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Delhi Liquor Policy Verdict दिल्ली शराब नीति केस में Kejriwal और Sisodia बरी

दिल्ली (Delhi) की बहुचर्चित 2021-22 आबकारी नीति (Delhi Liquor Policy) से जुड़े CBI केस में बड़ा कानूनी फैसला सामने आया है। राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal और पूर्व उपमुख्यमंत्री Manish Sisodia को आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने साफ कहा कि जांच एजेंसी की ओर से दाखिल चार्जशीट में पर्याप्त और ठोस सबूत नहीं हैं, इसलिए आरोप तय नहीं किए जा सकते। यह फैसला न सिर्फ कानूनी, बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद अहम माना जा रहा है। कोर्ट ने क्या कहा? अदालत ने अपने आदेश में टिप्पणी की कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने के लिए ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य जरूरी होते हैं। केवल आरोप या आशंका के आधार पर आरोप तय नहीं किए जा सकते। मामले की जांच Central Bureau of Investigation (CBI) ने की थी। कोर्ट के अनुसार, चार्जशीट में प्रस्तुत दस्तावेज और गवाहियां आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं थीं। इसी आधार पर दोनों नेताओं को राहत दी गई। क्या था Delhi Liquor Policy Case? दिल्ली सरकार की 2021-22 की नई शराब नीति को लागू करने के बाद आरोप लगे थे कि लाइसेंस वितरण और कमीशन संरचना में कथित अनियमितताएं हुईं। विपक्ष ने दावा किया था कि इससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा और कुछ निजी कंपनियों को अनुचित लाभ मिला। इस मामले में Aam Aadmi Party (AAP) के कई नेताओं के नाम सामने आए थे। राज्यसभा सांसद Sanjay Singh और पार्टी से जुड़े Vijay Nair भी जांच के दायरे में आए थे। समय-समय पर गिरफ्तारी, पूछताछ और जमानत की खबरों ने इस केस को लगातार सुर्खियों में बनाए रखा। फैसले के बाद भावुक दिखे केजरीवाल फैसला आने के बाद अरविंद केजरीवाल मीडिया के सामने आए। उनकी आवाज में भावनाएं साफ झलक रही थीं। उन्होंने कहा कि उन्होंने “ज़िंदगीभर ईमानदारी की कमाई की है” और सच की लड़ाई लड़ी है। उनका यह बयान समर्थकों के बीच तेजी से वायरल हुआ। कई कार्यकर्ताओं ने इसे “सत्य की जीत” बताया, तो विरोधी दलों ने फैसले पर अलग राय रखी। आगे क्या होगा? | What Next? कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि जांच एजेंसी चाहे तो उच्च अदालत में अपील कर सकती है। हालांकि फिलहाल यह फैसला केजरीवाल और सिसोदिया के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है। राजनीतिक रूप से भी इसका असर दिखना तय है, खासकर ऐसे समय में जब राष्ट्रीय राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Shankaracharya Case : मेडिकल रिपोर्ट में नाबालिगों से यौन शोषण की पुष्टि का दावा

