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Nationwide Strike 9 July

Nationwide Strike: 9 जुलाई को बैंकिंग से लेकर परिवहन तक, देश भर में ठप हो सकती हैं जरूरी सेवाएं

नई दिल्ली। देश हरपल न्यूज।देशभर में कल यानी 9 जुलाई 2025 को Nationwide Strike (भारत बंद) का असर देखने को मिलेगा। इस देशव्यापी हड़ताल में करीब 25 करोड़ कर्मचारी और मजदूर शामिल होंगे, जिससे Banking, Insurance, Coal Mining, Transport, Construction जैसे अहम सेक्टर्स पर असर पड़ सकता है। इस हड़ताल का आह्वान देश की 10 बड़ी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और उनके सहयोगी संगठनों ने मिलकर किया है। उनका आरोप है कि सरकार की नीतियां मजदूरों और किसानों के खिलाफ और कॉरपोरेट्स के पक्ष में हैं। कौन-कौन होंगे इस Strike में शामिल? हालांकि Railway और Tourism जैसे सेक्टर इस हड़ताल से बाहर रहेंगे ताकि कुछ आवश्यक सेवाएं बनी रहें। किन-किन सेवाओं पर पड़ेगा असर? हड़ताल की वजह क्या है? ट्रेड यूनियनों के मुताबिक: ✅ लेबर कोड्स के जरिए मजदूरों के हक कम किए जा रहे हैं।✅ Public Sector कंपनियों का Privatization मजदूरों के लिए खतरा है।✅ Strike और Collective Bargaining जैसे अधिकारों पर रोक।✅ किसानों के लिए MSP गारंटी कानून समेत कृषि सुधारों की कमी। किसका मिल रहा है समर्थन? क्या School & College भी बंद रहेंगे? स्कूल-कॉलेजों के बंद होने पर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। लेकिन Public Transport Strike की वजह से छात्रों और शिक्षकों को परेशानी हो सकती है। बेहतर होगा कि आप संबंधित संस्थान से संपर्क कर लें। क्या पहले भी हुई हैं ऐसी Strike? हां, 2020, 2022 और 2024 में इसी तरह की हड़तालें हो चुकी हैं, जिनमें लाखों कर्मचारियों और किसानों ने भाग लिया था। इनका असर कुछ राज्यों में काफी ज्यादा देखा गया था। क्या हड़ताल शांतिपूर्ण रहेगी? ट्रेड यूनियन नेताओं ने दावा किया है कि हड़ताल पूरी तरह शांतिपूर्ण होगी और सरकार का ध्यान अपनी मांगों की ओर खींचना ही इसका मकसद है। हालांकि, इतने बड़े पैमाने के विरोध के कारण कुछ जगहों पर असुविधा या टकराव की स्थिति बन सकती है। सरकार का क्या कहना है? अभी तक केंद्र सरकार की ओर से इस हड़ताल पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, पहले की तरह सरकार इसे “सीमित प्रभाव” वाली हड़ताल बता सकती है। सरकार और यूनियनों के बीच तनातनी जारी है।
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MNS

MNS Protest में शामिल हुए Maharashtra के Minister, बोले -‘गिरफ्तार कर लो’

महाराष्ट्र में भाषा को लेकर मचा बवाल अब सियासी भूचाल में बदल गया है। मराठी भाषा और स्थानीय पहचान के मुद्दे पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) द्वारा ठाणे में निकाले गए प्रदर्शन मार्च ने ना सिर्फ प्रशासन को चुनौती दी, बल्कि खुद राज्य सरकार के भीतर फूट की तस्वीर भी सामने रख दी। खुद की सरकार के खिलाफ उतरे मंत्री राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने सरकार की अनुमति न मिलने के बावजूद MNS के प्रदर्शन में हिस्सा लिया और साफ शब्दों में कहा, “Let them arrest me” यानी “चाहे तो मुझे गिरफ्तार कर लें”। सरनाईक ने पुलिस की कार्रवाई को गलत बताया और कहा कि वो इस मुद्दे को मुख्यमंत्री के सामने उठाएंगे। MNS नेताओं की गिरफ्तारी और अनुमति रद्द प्रदर्शन से पहले ही MNS के ठाणे-पालघर अध्यक्ष अविनाश जाधव समेत कई कार्यकर्ताओं को पुलिस ने एहतियातन गिरफ्तार कर लिया। पहले पुलिस ने मार्च की अनुमति दी थी लेकिन बाद में तय किए गए रूट को लेकर विवाद होने पर अनुमति वापस ले ली गई। पुलिस का कहना था कि MNS जिस रूट से प्रदर्शन करना चाहती थी, वह ट्रैफिक और भीड़-भाड़ के लिहाज़ से सही नहीं था। “Slapgate” से उठा विवाद इस पूरे विवाद की शुरुआत मिरा रोड में एक फूड स्टॉल मालिक को हिंदी बोलने पर थप्पड़ मारने की घटना से हुई। इसे “Slapgate” नाम दिया गया और इसके विरोध में व्यापारियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। वहीं MNS ने इसे मराठी अस्मिता का अपमान बताते हुए “मराठी स्वाभिमान रैली” निकालने की ठानी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का बयान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि प्रदर्शन करना सबका अधिकार है, लेकिन रूट को लेकर पुलिस की चिंता जायज थी। उन्होंने तीखा हमला करते हुए कहा,“मराठी लोग संकीर्ण नहीं हैं… इस तरह के प्रयोग महाराष्ट्र में नहीं चलेंगे।”उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहा है, लेकिन महाराष्ट्र के लोग समझदार हैं। सरनाईक को किया गया हूट प्रदर्शन के दौरान एक पल ऐसा भी आया जब खुद मंत्री प्रताप सरनाईक को विरोध का सामना करना पड़ा। कुछ MNS कार्यकर्ताओं ने उन्हें प्रदर्शन से हटने को कहा और उन्हें सुरक्षा में बाहर निकाला गया। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gopal Khemka

Gopal Khemka Murder कारोबारी दुश्मनी में हुई थी हत्या, Police Encounter में आरोपी ढेर

