाना चाहती है। दोनों उपमुख्यमंत्री, बिहार सरकार की नई रणनीति में प्रमुख भूमिका निभाते नज़र आएंगे। 36 मंत्रियों का Cabinet अब Full Strength में नए विस्तार के बाद बिहार मंत्रिमंडल अपनी अधिकतम संवैधानिक सीमा 36 तक पहुँच गया है। इस विस्तार के साथ सरकार अब बजट सत्र और आगामी विकास योजनाओं पर फोकस करना चाहती है। नए मंत्रियों को मिले अहम विभाग नियुक्ति के बाद विभागों का बड़ा फेरबदल हुआ है। नई टीम इस प्रकार है: यह बदलाव बताता है कि सरकार अब प्रशासनिक कामकाज को अधिक तेज़ी से आगे बढ़ाना चाहती है। संवैधानिक और राजनीतिक संदेश 243 सदस्यीय विधानसभा में मंत्रियों की अधिकतम संख्या 36 हो सकती है। नीतीश कुमार ने इसी सीमा तक मंत्रिमंडल बढ़ाकर गठबंधन को स्थिरता और राजनीतिक शक्ति के संतुलन का संदेश दिया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi

Delhi Blast लाल किला ब्लास्ट में Drone Attack Plan का बड़ा खुलासा

Delhi के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास 10 नवंबर 2025 को हुई कार ब्लास्ट घटना अब एक बड़े आतंकी मॉड्यूल (Terror Module) की साजिश के रूप में सामने आई है। शुरुआती जांच से साफ हो गया है कि यह साधारण विस्फोट नहीं, बल्कि राजधानी को दहलाने वाली हाई-टेक आतंकवादी योजना थी, जिसमें ड्रोन और प्रेशर बम जैसे मॉडर्न हथियार शामिल थे। क्या हुआ था धमाके वाली रात? लाल किला मेट्रो स्टेशन (Gate No. 1) के पास खड़ी Hyundai i20 कार में अचानक विस्फोट हुआ। धमाका इतना तेज़ था कि कई गाड़ियाँ जल गईं और आसपास के लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में पता चला कि कार में व्यवस्थित तरीके से विस्फोटक सामग्री लगाई गई थी। NIA की जांच: 10 टीमें, 50 अधिकारी मैदान में केंद्र सरकार ने मामले की जांच NIA को सौंपते हुए इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा “टॉप प्रायोरिटी केस” घोषित किया है।NIA ने: हमास-स्टाइल ड्रोन Attack: सबसे बड़ा खुलासा NIA के अनुसार आतंकियों की साजिश सिर्फ कार ब्लास्ट तक सीमित नहीं थी। उन्हें हमास जैसे Drone-Based हमले (Hamas-Style Drone Attack) की तैयारी करते पाया गया। जांच में जो सामने आया: इस योजना का टेक्निकल मास्टरमाइंड जसीर बिलाल वानी उर्फ दानिश है, जिसे श्रीनगर से गिरफ्तार किया गया। मुख्य आरोपी: कार मालिक से लेकर फिदायीन तक सरकार की प्रतिक्रिया Delhi की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मृतकों के परिवारों के लिए ₹10 लाख मुआवजा घोषित किया है।राजधानी में हाई अलर्ट जारी है और सुरक्षा एजेंसियों को संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया गया है। ये हमला क्यों गंभीर है? हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Tejashwi Yadav

