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Apple ने लॉन्च किया फोल्डेबल iPhone Duo, कीमत 4.50 लाख तक; iPhone 18 Pro सीरीज भी आई

Apple ने बुधवार रात आयोजित लॉन्च इवेंट ‘Surprise and Shine’ में कई नए डिवाइस पेश किए। कंपनी ने पहली बार फोल्डेबल iPhone Duo लॉन्च किया है। इसके साथ iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max समेत कुल 6 नए डिवाइस पेश किए गए। iPhone Duo को कंपनी का अब तक का सबसे महंगा iPhone बताया जा रहा है। इसकी शुरुआती कीमत करीब 3 लाख रुपए है, जबकि टॉप मॉडल की कीमत करीब 4.50 लाख रुपए तक जाती है। iPhone Duo में 7.6 इंच की मेन स्क्रीन फोल्डेबल iPhone Duo में बाहर की तरफ 5.4 इंच का कवर डिस्प्ले दिया गया है। फोन खोलने पर अंदर 7.6 इंच की मेन स्क्रीन मिलती है। कंपनी के मुताबिक, यह अब तक किसी भी iPhone में दिया गया सबसे बड़ा डिस्प्ले है। फोन में पहली बार डुअल-बैटरी सिस्टम दिए जाने की जानकारी है। इसके अलावा इसमें फिजिकल SIM कार्ड का विकल्प नहीं होगा। iPhone Duo केवल e-SIM के जरिए काम करेगा। भारत में iPhone Duo की बुकिंग 16 अक्टूबर से शुरू होगी, जबकि इसकी बिक्री 23 अक्टूबर से शुरू होने की जानकारी दी गई है। iPhone 18 Pro और Pro Max में DSLR जैसी कैमरा टेक्नोलॉजी Apple ने इस बार iPhone 18 सीरीज में केवल प्रीमियम मॉडल iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max लॉन्च किए हैं। इन दोनों मॉडल्स में सबसे ज्यादा जोर कैमरा सिस्टम पर दिया गया है। इनके मेन कैमरे में प्रोफेशनल DSLR कैमरों जैसी टेक्नोलॉजी दिए जाने का दावा किया गया है। भारत में iPhone 18 Pro की शुरुआती कीमत 1,64,900 रुपए, जबकि iPhone 18 Pro Max की शुरुआती कीमत 1,79,900 रुपए रखी गई है। इन दोनों मॉडल्स की बुकिंग 12 सितंबर से शुरू होगी और बिक्री 18 सितंबर से शुरू होगी। AirPods 5 और नई Apple Watch भी लॉन्च Apple के लॉन्च इवेंट में iPhone के अलावा AirPods 5, Apple Watch Series 12 और Watch Ultra 4 भी पेश किए गए। कंपनी के नए प्रोडक्ट्स में सबसे ज्यादा चर्चा फोल्डेबल iPhone Duo की है, जिसे Apple के स्मार्टफोन लाइनअप में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
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जयपुर में Zepto और Blinkit के डार्क स्टोर पर छापा, खराब और एक्सपायरी फूड प्रोडक्ट नष्ट

जयपुर। जयपुर में फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट की सेंट्रल टीम ने क्विक कॉमर्स कंपनियों Zepto और Blinkit के डार्क स्टोर पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान दोनों स्टोर में बड़ी मात्रा में खराब, क्षतिग्रस्त और एक्सपायरी डेट के खाद्य उत्पाद मिले। टीम ने ऐसे खाद्य उत्पादों को मौके पर ही नष्ट करवाया। अधिकारियों के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान खाद्य पदार्थों के सुरक्षित स्टोरेज और तापमान मानकों की भी जांच की गई। कुछ खाद्य उत्पादों के सैंपल लेकर जांच के लिए लैब भेजे गए हैं। Zepto के डार्क स्टोर में 1,550 पैकेट डेयरी प्रोडक्ट मिले रामनगरिया विस्तार के ए-ब्लॉक स्थित मैसर्स जे.डी.एस. मार्केटिंग के वेयरहाउस का टीम ने निरीक्षण किया। यहां कोल्ड रूम और डीप फ्रीजर में डेयरी प्रोडक्ट रखने का तापमान निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिला। अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षित स्टोरेज के लिए तापमान करीब 5 डिग्री या उससे कम होना चाहिए। निरीक्षण के दौरान फ्रिज का तापमान 6 से 14 डिग्री तक पाया गया। इसके बाद सरस और अमूल के दूध, दही और छाछ के करीब 1,550 पैकेट मौके पर ही नष्ट करवाए गए। 7 किलो एक्सपायरी फूड प्रोडक्ट भी मिले जांच के दौरान करीब 7 किलोग्राम एक्सपायरी डेट के खाद्य उत्पाद मिले। इनमें मूसली, कैंडी और भुजिया समेत अन्य सामान शामिल था। टीम ने इन्हें भी मौके पर नष्ट करवाया। इसके अलावा डार्क स्टोर और कोल्ड रूम के आसपास पान मसाला और जर्दा थूकने के निशान भी मिले। अधिकारियों ने स्टोर प्रबंधन को तत्काल सफाई और व्यवस्था में सुधार करने के निर्देश दिए। स्टोर मैनेजर की मौजूदगी में पीनट बटर और शहद के सैंपल भी लिए गए। इन्हें जांच के लिए सेंट्रल लैब भेजा गया है। अधिकारियों के मुताबिक, इस डार्क स्टोर से रोजाना करीब 500 ऑर्डर की डिलीवरी की जाती है। Blinkit के स्टोर में 800 पैकेट डेयरी प्रोडक्ट नष्ट इसके बाद सेंट्रल टीम ने आदर्श नगर स्थित Blinkit के डार्क स्टोर पर दोपहर करीब 1 बजे कार्रवाई की। यहां करीब 800 पैकेट डेयरी प्रोडक्टके साथ बड़ी मात्रा में खराब और एक्सपायरी डेट के खाद्य उत्पाद मिले। जांच के दौरान कोल्ड स्टोर का तापमान 32 डिग्री पाया गया, जबकि अधिकारियों के मुताबिक खाद्य पदार्थों के सुरक्षित भंडारण के लिए यहां करीब 5 डिग्री या उससे कम तापमान होना चाहिए। बटर, जूस और दूध के खराब पैकेट भी मिले कार्रवाई के दौरान टीम को 24 पैकेट अमूल बटर, 60 बोतल बॉम्बे बंटा जूस, लो-फैट दूध के 11 पाउच, ट्रॉपिकाना जूस और काउ घी समेत अन्य खाद्य सामग्री मिली। इसके अलावा करीब 1,400 मिलीलीटर अमूल टोंड मिल्क के क्षतिग्रस्त और एक्सपायरी डेट वाले पैकेट भी मिले। टीम ने इन सभी खाद्य उत्पादों को मौके पर नष्ट करवाया। दूध, घी और कार्बोनेटेड वाटर के सैंपल लिए फूड सेफ्टी टीम ने Blinkit के डार्क स्टोर से मिल्क, फूड घी और Paper Boat कार्बोनेटेड वाटर के सैंपल भी लिए। सभी सैंपल जांच के लिए लैब भेजे गए हैं। फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट के कमिश्नर अविचल चतुर्वेदी के मुताबिक, खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षित स्टोरेज सुनिश्चित करने के लिए इस तरह की जांच आगे भी जारी रहेगी।
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बिहार में बाढ़ का कहर जारी, 41 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित; भागलपुर में 5 की मौत