बिहार की राजधानी पटना में हुए चर्चित गोपाल खेमका मर्डर केस (Gopal Khemka Murder Case) की गुत्थी पुलिस ने लगभग सुलझा ली है। इस हाई-प्रोफाइल हत्या के पीछे की वजह बिजनेस राइवलरी (Business Rivalry) बताई जा रही है। अब तक पुलिस ने इस केस में 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है और एक मुख्य आरोपी को मंगलवार को पुलिस एनकाउंटर (Police Encounter) में ढेर कर दिया गया। Police Encounter में मारा गया Arms Supplier पुलिस ने मंगलवार सुबह दमरिया घाट (Damaria Ghat), पटना में मुठभेड़ के दौरान विकास उर्फ राजा (29) को मार गिराया। वह इस मर्डर केस में हथियार सप्लाई करने वाला मुख्य आरोपी था। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने STF और Patna Police की टीम पर फायरिंग कर भागने की कोशिश की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया। Mastermind Arrested: सुपारी देकर करवाई गई थी हत्या Gopal Khemka मर्डर केस में मुख्य साजिशकर्ता (Mastermind) भी पुलिस की गिरफ्त में है। शुरुआती जांच में पता चला है कि एक प्रतिद्वंद्वी व्यवसायी (Business Rival) ने गोपाल खेमका को रास्ते से हटाने के लिए शूटर को सुपारी दी थी। आरोपी ने पेशेवर शूटर उमेश को हायर किया, जिसे STF ने सोमवार को गिरफ्तार कर लिया। CCTV फुटेज से मिले बड़े सुराग हत्या से पहले आरोपी पटना के दलदली रोड स्थित एक चाय की दुकान पर इकट्ठा हुए थे। CCTV फुटेज में साफ दिखा कि आरोपियों ने वहां मीटिंग की और फिर योजना के अनुसार खेमका की हत्या की। यहां तक कि एक आरोपी खेमका की अंतिम यात्रा में भी शामिल हुआ ताकि शक न हो। पुलिस ने मौके से पिस्तौल, कपड़े और स्कूटर बरामद किए हैं जो हत्या में इस्तेमाल हुए थे। Police Action जारी, 7 आरोपी गिरफ्तार अब तक Gopal Khemka केस में 7 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। STF और Patna Police की टीम लगातार पटना सिटी और हाजीपुर में छापेमारी कर रही है। पुलिस का कहना है कि यह मामला पूरी तरह से प्लांड सुपारी किलिंग (Planned Contract Killing) का है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Tamil Nadu

Tamil Nadu School Van Accident ट्रेन टक्कर से 2 छात्रों की मौत

स्कूल वैन की टक्कर से 2 छात्रों की मौत Cuddalore, Tamil Nadu: तमिलनाडु के कुड्डालोर (Cuddalore) जिले में सोमवार सुबह एक भयानक हादसे में दो मासूम छात्रों की जान चली गई और कई बच्चे घायल हो गए। हादसा उस वक्त हुआ जब एक स्कूल वैन (School Van) रेलवे क्रॉसिंग पर तेज़ रफ्तार पैसेंजर ट्रेन से टकरा गई। हादसा कैसे हुआ? यह दर्दनाक घटना सुबह करीब 7:45 बजे सेम्मनकुप्पम (Semmankuppam) में एक नॉन-इंटरलॉक्ड लेवल क्रॉसिंग (Gate No. 170) पर हुई। स्कूल वैन बच्चों को लेकर स्कूल जा रही थी, तभी विल्लुपुरम-मयिलाडुथुरई पैसेंजर ट्रेन (Villupuram–Mayiladuthurai Passenger Train) ने वैन को टक्कर मार दी। लापरवाही बनी मौत की वजह रिपोर्ट्स के मुताबिक, क्रॉसिंग गेट खुला हुआ था और गेटमैन मौके पर मौजूद नहीं था। कुछ स्थानीय लोगों का दावा है कि गेटमैन ड्यूटी पर सो गया था। वैन ड्राइवर ने बिना देखे जल्दबाज़ी में पार करने की कोशिश की, जिससे यह हादसा हुआ। इलाज और मुआवज़ा रेलवे और राज्य प्रशासन ने घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया है। साथ ही दक्षिण रेलवे (Southern Railway) की ओर से मुआवज़े की घोषणा की गई है: मुख्यमंत्री स्टालिन की प्रतिक्रिया Tamil Nadu के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने हादसे पर शोक व्यक्त किया और पीड़ित परिवारों को हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे इस हादसे की गहराई से जांच करें और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump

BRICS पर Trump का Attack, China ने कहा ‘No to Trade War’ भारत की चुनौती बढ़ी

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने BRICS देशों को लेकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। ट्रंप ने स्पष्ट कहा कि जो देश BRICS की “Anti-America” Policies को समर्थन देंगे, उन पर मौजूदा टैक्स के अलावा 10% Additional Tariff लगाया जाएगा। ट्रंप के इस बयान के बाद China ने सख्त जवाब दिया, और भारत समेत अन्य देशों में कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। क्या है Trump की Tariff धमकी? Trump ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर BRICS देशों को चेतावनी दी कि यदि कोई देश अमेरिका विरोधी नीतियों का समर्थन करता है, तो उस पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब BRICS ग्रुप वैश्विक मंच पर अमेरिका के प्रभाव को चुनौती देने की कोशिश कर रहा है। BRICS Summit 2025 में क्या हुआ? ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में हुई BRICS समिट में सदस्य देशों ने अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों की आलोचना की। साथ ही, अमेरिका द्वारा लगाए गए एकतरफा टैरिफ को अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों के खिलाफ बताया गया। इस विरोध के बाद ही ट्रंप ने नया बयान जारी किया। China का जवाब: “हम टकराव नहीं, सहयोग चाहते हैं” चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि BRICS देशों का मकसद संघर्ष नहीं, Global Cooperation है। उन्होंने कहा – “टैरिफ वॉर में कोई विजेता नहीं होता, और अमेरिका का संरक्षणवाद दुनिया को नुकसान पहुँचा रहा है।“ भारत की स्थिति: संतुलन की कूटनीति भारत BRICS का सक्रिय सदस्य है लेकिन अमेरिका के साथ उसके मजबूत Trade और Strategic Relations भी हैं। ट्रंप की धमकी भारत को कठिन डिप्लोमैटिक बैलेंसिंग की स्थिति में डाल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अब बेहद सावधानी से अपनी नीति तय करनी होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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supreme court

Bihar Voter Update 2025 Supreme Court ने SIR Process पर नहीं लगाई Stay

Bihar Assembly Election 2025 से पहले मतदाता सूची (Voter List) को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। Supreme Court ने सोमवार को State Election Commission द्वारा शुरू की गई Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया पर अंतरिम रोक (Interim Stay) लगाने से इनकार कर दिया है। अब इस मामले पर 10 जुलाई 2025 को विस्तृत सुनवाई होगी। क्या है Bihar SIR Process? बिहार में 24 जून से शुरू हुई यह SIR प्रक्रिया का उद्देश्य है: यह 2003 के बाद पहली बार इतना बड़ा अपडेट अभियान चलाया गया है। Supreme Court में क्यों गई याचिका? कई नेताओं और संगठनों ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं: याचिकाकर्ताओं का दावा है कि: Supreme Court ने क्या कहा? हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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BRICS