Tejashwi Yadav के आवास पर RJD नेताओं की अहम समीक्षा बैठक

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में RJD की हार के बाद पार्टी ने अपनी रणनीति और भविष्य की दिशा तय करने के लिए Tejashwi Yadav के आवास पर अहम समीक्षा बैठक बुलाई। इस बैठक में RJD प्रमुख Lalu Prasad Yadav, पूर्व मुख्यमंत्री Rabri Devi, बेटी Misa Bharti, और कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। पार्टी ने इस चुनाव में 143 सीटों में से केवल 25 सीटें जीती हैं। हार के कारणों में पारंपरिक Muslim-Yadav (MY) वोट बैंक में गिरावट, NDA की कल्याणकारी योजनाओं का प्रभाव, और संगठनात्मक कमज़ोरियां शामिल हैं। बैठक के मुख्य एजेंडे में शामिल हैं: विश्लेषकों का कहना है कि यह बैठक RJD के लिए सोच-विचार और रणनीति सुधार का अवसर है। तेजस्वी यादव के घर बैठक होने से यह स्पष्ट होता है कि वे अभी भी पार्टी की निर्णय प्रक्रिया में केंद्रीय भूमिका निभा रहे हैं। RJD की इस समीक्षा बैठक से संकेत मिलता है कि पार्टी जल्द ही संगठनात्मक सुधार, नए रणनीतिक कदम और मतदाता पुनः जुड़ाव पर ध्यान दे सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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ऑस्ट्रेलिया

Gold Mining: ऑस्ट्रेलिया में सोने की नई खोज से बदलेगी तस्वीर, भारत को मिल सकता है नया सप्लायर