Shankaracharya Case : मेडिकल रिपोर्ट में नाबालिगों से यौन शोषण की पुष्टि का दावा

ज्योतिर्मठ के Shankaracharya स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर नाबालिगों के साथ यौन शोषण के आरोप लगे हैं। ताजा घटनाक्रम में दावा किया जा रहा है कि मेडिकल रिपोर्ट में शोषण की पुष्टि हुई है। पीड़ित बताए जा रहे एक बटुक (वेद अध्ययन करने वाला छात्र) ने आरोप लगाया है कि उसके साथ गलत व्यवहार किया गया। उसने कहा कि यह घटना उसके लिए मानसिक रूप से बेहद पीड़ादायक रही। मामले के सामने आने के बाद धार्मिक और सामाजिक हलकों में हलचल मच गई है। क्या है पूरा मामला? जानकारी के मुताबिक, कुछ समय पहले नाबालिग छात्रों ने आरोप लगाए थे कि उनके साथ अनुचित व्यवहार किया गया। अब आई मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर दावा किया जा रहा है कि शोषण की पुष्टि हुई है। हालांकि, मामले की जांच अभी जारी है और अंतिम सच्चाई अदालत और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी। पीड़ित का बयान एक पीड़ित बटुक ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह लंबे समय तक डर और दबाव में रहा। उसने आरोप लगाया कि उसे चुप रहने के लिए मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। परिवार का कहना है कि उन्हें न्याय पर भरोसा है और वे चाहते हैं कि सच्चाई सामने आए। जांच एजेंसियां सक्रिय मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित जांच एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। पुलिस ने बयान दर्ज किए हैं और मेडिकल रिपोर्ट को केस डायरी में शामिल किया गया है। यदि आरोप साबित होते हैं तो यह धार्मिक जगत के लिए एक बड़ा झटका होगा। समाज में बढ़ी चिंता यह मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि इसमें धार्मिक संस्था और नाबालिग छात्र शामिल हैं। समाज के कई वर्गों ने निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल, सभी की नजर जांच प्रक्रिया पर टिकी हुई है। सच्चाई सामने आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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PM Modi

Israel Tour PM Modi ने Yad Vashem में दी श्रद्धांजलि, Defence Deal पर बड़ी चर्चा

होलोकॉस्ट स्मारक Yad Vashem में श्रद्धांजलि इज़राइल दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने Jerusalem स्थित ऐतिहासिक होलोकॉस्ट स्मारक Yad Vashem में नाजी शासन के दौरान मारे गए लगभग 60 लाख यहूदियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। यह स्थल द्वितीय विश्व युद्ध के उस दर्दनाक इतिहास की याद दिलाता है, जब मानवता ने अपने सबसे कठिन दौर का सामना किया था। होलोकॉस्ट के दौरान Adolf Hitler के नेतृत्व में नाजी शासन ने लाखों निर्दोष लोगों का सुनियोजित नरसंहार किया था। प्रधानमंत्री ने स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर मौन रखा और शांति व सह-अस्तित्व का संदेश दिया। President Isaac Herzog से अहम मुलाकात अपनी यात्रा के दौरान PM Modi ने इज़राइल के राष्ट्रपति Isaac Herzog से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में रक्षा सहयोग, कृषि तकनीक, जल प्रबंधन, साइबर सुरक्षा और इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया। Defence Deal और Strategic Partnership पर फोकस सूत्रों के अनुसार, भारत और Israel के बीच संभावित Defence Deal को लेकर भी सकारात्मक बातचीत हुई है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच रक्षा और रणनीतिक सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। भारत के लिए इज़राइल आधुनिक रक्षा तकनीक का अहम साझेदार रहा है, जबकि इज़राइल भारत को एक विश्वसनीय और दीर्घकालिक सहयोगी के रूप में देखता है। भावनात्मक और कूटनीतिक रूप से अहम दौरा PM Modi की यह यात्रा केवल एक औपचारिक राजनयिक कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि ऐतिहासिक संवेदनाओं से जुड़ा एक भावनात्मक क्षण भी साबित हुई। होलोकॉस्ट स्मारक पर उनकी उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि इतिहास की त्रासदियों को याद रखना और उनसे सीख लेकर भविष्य को बेहतर बनाना ही सच्ची श्रद्धांजलि है। इस दौरे से भारत-इज़राइल संबंधों को नई ऊर्जा मिली है और आने वाले समय में दोनों देशों के बीच सहयोग और गहरा होने की उम्मीद जताई जा रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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BJP