पटना। बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों में अब पानी धीरे-धीरे उतरने लगा है, लेकिन कई जिलों में हालात अभी भी गंभीर बने हुए हैं। राज्य के 14 जिलों की 517 पंचायतें अब भी बाढ़ से प्रभावित हैं। बाढ़ के कारण करीब 41.45 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। भागलपुर में बाढ़ के पानी में डूबने से 5 लोगों की मौत भागलपुर के बाईपास थाना क्षेत्र के कोयली खुटहा गांव में बाढ़ के पानी में डूबने से पांच लोगों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान मंचों देवी, सोनाक्षी कुमारी, प्रिंस कुमार, अभिषेक कुमार और अंशु प्रिया के रूप में हुई है। परिजनों के मुताबिक, सड़क पर पानी भरा होने के कारण गहराई का अंदाजा नहीं लग सका और हादसा हो गया। राघोपुर में बाढ़ पीड़ितों से मिलने पहुंचे पप्पू यादव वैशाली के राघोपुर में बाढ़ प्रभावित लोगों से मुलाकात करने सांसद पप्पू यादव पहुंचे। इस दौरान वह पीड़ितों को आर्थिक मदद कर रहे थे, तभी उनकी तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें पटना स्थित आवास लाया गया, जहां डॉक्टर ने उनका इलाज किया। पप्पू यादव ने कहा कि अगर तबीयत ठीक रही तो वह शाम 5 बजे सोनपुर में बाढ़ पीड़ितों से मिलने जाएंगे। अररिया में आकाशीय बिजली से 3 की मौत अररिया में भी मौसम से जुड़ी घटना में आकाशीय बिजली की चपेट में आने से तीन लोगों की मौत हो गई। लगातार बारिश और बाढ़ के बीच राज्य के कई हिस्सों में लोगों को प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ रहा है। सामान्य से 35% कम बारिश बिहार में इस मानसून सीजन में अब तक सामान्य से 35 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। इसके बावजूद कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। खाना खाने को लेकर बाढ़ पीड़ितों में मारपीट समस्तीपुर के विद्यापतिनगर प्लस टू हाईस्कूल में बाढ़ राहत शिविर के दौरान खाना खाने को लेकर बेगूसराय और समस्तीपुर के बाढ़ प्रभावितों के बीच विवाद हो गया। देखते ही देखते विवाद मारपीट में बदल गया। घटना का वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में कुछ लोग लाठी-डंडे लेकर एक-दूसरे पर हमला करते नजर आ रहे हैं। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच गाली-गलौज भी होती दिखाई दे रही है। बाढ़ के बीच राहत शिविर में हुई इस घटना ने प्रशासन के सामने राहत व्यवस्था और लोगों के बीच बढ़ते तनाव को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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लखनऊ-दम्माम इंडिगो फ्लाइट में बम की धमकी, अहमदाबाद में कराई इमरजेंसी लैंडिंग

अहमदाबाद। लखनऊ से सऊदी अरब के दम्माम जा रही इंडिगो की फ्लाइट में गुरुवार को बम की धमकी मिलने से हड़कंप मच गया। उड़ान के दौरान क्रू मेंबर को विमान के टॉयलेट में एक टिश्यू पेपर मिला, जिस पर अंग्रेजी में ‘बम’ लिखा हुआ था। इसके बाद विमान की अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। विमान में 133 यात्री सवार थे। लैंडिंग के बाद सभी यात्रियों को सुरक्षित विमान से उतारकर टर्मिनल-2 ले जाया गया। आइसोलेशन एरिया में ले जाकर विमान की जांच विमान को सामान्य पार्किंग बे के बजाय आइसोलेशन एरिया में ले जाया गया। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने विमान की गहन जांच शुरू की। सुरक्षा टीमों ने विमान के केबिन, सीटों, कार्गो और यात्रियों के सामान की जांच की। शुरुआती जांच में विमान से कोई संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक बरामद नहीं हुआ है। विमान ने लखनऊ से गुरुवार शाम करीब 4:17 बजे उड़ान भरी थी। इसके बाद सुरक्षा कारणों के चलते इसे अहमदाबाद में सुरक्षित उतारा गया। 10 दिन पहले भी मिली थी धमकी इसी रूट की फ्लाइट को करीब 10 दिन पहले भी बम की धमकी मिलने की जानकारी सामने आई थी। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बाद एयरपोर्ट और सुरक्षा एजेंसियां विशेष सतर्कता बरत रही हैं। बम की धमकी मिलने पर क्या होता है प्रोटोकॉल? विमान में बम या विस्फोटक की धमकी मिलने पर सुरक्षा एजेंसियां निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत कार्रवाई करती हैं। फिलहाल शुरुआती जांच में कोई विस्फोटक या संदिग्ध वस्तु नहीं मिलने की जानकारी है। सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं।
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Bihar

Bihar Bridge Construction Accident: लालगंज में अचानक गिरा Launcher, 2 मजदूरों की हालत नाजुक