भारत में सोना सिर्फ गहना नहीं, बल्कि लोगों की बचत और निवेश का भी अहम हिस्सा है। शादी का सीजन हो या दिवाली-धनतेरस, सोने की खरीदारी को लेकर बाजार में हमेशा हलचल रहती है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया से आई सोने की खोज और बढ़ते निवेश की खबर भारत के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऑस्ट्रेलिया में सोने की नई खोज के लिए कंपनियां बड़े स्तर पर खर्च कर रही हैं। इससे आने वाले समय में सोने की वैश्विक सप्लाई बढ़ने की संभावना है। भारत जैसे देश के लिए यह एक अहम घटनाक्रम है, क्योंकि अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा पूरा करने के लिए भारत को दूसरे देशों से सोना आयात करना पड़ता है। Australia में Gold Exploration पर कितना खर्च हुआ? ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज से जुड़ा निवेश जून 2026 की तिमाही में बढ़कर लगभग 565.6 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पहुंच गया। ऑस्ट्रेलियाई सांख्यिकी ब्यूरो (ABS) के आंकड़ों के अनुसार, पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें 23.6% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह खर्च जमीन के नीचे मौजूद सोने के संभावित भंडार का पता लगाने, ड्रिलिंग और खनन की संभावनाओं का आकलन करने जैसे कामों पर किया जाता है। हालांकि, खोज पर खर्च बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि हर जगह सोने का नया भंडार मिल गया है। किसी जगह सोना मिलने के बाद भी यह देखना पड़ता है कि वहां से उसे निकालना आर्थिक रूप से कितना व्यावहारिक होगा। ऑस्ट्रेलिया में कितना Gold Reserve मौजूद है? ऑस्ट्रेलिया दुनिया के प्रमुख सोना उत्पादक देशों में शामिल है। सरकारी संस्था Geoscience Australia के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2024 तक देश के अनुमानित Ore Reserves करीब 4,785 टन थे। वहीं, पहचाने गए कुल Gold Resources का आंकड़ा इससे काफी ज्यादा था। यहां एक बात समझना जरूरी है। Gold Resources में सोने के संभावित और पहचाने गए संसाधन शामिल होते हैं, जबकि Ore Reserves उस सोने को दर्शाते हैं जिसे मौजूदा तकनीकी और आर्थिक परिस्थितियों में निकालना व्यावहारिक माना जाता है। इसीलिए ऑस्ट्रेलिया में सोने के बड़े भंडार होने और किसी नई खोज को दुनिया का सबसे बड़ा भंडार बताने में अंतर है। किसी खास नई खोज के बारे में ऐसा दावा करने से पहले उसके आधिकारिक आंकड़ों की पुष्टि जरूरी है। भारत को कैसे मिल सकता है फायदा? भारत में सोने की मांग काफी बड़ी है और घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अगर ऑस्ट्रेलिया में आने वाले वर्षों में सोने का उत्पादन बढ़ता है, तो भारतीय आयातकों के लिए सप्लाई का एक अतिरिक्त विकल्प तैयार हो सकता है। इसके तीन संभावित फायदे हो सकते हैं: हालांकि, ऑस्ट्रेलिया में निकाला गया सोना अपने आप भारत नहीं पहुंचेगा। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि उत्पादन कितना बढ़ता है, कंपनियां किस देश को निर्यात करती हैं और भारतीय आयातकों के साथ किस तरह के व्यापारिक समझौते होते हैं। क्या भारत में सस्ता हो जाएगा सोना? सोने की नई खोज की खबर सुनकर खरीदारों के मन में सबसे पहले यही सवाल आता है कि क्या अब Gold Price कम होगा? फिलहाल ऐसा कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत केवल उत्पादन पर निर्भर नहीं करती। निवेशकों की मांग, केंद्रीय बैंकों की खरीद, डॉलर की चाल और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी भाव को प्रभावित करती हैं। भारत में इसके अलावा रुपये और डॉलर की विनिमय दर, आयात शुल्क, टैक्स और घरेलू मांग का भी असर पड़ता है। इसलिए ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज बढ़ने के बावजूद भारतीय बाजार में कीमतें तुरंत कम होंगी, इसकी गारंटी नहीं है। ₹13,000 करोड़ के निवेश की खबर कितनी सही है? ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज पर खर्च बढ़ने के आंकड़े सामने आए हैं। लेकिन ₹13,000 करोड़ के निवेश को किसी खास नई खोज या दुनिया के सबसे बड़े सोना भंडार से जोड़ने के लिए संबंधित कंपनी और परियोजना के आधिकारिक दस्तावेजों की जरूरत है। इसलिए इस रकम को किसी एक नए गोल्ड रिजर्व की खोज पर खर्च हुई राशि बताने से पहले इसकी पुष्टि करना जरूरी है। खोज पर किया गया खर्च, जमीन में मौजूद कुल सोने का मूल्य और खनन परियोजना में कुल निवेश तीन अलग-अलग बातें हैं। आगे क्या होगा? ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज पर बढ़ता खर्च वैश्विक गोल्ड इंडस्ट्री के लिए अहम है। अगर आने वाले वर्षों में नए भंडार की पहचान होती है और उनसे व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो पाता है, तो इससे अंतरराष्ट्रीय सप्लाई के विकल्प बढ़ सकते हैं। भारत के लिए भी यह एक संभावित अवसर है। लेकिन नए सप्लायर की भूमिका, आयात पर असर और सोने की कीमतों में बदलाव का पता तभी चलेगा, जब वास्तविक उत्पादन और निर्यात के आंकड़े सामने आएंगे। फिलहाल, ऑस्ट्रेलिया की गोल्ड इंडस्ट्री पर नजर रखना जरूरी है, लेकिन नई खोज के नाम पर सोना सस्ता होने की उम्मीद करना अभी जल्दबाजी होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

इंदौर में 175 डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के अटैचमेंट खत्म, मूल पदस्थापना पर जॉइनिंग के बाद ही मिलेगा अक्टूबर का वेतन

