आपका चैनल --
ताज़ा खबर
BREAKINGदेश-हरपलन्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर मोहम्मद यूनुस का विरोध, प्रदर्शनकारियों ने लगाए गंभीर आरोप; वीडियो वायरल◆BREAKINGदेश-हरपलApple ने लॉन्च किया HomeView स्मार्ट डिस्प्ले, ₹39,900 से शुरू कीमत; HomePod Mini 2 और नए Apple TV 4K से भी उठा पर्दा◆BREAKINGदेश-हरपलकॉकरोच जनता पार्टी के आशुतोष रांका और सौरव दास तिहाड़ जेल भेजे गए, अजिंक्य शिंदे को मिली जमानत◆BREAKINGBreaking Newsएअर इंडिया की फ्रैंकफर्ट-दिल्ली फ्लाइट की जयपुर में इमरजेंसी लैंडिंग, हाईजैक अलर्ट से मचा हड़कंप◆BREAKINGधर्म-कर्मNavratri 2026: चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा, जानें कथा, भोग और मंत्र◆BREAKINGदेश-हरपलGandhinagar Municipal Election: भाजपा को बहुमत, कांग्रेस को फायदा; AAP को एक भी सीट नहीं◆BREAKINGदेश-हरपलUPI Charges Update: ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर 0.4% फीस, दिवाली तक टला फैसला◆BREAKINGदेश-हरपलPatna SIR Protest: पटना में छात्रों का हंगामा, बैरिकेडिंग तोड़ी; छात्राओं को खींचकर ले जाने का आरोप◆BREAKINGदेश-हरपलन्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर मोहम्मद यूनुस का विरोध, प्रदर्शनकारियों ने लगाए गंभीर आरोप; वीडियो वायरल◆BREAKINGदेश-हरपलApple ने लॉन्च किया HomeView स्मार्ट डिस्प्ले, ₹39,900 से शुरू कीमत; HomePod Mini 2 और नए Apple TV 4K से भी उठा पर्दा◆BREAKINGदेश-हरपलकॉकरोच जनता पार्टी के आशुतोष रांका और सौरव दास तिहाड़ जेल भेजे गए, अजिंक्य शिंदे को मिली जमानत◆BREAKINGBreaking Newsएअर इंडिया की फ्रैंकफर्ट-दिल्ली फ्लाइट की जयपुर में इमरजेंसी लैंडिंग, हाईजैक अलर्ट से मचा हड़कंप◆BREAKINGधर्म-कर्मNavratri 2026: चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा, जानें कथा, भोग और मंत्र◆BREAKINGदेश-हरपलGandhinagar Municipal Election: भाजपा को बहुमत, कांग्रेस को फायदा; AAP को एक भी सीट नहीं◆BREAKINGदेश-हरपलUPI Charges Update: ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर 0.4% फीस, दिवाली तक टला फैसला◆BREAKINGदेश-हरपलPatna SIR Protest: पटना में छात्रों का हंगामा, बैरिकेडिंग तोड़ी; छात्राओं को खींचकर ले जाने का आरोप◆

NE

News Elementor

What's Hot

Banner

Latest Posts

Amit Shah

Amit Shah Statement: घुसपैठ को लेकर शाह का बड़ा ऐलान, Security और Economy पर बताया खतरा

देश की आंतरिक सुरक्षा और अवैध घुसपैठ को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने एक बार फिर सख्त संदेश दिया है। राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन में उन्होंने कहा कि भारत कोई धर्मशाला नहीं है। देश में आने और रहने के लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी है। गृह मंत्री ने अवैध घुसपैठ को सिर्फ सीमा का मुद्दा नहीं, बल्कि National Security, Economy और Demographic Balance से जुड़ी चुनौती बताया। शाह के इस बयान के बाद अवैध प्रवासियों की पहचान, सीमा सुरक्षा और राज्यों की भूमिका को लेकर चर्चा फिर तेज हो गई है। ‘भारत कोई धर्मशाला नहीं’, शाह ने क्यों कहा? अमित शाह ने अपने संबोधन में साफ कहा कि भारत में रहने का अधिकार नागरिकों को है। जो विदेशी नागरिक वैध दस्तावेज और तय कानूनी प्रक्रिया के तहत भारत आते हैं, उनके लिए अलग व्यवस्था है, लेकिन अवैध तरीके से देश में प्रवेश करने वालों पर सरकार सख्ती से कार्रवाई करेगी। गृह मंत्री ने कहा कि अवैध घुसपैठ का असर देश की सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ अर्थव्यवस्था और जनसांख्यिकीय स्थिति पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि इसे लंबे समय से सरकार की प्रमुख आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में शामिल किया गया है। Infiltration Free India का लक्ष्य शाह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य देश को कम से कम समय में Infiltration Free India बनाना है। इसके लिए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया जा रहा है। भूमि सीमा साझा करने वाले राज्यों के साथ बैठकें और दौरे कर सीमा सुरक्षा को लेकर एक चार सूत्रीय रणनीति पर भी काम किया गया है। इसका उद्देश्य सीमा पर निगरानी मजबूत करने के साथ स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाना है। Border Security में Technology का बढ़ेगा इस्तेमाल बदलते समय के साथ सीमा सुरक्षा का तरीका भी बदल रहा है। सरकार अब पारंपरिक निगरानी के साथ आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दे रही है। Smart Border Management, बेहतर निगरानी और सुरक्षा एजेंसियों के बीच डेटा साझा करने जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसका मकसद संदिग्ध गतिविधियों की पहचान जल्दी करना और सुरक्षा तंत्र को ज्यादा प्रभावी बनाना है। 15-20 साल आगे की तैयारी पर जोर राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन में शाह ने अधिकारियों से सिर्फ आज की चुनौतियों पर ध्यान देने के बजाय आने वाले 15 से 20 वर्षों के सुरक्षा रुझानों का अध्ययन करने को कहा। उनका जोर इस बात पर रहा कि किसी खतरे के बड़ा रूप लेने का इंतजार करने के बजाय पहले से उसकी पहचान कर तैयारी की जाए। आतंकवाद, साइबर खतरे, कट्टरपंथ, नशीले पदार्थों की तस्करी और सीमा पार से आने वाली चुनौतियां इसी व्यापक सुरक्षा रणनीति का हिस्सा हैं। Narcotics और Terrorism पर भी सरकार की नजर गृह मंत्री ने नशीले पदार्थों की तस्करी और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई तेज करने की जरूरत बताई। सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर Coordination के साथ नई तकनीक और Intelligence Sharing को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। सरकार की कोशिश है कि अलग-अलग सुरक्षा एजेंसियों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान तेज हो, ताकि किसी संभावित खतरे पर समय रहते कार्रवाई की जा सके। राज्यों की भूमिका क्यों अहम? भारत की सीमा से जुड़े कई राज्यों की भूमिका इस पूरी रणनीति में बेहद महत्वपूर्ण है। सीमा सुरक्षा केवल केंद्रीय बलों की जिम्मेदारी नहीं है। स्थानीय प्रशासन, पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के बीच तालमेल से ही सीमा क्षेत्रों में प्रभावी निगरानी संभव है। इसी वजह से केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर Integrated Security Grid को मजबूत करने पर जोर दे रही है। शाह के बयान का बड़ा संदेश अमित शाह का ताजा बयान बताता है कि केंद्र सरकार के लिए Illegal Infiltration और Border Security आने वाले समय में भी बड़ी प्राथमिकता बने रहेंगे। सरकार एक तरफ सीमा पर निगरानी मजबूत करने की बात कर रही है, वहीं दूसरी तरफ तकनीक और Intelligence आधारित सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ाने पर जोर दे रही है। हालांकि, किसी भी व्यक्ति की पहचान या उसके खिलाफ कार्रवाई कानून और निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही की जानी चाहिए। अवैध घुसपैठ और वैध रूप से भारत आने वाले विदेशी नागरिकों के बीच अंतर करना भी इसी कानूनी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
Ram Mandir

