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Mayawati vs Akash Anand: BSP से बाहर हुए आकाश, ससुर अशोक सिद्धार्थ के संन्यास से जुड़ा मामला

बहुजन समाज पार्टी (BSP) में एक बार फिर बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिला है। पार्टी प्रमुख मायावती (Mayawati) ने अपने भतीजे आकाश आनंद (Akash Anand) को BSP से बाहर कर दिया है। कभी मायावती के उत्तराधिकारी के तौर पर देखे जाने वाले आकाश आनंद को लेकर पिछले कुछ समय से पार्टी के भीतर लगातार उठापटक चल रही थी। अब उनके निष्कासन के बाद BSP की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर चर्चा में आ गई है। आकाश आनंद को पार्टी से निकालने का फैसला ऐसे समय आया है, जब उनके ससुर और BSP के पूर्व नेता अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान किया। यही वजह है कि पूरे घटनाक्रम में परिवार और पार्टी के बीच चल रहा विवाद सबसे ज्यादा चर्चा में है। आकाश आनंद को लेकर मायावती का बड़ा फैसला मायावती ने आकाश आनंद को लेकर अपना रुख पहले ही काफी स्पष्ट कर दिया था। उन्होंने संकेत दिया था कि पार्टी में आकाश की भूमिका तय करने से पहले उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से पूरी तरह अलग होना होगा। अशोक सिद्धार्थ के संन्यास की घोषणा के बाद माना जा रहा था कि आकाश आनंद के लिए पार्टी में दोबारा रास्ता साफ हो सकता है। लेकिन घटनाक्रम ने अचानक दूसरा मोड़ ले लिया। मायावती ने आकाश आनंद को ही पार्टी से बाहर करने का फैसला सुना दिया। इस फैसले ने BSP समर्थकों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश की राजनीति पर नजर रखने वालों को भी चौंका दिया है। ‘ससुर’ को लेकर क्यों शुरू हुआ था विवाद? आकाश आनंद की राजनीतिक सक्रियता में उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ की भूमिका लंबे समय से चर्चा में रही है। मायावती ने आरोप लगाया था कि पार्टी में पारिवारिक और निजी हितों को संगठन के हित से ऊपर नहीं रखा जा सकता। मायावती का मानना रहा है कि BSP का संगठन और बहुजन आंदोलन किसी एक परिवार के इर्द-गिर्द नहीं चल सकता। इसी वजह से आकाश आनंद की राजनीतिक जिम्मेदारियों को लेकर भी कई बार सवाल उठे। अशोक सिद्धार्थ ने अब राजनीति से संन्यास लेने का फैसला कर लिया है। उन्होंने BSP और बहुजन आंदोलन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए यह कदम उठाया। हालांकि, उनके इस फैसले के बावजूद आकाश आनंद की पार्टी में वापसी नहीं हो सकी। पहले भी आकाश आनंद को हटाया जा चुका है आकाश आनंद का BSP में राजनीतिक सफर शुरू से ही आसान नहीं रहा है। मायावती ने उन्हें पार्टी में आगे बढ़ाया और युवा नेतृत्व के तौर पर बड़ी जिम्मेदारी दी थी। एक समय उन्हें मायावती के संभावित राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में भी देखा जाने लगा था। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान उनके बयानों और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर विवाद हुआ। इसके बाद मायावती ने उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से हटा दिया था। बाद में आकाश आनंद की पार्टी में वापसी हुई और उन्हें फिर से संगठन में अहम भूमिका मिली। इससे लगा कि BSP में युवा नेतृत्व को लेकर तस्वीर साफ हो गई है। लेकिन कुछ समय बाद ही परिस्थितियां दोबारा बदल गईं। मायावती के फैसले से उठे कई सवाल आकाश आनंद को BSP से बाहर किए जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि पार्टी अब युवा नेतृत्व को किस तरह आगे बढ़ाएगी। आकाश को लंबे समय तक पार्टी की नई पीढ़ी का चेहरा माना जाता रहा है। ऐसे में उनका निष्कासन केवल संगठनात्मक फैसला नहीं, बल्कि BSP की भविष्य की राजनीति के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। खासकर UP Election 2027 को देखते हुए यह घटनाक्रम काफी महत्वपूर्ण है। उत्तर प्रदेश में BSP को अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की चुनौती पहले से ही है। ऐसे में पार्टी के एक चर्चित युवा चेहरे का बाहर होना चुनावी रणनीति पर भी असर डाल सकता है। अब ईशान आनंद की भूमिका पर नजर आकाश आनंद के बाद अब मायावती के छोटे भाई आनंद कुमार के बेटे ईशान आनंद का नाम भी राजनीतिक चर्चाओं में आने लगा है। पार्टी की भविष्य की रणनीति में ईशान को कितनी जिम्मेदारी मिलती है, यह आने वाले समय में साफ होगा। हालांकि, फिलहाल BSP की ओर से भविष्य के नेतृत्व को लेकर कोई अंतिम तस्वीर सामने नहीं आई है। लेकिन जिस तरह से पिछले कुछ समय में पार्टी के भीतर बदलाव हुए हैं, उससे साफ है कि मायावती संगठन को अपने तरीके से नए सिरे से तैयार करने में जुटी हैं। 2027 चुनाव से पहले BSP में नई रणनीति? उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। ऐसे में BSP में आकाश आनंद का निष्कासन पार्टी की चुनावी रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है। मायावती लंबे समय से BSP के संगठन और नेतृत्व पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए हुए हैं। अब आकाश आनंद के बाहर होने के बाद पार्टी किस चेहरे को आगे करती है और युवाओं के बीच अपनी पकड़ कैसे मजबूत करती है, यह देखने वाली बात होगी। फिलहाल एक बात तय है—आकाश आनंद और उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब BSP के भीतर बड़े राजनीतिक फैसले तक पहुंच चुका है। 2027 के UP Election से पहले मायावती के इस फैसले ने उत्तर प्रदेश की सियासत में एक नई चर्चा जरूर छेड़ दी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bihar