स्वास्थ्य विभाग में मूल पदस्थापना के बजाय दूसरी जगह काम कर रहे 175 डॉक्टरों, नर्सों और अन्य कर्मचारियों के अटैचमेंट समाप्त कर दिए गए हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने 16 अक्टूबर को आदेश जारी कर सभी अटैचमेंट तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए। आदेश के बाद संबंधित कर्मचारियों को अपने मूल पदस्थापना स्थल पर वापस जाकर जॉइनिंग देनी होगी। ऐसा करने के बाद ही उन्हें अक्टूबर महीने का वेतन मिल सकेगा। स्वास्थ्य विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को आदेश का तत्काल पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। तत्काल कार्यमुक्त कर मूल पदस्थापना पर भेजने के निर्देश CMHO के आदेश के मुताबिक, संबंधित अधिकारियों को अटैचमेंट पर काम कर रहे कर्मचारियों को उसी दिन कार्यमुक्त कर उनके मूल पदस्थापना स्थल पर भेजना होगा। इसकी जानकारी CMHO कार्यालय को भी उपलब्ध करानी होगी। वेतन आहरण केंद्रों को निर्देश दिए गए हैं कि कर्मचारियों की मूल पदस्थापना पर उपस्थिति सुनिश्चित होने के बाद ही अक्टूबर का वेतन जारी किया जाए। इससे कर्मचारियों को अपने निर्धारित कार्यस्थल पर लौटना अनिवार्य होगा। अटैचमेंट जारी मिला तो जिम्मेदार अधिकारी पर होगी कार्रवाई स्वास्थ्य विभाग ने आदेश के पालन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। CMHO ने स्पष्ट किया है कि आदेश जारी होने के बाद भी कोई कर्मचारी या अधिकारी अटैचमेंट पर काम करता पाया गया, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसकी जिम्मेदारी संबंधित संस्था के प्रभारी की होगी। विभाग ने अधिकारियों को निर्देशों का पालन कराने और इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थाओं को भेजा गया आदेश यह आदेश सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक, देपालपुर, मानपुर, सांवेर और हातोद के खंड चिकित्सा अधिकारियों, महू सहित विभिन्न अस्पतालों के प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों, शहरी स्वास्थ्य संस्थाओं और मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक के प्रभारियों को भेजा गया है। आदेश में भोपाल में हुई बैठकों और 16 अक्टूबर को मुख्यालय स्तर से मिले निर्देशों का भी हवाला दिया गया है। सभी संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से आदेश लागू कराने के निर्देश दिए गए हैं।

नवरात्रि पर रायपुर सेंट्रल जेल में सेवा की मिसाल, काली माता सेवा समिति ने 1300 बंदियों को बांटे फल

नवरात्रि के अवसर पर काली माता सेवा समिति ने रायपुर सेंट्रल जेल में करीब 1300 बंदियों को फल वितरित किए। समिति ने यह पहल उन बंदियों के लिए की, जो नवरात्रि में उपवास रखकर माता रानी की आराधना कर रहे हैं। इस आयोजन के जरिए समिति ने सेवा, करुणा और मानवीय संवेदना का संदेश दिया। समिति के अध्यक्ष दीपक भारद्वाज (पोल्ले) ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य बंदियों के प्रति संवेदनशीलता और सेवा भाव को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की गलती या अपराध से उसके सुधरने और बेहतर जीवन जीने की संभावनाएं समाप्त नहीं हो जातीं। बंदियों के सुधार और पुनर्वास पर दिया जोर दीपक भारद्वाज ने कहा कि समाज को न्याय के प्रति सम्मान बनाए रखने के साथ-साथ सुधार और पुनर्वास की भावना को भी महत्व देना चाहिए। बंदियों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने से समाज में मानवीय मूल्यों को मजबूती मिलती है। समिति का मानना है कि जेल में बंद लोगों के साथ भी सम्मानजनक और मानवीय व्यवहार होना चाहिए, ताकि उनमें सकारात्मक बदलाव की भावना विकसित हो सके। पहले भी जेल में कर चुके हैं फल वितरण काली माता सेवा समिति के अनुसार, वह पहले भी कई बार जेल में बंदियों को फल वितरित कर चुकी है। समिति का कहना है कि नवरात्रि केवल पूजा-पाठ और उपवास तक सीमित पर्व नहीं है, बल्कि यह सेवा, करुणा और सद्भावना को जीवन में अपनाने का अवसर भी है। इसी भावना के साथ समिति के सदस्यों ने उपवास रखने वाले बंदियों तक फल पहुंचाए। आगे भी जारी रहेंगे सेवा कार्य समिति ने समाज में सेवा, सद्भावना और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए ऐसे आयोजन आगे भी जारी रखने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में अशोक त्रिपाठी, गुड्डू, सुनील प्रमुख, राजू भाई तारवानी और रामकृष्ण धीवर सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
वैभव सूर्यवंशी