Ayodhya Ram Mandir चंपत राय की Diary में दर्ज हुए बड़े सवाल, नृपेंद्र मिश्रा के 14 Interviews चर्चा में

अयोध्या (Ayodhya) के राम मंदिर (Ram Mandir) से जुड़ा Donation Theft Controversy अब लगातार नए सवाल खड़े कर रहा है। मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी के मामले को लेकर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय की बताई जा रही डायरी में कई अहम बातें दर्ज होने की चर्चा है। इनमें FIR कराने में देरी, नृपेंद्र मिश्रा के लगातार मीडिया इंटरव्यू और मंदिर से जुड़ी अंदरूनी जानकारी बाहर पहुंचने जैसे मुद्दे शामिल हैं। मामले ने तब ज्यादा तूल पकड़ा जब डायरी में दर्ज कथित टिप्पणियों के आधार पर नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका को लेकर सवाल सामने आए। हालांकि, डायरी में लिखी बातों को आरोप या सवाल के तौर पर ही देखना जरूरी है, क्योंकि इनसे किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी अपने आप साबित नहीं होती। चढ़ावे की चोरी सामने आई तो FIR क्यों नहीं हुई? चंपत राय की कथित डायरी में सबसे अहम सवाल यही है कि चढ़ावे में चोरी की जानकारी सामने आने के बावजूद तत्काल पुलिस FIR क्यों नहीं कराई गई। रिपोर्टों के अनुसार, चंपत राय का तर्क था कि पुलिस को मामला सौंपने के बाद जांच का दायरा काफी बढ़ सकता था और मंदिर से जुड़े कई लोगों से पूछताछ की नौबत आ सकती थी। इसी वजह से पहले अंदरूनी स्तर पर जानकारी जुटाने और मामले को समझने की कोशिश किए जाने का दावा किया गया। यही फैसला अब विवाद का बड़ा हिस्सा बन गया है। सवाल यह है कि अगर चोरी की आशंका गंभीर थी तो पुलिस कार्रवाई में देरी क्यों हुई? नृपेंद्र मिश्रा से मुलाकात का भी जिक्र डायरी में जून की शुरुआत में नृपेंद्र मिश्रा के अयोध्या पहुंचने और मंदिर से जुड़े पदाधिकारियों के साथ बैठक का उल्लेख होने की बात सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, इस बैठक में चढ़ावे में कथित चोरी की जानकारी साझा की गई थी। इसी दौरान FIR नहीं होने को लेकर सवाल भी उठाया गया। चंपत राय की ओर से पुलिस जांच के संभावित असर का हवाला दिए जाने की बात कही गई है। इस मुलाकात ने मामले को और संवेदनशील बना दिया, क्योंकि इसके बाद मंदिर से जुड़े विवाद की जानकारी धीरे-धीरे सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बनने लगी। 14 Interviews ने क्यों बढ़ाई हलचल? चंपत राय की कथित डायरी में नृपेंद्र मिश्रा के करीब 14 मीडिया इंटरव्यू का भी उल्लेख होने की बात सामने आई है। डायरी में कथित तौर पर सवाल उठाया गया कि इतने कम समय में इतने इंटरव्यू देने की जरूरत क्यों पड़ी और इसके पीछे किसका सुझाव था। यह सवाल इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि मामला उस समय मंदिर के अंदर हुई कथित चोरी और चढ़ावे की व्यवस्था से जुड़ा था। हालांकि, किसी वरिष्ठ पदाधिकारी का मीडिया से बात करना अपने आप में गलत नहीं है। असली सवाल डायरी में दर्ज उस कथित आशंका का है कि इतने इंटरव्यू की रणनीति आखिर किसने तय की थी। ‘असली भेदिया कौन?’ सवाल ने खींचा ध्यान इस पूरे विवाद में सबसे दिलचस्प सवाल अंदर की जानकारी बाहर पहुंचने को लेकर है। रिपोर्टों के मुताबिक, चंपत राय ने अपनी डायरी में यह सवाल भी दर्ज किया कि मंदिर से जुड़ी संवेदनशील जानकारी बाहर कैसे पहुंची और इसे बाहर ले जाने वाला व्यक्ति कौन था। इसी संदर्भ में कुछ संतों की ओर से नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका को लेकर सवाल पूछे जाने का भी उल्लेख है। लेकिन यहां यह साफ करना जरूरी है कि ‘भेदिया’ या किसी व्यक्ति की संलिप्तता का दावा जांच के बिना तथ्य नहीं माना जा सकता। फिलहाल ये बातें डायरी में दर्ज कथित सवालों और आरोपों के रूप में सामने आई हैं। 23 जून के बाद बयान बंद होने पर भी सवाल चंपत राय की कथित डायरी में नृपेंद्र मिश्रा के मीडिया बयानों के क्रम का भी उल्लेख होने की बात कही गई है। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ दिनों तक लगातार सार्वजनिक बयान देने के बाद 23 जून के बाद उनकी ओर से इस मुद्दे पर बयान नहीं आए। इसी बदलाव को लेकर भी डायरी में सवाल उठाए जाने की चर्चा है। क्या यह सामान्य मीडिया रणनीति थी या किसी स्तर पर बयान रोकने का फैसला हुआ था? इसका जवाब आधिकारिक तौर पर सामने आना बाकी है। विवाद अब सिर्फ चोरी तक सीमित नहीं राम मंदिर चढ़ावा विवाद ने अब कई अलग-अलग सवालों को जन्म दे दिया है। एक तरफ कथित चोरी की जांच है, तो दूसरी तरफ मंदिर में चढ़ावे की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल हैं। इसके अलावा FIR में देरी, वरिष्ठ पदाधिकारियों की भूमिका और मीडिया में दिए गए बयानों को लेकर भी चर्चा तेज है। चंपत राय की ओर से मंदिर निर्माण की व्यवस्थाओं और नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका को लेकर पहले भी कई सवाल उठाए गए हैं। इससे विवाद केवल चढ़ावे की कथित चोरी तक सीमित नहीं रहा। श्रद्धालुओं के लिए सबसे बड़ा सवाल राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे से जुड़ी किसी भी गड़बड़ी की खबर श्रद्धालुओं के लिए बेहद संवेदनशील है। यही वजह है कि इस मामले में सामने आने वाली हर नई जानकारी पर लोगों की नजर बनी हुई है। फिलहाल चंपत राय की डायरी में बताए गए दावों को लेकर सबसे जरूरी बात यही है कि डायरी में दर्ज आरोपों और जांच में साबित तथ्यों के बीच अंतर किया जाए। नृपेंद्र मिश्रा या किसी अन्य व्यक्ति की वास्तविक भूमिका का फैसला जांच और आधिकारिक साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकता है। आने वाले दिनों में अगर जांच से FIR में देरी, चढ़ावे की निगरानी और अंदर की जानकारी बाहर पहुंचने जैसे सवालों के जवाब मिलते हैं, तो इस पूरे विवाद की तस्वीर काफी हद तक साफ हो सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
Monsoon

Monsoon Flood Alert: काशी के 84 घाट डूबे, Bihar में 50 हजार लोग प्रभावित; MP के 21 जिलों में Heavy Rain

