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Balen Shah

Balen Shah से मोहभंग? Nepal के Gen-Z PM के 150 दिन, उपलब्धियों से ज्यादा विवाद

नेपाल की राजनीति में बालेन शाह (Balen Shah) का नाम कभी बदलाव, युवा सोच और पुरानी व्यवस्था को चुनौती देने वाले नेता के तौर पर लिया जाता था। Gen-Z के बीच उनकी लोकप्रियता ने उन्हें अलग पहचान दिलाई और सत्ता तक पहुंचाया। लेकिन प्रधानमंत्री बनने के करीब 150 दिन बाद सवाल उठने लगा है—क्या जनता का अपने इस नए नेता से मोहभंग होने लगा है? बालेन शाह के सामने अब वह चुनौती है, जो किसी भी नए नेता के लिए सबसे मुश्किल होती है। चुनावी वादों और उम्मीदों को जमीन पर उतारना। शुरुआती महीनों में सरकार ने कई फैसलों को अपनी उपलब्धि बताया है, लेकिन संसद से दूरी, राजनीतिक संवाद और जनता से जुड़े विवादों ने उनकी सरकार की छवि को झटका दिया है। Balen Shah के 150 दिन: उम्मीद बड़ी, सवाल भी बड़े बालेन शाह ने 27 मार्च 2026 को नेपाल के प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। इससे पहले काठमांडू के मेयर के तौर पर उन्होंने अपनी सख्त और सीधे फैसले लेने वाली कार्यशैली से खूब सुर्खियां बटोरी थीं। यही वजह थी कि जब उनकी पार्टी RSP को चुनाव में बड़ी सफलता मिली तो युवाओं को लगा कि नेपाल की राजनीति में अब कुछ अलग होने वाला है। लेकिन प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्हें सिर्फ लोकप्रिय नेता नहीं, बल्कि एक पूरी सरकार चलाने वाले मुखिया के तौर पर खुद को साबित करना पड़ा। सरकार का दावा है कि उसके शुरुआती एजेंडे पर अच्छी प्रगति हुई है। हालांकि, विपक्ष और आलोचकों की नजर में तस्वीर इतनी आसान नहीं है। Parliament से दूरी बनी बड़ा मुद्दा बालेन शाह की कार्यशैली पर सबसे ज्यादा सवाल उनकी Parliament Attendance को लेकर उठ रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, शुरुआती 39 संसदीय बैठकों में प्रधानमंत्री केवल 5 बैठकों में मौजूद रहे। विपक्षी सांसदों ने इसे गंभीर मुद्दा बनाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को संसद में उपस्थित होकर सरकार के कामकाज और नीतियों पर जवाब देना चाहिए। अब संसद के स्पीकर ने बालेन शाह को 26 अगस्त को सदन में मौजूद होकर सांसदों के सवालों का जवाब देने को कहा है। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जिस नेता से युवाओं ने पारदर्शिता और जवाबदेही की उम्मीद की थी, उसी की संसद में कम मौजूदगी अब राजनीतिक बहस का विषय बन गई है। जनता के मुद्दों पर सरकार घिरी काठमांडू में अनौपचारिक बस्तियों और जमीन पर रहने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर भी सरकार को आलोचना झेलनी पड़ी। प्रभावित लोगों ने पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। जुलाई में एक राइड-शेयर ड्राइवर की मौत के बाद भी सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठे। इस घटना ने अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने वाले लोगों और प्रशासन के बीच तनाव को सामने ला दिया। इन घटनाओं ने सरकार के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है—सख्त प्रशासन और संवेदनशील शासन के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए? Foreign Policy पर भी बढ़ी नजर प्रधानमंत्री बनने के बाद बालेन शाह की विदेश नीति भी चर्चा में रही। भारत और चीन जैसे पड़ोसी देशों के साथ संबंध नेपाल के लिए हमेशा संवेदनशील मुद्दा रहे हैं। बालेन शाह के कुछ बयानों और राजनयिक गतिविधियों को लेकर राजनीतिक बहस हुई। हालांकि बाद में उन्होंने भारत और चीन के राजदूतों से मुलाकात भी की। RSP प्रमुख रबी लामिछाने की भारत यात्रा और वहां हुई मुलाकातों ने भी नेपाल की राजनीति में अलग चर्चा पैदा की। इससे यह सवाल उठा कि पार्टी और सरकार के बीच विदेश नीति को लेकर तालमेल कितना मजबूत है। RSP के अंदर भी सबकुछ ठीक है? बालेन शाह के लिए एक और चुनौती अपनी ही पार्टी के भीतर बेहतर तालमेल बनाए रखना है। रिपोर्टों के मुताबिक, 21 अगस्त को RSP की केंद्रीय समिति की अहम बैठक में बालेन शाह शामिल नहीं हुए। बैठक में स्थानीय चुनावों की तैयारियों समेत कई राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा होनी थी। प्रधानमंत्री का बैठक में शामिल नहीं होना पार्टी के भीतर उनकी भूमिका और नेतृत्व को लेकर अटकलों का कारण बना। हालांकि, इसे सीधे तौर पर किसी बड़े राजनीतिक टकराव का संकेत मानना जल्दबाजी होगी। Gen-Z का भरोसा अब सबसे बड़ी परीक्षा बालेन शाह की राजनीति की सबसे बड़ी ताकत Gen-Z और युवा मतदाताओं का समर्थन रही है। भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और पुराने राजनीतिक दलों से नाराज युवाओं ने उन्हें बदलाव के चेहरे के रूप में देखा। लेकिन सरकार बनने के बाद तस्वीर बदलती है। अब सिर्फ भाषण या लोकप्रिय छवि काफी नहीं है। रोजगार, महंगाई, प्रशासन, भ्रष्टाचार और रोजमर्रा की समस्याओं पर जनता ठोस नतीजे चाहती है। यही वजह है कि बालेन शाह के लिए आने वाले महीने बेहद अहम हैं। Balen Shah का Report Card: पास या फेल? 150 दिनों के आधार पर बालेन शाह सरकार को सीधे तौर पर Fail कहना सही नहीं होगा। सरकार ने कुछ फैसलों और प्रशासनिक सुधारों को अपनी उपलब्धि बताया है। लेकिन दूसरी तरफ संसद से दूरी, जनता से जुड़े विवाद और राजनीतिक संवाद की कमी ने कई सवाल खड़े किए हैं। असल परीक्षा अब शुरू होती है। बालेन शाह को यह साबित करना होगा कि वह सिर्फ Gen-Z के लोकप्रिय नेता नहीं, बल्कि नेपाल को लंबे समय तक प्रभावी तरीके से चलाने वाले प्रधानमंत्री भी हैं। जनता ने उन्हें बदलाव के नाम पर मौका दिया है। अब जनता को नारे नहीं, Result चाहिए। यही आने वाले समय में बालेन शाह के राजनीतिक भविष्य का सबसे बड़ा पैमाना बनेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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शिवराज सिंह चौहान

2029 में बदल सकता है Election System! शिवराज सिंह चौहान बोले- 2034 तक इंतजार जरूरी नहीं