PM Modi BRICS Summit 2025 Rio ग्लोबल साउथ, Terrorism और AI पर भारत की बड़ी बात

रियो डी जेनेरियो में BRICS सम्मेलन 2025: भारत का बड़ा प्रभाव ब्राज़ील के रियो डी जेनेरियो में 6–7 जुलाई को आयोजित हुए 17वें BRICS Summit 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की वैश्विक भूमिका को मजबूती से प्रस्तुत किया। उन्होंने ग्लोबल साउथ की आवाज बुलंद करते हुए आतंकवाद, AI गवर्नेंस और ग्लोबल संस्थाओं में सुधार जैसे अहम मुद्दों पर दुनिया का ध्यान खींचा। Modi का बड़ा बयान: “Global South की आवाज दबाई नहीं जा सकती” PM मोदी ने BRICS मंच से कहा कि आज की वैश्विक संस्थाएँ — जैसे UN, IMF, WTO — 20वीं सदी की संरचनाएं हैं और ये 21वीं सदी की आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर पा रहीं। उन्होंने कहा: “Global institutions बिना Global South के ऐसे हैं जैसे mobile बिना network।” उन्होंने इन संस्थाओं में व्यापक और समावेशी सुधार की ज़रूरत बताई। Terrorism पर Zero Tolerance की मांग मोदी ने जम्मू-कश्मीर के Pahalgam Terror Attack का ज़िक्र करते हुए देशों से अपील की कि वे आतंकवाद को “convenience-based” नहीं बल्कि “principle-based” तरीके से देखें। उन्होंने कहा कि आतंकवादी संगठनों के funding sources और safe havens पर एकजुट कार्रवाई ज़रूरी है। Climate Finance और Environmental Protection BRICS देशों ने विकसित राष्ट्रों से climate finance के लिए जवाबदेही तय करने की मांग की। Brazil द्वारा पेश की गई Tropical Forests Forever Facility को China और UAE ने निवेश देने की इच्छा जताई। इंडिया ने भी स्वच्छ ऊर्जा व पर्यावरण संरक्षण में साझेदारी को प्राथमिकता देने पर बल दिया। AI और Technology पर Modi की पहल PM Modi ने एक AI Impact Summit की मेज़बानी का ऐलान किया, जिसमें BRICS देश तकनीकी सहयोग और एथिकल AI frameworks पर चर्चा करेंगे। उन्होंने एक Science & Innovation Repository बनाने का प्रस्ताव भी रखा। Protectionism के खिलाफ एकजुट BRICS नेताओं ने वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (WTO) की spirit के खिलाफ बढ़ रहे trade barriers और tariffs का विरोध किया। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा BRICS देशों पर 10% extra tariff लगाने की धमकी को भी कड़ी प्रतिक्रिया मिली। BRICS Expansion और Missing Leaders इस बार Indonesia को BRICS का नया सदस्य बनाया गया, जबकि पिछले साल ही Saudi Arabia, UAE, Egypt, Iran और Ethiopia जुड़ चुके थे। हालांकि, इस सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की गैरमौजूदगी से ब्लॉक की एकता पर सवाल उठे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Breaking Unity: 20 Years Later,

Breaking Unity: 20 Years Later,कान के नीचे मारिए। और हां, मारने का वीडियो मत बनाइए :राज ठाकरे

मुंबई में ऐतिहासिक पल: वर्ली डोम में दिखी मराठी अस्मिता की एकजुटता 20 साल बाद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की वर्ली डोम रैली में ऐतिहासिक मुलाकात, महाराष्ट्र में हिंदी थोपने के विरोध में दिखाई मराठी एकता। जानिए रैली में क्या बोले राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे। मुंबई के वर्ली डोम (Worli Dome Rally) में महाराष्ट्र की राजनीति में एक ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला जब 20 साल बाद शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे एक ही मंच पर नजर आए। दोनों नेताओं ने न सिर्फ एक-दूसरे को गले लगाया बल्कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा हिंदी को तीसरी भाषा बनाने के फैसले के खिलाफ एकजुटता भी दिखाई। GR रद्द होने के बाद रैली का आयोजन महाराष्ट्र सरकार द्वारा हिंदी को तीसरी भाषा बनाने वाले दो GR (Government Resolutions) रद्द किए जाने के बाद यह संयुक्त रैली आयोजित की गई। इसे मराठी अस्मिता की जीत के तौर पर देखा जा रहा है। उद्धव और राज ठाकरे ने इसे महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत के लिए बड़ी उपलब्धि बताया। राज ठाकरे के तीखे सवाल: हिंदी क्यों थोप रहे हो? राज ठाकरे ने अपने चिर-परिचित अंदाज में कहा, “मैंने पहले भी कहा था कि मेरा महाराष्ट्र किसी भी राजनीति से बड़ा है। आज 20 साल बाद हम दोनों साथ आए हैं। जो काम बालासाहेब नहीं कर पाए, वो देवेंद्र फडणवीस ने कर दिया।” राज ठाकरे ने सरकार से तीखा सवाल पूछा कि अगर महाराष्ट्र में हिंदी तीसरी भाषा होगी, तो उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान की तीसरी भाषा क्या होगी? उन्होंने कहा कि जब महाराष्ट्र सभी हिंदी भाषी राज्यों से आगे है तो हमें हिंदी सीखने के लिए क्यों मजबूर किया जा रहा है? हिंदी से नहीं विरोध, थोपने से विरोध राज ठाकरे ने स्पष्ट किया कि उन्हें हिंदी भाषा से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन किसी भाषा को थोपना गलत है। उन्होंने मराठा साम्राज्य का उदाहरण देते हुए कहा कि मराठी शासकों ने कभी अपनी भाषा दूसरों पर नहीं थोपी। उन्होंने कहा, “यह शुरुआत थी कि अगर हम विरोध नहीं करते तो शायद वे मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने की तैयारी कर रहे थे।” स्कूल मीडियम पर भी बोले राज ठाकरे राज ठाकरे ने कहा कि स्कूल का माध्यम व्यक्ति के ज्ञान या राज्य प्रेम को तय नहीं करता। उन्होंने बताया कि उनके पिता श्रीकांत ठाकरे और चाचा बालासाहेब ठाकरे अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में पढ़े थे, लेकिन उनकी मराठी अस्मिता पर कभी कोई सवाल नहीं उठा सका। उन्होंने कहा, “अगर मैं कल हिब्रू सीख लूं, तो क्या कोई मेरे मराठी प्रेम पर सवाल उठाएगा?” अंत में दिया विवादास्पद बयान: पिटाई कीजिए लेकिन वीडियो मत बनाइए राज ठाकरे ने अपने भाषण के अंत में कहा, “अगर कोई मराठी नहीं बोलता तो उसे पीटने की जरूरत नहीं है, लेकिन अगर कोई ड्रामा करता है तो उसके कान के नीचे मारिए। और हां, मारने का वीडियो मत बनाइए, बस उसे समझाइए कि क्यों मारा।” उद्धव ठाकरे ने क्या कहा? उद्धव ठाकरे ने कहा कि मराठी भाषा का सम्मान किसी भी कीमत पर बनाए रखा जाएगा। उन्होंने कहा, “हमें हमारी भाषा पर गर्व है और हम किसी के दबाव में झुकेंगे नहीं।” राजनीतिक विश्लेषण: यह रैली केवल भाषा का मुद्दा नहीं थी, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीतिक समीकरणों में संभावित बड़े बदलाव का संकेत भी थी। माना जा रहा है कि आगामी चुनावों में यह मराठी एकता का बड़ा फैक्टर बन सकता है
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Raj Thackeray Uddhav Thackeray Rally,