India AI Summit विवाद BJP का दावा Congress ने पैसे देकर कराई Online बदनामी

भारत में आयोजित India AI Impact Summit 2026 को लेकर सियासत तेज हो गई है। एक तरफ सरकार इस ग्लोबल टेक इवेंट को भारत की डिजिटल ताकत का प्रतीक बता रही है, तो वहीं दूसरी ओर यह आयोजन अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र बन चुका है। सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पार्टी ने कुछ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को पैसे का ऑफर देकर AI समिट के खिलाफ नकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश की। भाजपा नेताओं का दावा है कि इस संबंध में कुछ वीडियो और चैट स्क्रीनशॉट सामने आए हैं, जिनमें कथित तौर पर पैसों के बदले समिट की आलोचना करने की बात कही गई है। BJP का आरोप क्या है? भाजपा प्रवक्ताओं के अनुसार, कुछ इन्फ्लुएंसर्स को मैसेज भेजकर कहा गया कि वे AI Summit से जुड़ी कमियों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करें। आरोप है कि इसके बदले उन्हें तय रकम देने का प्रस्ताव रखा गया। पार्टी का कहना है कि यह केवल सरकार की आलोचना नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि को नुकसान पहुँचाने की कोशिश है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हुई है। मामले को लेकर आधिकारिक जांच या किसी एजेंसी की पुष्टि सामने नहीं आई है। Youth Congress Protest से बढ़ा विवाद विवाद तब और गहरा गया जब AI समिट के दौरान Indian Youth Congress के कुछ कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। बताया गया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने शर्ट उतारकर नारेबाजी की। पुलिस ने इसे सुरक्षा नियमों का उल्लंघन बताया और कई लोगों को हिरासत में लिया। भाजपा ने इस प्रदर्शन को “सुनियोजित” करार देते हुए कहा कि यह आयोजन की गरिमा को ठेस पहुँचाने के लिए किया गया कदम था। वहीं कांग्रेस का कहना है कि यह लोकतांत्रिक विरोध का हिस्सा था और सरकार को आलोचना स्वीकार करनी चाहिए। Congress का पक्ष कांग्रेस नेताओं ने भाजपा के आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि पार्टी का किसी भी इन्फ्लुएंसर को पैसे देने से कोई लेना-देना नहीं है। कांग्रेस का तर्क है कि जब भी सरकार की नीतियों पर सवाल उठते हैं, तो सत्ता पक्ष उसे देश विरोधी करार दे देता है। पार्टी नेताओं ने यह भी कहा कि AI Summit जैसे बड़े आयोजन पर सवाल उठाना या प्रदर्शन करना लोकतंत्र का हिस्सा है और इसे देश की छवि से जोड़कर देखना सही नहीं है। Political Narrative और Public Perception AI Summit, जिसे भारत की तकनीकी प्रगति और स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए अहम माना जा रहा था, अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। आम नागरिकों के बीच भी इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग राय देखने को मिल रही है। कुछ लोगों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर ऐसे विवाद देश की छवि पर असर डाल सकते हैं। वहीं कई लोग इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था का स्वाभाविक हिस्सा बताते हैं, जहां सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद खुलकर सामने आते हैं। आगे क्या? फिलहाल यह मामला राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित है। यदि आरोपों से जुड़े वीडियो और सबूतों की जांच होती है, तो स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। तब तक यह मुद्दा सियासी गर्मी बढ़ाता रहेगा। AI Summit Controversy अब केवल एक टेक इवेंट की खबर नहीं रह गई है, बल्कि यह इस बात का उदाहरण बन गई है कि डिजिटल युग में राजनीति, सोशल मीडिया और पब्लिक ओपिनियन किस तरह एक-दूसरे से जुड़ चुके हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस मामले में कोई आधिकारिक जांच होती है या यह विवाद भी भारतीय राजनीति की कई बहसों की तरह समय के साथ ठंडा पड़ जाएगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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NCERT

Education vs Judiciary Row NCERT बदलाव पर Supreme Court बोला– सिर्फ माफी काफी नहीं