One Nation One Election को लेकर देश की राजनीति में फिर से चर्चा तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के एक बयान ने इस मुद्दे को नई हवा दे दी है। चौहान ने कहा है कि देश को एक साथ चुनाव की व्यवस्था के लिए 2034 तक इंतजार करने की जरूरत नहीं है, इसे 2029 में ही लागू किया जा सकता है। उनके इस बयान के बाद अब सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की है कि क्या 2029 Lok Sabha Election के साथ देश में विधानसभा चुनाव भी एक साथ कराए जा सकते हैं। क्या 2029 में बदल जाएगा Election System? One Nation One Election का मतलब लोकसभा और राज्यों की विधानसभा के चुनाव एक साथ कराना है। इसका मकसद देश में बार-बार होने वाले चुनावों की प्रक्रिया को कम करना और एक तय चुनावी चक्र तैयार करना है। शिवराज सिंह चौहान के बयान ने इस संभावना को लेकर राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है। हालांकि, इसे लागू करने के लिए कई संवैधानिक और कानूनी बदलाव जरूरी होंगे। इसलिए अंतिम फैसला संसद की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा। One Nation One Election पर JPC कर रही विचार इस प्रस्ताव से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर Joint Parliamentary Committee (JPC) विचार कर रही है। समिति में इस व्यवस्था के फायदे, चुनौतियां और संभावित कानूनी प्रावधानों पर चर्चा हो रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर किसी राज्य में सरकार अपना कार्यकाल पूरा करने से पहले गिर जाती है या विधानसभा भंग हो जाती है, तो एक साथ चुनाव की व्यवस्था कैसे बनी रहेगी। इसी तरह लोकसभा की स्थिति को लेकर भी स्पष्ट नियम बनाने होंगे। सरकार के मुताबिक क्या होगा फायदा? One Nation One Election के समर्थकों का मानना है कि बार-बार चुनाव कराने से सरकारी संसाधनों और प्रशासनिक व्यवस्था पर दबाव पड़ता है। चुनाव के दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारियों और सुरक्षा बलों की तैनाती करनी पड़ती है। इसके अलावा Model Code of Conduct लागू होने के कारण कई नए सरकारी फैसलों और योजनाओं की घोषणा पर भी रोक लग जाती है। समर्थकों का कहना है कि चुनावों को एक साथ कराने से प्रशासन को लंबे समय तक विकास कार्यों पर ध्यान देने का मौका मिल सकता है। भारत में पहले हो चुके हैं Simultaneous Elections भारत में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने का प्रयोग पहले भी हो चुका है। आजादी के बाद शुरुआती चुनावों में लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ होते थे। 1952, 1957, 1962 और 1967 में देश में बड़े पैमाने पर चुनाव एक साथ हुए थे। बाद में कुछ राज्यों की विधानसभाएं समय से पहले भंग हुईं और धीरे-धीरे लोकसभा तथा विधानसभा चुनावों का चक्र अलग होता चला गया। विपक्ष की क्या है चिंता? One Nation One Election को लेकर विपक्षी दलों की अपनी चिंताएं हैं। उनका कहना है कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने से राज्य स्तर के मुद्दों और क्षेत्रीय दलों को नुकसान हो सकता है। विपक्ष की ओर से संघीय ढांचे को लेकर भी सवाल उठाए जाते रहे हैं। उनका तर्क है कि केंद्र और राज्य के चुनावों में मतदाताओं के सामने अलग-अलग मुद्दे होते हैं, इसलिए दोनों चुनावों को एक साथ कराना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकता है। अब 2029 पर रहेगी नजर फिलहाल One Nation One Election को लेकर अंतिम फैसला अभी बाकी है। कानून में बदलाव और संविधान संशोधन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह साफ होगा कि इसे किस समय से लागू किया जा सकता है। लेकिन शिवराज सिंह चौहान के 2029 वाले बयान ने चुनावी राजनीति में नई बहस जरूर छेड़ दी है। अगर जरूरी कानूनी प्रक्रिया समय पर पूरी हो जाती है, तो 2029 का लोकसभा चुनाव भारत की चुनावी व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। यानी अभी सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि One Nation One Election कब लागू होगा, बल्कि असली चर्चा अब इस बात पर है कि क्या देश 2034 से पहले ही यानी 2029 में एक साथ चुनाव की ओर कदम बढ़ा देगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Yogi

Yogi vs Congress: अयोध्या में Fish Feast पर घमासान, अजय राय ने मांगा सबूत

अयोध्या में कांग्रेस नेता अजय राय के दौरे के बाद शुरू हुआ Fish Feast विवाद अब उत्तर प्रदेश की सियासत में बड़ा मुद्दा बन गया है। सावन के बीच अयोध्या में मछली भोज की खबर सामने आने के बाद बीजेपी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। CM Yogi ने अजय राय के साथ-साथ राहुल गांधी को भी निशाने पर लिया, जबकि कांग्रेस नेता ने आरोपों पर सबूत मांगा है। हनुमानगढ़ी में दर्शन, फिर Fish Feast पर विवाद अजय राय अयोध्या पहुंचे थे। यहां उन्होंने हनुमानगढ़ी में दर्शन किए। उनके दौरे के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों की ओर से स्वागत कार्यक्रम भी रखा गया। इसी कार्यक्रम से कथित तौर पर जुड़े Fish Feast की खबर सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद शुरू हो गया। बीजेपी नेताओं और संतों ने सवाल उठाया कि धार्मिक नगरी अयोध्या में सावन के दौरान इस तरह का आयोजन क्यों किया गया। मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक इस पर खूब चर्चा होने लगी। योगी आदित्यनाथ का कांग्रेस पर हमला विवाद के बीच CM Yogi ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने अजय राय के अयोध्या दौरे और कथित मछली भोज को लेकर सवाल खड़े किए। Yogi ने कहा कि अगर किसी को मछली खानी थी तो अयोध्या से बाहर जाकर खा सकता था। उनके बयान के बाद यह मुद्दा और गरमा गया। मुख्यमंत्री ने इसी दौरान कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने राहुल गांधी पर देश की विरासत और सनातन परंपराओं को लेकर आपत्तिजनक राजनीति करने का आरोप लगाया। योगी ने राहुल गांधी पर कथित रूप से ‘अर्बन नक्सली’ सोच से प्रभावित होने का भी आरोप लगाया। अजय राय का पलटवार- तस्वीर दिखाइए योगी के आरोपों के बाद अजय राय ने भी जवाब दिया। कांग्रेस नेता ने कहा कि यदि उनके खिलाफ मछली भोज में शामिल होने का आरोप लगाया जा रहा है तो इसका प्रमाण सामने रखा जाए। अजय राय ने चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनकी ऐसी तस्वीर सामने आती है, जिसमें वह मछली भोज करते नजर आएं, तो वह इस्तीफा देने तक को तैयार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना ठोस सबूत के उनके खिलाफ राजनीतिक माहौल बनाया जा रहा है। BJP और Congress में बढ़ी बयानबाजी अयोध्या का यह मामला अब सिर्फ एक कार्यक्रम या भोजन तक सीमित नहीं है। बीजेपी इसे धार्मिक भावनाओं से जोड़कर कांग्रेस पर हमला कर रही है, जबकि कांग्रेस आरोपों के सबूत मांग रही है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, अयोध्या जैसे संवेदनशील और धार्मिक शहर से जुड़ा मामला होने के कारण इस विवाद का राजनीतिक असर सामान्य विवादों की तुलना में ज्यादा हो सकता है। क्या है पूरा विवाद? दरअसल, अजय राय के अयोध्या दौरे के दौरान उनके स्वागत कार्यक्रम और कथित मछली भोज को लेकर विवाद शुरू हुआ। बीजेपी ने इसे मुद्दा बनाकर कांग्रेस पर निशाना साधा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस मामले पर बयान दिया। दूसरी ओर, अजय राय ने खुद मछली भोज में शामिल होने के आरोप को चुनौती देते हुए सबूत सार्वजनिक करने की मांग की है। ऐसे में विवाद के केंद्र में यही सवाल है कि कार्यक्रम में वास्तव में क्या हुआ और उसमें अजय राय की भूमिका क्या थी। फिलहाल अयोध्या का यह Fish Feast विवाद यूपी की राजनीति में चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है। बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Tamil Nadu

