महाराष्ट्र में भाषा को लेकर मचा बवाल अब सियासी भूचाल में बदल गया है। मराठी भाषा और स्थानीय पहचान के मुद्दे पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) द्वारा ठाणे में निकाले गए प्रदर्शन मार्च ने ना सिर्फ प्रशासन को चुनौती दी, बल्कि खुद राज्य सरकार के भीतर फूट की तस्वीर भी सामने रख दी।
खुद की सरकार के खिलाफ उतरे मंत्री
राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने सरकार की अनुमति न मिलने के बावजूद MNS के प्रदर्शन में हिस्सा लिया और साफ शब्दों में कहा, “Let them arrest me” यानी “चाहे तो मुझे गिरफ्तार कर लें”। सरनाईक ने पुलिस की कार्रवाई को गलत बताया और कहा कि वो इस मुद्दे को मुख्यमंत्री के सामने उठाएंगे।
MNS नेताओं की गिरफ्तारी और अनुमति रद्द
प्रदर्शन से पहले ही MNS के ठाणे-पालघर अध्यक्ष अविनाश जाधव समेत कई कार्यकर्ताओं को पुलिस ने एहतियातन गिरफ्तार कर लिया। पहले पुलिस ने मार्च की अनुमति दी थी लेकिन बाद में तय किए गए रूट को लेकर विवाद होने पर अनुमति वापस ले ली गई। पुलिस का कहना था कि MNS जिस रूट से प्रदर्शन करना चाहती थी, वह ट्रैफिक और भीड़-भाड़ के लिहाज़ से सही नहीं था।
“Slapgate” से उठा विवाद
इस पूरे विवाद की शुरुआत मिरा रोड में एक फूड स्टॉल मालिक को हिंदी बोलने पर थप्पड़ मारने की घटना से हुई। इसे “Slapgate” नाम दिया गया और इसके विरोध में व्यापारियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। वहीं MNS ने इसे मराठी अस्मिता का अपमान बताते हुए “मराठी स्वाभिमान रैली” निकालने की ठानी।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का बयान
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि प्रदर्शन करना सबका अधिकार है, लेकिन रूट को लेकर पुलिस की चिंता जायज थी। उन्होंने तीखा हमला करते हुए कहा,
“मराठी लोग संकीर्ण नहीं हैं… इस तरह के प्रयोग महाराष्ट्र में नहीं चलेंगे।”
उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहा है, लेकिन महाराष्ट्र के लोग समझदार हैं।
सरनाईक को किया गया हूट
प्रदर्शन के दौरान एक पल ऐसा भी आया जब खुद मंत्री प्रताप सरनाईक को विरोध का सामना करना पड़ा। कुछ MNS कार्यकर्ताओं ने उन्हें प्रदर्शन से हटने को कहा और उन्हें सुरक्षा में बाहर निकाला गया।
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