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22 की उम्र में बनीं IPS, 28 में दिया इस्तीफा: बिहार की ‘लेडी सिंघम’ काम्या मिश्रा की पूरी कहानी

बिहार कैडर की तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी काम्या मिश्रा एक बार फिर सुर्खियों में हैं। मात्र 22 साल की उम्र में यूपीएससी परीक्षा पास कर आईपीएस बनीं काम्या ने अब 28 वर्ष की उम्र में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस फैसले ने न केवल प्रशासनिक हलकों बल्कि आम जनता के बीच भी हलचल मचा दी है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर क्यों एक काबिल और लोकप्रिय अधिकारी ने छह साल की सेवा के बाद पुलिस विभाग को अलविदा कह दिया? आइए जानते हैं उनकी पूरी कहानी। शुरुआत से लेकर आईपीएस बनने तक काम्या मिश्रा बिहार के एक प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक रखती हैं। शुरू से ही पढ़ाई में अव्वल रहने वाली काम्या ने बेहद कम उम्र में यूपीएससी परीक्षा पास कर देश की सबसे कठिन परीक्षा में अपना लोहा मनवाया। 22 साल की उम्र में जब ज्यादातर युवा अपने करियर की दिशा तय कर रहे होते हैं, तब उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में कदम रख लिया था। बिहार कैडर मिलने के बाद उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिलों में अपनी सेवाएं दीं। उनकी कार्यशैली, बेबाक अंदाज और निष्पक्ष रवैया लोगों के बीच काफी लोकप्रिय रहा। अपराधियों के खिलाफ उनकी सख्त कार्रवाई के चलते लोग उन्हें ‘लेडी सिंघम’ के नाम से बुलाने लगे। पुलिस सेवा में शानदार कार्यकाल काम्या मिश्रा ने बिहार के कई संवेदनशील जिलों में अपनी सेवाएं दीं। अपराध और भ्रष्टाचार पर उनकी कड़ी निगरानी ने उन्हें जनता के बीच खास पहचान दिलाई। महिला सुरक्षा को लेकर किए गए उनके प्रयासों की भी खूब सराहना हुई। उन्होंने कई जिलों में महिला हेल्पलाइन और स्पेशल टास्क फोर्स के जरिए महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर लगाम लगाने की कोशिश की। उनका नाम तब और ज्यादा चर्चा में आया जब उन्होंने संगठित अपराधियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। कई बार उनकी पोस्टिंग राजनीतिक दबाव में भी चर्चा का विषय बनी, लेकिन उन्होंने कभी भी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। आखिर क्यों दिया इस्तीफा? काम्या मिश्रा के अचानक इस्तीफे ने सभी को चौंका दिया। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने पिछले साल अगस्त में ही इस्तीफा देने का मन बना लिया था और इसकी वजह पारिवारिक कारण बताए जा रहे हैं। हालांकि, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स का कहना है कि काम्या मिश्रा प्रशासनिक व्यवस्था से संतुष्ट नहीं थीं और उनकी कार्यशैली को लेकर अक्सर राजनीतिक दबाव बनाया जाता था। हालांकि, उन्होंने खुद अभी तक अपने इस्तीफे की असली वजह सार्वजनिक रूप से नहीं बताई है। लेकिन यह तय है कि बिहार की ‘लेडी सिंघम’ के रूप में मशहूर काम्या मिश्रा का यह फैसला पुलिस सेवा के लिए एक बड़ी क्षति मानी जा रही है। आगे क्या करेंगी काम्या मिश्रा? काम्या मिश्रा के आगे की योजनाओं को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। कुछ लोगों का मानना है कि वे शिक्षा या सामाजिक सेवा के क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं, जबकि कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, वे निजी क्षेत्र में बड़ी जिम्मेदारी संभाल सकती हैं। बहरहाल, उनकी आगे की राह चाहे जो भी हो, लेकिन काम्या मिश्रा का नाम उन गिने-चुने अधिकारियों में शामिल रहेगा जिन्होंने ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के साथ अपनी सेवा दी। उनके फैसले को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है और जनता उनके भविष्य को लेकर उत्सुकता से इंतजार कर रही है। देश हरपल के लिए विशेष रिपोर्ट
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वक्फ संशोधन विधेयक 2025: आज लोकसभा में पेश होगा, NDA के समर्थन के बावजूद विपक्ष हमलावर