Bihar Flood Crisis: लाखों लोग प्रभावित, UP में सरयू के तेज बहाव से कई घर बहे

Bihar में बाढ़ की स्थिति ने एक बार फिर लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। राज्य के 14 जिलों में 40 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। कई गांवों और निचले इलाकों में पानी भरा हुआ है। कहीं सड़कें डूबी हैं तो कहीं लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है। हालांकि कुछ इलाकों में नदियों का पानी अब धीरे-धीरे कम होने लगा है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। बिहार के बाद अब उत्तर प्रदेश में भी नदियों का बढ़ता जलस्तर चिंता बढ़ा रहा है। रामगंगा नदी के कटाव की वजह से एक मंदिर के नदी में समाने की खबर है, जबकि सरयू के तेज बहाव से कई घरों को नुकसान पहुंचा है। दूसरी तरफ मध्य प्रदेश और राजस्थान के कई हिस्से अब भी अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। Bihar Flood: 14 जिलों में बाढ़, 40 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित बिहार में गंगा समेत कई नदियों के बढ़े जलस्तर ने बड़ी आबादी को प्रभावित किया है। बाढ़ का पानी खेतों, सड़कों और रिहायशी इलाकों तक पहुंच गया है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित परिवारों तक भोजन, पीने का पानी और दूसरी जरूरी चीजें पहुंचाना है। कई जगह लोगों को नावों के सहारे सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है। राहत शिविरों में भी लोगों के रहने और खाने की व्यवस्था की गई है। ग्रामीण इलाकों में बाढ़ का असर ज्यादा दिखाई दे रहा है, जहां लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह प्रभावित हुई है। Ganga का जलस्तर बढ़ने से बढ़ी चिंता बिहार में गंगा का बढ़ता जलस्तर बाढ़ की स्थिति को और गंभीर बना रहा है। कई स्थानों पर नदी खतरे के निशान के आसपास या उससे ऊपर बह रही है। भागलपुर समेत गंगा किनारे के इलाकों में लोगों को खास सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। हालांकि कुछ जगहों पर पानी में कमी आने लगी है। इससे प्रशासन और स्थानीय लोगों को थोड़ी राहत मिली है, लेकिन नदियों के जलस्तर में दोबारा बढ़ोतरी की संभावना को देखते हुए निगरानी जारी है। UP Flood: रामगंगा के कटाव में नदी में समाया मंदिर उत्तर प्रदेश में भी बाढ़ और नदी कटाव ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। रामगंगा नदी के तेज बहाव और कटाव की वजह से एक मंदिर के नदी में समाने की खबर सामने आई है। नदी के किनारे रहने वाले लोगों के लिए यह स्थिति लगातार खतरा पैदा कर रही है। वहीं सरयू नदी के बढ़े जलस्तर से कई इलाकों में पानी पहुंच गया है। कुछ जगहों पर घरों को नुकसान हुआ है और लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा है। नदी किनारे बसे गांवों में प्रशासन की टीम हालात पर नजर बनाए हुए है। राहत और Rescue Operations जारी बिहार और उत्तर प्रदेश के बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव अभियान जारी है। प्रशासन के साथ SDRF और NDRF की टीमें भी जरूरत के मुताबिक तैनात हैं। बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए नावों का इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाने के साथ सामुदायिक रसोई के जरिए भोजन उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। सबसे ज्यादा चिंता उन परिवारों को लेकर है, जिनके घर पानी की चपेट में आ गए हैं। ऐसे लोगों के लिए राहत शिविर फिलहाल सबसे बड़ा सहारा बने हुए हैं। MP और Rajasthan में बारिश का इंतजार जहां बिहार और यूपी में ज्यादा बारिश और नदियों के उफान ने मुश्किलें बढ़ा रखी हैं, वहीं मध्य प्रदेश और राजस्थान के कई इलाकों में लोग अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। मानसून का असर हर राज्य में एक जैसा नहीं दिखाई दे रहा है। कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश से बाढ़ जैसे हालात हैं, तो कुछ जगह बारिश की कमी लोगों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। किसानों की नजर भी अब आने वाले दिनों के मौसम पर टिकी है। अभी खतरा टला नहीं बिहार में पानी कुछ इलाकों में कम जरूर हुआ है, लेकिन लाखों लोगों के प्रभावित होने के कारण स्थिति को सामान्य नहीं कहा जा सकता। उत्तर प्रदेश में भी नदी कटाव और बढ़ते जलस्तर ने खतरा कायम रखा है। आने वाले दिनों में बारिश और नदियों के जलस्तर पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा। प्रशासन की कोशिश है कि बाढ़ प्रभावित लोगों तक समय पर मदद पहुंचे और किसी भी आपात स्थिति में उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके। फिलहाल तस्वीर साफ है—बिहार और यूपी में बाढ़ ने लोगों की मुश्किलें बढ़ाई हैं, जबकि MP और Rajasthan में आसमान से राहत की उम्मीद बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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गांधीनगर में बड़ा हादसा: निर्माणाधीन इमारत पर गिरी क्रेन, 10-15 मजदूरों के दबे होने की आशंका

गांधीनगर। गुजरात के गांधीनगर के पास कुडासन इलाके में बुधवार को एक बड़ा हादसा हो गया। निर्माणाधीन इमारत पर अचानक भारी क्रेन गिर गई। हादसे के समय नीचे काम कर रहे करीब 10 से 15 मजदूरों के मलबे और क्रेन के भारी हिस्सों के नीचे दबे होने की आशंका है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंच गईं। मलबे में फंसे मजदूरों को बाहर निकालने के लिए राहत और बचाव अभियान शुरू कर दिया गया है। मलबा हटाने के लिए दूसरी क्रेन बुलाई गई क्रेन और निर्माण सामग्री के भारी मलबे को हटाने के लिए मौके पर एक और क्रेन बुलाई गई है। बचाव दल मलबे के नीचे दबे मजदूरों तक पहुंचने का प्रयास कर रहा है। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। दमकल की चार से ज्यादा गाड़ियां मौके पर पहुंचकर राहत कार्य में जुटी हैं। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस भी घटनास्थल पर तैनात की गई हैं। फिलहाल हादसे में कितने लोग घायल हुए हैं या किसी की मौत हुई है, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। नगर आयुक्त और डिप्टी CM मौके पर पहुंचे हादसे की गंभीरता को देखते हुए गांधीनगर नगर आयुक्त और गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी भी घटनास्थल पर पहुंचे। अधिकारियों की निगरानी में राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन की प्राथमिकता मलबे में फंसे मजदूरों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकालना है। फिलहाल बचाव अभियान जारी है और हादसे से जुड़ी विस्तृत जानकारी का इंतजार है।
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Apple iPhone 18 Pro और Pro Max लॉन्च, A20 Pro चिप और 45 घंटे तक की बैटरी; पहली बार फोल्डेबल iPhone भी