IND vs WI T20: वैभव सूर्यवंशी का भरोसा कायम, 4 दिन में दूसरी पोस्ट; अब भी मौके का इंतजार

भारत और वेस्टइंडीज (IND vs WI) के बीच T-20 सीरीज के निर्णायक मुकाबले से पहले युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी एक बार फिर चर्चा में हैं। सीरीज में अब तक खेलने का मौका नहीं मिलने के बावजूद वैभव ने उम्मीद नहीं छोड़ी है। चार दिन के भीतर उनकी दूसरी सोशल मीडिया पोस्ट सामने आई है, जिसमें भरोसे का संदेश देखने को मिला। वैभव को इस सीरीज में अब तक मैदान पर उतरने का मौका नहीं मिला है। ऐसे में क्रिकेट फैंस के मन में एक ही सवाल है—क्या पांचवें टी-20 में उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा? Vaibhav Sooryavanshi की दूसरी पोस्ट ने खींचा ध्यान वैभव सूर्यवंशी की सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर फैंस के बीच चर्चा हो रही है। चार दिन में दूसरी पोस्ट आने के बाद उनके संदेश पर लोगों की नजरें टिकी हैं। हालांकि, पोस्ट को टीम में चयन या किसी खास फैसले से जोड़कर देखना सही नहीं होगा, क्योंकि प्लेइंग-11 में किसे मौका मिलेगा, इसका फैसला टीम मैनेजमेंट करता है। कम उम्र में अपनी बल्लेबाजी से पहचान बनाने वाले वैभव के लिए टीम के साथ रहना और मौके का इंतजार करना भी अनुभव का हिस्सा है। अब देखना होगा कि उन्हें इस सीरीज में खेलने का मौका मिलता है या नहीं। IND vs WI 5th T20: निर्णायक मुकाबले पर नजर भारत और वेस्टइंडीज की टी-20 सीरीज का पांचवां मुकाबला दोनों टीमों के लिए अहम है। सीरीज के आखिरी मैच में जीत हासिल करने वाली टीम खिताब अपने नाम करेगी। ऐसे में भारतीय टीम की प्लेइंग-11 को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। फैंस यह जानना चाहते हैं कि क्या टीम मैनेजमेंट इस मुकाबले में युवा खिलाड़ियों को मौका देगा। वैभव सूर्यवंशी का नाम भी इसी चर्चा में शामिल है। हालांकि, उनके खेलने को लेकर आधिकारिक पुष्टि के बिना किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। क्या वैभव सूर्यवंशी को मिलेगा डेब्यू का मौका? वैभव को लेकर उत्सुकता की एक बड़ी वजह उनकी कम उम्र और क्रिकेट में तेजी से बनी पहचान है। फैंस उन्हें भारतीय टीम की जर्सी में खेलते देखना चाहते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौका मिलना टीम की जरूरत और चयन रणनीति पर निर्भर करता है। फिलहाल वैभव के लिए इंतजार जारी है। पांचवें टी-20 में उनका नाम प्लेइंग-11 में शामिल होता है या नहीं, इसका पता टीम की आधिकारिक घोषणा के बाद ही चलेगा। क्रिकेट में हर खिलाड़ी को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। वैभव के समर्थकों को उम्मीद है कि उन्हें जल्द ही मैदान पर अपनी काबिलियत दिखाने का अवसर मिलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
लालकृष्ण आडवाणी

LK Advani Hospitalised ICU में भर्ती लालकृष्ण आडवाणी की सेहत कैसी? जानें ताजा अपडेट