देश में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। इस बार मामला स्कूल की किताबों और उनमें किए गए बदलावों से जुड़ा है। हाल ही में National Council of Educational Research and Training (NCERT) द्वारा कुछ पाठ्यपुस्तकों में संशोधन किए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया। मामला अदालत तक पहुंचा और सुनवाई के दौरान Supreme Court of India ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर न्यायपालिका की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हुई है तो “सिर्फ माफी काफी नहीं” मानी जाएगी। क्या है पूरा मामला? NCERT ने हाल के समय में पाठ्यक्रम को “रैशनलाइज” करने और छात्रों पर पढ़ाई का बोझ कम करने के उद्देश्य से कुछ अध्यायों और अंशों में बदलाव किए। इन बदलावों में इतिहास, लोकतांत्रिक संस्थाओं और न्यायपालिका से जुड़े कुछ हिस्सों को हटाया या संक्षिप्त किया गया। यहीं से विवाद शुरू हुआ। कई शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाया कि क्या इन संशोधनों से छात्रों को देश की संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका की पूरी और संतुलित जानकारी मिल पाएगी? सुप्रीम कोर्ट की सख्त प्रतिक्रिया सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शिक्षा सामग्री बेहद संवेदनशील विषय है। कोर्ट की टिप्पणी का सार यह था कि अगर किसी संस्था—खासकर न्यायपालिका—को बदनाम करने की मंशा से बदलाव किए गए हैं, तो केवल माफी मांग लेना पर्याप्त नहीं होगा। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है, क्योंकि स्कूल की किताबें ही छात्रों की सोच और समझ की नींव रखती हैं। NCERT का पक्ष क्या है? NCERT का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया शैक्षणिक समीक्षा का हिस्सा थी। संस्था के अनुसार: हालांकि, आलोचकों का मानना है कि पाठ्यपुस्तकों में किए गए बदलावों का प्रभाव लंबे समय तक छात्रों की समझ पर पड़ सकता है। क्यों महत्वपूर्ण है यह विवाद? यह मुद्दा केवल एक अध्याय या किताब तक सीमित नहीं है। यह बहस तीन बड़े सवालों को सामने लाती है: जब न्यायपालिका जैसी संस्था इस पर टिप्पणी करती है, तो मामला और गंभीर हो जाता है। शिक्षा और समाज पर संभावित असर स्कूल की किताबें सिर्फ परीक्षा पास करने का माध्यम नहीं होतीं। वे समाज, संविधान और लोकतंत्र की समझ विकसित करती हैं। ऐसे में अगर किसी भी बदलाव को लेकर संदेह पैदा होता है, तो उसका असर भरोसे पर पड़ता है—चाहे वह छात्रों का हो, अभिभावकों का या शिक्षकों का। इस पूरे विवाद ने यह साफ कर दिया है कि शिक्षा नीति में किया गया हर छोटा बदलाव भी व्यापक सामाजिक और संवैधानिक चर्चा का विषय बन सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मोदी

PM मोदी की Israel यात्रा Defense, Technology और Trade में नई दिशा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 25-26 फरवरी 2026 को इज़राइल के लिए दो दिवसीय राजकीय दौरे पर गए। इस यात्रा को इज़रायली मीडिया ने “Strategic Reset” और “Landmark Moment” बताया है, यानी इसे भारत-इज़राइल संबंधों में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। यह मोदी का इज़राइल में दूसरा दौरा है, पिछला दौरा 2017 में हुआ था। इज़राइल में मोदी का गर्मजोशी से स्वागत इज़राइल में पीएम मोदी का स्वागत बेहद भव्य और रंगीन रहा। सड़कों पर “Namaste” के नारे लगे और भारतीय तिरंगे की रोशनी से जगह-जगह इमारतें जगमगा उठीं। संसद भवन कनेसट को भी भारतीय तिरंगे के रंगों में रोशन किया गया। मीडिया ने इस स्वागत को भारत और इज़राइल के बीच मित्रता और साझा सम्मान का प्रतीक बताया। Strategic Reset: क्या है खास? “Strategic Reset” का मतलब है कि भारत और इज़राइल अब अपने रिश्तों को सिर्फ औपचारिक दोस्ती तक सीमित नहीं रखेंगे। इस यात्रा के जरिए दोनों देशों के बीच रक्षा, सुरक्षा, तकनीकी नवाचार, निवेश और व्यापार सहयोग को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की योजना है। यानी यह दौरा केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी (Special Strategic Partnership) का मार्ग प्रशस्त करने वाला कदम है। मोदी का कार्यक्रम और ऐतिहासिक बातें पीएम मोदी इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग से मुलाकात करेंगे। वे कनेसट (इज़राइली संसद) को संबोधित करेंगे, और इस तरह मोदी पहले भारतीय प्रधानमंत्री होंगे, जिन्होंने यह अवसर प्राप्त किया। इसके अलावा मोदी याद वशेम (Holocaust Memorial) का दौरा भी करेंगे, जो दोनों देशों के साझा इतिहास और सम्मान को दर्शाता है। रक्षा और तकनीक के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण समझौतों की संभावनाएँ भी हैं। क्यों कहा जा रहा है ‘New Phase’? इज़रायली मीडिया और विशेषज्ञ मानते हैं कि यह दौरा भारत-इज़राइल रिश्तों में नए अध्याय (New Phase) की शुरुआत है। पिछली यात्राओं के मुकाबले अब सहयोग पहले से कहीं अधिक गहरा और व्यापक है। रक्षा, तकनीक, व्यापार और वैश्विक सहयोग के क्षेत्रों में यह एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है। राजनीतिक और वैश्विक प्रभाव इस दौरे से क्षेत्रीय राजनीति और सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है। इज़राइल के प्रधानमंत्री ने इसे स्थिरता और साझेदारी के प्रतीक के रूप में बताया। वहीं कुछ आलोचक, विशेषकर भारत में विपक्ष, यह कहते हैं कि भारत को फिलीस्तीन संकट जैसे मानवीय मुद्दों पर भी ध्यान देना चाहिए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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NCERT

