देशभर में केमिस्ट्स की हड़ताल (Chemists Strike) का असर बुधवार को कई बड़े शहरों में साफ देखने को मिला। दिल्ली, लखनऊ, राजकोट और चंडीगढ़ समेत कई जगह मेडिकल स्टोर्स के बंद रहने से आम लोगों को दवाइयों के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा। सुबह से ही कई मरीज और उनके परिजन जरूरी दवाइयों की तलाश में परेशान नजर आए।
हालांकि कुछ जगहों पर अस्पतालों और इमरजेंसी सेवाओं को ध्यान में रखते हुए सीमित मेडिकल स्टोर्स खुले रहे, ताकि गंभीर मरीजों को दिक्कत न हो।
ऑनलाइन फार्मेसी के खिलाफ नाराजगी, क्यों हो रही है हड़ताल?
यह हड़ताल ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के आह्वान पर की गई। दवा व्यापारियों का कहना है कि ऑनलाइन फार्मेसी और क्विक डिलीवरी प्लेटफॉर्म बिना सख्त निगरानी के दवाइयां बेच रहे हैं, जिससे छोटे मेडिकल स्टोर कारोबार पर असर पड़ रहा है।
केमिस्ट संगठनों की मुख्य चिंता यह है कि दवाइयां “सामान्य प्रोडक्ट” की तरह बिक रही हैं, जबकि ये सीधे लोगों की सेहत से जुड़ी होती हैं।
Delhi NCR में सबसे ज्यादा असर, लोग परेशान
दिल्ली-एनसीआर में हड़ताल का असर काफी व्यापक रहा। कई इलाकों में मेडिकल स्टोर्स पूरी तरह बंद रहे। सुबह से ही लोग जरूरी दवाइयों के लिए दुकानें तलाशते रहे, लेकिन कई जगह निराशा हाथ लगी।
बुजुर्ग मरीजों और नियमित दवा लेने वालों को सबसे ज्यादा परेशानी हुई। कुछ इलाकों में अस्पतालों के आसपास की दुकानें खुली रहीं, ताकि इमरजेंसी सेवाएं बाधित न हों।
Lucknow में दवा खरीदने को लेकर लोगों की मुश्किलें
लखनऊ में भी हड़ताल का असर साफ दिखा। शहर के प्रमुख बाजारों और मेडिकल हब में कई दुकानें बंद रहीं। मरीज सुबह से दवा लेने पहुंचे लेकिन उन्हें बंद शटर देखकर वापस लौटना पड़ा।
कुछ मेडिकल स्टोर्स ने मानवता के आधार पर सीमित दवाइयां उपलब्ध कराईं, लेकिन सामान्य खरीदारी लगभग प्रभावित रही।
Rajkot में जोरदार विरोध, Online Pharmacy पर सवाल
गुजरात के राजकोट में दवा व्यापारियों ने ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियों के खिलाफ प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि भारी डिस्काउंट और आसान डिलीवरी मॉडल से पारंपरिक मेडिकल स्टोर्स का कारोबार प्रभावित हो रहा है।
साथ ही यह भी चिंता जताई गई कि बिना पर्ची के दवाइयों की उपलब्धता स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।
Chandigarh और Punjab में आंशिक असर
चंडीगढ़ और पंजाब के कई हिस्सों में मेडिकल स्टोर्स बंद रहे, लेकिन जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं पर असर नहीं पड़ा। PGI और GMCH-32 जैसे बड़े अस्पतालों के आसपास दवा व्यवस्था चालू रही।
प्रशासन ने लोगों से अपील की कि घबराने की जरूरत नहीं है, दवाइयों की सप्लाई सामान्य रखी गई है।
कई राज्यों में मिला-जुला असर, कुछ संगठनों ने बनाई दूरी
दिलचस्प बात यह रही कि कुछ राज्यों में केमिस्ट संगठनों ने हड़ताल से दूरी बना ली। ऐसे में वहां आंशिक असर ही देखने को मिला।
कई जगह बातचीत की संभावना भी जताई जा रही है, जिससे आने वाले दिनों में इस विवाद का हल निकल सकता है।
क्या है आगे की उम्मीद?
दवा व्यापारियों और सरकार के बीच ऑनलाइन फार्मेसी को लेकर बातचीत जारी है। आने वाले समय में इस पर नए नियम या गाइडलाइन आने की संभावना है।
केमिस्ट संगठनों की मांग है कि दवाइयों की बिक्री पर सख्त नियंत्रण हो और बिना पर्ची दवा बेचने पर रोक लगे, ताकि मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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