देश के कई राज्यों में मानसून (Monsoon) की बारिश अब राहत से ज्यादा परेशानी का कारण बनती जा रही है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ने से काशी के 84 घाट पानी में डूब गए हैं। घाटों के आसपास की करीब 5 हजार दुकानों पर इसका असर पड़ा है। दूसरी ओर बिहार में बाढ़ से करीब 50 हजार लोग प्रभावित बताए जा रहे हैं। मध्य प्रदेश में भी मौसम विभाग ने 21 जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई है। लगातार बढ़ते जलस्तर ने नदी किनारे रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है। कई जगहों पर रोजमर्रा की जिंदगी और छोटे कारोबार सीधे प्रभावित हुए हैं। Varanasi Flood: काशी के 84 घाट जलमग्न वाराणसी में गंगा का पानी तेजी से बढ़ने के बाद काशी के 84 घाटों पर बाढ़ का असर दिखाई दे रहा है। दशाश्वमेध, अस्सी और मणिकर्णिका समेत कई प्रमुख घाटों की सीढ़ियां पानी में डूब गई हैं। घाटों पर आने-जाने वाले लोगों की संख्या कम हुई है। सुरक्षा को देखते हुए कई गतिविधियों पर भी रोक लगाई गई है। गंगा किनारे रहने और काम करने वाले लोगों के लिए स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। 5 हजार दुकानों पर Flood का असर गंगा का जलस्तर बढ़ने का सबसे बड़ा असर घाट किनारे कारोबार करने वाले दुकानदारों पर पड़ा है। करीब 5 हजार दुकानों के बंद होने या कारोबार प्रभावित होने की बात सामने आई है। फूल-माला, पूजा सामग्री, खानपान और पर्यटकों से जुड़े छोटे कारोबार करने वाले लोगों के लिए मानसून की यह स्थिति आर्थिक नुकसान का कारण बन रही है। नाव संचालन पर भी असर पड़ा है। Bihar Flood: 50 हजार लोग बाढ़ से घिरे बिहार में भी नदियों का बढ़ता जलस्तर लोगों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। गंगा समेत कई नदियों के उफान पर आने से निचले इलाकों में पानी पहुंच गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 50 हजार लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। कई इलाकों में आवागमन प्रभावित हुआ है और प्रशासन की ओर से राहत एवं बचाव व्यवस्था पर नजर रखी जा रही है। बाढ़ के बीच सबसे बड़ी चिंता उन परिवारों की है जिनका घर और रोजमर्रा का काम सीधे नदी के बढ़ते पानी से प्रभावित हुआ है। MP Weather Alert: 21 जिलों में Heavy Rain की संभावना मध्य प्रदेश में भी मानसून सक्रिय बना हुआ है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार प्रदेश के 21 जिलों में भारी बारिश हो सकती है। भोपाल समेत कई क्षेत्रों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में Waterlogging और नदी-नालों के जलस्तर बढ़ने का खतरा बना हुआ है। प्रशासन ने लोगों से मौसम की स्थिति पर नजर रखने और नदी-नालों के आसपास अनावश्यक रूप से जाने से बचने की अपील की है। लगातार बारिश ने बढ़ाई चिंता वाराणसी से लेकर बिहार और मध्य प्रदेश तक बारिश का असर अलग-अलग रूप में दिखाई दे रहा है। कहीं घाट डूब रहे हैं, कहीं गांवों तक बाढ़ का पानी पहुंच रहा है तो कहीं भारी बारिश का Alert लोगों की चिंता बढ़ा रहा है। फिलहाल आने वाले दिनों का मौसम बेहद अहम रहेगा। खासकर नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की Advisory को गंभीरता से लेना जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
तरुण तेजपाल

2013 Rape Case: तरुण तेजपाल को राहत नहीं, Supreme Court ने दिया Surrender का निर्देश

2013 के रेप केस में दोषी ठहराए गए पूर्व तहलका एडिटर तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी Surrender से छूट की मांग खारिज कर दी। कोर्ट ने साफ कहा कि उन्हें दो हफ्ते के भीतर सरेंडर करना होगा। तरुण तेजपाल ने बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उन्हें मामले में दोषी ठहराते हुए 10 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई गई थी। अब उनकी अपील पर अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी। Supreme Court ने क्या कहा? सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान तेजपाल की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सरेंडर से राहत देने की मांग की। उनका पक्ष था कि मुख्य अपील पर सुनवाई होने तक तेजपाल को जेल जाने से छूट दी जाए। वहीं, गोवा सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसका विरोध किया। सरकार का कहना था कि अदालत के आदेश के मुताबिक पहले सरेंडर किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल सरेंडर से राहत देने से इनकार कर दिया और दो सप्ताह के अंदर सरेंडर करने का निर्देश दिया। साथ ही सरेंडर सर्टिफिकेट अदालत में दाखिल करने को कहा गया है। 10 साल की सजा के खिलाफ Supreme Court पहुंचे तेजपाल यह मामला 2013 का है। आरोप एक महिला सहकर्मी से जुड़े यौन उत्पीड़न के मामले का है। मामले की सुनवाई के दौरान तेजपाल ने आरोपों से इनकार किया था। 2021 में गोवा की ट्रायल कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था। इसके बाद गोवा सरकार ने इस फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी। 6 अगस्त 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलट दिया। हाईकोर्ट ने तेजपाल को दोषी ठहराते हुए उन्हें 10 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके बाद तेजपाल ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। Goa Government ने Life Imprisonment की मांग की मामला यहीं खत्म नहीं हुआ है। गोवा सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर तेजपाल की सजा बढ़ाने की मांग की है। सरकार की मांग है कि 10 साल की सजा को बढ़ाकर आजीवन कारावास किया जाए। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के सामने अब दोषसिद्धि और सजा से जुड़े कई अहम पहलू हैं। अब आगे क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल तेजपाल को दो हफ्ते के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है। इसके बाद उनकी मुख्य अपील पर 22 सितंबर को सुनवाई होनी है। यानी आने वाले दिनों में यह मामला एक बार फिर अदालत में केंद्र में रहेगा। तेजपाल की ओर से हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है, जबकि गोवा सरकार सजा बढ़ाने की मांग कर रही है। फिलहाल सबसे अहम बात यही है कि सुप्रीम कोर्ट ने सरेंडर से राहत नहीं दी है और तेजपाल को निर्धारित समय के भीतर कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
TRE-4

Patna में TRE-4 Protest तेज: छात्रों और पुलिस में झड़प, Water Cannon का इस्तेमाल; परीक्षा Pattern पर विवाद