Education vs Judiciary Debate NCERT के ‘Judicial Corruption’ चैप्टर पर CJI का सख्त स्टैंड

देश की स्कूली शिक्षा और न्यायपालिका—दोनों ही लोकतंत्र के मजबूत स्तंभ माने जाते हैं। ऐसे में जब National Council of Educational Research and Training (NCERT) की एक किताब में शामिल ‘Judicial Corruption’ (ज्यूडिशियल करप्शन) चैप्टर को लेकर विवाद खड़ा हुआ, तो मामला सीधे देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया। इस मुद्दे पर सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। उन्होंने यह भी कहा कि मामला पहली नजर में सोचा-समझा कदम लगता है और वे स्वयं इस केस को देखेंगे। क्या है NCERT Judicial Corruption Controversy? विवाद उस अध्याय को लेकर है जिसमें न्यायिक भ्रष्टाचार से जुड़े संदर्भ और उदाहरण शामिल किए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इस तरह की सामग्री छात्रों के मन में न्यायपालिका की छवि को लेकर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। उनका कहना है कि स्कूल स्तर पर पढ़ाई जाने वाली किताबों में संवैधानिक संस्थाओं के बारे में संतुलित और जिम्मेदार भाषा होनी चाहिए। दूसरी तरफ कुछ शिक्षा विशेषज्ञों का मत है कि लोकतंत्र में पारदर्शिता और संस्थाओं की आलोचनात्मक समझ भी जरूरी है। उनके अनुसार, यदि विषय तथ्यों और ऐतिहासिक संदर्भों के साथ रखा गया है, तो इसे शिक्षा के दायरे में ही देखा जाना चाहिए, न कि संस्थान के खिलाफ अभियान के रूप में। CJI का सख्त रुख सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि न्यायपालिका की साख और विश्वसनीयता पर आंच नहीं आने दी जा सकती। उन्होंने संकेत दिया कि अगर सामग्री भ्रामक या एकतरफा पाई गई तो अदालत जरूरी निर्देश दे सकती है। CJI का खुद इस मामले को देखने का फैसला बताता है कि सुप्रीम कोर्ट इस विवाद को बेहद गंभीरता से ले रहा है। Education vs Institution Reputation: बड़ा सवाल यह मामला केवल एक अध्याय तक सीमित नहीं है। यह उस बड़े सवाल को सामने लाता है—क्या पाठ्यपुस्तकों में संवैधानिक संस्थाओं की आलोचनात्मक चर्चा होनी चाहिए? अगर हां, तो उसकी सीमा क्या हो? एक ओर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है, दूसरी ओर संस्थाओं की गरिमा। संतुलन कहां बनेगा, यह अब अदालत के फैसले से तय होगा। आगे क्या हो सकता है? आगामी सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट यह तय कर सकता है कि: देशभर के अभिभावक, शिक्षक और छात्र अब इस फैसले का इंतजार कर रहे हैं। क्योंकि यह मामला केवल एक चैप्टर का नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और न्यायपालिका के बीच भरोसे के रिश्ते का भी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Kerala