Tamil Nadu Government का बड़ा ऐलान: महिलाओं की Free यात्रा, परिवारों को मिलेंगे 3 मुफ्त LPG Cylinder

तमिलनाडु (Tamil Nadu) में महिलाओं और आम परिवारों के लिए सरकार ने बड़ी राहत का ऐलान किया है। विधानसभा में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने ऐसी कई योजनाओं की घोषणा की, जिनका सीधा असर लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और घरेलू बजट पर पड़ सकता है। इनमें महिलाओं के लिए Free Bus Travel और पात्र परिवारों को हर साल 3 Free LPG Cylinder देने की योजना सबसे ज्यादा चर्चा में है। सरकार के मुताबिक, मुफ्त बस यात्रा का विस्तार 2 अक्टूबर 2026 से किया जाएगा, जबकि मुफ्त LPG सिलेंडर की योजना पोंगल 2027 से शुरू होने की बात कही गई है। 2 अक्टूबर से महिलाओं की Free Bus Travel सुविधा तमिलनाडु में महिलाओं के लिए पहले से चल रही मुफ्त बस यात्रा योजना का अब विस्तार किया जाएगा। सरकार ने इसे 2 अक्टूबर 2026 से लागू करने की घोषणा की है। इसका फायदा महिलाओं के साथ ट्रांसजेंडर यात्रियों को भी मिलने की बात कही गई है। योजना के तहत सरकारी परिवहन की कुछ अतिरिक्त बस सेवाओं को भी मुफ्त यात्रा के दायरे में लाया जाएगा। सबसे खास बात यह है कि इस सुविधा का लाभ लेने के लिए आय की सीमा नहीं होने की जानकारी सामने आई है। यानी पात्र श्रेणी में आने वाली महिलाओं को बार-बार यात्रा करने के लिए अलग से किराया नहीं देना होगा। सरकार का अनुमान है कि इस विस्तार पर हर साल करीब 6,000 करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं। हर साल मिलेंगे 3 Free LPG Cylinder तमिलनाडु सरकार ने महिलाओं और कम आय वाले परिवारों के लिए LPG को लेकर भी बड़ा ऐलान किया है। ‘अन्नापूरणी सुपर सिक्स’ योजना के तहत पात्र परिवारों को हर साल तीन मुफ्त LPG सिलेंडर देने की योजना बनाई गई है। यह योजना पोंगल 2027 से शुरू होने की जानकारी दी गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, सालाना 2.5 लाख रुपये से कम आय वाले परिवार इसके लिए पात्र हो सकते हैं। सरकार का अनुमान है कि इस योजना से करीब 1.30 करोड़ परिवारों को फायदा मिल सकता है। इसके लिए सालाना लगभग 4,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान बताया गया है। महिलाओं और परिवारों को क्या फायदा होगा? महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा सिर्फ किराये में बचत तक सीमित नहीं है। रोज नौकरी, पढ़ाई, इलाज या दूसरे जरूरी कामों के लिए सफर करने वाली महिलाओं के लिए यह सुविधा महीने के खर्च में अच्छी-खासी राहत दे सकती है। दूसरी ओर, LPG सिलेंडर पर मिलने वाली सहायता सीधे घरेलू बजट को प्रभावित करेगी। खासकर उन परिवारों के लिए, जहां रसोई गैस का खर्च हर महीने की जरूरतों में बड़ा हिस्सा होता है। यही वजह है कि सरकार की इन घोषणाओं को सिर्फ राजनीतिक ऐलान के बजाय महिलाओं और निम्न आय वाले परिवारों के लिए आर्थिक राहत के तौर पर भी देखा जा रहा है। योजनाओं को लेकर आगे क्या? फिलहाल इन घोषणाओं के बाद सबसे ज्यादा नजर इनके implementation और eligibility rules पर रहेगी। सरकार की ओर से विस्तृत दिशानिर्देश जारी होने के बाद यह साफ होगा कि लाभ लेने की प्रक्रिया क्या होगी और किन परिवारों को किस तरह शामिल किया जाएगा। फिलहाल इतना जरूर है कि 2 अक्टूबर से Free Bus Travel और पोंगल 2027 से 3 Free LPG Cylinder की घोषणा ने तमिलनाडु में कल्याणकारी योजनाओं को लेकर चर्चा तेज कर दी है। आम परिवारों के लिए अब नजर इस बात पर है कि ये घोषणाएं जमीन पर कितनी जल्दी और कितनी प्रभावी तरीके से लागू होती हैं।
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Madhepura

Madhepura Temple Incident: सिंहेश्वर मंदिर में बेकाबू हुई भीड़, महिला समेत 8 श्रद्धालु घायल

