पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस (TMC) को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। राज्य की सत्ता हाथ से निकलने के बाद अब पार्टी के अंदर हलचल और असंतोष की खबरें सामने आने लगी हैं। हाल ही में हुए एक बड़े विरोध प्रदर्शन ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी, क्योंकि इस कार्यक्रम में पार्टी के केवल 35 विधायक ही नजर आए।
शक्ति प्रदर्शन में क्यों कम दिखे विधायक?
यह प्रदर्शन TMC के लिए सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि ताकत दिखाने का मौका माना जा रहा था। पार्टी नेतृत्व को उम्मीद थी कि बड़ी संख्या में विधायक और कार्यकर्ता सड़क पर उतरेंगे, लेकिन तस्वीर उम्मीद से बिल्कुल अलग दिखाई दी। कम मौजूदगी ने विपक्ष को हमला बोलने का मौका दे दिया।
विपक्ष ने क्या लगाए आरोप?
विपक्षी दलों ने दावा किया कि सत्ता जाने के बाद पार्टी के भीतर एकजुटता कमजोर पड़ती दिख रही है। कई नेताओं ने इसे TMC के अंदर बढ़ती नाराजगी और गुटबाजी से जोड़कर देखा। राजनीतिक जानकार भी मानते हैं कि लंबे समय तक सत्ता में रहने वाली किसी पार्टी के लिए हार के बाद संगठन को संभालना आसान नहीं होता।
TMC ने क्या दी सफाई?
हालांकि, TMC नेताओं ने इन अटकलों को खारिज किया है। पार्टी का कहना है कि कई विधायक अपने क्षेत्रों में पहले से तय कार्यक्रमों में व्यस्त थे, इसलिए वे प्रदर्शन में शामिल नहीं हो सके। लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस सफाई से ज्यादा चर्चा विधायकों की कम मौजूदगी की हो रही है।
आगे TMC के सामने क्या चुनौती?
Mamata Banerjee की अगुवाई वाली TMC अब ऐसे दौर में खड़ी है, जहां उसे सिर्फ विपक्ष से ही नहीं बल्कि संगठन को मजबूत बनाए रखने की चुनौती से भी जूझना पड़ रहा है। आने वाले दिनों में पार्टी किस तरह खुद को संभालती है, इस पर बंगाल की राजनीति की नजरें टिकी रहेंगी।