नई दिल्ली: लोकसभा में आज वक्फ संशोधन विधेयक 2025 पेश किया जाएगा। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू प्रश्नकाल के बाद दोपहर 12 बजे इसे सदन में चर्चा के लिए रखेंगे। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने इस बिल पर 8 घंटे की चर्चा का समय निर्धारित किया है, जिसमें से NDA को 4 घंटे 40 मिनट का समय मिलेगा, जबकि शेष समय विपक्ष को दिया गया है। TDP और JDU का समर्थन, सभी सांसदों को व्हिप जारी विधेयक को लेकर सत्ता पक्ष को बड़ी राहत मिली है, क्योंकि चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी (TDP) और नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने समर्थन देने की घोषणा कर दी है। इन दोनों दलों ने अपने सांसदों को सदन में उपस्थित रहने के लिए व्हिप भी जारी किया है। TDP और JDU के समर्थन के बाद NDA के पास सदन में विधेयक को पारित कराने की पर्याप्त संख्या बल है। विपक्ष हमलावर, चर्चा का समय बढ़ाने की मांग विपक्ष इस विधेयक के विरोध में एकजुट हो रहा है। मुख्य विपक्षी दलों के अलावा, कुछ तटस्थ मानी जाने वाली पार्टियां भी विरोध में आ गई हैं। इनमें तमिलनाडु की अन्नाद्रमुक (AIADMK), नवीन पटनायक की बीजू जनता दल (BJD) और के चंद्रशेखर राव की भारत राष्ट्र समिति (BRS) शामिल हैं। इन दलों ने भी I.N.D.I.A गठबंधन के दलों के साथ मिलकर विधेयक का विरोध करने का फैसला किया है। बिल पर अपनी रणनीति तय करने के लिए बीते दिन I.N.D.I.A ब्लॉक के नेताओं ने संसद भवन में बैठक की। विपक्ष का कहना है कि 8 घंटे का समय पर्याप्त नहीं है, इसलिए उन्होंने चर्चा का समय बढ़ाकर 12 घंटे करने की मांग की है। रिजिजू बोले- समय बढ़ाने पर विचार संभव इस मांग के जवाब में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार इस पर विचार कर सकती है। उन्होंने कहा,“देश भी जानना चाहता है कि किस पार्टी का क्या स्टैंड है। अगर विपक्ष को और समय चाहिए, तो हम इस पर विचार कर सकते हैं।” क्या है वक्फ संशोधन विधेयक 2025? वक्फ संपत्तियों से जुड़े प्रावधानों में बदलाव लाने के लिए यह विधेयक लाया जा रहा है। इस विधेयक को लेकर सरकार का कहना है कि इससे वक्फ संपत्तियों की पारदर्शिता बढ़ेगी और विवादों को सुलझाने की प्रक्रिया को स्पष्ट किया जाएगा। हालांकि, विपक्ष को इसमें कई आपत्तियां हैं और वे इसे संप्रदाय विशेष के खिलाफ बताया जा रहा है। क्या होगा आगे? आज लोकसभा में होने वाली चर्चा के दौरान इस पर तीखी बहस होने की संभावना है। जहां NDA के पास इस बिल को पारित कराने के लिए संख्याबल है, वहीं विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बनाने के मूड में है। अगर चर्चा का समय बढ़ाया जाता है, तो विपक्ष को अपनी बात रखने के लिए और अधिक अवसर मिलेंगे। अब देखना होगा कि सरकार और विपक्ष के बीच इस पर क्या समझौता होता है और विधेयक किन संशोधनों के साथ पारित होता है। देश हरपल के लिए रिपोर्टिंग 🚩
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Mod. Yunus

चिकन नेक कॉरिडोर पर यूनुस का बयान: ‘हम बांग्लादेश को तोड़कर समंदर तक अपना रास्ता बना सकते हैं…’, पूर्वोत्तर में भड़के विरोध के स्वर