सावन की आखिरी सोमवारी पर भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए मधेपुरा (Madhepura) के प्रसिद्ध सिंहेश्वरनाथ मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी थी। भक्तों की संख्या बढ़ते-बढ़ते हालात ऐसे हो गए कि मंदिर परिसर में कुछ देर के लिए धक्का-मुक्की शुरू हो गई। बैरिकेडिंग पर भीड़ का दबाव पड़ने से कुछ लोग गिर पड़े और कई श्रद्धालु घायल हो गए। जलाभिषेक के लिए उमड़ी भारी भीड़ सावन के अंतिम सोमवार को शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ आम दिनों के मुकाबले काफी ज्यादा रहती है। सिंहेश्वरनाथ धाम में भी रात से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। सुबह होते-होते मंदिर के बाहर और परिसर में लंबी कतारें लग गईं। श्रद्धालु अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे, इसी दौरान भीड़ का दबाव बढ़ गया। आगे जाने की कोशिश में अचानक धक्का-मुक्की होने लगी। कुछ ही पलों में स्थिति बिगड़ती नजर आई और लोगों में अफरा-तफरी फैल गई। बैरिकेडिंग पर गिरी महिला, सिर में लगी चोट धक्का-मुक्की के दौरान बैरिकेडिंग का एक हिस्सा दबाव में आ गया। इसी दौरान एक महिला श्रद्धालु गिरकर बैरिकेडिंग से टकरा गई और उसके सिर में चोट लग गई। अन्य श्रद्धालुओं को भी चोटें आईं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इस घटना में करीब 8 लोग घायल हुए हैं। इनमें महिलाएं और बुजुर्ग श्रद्धालु भी शामिल बताए जा रहे हैं। भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश में ड्यूटी पर मौजूद एक पुलिसकर्मी के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है। पुलिस और प्रशासन ने संभाला मोर्चा घटना की सूचना मिलते ही सुरक्षाकर्मियों और पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश शुरू कर दी। लोगों को अलग-अलग कतारों में व्यवस्थित किया गया और अतिरिक्त सुरक्षा बल की मदद ली गई। घायल श्रद्धालुओं को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। कुछ देर की मशक्कत के बाद मंदिर परिसर में स्थिति सामान्य हुई और श्रद्धालुओं का जलाभिषेक फिर शुरू कराया गया। अंतिम सोमवारी के कारण पहले से थी भारी भीड़ सिंहेश्वरनाथ मंदिर में सावन की अंतिम सोमवारी को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान पहले से था। इसी वजह से प्रशासन की ओर से सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के इंतजाम किए गए थे। इसके बावजूद सुबह अचानक बढ़े भीड़ के दबाव से परेशानी पैदा हो गई। मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं का कहना था कि अंतिम सोमवारी होने के कारण भीड़ काफी ज्यादा थी। ऐसे में कतार को नियंत्रित रखना सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन गया। श्रद्धालुओं से धैर्य रखने की अपील घटना के बाद प्रशासन ने श्रद्धालुओं से जल्दबाजी और धक्का-मुक्की से बचने की अपील की। अधिकारियों का कहना है कि भीड़ को व्यवस्थित रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जा रही है। सावन की आखिरी सोमवारी पर पूजा के लिए उमड़ी इस भीड़ ने एक बार फिर बड़े धार्मिक आयोजनों में Crowd Management और सुरक्षा व्यवस्था की अहमियत सामने ला दी है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है और मंदिर में जलाभिषेक जारी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Monsoon

UP-MP Monsoon Alert: यूपी के 19 जिलों में Flood, काशी में चौकी डूबी; MP के 22 जिलों में Red Alert

मानसून (Monsoon) इस वक्त उत्तर प्रदेश से लेकर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ तक अपना असर दिखा रहा है। कई इलाकों में लगातार बारिश के बाद नदियों का जलस्तर बढ़ गया है और निचले क्षेत्रों में पानी भरने लगा है। UP के 19 जिलों में बाढ़ जैसे हालात हैं, वहीं वाराणसी में गंगा का पानी बढ़ने से पुलिस चौकी तक प्रभावित हुई है। मध्य प्रदेश में भी मौसम विभाग ने 22 जिलों में भारी बारिश का Alert जारी किया है। छत्तीसगढ़ में बारिश के बीच आकाशीय बिजली गिरने से एक महिला की जान चली गई। UP में 19 जिले बाढ़ की चपेट में उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में पिछले दिनों हुई लगातार बारिश ने हालात मुश्किल कर दिए हैं। नदियों के बढ़ते जलस्तर का असर गांवों और शहरों के निचले इलाकों में दिखाई दे रहा है। कई जगह लोगों को जलभराव और बाढ़ के पानी के बीच रोजमर्रा के काम करने पड़ रहे हैं। प्रशासन की टीमें प्रभावित इलाकों पर नजर बनाए हुए हैं। जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और राहत सामग्री उपलब्ध कराने की तैयारी भी की गई है। काशी में गंगा का जलस्तर बढ़ा, पुलिस चौकी डूबी वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ ही घाटों और आसपास के इलाकों में बाढ़ का असर दिखाई देने लगा है। पानी बढ़ने से एक पुलिस चौकी भी इसकी चपेट में आ गई। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। राहत शिविरों और बाढ़ चौकियों को तैयार रखा गया है। NDRF, SDRF, जल पुलिस और अन्य राहत एजेंसियों को भी जरूरत के मुताबिक तैनात किया जा रहा है। काशी में गंगा का बढ़ता पानी स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। खासकर नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। MP के 22 जिलों में Heavy Rain का Alert मध्य प्रदेश में भी बारिश का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। मौसम विभाग ने 22 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। कई जिलों में तेज बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं की स्थिति बन सकती है। नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, नरसिंहपुर, दमोह, सिवनी, जबलपुर, विदिशा, सागर, रायसेन और मंडला समेत कई जिलों में मौसम खराब रहने का अनुमान है। लगातार बारिश के कारण नदी-नालों का जलस्तर बढ़ सकता है। ऐसे में निचले इलाकों और जलभराव वाले रास्तों पर लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। छत्तीसगढ़ में बिजली गिरने से महिला की मौत छत्तीसगढ़ में बारिश के साथ आकाशीय बिजली भी लोगों के लिए खतरा बनी हुई है। बारिश के दौरान खेत से लौट रही एक महिला पर बिजली गिरने की घटना सामने आई, जिसमें उसकी मौत हो गई। इस घटना ने एक बार फिर मानसून के दौरान Lightning Safety को लेकर चिंता बढ़ा दी है। मौसम खराब होने पर खुले मैदान, खेत और पेड़ के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी जाती है। Weather Alert: अगले कुछ दिन भी महत्वपूर्ण मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक उत्तर और मध्य भारत के कई हिस्सों में बारिश का सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है। UP, MP और छत्तीसगढ़ के साथ दूसरे राज्यों में भी कहीं भारी तो कहीं बहुत भारी बारिश देखने को मिल सकती है। ऐसे में प्रशासन के साथ आम लोगों की सतर्कता भी बेहद जरूरी है। नदी और नालों के आसपास जाने से बचना, जलभराव वाले रास्तों पर सावधानी रखना और मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखना जरूरी है। UP से MP तक बारिश ने बढ़ाई चिंता फिलहाल तस्वीर साफ है—UP में बाढ़, MP में Heavy Rain Alert और छत्तीसगढ़ में Lightning Incident ने मानसून की गंभीरता को सामने ला दिया है। आने वाले दिनों में बारिश का रुख क्या रहता है, इस पर प्रशासन और लोगों दोनों की नजर बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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NICU