बिहार (Bihar) के वैशाली जिले के लालगंज में गुरुवार को निर्माणाधीन पुल पर अचानक बड़ा हादसा हो गया। पुल बनाने के काम में इस्तेमाल किया जा रहा भारी Launcher अचानक नीचे गिर गया। हादसे के समय वहां मजदूर काम कर रहे थे, जिनमें कई इसकी चपेट में आ गए। शुरुआती जानकारी के मुताबिक हादसे में 8 मजदूर घायल हुए हैं। इनमें से 2 मजदूरों की हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। आसपास मौजूद लोगों और निर्माण स्थल पर काम कर रहे कर्मचारियों ने घायलों को बाहर निकालने में मदद की। भारतमाला Project के तहत चल रहा था काम लालगंज में जिस जगह यह हादसा हुआ, वहां भारत माला परियोजना के तहत NH-139W फोरलेन का निर्माण चल रहा है। इसी परियोजना के तहत पुल का काम भी किया जा रहा है। निर्माण के दौरान इस्तेमाल होने वाला लॉन्चर अचानक गिरने से यह दुर्घटना हुई। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। राहत और बचाव का काम शुरू किया गया और घायलों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। दो मजदूरों की हालत गंभीर हादसे में घायल मजदूरों में दो की स्थिति गंभीर बताई जा रही है। उन्हें बेहतर इलाज के लिए रेफर किए जाने की जानकारी सामने आई है। बाकी घायलों का भी अस्पताल में इलाज चल रहा है। घटना के बाद प्रशासन ने मौके का जायजा लिया और हादसे की वजह पता करने के लिए जानकारी जुटाई जा रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि लॉन्चर गिरने के पीछे तकनीकी खराबी थी, मशीनरी में कोई समस्या आई या निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा में चूक हुई। Construction Site की Safety पर फिर उठे सवाल निर्माणाधीन पुल पर भारी मशीनरी के इस्तेमाल के दौरान सुरक्षा बेहद जरूरी होती है। ऐसे हादसे में सिर्फ मशीन या निर्माण कार्य को नुकसान नहीं पहुंचता, बल्कि वहां काम कर रहे मजदूरों की जान भी खतरे में पड़ जाती है। लालगंज की घटना के बाद निर्माण स्थल पर Safety Measures और मशीनरी की तकनीकी जांच को लेकर सवाल उठ रहे हैं। प्रशासन की जांच पूरी होने के बाद ही हादसे की वास्तविक वजह सामने आएगी। फिलहाल घायल मजदूरों का इलाज जारी है। सभी की नजर अब गंभीर रूप से घायल दो मजदूरों की हालत पर बनी हुई है।
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Nepal

India-Nepal Relief: बाढ़ से तबाह Nepal के लिए भारत ने भेजी 8वीं बड़ी मदद

Nepal में अगस्त के आखिर में आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। कई इलाकों में घर, सड़कें और पुल बह गए, जबकि हजारों परिवारों की जिंदगी पूरी तरह बदल गई। इस मुश्किल वक्त में भारत लगातार नेपाल के साथ खड़ा है। भारत ने अब 35 टन राहत सामग्री लेकर 8वीं खेप नेपाल भेजी है, जो काठमांडू पहुंच गई है। इस मदद के जरिए बाढ़ प्रभावित लोगों तक जरूरी सामान और Rescue Equipment पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। Nepal Flood में 1367 से ज्यादा लोगों की मौत नेपाल में 26 अगस्त को शुरू हुई इस भीषण आपदा के बाद मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। Reuters के मुताबिक कम से कम 1,367 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 5,000 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। राहत और बचाव टीमें लगातार प्रभावित इलाकों में Search Operation चला रही हैं। इस आपदा की वजह हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर के टूटने से आई भारी बाढ़ बताई जा रही है। तेज बहाव के साथ पानी, मलबा और चट्टानें नीचे की ओर आईं और रास्ते में आने वाले कई गांवों तथा Infrastructure को भारी नुकसान पहुंचा। India ने भेजी 8वीं राहत खेप भारत ने मानवीय सहायता के तहत भारतीय वायुसेना के विमान से 35 टन राहत और बचाव सामग्री नेपाल भेजी है। यह नेपाल के लिए भेजी गई भारत की आठवीं राहत खेप है। इससे पहले भी भारत कई चरणों में राहत सामग्री और विशेषज्ञ टीम नेपाल भेज चुका है। भारत की मदद सिर्फ राहत सामग्री तक सीमित नहीं है। भारतीय विशेषज्ञ नेपाल में Rescue और Forensic Operations में भी सहयोग कर रहे हैं। इससे प्रभावित लोगों की तलाश और आपदा में जान गंवाने वालों की पहचान के प्रयासों को मजबूती मिल रही है। सड़कें और पुल टूटे, Rescue Operation में बड़ी चुनौती बाढ़ ने नेपाल के कई हिस्सों में सड़क और पुलों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया है। यही वजह है कि राहत टीमों के लिए दूरदराज के इलाकों तक पहुंचना आसान नहीं है। कई जगह Helicopter पहले से Search and Rescue Mission में लगे हैं। ऐसे में नेपाल की सेना अब Drones की मदद से राहत सामग्री प्रभावित इलाकों तक पहुंचा रही है। इन ड्रोन के जरिए भोजन, दवाइयां, ईंधन और दूसरी जरूरी चीजें उन जगहों तक भेजी जा रही हैं, जहां सामान्य वाहनों का पहुंचना मुश्किल है। हजारों लोग अभी भी Missing बाढ़ के कई दिन बाद भी हजारों लोगों का पता नहीं चल पाया है। लापता लोगों के परिवार लगातार अपने प्रियजनों की तलाश कर रहे हैं। कई मामलों में शवों की पहचान भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। भारत ने पहले ही Forensic Experts और अन्य विशेषज्ञों को नेपाल भेजा है। जरूरत पड़ने पर DNA आधारित पहचान की प्रक्रिया भी मददगार साबित हो रही है। भारत में भी कुछ परिवार अपने लापता रिश्तेदारों की पहचान के लिए DNA Samples जमा कर रहे हैं। Infrastructure को भी भारी नुकसान नेपाल में इस आपदा से सिर्फ लोगों की जान नहीं गई, बल्कि बड़े पैमाने पर Infrastructure को नुकसान पहुंचा है। सड़कें, पुल, घर और Hydropower Projects प्रभावित हुए हैं। नेपाल अब राहत के साथ-साथ आने वाले समय में Reconstruction की तैयारी भी कर रहा है। सरकार ने शुरुआती Recovery और Reconstruction के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद की जरूरत बताई है। इसका मकसद प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी व्यवस्था करने के साथ जरूरी Infrastructure को दोबारा खड़ा करना है। भारत की मदद से बढ़ी उम्मीद नेपाल इस समय अपने हाल के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। हजारों परिवार अपनों की तलाश में हैं और कई इलाकों में सामान्य जिंदगी वापस लाने की कोशिश जारी है। ऐसे समय में भारत की लगातार राहत सहायता पड़ोसी देश के लिए महत्वपूर्ण है। 35 टन की 8वीं राहत खेप के काठमांडू पहुंचने से Search, Rescue और राहत अभियान को जरूरी सामान मिलने की उम्मीद है। फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक मदद पहुंचाना और नेपाल में धीरे-धीरे सामान्य हालात बहाल करना है।
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BRICS Summit 2026

BRICS Summit 2026: Xi Jinping आएंगे India, PM Modi के साथ Bilateral Talks पर सबकी नजर