नई दिल्ली। बांग्लादेश के नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के एक बयान ने भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में तीखी प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया है। यूनुस ने कथित तौर पर कहा कि अगर बांग्लादेश भारत के खिलाफ खड़ा हो जाए, तो वह समुद्र तक अपना रास्ता बना सकता है। यह टिप्पणी भारत के लिए रणनीतिक रूप से अहम चिकन नेक कॉरिडोर को लेकर की गई, जिसे देश के पूर्वोत्तर राज्यों को शेष भारत से जोड़ने वाली पतली ज़मीन की पट्टी माना जाता है। यूनुस का विवादित बयान और पृष्ठभूमि खबरों के मुताबिक, मोहम्मद यूनुस हाल ही में चीन की यात्रा पर थे, जहां उन्होंने कथित तौर पर बांग्लादेश को चीन के साथ मजबूत आर्थिक साझेदारी की जरूरत बताई। उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेश एक लैंडलॉक्ड (चारों ओर से भूमि से घिरा) देश नहीं है और अगर वह भारत से टकराने को तैयार हो, तो समुद्र तक अपनी पहुंच बना सकता है। यूनुस के इस बयान के बाद पूर्वोत्तर भारत के राजनीतिक और सामाजिक संगठनों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई नेताओं और संगठनों ने इसे भारत की अखंडता के खिलाफ खुली धमकी बताया है। क्या है चिकन नेक कॉरिडोर? चिकन नेक या सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत के लिए एक अत्यंत संवेदनशील भौगोलिक क्षेत्र है। यह सिर्फ 22 किलोमीटर चौड़ी भूमि पट्टी है, जो देश के पूर्वोत्तर राज्यों को बाकी भारत से जोड़ती है। चीन और बांग्लादेश की सीमा के बेहद करीब स्थित इस क्षेत्र को रणनीतिक और सैन्य दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील माना जाता है। यदि इस क्षेत्र पर किसी तरह का बाहरी खतरा उत्पन्न होता है, तो पूर्वोत्तर राज्यों का भारत से संपर्क कट सकता है। पूर्वोत्तर में भड़का गुस्सा यूनुस के बयान के बाद असम, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल के कई राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने विरोध जताया है। असम गण परिषद (AGP) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) के नेताओं ने इस बयान को पूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा के खिलाफ गंभीर खतरा बताया है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा,“भारत का कोई भी हिस्सा, खासकर पूर्वोत्तर, बाहरी ताकतों के लिए कभी कमजोर नहीं रहा। हम अपनी सीमाओं की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क हैं और कोई भी व्यक्ति या देश हमारी संप्रभुता को चुनौती नहीं दे सकता।” इसके अलावा, कई राष्ट्रवादी संगठनों और छात्र संघों ने भी यूनुस के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। भारत की सुरक्षा पर असर? विशेषज्ञों के अनुसार, यदि बांग्लादेश के भीतर ऐसी भावनाएं पनपती हैं, तो यह भारत-बांग्लादेश संबंधों को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, भारत और बांग्लादेश के रिश्ते अभी तक सकारात्मक रहे हैं और दोनों देशों के बीच व्यापारिक और कूटनीतिक संबंध मजबूत हैं। लेकिन इस तरह की बयानबाजी से पूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ सकती है। बांग्लादेश सरकार की प्रतिक्रिया अब तक बांग्लादेश सरकार की ओर से यूनुस के इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, बांग्लादेश के कई राजनीतिक विशेषज्ञों ने इस बयान को व्यक्तिगत विचार बताते हुए कहा कि यह सरकारी नीति का प्रतिनिधित्व नहीं करता। निष्कर्ष मोहम्मद यूनुस का यह बयान भारत के लिए सिर्फ एक राजनीतिक विवाद नहीं बल्कि एक रणनीतिक चेतावनी भी है। भारत के पूर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा और संप्रभुता को लेकर पहले से ही संवेदनशील माहौल में ऐसे बयान आग में घी डालने का काम कर सकते हैं। अब देखना होगा कि भारत सरकार और पूर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा एजेंसियां इस मामले पर क्या कदम उठाती हैं।
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BREAKING NEWS:वक्फ संशोधन बिल पर लोकसभा में कल 12 बजे होगी चर्चा: सरकार और विपक्ष आमने-सामने, बड़ा सियासी संग्राम तय

नई दिल्ली: वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और प्रशासन से जुड़े वक्फ संशोधन विधेयक (Waqf Amendment Bill) को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। यह विधेयक कल दोपहर 12 बजे लोकसभा में पेश किया जाएगा, जिस पर 8 घंटे की चर्चा निर्धारित की गई है। हालांकि, विपक्ष ने इस चर्चा को 12 घंटे तक बढ़ाने की मांग की है, जिससे यह साफ हो गया है कि इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच बड़ा टकराव हो सकता है। क्या है वक्फ संशोधन विधेयक? वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन भारत में वक्फ अधिनियम, 1995 के तहत किया जाता है। वक्फ बोर्ड मुस्लिम समुदाय की धार्मिक और सामाजिक संपत्तियों को नियंत्रित करता है। हालांकि, समय-समय पर इस अधिनियम को लेकर विवाद होते रहे हैं। नए संशोधन में क्या बदलाव किए जा रहे हैं? विपक्ष ने जताया कड़ा विरोध इस विधेयक को लेकर विपक्ष ने तीखा विरोध जताया है। समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे समुदाय के खिलाफ बताया और कहा,“सरकार बिना सभी पक्षों को सुने यह विधेयक लाना चाहती है, जो पूरी तरह अनुचित है। यह मुसलमानों की धार्मिक और सामाजिक संपत्तियों पर हमला है। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे और पूरी ताकत से इसका विरोध करेंगे।” कांग्रेस, टीएमसी और अन्य विपक्षी दलों ने भी विधेयक पर चर्चा का समय बढ़ाने की मांग की है। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा,“यह कानून देश के लाखों लोगों को प्रभावित करेगा, इसलिए इस पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए। केवल 8 घंटे की चर्चा काफी नहीं है।” योगी आदित्यनाथ का समर्थन, कहा- बदलाव समय की मांग उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस विधेयक का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने कहा,“देश में वक्फ संपत्तियों का सही उपयोग बहुत ज़रूरी है। यह संशोधन पारदर्शिता लाने और गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए किया जा रहा है।” योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि,“वक्फ संपत्तियों को लेकर वर्षों से विवाद और अनियमितताएं रही हैं। अगर कोई बदलाव किया जा रहा है, तो वह राष्ट्रहित और समाजहित में है।” विधेयक के समर्थक और विरोधी कौन? इस विधेयक को लेकर दो खेमे बन चुके हैं।✅ समर्थक (BJP, JDU, AIADMK) – इन दलों का कहना है कि यह विधेयक संपत्तियों का सही प्रबंधन सुनिश्चित करेगा और भ्रष्टाचार को रोकेगा।❌ विरोधी (SP, Congress, TMC, AIMIM, Left) – विपक्षी दलों का मानना है कि सरकार इस कानून के ज़रिए वक्फ संपत्तियों पर नियंत्रण करना चाहती है और अल्पसंख्यकों को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रही है। अब आगे क्या होगा? निष्कर्ष: वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर संसद में जबरदस्त हंगामा देखने को मिल सकता है। सरकार इसे भ्रष्टाचार रोकने वाला कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ साजिश करार दे रहा है। कल संसद में होने वाली बहस के बाद ही यह तय होगा कि यह विधेयक पास होगा या नहीं।
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क्या राणा सांगा ने बाबर को भारत आने का निमंत्रण दिया था? इतिहासकारों की राय और प्रमाण