Maharashtra Hospital Fire: अमरावती में NICU बना आग का शिकार, 3 नवजातों की मौत

महाराष्ट्र के अमरावती से सोमवार सुबह एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आई। जिला महिला अस्पताल के NICU/नवजात यूनिट में अचानक आग लगने से तीन नवजात बच्चों की मौत हो गई। हादसे के समय यूनिट में कुल 39 बच्चे भर्ती थे। आग की खबर फैलते ही अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई और डॉक्टरों व मेडिकल स्टाफ ने बच्चों को सुरक्षित निकालने के लिए तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। सुबह तड़के NICU में भड़की आग जानकारी के मुताबिक, अस्पताल की तीसरी मंजिल पर स्थित नवजात यूनिट में सुबह करीब 3:30 बजे आग लगी। शुरुआती जानकारी में आग एक ventilator में धमाके या तकनीकी खराबी के बाद लगने की बात सामने आई है। हालांकि, आग की वास्तविक वजह अभी जांच के बाद ही साफ हो पाएगी। आग लगते ही यूनिट में धुआं फैल गया। उस समय वहां कई नवजात बच्चे इलाज और निगरानी में थे। ऐसी स्थिति में मेडिकल स्टाफ के सामने सबसे बड़ी चुनौती बच्चों को जल्द से जल्द सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की थी। 39 में से 36 बच्चों को सुरक्षित निकाला आग की सूचना मिलते ही अस्पताल के डॉक्टर, नर्स और अन्य कर्मचारी हरकत में आ गए। स्टाफ ने बिना समय गंवाए बच्चों को यूनिट से बाहर निकालना शुरू किया। रिपोर्ट के अनुसार, 39 में से 36 नवजातों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया। कुछ बच्चों की हालत गंभीर बताई गई, जिसके बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में शिफ्ट किया गया। अस्पताल प्रशासन की ओर से प्रभावित बच्चों की लगातार निगरानी की जा रही है। तीन नवजातों की मौत से परिवारों में मातम हादसे में तीन नवजातों की जान चली गई। जिन परिवारों के बच्चे इस हादसे का शिकार हुए, उनके लिए यह पल बेहद मुश्किल है। अस्पताल परिसर में परिजनों की चिंता और दुख का माहौल देखने को मिला। Ventilator Explosion की बात, जांच जारी प्रारंभिक रिपोर्टों में वेंटिलेटर में धमाके को आग की संभावित वजह बताया जा रहा है। हालांकि, इसे अभी अंतिम कारण नहीं माना जा सकता। प्रशासन की जांच के बाद ही पता चलेगा कि आग मेडिकल उपकरण में तकनीकी खराबी के कारण लगी या इसके पीछे कोई दूसरी वजह थी। जांच में अस्पताल की Fire Safety व्यवस्था, मेडिकल उपकरणों की स्थिति और सुरक्षा प्रोटोकॉल समेत कई पहलुओं को देखा जा सकता है। Hospital Fire Safety पर फिर उठे सवाल अमरावती की घटना ने अस्पतालों, खासकर NICU जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में Fire Safety को लेकर चिंता बढ़ा दी है। नवजात बच्चों को अत्यधिक संवेदनशील स्थिति में रखा जाता है और वहां इस्तेमाल होने वाले वेंटिलेटर, वार्मर समेत दूसरे उपकरणों की सुरक्षा बेहद अहम होती है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आग कैसे लगी और क्या समय रहते इसे रोकने या नियंत्रित करने के लिए सभी जरूरी इंतजाम मौजूद थे। जांच पूरी होने के बाद ही हादसे की पूरी तस्वीर सामने आएगी। Amravati Hospital Fire ने कई परिवारों को गहरा सदमा दिया है। तीन नवजातों की मौत के बाद अब अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और घटना की वजह को लेकर जांच के नतीजों का इंतजार है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Satish Mahana

Satish Mahana Viral Video ने बढ़ाया विवाद, राष्ट्रगान को लेकर आयोजकों ने दी ये सफाई

उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना (Satish Mahana) से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि राष्ट्रगान के दौरान महाना कार्यक्रम स्थल से निकलकर अपनी कार में बैठकर चले गए। वीडियो सामने आते ही राजनीतिक हलकों में भी इसको लेकर सवाल उठने लगे। हालांकि, इस पूरे विवाद की तस्वीर सिर्फ वायरल वीडियो तक सीमित नहीं है। कार्यक्रम के आयोजकों ने सामने आकर अलग जानकारी दी है। उनका कहना है कि जिस जगह महाना मौजूद थे, वहां राष्ट्रगान नहीं बज रहा था। राष्ट्रगान मुख्य सभागार में चल रहा था और उसकी आवाज बाहर तक सुनाई दे रही थी। Viral Video में क्या दिखाई दे रहा है? वायरल वीडियो में सतीश महाना मंच से नीचे उतरते और फिर अपनी कार की तरफ जाते नजर आते हैं। इसी दौरान राष्ट्रगान की आवाज सुनाई देती है। वीडियो के आधार पर सोशल मीडिया पर यह सवाल उठाया गया कि क्या महाना राष्ट्रगान पूरा होने से पहले ही कार्यक्रम से चले गए थे। यही वीडियो अब राजनीतिक बहस का कारण बन गया है। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को लेकर बीजेपी और विधानसभा अध्यक्ष पर सवाल खड़े किए हैं। आयोजकों ने बताई पूरी कहानी विवाद बढ़ने के बाद कार्यक्रम के आयोजक वेणु रंजन भदौरिया ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो को देखकर गलत धारणा बन रही है। उनके मुताबिक, महाना को जहां गार्ड ऑफ ऑनर दिया जा रहा था, वह जगह मुख्य ऑडिटोरियम से अलग थी। आयोजक का कहना है कि राष्ट्रगान ऑडिटोरियम के अंदर बजाया जा रहा था, जबकि बाहर खड़े लोगों तक उसकी आवाज पहुंच रही थी। इसलिए वीडियो में राष्ट्रगान सुनाई देने के बावजूद यह जरूरी नहीं कि महाना उसी स्थान पर राष्ट्रगान के सामने खड़े थे। Satish Mahana ने भी रखा अपना पक्ष सतीश महाना की ओर से भी मामले पर सफाई सामने आई। उनका कहना है कि उन्होंने राष्ट्रगान के दौरान सम्मान में सलामी दी थी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रगान जिस स्थान पर बजाया जा रहा था, वह उनकी मौजूदगी वाली जगह से अलग था। महाना ने वायरल वीडियो को लेकर उठ रहे सवालों पर नाराजगी भी जताई। उनके मुताबिक, पूरे मामले को जिस तरह सोशल मीडिया पर पेश किया जा रहा है, उससे वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं होती। Opposition ने साधा निशाना वीडियो वायरल होने के बाद कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर सतीश महाना पर निशाना साधा। विपक्ष का कहना है कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से राष्ट्रगान के दौरान विशेष सावधानी और सम्मान की अपेक्षा की जाती है। वहीं, दूसरी तरफ आयोजकों की सफाई और महाना के बयान के बाद इस मामले में एक दूसरा पक्ष भी सामने आया है। अब पूरा विवाद इस बात पर टिका है कि राष्ट्रगान वास्तव में किस स्थान पर बज रहा था और वायरल वीडियो किस परिस्थिति में रिकॉर्ड किया गया। सोशल मीडिया पर Viral हुआ मामला सतीश महाना का यह वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं तेजी से आने लगीं। कुछ लोग वीडियो के आधार पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि कुछ यूजर्स आयोजकों की सफाई को अहम मान रहे हैं। फिलहाल इस मामले में वायरल वीडियो, विपक्ष के आरोप और आयोजकों की सफाई—तीनों अलग-अलग दावे सामने हैं। ऐसे में बिना पूरी परिस्थिति जाने किसी एक निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sridhar Vembu