नई दिल्ली में होने वाले BRICS Summit 2026 से पहले भारत और चीन के रिश्तों को लेकर हलचल बढ़ गई है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग BRICS बैठक में हिस्सा लेने के लिए भारत आ रहे हैं। उनका यह दौरा इसलिए भी अहम है क्योंकि 2019 के बाद यह उनका पहला India Visit होगा। सबसे ज्यादा नजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और Xi Jinping की Bilateral Meeting पर है। 2019 के बाद पहली बार भारत आएंगे Xi Jinping शी जिनपिंग आखिरी बार 2019 में भारत आए थे। तब प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी मुलाकात तमिलनाडु के मामल्लपुरम में हुई थी। इसके बाद 2020 में गलवान घाटी की हिंसक झड़प ने दोनों देशों के रिश्तों को बड़ा झटका दिया। सीमा पर तनाव के बाद भारत और चीन के बीच लंबे समय तक रिश्ते मुश्किल दौर से गुजरे। राजनीतिक बातचीत, कारोबार और निवेश पर भी इसका असर दिखाई दिया। हालांकि, पिछले कुछ समय से दोनों देशों ने संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य करने की कोशिश की है। Modi-Xi Meeting पर क्यों टिकी हैं निगाहें? BRICS Summit के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात को सिर्फ एक सामान्य कूटनीतिक बैठक के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। दोनों देशों के बीच LAC, Border Peace, Trade और Economic Relations जैसे कई अहम मुद्दे हैं। अगर दोनों नेताओं के बीच विस्तृत बातचीत होती है, तो सीमा पर शांति बनाए रखने और आपसी रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। हालिया रिपोर्टों में भी इस बैठक में LAC की स्थिति और तनाव कम करने के प्रयासों पर चर्चा की संभावना जताई गई है। Galwan Clash के बाद बदले भारत-चीन के रिश्ते 2020 की गलवान झड़प भारत-चीन संबंधों के लिए एक बड़ा turning point साबित हुई थी। इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर कई दौर की बातचीत हुई। समय के साथ सीमा पर स्थिति को संभालने के लिए दोनों पक्षों ने बातचीत का रास्ता बनाए रखा। अब BRICS जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर मोदी और जिनपिंग की आमने-सामने बातचीत को इसी प्रक्रिया की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। Trade और Business Relations भी बड़ा मुद्दा भारत और चीन के बीच सिर्फ सीमा विवाद ही चुनौती नहीं है। दोनों देशों के बीच व्यापार काफी बड़ा है, लेकिन इसके साथ कई तरह की चिंताएं भी जुड़ी हुई हैं। चीनी कंपनियों के निवेश, वीजा, तकनीक और संवेदनशील क्षेत्रों में कारोबार को लेकर भारत सतर्क रहा है। वहीं कुछ भारतीय कारोबारी भी चीन के साथ व्यापार करते समय अलग-अलग व्यावसायिक और नियामकीय अड़चनों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में दोनों नेताओं की बातचीत से Economic Relations को लेकर भी कोई सकारात्मक संकेत मिलने की उम्मीद की जा रही है। BRICS Summit में बड़े नेताओं का जमावड़ा 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में BRICS Summit आयोजित हो रहा है। भारत इस बार BRICS की मेजबानी कर रहा है। सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, आपदा से निपटने और महत्वपूर्ण Supply Chains जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अलावा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन समेत कई प्रमुख नेताओं की मौजूदगी से यह Summit काफी महत्वपूर्ण हो गया है। क्या India-China Relations में आएगा नया मोड़? सबसे बड़ा सवाल यही है कि Modi-Xi Meeting से भारत और चीन के रिश्तों को कितनी नई दिशा मिलती है। दोनों देशों के बीच अभी भी कई मतभेद हैं, लेकिन हाल के महीनों में संवाद और संपर्क बढ़ाने की कोशिशें दिखाई दी हैं। अगर बातचीत सकारात्मक रहती है तो इससे सीमा पर शांति, व्यापार और दोनों देशों के बीच व्यापक संबंधों को आगे बढ़ाने का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक केवल एक बैठक से वर्षों से चले आ रहे मतभेद खत्म नहीं होंगे। फिलहाल दुनिया की नजर BRICS Summit पर है और खासतौर पर इस बात पर कि PM Modi और Xi Jinping की मुलाकात में क्या बातचीत होती है और भारत-चीन रिश्तों के लिए इससे क्या संदेश निकलता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Abu Salem

1993 Mumbai Blast: Abu Salem की Early Release पर Supreme Court ने लगाई रोक, नहीं मिली राहत

1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट केस में उम्रकैद की सजा काट रहे गैंगस्टर अबू सलेम (Abu Salem) को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। सलेम ने जेल से समय से पहले रिहाई यानी Premature Release की मांग की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को भी बरकरार रखा गया है। अबू सलेम ने अपनी याचिका में भारत और पुर्तगाल के बीच हुए प्रत्यर्पण समझौते का हवाला देते हुए कहा था कि भारत सरकार ने उसे 25 साल से ज्यादा जेल में नहीं रखने का आश्वासन दिया था। सलेम का दावा था कि यह अवधि पूरी होने के करीब है और जेल में बिताई गई अवधि तथा मिली रिमिशन को भी गणना में शामिल किया जाना चाहिए। Supreme Court ने क्यों खारिज की याचिका? अबू सलेम की याचिका पर जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई की। कोर्ट के सामने मुख्य मुद्दा यह था कि क्या जेल में मिली Remission को भारत की ओर से पुर्तगाल को दिए गए 25 साल के आश्वासन में शामिल करके सलेम को समय से पहले रिहा किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने उसकी दलील को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया। यानी सलेम को फिलहाल इस आधार पर जेल से बाहर आने का रास्ता नहीं मिला। 25 साल की अवधि को लेकर क्या है पूरा मामला? अबू सलेम को 11 नवंबर 2005 को पुर्तगाल से भारत प्रत्यर्पित किया गया था। प्रत्यर्पण के दौरान भारत की ओर से आश्वासन दिया गया था कि उसे मौत की सजा नहीं दी जाएगी और उसकी कैद 25 साल से अधिक नहीं होगी। इसी आश्वासन को आधार बनाकर सलेम ने अपनी रिहाई की मांग की थी। उसका कहना था कि उसने जेल में लंबा समय बिताया है और अच्छे आचरण के कारण मिलने वाली रिमिशन को भी उसकी सजा की अवधि में जोड़ा जाना चाहिए। हालांकि, अदालत ने इस दलील को राहत देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं माना। नवंबर 2030 क्यों है अहम? अबू सलेम को भारत लाए जाने की तारीख 11 नवंबर 2005 से 25 साल की अवधि की गणना की जाती है। इस हिसाब से यह अवधि नवंबर 2030 में पूरी होगी। यही वजह है कि सलेम की मौजूदा कानूनी स्थिति में 2030 की तारीख महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि प्रत्यर्पण के दौरान पुर्तगाल को दिए गए आश्वासन का भारत को सम्मान करना होगा। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सलेम को 25 साल पूरे होने से पहले अपने आप रिहा किया जा सकता है। रिहाई से जुड़ी प्रक्रिया और कानूनी शर्तें अपनी जगह लागू रहेंगी। 1993 Mumbai Blast Case में मिली थी उम्रकैद अबू सलेम का नाम 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट केस से जुड़ा है। 12 मार्च 1993 को मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस मामले में लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद सितंबर 2017 में अबू सलेम को दोषी ठहराया गया और उम्रकैद की सजा सुनाई गई। इसके अलावा मुंबई के बिल्डर प्रदीप जैन की हत्या के मामले में भी सलेम को उम्रकैद की सजा मिल चुकी है। अभी जेल से बाहर नहीं आएगा अबू सलेम सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद अबू सलेम की Early Release की उम्मीदों को फिलहाल झटका लगा है। कोर्ट ने समय से पहले रिहाई की उसकी मांग को स्वीकार नहीं किया है। अब इस मामले में नवंबर 2030 की अवधि और उससे जुड़ी कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल सलेम को सुप्रीम कोर्ट से तत्काल रिहाई की राहत नहीं मिली है। क्या है मामला एक नजर में? हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Vijay Mallya