देश हरपल एक्सक्लूसिव मुगल साम्राज्य के संस्थापक बाबर का भारत आगमन इतिहास के सबसे चर्चित विषयों में से एक है। एक लंबे समय से यह चर्चा होती रही है कि क्या मेवाड़ के राजा राणा सांगा ने वास्तव में बाबर को भारत पर आक्रमण करने के लिए आमंत्रित किया था या नहीं। इस सवाल का जवाब खोजने के लिए हमने कई प्रामाणिक ऐतिहासिक स्रोतों और इतिहासकारों की राय को खंगाला। क्या था ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य? 16वीं शताब्दी के प्रारंभ में उत्तर भारत छोटे-छोटे राज्यों में बंटा हुआ था। दिल्ली की सत्ता लोदी वंश के हाथों में थी, लेकिन सुल्तान इब्राहिम लोदी के खिलाफ कई विरोधी शासक थे, जिनमें राणा सांगा प्रमुख थे। दूसरी ओर, बाबर मध्य एशिया का एक शक्तिशाली शासक था, जिसने समरकंद और काबुल पर शासन किया था और उसकी नजरें हिंदुस्तान पर थीं। इतिहासकारों की राय और प्रमुख ग्रंथों का उल्लेख खानवा की लड़ाई: विश्वासघात या गलतफहमी? निष्कर्ष इतिहासकारों और प्रामाणिक ग्रंथों के अध्ययन से स्पष्ट होता है कि राणा सांगा ने बाबर को भारत आने का कोई औपचारिक निमंत्रण नहीं दिया था। हां, इब्राहिम लोदी के खिलाफ एक अनकहा गठबंधन जरूर था, लेकिन बाबर ने भारत पर अपने हितों के कारण आक्रमण किया था, न कि राणा सांगा के निमंत्रण पर। बाद में जब राणा सांगा को एहसास हुआ कि बाबर वापस नहीं जाने वाला, तो उन्होंने उसके खिलाफ युद्ध किया। (लेखक: देश हरपल न्यूज़ डेस्क)
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Kiran Rijiju

वक्फ संशोधन बिल पर किरन रिजिजू का बड़ा बयान: ‘विरोध करने वाले करोड़ों की जमीन पर काबिज’, जानिए पूरा मामला

नई दिल्ली: वक्फ संशोधन बिल को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है। इस बीच, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जो लोग इस बिल का विरोध कर रहे हैं, वे खुद करोड़ों की जमीन पर अवैध कब्जा जमाए बैठे हैं। क्या है वक्फ संशोधन बिल? वक्फ संशोधन बिल 2023 को लेकर संसद में चर्चा जोरों पर है। सरकार का कहना है कि यह बिल वक्फ संपत्तियों से जुड़े विवादों को हल करने और पारदर्शिता लाने के लिए लाया गया है। इस बिल के जरिए वक्फ बोर्डों को दी जाने वाली कुछ विशेष शक्तियों में बदलाव किया गया है, जिससे संपत्ति विवादों को सुलझाने में आसानी होगी। किरन रिजिजू ने क्या कहा? केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक इंटरव्यू में कहा कि जो लोग इस बिल का विरोध कर रहे हैं, वे खुद करोड़ों रुपये की जमीन पर अवैध रूप से काबिज हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वक्फ की आड़ में कई जगहों पर अवैध कब्जे हुए हैं और सरकार इन मामलों को ठीक करने के लिए यह कानून ला रही है। केरल के बिशप का समर्थन केरल के कैथोलिक बिशप ने भी वक्फ संशोधन बिल का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि वक्फ संपत्तियों को लेकर कई राज्यों में विवाद हैं और इस बिल से इस समस्या का हल निकल सकता है। विपक्ष का विरोध क्यों? विपक्षी दलों का कहना है कि यह बिल मुस्लिम समुदाय की संपत्तियों के खिलाफ है और इससे उनके अधिकारों का हनन होगा। वहीं, सरकार का कहना है कि यह बिल केवल पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है। सरकार की मंशा क्या है? सरकार का कहना है कि वक्फ संपत्तियों पर अनियमितताओं और अवैध कब्जों को रोकने के लिए इस बिल की जरूरत है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि इससे किसी भी धर्म विशेष के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होगा। आगे क्या होगा? वक्फ संशोधन बिल पर संसद में बहस जारी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह बिल पास होता है या विपक्षी विरोध के कारण इसमें और बदलाव किए जाते हैं।
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PM pays tribute to RSS founders in Nagpur