बिहार की राजधानी पटना में TRE-4 Exam को लेकर अभ्यर्थियों का गुस्सा अब सड़कों पर दिखाई दे रहा है। शिक्षक भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों का कहना है कि परीक्षा के नियमों में बदलाव से उनकी परेशानी बढ़ गई है। अपनी मांगों को लेकर बड़ी संख्या में अभ्यर्थी प्रदर्शन कर रहे हैं। मंगलवार को प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब छात्रों ने आगे बढ़ने की कोशिश की और पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग की। हालात बिगड़ने पर Water Cannon का इस्तेमाल किया गया। प्रदर्शन के दौरान एक छात्रा के घायल होने की भी खबर सामने आई है। TRE-4 Exam Pattern को लेकर सबसे ज्यादा नाराजगी अभ्यर्थियों का मुख्य विरोध BPSC TRE-4 परीक्षा के Pattern को लेकर है। छात्रों की मांग है कि परीक्षा को एक चरण में कराया जाए और भर्ती प्रक्रिया को पहले की तरह सरल एवं स्पष्ट रखा जाए। छात्रों का कहना है कि परीक्षा के नियमों में बदलाव से उनकी तैयारी प्रभावित हो रही है। उनका यह भी कहना है कि प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में उम्मीदवार महीनों मेहनत करते हैं, इसलिए परीक्षा से जुड़े नियमों में किसी भी बदलाव की जानकारी पहले से स्पष्ट होनी चाहिए। Single Stage Exam और No Negative Marking की मांग प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थी Single Stage Examination की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही वे No Negative Marking की व्यवस्था चाहते हैं। छात्रों का तर्क है कि Negative Marking होने से परीक्षा में प्रश्न हल करने की रणनीति बदल जाएगी। उनका कहना है कि अगर परीक्षा का पैटर्न बदला जा रहा है तो BPSC को अभ्यर्थियों की चिंताओं को भी गंभीरता से सुनना चाहिए। Patna में प्रदर्शन के दौरान बढ़ा तनाव TRE-4 अभ्यर्थियों का प्रदर्शन पटना के गर्दनीबाग इलाके में लंबे समय से चल रहा है। मंगलवार को प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर आगे बढ़ने की कोशिश की। पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोकने की कोशिश की। इसके बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव बढ़ गया। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए Water Cannon का इस्तेमाल किया। इस दौरान धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। प्रदर्शन के दौरान एक छात्रा के घायल होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि चोट की परिस्थितियों को लेकर अलग-अलग दावे हैं, इसलिए इस मामले में आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना जरूरी है। BPSC के बयान से भी नाराज हुए छात्र TRE-4 परीक्षा को लेकर विवाद केवल परीक्षा Pattern तक सीमित नहीं है। हाल में BPSC के परीक्षा नियंत्रक की एक टिप्पणी को लेकर भी अभ्यर्थियों में नाराजगी देखने को मिली थी। विवाद बढ़ने के बाद संबंधित अधिकारी की ओर से बयान पर खेद जताया गया। लेकिन छात्रों की नाराजगी पूरी तरह खत्म नहीं हुई। अभ्यर्थियों का कहना है कि उनकी असली चिंता परीक्षा व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया को लेकर है। आंदोलन को मिला राजनीतिक समर्थन TRE-4 अभ्यर्थियों के आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। विपक्षी नेताओं ने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से उनकी समस्याओं का समाधान करने की अपील की है। RJD नेता तेजस्वी यादव ने भी प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने की मांग की। छात्रों की मांग साफ, अब सरकार के फैसले का इंतजार प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि वे किसी टकराव के लिए सड़क पर नहीं आए हैं। उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि TRE-4 Exam Pattern को लेकर स्थिति साफ की जाए और उम्मीदवारों के हित में फैसला लिया जाए। अब निगाहें बिहार सरकार और BPSC के अगले कदम पर हैं। अगर छात्रों की मांगों पर जल्द कोई स्पष्ट फैसला नहीं आता है, तो आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है। फिलहाल पटना का TRE-4 Protest बिहार में सरकारी शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं की चिंता को सामने ला रहा है। छात्रों के लिए यह सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि उनके लंबे समय से देखे जा रहे सरकारी नौकरी के सपने से जुड़ा मामला है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
UPI

UPI के 10 साल पूरे: ₹1.78 करोड़ से हजारों करोड़ तक पहुंचा सफर, PM Modi ने किया याद

भारत में आज मोबाइल से चंद सेकंड में पैसे भेजना जितना आसान लगता है, दस साल पहले इसकी कल्पना भी इतनी आम नहीं थी। UPI यानी Unified Payments Interface ने इसी बदलाव को संभव बनाया। साल 2016 में शुरू हुआ UPI अब अपने 10 साल पूरे कर चुका है और इस दौरान इसने भारत के Digital Payment सिस्टम की पूरी तस्वीर बदल दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने UPI की 10वीं वर्षगांठ पर सोशल मीडिया के जरिए इस खास सफर को याद किया। उन्होंने UPI को भारत की डिजिटल तरक्की की एक बड़ी मिसाल बताते हुए इससे जुड़े लोगों के योगदान की सराहना की। ₹1.78 करोड़ से शुरू होकर ₹24,162 करोड़ तक पहुंचा UPI UPI की शुरुआत के समय इसके जरिए होने वाले लेनदेन बेहद कम थे। शुरुआती दौर में इसका सालाना ट्रांजैक्शन करीब ₹1.78 करोड़ था। लेकिन अगले कुछ वर्षों में स्मार्टफोन, इंटरनेट और Digital Banking के बढ़ते इस्तेमाल ने UPI को तेजी से आगे बढ़ाया। आज यही आंकड़ा बढ़कर करीब ₹24,162 करोड़ सालाना ट्रांजैक्शन तक पहुंच गया है। यह बदलाव सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं है, बल्कि बताता है कि भारतीयों ने डिजिटल पेमेंट को कितनी तेजी से अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में अपनाया। चाय की दुकान से बड़े कारोबार तक पहुंचा QR Payment UPI की असली ताकत उसकी सादगी रही। सड़क किनारे चाय बेचने वाला हो या बड़ा कारोबारी, QR Code ने सभी के लिए डिजिटल भुगतान का रास्ता आसान कर दिया। अब किसी दुकान पर कैश नहीं है तो परेशानी नहीं। मोबाइल निकाला, QR Code स्कैन किया और Payment पूरा। यही सुविधा UPI को आम लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय बनाने में अहम रही। Cashless India की दिशा में बड़ा कदम UPI ने भारत में Cashless Economy को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। छोटे भुगतान से लेकर बड़े लेनदेन तक, डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल लगातार बढ़ा है। खास बात यह है कि इसके लिए ग्राहक को अलग से कोई जटिल प्रक्रिया अपनाने की जरूरत नहीं पड़ती। बैंक अकाउंट और मोबाइल के जरिए भुगतान करना काफी आसान हो गया है। PM Modi ने UPI के सफर को बताया खास UPI के 10 साल पूरे होने के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक खास पोस्ट साझा किया। उन्होंने इस डिजिटल पेमेंट सिस्टम के विकास को भारत की तकनीकी क्षमता और Innovation से जोड़ते हुए इससे जुड़े लोगों की तारीफ की। UPI ने न केवल देश के भीतर भुगतान को आसान बनाया, बल्कि भारत के Digital Public Infrastructure की चर्चा को भी दुनिया तक पहुंचाया है। भारत से बाहर भी बढ़ी UPI की पहचान पिछले कुछ वर्षों में UPI की चर्चा भारत के बाहर भी बढ़ी है। अलग-अलग देशों के साथ Digital Payment Connectivity बढ़ने से भारतीय यात्रियों और कारोबारियों के लिए भी भुगतान के नए रास्ते खुले हैं। इससे भारत के उस मॉडल को भी मजबूती मिली है, जिसमें Technology को आम लोगों की जरूरतों से जोड़कर बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जाता है। 10 साल बाद भी UPI की कहानी जारी 2016 में शुरू हुआ UPI आज करोड़ों लोगों की रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है। ₹1.78 करोड़ से ₹24,162 करोड़ तक पहुंचा इसका सफर भारत में Digital Payment Revolution की तस्वीर सामने रखता है। आने वाले समय में UPI को और सुरक्षित, तेज और सुविधाजनक बनाने की दिशा में काम जारी रहने की उम्मीद है। फिलहाल, UPI के 10 साल पूरे होना इस बात का प्रमाण है कि सही Technology जब आम आदमी के हाथ में पहुंचती है, तो बदलाव बहुत बड़े स्तर पर दिखाई देता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
TMC