Kingfisher Case: Vijay Mallya ने कहा- भारत लौटना चाहता हूं, लेकिन UK की Legal पाबंदी बनी रोड़ा

करीब एक दशक से भारत से बाहर रह रहे कारोबारी Vijay Mallya एक बार फिर चर्चा में हैं। किंगफिशर एयरलाइंस से जुड़े हजारों करोड़ रुपये के बैंक कर्ज और कानूनी मामलों के बीच माल्या ने ब्रिटेन में अपनी स्थिति को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि वह ब्रिटेन से बाहर नहीं जा सकते, ऐसे में भारत लौटने का सवाल ही कैसे हल हो सकता है। माल्या ने सोशल मीडिया पर अपने खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई और उन्हें ‘भगोड़ा’ कहे जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि ब्रिटेन की अदालतों के आदेशों के कारण उनकी आवाजाही पर पाबंदी है। ‘जब UK छोड़ नहीं सकता तो भारत कैसे लौटूं?’ विजय माल्या का कहना है कि लोग उनसे अक्सर पूछते हैं कि वह भारत कब लौटेंगे। लेकिन उनके मुताबिक यह फैसला केवल उनकी इच्छा पर निर्भर नहीं है। ब्रिटेन में चल रही कानूनी प्रक्रिया के कारण उनके लिए देश छोड़ना आसान नहीं है। माल्या ने इसी स्थिति को लेकर सवाल किया कि अगर उन्हें UK से बाहर जाने की कानूनी अनुमति नहीं है, तो फिर भारत नहीं लौटने के लिए उन्हें ‘भगोड़ा’ कहना कितना सही है। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत में माल्या के खिलाफ लंबे समय से कानूनी कार्रवाई चल रही है और उन्हें भारत वापस लाने की कोशिशें भी जारी रही हैं। ‘सोचता हूं कॉकरोच बन जाऊं’ अपने बयान में माल्या ने व्यंग्य के अंदाज में कहा कि कभी-कभी उन्हें लगता है कि शायद कॉकरोच बन जाना ही बेहतर होगा। उनका यह बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर काफी चर्चा होने लगी। माल्या ने अपने खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर ‘अन्याय’ की बात कही। उनका कहना है कि मामले को जिस तरह पेश किया जाता है, उसमें उनकी ओर से किए गए भुगतान और संपत्तियों से हुई Recovery को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। Kingfisher Airlines और ₹9,000 करोड़ का कर्ज विजय माल्या का नाम सबसे ज्यादा Kingfisher Airlines से जुड़े बैंक कर्ज के मामले में सामने आया। एयरलाइन के बंद होने के बाद भारतीय बैंकों का हजारों करोड़ रुपये का कर्ज बकाया रह गया। मीडिया रिपोर्टों में यह रकम करीब ₹9,000 करोड़ बताई जाती रही है। इसी विवाद के बीच माल्या मार्च 2016 में भारत से ब्रिटेन चले गए थे। इसके बाद भारत सरकार ने उनकी वापसी के लिए कानूनी रास्ता अपनाया। माल्या को भारत में Fugitive Economic Offender भी घोषित किया जा चुका है। माल्या का ₹14,131 करोड़ Recovery को लेकर दावा हालिया बयान में माल्या ने Recovery के आंकड़े का भी जिक्र किया। उनका दावा है कि उनकी संपत्तियों से करीब ₹14,131.60 करोड़ की रकम बरामद की जा चुकी है। हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है। करीब ₹9,000 करोड़ का आंकड़ा मुख्य रूप से बैंकों के कर्ज से जुड़े मामले के संदर्भ में सामने आता है, जबकि ₹14,131.60 करोड़ का आंकड़ा माल्या द्वारा बताई गई Recovery से संबंधित है। इसलिए दोनों आंकड़ों को एक ही चीज समझना सही नहीं होगा। भारत वापसी पर अभी भी कानूनी पेंच विजय माल्या की भारत वापसी का मामला केवल उनकी इच्छा से तय होने वाला नहीं है। भारत और ब्रिटेन में उनके खिलाफ चल रही अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाओं का इसमें बड़ा रोल है। एक तरफ भारतीय एजेंसियां और अदालतें मामले को आगे बढ़ा रही हैं, वहीं माल्या ब्रिटेन में अपने खिलाफ हुई कार्रवाई और वहां की कानूनी पाबंदियों का हवाला देते रहे हैं। करीब 10 साल बाद भी विजय माल्या की भारत वापसी का मुद्दा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। उनके ताजा बयान ने एक बार फिर Kingfisher Airlines, ₹9,000 करोड़ के बैंक कर्ज, Recovery और Extradition से जुड़े पुराने विवाद को सुर्खियों में ला दिया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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BSP

Mayawati vs Akash Anand: BSP से बाहर हुए आकाश, ससुर अशोक सिद्धार्थ के संन्यास से जुड़ा मामला