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नागपुर दौरा: संघ संस्थापकों को श्रद्धांजलि, माधव नेत्रालय के कार्यक्रम में संबोधन

नागपुर, 30 मार्च: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने नागपुर दौरे के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संस्थापकों को श्रद्धांजलि अर्पित की और माधव नेत्रालय के एक विशेष कार्यक्रम में लोगों को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने चिकित्सा सेवा, सामाजिक योगदान और भारत के दृष्टिहीन नागरिकों के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला। संघ संस्थापकों को पुष्पांजलि प्रधानमंत्री मोदी ने नागपुर स्थित केशव कुंज पहुंचकर संघ के संस्थापकों डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और माधव सदाशिव गोलवलकर (गुरुजी) को पुष्पांजलि अर्पित की। यह स्थान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का ऐतिहासिक केंद्र माना जाता है, जहां से संघ की विचारधारा और राष्ट्र निर्माण की दिशा में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते हैं। माधव नेत्रालय के कार्यक्रम में PM मोदी का संबोधन इसके बाद प्रधानमंत्री माधव नेत्रालय के एक कार्यक्रम में पहुंचे, जहां उन्होंने समाज के जरूरतमंद लोगों के लिए इस संस्थान की सेवाओं की सराहना की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा,“माधव नेत्रालय केवल नेत्रों का इलाज करने का केंद्र नहीं, बल्कि समाज की सेवा का एक बड़ा उदाहरण है। दृष्टिहीनता को कम करने के लिए किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं।” प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत देशभर में आंखों की बीमारियों से बचाव और इलाज के लिए बड़े स्तर पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना, डिजिटल हेल्थ मिशन और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। राष्ट्रीय सेवा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में योगदान प्रधानमंत्री नेत्रालय के डॉक्टरों, विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भी प्रशंसा की, जो नि:स्वार्थ भाव से जरूरतमंदों की मदद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा और समाज सेवा के क्षेत्र में नागपुर जैसे शहरों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है, और यह संस्थान इस दिशा में एक मिसाल कायम कर रहा है। नागपुर दौरे का महत्व प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा कई मायनों में अहम माना जा रहा है। संघ के गढ़ नागपुर में उनकी उपस्थिति राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि आने वाले चुनावों में इससे भाजपा और संघ के संबंधों को नई ऊर्जा मिलने की संभावना जताई जा रही है। प्रधानमंत्री का यह दौरा केवल श्रद्धांजलि और संबोधन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने नागपुरवासियों को यह संदेश दिया कि सरकार स्वास्थ्य, सेवा और समाज कल्याण के लिए निरंतर प्रयासरत है। (देश हरपल न्यूज के लिए विशेष रिपोर्ट)
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सामूहिक विवाह में भाई-बहन की शादी

उत्तर प्रदेश के जौनपुर में आयोजित एक महोत्सव के दौरान हुए सामूहिक विवाह कार्यक्रम में फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि इस कार्यक्रम में भाई-बहन को दूल्हा-दुल्हन के रूप में बैठाकर उनकी शादी कराई गई। इस सामूहिक विवाह में लगभग 1001 जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ था, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल हुए थे। घटना के अनुसार, एक युवक ने अपनी बहन के साथ विवाह मंडप में बैठने के पीछे सफा पहनने की इच्छा का कारण बताया। उसका कहना था कि उसे सफा पहनने का शौक था, इसलिए वह अपनी बहन के साथ विवाह मंडप में बैठ गया। इस मामले के उजागर होने के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।  यह घटना मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत आयोजित कार्यक्रमों में सामने आए फर्जीवाड़े की घटनाओं में से एक है। इससे पहले भी अमरोहा जिले में एक महिला ने अपने चचेरे भाई के साथ शादी करके सरकारी लाभ प्राप्त करने की कोशिश की थी। इन घटनाओं के प्रकाश में आने के बाद प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है और जांच के आदेश दिए गए हैं। इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि सामूहिक विवाह योजनाओं में सख्त निगरानी और सत्यापन की आवश्यकता है, ताकि इस तरह के फर्जीवाड़े रोके जा सकें और सरकारी योजनाओं का सही लाभ पात्र लोगों तक पहुंच सके।
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SupremeCourtHearingControversy; Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर लगाई रोक, कहा- ‘टिप्पणी असंवेदनशील और अमानवीय’

