Chhattisgarh के बस्तर संभाग में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। पिछले कुछ दिनों में बीजापुर, कांकेर और सुकमा जिलों में कई बड़ी मुठभेड़ हुई हैं, जिनमें कई नक्सलियों के मारे जाने और कुछ के घायल होने की खबर है। लगातार चल रहे Search Operation से जंगल क्षेत्रों में सुरक्षा बलों का दबदबा बढ़ता दिख रहा है।
बीजापुर में Security Forces का बड़ा ऑपरेशन—कई नक्सली ढेर
बस्तर के बीजापुर क्षेत्र में सुरक्षा बलों ने एक बड़े ऑपरेशन के दौरान कई नक्सलियों को मार गिराया। पिछले 48 घंटों में कम से कम 3 नक्सली ढेर हुए और कुछ के घायल होने की जानकारी मिली है।
- इस अभियान में DRG, CRPF और STF की संयुक्त टीम शामिल थी।
- इलाके में नक्सलियों के हथियार, IED और विस्फोटक सामग्री भी बरामद की गई है।
ग्राउंड इनपुट के आधार पर माना जा रहा है कि सुरक्षा बलों की भारी कार्रवाई के कारण नक्सली गहरे जंगलों में छिपे हुए हैं और उनकी मूवमेंट सीमित हो गई है।
कांकेर–सुकमा बेल्ट में भी मुठभेड़ तेज, कई Naxal Camps नष्ट
कांकेर और सुकमा जिलों में भी पिछले कुछ हफ्तों से लगातार कॉम्बिंग ऑपरेशन चल रहा है।
- ऑपरेशन “संकल्प” के तहत कई नक्सली ठिकानों को ध्वस्त किया गया।
- सर्चिंग के दौरान भारी मात्रा में गोला-बारूद, हथियार और रोजमर्रा की सामग्रियाँ मिलीं।
- एक महिला नक्सली के मारे जाने की पुष्टि भी की गई है।
जंगलों में नक्सलियों की गतिविधि को पहचानने के लिए ड्रोन्स और हाई-टेक साधनों का उपयोग किया जा रहा है।
113 से ज्यादा नक्सली मारे जा चुके—बस्तर में Naxal Network कमजोर
बीते लगभग 80 दिनों में सुरक्षा बलों द्वारा 113 से अधिक नक्सलियों को खत्म किया जा चुका है, जिनमें से अधिकांश घटनाएँ बस्तर क्षेत्र में हुईं।
- बीजापुर में सबसे ज्यादा नक्सली हताहत हुए।
- लगातार बढ़ती सफलता के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इसे नक्सलवाद के अंत की दिशा में बड़ा कदम बताया है।
सरेंडर बढ़े — कई Naxalites ने हथियार डाले
ऑपरेशन के साथ-साथ सरकार की पुनर्वास नीति भी असर दिखा रही है।
- बीजापुर और आसपास के जिलों में 100 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया।
- सरेंडर करने वालों को आर्थिक सहायता, सुरक्षा तथा पुनर्वास योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है।
इससे जंगल क्षेत्रों में नक्सलियों की नई भर्ती पर भी रोक लगी है।
सरकार की रणनीति — Security + Development दोनों पर फोकस
मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों ने बस्तर के गांवों का दौरा किया और सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ाया।
- सीमावर्ती गांवों में सड़क, स्वास्थ्य, राशन और शिक्षा सुविधाओं को तेजी से बढ़ाया जा रहा है।
- लक्ष्य है — 2026 तक नक्सल-मुक्त छत्तीसगढ़।
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