Raj Thackeray-Uddhav Thackeray Rally – महाराष्ट्र में मराठी अस्मिता के लिए 20 साल बाद साथ आयेंगे ठाकरे बंधु

मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में आज एक नया अध्याय जुड़ जायेगा शनिवार को वर्ली के NSCI डोम (NSCI Dome Worli) में आयोजित Vijay Rally Mumbai में राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने 20 साल बाद एक ही मंच साझा करेंगे । यह रैली महाराष्ट्र सरकार की विवादित तीन-भाषा नीति के खिलाफ जनता की जीत का जश्न मनाने के लिए आयोजित की गई हैं । मराठी अस्मिता (Marathi Pride) को केंद्र में रखते हुए यह आयोजन राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक मंच पर 20 साल बाद साथ आए ठाकरे बंधु साल 2005 के बाद यह पहला मौका होगा जब Shiv Sena UBT प्रमुख उद्धव ठाकरे और MNS अध्यक्ष राज ठाकरे किसी सार्वजनिक मंच पर एक साथ दिखेंगे । आखिरी बार दोनों नेता मालवण उपचुनाव के समय साथ नजर आए थे। 2006 में राज ठाकरे ने शिवसेना छोड़कर अपनी पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) बनाई थी। क्यों खास है यह विजय रैली? महाराष्ट्र सरकार ने अप्रैल 2025 में कक्षा 1 से 5 तक हिंदी भाषा को तीसरी अनिवार्य भाषा बनाने का आदेश जारी किया था। इसे मराठी अस्मिता पर हमला बताते हुए शिवसेना (UBT) और मनसे ने जोरदार विरोध किया। ठाणे, मुंबई और पुणे समेत राज्यभर में जगह-जगह Hindi Imposition Protest in Maharashtra के तहत पोस्टर फाड़े गए, जुलूस निकाले गए और पुतले जलाए गए। जन दबाव के चलते सरकार ने आखिरकार 29 जून को आदेश वापस ले लिया और हिंदी को वैकल्पिक भाषा बना दिया। रैली से पहले ठाणे में जश्न रैली की पूर्व संध्या पर ठाणे में मनसे और शिवसेना यूबीटी कार्यकर्ताओं ने मिलकर लड्डू बांटे और ढोल-ताशों के साथ जश्न मनाया। ठाणे के प्रसिद्ध एकविरा देवी मंदिर में कोली समाज द्वारा ठाकरे बंधुओं की एकता के लिए विशेष पूजा की गई। कौन-कौन हो रहा हैं शामिल? इस ऐतिहासिक रैली में एनसीपी (शरद पवार गुट) के नेता सुप्रिया सुले और जितेंद्र आव्हाड भी शामिल होंगे । कांग्रेस ने मंच साझा नहीं किया लेकिन मराठी भाषा के समर्थन में वैचारिक समर्थन जताया। साथ ही महाराष्ट्र के कला, साहित्य और नाटक जगत के कई प्रमुख नाम भी इस कार्यक्रम में उपस्थित रह सकते हैं । राजनीतिक असर: बीएमसी चुनाव पर नजर 2024 के लोकसभा चुनाव में Shiv Sena UBT ने 20 सीटें जीती थीं जबकि MNS का खाता नहीं खुला। आगामी BMC चुनाव 2025 में यह एकता दोनों दलों की राजनीतिक ताकत को पुनः स्थापित करने का प्रयास मानी जा रही है। विशेष रूप से आदित्य ठाकरे का विधानसभा क्षेत्र वर्ली इस रैली का केंद्र रहा। कोई पार्टी झंडा नहीं, सिर्फ अस्मिता की बात रैली में किसी भी पार्टी का झंडा, चिन्ह या चुनावी स्लोगन नहीं लगाया गया। केवल मराठी अस्मिता और जनता की जीत के जश्न पर फोकस किया गया, जिससे साफ है कि दोनों ठाकरे भाई जनता के मुद्दों पर एकजुट हो रहे हैं। आगे क्या? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह एकजुटता बनी रहती है तो आगामी नगरपालिका और विधानसभा चुनावों में महाराष्ट्र की राजनीति में नया समीकरण बन सकता है।
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Rahul Gandhi

Trump Tariff Deal पर Rahul Gandhi का हमला “PM Modi फिर झुकेंगे America के आगे?”

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते (Trade Deal) को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है, और इस पर अब राजनीति भी गर्मा गई है। कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए कहा है कि अमेरिका की डेडलाइन से पहले मोदी सरकार एक बार फिर “Meekly Bow” करेगी। Rahul Gandhi का तंज: “PM Modi झुकेंगे America के आगे” राहुल गांधी ने शनिवार को एक्स (ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा तय की गई 9 जुलाई की डेडलाइन से पहले, मोदी सरकार अमेरिका के आगे झुक जाएगी। उन्होंने लिखा: “पीयूष गोयल जी कुछ भी कहें, लेकिन मोदी जी फिर अमेरिका के सामने Meekly Bow कर लेंगे।“ उनका ये बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने साफ किया है कि अगर भारत 9 जुलाई तक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करता, तो भारतीय उत्पादों पर 26% तक के टैरिफ फिर से लागू कर दिए जाएंगे। क्या है Trump Tariff Deal का मामला? अमेरिका ने फिलहाल भारत को 90 दिनों की मोहलत दी थी, जो 9 जुलाई को खत्म हो रही है। अगर तब तक समझौता नहीं हुआ तो: Piyush Goyal बोले – “हम Deal दबाव में नहीं करेंगे” भारत सरकार की ओर से वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि: “भारत केवल ऐसा व्यापार समझौता करेगा जो Win-Win Situation बनाए और देश के आर्थिक हितों की रक्षा करे। हम किसी डेडलाइन के दबाव में नहीं आएंगे।” भारत इस समय अमेरिका के अलावा EU, पेरू, ओमान, न्यूज़ीलैंड और चिली जैसे देशों के साथ भी FTA डील्स पर बातचीत कर रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Mallikarjun Kharge Shuddhikaran Row: मंच ‘शुद्ध’ कराने पर बवाल, Rahul Gandhi ने BJP-RSS को घेरा

 उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष Rahul Gandhi मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद कथित तौर पर मंच के ‘शुद्धिकरण’ को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इस मामले को लेकर Rahul Gandhi ने BJP और RSS पर जातिगत भेदभाव तथा ‘मनुवादी सोच’ को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। वहीं, BJP ने आरोपों से दूरी बनाते हुए मामले की जांच कराने की बात कही है। क्या है Haldwani Shuddhikaran विवाद? मल्लिकार्जुन खड़गे ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस की रैली को संबोधित किया था। रैली के कुछ दिन बाद कथित तौर पर कुछ लोगों ने मैदान में पूजा-पाठ और हवन कर ‘शुद्धिकरण’ किया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई खड़गे के दलित समुदाय से होने के कारण की गई। पार्टी ने इसे छुआछूत और जातिगत भेदभाव की मानसिकता का उदाहरण बताया है। हालांकि, BJP की ओर से कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया गया है। BJP नेताओं का कहना है कि रैली के दौरान लगाए गए कुछ नारों से धार्मिक भावनाएं आहत हुई थीं और इसी वजह से धार्मिक अनुष्ठान किया गया था। BJP ने इस कार्रवाई को खड़गे की जाति से जोड़ने पर भी सवाल उठाए हैं। Mallikarjun Kharge ने राज्यसभा में उठाया मुद्दा मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मामले को राज्यसभा में भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके भाषण के बाद उस मंच का ‘शुद्धिकरण’ किया गया, जिससे उन्हें बेहद अपमानित महसूस हुआ। खड़गे ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी व्यक्ति को उसकी जाति के आधार पर अपवित्र मानना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। उन्होंने इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ Untouchability Act के तहत कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग की। खड़गे का कहना है कि ऐसी घटनाएं केवल किसी एक व्यक्ति का अपमान नहीं हैं, बल्कि देश में सामाजिक समानता और संवैधानिक मूल्यों पर भी सवाल खड़े करती हैं। Rahul Gandhi का BJP-RSS पर हमला हल्द्वानी के इस विवाद पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कथित ‘शुद्धिकरण’ को दलितों के अपमान से जोड़ते हुए BJP और RSS पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इस तरह की सोच BJP-RSS की कथित ‘मनुवादी मानसिकता’ को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और छुआछूत तथा जातिगत भेदभाव के लिए आधुनिक भारत में कोई जगह नहीं होनी चाहिए। कांग्रेस ने इस मुद्दे को सामाजिक न्याय और दलित सम्मान से जोड़ते हुए सरकार से दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। क्या Rahul Gandhi ने SC/ST Act के तहत FIR की मांग की? इस मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार SC/ST Act के तहत FIR दर्ज कराने की स्पष्ट मांग राहुल गांधी की ओर से नहीं बताई गई है। रिपोर्टों में मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा Untouchability Act के तहत मामला दर्ज करने और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग का उल्लेख है। वहीं, राहुल गांधी ने घटना को दलितों के अपमान, जातिगत भेदभाव और कथित मनुवादी सोच से जोड़कर BJP-RSS पर राजनीतिक हमला किया। इसलिए खबर को पेश करते समय राहुल गांधी के बयान और खड़गे की कानूनी कार्रवाई की मांग को अलग-अलग रखना जरूरी है। BJP ने क्या कहा? BJP ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया है। पार्टी की ओर से कहा गया कि वह किसी भी तरह के भेदभावपूर्ण व्यवहार का समर्थन नहीं करती। केंद्रीय मंत्री और BJP के वरिष्ठ नेता जेपी नड्डा ने मामले की जांच का आश्वासन दिया। BJP नेताओं का कहना है कि घटना के पीछे धार्मिक कारण हो सकते हैं और इसे खड़गे की जाति से जोड़ना उचित नहीं है। अब इस मामले में जांच के परिणाम महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि इसी से यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित ‘शुद्धिकरण’ किसने कराया और इसके पीछे वास्तविक कारण क्या था। कांग्रेस ने राज्यपाल से भी की शिकायत मामले को लेकर कांग्रेस नेताओं ने उत्तराखंड के राज्यपाल से मुलाकात कर कथित ‘शुद्धिकरण’ की निष्पक्ष जांच की मांग भी की है। कांग्रेस का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की जाति के आधार पर किसी सार्वजनिक स्थान या मंच को ‘अपवित्र’ माना गया है, तो यह गंभीर सामाजिक और संवैधानिक मुद्दा है। Haldwani Row बना Political मुद्दा हल्द्वानी का ‘शुद्धिकरण’ विवाद अब स्थानीय घटना से आगे बढ़कर राष्ट्रीय राजनीति का मुद्दा बन गया है। कांग्रेस इसे Dalit dignity, social equality और constitutional values से जोड़ रही है, जबकि BJP कांग्रेस पर घटना को राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगा रही है। फिलहाल दोनों पक्षों के दावों के बीच इस मामले में जांच और संभावित कानूनी कार्रवाई पर सबकी नजर है। विवाद के आगे बढ़ने के साथ Rahul Gandhi, Mallikarjun Kharge, Haldwani Shuddhikaran Row, FIR और SC/ST Act जैसे मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में बने हुए हैं।
H-1B

H-1B Rules में बड़ा बदलाव: Trump हटाएंगे 60 Days Grace Period? Indian IT Professionals पर असर