कैलिफोर्निया। Apple ने अपने नए iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max को लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने दोनों प्रीमियम मॉडल्स में नए डिजाइन, A20 Pro चिप, बेहतर AI फीचर्स और लंबी बैटरी लाइफ पर खास जोर दिया है। लॉन्च इवेंट नए CEO जॉन टर्नस के नेतृत्व में Apple का पहला बड़ा प्रोडक्ट प्रेजेंटेशन भी रहा। दोनों मॉडल चार कलर ऑप्शन में पेश किए गए हैं—डीप ब्लैक, सिल्वर, ग्लेशियर और बरगंडी। iPhone 18 Pro की शुरुआती कीमत 1,199 डॉलर और iPhone 18 Pro Max की 1,299 डॉलर रखी गई है। दोनों के बेस मॉडल में 256GB स्टोरेज दी गई है। A20 Pro चिप से मिलेगा तेज परफॉर्मेंस iPhone 18 Pro सीरीज में नया A20 Pro प्रोसेसर दिया गया है। Apple के मुताबिक यह 2nm टेक्नोलॉजी पर आधारित नई आर्किटेक्चर वाली चिप है। इसमें 6-कोर CPU और नया GPU दिया गया है, जबकि कंपनी ने GPU परफॉर्मेंस में करीब 40 फीसदी तक सुधार का दावा किया है। Apple Intelligence और Siri को भी नए हार्डवेयर के साथ ज्यादा सक्षम बनाया गया है। Siri में AI क्षमताओं और अधिक नैचुरल वॉइस अनुभव पर जोर दिया गया है। कंपनी का कहना है कि डिवाइस पर AI प्रोसेसिंग के साथ प्राइवेसी को भी प्राथमिकता दी गई है। बैटरी लाइफ में बड़ा अपग्रेड iPhone 18 Pro और Pro Max में अब तक की सबसे लंबी iPhone बैटरी लाइफ में से एक मिलने का दावा किया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक iPhone 18 Pro करीब 24 घंटे और Pro Max करीब 30 घंटे तक सामान्य उपयोग में चल सकता है। वहीं वीडियो प्लेबैक में Pro मॉडल करीब 36 घंटे और Pro Max करीब 45 घंटे तक का बैकअप दे सकता है। Pro Max का 45 घंटे का वीडियो प्लेबैक इस सीरीज की सबसे बड़ी बैटरी उपलब्धियों में से एक है। नई फास्ट चार्जिंग तकनीक भी दी गई है। कंपनी के अनुसार फोन करीब 15 मिनट की चार्जिंग में 50 फीसदी तक चार्ज हो सकता है। कैमरा सिस्टम में भी बड़ा बदलाव iPhone 18 Pro सीरीज में कैमरा सिस्टम को भी अपग्रेड किया गया है। मुख्य कैमरे में 48MP सेंसर के साथ डायनेमिक/वेरिएबल अपर्चर दिया गया है, जिससे अलग-अलग रोशनी की परिस्थितियों में फोटो क्वालिटी और लो-लाइट परफॉर्मेंस बेहतर करने में मदद मिलेगी। वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए भी नए प्रो कंट्रोल और 4K Dolby Vision HDR टाइम-लैप्स जैसे फीचर्स जोड़े गए हैं। Apple का पहला फोल्डेबल iPhone भी लॉन्च Apple के इस इवेंट की सबसे बड़ी खासियत कंपनी का पहला फोल्डेबल iPhone भी रहा। यह Apple के स्मार्टफोन डिजाइन में लंबे समय बाद सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है। Reuters के मुताबिक फोल्डेबल iPhone की कीमत 2,000 डॉलर से ज्यादा हो सकती है और कंपनी ने इसे लंबे समय तक इंजीनियरिंग चुनौतियों पर काम करने के बाद पेश किया है। इस साल Apple का फोकस प्रीमियम iPhone मॉडल्स और फोल्डेबल डिवाइस पर ज्यादा रहा है। बेस iPhone मॉडल के लॉन्च शेड्यूल में भी बदलाव किया गया है। नए CEO जॉन टर्नस का पहला बड़ा प्रेजेंटेशन 1 सितंबर को Tim Cook के बाद Apple के CEO बने John Ternus के लिए यह पहला बड़ा प्रोडक्ट लॉन्च प्रेजेंटेशन रहा। Ternus इससे पहले Apple के हार्डवेयर प्रमुख के तौर पर काम कर चुके हैं। Apple के इस इवेंट में iPhone के अलावा नए वियरेबल्स और अन्य प्रोडक्ट्स की घोषणाएं भी की गईं। कंपनी के लिए यह लॉन्च नए CEO के नेतृत्व में उसकी अगली प्रोडक्ट रणनीति की शुरुआत के तौर पर भी अहम माना जा रहा है।
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असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती-2025 में अंग्रेजी विषय का फाइनल रिजल्ट जारी करने पर हाईकोर्ट की रोक

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने असिस्टेंट प्रोफेसर कॉलेज शिक्षा भर्ती-2025 में अंग्रेजी विषय का फाइनल परिणाम जारी करने पर रोक लगा दी है। जस्टिस गणेशराम मीणा की अदालत ने संजय आशिया की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। हालांकि, अदालत ने राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) को भर्ती प्रक्रिया आगे जारी रखने की अनुमति दी है। कोर्ट ने उच्च शिक्षा सचिव और राजस्थान लोक सेवा आयोग, अजमेर के सचिव से मामले में जवाब मांगा है। फाइनल आंसर-की जारी किए बिना इंटरव्यू का आरोप याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में कहा गया कि आरपीएससी ने मॉडल आंसर-की में विवादित प्रश्नों को लेकर दर्ज कराई गई आपत्तियों का निस्तारण किए बिना ही भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। याचिका के मुताबिक, आयोग ने विवादित प्रश्नों पर आपत्तियों का अंतिम निस्तारण नहीं किया और फाइनल आंसर-की जारी किए बिना अभ्यर्थियों के इंटरव्यू शुरू कर दिए। याचिकाकर्ता ने आशंका जताई कि यदि विवादित प्रश्नों का निस्तारण किए बिना नियुक्तियां कर दी जाती हैं तो नियुक्त अभ्यर्थियों के पक्ष में थर्ड पार्टी राइट्स यानी तीसरे पक्ष के अधिकार पैदा हो जाएंगे। ऐसी स्थिति में बाद में भर्ती प्रक्रिया में बदलाव करना मुश्किल हो सकता है। जनरल पेपर के 15 सवालों पर आपत्ति याचिकाकर्ता के अधिवक्ता रामप्रताप सैनी ने कोर्ट को बताया कि राजस्थान लोक सेवा आयोग ने 18 सितंबर 2025 को अंग्रेजी समेत कुल 31 विषयों में सहायक आचार्य पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। याचिकाकर्ता ने अंग्रेजी विषय में आवेदन किया था। याचिका में बताया गया कि लिखित परीक्षा के दौरान जनरल पेपर के 15 प्रश्नों, अंग्रेजी विषय के प्रथम पेपर के 4 प्रश्नों और द्वितीय पेपर के 7 प्रश्नों को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। आरोप है कि आरपीएससी ने इन आपत्तियों का निस्तारण नहीं किया और न ही फाइनल आंसर-की जारी की। इसके बावजूद इंटरव्यू प्रक्रिया शुरू कर दी गई। अन्य विषयों पर भी असर पड़ने का दावा अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि जनरल पेपर के 15 प्रश्नों पर दर्ज आपत्तियों का प्रभाव केवल अंग्रेजी विषय तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भर्ती में शामिल अन्य विषयों के अभ्यर्थियों पर भी इसका असर पड़ सकता है। मामले में हाईकोर्ट ने अंग्रेजी विषय का फाइनल परिणाम जारी करने पर रोक लगाते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है। वहीं, आरपीएससी को भर्ती प्रक्रिया जारी रखने की अनुमति दी गई है।
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राजस्थान निकाय चुनाव: मतदान खत्म होते ही प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी शुरू, BJP-कांग्रेस ने एक्टिव की रणनीति