बहुजन समाज पार्टी (BSP) में एक बार फिर बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिला है। पार्टी प्रमुख मायावती (Mayawati) ने अपने भतीजे आकाश आनंद (Akash Anand) को BSP से बाहर कर दिया है। कभी मायावती के उत्तराधिकारी के तौर पर देखे जाने वाले आकाश आनंद को लेकर पिछले कुछ समय से पार्टी के भीतर लगातार उठापटक चल रही थी। अब उनके निष्कासन के बाद BSP की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर चर्चा में आ गई है। आकाश आनंद को पार्टी से निकालने का फैसला ऐसे समय आया है, जब उनके ससुर और BSP के पूर्व नेता अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान किया। यही वजह है कि पूरे घटनाक्रम में परिवार और पार्टी के बीच चल रहा विवाद सबसे ज्यादा चर्चा में है। आकाश आनंद को लेकर मायावती का बड़ा फैसला मायावती ने आकाश आनंद को लेकर अपना रुख पहले ही काफी स्पष्ट कर दिया था। उन्होंने संकेत दिया था कि पार्टी में आकाश की भूमिका तय करने से पहले उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से पूरी तरह अलग होना होगा। अशोक सिद्धार्थ के संन्यास की घोषणा के बाद माना जा रहा था कि आकाश आनंद के लिए पार्टी में दोबारा रास्ता साफ हो सकता है। लेकिन घटनाक्रम ने अचानक दूसरा मोड़ ले लिया। मायावती ने आकाश आनंद को ही पार्टी से बाहर करने का फैसला सुना दिया। इस फैसले ने BSP समर्थकों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश की राजनीति पर नजर रखने वालों को भी चौंका दिया है। ‘ससुर’ को लेकर क्यों शुरू हुआ था विवाद? आकाश आनंद की राजनीतिक सक्रियता में उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ की भूमिका लंबे समय से चर्चा में रही है। मायावती ने आरोप लगाया था कि पार्टी में पारिवारिक और निजी हितों को संगठन के हित से ऊपर नहीं रखा जा सकता। मायावती का मानना रहा है कि BSP का संगठन और बहुजन आंदोलन किसी एक परिवार के इर्द-गिर्द नहीं चल सकता। इसी वजह से आकाश आनंद की राजनीतिक जिम्मेदारियों को लेकर भी कई बार सवाल उठे। अशोक सिद्धार्थ ने अब राजनीति से संन्यास लेने का फैसला कर लिया है। उन्होंने BSP और बहुजन आंदोलन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए यह कदम उठाया। हालांकि, उनके इस फैसले के बावजूद आकाश आनंद की पार्टी में वापसी नहीं हो सकी। पहले भी आकाश आनंद को हटाया जा चुका है आकाश आनंद का BSP में राजनीतिक सफर शुरू से ही आसान नहीं रहा है। मायावती ने उन्हें पार्टी में आगे बढ़ाया और युवा नेतृत्व के तौर पर बड़ी जिम्मेदारी दी थी। एक समय उन्हें मायावती के संभावित राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में भी देखा जाने लगा था। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान उनके बयानों और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर विवाद हुआ। इसके बाद मायावती ने उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से हटा दिया था। बाद में आकाश आनंद की पार्टी में वापसी हुई और उन्हें फिर से संगठन में अहम भूमिका मिली। इससे लगा कि BSP में युवा नेतृत्व को लेकर तस्वीर साफ हो गई है। लेकिन कुछ समय बाद ही परिस्थितियां दोबारा बदल गईं। मायावती के फैसले से उठे कई सवाल आकाश आनंद को BSP से बाहर किए जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि पार्टी अब युवा नेतृत्व को किस तरह आगे बढ़ाएगी। आकाश को लंबे समय तक पार्टी की नई पीढ़ी का चेहरा माना जाता रहा है। ऐसे में उनका निष्कासन केवल संगठनात्मक फैसला नहीं, बल्कि BSP की भविष्य की राजनीति के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। खासकर UP Election 2027 को देखते हुए यह घटनाक्रम काफी महत्वपूर्ण है। उत्तर प्रदेश में BSP को अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की चुनौती पहले से ही है। ऐसे में पार्टी के एक चर्चित युवा चेहरे का बाहर होना चुनावी रणनीति पर भी असर डाल सकता है। अब ईशान आनंद की भूमिका पर नजर आकाश आनंद के बाद अब मायावती के छोटे भाई आनंद कुमार के बेटे ईशान आनंद का नाम भी राजनीतिक चर्चाओं में आने लगा है। पार्टी की भविष्य की रणनीति में ईशान को कितनी जिम्मेदारी मिलती है, यह आने वाले समय में साफ होगा। हालांकि, फिलहाल BSP की ओर से भविष्य के नेतृत्व को लेकर कोई अंतिम तस्वीर सामने नहीं आई है। लेकिन जिस तरह से पिछले कुछ समय में पार्टी के भीतर बदलाव हुए हैं, उससे साफ है कि मायावती संगठन को अपने तरीके से नए सिरे से तैयार करने में जुटी हैं। 2027 चुनाव से पहले BSP में नई रणनीति? उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। ऐसे में BSP में आकाश आनंद का निष्कासन पार्टी की चुनावी रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है। मायावती लंबे समय से BSP के संगठन और नेतृत्व पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए हुए हैं। अब आकाश आनंद के बाहर होने के बाद पार्टी किस चेहरे को आगे करती है और युवाओं के बीच अपनी पकड़ कैसे मजबूत करती है, यह देखने वाली बात होगी। फिलहाल एक बात तय है—आकाश आनंद और उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब BSP के भीतर बड़े राजनीतिक फैसले तक पहुंच चुका है। 2027 के UP Election से पहले मायावती के इस फैसले ने उत्तर प्रदेश की सियासत में एक नई चर्चा जरूर छेड़ दी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Apple ने लॉन्च किया HomeView स्मार्ट डिस्प्ले, ₹39,900 से शुरू कीमत; HomePod Mini 2 और नए Apple TV 4K से भी उठा पर्दा