अमेरिका में काम करने वाले भारतीय H-1B visa holders के लिए Donald Trump administration की immigration policies लगातार चिंता बढ़ा रही हैं। अब H-1B के तहत मिलने वाली 60 Days Grace Period को खत्म करने की तैयारी की खबरों ने भारतीय IT professionals के बीच नई चिंता पैदा कर दी है। अगर यह प्रस्ताव अंतिम रूप से लागू होता है, तो नौकरी जाने के बाद H-1B workers को अमेरिका में नई नौकरी तलाशने के लिए मिलने वाली मौजूदा 60 दिनों की राहत खत्म हो सकती है। इसके साथ ही H-1B visa से जुड़ी बढ़ी हुई लागत और दूसरे proposed immigration changes भी भारतीय professionals के लिए अमेरिका में नौकरी और long-term career planning को प्रभावित कर सकते हैं। क्या है H-1B 60 Days Grace Period? मौजूदा नियमों के तहत, अगर किसी H-1B worker की नौकरी समाप्त हो जाती है, तो कुछ परिस्थितियों में उसे अधिकतम 60 दिन या उसके authorized stay की समाप्ति तक, जो भी पहले हो, अमेरिका में रहने की अनुमति मिल सकती है। इस दौरान कर्मचारी: टेक्नोलॉजी सेक्टर में layoffs के दौरान यह grace period H-1B workers के लिए एक महत्वपूर्ण safety net बन गई है। Trump Administration क्यों बदलना चाहती है H-1B Rules? Trump administration लंबे समय से अमेरिकी workers को प्राथमिकता देने और foreign workers पर अमेरिकी कंपनियों की निर्भरता कम करने की नीति पर जोर देती रही है। प्रस्तावित बदलावों का व्यापक उद्देश्य H-1B program में ज्यादा सख्ती और oversight लाना है। हालांकि, 60-day grace period को खत्म करने का प्रस्ताव अभी अंतिम रूप से लागू नियम नहीं माना जा सकता। अंतिम regulatory process और effective date यह तय करेंगे कि बदलाव वास्तव में कब और किस रूप में लागू होगा। Indians पर सबसे बड़ा असर क्या होगा? H-1B program में भारतीय professionals की बड़ी हिस्सेदारी होने के कारण किसी भी बड़े बदलाव का असर भारतीयों पर विशेष रूप से पड़ सकता है। 1. Layoff के बाद बढ़ेगा Immigration Pressure अगर किसी भारतीय H-1B employee की नौकरी चली जाती है, तो मौजूदा 60 दिनों का buffer उपलब्ध नहीं होने पर उसे बहुत तेजी से नया employer या दूसरा वैध immigration option तलाशना पड़ सकता है। इससे layoffs का असर सिर्फ नौकरी खोने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अमेरिका में रहने की स्थिति भी तुरंत चिंता का विषय बन सकती है। 2. IT Professionals पर ज्यादा असर भारतीय H-1B workers की बड़ी संख्या technology और specialized professional roles में काम करती है। इसलिए software engineers, IT consultants, data professionals और दूसरे skilled workers के लिए नौकरी बदलने की समय-सीमा महत्वपूर्ण हो सकती है। नई व्यवस्था में companies के बीच job switch करने की प्रक्रिया को पहले से ज्यादा जल्दी पूरा करना जरूरी हो सकता है। 3. कम समय में Job Search का दबाव 60 दिन की grace period खत्म होने की स्थिति में कर्मचारी के पास नई नौकरी तलाशने के लिए कम flexibility होगी। ऐसे में कुछ workers को: H-1B Fee में भारी बढ़ोतरी से भी बढ़ी चिंता H-1B program में प्रस्तावित एक और बड़ा बदलाव इसकी लागत से जुड़ा है। Trump administration ने नए H-1B petitions से जुड़ी $103,265 की proposed fee को लेकर कदम उठाए हैं। यह समझना जरूरी है कि इसका अर्थ यह नहीं है कि हर H-1B employee को अपनी जेब से करीब $100,000 देना होगा। यह मुख्य रूप से employer-side cost से जुड़ा प्रस्ताव है। फिर भी इतनी बड़ी लागत कंपनियों के hiring decisions को प्रभावित कर सकती है। Indian IT Companies के लिए क्या बदल सकता है? H-1B rules में सख्ती और बढ़ी हुई लागत का असर भारतीय IT companies की US business strategy पर भी पड़ सकता है। कंपनियां संभावित रूप से: इसका मतलब यह हो सकता है कि आने वाले समय में भारतीय IT professionals के लिए US onsite opportunities की competition और बढ़ जाए। H-4 Visa पर रहने वाले परिवारों पर भी असर H-1B employee की immigration स्थिति का असर उसके परिवार पर भी पड़ सकता है। H-4 status पर अमेरिका में रहने वाले spouse और children के लिए भी primary H-1B holder की स्थिति महत्वपूर्ण होती है। अगर principal H-1B worker को नौकरी जाने के बाद जल्दी नया immigration solution नहीं मिलता, तो परिवार को भी relocation या दूसरे immigration options पर विचार करना पड़ सकता है। इसका असर बच्चों की schooling, spouse की employment और परिवार की financial planning पर भी पड़ सकता है। क्या हर H-1B worker को नौकरी जाते ही अमेरिका छोड़ना पड़ेगा? यह सबसे महत्वपूर्ण बात है। 60-day grace period खत्म करने का प्रस्ताव अगर लागू होता भी है, तो उसकी वास्तविक conditions अंतिम नियम में स्पष्ट होंगी। इसके अलावा H-1B worker की स्थिति उसके individual immigration circumstances, pending petitions, authorized stay और उपलब्ध दूसरे legal options पर निर्भर कर सकती है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि grace period हटते ही हर H-1B worker को नौकरी खत्म होने के अगले दिन अमेरिका छोड़ना पड़ेगा। क्या भारतीयों के लिए US में Jobs खत्म हो जाएंगी? ऐसा कहना भी सही नहीं होगा। अमेरिका की technology, healthcare, research, engineering और दूसरे specialized sectors में skilled professionals की मांग बनी हुई है। लेकिन नए नियमों से H-1B sponsorship की लागत और immigration uncertainty बढ़ सकती है। इसका सबसे बड़ा असर नए applicants और ऐसे professionals पर पड़ सकता है जिन्हें employer sponsorship की जरूरत है। H-1B Indians के लिए आगे क्या महत्वपूर्ण होगा? भारतीय H-1B professionals को आने वाले समय में immigration policy में होने वाले बदलावों पर नजर रखनी होगी। खासकर ये चार चीजें महत्वपूर्ण रहेंगी: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
PM Modi