TMC vs Rebel MPs: 20 सांसदों की Disqualification पर Supreme Court का बड़ा कदम

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों की सदस्यता को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। पार्टी की ओर से दायर याचिका पर शीर्ष अदालत ने संबंधित सांसदों को नोटिस जारी किया है। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। मामला केवल सांसदों की सदस्यता तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में दल-बदल कानून, लोकसभा स्पीकर के अधिकार और अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला लेने में हो रही देरी जैसे अहम सवाल भी हैं। 20 सांसदों की Disqualification का क्या है मामला? TMC का आरोप है कि उसके टिकट पर चुनाव जीतने वाले 20 सांसदों ने बाद में पार्टी से अलग रुख अपनाया और दूसरे राजनीतिक संगठन के साथ जाने की कोशिश की। पार्टी ने इसे संविधान की दसवीं अनुसूची यानी Anti-Defection Law के तहत कार्रवाई योग्य बताया है। TMC की ओर से इन सांसदों की सदस्यता खत्म करने की मांग करते हुए लोकसभा स्पीकर के समक्ष अयोग्यता याचिकाएं दाखिल की गई थीं। पार्टी का कहना है कि इन याचिकाओं पर अपेक्षित तेजी से फैसला नहीं हुआ। हालांकि, बागी सांसदों की ओर से अलग दलील रखी गई है। उनका कहना है कि उनका कदम कानूनी राजनीतिक विलय के दायरे में आता है और इसलिए उन्हें दल-बदल कानून के तहत अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। Abhishek Banerjee ने उठाया मामला इस मामले को लेकर TMC के महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने पहले लोकसभा स्पीकर से भी जल्द फैसला लेने की मांग की थी। पार्टी की ओर से कहा गया कि अयोग्यता याचिकाओं को लंबे समय तक लंबित रखना उचित नहीं है। जब मामला आगे नहीं बढ़ा तो TMC ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। पार्टी की प्रमुख मांग है कि अयोग्यता याचिकाओं पर Time-Bound Decision लिया जाए। SC के Notice से क्या बदलेगा? सुप्रीम कोर्ट का नोटिस जारी होना फिलहाल यह नहीं बताता कि 20 सांसदों को अयोग्य घोषित कर दिया गया है। अदालत अब संबंधित पक्षों का जवाब सुनकर मामले की कानूनी स्थिति पर विचार करेगी। यही वजह है कि इस मामले में अगली सुनवाई को बेहद अहम माना जा रहा है। अदालत के सामने यह सवाल भी रहेगा कि अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला लेने में देरी की स्थिति में न्यायिक हस्तक्षेप की सीमा क्या हो सकती है। Anti-Defection Law पर भी नजर भारत में दल-बदल रोकने के लिए संविधान की दसवीं अनुसूची में प्रावधान किए गए हैं। किसी सांसद के पार्टी बदलने या पार्टी के निर्देशों के खिलाफ जाने की स्थिति में अयोग्यता का सवाल उठ सकता है। हालांकि, कानून में कुछ अपवाद भी मौजूद हैं। TMC और बागी सांसदों के बीच विवाद इसी कानूनी ढांचे की अलग-अलग व्याख्या से जुड़ा हुआ है। इसलिए मामला सिर्फ राजनीतिक लड़ाई नहीं, बल्कि संसदीय कानून के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बन गया है। आगे क्या होगा? अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर है। 20 बागी सांसदों को नोटिस मिलने के बाद मामले में सभी पक्षों की दलीलें सामने आएंगी। इसके बाद अदालत यह तय कर सकती है कि अयोग्यता याचिकाओं को लेकर आगे किस तरह की प्रक्रिया अपनाई जाए। फिलहाल इतना साफ है कि TMC के 20 Rebel MPs का Disqualification Case अब संसद से निकलकर देश की सबसे बड़ी अदालत तक पहुंच चुका है। आने वाले दिनों में इस मामले का राजनीतिक असर जितना महत्वपूर्ण होगा, उतना ही इसकी कानूनी दिशा पर भी नजर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
Gurugram

Gurugram में बारिश बनी आफत! Waterlogging से सड़कें जाम, School-Office पर बड़ा फैसला

गुरुग्राम (Gurugram) में सोमवार को हुई तेज बारिश ने एक बार फिर शहर की तैयारियों की पोल खोल दी। कुछ घंटों की बारिश के बाद ही कई इलाकों में पानी भर गया। सड़कें तालाब जैसी नजर आने लगीं और कई प्रमुख मार्गों पर वाहनों की रफ्तार थम गई। हालात ऐसे बने कि लोगों को घंटों ट्रैफिक में फंसे रहना पड़ा। बारिश और जलभराव को देखते हुए प्रशासन ने मंगलवार, 25 अगस्त को स्कूलों में Online Classes चलाने और सरकारी व निजी संस्थानों के कर्मचारियों को Work From Home (WFH) की सलाह दी। तेज बारिश के बाद सड़कें बनीं जलमग्न गुरुग्राम में बारिश के बाद राजीव चौक, IFFCO चौक, रेलवे रोड, ओल्ड दिल्ली रोड, मेहरौली रोड, बसई रोड और नरसिंहपुर समेत कई इलाकों में जलभराव की शिकायतें सामने आईं। कुछ अंडरपास और निचले इलाकों में भी पानी जमा होने से लोगों की परेशानी बढ़ गई। दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे समेत कई व्यस्त सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। ऑफिस से लौट रहे लोगों और जरूरी काम से बाहर निकले लोगों को काफी समय तक जाम का सामना करना पड़ा। School Buses फंसीं, Parents की बढ़ी चिंता बारिश का सबसे ज्यादा असर उस समय दिखाई दिया जब कई स्कूल बसें जलभराव वाले रास्तों में फंस गईं। बच्चों के देर से घर पहुंचने की खबरों के बाद अभिभावकों की चिंता बढ़ गई। ऐसे हालात को देखते हुए अगले दिन स्कूलों में ऑफलाइन पढ़ाई के बजाय Online Classes कराने का फैसला लिया गया। इससे बच्चों और शिक्षकों को जलभराव वाले रास्तों से आने-जाने की परेशानी से बचाने की कोशिश की गई। Offices के लिए WFH Advisory गुरुग्राम प्रशासन ने 25 अगस्त के लिए Work From Home Advisory जारी की। कॉरपोरेट, सरकारी और निजी संस्थानों से कर्मचारियों को संभव हो तो घर से काम कराने की अपील की गई। इस फैसले का मकसद सिर्फ कर्मचारियों की परेशानी कम करना नहीं है। प्रशासन के मुताबिक, अगर कम लोग सड़कों पर निकलेंगे तो ट्रैफिक का दबाव घटेगा और जलभराव वाले इलाकों में राहत एवं निकासी का काम तेजी से किया जा सकेगा। बारिश ने फिर उठाए Drainage System पर सवाल गुरुग्राम देश के बड़े कॉरपोरेट और IT हब में गिना जाता है। यहां रोजाना हजारों लोग काम के लिए अलग-अलग इलाकों से आते-जाते हैं। ऐसे में बारिश के बाद सड़कों पर पानी भरना और ट्रैफिक व्यवस्था का बिगड़ना सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि शहर के Urban Infrastructure के लिए भी बड़ी चुनौती है। हर साल मानसून के दौरान जलभराव की तस्वीरें सामने आने के बाद एक सवाल बार-बार उठता है—क्या गुरुग्राम का Drainage System तेज बारिश का सामना करने के लिए पर्याप्त है? Delhi-NCR में भी बारिश का असर गुरुग्राम के अलावा दिल्ली-NCR के कई इलाकों में भी भारी बारिश का असर देखने को मिला। कई जगह जलभराव और ट्रैफिक की समस्या सामने आई। मौसम विभाग ने भी क्षेत्र में बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया था। फिलहाल प्रशासन की कोशिश जलभराव वाले इलाकों से पानी निकालने, ट्रैफिक को नियंत्रित करने और लोगों को सुरक्षित रखने की है। Gurugram Rain से लोगों को मिला एक और सबक गुरुग्राम में कुछ घंटों की बारिश ने शहर की चमकती तस्वीर के पीछे की एक पुरानी समस्या फिर सामने ला दी। सड़कें डूबने के बाद स्कूलों को Online और कर्मचारियों को WFH करना पड़ा। अब नजर इस बात पर है कि बारिश थमने के बाद प्रशासन सिर्फ पानी निकालने तक सीमित रहता है या अगले मानसून से पहले Drainage System को मजबूत करने की ठोस तैयारी भी होती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
Hijab

School में Hijab पहनने पर Allahabad HC का फैसला, मुस्लिम छात्रा को नहीं मिली राहत