Drugs और Corruption पर सख्त कानून की जरूरत, Zoho Founder Sridhar Vembu का बड़ा बयान

तमिलनाडु में Corruption और Drugs को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। Zoho के फाउंडर Sridhar Vembu ने राज्य सरकार से इन दोनों समस्याओं पर सख्त रुख अपनाने की अपील की है। उन्होंने Singapore की कड़ी कानून व्यवस्था का उदाहरण देते हुए गंभीर अपराधों में सख्त सजा की जरूरत बताई। वेम्बू के बयान ने इसलिए भी ध्यान खींचा है क्योंकि उन्होंने केवल सजा बढ़ाने की बात नहीं की, बल्कि भ्रष्टाचार रोकने के लिए सरकारी व्यवस्था में कुछ दूसरे बदलावों का सुझाव भी दिया है। Singapore जैसा सख्त कानून क्यों? Sridhar Vembu का मानना है कि भ्रष्टाचार और ड्रग्स जैसी समस्याओं से निपटने के लिए कानून का डर और उसका प्रभावी इस्तेमाल दोनों जरूरी हैं। उन्होंने Singapore और Malaysia की anti-drug policies का उदाहरण देते हुए कहा है कि भारत को भी दूसरे देशों के सफल मॉडल से सीख लेनी चाहिए। उनकी राय में गंभीर मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान अपराधियों के लिए बड़ा deterrent बन सकता है। हालांकि, किसी भी ऐसे कानून को लागू करने से पहले कानूनी प्रक्रिया और मौजूदा भारतीय कानूनों को ध्यान में रखना जरूरी होगा। Drugs को लेकर पहले भी चिंता जता चुके हैं Vembu यह पहली बार नहीं है जब Sridhar Vembu ने तमिलनाडु में Drugs की समस्या को लेकर चिंता जाहिर की हो। इससे पहले भी वह ग्रामीण इलाकों तक नशीले पदार्थों की पहुंच को लेकर अपनी चिंता सामने रख चुके हैं। उन्होंने युवाओं और स्कूली बच्चों को नशे से दूर रखने की जरूरत पर जोर दिया था। उनका कहना रहा है कि केवल पुलिस कार्रवाई काफी नहीं है, बल्कि समाज और सरकार दोनों को मिलकर इस समस्या पर काम करना होगा। Corruption पर भी खुलकर बोले Sridhar Vembu तमिलनाडु में Corruption को लेकर भी मुखर रहे हैं। उन्होंने अपने स्कूल से जुड़े अनुभवों का हवाला देते हुए सरकारी मंजूरी की प्रक्रिया में कथित परेशानियों और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। इन बयानों के बाद तमिलनाडु की राजनीति में भी चर्चा शुरू हुई। हालांकि, ऐसे आरोपों को लेकर अलग-अलग पक्षों की अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं रही हैं और हर आरोप को स्वतंत्र रूप से साबित किया जाना जरूरी है। CM Vijay से क्या उम्मीद? वेम्बू का ताजा बयान ऐसे समय आया है जब तमिलनाडु में Drugs, Corruption और Law and Order जैसे मुद्दे राजनीतिक बहस का हिस्सा बने हुए हैं। उनका सुझाव है कि सरकार को केवल कार्रवाई के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय ऐसी व्यवस्था तैयार करनी चाहिए, जिससे अपराध और भ्रष्टाचार को शुरुआत में ही रोका जा सके। यह भी साफ करना जरूरी है कि Sridhar Vembu की मांग को सरकार के फैसले के तौर पर नहीं देखा जा सकता। यह उनकी ओर से दिया गया एक नीतिगत सुझाव है। तमिलनाडु सरकार की ओर से Singapore-style death penalty कानून लागू करने की कोई आधिकारिक घोषणा इससे साबित नहीं होती। सख्त सजा के साथ सिस्टम में सुधार की बात Vembu की बात का एक दूसरा पहलू भी है। उनका मानना है कि भ्रष्टाचार रोकने के लिए केवल सजा बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। सरकारी अधिकारियों की जिम्मेदारी, पारदर्शिता, बेहतर वेतन और जवाबदेही जैसे मुद्दों पर भी काम करना होगा। यानी उनका फोकस सिर्फ “कड़ी सजा” पर नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाने पर है जिसमें भ्रष्टाचार करने की गुंजाइश ही कम हो।
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Ganeshotsav