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले पर रोक लगाते हुए उसकी कड़ी आलोचना की। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि किसी नाबालिग लड़की के ब्रेस्ट पकड़ना और उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ना रेप या ‘अटेम्प्ट टु रेप’ की श्रेणी में नहीं आता। सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को ‘असंवेदनशील’ और ‘अमानवीय दृष्टिकोण’ बताया है। सुप्रीम कोर्ट की कड़ी प्रतिक्रिया जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा, “यह बहुत गंभीर मामला है और जिस जज ने यह फैसला दिया, उसकी तरफ से बहुत असंवेदनशीलता दिखाई गई। हमें यह कहते हुए बहुत दुख हो रहा है कि फैसला लिखने वाले में संवेदनशीलता की पूरी तरह से कमी थी।” सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इससे पहले मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर स्वतः संज्ञान लिया था। यह फैसला आते ही कानूनी विशेषज्ञों, राजनेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को गंभीर मानते हुए तुरंत सुनवाई का निर्णय लिया। केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी सुप्रीम कोर्ट के रुख का समर्थन किया। उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने खुद लिया संज्ञान “कुछ फैसलों को रोकने के पीछे महत्वपूर्ण कारण होते हैं, और यह उनमें से एक है।” हाईकोर्ट का विवादास्पद फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था, “किसी लड़की के निजी अंग पकड़ लेना, उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ देना और जबरन उसे पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश करना रेप या ‘अटेम्प्ट टु रेप’ की श्रेणी में नहीं आता।” हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद महिला संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों ने इसकी आलोचना करते हुए कहा कि यह पीड़िता के अधिकारों का हनन करता है और यौन उत्पीड़न को हल्के में लेने जैसा है। न्यायपालिका पर उठे सवाल यह मामला देश में महिला सुरक्षा से जुड़े कानूनी ढांचे को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे फैसले अपराधियों को बचाव का आधार दे सकते हैं और महिलाओं के प्रति हो रहे अपराधों के खिलाफ न्याय मिलने में बाधा बन सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से अब पीड़िता को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। इस मामले की अगली सुनवाई जल्द ही होने की संभावना है। (देश हरपल की विशेष रिपोर्ट)
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Bhopal

Bhopal Municipal Action: दुकानों पर Sealing से नाराज व्यापारी, बोले- बड़े Malls पर कार्रवाई क्यों नहीं?