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की सेहत को लेकर 17 अक्टूबर को ताजा जानकारी सामने आई है। 98 वर्षीय आडवाणी को सीने में संक्रमण (Chest Infection) की शिकायत के बाद दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है और डॉक्टरों की टीम उनकी निगरानी कर रही है। परिवार और समर्थकों के लिए यह खबर चिंता बढ़ाने वाली जरूर है, लेकिन फिलहाल राहत की बात यह है कि अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक उनकी स्थिति स्थिर है। डॉक्टर उनकी सेहत से जुड़ी जरूरी जांच कर रहे हैं और इलाज जारी है। LK Advani Health Update: अस्पताल में क्या चल रहा है इलाज? लालकृष्ण आडवाणी को शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 की शाम करीब 7:30 बजे अस्पताल लाया गया था। उन्हें सीने में संक्रमण की शिकायत के बाद पल्मोनरी विभाग में भर्ती किया गया। यहां डॉक्टरों की एक टीम उनकी सेहत पर नजर रख रही है और जरूरी मेडिकल जांच की जा रही है। 17 अक्टूबर तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनकी हालत स्थिर है। हालांकि, उनकी सेहत में आगे कितना सुधार हुआ है और अस्पताल से छुट्टी कब मिलेगी, इस बारे में अभी कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। पहले भी अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं लालकृष्ण आडवाणी लालकृष्ण आडवाणी को इससे पहले मई 2026 में भी उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई थी। दिसंबर 2024 में भी उन्हें अपोलो अस्पताल की ICU में रखा गया था। उस समय डॉक्टरों ने उनकी मेडिकल जांच और इलाज किया था। जून और जुलाई 2024 में भी उन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बढ़ती उम्र को देखते हुए उनकी सेहत पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मौजूदा समय में डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार जारी है। PM Modi ने हाल ही में की थी लालकृष्ण आडवाणी से मुलाकात लालकृष्ण आडवाणी के अस्पताल में भर्ती होने से कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2026 को उनके दिल्ली स्थित आवास पर मुलाकात की थी। इस दौरान प्रधानमंत्री ने उनसे आशीर्वाद लिया और सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान की सराहना की थी। आडवाणी लंबे समय तक बीजेपी के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं। पार्टी को राष्ट्रीय राजनीति में स्थापित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यही वजह है कि उनकी सेहत से जुड़ी खबर पर राजनीतिक जगत और उनके समर्थकों की नजर बनी हुई है। राम रथ यात्रा से उपप्रधानमंत्री तक का सफर लालकृष्ण आडवाणी का राजनीतिक सफर कई दशकों तक फैला रहा है। वह भारतीय जनता पार्टी के तीन बार राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे और पार्टी के विस्तार में अहम भूमिका निभाई। साल 1990 में निकाली गई उनकी राम रथ यात्रा ने राष्ट्रीय राजनीति में व्यापक चर्चा पैदा की थी। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद 2002 से 2004 तक वह भारत के उपप्रधानमंत्री रहे। देश की राजनीति में उनके लंबे योगदान को देखते हुए वर्ष 2024 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। LK Advani अब अगले हेल्थ अपडेट का इंतजार लालकृष्ण आडवाणी फिलहाल दिल्ली के अपोलो अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में हैं। 17 अक्टूबर तक सामने आई जानकारी के मुताबिक, उनकी हालत स्थिर है और सीने में संक्रमण के लिए इलाज चल रहा है। अब सभी की नजर अस्पताल की ओर से जारी होने वाले अगले हेल्थ अपडेट पर है। उनकी सेहत में सुधार, इलाज की स्थिति और डिस्चार्ज को लेकर नई जानकारी मिलने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल सबसे अहम बात यही है कि लालकृष्ण आडवाणी की हालत स्थिर बताई गई है और उनका इलाज जारी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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