Ganeshotsav से पहले Mumbai में बड़ा हादसा, 22 फीट की प्रतिमा गिरी; 2 की मौत

मुंबई में गणेशोत्सव (Ganeshotsav) की तैयारियों के बीच एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को हिला दिया। भुलेश्वर इलाके में गणेश प्रतिमा के आगमन के दौरान करीब 22 फीट ऊंची मूर्ति अचानक गिर गई। हादसे में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच लोग घायल हुए हैं। घायलों में दो बच्चियां भी शामिल हैं। घटना शनिवार रात की बताई जा रही है। प्रतिमा को पंडाल की ओर ले जाया जा रहा था और वहां मौजूद लोग गणपति बप्पा के स्वागत की तैयारियों में जुटे थे। इसी दौरान अचानक प्रतिमा का सपोर्ट टूट गया और भारी मूर्ति नीचे जा गिरी। देखते ही देखते मौके पर अफरा-तफरी मच गई। कैसे हुआ Mumbai Ganesh Idol Accident? जानकारी के मुताबिक, हादसा भुलेश्वर के डॉ. आत्माराम मर्चेंट रोड, कबूतरखाना और जय अंबे चौक के आसपास हुआ। गणेश प्रतिमा को एक विशेष फ्रेम और सपोर्ट के सहारे ले जाया जा रहा था। इसी दौरान सपोर्ट सिस्टम में गड़बड़ी आने के बाद प्रतिमा का संतुलन बिगड़ गया। प्रारंभिक जानकारी में वेल्डिंग सपोर्ट टूटने की बात सामने आई है। हालांकि फ्रेम के नट-बोल्ट और तकनीकी मजबूती को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हादसे की असली वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। हादसे में 2 लोगों की मौत, 5 घायल प्रतिमा गिरने से वहां मौजूद कई लोग उसकी चपेट में आ गए। हादसे में दो लोगों की जान चली गई, जबकि पांच लोग घायल बताए जा रहे हैं। घायलों में दो बच्चियां भी हैं, जिनकी उम्र करीब पांच और सात साल बताई गई है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, फायर ब्रिगेड और राहत टीम मौके पर पहुंची। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। राहत और बचाव के दौरान इलाके में काफी देर तक लोगों की भीड़ जमा रही। तीन हिस्सों में टूट गई विशाल प्रतिमा करीब 22 फीट ऊंची गणेश प्रतिमा गिरने के बाद तीन हिस्सों में टूट गई। इतनी बड़ी प्रतिमा को अचानक गिरते देखकर मौके पर मौजूद लोगों में दहशत फैल गई। गणपति के आगमन की खुशी का माहौल कुछ ही पल में मातम में बदल गया। पुलिस ने मामले में Accidental Death Report (ADR) दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हादसे के पीछे तकनीकी लापरवाही या सपोर्ट सिस्टम में कमी थी या नहीं, इसकी जांच की जा रही है। Ganeshotsav से पहले Safety पर बड़ा सवाल मुंबई में गणेशोत्सव के दौरान बड़ी-बड़ी प्रतिमाओं का आगमन और विसर्जन जुलूस आकर्षण का केंद्र रहता है। ऐसे आयोजनों में भारी प्रतिमाओं को क्रेन, ट्रॉली और विशेष फ्रेम के जरिए ले जाया जाता है। भुलेश्वर की घटना ने इन व्यवस्थाओं की Safety को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों और आयोजकों के लिए यह घटना एक सबक भी है कि विशाल प्रतिमाओं को ले जाने से पहले उनके फ्रेम, वेल्डिंग, सपोर्ट और परिवहन व्यवस्था की अच्छी तरह जांच होनी चाहिए। इसके साथ ही भीड़ को सुरक्षित दूरी पर रखना भी बेहद जरूरी है। खुशी के मौके पर छाया मातम गणेशोत्सव को लेकर मुंबई में हर साल लोगों में खास उत्साह रहता है। भुलेश्वर में भी लोग गणपति बप्पा के आगमन की तैयारी में जुटे थे, लेकिन अचानक हुए इस हादसे ने परिवारों को गहरे दुख में डाल दिया। फिलहाल पुलिस हादसे की पूरी परिस्थितियों की जांच कर रही है। जांच के बाद ही यह साफ होगा कि प्रतिमा का सपोर्ट आखिर क्यों टूटा और इतनी बड़ी दुर्घटना को रोका जा सकता था या नहीं। Mumbai Ganesh Idol Accident ने गणेशोत्सव से पहले सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक जरूरी सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—आस्था और उत्सव के साथ लोगों की सुरक्षा को सबसे ऊपर रखना कितना जरूरी है, यह हादसा इसकी गंभीर याद दिलाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर मोहम्मद यूनुस का विरोध, प्रदर्शनकारियों ने लगाए गंभीर आरोप; वीडियो वायरल

बांग्लादेश के पूर्व मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस को अमेरिका के न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर विरोध का सामना करना पड़ा। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में कुछ लोग उन्हें घेरकर नारे लगाते और सवाल पूछते नजर आ रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने यूनुस को ‘आतंकवादी’ कहा और बांग्लादेश में हिंसा तथा लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए। वीडियो के मुताबिक, विरोध कर रहे लोगों ने यूनुस से सवाल किया कि वह न्यूयॉर्क क्यों आए हैं और उन्हें वापस लौट जाना चाहिए। स्थिति को देखते हुए यूनुस और उनकी सहयोगी लामिया मोर्शेद को एयरपोर्ट के अंदर वापस ले जाया गया। प्रदर्शनकारियों ने लगाए हजारों मौतों और गिरफ्तारियों के आरोप प्रदर्शनकारियों ने मोहम्मद यूनुस पर बांग्लादेश में हजारों पुलिसकर्मियों की मौत के लिए जिम्मेदार होने का आरोप लगाया। उन्होंने देश में करीब दो लाख लोगों की गिरफ्तारी का दावा भी किया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है और विरोध करने वालों की पहचान भी स्पष्ट नहीं हुई है। बांग्लादेश के एक मीडिया संस्थान की रिपोर्ट में प्रदर्शनकारियों को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग का समर्थक बताया गया है। बांग्लादेश सरकार ने कार्रवाई की बात कही बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के सलाहकार जाहेद उर रहमान ने मंगलवार को कहा कि न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर मोहम्मद यूनुस का घेराव करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने इस घटना को ‘अवामी लीग का आतंक’ बताया। जाहेद ने विदेशों में रह रहे अवामी लीग के सदस्यों को चेतावनी भी दी। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किस कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। यूनुस के कार्यकाल में हिंसा और गिरफ्तारियों को लेकर विवाद शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद 8 अगस्त 2024 को मोहम्मद यूनुस ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार का नेतृत्व संभाला था। उनके कार्यकाल के दौरान देश में हिंसा, अल्पसंख्यकों पर हमलों और गिरफ्तारियों को लेकर सवाल उठते रहे। अवामी लीग ने आरोप लगाया था कि यूनुस सरकार ने उसके नेताओं और समर्थकों को निशाना बनाया। वहीं, मानवाधिकार संगठनों ने हिंसा और हिरासत में कथित दुर्व्यवहार के मामलों की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करने की मांग की थी। शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद करीब डेढ़ साल सत्ता में रहे यूनुस अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद मोहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार की कमान संभाली थी। इस दौरान उनकी सरकार और अवामी लीग के बीच राजनीतिक टकराव जारी रहा। बांग्लादेश के एक विशेष ट्रिब्यूनल ने 2025 में शेख हसीना की गैरमौजूदगी में मुकदमा चलाने के बाद उन्हें मौत की सजा सुनाई थी। यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाया गया और भारत से शेख हसीना को बांग्लादेश प्रत्यर्पित करने की मांग भी की गई।

Apple ने लॉन्च किया HomeView स्मार्ट डिस्प्ले, ₹39,900 से शुरू कीमत; HomePod Mini 2 और नए Apple TV 4K से भी उठा पर्दा