Kerala का नाम बदलेगा अब “Keralam” होगा आधिकारिक नाम

देश की राजनीति और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने केरल (Kerala) का नाम बदलकर “केरलम (Keralam)” करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल के इस फैसले के बाद अब आधिकारिक रूप से राज्य का नाम बदलने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यह प्रस्ताव पहले ही केरल विधानसभा द्वारा पारित किया जा चुका था। विधानसभा ने सर्वसम्मति से केंद्र से आग्रह किया था कि राज्य का पारंपरिक और स्थानीय नाम “केरलम” ही संविधान और सभी सरकारी दस्तावेजों में दर्ज किया जाए। मलयालम भाषा में राज्य को लंबे समय से “केरलम” कहा जाता रहा है, इसलिए इसे औपचारिक मान्यता देने की मांग उठी थी। क्यों बदला जा रहा है Kerala का नाम? राज्य सरकार का कहना है कि “केरल” नाम अंग्रेज़ी और अन्य भाषाओं में प्रचलित रूप है, जबकि स्थानीय भाषा मलयालम में सही उच्चारण और ऐतिहासिक पहचान “केरलम” है। इस बदलाव को सांस्कृतिक सम्मान और भाषाई अस्मिता से जोड़कर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के नेतृत्व में राज्य सरकार ने यह प्रस्ताव केंद्र को भेजा था। उनका तर्क था कि जब कई राज्यों ने अपने पारंपरिक नामों को आधिकारिक रूप दिया है, तो केरल भी अपनी मूल पहचान के साथ जाना जाए। अब आगे क्या होगा? कैबिनेट की मंजूरी के बाद अगला कदम संसद में संविधान संशोधन विधेयक लाना होगा। संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत और पहली अनुसूची में संशोधन के जरिए “केरल” की जगह “केरलम” दर्ज किया जाएगा। राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद यह बदलाव आधिकारिक रूप से लागू हो जाएगा। इसके बाद सरकारी दस्तावेज, आधिकारिक वेबसाइटें, साइनबोर्ड और अन्य प्रशासनिक अभिलेखों में भी नया नाम अपडेट किया जाएगा। राजनीतिक और सांस्कृतिक मायने यह फैसला ऐसे समय आया है जब राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव की चर्चा भी तेज हो रही है। हालांकि सरकार इसे पूरी तरह सांस्कृतिक और भाषाई सम्मान से जुड़ा कदम बता रही है। कई लोगों के लिए यह सिर्फ नाम बदलने का मामला नहीं है, बल्कि अपनी जड़ों और परंपरा को पहचान देने का प्रयास है। “केरलम” शब्द राज्य की मिट्टी, भाषा और इतिहास से गहराई से जुड़ा हुआ है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Prayagraj Controversy शंकराचार्य को गिरफ्तारी का अंदेशा, IPS अधिकारी पर साजिश का आरोप

ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने संभावित गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। उनका कहना है कि प्रयागराज में तैनात आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा उनके खिलाफ साजिश रच रहे हैं और प्रशासनिक तंत्र उनके विरुद्ध सक्रिय है। इस घटनाक्रम ने धार्मिक और राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। क्या है पूरा मामला? शंकराचार्य का आरोप है कि उन्हें झूठे मामलों में फंसाने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि हाल के दिनों में जिस तरह की प्रशासनिक गतिविधियां हुई हैं, उससे उन्हें अपनी गिरफ्तारी का अंदेशा है। उन्होंने अदालत से गुहार लगाई है कि बिना निष्पक्ष जांच के कोई कठोर कदम न उठाया जाए। करीबी सूत्रों के मुताबिक, शंकराचार्य ने अपनी याचिका में कहा है कि उन्हें व्यक्तिगत और संस्थागत तौर पर निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि “सारा सिस्टम” उनके खिलाफ खड़ा नजर आ रहा है। हाईकोर्ट से क्या मांग? याचिका में मुख्य रूप से तीन मांगें रखी गई हैं: कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि अदालत को प्रथम दृष्टया मामला गंभीर लगा, तो अंतरिम राहत मिल सकती है। हालांकि अंतिम फैसला सुनवाई के बाद ही होगा। क्यों बढ़ी चर्चा? यह मामला केवल कानूनी विवाद तक सीमित नहीं है। एक प्रमुख धार्मिक पद पर आसीन व्यक्ति द्वारा खुले तौर पर गिरफ्तारी की आशंका जताना कई सवाल खड़े करता है। समर्थकों का कहना है कि यह धार्मिक आवाज को दबाने की कोशिश है, जबकि प्रशासन की ओर से अभी तक औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आगे क्या? अब सभी की नजर हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी है। अदालत प्रशासन से जवाब तलब कर सकती है और यह तय करेगी कि शंकराचार्य को तत्काल राहत मिलेगी या नहीं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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CM Nitish