स्कूल की यूनिफॉर्म और हिजाब (Hijab) को लेकर चल रही बहस के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने प्रयागराज के एक निजी स्कूल की मुस्लिम छात्रा की याचिका खारिज कर दी। छात्रा ने स्कूल की तय यूनिफॉर्म के साथ Headscarf यानी हिजाब पहनने की अनुमति मांगी थी। अदालत ने कहा कि याचिका में ऐसा पर्याप्त आधार नहीं दिया गया, जिससे यह साबित हो कि स्कूल में हेडस्कार्फ पहनना इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा है। क्या है Hijab और School Uniform का पूरा मामला? मामला प्रयागराज के टैगोर पब्लिक स्कूल से जुड़ा है। छात्रा ने अपनी मां के माध्यम से हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उसका कहना था कि वह कक्षा 6 से 10 तक इसी स्कूल में पढ़ी और इस दौरान हेडस्कार्फ पहनती रही। उस समय स्कूल की ओर से इस पर आपत्ति नहीं जताई गई थी। कक्षा 11 में पहुंचने के बाद स्कूल के ड्रेस कोड को लेकर विवाद सामने आया। छात्रा चाहती थी कि उसे निर्धारित यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की अनुमति दी जाए। मामला बढ़ने के बाद परिवार ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। School का क्या था पक्ष? स्कूल की ओर से कहा गया कि संस्थान में सभी विद्यार्थियों के लिए एक समान Dress Code लागू है। स्कूल एक निजी और CBSE से संबद्ध संस्थान है और उसकी यूनिफॉर्म नीति सभी छात्रों पर समान रूप से लागू होती है। स्कूल ने यह भी तर्क दिया कि ड्रेस कोड का मकसद विद्यार्थियों के बीच समानता और अनुशासन बनाए रखना है। किसी एक विद्यार्थी के लिए अलग नियम बनाने से यूनिफॉर्म की एकरूपता प्रभावित हो सकती है। Allahabad High Court ने क्या फैसला दिया? जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की डिविजन बेंच ने छात्रा की याचिका खारिज कर दी। अदालत के सामने मुख्य सवाल यह था कि क्या स्कूल में हेडस्कार्फ पहनना ऐसी Essential Religious Practice है, जिसके आधार पर छात्रा को स्कूल की निर्धारित यूनिफॉर्म से अलग पहनावे की अनुमति दी जानी चाहिए। कोर्ट ने माना कि छात्रा की ओर से इस दावे को साबित करने के लिए पर्याप्त सामग्री पेश नहीं की गई। इसी आधार पर अदालत ने स्कूल के ड्रेस कोड में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। पहले हिजाब पहनती थी छात्रा, फिर विवाद क्यों हुआ? मामले में छात्रा की ओर से यह महत्वपूर्ण दलील दी गई कि वह कई सालों से स्कूल में हेडस्कार्फ पहनती आ रही थी। लेकिन कोर्ट ने इस तर्क को पर्याप्त नहीं माना। अदालत ने स्पष्ट किया कि अतीत में स्कूल की ओर से किसी नियम पर आपत्ति नहीं जताए जाने का मतलब यह नहीं है कि भविष्य में भी उसी व्यवस्था को जारी रखना छात्रा का स्थायी कानूनी अधिकार बन जाता है। यानी स्कूल अगर बाद में अपने तय Uniform Rules को लागू करता है, तो केवल पुरानी व्यवस्था के आधार पर उसे रोकना जरूरी नहीं है। Court ने Uniform को लेकर क्या कहा? हाईकोर्ट ने स्कूल के यूनिफॉर्म नियम को भी मामले का महत्वपूर्ण हिस्सा माना। अदालत के अनुसार, यदि ड्रेस कोड सभी विद्यार्थियों पर समान रूप से लागू होता है और उसके पीछे अनुशासन तथा संस्थान की पहचान जैसे उद्देश्य हैं, तो केवल व्यक्तिगत पसंद के आधार पर उसमें बदलाव की मांग स्वीकार करना जरूरी नहीं है। यही वजह रही कि इस मामले में कोर्ट ने स्कूल प्रशासन के पक्ष में फैसला दिया। Karnataka Hijab Case का भी हुआ जिक्र इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कर्नाटक हिजाब केस का भी संदर्भ दिया। 2022 में कर्नाटक हाईकोर्ट ने भी हिजाब को इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा मानने से इनकार किया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि उसके सामने ऐसा पर्याप्त आधार नहीं रखा गया है, जिसके चलते वह उस दृष्टिकोण से अलग निष्कर्ष पर पहुंचे। हालांकि हिजाब और धार्मिक स्वतंत्रता का संवैधानिक मुद्दा व्यापक है और अलग परिस्थितियों में अदालतों के सामने इसके अलग पहलू उठ सकते हैं। क्या हर स्कूल में अब हिजाब पर रोक लग गई? नहीं। इस फैसले को इस तरह समझना सही नहीं होगा कि देश के सभी स्कूलों में हिजाब पर एक समान रोक लगा दी गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला एक विशेष स्कूल की यूनिफॉर्म नीति और उसके सामने रखे गए तथ्यों से जुड़ा है। इसलिए अलग स्कूल, अलग ड्रेस कोड या अलग परिस्थितियों में कानूनी स्थिति अलग हो सकती है। Hijab vs Uniform: क्यों अहम है यह फैसला? इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस फैसले ने एक बार फिर Religious Freedom और School Dress Code के बीच संतुलन की बहस को चर्चा में ला दिया है। एक तरफ धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत अधिकारों का सवाल है, तो दूसरी तरफ स्कूल की यूनिफॉर्म, अनुशासन और समानता का मुद्दा है। फिलहाल इस मामले में हाईकोर्ट ने छात्रा को स्कूल की निर्धारित यूनिफॉर्म के साथ हेडस्कार्फ पहनने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। फैसला आने के बाद यह मुद्दा एक बार फिर सार्वजनिक बहस के केंद्र में आ गया है।
Read more
Patna Airport

Patna Airport पर Bird Strike से हड़कंप, 164 यात्रियों वाली फ्लाइट की Safe Landing