जयपुर। राजस्थान के 162 नगरीय निकायों—नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाओं—में पहले चरण के लिए बुधवार को मतदान हुआ। शाम 6 बजे वोटिंग समाप्त होते ही राजनीतिक दलों ने अपने-अपने प्रत्याशियों को एकजुट रखने के लिए बाड़ेबंदी की तैयारी शुरू कर दी। मतदान खत्म होने के बाद कई प्रत्याशियों को पार्टी कार्यालयों और तय स्थानों पर बुलाया गया। भीलवाड़ा में BJP के 70 प्रत्याशी पार्टी ऑफिस पहुंचे भीलवाड़ा नगर निगम के 70 वार्डों में मतदान समाप्त होने के बाद भाजपा ने अपने सभी 70 प्रत्याशियों को पार्टी कार्यालय बुलाया। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, प्रत्याशियों को फोन कर कार्यालय पहुंचने के निर्देश दिए गए। कई प्रत्याशी बैग में जरूरी कपड़े और सामान लेकर पार्टी कार्यालय पहुंचते नजर आए। माना जा रहा है कि इसके बाद उन्हें किसी अन्य स्थान पर ले जाने की तैयारी है। पार्टी हाईकमान के निर्देशों के बाद प्रत्याशियों को मतगणना तक एकजुट रखने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। वहीं, कांग्रेस ने भीलवाड़ा में 53 वार्डों में अधिकृत प्रत्याशी उतारे थे। मतदान के बाद कांग्रेस प्रत्याशियों को अभी तक पार्टी की ओर से किसी तरह का फोन आने की जानकारी सामने नहीं आई है। भीलवाड़ा में 154 निर्दलीय प्रत्याशी भी चुनाव मैदान में हैं। इनमें कई प्रत्याशी भाजपा और कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवारों को सीधी चुनौती दे रहे हैं। चित्तौड़गढ़ में समर्थकों के साथ BJP प्रत्याशी पार्टी ऑफिस पहुंचे चित्तौड़गढ़ में मतदान समाप्त होते ही भाजपा प्रत्याशियों को पार्टी कार्यालय बुलाया गया। प्रत्याशी अपने समर्थकों और जरूरी सामान के साथ पार्टी ऑफिस पहुंचे। यहां पार्टी पदाधिकारियों के साथ चर्चा के बाद वे अलग-अलग गाड़ियों से रवाना हो गए। राजनीतिक हलकों में इसे चुनाव के बाद शुरू हुई बाड़ेबंदी की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टियां अपने प्रत्याशियों को एकजुट रखने और मतगणना तक उनके संपर्क में रहने की रणनीति पर काम कर रही हैं। महवा में BJP के 35 प्रत्याशी बस से जयपुर रवाना दौसा जिले की महवा नगर पालिका में भी मतदान खत्म होते ही प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी शुरू हो गई। भाजपा के 35 प्रत्याशियों को महवा विधायक राजेंद्र मीणा बस में बैठाकर जयपुर के लिए रवाना हुए। भाजपा की ओर से प्रत्याशियों को एकजुट रखने के साथ-साथ आगे की राजनीतिक रणनीति पर भी काम किया जा रहा है। कांग्रेस प्रत्याशियों को निजी होटल में बुलाया महवा में कांग्रेस के 34 प्रत्याशियों को हिंडौन रोड स्थित एक निजी होटल में बुलाया गया है। माना जा रहा है कि यहां प्रत्याशियों को एकजुट रखने और नगर पालिका अध्यक्ष के चुनाव को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा की जा रही है। वहीं, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष विजय बोहरा 22 निर्दलीय प्रत्याशियों को लेकर दिल्ली की ओर रवाना हो गए। ऐसे में महवा में चुनावी नतीजों से पहले ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। मतगणना से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव में मतदान खत्म होने के बाद अब सभी दलों की नजर संभावित बहुमत और अध्यक्ष पद के समीकरण पर है। प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी को इसी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अब मतगणना के दिन ही तस्वीर साफ होगी कि किस दल को कितनी सफलता मिलती है और अध्यक्ष पद के लिए किस तरह के समीकरण बनते हैं।
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5 राज्यों के चुनाव में BJP को मिला कांग्रेस से 7 गुना ज्यादा चंदा, खर्च में भी आगे