Bhopal में नगर निगम की Sealing Action के बाद व्यापारियों में नाराजगी बढ़ गई है। सोमवार को रिहायशी इलाकों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ निगम ने बड़े स्तर पर कार्रवाई की। करीब चार घंटे तक चले अभियान में शहर के अलग-अलग इलाकों में 15 से ज्यादा दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बंद या सील किया गया। कार्रवाई के दौरान सबसे ज्यादा हलचल अरेरा कॉलोनी में देखने को मिली। निगम की टीम जब E-3 इलाके में पहुंची तो दुकानदारों ने विरोध शुरू कर दिया। व्यापारियों का कहना था कि नियमों के नाम पर छोटे कारोबारियों को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि बड़े शॉपिंग मॉल और दूसरे बड़े प्रतिष्ठानों पर ऐसी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। अरेरा कॉलोनी में आमने-सामने आए व्यापारी और निगम की टीम अरेरा कॉलोनी के E-3 इलाके में निगम की टीम ने कई दुकानों पर कार्रवाई की। इस दौरान करीब 8 दुकानों को सील किए जाने की जानकारी सामने आई है। निगम की कार्रवाई शुरू होते ही दुकानदार मौके पर जमा हो गए। व्यापारियों ने अधिकारियों से कार्रवाई को लेकर सवाल किए और अपनी परेशानी बताई। उनका कहना था कि कई परिवार इन छोटे कारोबारों पर निर्भर हैं और दुकान अचानक बंद होने से रोजमर्रा की कमाई पर सीधा असर पड़ेगा। व्यापारियों ने यह भी आरोप लगाया कि निगम की कार्रवाई में समानता नहीं दिखाई दे रही है। दुकानदारों का सवाल- बड़े Malls पर कार्रवाई कब? अरेरा कॉलोनी में विरोध की सबसे बड़ी वजह बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को लेकर उठे सवाल रहे। दुकानदारों का कहना है कि यदि रिहायशी क्षेत्र में Commercial Activity नियमों के खिलाफ है, तो फिर छोटी दुकान हो या बड़ा Shopping Mall, नियम सभी के लिए एक जैसे होने चाहिए। व्यापारियों ने नगर निगम से यह स्पष्ट करने की मांग की कि कार्रवाई का आधार क्या है और किन प्रतिष्ठानों को नियमों के उल्लंघन की श्रेणी में रखा गया है। हालांकि, निगम का कहना है कि कार्रवाई नियमों के तहत की जा रही है और नोटिस दिए जाने के बाद आगे की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। Kolar से लेकर Rachna Nagar तक Action नगर निगम का अभियान सिर्फ अरेरा कॉलोनी तक सीमित नहीं रहा। कोलार के सर्वधर्म क्षेत्र में भी निगम की टीमों ने कई प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। यहां होटल, पब, मॉल और जिम समेत कई व्यावसायिक गतिविधियां कार्रवाई के दायरे में आईं। इसके अलावा रचना नगर और खानूगांव सहित दूसरे क्षेत्रों में भी निगम की टीमें पहुंचीं। कुछ स्थानों पर टीम के पहुंचने से पहले ही दुकानदारों ने अपने प्रतिष्ठान बंद कर दिए। 8 हजार से ज्यादा नोटिस जारी भोपाल में रिहायशी इलाकों में Commercial Use को लेकर नगर निगम पहले से ही कार्रवाई की तैयारी कर रहा था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 26 अगस्त तक करीब 8,264 नोटिस जारी किए जा चुके थे। अब नोटिस के बाद Sealing Action शुरू होने से कारोबारियों में चिंता बढ़ गई है। खासकर छोटे दुकानदारों को डर है कि दुकान बंद होने से उनकी आय पर सीधा असर पड़ेगा। Supreme Court के निर्देशों के बाद तेज हुई कार्रवाई रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों का मामला लंबे समय से चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद नगर निगम की कार्रवाई में तेजी आई है। निगम का फोकस ऐसे प्रतिष्ठानों पर है, जहां निर्धारित नियमों के अनुरूप व्यावसायिक गतिविधियां संचालित नहीं हो रही हैं। दूसरी तरफ व्यापारियों की मांग है कि कार्रवाई के साथ उनकी रोजी-रोटी का भी ध्यान रखा जाए। उनका कहना है कि अगर कोई नियम लागू है तो उसकी जानकारी स्पष्ट तरीके से दी जाए और सभी प्रतिष्ठानों पर बिना भेदभाव के कार्रवाई हो। अब आगे क्या होगा? भोपाल में Sealing Drive अभी खत्म होती नजर नहीं आ रही है। नगर निगम की टीमें आने वाले दिनों में दूसरे इलाकों में भी ऐसे प्रतिष्ठानों की जांच कर सकती हैं। अरेरा कॉलोनी में हुए विरोध ने इस पूरे मामले को और चर्चा में ला दिया है। अब देखना होगा कि निगम की कार्रवाई आगे कितनी तेज होती है और व्यापारियों की शिकायतों पर प्रशासन की ओर से क्या जवाब सामने आता है। फिलहाल एक बात साफ है—भोपाल में residential areas में commercial activities को लेकर नगर निगम की सख्ती बढ़ गई है और आने वाले दिनों में इसका असर शहर के कई कारोबारियों पर देखने को मिल सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Silver