Bihar Political Drama लाठीचार्ज मुद्दे पर विधानसभा में टकराव, CM Nitish ने दिया करारा जवाब

बिहार की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान चौकीदारों और दफेदारों पर हुए लाठीचार्ज का मुद्दा ऐसा उठा कि सदन में तीखी बहस, नारेबाजी और हंगामे का माहौल बन गया। बात इतनी बढ़ी कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish) और राजद विधायक भाई वीरेंद्र के बीच खुली नोकझोंक देखने को मिली। क्या है पूरा मामला? हाल ही में पटना में अपनी मांगों को लेकर चौकीदार और दफेदार सड़कों पर उतरे थे। उनका कहना था कि वे लंबे समय से वेतन, सेवा शर्तों और सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर सरकार से गुहार लगा रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बल प्रयोग किया, जिसे विपक्ष ने “अनावश्यक लाठीचार्ज” बताया। इसी मुद्दे को लेकर विधानसभा में विपक्ष ने सरकार को घेरा। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सदस्यों ने जोरदार विरोध जताया और जवाब की मांग की। सदन में क्यों बढ़ी तल्खी? बहस के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish) ने कहा कि सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी तरह की अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उनका इशारा इस ओर था कि प्रदर्शन के दौरान हालात बिगड़ रहे थे। लेकिन भाई वीरेंद्र ने सरकार के इस पक्ष को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों पर लाठी क्यों चली? इसी बात पर दोनों के बीच तीखी बहस हुई, जिसने माहौल और गर्म कर दिया। RJD का हमला, सरकार का बचाव मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल ने इसे कर्मचारियों की आवाज दबाने की कोशिश बताया। पार्टी नेताओं का कहना है कि अगर सरकार समय रहते संवाद करती, तो नौबत लाठीचार्ज तक नहीं पहुंचती। वहीं सत्ता पक्ष का तर्क है कि पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए। सरकार का कहना है कि विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देकर जनता को भ्रमित कर रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Chandigarh के एलांते मॉल में हंगामा, खाने में कीड़ा मिलने का आरोप

Chandigarh के एलांते मॉल में हंगामा, खाने में कीड़ा मिलने का आरोप

Chandigarh के Elante Mall के फूड कोर्ट में उस वक्त हंगामा हो गया, जब एक ग्राहक ने खाने में कीड़ा मिलने का आरोप लगाया। ग्राहक का कहना है कि उसने चाइनीज डिश ऑर्डर की थी, जिसमें उसे कीड़ा नजर आया। उसने इस घटना का वीडियो भी दिखाया, जिसके बाद मौके पर मौजूद लोगों में नाराजगी बढ़ गई। मामले के बढ़ने पर संबंधित कैफे के मैनेजर (GM) ने स्थिति संभालने की कोशिश की। उन्होंने ग्राहक से माफी मांगी और कहा कि इस तरह की घटना दोबारा न हो, इसके लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। घटना के बाद फूड कोर्ट में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। अन्य ग्राहकों ने भी खाने की क्वालिटी और सफाई को लेकर चिंता जताई। यह मामला एक बार फिर फूड सेफ्टी और हाइजीन को लेकर सवाल खड़े करता है। लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में सख्त जांच और कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
Parshuram Jayanti पर इंदौर में भव्य शोभायात्रा, मुख्यमंत्री ने किए बड़े ऐलान