नई दिल्ली: इस साल अप्रैल में हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के दौरान भारतीय जनता पार्टी (BJP) को करीब 1,472.8 करोड़ रुपये का चंदा मिला। यह रकम कांग्रेस को मिले करीब 207.17 करोड़ रुपये के चंदे से लगभग सात गुना ज्यादा है। चुनाव आयोग की ओर से बुधवार को जारी जानकारी में दोनों दलों की चुनावी आय और खर्च का ब्योरा सामने आया है। इन चुनावों में असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में मतदान हुआ था। 4 मई को घोषित नतीजों में असम, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में NDA को जीत मिली, जबकि केरल और तमिलनाडु में विपक्षी गठबंधनों ने सरकार बनाई। BJP के चुनावी फंड में 904.6 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी चुनावी अवधि के दौरान BJP के फंड में भी बड़ा इजाफा हुआ। 15 मार्च को पार्टी के पास करीब 6,722.6 करोड़ रुपये थे, जो 6 मई तक बढ़कर 7,627.2 करोड़ रुपये हो गए। इस तरह पार्टी के फंड में करीब 904.6 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, BJP के केरल और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से जुड़े खर्च का पूरा ब्योरा अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है। कांग्रेस के फंड में आई 65.86 करोड़ रुपये की कमी चुनावी अवधि की शुरुआत में कांग्रेस के पास करीब 169.06 करोड़ रुपये थे। इनमें लगभग 22.9 करोड़ रुपये नकद और 146.1 करोड़ रुपये बैंक खातों में थे। 6 मई तक पार्टी के पास करीब 103.2 करोड़ रुपये बचे थे। यानी चुनावी अवधि के दौरान कांग्रेस के उपलब्ध फंड में करीब 65.86 करोड़ रुपये की कमी आई। तमिलनाडु में BJP ने 51.56 करोड़ रुपये खर्च किए BJP ने असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी में कुल मिलाकर करीब 159.7 करोड़ रुपये खर्च किए। इसमें लगभग 130.4 करोड़ रुपये सामान्य पार्टी प्रचार पर और बाकी रकम उम्मीदवारों तथा चुनाव से जुड़े अन्य खर्चों पर खर्च हुई। असम में BJP ने सबसे ज्यादा करीब 96.27 करोड़ रुपये खर्च किए। इसमें 76.73 करोड़ रुपये सामान्य प्रचार और 19.54 करोड़ रुपये उम्मीदवारों से जुड़े खर्च पर लगाए गए। तमिलनाडु में BJP का कुल चुनावी खर्च करीब 51.56 करोड़ रुपये रहा। इसमें 44.51 करोड़ रुपये सामान्य प्रचार और 7.05 करोड़ रुपये उम्मीदवारों से जुड़े खर्च पर खर्च हुए। हालांकि, राज्य में पार्टी को सिर्फ एक सीट मिली। तमिलनाडु में BJP ने मीडिया विज्ञापनों पर करीब 23.96 करोड़ रुपये, स्टार प्रचारकों की यात्रा पर करीब 10.04 करोड़ रुपये और प्रचार सामग्री पर लगभग 5.85 करोड़ रुपये खर्च किए। पुडुचेरी में पार्टी का चुनावी खर्च करीब 11.90 करोड़ रुपये रहा। इसमें 9.19 करोड़ रुपये सामान्य प्रचार और 2.71 करोड़ रुपये उम्मीदवारों से जुड़े खर्च पर लगाए गए। कांग्रेस ने चुनाव प्रचार पर खर्च किए 143 करोड़ रुपये कांग्रेस ने पांचों राज्यों में सामान्य पार्टी प्रचार पर करीब 143 करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि उम्मीदवारों पर करीब 105.55 करोड़ रुपये खर्च हुए। इस तरह पार्टी का कुल चुनावी खर्च करीब 248.55 करोड़ रुपये रहा। कांग्रेस के केंद्रीय मुख्यालय ने पांचों राज्यों में सामान्य प्रचार पर करीब 40.52 करोड़ रुपये खर्च किए। वहीं, राज्य और स्थानीय इकाइयों ने इसी मद में करीब 102.49 करोड़ रुपये खर्च किए। कांग्रेस के सामान्य प्रचार खर्च में केरल का हिस्सा सबसे ज्यादा रहा। पार्टी ने वहां करीब 59.28 करोड़ रुपये खर्च किए। इसके बाद असम में सामान्य प्रचार पर करीब 22.62 करोड़ रुपये खर्च किए गए। चुनावी चंदे और खर्च के इन आंकड़ों से साफ है कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के दौरान BJP की वित्तीय स्थिति कांग्रेस की तुलना में काफी मजबूत रही।
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Nitin Nabin

Nitin Nabin ने गिनाईं Modi Government की उपलब्धियां, बोले- 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्र सरकार की उपलब्धियों को लेकर भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन (Nitin Nabin) ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में देश ने कई क्षेत्रों में बदलाव देखा है। खासतौर पर युवाओं में नई उम्मीद पैदा हुई है और भारत की Economy ने भी तेजी से आगे बढ़ने की दिशा पकड़ी है। नितिन नवीन ने प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे होने के मौके पर सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं। उनके मुताबिक, गरीबों के लिए चलाई गई योजनाओं और विकास से जुड़े कदमों का असर आम लोगों की जिंदगी में दिखाई दे रहा है। युवाओं को लेकर क्या बोले नितिन नवीन? भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने देश के युवाओं को निराशा के माहौल से निकालकर उनके सामने आगे बढ़ने के नए रास्ते खोले हैं। उनका कहना है कि आज युवा रोजगार के साथ-साथ Startup, Technology, Innovation और Entrepreneurship जैसे क्षेत्रों में भी अपनी पहचान बना रहे हैं। नितिन नवीन के मुताबिक, देश की युवा आबादी को विकास की ताकत बनाने पर सरकार का लगातार फोकस रहा है। उन्होंने कहा कि बदलते भारत में युवाओं की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है। India की Economy पर भी कही बड़ी बात नितिन नवीन ने भारत की आर्थिक प्रगति का जिक्र करते हुए कहा कि देश की Economy ने पिछले वर्षों में तेज रफ्तार पकड़ी है। उनके मुताबिक, भारत अब दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह मजबूत कर रहा है। उन्होंने मोदी सरकार के नेतृत्व में हुए आर्थिक बदलावों को देश के बढ़ते आत्मविश्वास से जोड़ते हुए कहा कि भारत अब सिर्फ विकास की बात नहीं कर रहा, बल्कि कई क्षेत्रों में दुनिया के सामने अपनी क्षमता भी दिखा रहा है। 25 करोड़ लोगों के गरीबी से बाहर आने का दावा नितिन नवीन ने सरकार की गरीब कल्याण योजनाओं को भी अपनी बात का आधार बनाया। उन्होंने दावा किया कि 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं। इसके साथ ही उन्होंने गरीब परिवारों के लिए राशन, घर, गैस कनेक्शन और दूसरी बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं का उल्लेख किया। हालांकि, गरीबी से बाहर आने वाले लोगों का यह आंकड़ा भाजपा नेतृत्व की ओर से किया गया दावा है। ऐसे आंकड़ों को समझते समय संबंधित सरकारी रिपोर्ट और आंकड़ों को भी ध्यान में रखना जरूरी है। 17 सितंबर से शुरू होगा ‘सेवा संकल्प अभियान’ प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे होने के अवसर पर भाजपा देशभर में कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी में है। पार्टी की ओर से ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाने की बात कही गई है। इस अभियान के जरिए प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन, सरकार की योजनाओं और गरीब कल्याण से जुड़े कामों को लोगों तक पहुंचाने की कोशिश होगी। पार्टी कार्यकर्ताओं को भी इस अभियान से जोड़ने की तैयारी है। ‘Viksit Bharat 2047’ पर नजर नितिन नवीन ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का लक्ष्य सिर्फ वर्तमान की चुनौतियों तक सीमित नहीं है। सरकार ‘Viksit Bharat 2047’ के लक्ष्य को ध्यान में रखकर आगे बढ़ रही है। उनके मुताबिक, आने वाले समय में युवाओं के लिए अवसर बढ़ाना, महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करना, गरीबों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना और भारत की Economy को और मजबूत करना बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Russia Su-57

Russia Su-57 Deal: भारत की नजर 75 Stealth Fighter Jets पर, Modi-Putin Talks से बढ़ी उम्मीद