Apple ने स्मार्ट होम बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए नया स्मार्ट डिस्प्ले ‘HomeView’ लॉन्च किया है। इसकी शुरुआती कीमत ₹39,900 बताई गई है। न्यूयॉर्क में आयोजित ‘Welcome Home’ इवेंट में कंपनी ने HomePod Mini 2 और नए Apple TV 4K समेत कई स्मार्ट होम डिवाइस भी पेश किए। इन गैजेट्स में होम ऑटोमेशन, एंटरटेनमेंट, सिक्योरिटी और AI से जुड़े फीचर्स दिए गए हैं। कंपनी का लक्ष्य Amazon और Google जैसी कंपनियों के साथ स्मार्ट होम बाजार में अपनी जगह मजबूत करना है। दी गई जानकारी के मुताबिक, HomeView और Apple TV 4K की एडवांस बुकिंग शुरू हो गई है। इनकी डिलीवरी 13 नवंबर से मिलने की बात कही गई है, जबकि HomePod Mini 2 की डिलीवरी 30 अक्टूबर से शुरू होगी। HomeView: 7 इंच की स्क्रीन, वीडियो कॉल और स्मार्ट होम कंट्रोल Apple HomeView इस नए कलेक्शन का प्रमुख डिवाइस है। इसमें नीचे स्पीकर और ऊपर 7 इंच की टचस्क्रीन दी गई है। इसे टेबल पर रखा जा सकता है या दीवार पर लगाया जा सकता है। इसमें A18 प्रोसेसर दिया गया है। इसकी मदद से यूजर घर की लाइट और पंखे नियंत्रित करने, वीडियो कॉल करने, गाने सुनने और फिल्में देखने जैसे काम कर सकेंगे। Apple HomeView के प्रमुख फीचर्स HomePod Mini 2: गानों के साथ बदलेगी लाइट Apple ने HomePod Mini 2 स्मार्ट स्पीकर भी पेश किया है। इसमें S10 प्रोसेसर और ‘Sound Glow’ नाम की लाइटिंग सुविधा दी गई है। बताया गया है कि म्यूजिक के हिसाब से स्पीकर की लाइटों के रंग बदलेंगे। इसकी कीमत ₹18,900 रखी गई है। यह गुलाबी, नीले, हरे, सफेद और मिडनाइट कलर में उपलब्ध होगा। कंपनी के मुताबिक, नए प्रोसेसर से कनेक्टिविटी और डिवाइस के प्रदर्शन में सुधार होगा। नया Apple TV 4K: आवाज से कंट्रोल करने की सुविधा नया Apple TV 4K टीवी देखने के अनुभव को अधिक सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से पेश किया गया है। दी गई जानकारी के अनुसार, इसमें दूर से आवाज पहचानने वाले माइक्रोफोन हैं, जिनकी मदद से यूजर बिना रिमोट उठाए वॉइस कमांड से फिल्म या शो चला सकेंगे। अगर रिमोट खो जाए, तो iPhone के Find My फीचर की मदद से उसकी लोकेशन पता करने की सुविधा भी दी गई है। Apple HomePod स्पीकर्स के साथ इस्तेमाल करने पर यह ऑडियो सेटिंग्स को उनके अनुरूप समायोजित कर बेहतर साउंड अनुभव देने में मदद कर सकता है। हालांकि, Apple TV 4K की भारत में कीमत की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं बताई गई है। स्मार्ट होम बाजार में Apple की नई पहल HomeView, HomePod Mini 2 और Apple TV 4K के जरिए Apple घर के अलग-अलग स्मार्ट डिवाइस को एक ही इकोसिस्टम से जोड़ने पर जोर दे रहा है। होम ऑटोमेशन, सिक्योरिटी और AI सुविधाओं के मेल से कंपनी Amazon और Google के साथ प्रतिस्पर्धा बढ़ाना चाहती है।

कॉकरोच जनता पार्टी के आशुतोष रांका और सौरव दास तिहाड़ जेल भेजे गए, अजिंक्य शिंदे को मिली जमानत

दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के तीन सदस्यों के मामले में अदालत ने फैसला सुनाया है। स्पेशल कोर्ट ने आशुतोष रांका और सौरव दास को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया, जबकि अजिंक्य शिंदे को निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया। जानकारी के मुताबिक, तीनों को मंगलवार सुबह जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। बाद में रात करीब 3 बजे उन्हें एहतियातन गिरफ्तार किया गया। बुधवार सुबह तीनों को स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया, जहां आशुतोष रांका और सौरव दास को न्यायिक हिरासत में भेजने का फैसला हुआ। राहुल गांधी ने गिरफ्तारी पर उठाए सवाल इस कार्रवाई को लेकर राहुल गांधी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराना कोई अपराध नहीं है। उन्होंने युवाओं को जेल भेजे जाने को कायरता बताया और कार्रवाई पर सवाल उठाए। किन आरोपों में हुई कार्रवाई? CJP की लीगल टीम की प्रमुख रत्ना सिंह के मुताबिक, तीनों के खिलाफ बिना अनुमति जंतर-मंतर में प्रवेश करने, बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने और सरकारी कामकाज में बाधा डालने के आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने बताया कि आशुतोष रांका और सौरव दास को इससे पहले 10 अक्टूबर को भी फ्लाइट से हिरासत में लिया गया था। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

एअर इंडिया की फ्रैंकफर्ट-दिल्ली फ्लाइट की जयपुर में इमरजेंसी लैंडिंग, हाईजैक अलर्ट से मचा हड़कंप

फ्रैंकफर्ट से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की फ्लाइट AI-2030 की बुधवार सुबह जयपुर एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। विमान को यह कदम उस समय उठाना पड़ा, जब अहमदाबाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को फ्लाइट से हाईजैक अलर्ट का सिग्नल मिला। हालांकि, शुरुआती जांच में सिस्टम की गड़बड़ी के कारण यह संदेश जनरेट होने की आशंका जताई गई है। जानकारी के मुताबिक, अहमदाबाद ATC से मिले अलर्ट को जयपुर ATC के साथ साझा किया गया। इसके करीब 45 मिनट बाद विमान को जयपुर में सुरक्षित उतारा गया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, हाईजैक अलर्ट के पीछे तकनीकी या सिस्टम संबंधी गलती हो सकती है। मामले में विस्तृत जांच की जानकारी सामने आना बाकी है। रात 9:45 बजे फ्रैंकफर्ट से भरी थी उड़ान फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट Flightradar24 के मुताबिक, विमान ने 13 अक्टूबर की रात 9:45 बजे फ्रैंकफर्ट से उड़ान भरी थी। इसे 14 अक्टूबर की सुबह 10:40 बजे दिल्ली पहुंचना था, लेकिन हाईजैक अलर्ट मिलने के बाद विमान को जयपुर की ओर डायवर्ट कर दिया गया। 30 सितंबर को फ्लाईदुबई की फ्लाइट में भी मिला था हाईजैक सिग्नल इससे पहले 30 सितंबर को इजराइल जा रही फ्लाईदुबई की एक फ्लाइट से भी हाईजैक कोड 7500 भेजे जाने की खबर सामने आई थी। उस घटना में पायलट द्वारा विमान को हाईजैक करने और क्रैश करने की कोशिश किए जाने का दावा किया गया था। बताया गया कि भारतीय को-पायलट कैप्टन स्मित मच्छर ने स्थिति को संभालते हुए विमान को नुकसान पहुंचाने की कोशिश नाकाम कर दी थी।
मां कूष्मांडा