Parshuram Jayanti पर इंदौर में भव्य शोभायात्रा, मुख्यमंत्री ने किए बड़े ऐलान

Indore में Parshuram Jayanti के अवसर पर भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इस आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया और पूरा शहर भक्तिमय माहौल में रंगा नजर आया। यह शोभायात्रा Sarv Brahmin Samaj की ओर से आयोजित की गई, जिसमें पारंपरिक झांकियां, बैंड-बाजे और धार्मिक उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री Mohan Yadav भी शामिल हुए। उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए तीर्थ स्थलों के विकास और सनातन संस्कृति के संरक्षण को लेकर कई अहम घोषणाएं कीं। उनका कहना था कि सरकार धार्मिक स्थलों के विकास के लिए लगातार काम कर रही है। इस मौके पर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। लोगों ने भगवान परशुराम की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की। यह आयोजन न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि समाज को एकजुट करने का भी संदेश देता नजर आया।
तन्वी कोलते बनीं Bigg Boss Marathi 6 की विनर, राकेश-विशाल को मिली हार

तन्वी कोलते बनीं Bigg Boss Marathi 6 की विनर, राकेश-विशाल को मिली हार

रियलिटी शो Bigg Boss Marathi 6 का फिनाले काफी रोमांचक रहा। इस सीजन की ट्रॉफी Tanvi Kolte ने अपने नाम कर ली। शो के आखिरी मुकाबले में कई मजबूत कंटेस्टेंट्स के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। Rakesh और Vishal भी फाइनल तक पहुंचे, लेकिन अंत में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इस शो को Salman Khan के पॉपुलर रियलिटी शो के फॉर्मेट से जोड़ा जाता है, जिसकी वजह से दर्शकों में इसका क्रेज काफी ज्यादा रहता है। तन्वी कोलते की जीत के बाद उनके फैंस में खुशी की लहर है। पूरे सीजन में उनकी परफॉर्मेंस और स्ट्रॉन्ग पर्सनैलिटी को दर्शकों ने काफी पसंद किया। फिनाले एपिसोड में इमोशंस, ड्रामा और एंटरटेनमेंट का जबरदस्त तड़का देखने को मिला, जिसने दर्शकों को आखिरी तक बांधे रखा।
महिला आरक्षण के समर्थन में BJP की रैली, सीएम बोले- विशेष सत्र बुलाया जाएगा

महिला आरक्षण के समर्थन में BJP की रैली, सीएम बोले- विशेष सत्र बुलाया जाएगा

Bhopal में महिला आरक्षण के मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है। BJP ने इस मुद्दे के समर्थन में आज आक्रोश रैली निकालने का ऐलान किया है। रैली से पहले मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि सरकार इस विषय पर गंभीर है और जल्द ही विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जा सकता है। उनका कहना है कि महिलाओं को उनका अधिकार मिलना चाहिए और इसमें किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए। सीएम ने Indian National Congress पर आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष महिलाओं के अधिकारों को रोकने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है और आम लोगों की नजरें भी अब आने वाले फैसलों पर टिकी हुई हैं।
ई-रिक्शा में महिला के 5 लाख के जेवर चोरी, Gwalior में वारदात

ई-रिक्शा में महिला के 5 लाख के जेवर चोरी, Gwalior में वारदात

Gwalior में एक हैरान करने वाली चोरी की घटना सामने आई है। शादी में जा रही एक महिला के करीब 5 लाख रुपये के जेवर ई-रिक्शा में सफर के दौरान चोरी हो गए। जानकारी के अनुसार, महिला आराम से ई-रिक्शा में बैठकर अपने गंतव्य की ओर जा रही थी। रास्ते में गड्ढों और खराब सड़क के कारण रिक्शा में बार-बार झटके लग रहे थे। इसी दौरान किसी ने मौके का फायदा उठाकर बैग से जेवर पार कर दिए। महिला को चोरी का पता तब चला जब वह अपने गंतव्य पर पहुंची। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाएं बढ़ती जा रही हैं और यात्रियों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। खासकर भीड़भाड़ या खराब रास्तों पर सफर करते समय अपने सामान का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

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