भारत और रूस के बीच Defence Partnership को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। रूस के Su-57 Stealth Fighter Jet को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ रही है। खबरों के मुताबिक भारत करीब 75 Su-57 Fighter Jets लेने के विकल्प पर विचार कर सकता है। संभावित सौदे की कीमत करीब ₹1 लाख करोड़ तक बताई जा रही है। हालांकि, अभी तक 75 विमानों की खरीद और इतनी रकम की डील को लेकर कोई अंतिम आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इस पूरे मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की प्रस्तावित मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है। बातचीत के दौरान Defence Cooperation के साथ Su-57 की बिक्री और Technology Transfer पर भी चर्चा हो सकती है। Su-57 Deal पर क्यों टिकी हैं नजरें? भारत लंबे समय से अपनी Air Force की combat capability को मजबूत करने पर काम कर रहा है। ऐसे में रूस का पांचवीं पीढ़ी का Su-57 Fighter Jet चर्चा में आना स्वाभाविक है। रूस की ओर से भारत को सिर्फ तैयार विमान देने के बजाय Technology Transfer और स्थानीय स्तर पर उत्पादन से जुड़े विकल्पों पर भी बातचीत के संकेत मिले हैं। अगर इस दिशा में कोई समझौता होता है, तो इसका फायदा भारत के Defence Manufacturing Sector को मिल सकता है। 75 Fighter Jets की खबर कितनी सही? सबसे ज्यादा चर्चा 75 Su-57 Jets की संभावित खरीद को लेकर है। कुछ रिपोर्टों में इसकी अनुमानित लागत ₹1 लाख करोड़ तक बताई गई है। लेकिन फिलहाल इसे पक्की Deal मानना सही नहीं होगा। रूस ने Su-57 की बिक्री और तकनीकी सहयोग को लेकर भारत के साथ बातचीत की बात जरूर कही है, लेकिन विमानों की अंतिम संख्या, कीमत और खरीद की शर्तों पर आधिकारिक मुहर नहीं लगी है। यानी अभी कहानी बातचीत के दौर में है और आगे की तस्वीर दोनों देशों की बैठक के बाद ज्यादा साफ हो सकती है। Technology Transfer पर भारत का जोर भारत की Defence Procurement Policy में अब केवल विदेशी हथियार खरीदना ही मुख्य लक्ष्य नहीं है। देश की कोशिश है कि बड़े Defence Deals के साथ तकनीक और Manufacturing Capability भी भारत आए। Su-57 के मामले में भी Technology Transfer का मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है। अगर रूस भारत में इस विमान से जुड़ी तकनीक और उत्पादन क्षमता विकसित करने में सहयोग करता है, तो इससे भारतीय Aerospace Industry को लंबी अवधि में फायदा हो सकता है। Su-57 कितना खास है? Su-57 रूस का Fifth Generation Fighter Aircraft है। इसे आधुनिक एवियोनिक्स, स्टील्थ डिजाइन, सेंसर और लंबी दूरी की युद्ध क्षमता को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। भारत के लिए पांचवीं पीढ़ी के Fighter Aircraft की जरूरत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय वायुसेना आने वाले वर्षों में अपने Fighter Squadron को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। इसके साथ ही भारत का अपना AMCA यानी Advanced Medium Combat Aircraft Programme भी आगे बढ़ रहा है। मोदी-पुतिन Meeting पर सबकी नजर Su-57 के अलावा भारत और रूस की बातचीत का दायरा काफी बड़ा हो सकता है। Defence Cooperation, Nuclear Energy, Trade और रणनीतिक साझेदारी से जुड़े मुद्दों पर भी दोनों देशों के बीच चर्चा होने की उम्मीद है। ऐसे में अगर Su-57 को लेकर कोई बड़ा ऐलान होता है, तो यह भारत-रूस Defence Relations के लिए अहम पड़ाव साबित हो सकता है। भारत के लिए क्या बदल सकता है? अगर भविष्य में Su-57 की खरीद और Technology Transfer पर सहमति बनती है, तो भारत को एक तरफ आधुनिक Fighter Aircraft मिलेंगे, वहीं दूसरी ओर घरेलू Defence Manufacturing को भी बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि, अभी 75 Su-57 Jets और ₹1 लाख करोड़ की कीमत को संभावित प्रस्ताव के तौर पर ही देखना बेहतर है। अंतिम फैसला होने तक इन आंकड़ों में बदलाव संभव है। फिलहाल नजरें मोदी-पुतिन की बैठक पर हैं। अगर बातचीत किसी ठोस समझौते तक पहुंचती है, तो Su-57 Deal भारत की Defence Strategy और भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी दोनों के लिए बड़ी खबर बन सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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CJP

CJP Protest में Student को Notice, CJI भड़के- ‘हमने Action नहीं लेने को कहा था’

गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के एक छात्र को CJP प्रदर्शन से जोड़कर नोटिस जारी किए जाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट की कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई। CJI ने सवाल किया कि जब सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की जबरन कार्रवाई नहीं करने को कहा था, तो फिर मजिस्ट्रेट ने नोटिस जारी कैसे कर दिया? सुनवाई के दौरान CJI का रुख काफी सख्त नजर आया। उन्होंने पूछा कि “मजिस्ट्रेट की हिम्मत कैसे हुई?” अदालत ने साफ किया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद छात्रों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई नहीं की जा सकती। Student को क्यों भेजा गया था Notice? पूरा मामला गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के लॉ स्टूडेंट अक्षत त्रिपाठी से जुड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक, ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने 4 सितंबर को छात्र को BNSS की संबंधित धाराओं के तहत नोटिस जारी किया था। नोटिस में छात्र से शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए 5 लाख रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही राशि के दो जमानती मुचलके देने को कहा गया था। प्रशासन की ओर से इसे एहतियाती कार्रवाई बताया गया। पुलिस की रिपोर्ट में दावा किया गया कि छात्र विश्वविद्यालय के अन्य विद्यार्थियों के बीच कथित तौर पर सरकार विरोधी बातें फैला रहा था और उन्हें CJP के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहा था। छात्र ने Police के आरोपों को नकारा दूसरी तरफ, छात्र अक्षत त्रिपाठी ने पुलिस के इन आरोपों को गलत बताया। उनका कहना है कि वह काफी समय से विश्वविद्यालय नहीं गए थे और उनकी पढ़ाई ऑनलाइन चल रही थी। छात्र के मुताबिक, जिस समय प्रदर्शन हुआ, उस दौरान वह प्रयागराज में इलाहाबाद हाईकोर्ट में काम कर रहे थे। ऐसे में उन पर विश्वविद्यालय के छात्रों को प्रदर्शन के लिए उकसाने का आरोप लगाना सही नहीं है। Notice वापस लेने के बाद भी Supreme Court नाराज मामला सामने आने के बाद पुलिस ने नोटिस वापस ले लिया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह सवाल उठा कि अगर अदालत ने छात्रों के खिलाफ coercive action से बचने का निर्देश दिया था, तो फिर ऐसा नोटिस जारी ही क्यों किया गया। यही बात सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के तेवरों की बड़ी वजह बनी। अदालत ने मामले से जुड़े दस्तावेज रिकॉर्ड पर रखने को कहा है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि नोटिस किस आधार पर जारी किया गया था। Supreme Court के पुराने Order का भी जिक्र इस मामले की पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट का पहले दिया गया आदेश भी अहम है। रिपोर्टों के मुताबिक, अदालत ने 1 सितंबर 2026 को CJP प्रदर्शन से जुड़े लोगों के खिलाफ दर्ज FIRs को रद्द कर दिया था। हालांकि, आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के संबंध में अलग स्थिति रखी गई थी। इसके बाद छात्रों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला दिया गया। अदालत ने इसी संदर्भ में नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट की कार्रवाई पर सवाल उठाए। अब आगे क्या होगा? फिलहाल सुप्रीम कोर्ट पूरे मामले के तथ्यों को देख रहा है। अदालत ने नोटिस और उससे जुड़े दस्तावेज पेश करने को कहा है। आगे की सुनवाई में यह साफ हो सकता है कि मजिस्ट्रेट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद किस आधार पर छात्र को नोटिस भेजा था। यह मामला सिर्फ एक छात्र को नोटिस देने तक सीमित नहीं है। इसके जरिए students के protest rights, प्रशासनिक powers और Supreme Court के orders के पालन को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। फिलहाल सबकी नजर अगली सुनवाई पर है, जहां यह साफ हो सकता है कि सुप्रीम कोर्ट इस कार्रवाई को लेकर आगे क्या रुख अपनाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर मोहम्मद यूनुस का विरोध, प्रदर्शनकारियों ने लगाए गंभीर आरोप; वीडियो वायरल