PM Modi in Uzbekistan: SCO Summit से पहले पीएम मोदी का बड़ा बयान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) शनिवार को Uzbekistan और Kyrgyz Republic के चार दिवसीय दौरे के लिए रवाना हो गए। 29 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक चलने वाली इस यात्रा में पीएम मोदी पहले उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद जाएंगे। इसके बाद वह किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित होने वाले 26वें Shanghai Cooperation Organisation (SCO) Summit में हिस्सा लेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने दौरे से पहले कहा कि भारत SCO के सदस्य देशों के साथ मिलकर ऐसा क्षेत्र बनाने की दिशा में काम करेगा, जो आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से मुक्त हो। उन्होंने SCO के लिए भारत की प्राथमिकताओं को Security, Connectivity और Opportunity से जोड़ा है। PM Modi Uzbekistan Visit: द्विपक्षीय संबंधों पर होगी अहम बातचीत उज्बेकिस्तान की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। दोनों नेताओं के बीच भारत और उज्बेकिस्तान के संबंधों को और मजबूत करने के लिए कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। इस दौरान Trade and Investment, Defence, Energy, Education और Digital Connectivity जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होगा। भारत के लिए उज्बेकिस्तान Central Asia का एक महत्वपूर्ण साझेदार है। ऐसे में पीएम मोदी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच आर्थिक, सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। Tashkent में Shastri Memorial और Mahatma Gandhi Centre जाएंगे PM Modi ताशकंद में प्रधानमंत्री मोदी Lal Bahadur Shastri Memorial और Mahatma Gandhi Centre का दौरा भी करेंगे। इन कार्यक्रमों के जरिए भारत और उज्बेकिस्तान के बीच ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित किया जाएगा। भारत और Central Asia के बीच सदियों पुराने व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। मौजूदा दौर में दोनों पक्ष इन रिश्तों को आधुनिक आर्थिक और रणनीतिक सहयोग में बदलने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। SCO Summit 2026 में Terrorism पर भारत का सख्त रुख उज्बेकिस्तान दौरे के बाद पीएम मोदी 31 अगस्त और 1 सितंबर को बिश्केक में होने वाले 26वें SCO Summit में शामिल होंगे। यह सम्मेलन SCO की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। SCO Summit में regional security, terrorism, extremism, connectivity और economic cooperation जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। भारत लंबे समय से आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत कार्रवाई की वकालत करता रहा है। पीएम मोदी ने कहा है कि भारत SCO के माध्यम से ऐसे क्षेत्र के निर्माण के लिए काम करेगा, जो terrorism, separatism और extremism से मुक्त हो। उनका यह संदेश SCO Summit में भारत की सुरक्षा प्राथमिकताओं को स्पष्ट करता है। Security और Connectivity पर भी रहेगा फोकस SCO के मंच पर भारत के लिए Security, Connectivity और Opportunity प्रमुख प्राथमिकताएं हैं। मध्य एशिया के साथ बेहतर connectivity भारत के आर्थिक और रणनीतिक हितों के लिए महत्वपूर्ण है। व्यापार मार्गों, ऊर्जा सहयोग, डिजिटल कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा देने से भारत और Central Asian देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूती मिल सकती है। प्रधानमंत्री मोदी SCO Summit के दौरान अन्य सदस्य देशों के नेताओं के साथ Bilateral Meetings भी कर सकते हैं। इन बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर बातचीत की संभावना है। World Nomad Games के Opening Ceremony में शामिल होंगे PM Modi किर्गिस्तान दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी 6th World Nomad Games के Opening Ceremony में भी शामिल होंगे। यह आयोजन Central Asia की पारंपरिक संस्कृति, खेल और विरासत को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करता है। पीएम मोदी की इस कार्यक्रम में भागीदारी भारत और किर्गिस्तान के बीच people-to-people और cultural ties को और मजबूत करने का अवसर भी होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
RBI

EMI नहीं चुकाई तो क्या होगा? RBI Loan Recovery Rules में बदलाव, जानिए Bank क्या नहीं कर सकता

अगर आपने Personal Loan, Home Loan, Car Loan या किसी अन्य तरह का Loan लिया है और किसी वजह से EMI समय पर नहीं चुका पा रहे हैं, तो आपके लिए RBI के Loan Recovery Rules जानना बेहद जरूरी है। EMI डिफॉल्ट होने पर बैंक या NBFC बकाया रकम की Recovery कर सकता है, लेकिन इसके लिए उसे RBI के नियमों का पालन करना जरूरी है। कई लोग यह मान लेते हैं कि EMI मिस होने के बाद Recovery Agent घर आकर धमका सकता है या किसी भी समय फोन कर सकता है। ऐसा नहीं है। RBI ने Loan Recovery के दौरान ग्राहकों के सम्मान, Privacy और उचित व्यवहार को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए हैं। EMI Miss होने पर सबसे पहले क्या होता है? अगर आपकी EMI तय तारीख पर जमा नहीं होती है, तो बैंक इसे Overdue Payment के रूप में दर्ज कर सकता है। Loan Agreement के मुताबिक बैंक बकाया रकम के साथ लागू ब्याज या अन्य वैध Charges की मांग कर सकता है। अगर EMI लगातार Miss होती रहती है, तो बैंक ग्राहक से संपर्क कर सकता है और बकाया रकम चुकाने के लिए कह सकता है। लंबे समय तक भुगतान न होने पर बैंक अपने नियमों और लागू कानून के अनुसार Recovery Process आगे बढ़ा सकता है। इसलिए RBI के नियमों का मतलब यह नहीं है कि EMI नहीं चुकाने पर बैंक पैसा नहीं मांग सकता। नियम मुख्य रूप से यह तय करते हैं कि Recovery किस तरीके से की जा सकती है। RBI Loan Recovery Rules: Bank आपको कब कॉल कर सकता है? RBI के निर्देशों के अनुसार Overdue Loan की Recovery के लिए ग्राहक से सुबह 8 बजे से पहले और शाम 7 बजे के बाद संपर्क नहीं किया जाना चाहिए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि Recovery Agent ग्राहकों को अनुचित समय पर फोन करके परेशान न करें। अगर कोई Recovery Agent लगातार देर रात या सुबह-सुबह कॉल करता है, तो ग्राहक इस मामले की शिकायत संबंधित Bank या NBFC से कर सकता है। Recovery Agent आपको धमका नहीं सकता Loan की Recovery के लिए Bank या NBFC Recovery Agent की मदद ले सकता है, लेकिन Agent को ग्राहक के साथ धमकी, गाली-गलौज, अपमानजनक व्यवहार या मानसिक दबाव बनाने की अनुमति नहीं है। Recovery का उद्देश्य बकाया रकम की वसूली करना है, ग्राहक को डराना या परेशान करना नहीं। RBI ने Regulated Entities को अपने Recovery Agents की गतिविधियों पर उचित निगरानी रखने की जिम्मेदारी भी दी है। परिवार और दोस्तों को भी परेशान नहीं कर सकता Bank अगर आपकी EMI बकाया है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि Recovery Agent आपके परिवार, दोस्तों या परिचितों को परेशान करके आप पर दबाव बनाए। ग्राहक की Privacy और सम्मान का ध्यान रखना जरूरी है। किसी व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करना या उसके कर्ज की जानकारी का अनुचित तरीके से इस्तेमाल करना Recovery का स्वीकार्य तरीका नहीं है। क्या Bank घर आकर Recovery कर सकता है? बकाया Loan की Recovery के लिए Bank या उसका अधिकृत Recovery Agent ग्राहक से संपर्क कर सकता है। हालांकि, Recovery करते समय निर्धारित नियमों और कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। अगर Loan के बदले कोई Asset जैसे Car, Property या अन्य Security रखी गई है, तो Default की स्थिति में Bank के पास कानून और Loan Agreement के तहत Recovery के अधिकार हो सकते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि Recovery Agent अपनी मर्जी से जबरन सामान या संपत्ति पर कब्जा कर सकता है। Loan Default होने पर Credit Score पर भी असर पड़ सकता है EMI का लगातार भुगतान न करने का असर केवल Bank Recovery तक सीमित नहीं रहता। Loan Repayment History आपके Credit Profile को प्रभावित कर सकती है। अगर Loan Account में लगातार Default होता है, तो भविष्य में Loan या Credit Card लेने में परेशानी हो सकती है। इसलिए आर्थिक परेशानी होने पर EMI को नजरअंदाज करने के बजाय Bank से समय रहते संपर्क करना बेहतर होता है। Recovery Agent परेशान करे तो क्या करें? अगर कोई Recovery Agent RBI के नियमों का उल्लंघन करता है, तो ग्राहक को सबसे पहले संबंधित Bank या NBFC के Grievance Redressal Mechanism में शिकायत करनी चाहिए। शिकायत करते समय कॉल रिकॉर्ड, SMS, WhatsApp Message, Email या अन्य उपलब्ध सबूत सुरक्षित रखना उपयोगी हो सकता है। अगर Bank या NBFC से शिकायत का समाधान नहीं होता है, तो पात्र मामलों में RBI की Ombudsman व्यवस्था के तहत शिकायत की जा सकती है। क्या EMI नहीं भरने पर Bank Loan माफ कर देगा? नहीं। RBI के Recovery Rules का उद्देश्य ग्राहकों को अनुचित Recovery Practices से सुरक्षा देना है। इसका मतलब यह नहीं है कि EMI नहीं भरने पर Loan अपने आप माफ हो जाएगा। Bank अपने Loan Agreement और लागू कानून के अनुसार बकाया रकम की Recovery कर सकता है। लंबे समय तक Default की स्थिति में कानूनी कार्रवाई भी संभव है। EMI भरने में परेशानी हो तो क्या करें? अगर आपको लगता है कि किसी महीने या आने वाले समय में EMI भरना मुश्किल हो सकता है, तो Bank या NBFC से जल्द संपर्क करें। अपनी Financial Situation के बारे में जानकारी देकर उपलब्ध विकल्पों के बारे में पूछें। सबसे जरूरी बात यह है कि Recovery Agent के दबाव में आकर किसी अनजान व्यक्ति के Personal Account में पैसा जमा न करें। Payment हमेशा Bank/NBFC के अधिकृत माध्यम से ही करें। RBI Loan Recovery Rules का सबसे जरूरी सार EMI समय पर नहीं चुकाने पर Bank आपसे बकाया रकम की मांग कर सकता है और नियमों के अनुसार Recovery Process शुरू कर सकता है। लेकिन Recovery के दौरान Bank या उसके Agent को ग्राहक की Privacy और सम्मान का ध्यान रखना होगा। याद रखें: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CNG Price