Apple ने स्मार्ट होम बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए नया स्मार्ट डिस्प्ले ‘HomeView’ लॉन्च किया है। इसकी शुरुआती कीमत ₹39,900 बताई गई है। न्यूयॉर्क में आयोजित ‘Welcome Home’ इवेंट में कंपनी ने HomePod Mini 2 और नए Apple TV 4K समेत कई स्मार्ट होम डिवाइस भी पेश किए। इन गैजेट्स में होम ऑटोमेशन, एंटरटेनमेंट, सिक्योरिटी और AI से जुड़े फीचर्स दिए गए हैं। कंपनी का लक्ष्य Amazon और Google जैसी कंपनियों के साथ स्मार्ट होम बाजार में अपनी जगह मजबूत करना है। दी गई जानकारी के मुताबिक, HomeView और Apple TV 4K की एडवांस बुकिंग शुरू हो गई है। इनकी डिलीवरी 13 नवंबर से मिलने की बात कही गई है, जबकि HomePod Mini 2 की डिलीवरी 30 अक्टूबर से शुरू होगी। HomeView: 7 इंच की स्क्रीन, वीडियो कॉल और स्मार्ट होम कंट्रोल Apple HomeView इस नए कलेक्शन का प्रमुख डिवाइस है। इसमें नीचे स्पीकर और ऊपर 7 इंच की टचस्क्रीन दी गई है। इसे टेबल पर रखा जा सकता है या दीवार पर लगाया जा सकता है। इसमें A18 प्रोसेसर दिया गया है। इसकी मदद से यूजर घर की लाइट और पंखे नियंत्रित करने, वीडियो कॉल करने, गाने सुनने और फिल्में देखने जैसे काम कर सकेंगे। Apple HomeView के प्रमुख फीचर्स HomePod Mini 2: गानों के साथ बदलेगी लाइट Apple ने HomePod Mini 2 स्मार्ट स्पीकर भी पेश किया है। इसमें S10 प्रोसेसर और ‘Sound Glow’ नाम की लाइटिंग सुविधा दी गई है। बताया गया है कि म्यूजिक के हिसाब से स्पीकर की लाइटों के रंग बदलेंगे। इसकी कीमत ₹18,900 रखी गई है। यह गुलाबी, नीले, हरे, सफेद और मिडनाइट कलर में उपलब्ध होगा। कंपनी के मुताबिक, नए प्रोसेसर से कनेक्टिविटी और डिवाइस के प्रदर्शन में सुधार होगा। नया Apple TV 4K: आवाज से कंट्रोल करने की सुविधा नया Apple TV 4K टीवी देखने के अनुभव को अधिक सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से पेश किया गया है। दी गई जानकारी के अनुसार, इसमें दूर से आवाज पहचानने वाले माइक्रोफोन हैं, जिनकी मदद से यूजर बिना रिमोट उठाए वॉइस कमांड से फिल्म या शो चला सकेंगे। अगर रिमोट खो जाए, तो iPhone के Find My फीचर की मदद से उसकी लोकेशन पता करने की सुविधा भी दी गई है। Apple HomePod स्पीकर्स के साथ इस्तेमाल करने पर यह ऑडियो सेटिंग्स को उनके अनुरूप समायोजित कर बेहतर साउंड अनुभव देने में मदद कर सकता है। हालांकि, Apple TV 4K की भारत में कीमत की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं बताई गई है। स्मार्ट होम बाजार में Apple की नई पहल HomeView, HomePod Mini 2 और Apple TV 4K के जरिए Apple घर के अलग-अलग स्मार्ट डिवाइस को एक ही इकोसिस्टम से जोड़ने पर जोर दे रहा है। होम ऑटोमेशन, सिक्योरिटी और AI सुविधाओं के मेल से कंपनी Amazon और Google के साथ प्रतिस्पर्धा बढ़ाना चाहती है।

कॉकरोच जनता पार्टी के आशुतोष रांका और सौरव दास तिहाड़ जेल भेजे गए, अजिंक्य शिंदे को मिली जमानत

दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के तीन सदस्यों के मामले में अदालत ने फैसला सुनाया है। स्पेशल कोर्ट ने आशुतोष रांका और सौरव दास को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया, जबकि अजिंक्य शिंदे को निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया। जानकारी के मुताबिक, तीनों को मंगलवार सुबह जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। बाद में रात करीब 3 बजे उन्हें एहतियातन गिरफ्तार किया गया। बुधवार सुबह तीनों को स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया, जहां आशुतोष रांका और सौरव दास को न्यायिक हिरासत में भेजने का फैसला हुआ। राहुल गांधी ने गिरफ्तारी पर उठाए सवाल इस कार्रवाई को लेकर राहुल गांधी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराना कोई अपराध नहीं है। उन्होंने युवाओं को जेल भेजे जाने को कायरता बताया और कार्रवाई पर सवाल उठाए। किन आरोपों में हुई कार्रवाई? CJP की लीगल टीम की प्रमुख रत्ना सिंह के मुताबिक, तीनों के खिलाफ बिना अनुमति जंतर-मंतर में प्रवेश करने, बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने और सरकारी कामकाज में बाधा डालने के आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने बताया कि आशुतोष रांका और सौरव दास को इससे पहले 10 अक्टूबर को भी फ्लाइट से हिरासत में लिया गया था। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

एअर इंडिया की फ्रैंकफर्ट-दिल्ली फ्लाइट की जयपुर में इमरजेंसी लैंडिंग, हाईजैक अलर्ट से मचा हड़कंप

फ्रैंकफर्ट से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की फ्लाइट AI-2030 की बुधवार सुबह जयपुर एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। विमान को यह कदम उस समय उठाना पड़ा, जब अहमदाबाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को फ्लाइट से हाईजैक अलर्ट का सिग्नल मिला। हालांकि, शुरुआती जांच में सिस्टम की गड़बड़ी के कारण यह संदेश जनरेट होने की आशंका जताई गई है। जानकारी के मुताबिक, अहमदाबाद ATC से मिले अलर्ट को जयपुर ATC के साथ साझा किया गया। इसके करीब 45 मिनट बाद विमान को जयपुर में सुरक्षित उतारा गया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, हाईजैक अलर्ट के पीछे तकनीकी या सिस्टम संबंधी गलती हो सकती है। मामले में विस्तृत जांच की जानकारी सामने आना बाकी है। रात 9:45 बजे फ्रैंकफर्ट से भरी थी उड़ान फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट Flightradar24 के मुताबिक, विमान ने 13 अक्टूबर की रात 9:45 बजे फ्रैंकफर्ट से उड़ान भरी थी। इसे 14 अक्टूबर की सुबह 10:40 बजे दिल्ली पहुंचना था, लेकिन हाईजैक अलर्ट मिलने के बाद विमान को जयपुर की ओर डायवर्ट कर दिया गया। 30 सितंबर को फ्लाईदुबई की फ्लाइट में भी मिला था हाईजैक सिग्नल इससे पहले 30 सितंबर को इजराइल जा रही फ्लाईदुबई की एक फ्लाइट से भी हाईजैक कोड 7500 भेजे जाने की खबर सामने आई थी। उस घटना में पायलट द्वारा विमान को हाईजैक करने और क्रैश करने की कोशिश किए जाने का दावा किया गया था। बताया गया कि भारतीय को-पायलट कैप्टन स्मित मच्छर ने स्थिति को संभालते हुए विमान को नुकसान पहुंचाने की कोशिश नाकाम कर दी थी।
मां कूष्मांडा

Navratri 2026: चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा, जानें कथा, भोग और मंत्र

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं में उन्हें सृष्टि की रचनात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है। माना जाता है कि उनकी आराधना से भक्तों को उत्साह, सकारात्मकता और नई शुरुआत की प्रेरणा मिलती है। मां कूष्मांडा की पौराणिक कथा पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब चारों ओर अंधकार था, तब मां कूष्मांडा ने अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की। इसी कारण उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति के रूप में पूजा जाता है। यह कथा सृजन और ऊर्जा के महत्त्व को दर्शाती है। मां का स्वरूप और महत्त्व पूजा विधि मंत्र: ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः। भोग: मां को मालपुआ या मीठे फल अर्पित करने की परंपरा कुछ क्षेत्रों में प्रचलित है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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