बांग्लादेश के पूर्व मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस को अमेरिका के न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर विरोध का सामना करना पड़ा। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में कुछ लोग उन्हें घेरकर नारे लगाते और सवाल पूछते नजर आ रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने यूनुस को ‘आतंकवादी’ कहा और बांग्लादेश में हिंसा तथा लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए। वीडियो के मुताबिक, विरोध कर रहे लोगों ने यूनुस से सवाल किया कि वह न्यूयॉर्क क्यों आए हैं और उन्हें वापस लौट जाना चाहिए। स्थिति को देखते हुए यूनुस और उनकी सहयोगी लामिया मोर्शेद को एयरपोर्ट के अंदर वापस ले जाया गया। प्रदर्शनकारियों ने लगाए हजारों मौतों और गिरफ्तारियों के आरोप प्रदर्शनकारियों ने मोहम्मद यूनुस पर बांग्लादेश में हजारों पुलिसकर्मियों की मौत के लिए जिम्मेदार होने का आरोप लगाया। उन्होंने देश में करीब दो लाख लोगों की गिरफ्तारी का दावा भी किया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है और विरोध करने वालों की पहचान भी स्पष्ट नहीं हुई है। बांग्लादेश के एक मीडिया संस्थान की रिपोर्ट में प्रदर्शनकारियों को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग का समर्थक बताया गया है। बांग्लादेश सरकार ने कार्रवाई की बात कही बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के सलाहकार जाहेद उर रहमान ने मंगलवार को कहा कि न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर मोहम्मद यूनुस का घेराव करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने इस घटना को ‘अवामी लीग का आतंक’ बताया। जाहेद ने विदेशों में रह रहे अवामी लीग के सदस्यों को चेतावनी भी दी। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किस कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। यूनुस के कार्यकाल में हिंसा और गिरफ्तारियों को लेकर विवाद शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद 8 अगस्त 2024 को मोहम्मद यूनुस ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार का नेतृत्व संभाला था। उनके कार्यकाल के दौरान देश में हिंसा, अल्पसंख्यकों पर हमलों और गिरफ्तारियों को लेकर सवाल उठते रहे। अवामी लीग ने आरोप लगाया था कि यूनुस सरकार ने उसके नेताओं और समर्थकों को निशाना बनाया। वहीं, मानवाधिकार संगठनों ने हिंसा और हिरासत में कथित दुर्व्यवहार के मामलों की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करने की मांग की थी। शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद करीब डेढ़ साल सत्ता में रहे यूनुस अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद मोहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार की कमान संभाली थी। इस दौरान उनकी सरकार और अवामी लीग के बीच राजनीतिक टकराव जारी रहा। बांग्लादेश के एक विशेष ट्रिब्यूनल ने 2025 में शेख हसीना की गैरमौजूदगी में मुकदमा चलाने के बाद उन्हें मौत की सजा सुनाई थी। यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाया गया और भारत से शेख हसीना को बांग्लादेश प्रत्यर्पित करने की मांग भी की गई।

Apple ने लॉन्च किया HomeView स्मार्ट डिस्प्ले, ₹39,900 से शुरू कीमत; HomePod Mini 2 और नए Apple TV 4K से भी उठा पर्दा