पटना एयरपोर्ट (Patna Airport) पर सोमवार सुबह एक बार फिर विमान की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाने वाली घटना सामने आई। दिल्ली से पटना आ रही एक फ्लाइट लैंडिंग के दौरान पक्षी से टकरा गई। विमान में 164 यात्री सवार थे। गनीमत रही कि पायलट ने विमान को सुरक्षित रनवे पर उतार लिया और हादसे में किसी यात्री के घायल होने की खबर नहीं है। Landing के दौरान विमान से टकराया पक्षी दिल्ली से पटना पहुंची फ्लाइट जब लैंडिंग के लिए नीचे आ रही थी, तभी विमान से पक्षी टकरा गया। पायलट ने तुरंत एयरपोर्ट कंट्रोल को इसकी जानकारी दी। इसके बाद एयरपोर्ट पर सुरक्षा व्यवस्था को अलर्ट कर दिया गया। विमान के सुरक्षित उतरने के बाद यात्रियों को बाहर निकाला गया। इसके बाद तकनीकी टीम ने विमान की जांच की। शुरुआती जांच में किसी बड़े नुकसान की बात सामने नहीं आई। यात्रियों के लिए यह पल निश्चित तौर पर डराने वाला रहा होगा। हालांकि, क्रू की सतर्कता और समय पर उठाए गए सुरक्षा कदमों के कारण स्थिति नियंत्रण में रही। 7 दिन में Bird Hit की दूसरी घटना पटना एयरपोर्ट पर Bird Hit का यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि एक सप्ताह के भीतर यह दूसरी ऐसी घटना बताई जा रही है। इससे पहले भी दिल्ली-पटना रूट पर आने वाली फ्लाइट पक्षी से टकराई थी। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने एयरपोर्ट के आसपास पक्षियों की मौजूदगी और रनवे की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। टेक-ऑफ और लैंडिंग के दौरान Bird Strike को विमानन सुरक्षा के लिहाज से गंभीर माना जाता है। बारिश के मौसम में बढ़ती है चुनौती मानसून के दौरान एयरपोर्ट के आसपास हरियाली और कीड़े-मकौड़ों की संख्या बढ़ने से पक्षियों की गतिविधियां भी बढ़ सकती हैं। यही वजह है कि बारिश के मौसम में एयरपोर्ट प्रशासन को रनवे और उसके आसपास के इलाके की लगातार निगरानी करनी पड़ती है। पटना एयरपोर्ट के आसपास Bird Activity को कम करने के लिए अलग-अलग सुरक्षा उपाय किए जाते हैं। रनवे क्षेत्र में पक्षियों की गतिविधि पर नजर रखने के साथ उन्हें दूर रखने के लिए Bird Chasers जैसी व्यवस्था का इस्तेमाल भी किया जाता है। 164 यात्रियों की सुरक्षित लैंडिंग सबसे बड़ी राहत इस घटना में सबसे राहत वाली बात यही रही कि 164 यात्रियों से भरा विमान सुरक्षित पटना पहुंच गया। किसी यात्री के घायल होने की सूचना नहीं है। विमान की तकनीकी जांच के बाद ही आगे की उड़ान से जुड़े फैसले लिए जाते हैं। हालांकि, एक ही सप्ताह में Bird Hit की दो घटनाएं सामने आने के बाद एयरपोर्ट प्रशासन के सामने चुनौती साफ है। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए रनवे के आसपास Bird Movement को नियंत्रित करना बेहद जरूरी है। क्यों गंभीर है Bird Strike? विमान के उड़ान भरते या उतरते समय पक्षी से टकराव को Bird Strike कहा जाता है। छोटे स्तर की घटना में नुकसान सीमित रह सकता है, लेकिन बड़े पक्षी या तेज गति से टकराव की स्थिति में विमान के महत्वपूर्ण हिस्से प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए एयरपोर्ट पर Bird Control System विमान सुरक्षा का अहम हिस्सा माना जाता है। फिलहाल पटना एयरपोर्ट की इस घटना में बड़ी राहत यही है कि विमान सुरक्षित उतर गया और सभी 164 यात्री सुरक्षित रहे। लेकिन लगातार हो रही Bird Hit की घटनाएं एयरपोर्ट के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत जरूर दिखाती हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
1 … 20 21 22 23 24 … 236

Trending News

Editor's Picks

न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर मोहम्मद यूनुस का विरोध, प्रदर्शनकारियों ने लगाए गंभीर आरोप; वीडियो वायरल

बांग्लादेश के पूर्व मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस को अमेरिका के न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर विरोध का सामना करना पड़ा। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में कुछ लोग उन्हें घेरकर नारे लगाते और सवाल पूछते नजर आ रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने यूनुस को ‘आतंकवादी’ कहा और बांग्लादेश में हिंसा तथा लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए। वीडियो के मुताबिक, विरोध कर रहे लोगों ने यूनुस से सवाल किया कि वह न्यूयॉर्क क्यों आए हैं और उन्हें वापस लौट जाना चाहिए। स्थिति को देखते हुए यूनुस और उनकी सहयोगी लामिया मोर्शेद को एयरपोर्ट के अंदर वापस ले जाया गया। प्रदर्शनकारियों ने लगाए हजारों मौतों और गिरफ्तारियों के आरोप प्रदर्शनकारियों ने मोहम्मद यूनुस पर बांग्लादेश में हजारों पुलिसकर्मियों की मौत के लिए जिम्मेदार होने का आरोप लगाया। उन्होंने देश में करीब दो लाख लोगों की गिरफ्तारी का दावा भी किया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है और विरोध करने वालों की पहचान भी स्पष्ट नहीं हुई है। बांग्लादेश के एक मीडिया संस्थान की रिपोर्ट में प्रदर्शनकारियों को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग का समर्थक बताया गया है। बांग्लादेश सरकार ने कार्रवाई की बात कही बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के सलाहकार जाहेद उर रहमान ने मंगलवार को कहा कि न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर मोहम्मद यूनुस का घेराव करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने इस घटना को ‘अवामी लीग का आतंक’ बताया। जाहेद ने विदेशों में रह रहे अवामी लीग के सदस्यों को चेतावनी भी दी। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किस कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। यूनुस के कार्यकाल में हिंसा और गिरफ्तारियों को लेकर विवाद शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद 8 अगस्त 2024 को मोहम्मद यूनुस ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार का नेतृत्व संभाला था। उनके कार्यकाल के दौरान देश में हिंसा, अल्पसंख्यकों पर हमलों और गिरफ्तारियों को लेकर सवाल उठते रहे। अवामी लीग ने आरोप लगाया था कि यूनुस सरकार ने उसके नेताओं और समर्थकों को निशाना बनाया। वहीं, मानवाधिकार संगठनों ने हिंसा और हिरासत में कथित दुर्व्यवहार के मामलों की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करने की मांग की थी। शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद करीब डेढ़ साल सत्ता में रहे यूनुस अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद मोहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार की कमान संभाली थी। इस दौरान उनकी सरकार और अवामी लीग के बीच राजनीतिक टकराव जारी रहा। बांग्लादेश के एक विशेष ट्रिब्यूनल ने 2025 में शेख हसीना की गैरमौजूदगी में मुकदमा चलाने के बाद उन्हें मौत की सजा सुनाई थी। यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाया गया और भारत से शेख हसीना को बांग्लादेश प्रत्यर्पित करने की मांग भी की गई।

Apple ने लॉन्च किया HomeView स्मार्ट डिस्प्ले, ₹39,900 से शुरू कीमत; HomePod Mini 2 और नए Apple TV 4K से भी उठा पर्दा

Apple ने स्मार्ट होम बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए नया स्मार्ट डिस्प्ले ‘HomeView’ लॉन्च किया है। इसकी शुरुआती कीमत ₹39,900 बताई गई है। न्यूयॉर्क में आयोजित ‘Welcome Home’ इवेंट में कंपनी ने HomePod Mini 2 और नए Apple TV 4K समेत कई स्मार्ट होम डिवाइस भी पेश किए। इन गैजेट्स में होम ऑटोमेशन, एंटरटेनमेंट, सिक्योरिटी और AI से जुड़े फीचर्स दिए गए हैं। कंपनी का लक्ष्य Amazon और Google जैसी कंपनियों के साथ स्मार्ट होम बाजार में अपनी जगह मजबूत करना है। दी गई जानकारी के मुताबिक, HomeView और Apple TV 4K की एडवांस बुकिंग शुरू हो गई है। इनकी डिलीवरी 13 नवंबर से मिलने की बात कही गई है, जबकि HomePod Mini 2 की डिलीवरी 30 अक्टूबर से शुरू होगी। HomeView: 7 इंच की स्क्रीन, वीडियो कॉल और स्मार्ट होम कंट्रोल Apple HomeView इस नए कलेक्शन का प्रमुख डिवाइस है। इसमें नीचे स्पीकर और ऊपर 7 इंच की टचस्क्रीन दी गई है। इसे टेबल पर रखा जा सकता है या दीवार पर लगाया जा सकता है। इसमें A18 प्रोसेसर दिया गया है। इसकी मदद से यूजर घर की लाइट और पंखे नियंत्रित करने, वीडियो कॉल करने, गाने सुनने और फिल्में देखने जैसे काम कर सकेंगे। Apple HomeView के प्रमुख फीचर्स HomePod Mini 2: गानों के साथ बदलेगी लाइट Apple ने HomePod Mini 2 स्मार्ट स्पीकर भी पेश किया है। इसमें S10 प्रोसेसर और ‘Sound Glow’ नाम की लाइटिंग सुविधा दी गई है। बताया गया है कि म्यूजिक के हिसाब से स्पीकर की लाइटों के रंग बदलेंगे। इसकी कीमत ₹18,900 रखी गई है। यह गुलाबी, नीले, हरे, सफेद और मिडनाइट कलर में उपलब्ध होगा। कंपनी के मुताबिक, नए प्रोसेसर से कनेक्टिविटी और डिवाइस के प्रदर्शन में सुधार होगा। नया Apple TV 4K: आवाज से कंट्रोल करने की सुविधा नया Apple TV 4K टीवी देखने के अनुभव को अधिक सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से पेश किया गया है। दी गई जानकारी के अनुसार, इसमें दूर से आवाज पहचानने वाले माइक्रोफोन हैं, जिनकी मदद से यूजर बिना रिमोट उठाए वॉइस कमांड से फिल्म या शो चला सकेंगे। अगर रिमोट खो जाए, तो iPhone के Find My फीचर की मदद से उसकी लोकेशन पता करने की सुविधा भी दी गई है। Apple HomePod स्पीकर्स के साथ इस्तेमाल करने पर यह ऑडियो सेटिंग्स को उनके अनुरूप समायोजित कर बेहतर साउंड अनुभव देने में मदद कर सकता है। हालांकि, Apple TV 4K की भारत में कीमत की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं बताई गई है। स्मार्ट होम बाजार में Apple की नई पहल HomeView, HomePod Mini 2 और Apple TV 4K के जरिए Apple घर के अलग-अलग स्मार्ट डिवाइस को एक ही इकोसिस्टम से जोड़ने पर जोर दे रहा है। होम ऑटोमेशन, सिक्योरिटी और AI सुविधाओं के मेल से कंपनी Amazon और Google के साथ प्रतिस्पर्धा बढ़ाना चाहती है।