Navratri 2026: चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा, जानें कथा, भोग और मंत्र

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं में उन्हें सृष्टि की रचनात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है। माना जाता है कि उनकी आराधना से भक्तों को उत्साह, सकारात्मकता और नई शुरुआत की प्रेरणा मिलती है। मां कूष्मांडा की पौराणिक कथा पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब चारों ओर अंधकार था, तब मां कूष्मांडा ने अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की। इसी कारण उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति के रूप में पूजा जाता है। यह कथा सृजन और ऊर्जा के महत्त्व को दर्शाती है। मां का स्वरूप और महत्त्व पूजा विधि मंत्र: ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः। भोग: मां को मालपुआ या मीठे फल अर्पित करने की परंपरा कुछ क्षेत्रों में प्रचलित है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gandhinagar

Gandhinagar Municipal Election: भाजपा को बहुमत, कांग्रेस को फायदा; AAP को एक भी सीट नहीं

Gandhinagar Municipal Election गुजरात की राजधानी गांधीनगर के नगर निगम चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर अपना दबदबा कायम रखा है। 44 सीटों वाले नगर निगम में भाजपा ने 38 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया। वहीं, कांग्रेस 5 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर रही, जबकि आम आदमी पार्टी (AAP) इस बार अपना खाता भी नहीं खोल पाई। एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की। 13 अक्टूबर को सामने आए चुनाव परिणामों में भाजपा के लिए राहत की बात यह रही कि नगर निगम की सत्ता उसके पास बनी रही। हालांकि, पिछली बार के मुकाबले पार्टी की सीटें कम हुई हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस ने अपनी सीटों की संख्या बढ़ाकर स्थानीय राजनीति में अपनी मौजूदगी मजबूत की है। Gandhinagar Election Result: BJP को 38, कांग्रेस को मिलीं 5 सीटें गांधीनगर नगर निगम की 44 सीटों के लिए 11 अक्टूबर को मतदान हुआ था। चुनाव में अलग-अलग राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई। मतगणना के बाद भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई। पार्टीवार नतीजे इस प्रकार रहे: इन आंकड़ों से साफ है कि भाजपा ने नगर निगम में बहुमत बनाए रखा है। वहीं, कांग्रेस को मिली पांच सीटें और AAP का खाता नहीं खुलना इस चुनाव के प्रमुख नतीजे रहे। पिछली बार से BJP की सीटें घटीं, कांग्रेस ने बढ़ाई ताकत गांधीनगर नगर निगम के पिछले चुनाव अक्टूबर 2021 में हुए थे। उस समय भाजपा ने 44 में से 41 सीटों पर जीत दर्ज की थी। कांग्रेस को दो सीटें मिली थीं, जबकि आम आदमी पार्टी ने भी एक सीट हासिल की थी। इस बार तस्वीर में कुछ बदलाव देखने को मिला। भाजपा की सीटें 41 से घटकर 38 रह गईं, जबकि कांग्रेस दो से बढ़कर पांच सीटों तक पहुंच गई। AAP पिछले चुनाव में मिली अपनी एकमात्र सीट भी नहीं बचा सकी। यानी भाजपा ने अपनी सत्ता कायम रखी, लेकिन कांग्रेस ने पिछली बार के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया। इन नतीजों ने गांधीनगर की स्थानीय राजनीति में दोनों प्रमुख दलों की स्थिति को फिर चर्चा में ला दिया है। Ward No. 6 Result: कांग्रेस ने चारों सीटों पर दर्ज की जीत गांधीनगर नगर निगम चुनाव में वार्ड नंबर 6 का परिणाम भी खास रहा। यहां कांग्रेस ने सभी चार सीटों पर जीत दर्ज की। वार्ड नंबर 7 में भी कांग्रेस को एक सीट मिली, जबकि बाकी तीन सीटों पर भाजपा के उम्मीदवार विजयी रहे। इसके अलावा, वार्ड नंबर 2 में निर्दलीय उम्मीदवार दीपिका वाघेला ने जीत हासिल की। यह परिणाम दिखाता है कि भाजपा को कुल मिलाकर स्पष्ट बहुमत मिलने के बावजूद कुछ वार्डों में मुकाबला अलग रहा। Gandhinagar Municipal Election: कितना रहा मतदान? गांधीनगर नगर निगम चुनाव में 59.25 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। चुनाव के लिए 11 वार्डों की 44 सीटों पर कुल 130 उम्मीदवार मैदान में थे। 11 अक्टूबर को मतदान के बाद 13 अक्टूबर को मतगणना हुई। नतीजे सामने आने के साथ ही यह स्पष्ट हो गया कि भाजपा नगर निगम में अपना बहुमत बरकरार रखने में सफल रही है। Gujarat Civic Polls: थारा और ओखा में भी BJP को बढ़त गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में गांधीनगर के अलावा थारा और ओखा नगरपालिका के नतीजे भी चर्चा में रहे। थारा नगरपालिका की 24 सीटों में भाजपा ने 19 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस को पांच सीटें मिलीं। वहीं, ओखा नगरपालिका में मतदान वाली 32 सीटों में भाजपा ने 29 और कांग्रेस ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की। ओखा में चार अन्य सीटें भाजपा पहले ही निर्विरोध जीत चुकी थी। इस तरह गांधीनगर, थारा और ओखा के चुनाव परिणामों में भाजपा ने अपनी स्थिति बनाए रखी। हालांकि, गांधीनगर में कांग्रेस की सीटें बढ़ना भी इन नतीजों का एक अहम पहलू रहा। Gandhinagar Election Result 2026: आगे किस पर रहेगी नजर? चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद अब गांधीनगर नगर निगम में नई परिषद के गठन और महापौर के चयन की प्रक्रिया पर नजर रहेगी। महापौर पद को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल, चुनाव का सबसे बड़ा नतीजा यही है कि भाजपा ने 38 सीटों के साथ नगर निगम में अपना बहुमत बरकरार रखा है। कांग्रेस को पिछले चुनाव के मुकाबले तीन सीटों का फायदा हुआ, जबकि AAP इस बार एक भी सीट हासिल नहीं कर सकी। गांधीनगर के ये नतीजे स्थानीय निकाय की राजनीति में भाजपा की स्थिति और कांग्रेस की बढ़ी हुई सीटों, दोनों को सामने रखते हैं। आने वाले समय में नगर निगम के फैसलों और नई परिषद के कामकाज पर लोगों की नजर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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