Delhi CNG Price: CNG के दाम में ₹3.89 की बढ़ोतरी, अब ₹86.98 प्रति किलो मिलेगा गैस

दिल्ली-NCR में CNG इस्तेमाल करने वाले वाहन चालकों को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। CNG Price Hike के तहत इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने CNG की कीमत में ₹3.89 प्रति किलो की बढ़ोतरी की है। नई कीमतें 29 अगस्त 2026 से लागू हो गई हैं। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में CNG का रेट ₹83.09 प्रति किलो से बढ़कर ₹86.98 प्रति किलो हो गया है। यह 2026 में दिल्ली-NCR में CNG की पांचवीं कीमत बढ़ोतरी है। लगातार हो रही बढ़ोतरी से CNG कार चलाने वाले लोगों के साथ-साथ ऑटो, टैक्सी, कैब और कमर्शियल वाहनों के ड्राइवरों पर भी ईंधन खर्च का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। Delhi CNG Price: अब कितना हुआ CNG का रेट? IGL की नई कीमतों के मुताबिक दिल्ली-NCR के अलग-अलग शहरों में CNG के दाम इस प्रकार हैं: दिल्ली में CNG की कीमत में सीधे ₹3.89 प्रति किलो की वृद्धि हुई है। इसका मतलब है कि जो वाहन रोजाना बड़ी मात्रा में CNG की खपत करते हैं, उनके लिए महीने का fuel budget पहले की तुलना में और बढ़ जाएगा। Why CNG Price Increased: क्यों बढ़े CNG के दाम? IGL के अनुसार, CNG की कीमत बढ़ाने की मुख्य वजह imported LNG की बढ़ी हुई लागत है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में LNG की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर गैस की supply और import cost पर पड़ा है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण LNG की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ी है। इसके चलते global energy market में कीमतों पर दबाव बना हुआ है। IGL ने इसी बढ़ी हुई input cost के एक हिस्से को CNG की कीमतों में शामिल किया है। 2026 में पांचवीं बार महंगी हुई CNG दिल्ली-NCR में वर्ष 2026 के दौरान CNG की कीमतों में यह पांचवीं बढ़ोतरी है। इससे पहले भी इस साल अलग-अलग चरणों में CNG के दाम बढ़ाए गए थे। बार-बार होने वाली price hike के कारण CNG को economical fuel मानकर इस्तेमाल करने वाले वाहन मालिकों की लागत लगातार बढ़ रही है। हालांकि पेट्रोल और डीजल की तुलना में CNG अभी भी कई वाहन चालकों के लिए एक महत्वपूर्ण alternative fuel बनी हुई है। CNG Price Hike का आम लोगों पर क्या असर होगा? CNG की कीमत बढ़ने का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो रोजाना लंबी दूरी तय करते हैं। निजी CNG कारों के अलावा auto-rickshaw, taxi, cab और commercial vehicles चलाने वालों की operating cost भी बढ़ेगी। ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए बढ़ती fuel cost का सीधा असर उनकी daily earnings पर पड़ सकता है। अगर CNG की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो भविष्य में इसका असर transportation charges और passenger fares पर भी देखने को मिल सकता है। CNG महंगी होने से बढ़ सकता है Monthly Fuel Budget उदाहरण के तौर पर, अगर कोई वाहन प्रतिदिन 5 किलो CNG की खपत करता है, तो ₹3.89 प्रति किलो की अतिरिक्त कीमत के कारण उसका खर्च करीब ₹19.45 प्रतिदिन बढ़ जाएगा। 30 दिनों में यह अतिरिक्त खर्च लगभग ₹584 हो सकता है। जिन commercial vehicles की रोजाना CNG consumption इससे कहीं अधिक है, उनके लिए अतिरिक्त मासिक खर्च भी काफी ज्यादा होगा। आगे CNG के दाम पर क्या रहेगा असर? CNG की कीमतों पर आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय LNG prices, global gas supply और पश्चिम एशिया की स्थिति का असर महत्वपूर्ण रहेगा। अगर imported gas की लागत ऊंची बनी रहती है, तो domestic CNG prices पर भी दबाव बना रह सकता है। फिलहाल दिल्ली-NCR के लोगों को 29 अगस्त से CNG के लिए ₹3.89 प्रति किलो ज्यादा भुगतान करना होगा। दिल्ली में नई CNG कीमत ₹86.98 प्रति किलो पहुंच गई है, जबकि नोएडा और गाजियाबाद में यह ₹95.59 प्रति किलो हो गई है। CNG Price Hike 2026 की यह पांचवीं बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब बढ़ती fuel और transportation costs पहले से ही आम लोगों के बजट को प्रभावित कर रही हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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