कॉकरोच जनता पार्टी के आशुतोष रांका और सौरव दास तिहाड़ जेल भेजे गए, अजिंक्य शिंदे को मिली जमानत

दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के तीन सदस्यों के मामले में अदालत ने फैसला सुनाया है। स्पेशल कोर्ट ने आशुतोष रांका और सौरव दास को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया, जबकि अजिंक्य शिंदे को निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया। जानकारी के मुताबिक, तीनों को मंगलवार सुबह जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। बाद में रात करीब 3 बजे उन्हें एहतियातन गिरफ्तार किया गया। बुधवार सुबह तीनों को स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया, जहां आशुतोष रांका और सौरव दास को न्यायिक हिरासत में भेजने का फैसला हुआ। राहुल गांधी ने गिरफ्तारी पर उठाए सवाल इस कार्रवाई को लेकर राहुल गांधी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराना कोई अपराध नहीं है। उन्होंने युवाओं को जेल भेजे जाने को कायरता बताया और कार्रवाई पर सवाल उठाए। किन आरोपों में हुई कार्रवाई? CJP की लीगल टीम की प्रमुख रत्ना सिंह के मुताबिक, तीनों के खिलाफ बिना अनुमति जंतर-मंतर में प्रवेश करने, बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने और सरकारी कामकाज में बाधा डालने के आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने बताया कि आशुतोष रांका और सौरव दास को इससे पहले 10 अक्टूबर को भी फ्लाइट से हिरासत में लिया गया था। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

एअर इंडिया की फ्रैंकफर्ट-दिल्ली फ्लाइट की जयपुर में इमरजेंसी लैंडिंग, हाईजैक अलर्ट से मचा हड़कंप

फ्रैंकफर्ट से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की फ्लाइट AI-2030 की बुधवार सुबह जयपुर एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। विमान को यह कदम उस समय उठाना पड़ा, जब अहमदाबाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को फ्लाइट से हाईजैक अलर्ट का सिग्नल मिला। हालांकि, शुरुआती जांच में सिस्टम की गड़बड़ी के कारण यह संदेश जनरेट होने की आशंका जताई गई है। जानकारी के मुताबिक, अहमदाबाद ATC से मिले अलर्ट को जयपुर ATC के साथ साझा किया गया। इसके करीब 45 मिनट बाद विमान को जयपुर में सुरक्षित उतारा गया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, हाईजैक अलर्ट के पीछे तकनीकी या सिस्टम संबंधी गलती हो सकती है। मामले में विस्तृत जांच की जानकारी सामने आना बाकी है। रात 9:45 बजे फ्रैंकफर्ट से भरी थी उड़ान फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट Flightradar24 के मुताबिक, विमान ने 13 अक्टूबर की रात 9:45 बजे फ्रैंकफर्ट से उड़ान भरी थी। इसे 14 अक्टूबर की सुबह 10:40 बजे दिल्ली पहुंचना था, लेकिन हाईजैक अलर्ट मिलने के बाद विमान को जयपुर की ओर डायवर्ट कर दिया गया। 30 सितंबर को फ्लाईदुबई की फ्लाइट में भी मिला था हाईजैक सिग्नल इससे पहले 30 सितंबर को इजराइल जा रही फ्लाईदुबई की एक फ्लाइट से भी हाईजैक कोड 7500 भेजे जाने की खबर सामने आई थी। उस घटना में पायलट द्वारा विमान को हाईजैक करने और क्रैश करने की कोशिश किए जाने का दावा किया गया था। बताया गया कि भारतीय को-पायलट कैप्टन स्मित मच्छर ने स्थिति को संभालते हुए विमान को नुकसान पहुंचाने की कोशिश नाकाम कर दी थी।
मां कूष्मांडा

Navratri 2026: चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा, जानें कथा, भोग और मंत्र

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं में उन्हें सृष्टि की रचनात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है। माना जाता है कि उनकी आराधना से भक्तों को उत्साह, सकारात्मकता और नई शुरुआत की प्रेरणा मिलती है। मां कूष्मांडा की पौराणिक कथा पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब चारों ओर अंधकार था, तब मां कूष्मांडा ने अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की। इसी कारण उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति के रूप में पूजा जाता है। यह कथा सृजन और ऊर्जा के महत्त्व को दर्शाती है। मां का स्वरूप और महत्त्व पूजा विधि मंत्र: ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः। भोग: मां को मालपुआ या मीठे फल अर्पित करने की परंपरा कुछ क्षेत्रों में प्रचलित है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

About Me

देशहरपल सिर्फ खबरों का मंच नहीं, बल्कि आपकी आवाज़ को सामने लाने का एक सशक्त माध्यम भी है। यहां आपको ताज़ातरीन खबरों के साथ-साथ नौकरी, शिक्षा, और नए भारत की बदलती आर्थिक तस्वीर पर उपयोगी और भरोसेमंद जानकारी मिलेगी।

Phone: +91 9406783569, +91 755 484 8829
Email: support@deshharpal.com
Address : A-23 Sakshi Bunglow Trilanga Near Aura Mall Bhopal M.P

Recent Posts

  • All Post
  • Breaking News
  • Education
  • More News
  • Web Story
  • एंटरटेनमेंट
  • देश-हरपल
  • धर्म-कर्म
  • प्रदेश
  • बिज़नेस
  • वर्ल्ड न्यूज़
  • वीडियो
  • स्पोर्ट्स
    •   Back
    • एक्सक्लूसिव
    • Editorial
    •   Back
    • IPL 2026
    • T20 वर्ल्ड कप
    • FIFA 2026
    •   Back
    • सोच-विचार
    • हेल्थ
    • ट्रैवल
    • कल्चर
    • एनवायरनमेंट
    • Impact Feature
    •   Back
    • राशिफल
    • पंचांग
    • पर्व-त्यौहार
    • पूजा-पाठ
    • चैत्र नवरात्रि 2025
    •   Back
    • मध्य प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    •   Back
    • टीवी
    • वेब-सीरीज
    • फिल्म रिव्यू
    • बॉलीवुड
    •   Back
    • लाइफस्टाइल
    •   Back
    • स्टॉक-मार्केट

© 2023 Deshharpal. All Rights Reserved.