Apple ने स्मार्ट होम बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए नया स्मार्ट डिस्प्ले ‘HomeView’ लॉन्च किया है। इसकी शुरुआती कीमत ₹39,900 बताई गई है। न्यूयॉर्क में आयोजित ‘Welcome Home’ इवेंट में कंपनी ने HomePod Mini 2 और नए Apple TV 4K समेत कई स्मार्ट होम डिवाइस भी पेश किए। इन गैजेट्स में होम ऑटोमेशन, एंटरटेनमेंट, सिक्योरिटी और AI से जुड़े फीचर्स दिए गए हैं। कंपनी का लक्ष्य Amazon और Google जैसी कंपनियों के साथ स्मार्ट होम बाजार में अपनी जगह मजबूत करना है। दी गई जानकारी के मुताबिक, HomeView और Apple TV 4K की एडवांस बुकिंग शुरू हो गई है। इनकी डिलीवरी 13 नवंबर से मिलने की बात कही गई है, जबकि HomePod Mini 2 की डिलीवरी 30 अक्टूबर से शुरू होगी। HomeView: 7 इंच की स्क्रीन, वीडियो कॉल और स्मार्ट होम कंट्रोल Apple HomeView इस नए कलेक्शन का प्रमुख डिवाइस है। इसमें नीचे स्पीकर और ऊपर 7 इंच की टचस्क्रीन दी गई है। इसे टेबल पर रखा जा सकता है या दीवार पर लगाया जा सकता है। इसमें A18 प्रोसेसर दिया गया है। इसकी मदद से यूजर घर की लाइट और पंखे नियंत्रित करने, वीडियो कॉल करने, गाने सुनने और फिल्में देखने जैसे काम कर सकेंगे। Apple HomeView के प्रमुख फीचर्स HomePod Mini 2: गानों के साथ बदलेगी लाइट Apple ने HomePod Mini 2 स्मार्ट स्पीकर भी पेश किया है। इसमें S10 प्रोसेसर और ‘Sound Glow’ नाम की लाइटिंग सुविधा दी गई है। बताया गया है कि म्यूजिक के हिसाब से स्पीकर की लाइटों के रंग बदलेंगे। इसकी कीमत ₹18,900 रखी गई है। यह गुलाबी, नीले, हरे, सफेद और मिडनाइट कलर में उपलब्ध होगा। कंपनी के मुताबिक, नए प्रोसेसर से कनेक्टिविटी और डिवाइस के प्रदर्शन में सुधार होगा। नया Apple TV 4K: आवाज से कंट्रोल करने की सुविधा नया Apple TV 4K टीवी देखने के अनुभव को अधिक सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से पेश किया गया है। दी गई जानकारी के अनुसार, इसमें दूर से आवाज पहचानने वाले माइक्रोफोन हैं, जिनकी मदद से यूजर बिना रिमोट उठाए वॉइस कमांड से फिल्म या शो चला सकेंगे। अगर रिमोट खो जाए, तो iPhone के Find My फीचर की मदद से उसकी लोकेशन पता करने की सुविधा भी दी गई है। Apple HomePod स्पीकर्स के साथ इस्तेमाल करने पर यह ऑडियो सेटिंग्स को उनके अनुरूप समायोजित कर बेहतर साउंड अनुभव देने में मदद कर सकता है। हालांकि, Apple TV 4K की भारत में कीमत की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं बताई गई है। स्मार्ट होम बाजार में Apple की नई पहल HomeView, HomePod Mini 2 और Apple TV 4K के जरिए Apple घर के अलग-अलग स्मार्ट डिवाइस को एक ही इकोसिस्टम से जोड़ने पर जोर दे रहा है। होम ऑटोमेशन, सिक्योरिटी और AI सुविधाओं के मेल से कंपनी Amazon और Google के साथ प्रतिस्पर्धा बढ़ाना चाहती है।

कॉकरोच जनता पार्टी के आशुतोष रांका और सौरव दास तिहाड़ जेल भेजे गए, अजिंक्य शिंदे को मिली जमानत

दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के तीन सदस्यों के मामले में अदालत ने फैसला सुनाया है। स्पेशल कोर्ट ने आशुतोष रांका और सौरव दास को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया, जबकि अजिंक्य शिंदे को निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया। जानकारी के मुताबिक, तीनों को मंगलवार सुबह जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। बाद में रात करीब 3 बजे उन्हें एहतियातन गिरफ्तार किया गया। बुधवार सुबह तीनों को स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया, जहां आशुतोष रांका और सौरव दास को न्यायिक हिरासत में भेजने का फैसला हुआ। राहुल गांधी ने गिरफ्तारी पर उठाए सवाल इस कार्रवाई को लेकर राहुल गांधी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराना कोई अपराध नहीं है। उन्होंने युवाओं को जेल भेजे जाने को कायरता बताया और कार्रवाई पर सवाल उठाए। किन आरोपों में हुई कार्रवाई? CJP की लीगल टीम की प्रमुख रत्ना सिंह के मुताबिक, तीनों के खिलाफ बिना अनुमति जंतर-मंतर में प्रवेश करने, बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने और सरकारी कामकाज में बाधा डालने के आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने बताया कि आशुतोष रांका और सौरव दास को इससे पहले 10 अक्टूबर को भी फ्लाइट से हिरासत में लिया गया था। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

एअर इंडिया की फ्रैंकफर्ट-दिल्ली फ्लाइट की जयपुर में इमरजेंसी लैंडिंग, हाईजैक अलर्ट से मचा हड़कंप

फ्रैंकफर्ट से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की फ्लाइट AI-2030 की बुधवार सुबह जयपुर एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। विमान को यह कदम उस समय उठाना पड़ा, जब अहमदाबाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को फ्लाइट से हाईजैक अलर्ट का सिग्नल मिला। हालांकि, शुरुआती जांच में सिस्टम की गड़बड़ी के कारण यह संदेश जनरेट होने की आशंका जताई गई है। जानकारी के मुताबिक, अहमदाबाद ATC से मिले अलर्ट को जयपुर ATC के साथ साझा किया गया। इसके करीब 45 मिनट बाद विमान को जयपुर में सुरक्षित उतारा गया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, हाईजैक अलर्ट के पीछे तकनीकी या सिस्टम संबंधी गलती हो सकती है। मामले में विस्तृत जांच की जानकारी सामने आना बाकी है। रात 9:45 बजे फ्रैंकफर्ट से भरी थी उड़ान फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट Flightradar24 के मुताबिक, विमान ने 13 अक्टूबर की रात 9:45 बजे फ्रैंकफर्ट से उड़ान भरी थी। इसे 14 अक्टूबर की सुबह 10:40 बजे दिल्ली पहुंचना था, लेकिन हाईजैक अलर्ट मिलने के बाद विमान को जयपुर की ओर डायवर्ट कर दिया गया। 30 सितंबर को फ्लाईदुबई की फ्लाइट में भी मिला था हाईजैक सिग्नल इससे पहले 30 सितंबर को इजराइल जा रही फ्लाईदुबई की एक फ्लाइट से भी हाईजैक कोड 7500 भेजे जाने की खबर सामने आई थी। उस घटना में पायलट द्वारा विमान को हाईजैक करने और क्रैश करने की कोशिश किए जाने का दावा किया गया था। बताया गया कि भारतीय को-पायलट कैप्टन स्मित मच्छर ने स्थिति को संभालते हुए विमान को नुकसान पहुंचाने की कोशिश नाकाम कर दी थी।
मां कूष्मांडा

Navratri 2026: चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा, जानें कथा, भोग और मंत्र

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं में उन्हें सृष्टि की रचनात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है। माना जाता है कि उनकी आराधना से भक्तों को उत्साह, सकारात्मकता और नई शुरुआत की प्रेरणा मिलती है। मां कूष्मांडा की पौराणिक कथा पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब चारों ओर अंधकार था, तब मां कूष्मांडा ने अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की। इसी कारण उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति के रूप में पूजा जाता है। यह कथा सृजन और ऊर्जा के महत्त्व को दर्शाती है। मां का स्वरूप और महत्त्व पूजा विधि मंत्र: ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः। भोग: मां को मालपुआ या मीठे फल अर्पित करने की परंपरा कुछ क्षेत्रों में प्रचलित है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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