Gold Rate Today: सोना ₹1.55 लाख पर आया, Silver Price में ₹8,437 की बड़ी गिरावट

अगर आप सोना या चांदी खरीदने का मन बना रहे हैं तो आज के भाव आपके लिए खास हो सकते हैं। लंबे समय से ऊंचे स्तर पर चल रही कीमती धातुओं की कीमतों में सोमवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली। चांदी (Silver) का भाव ₹8,437 प्रति किलोग्राम टूटकर करीब ₹2.35 लाख पर आ गया। वहीं सोने की कीमत में भी ₹4,453 की गिरावट दर्ज की गई और 10 ग्राम सोना करीब ₹1.55 लाख के स्तर पर पहुंच गया। सोने-चांदी के दाम में अचानक आई इस नरमी ने बाजार का रुख बदल दिया है। खासकर वे लोग जो लंबे समय से कीमतों में कमी का इंतजार कर रहे थे, उनके लिए आज की गिरावट ध्यान देने वाली है। Silver Price: चांदी में ₹8 हजार से ज्यादा की गिरावट आज चांदी की कीमत में एक ही दिन में बड़ी गिरावट देखने को मिली। Silver Price करीब ₹8,437 नीचे आकर ₹2.35 लाख प्रति किलो के आसपास पहुंच गया। Silver के भाव में पिछले कुछ समय से लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। सात महीने के आंकड़ों पर नजर डालें तो मौजूदा भाव की तुलना में चांदी करीब ₹1.51 लाख प्रति किलोग्राम तक नीचे आ चुकी है। यानी जिस धातु ने कुछ समय पहले निवेशकों का ध्यान खींचा था, उसमें अब काफी बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। Gold Price Today: सोना भी ₹4,453 सस्ता चांदी ही नहीं, Gold Price Today में भी बड़ी गिरावट आई है। सोने का भाव करीब ₹4,453 प्रति 10 ग्राम टूटकर ₹1.55 लाख के आसपास पहुंच गया। Gold की कीमतों में इतनी बड़ी गिरावट आम खरीदारों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। शादी या किसी खास मौके के लिए सोना खरीदने वाले परिवार अक्सर कीमतों में थोड़ी नरमी का इंतजार करते हैं। ऐसे में आज का भाव उनकी नजर में जरूर आया होगा। आखिर क्यों गिर रहे हैं सोने-चांदी के दाम? सोने और चांदी की कीमतें केवल स्थानीय बाजार की मांग से तय नहीं होतीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनके भाव, डॉलर की चाल, ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें और निवेशकों की खरीद-बिक्री जैसे कई कारक कीमतों को प्रभावित करते हैं। खासकर चांदी में औद्योगिक मांग की भी अहम भूमिका होती है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर सेक्टर समेत कई उद्योगों में इसका इस्तेमाल होता है। इसलिए वैश्विक बाजार में मांग और आर्थिक गतिविधियों में बदलाव का असर चांदी के भाव पर जल्दी दिखाई दे सकता है। क्या अभी Gold-Silver खरीदना सही रहेगा? कीमतों में आज की गिरावट देखकर खरीदारों के मन में यह सवाल आना स्वाभाविक है कि क्या अभी सोना-चांदी खरीद लेना चाहिए? अगर खरीदारी आपकी जरूरत के लिए है तो मौजूदा भाव पर बाजार के अलग-अलग विक्रेताओं से रेट की तुलना की जा सकती है। लेकिन केवल एक दिन की गिरावट देखकर जल्दबाजी में निवेश का फैसला करना सही नहीं होगा। कीमती धातुओं के दाम आगे भी ऊपर-नीचे हो सकते हैं। ज्वेलरी खरीदते समय एक बात खास तौर पर ध्यान रखें। बाजार में दिखाई जाने वाली सोने की कीमत के अलावा GST, मेकिंग चार्ज और अन्य शुल्क भी बिल में जुड़ते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले अंतिम कीमत जरूर पूछें। आज के Gold-Silver Rate की अहम बातें खरीदारों के लिए राहत या निवेशकों की चिंता? सोने और चांदी में आई आज की गिरावट को कोई खरीदार के लिए मौका मान सकता है, तो किसी निवेशक के लिए यह बाजार में बढ़े उतार-चढ़ाव का संकेत हो सकता है। फिलहाल सबसे जरूरी बात यह है कि खरीदारी करने से पहले अपने शहर का ताजा रेट, शुद्धता और सभी चार्ज की जानकारी जरूर जांच लें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
PM Modi

SCO Summit में PM Modi और Pezeshkian की मुलाकात, Iran War के बाद पहली बातचीत

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की बिश्केक में मुलाकात हुई। दोनों नेताओं की यह बैठक SCO Summit 2026 के दौरान हुई। हालिया ईरान-अमेरिका संघर्ष के बाद मोदी और पेजेश्कियान की यह पहली आमने-सामने की मुलाकात है, इसलिए इस बैठक पर दुनियाभर की नजरें टिकी हैं। मुलाकात ऐसे वक्त हुई है, जब पश्चिम एशिया की स्थिति लगातार संवेदनशील बनी हुई है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का असर क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ ऊर्जा और व्यापार पर भी पड़ रहा है। ऐसे माहौल में भारत और ईरान के शीर्ष नेताओं की आमने-सामने बातचीत को कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। West Asia Crisis के बीच हुई बातचीत प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पेजेश्कियान की बातचीत में पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति प्रमुख मुद्दों में रही। इससे पहले भी दोनों नेताओं के बीच क्षेत्र में बढ़ते तनाव को लेकर संपर्क हुआ है। भारत लगातार क्षेत्र में तनाव कम करने, नागरिकों की सुरक्षा और बातचीत के जरिए समाधान की जरूरत पर जोर देता रहा है। भारत के लिए पश्चिम एशिया की स्थिति इसलिए भी अहम है क्योंकि इस क्षेत्र से बड़ी संख्या में भारतीयों का जुड़ाव है और ऊर्जा एवं व्यापार के लिहाज से भी यह क्षेत्र महत्वपूर्ण है। Iran के साथ रिश्तों पर भी नजर भारत और ईरान के रिश्ते केवल राजनीतिक संपर्क तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सहयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। ऐसे समय में जब ईरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुश्किल दौर से गुजर रहा है, भारत का उसके साथ संवाद बनाए रखना खास महत्व रखता है। बिश्केक में हुई मोदी-पेजेश्कियान बैठक इसी निरंतर कूटनीतिक संपर्क की एक अहम कड़ी मानी जा रही है। SCO Summit में एक मंच पर बड़े नेता बिश्केक में हो रहे Shanghai Cooperation Organisation (SCO) Summit में भारत, चीन, रूस, ईरान समेत कई देशों के शीर्ष नेता हिस्सा ले रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा में कई द्विपक्षीय बैठकों का कार्यक्रम भी है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी ने इस सम्मेलन को और महत्वपूर्ण बना दिया है। SCO के मंच पर क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और बदलते वैश्विक समीकरणों जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है। मौजूदा अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच यह बैठक सदस्य देशों के लिए अपनी-अपनी कूटनीतिक प्राथमिकताएं रखने का अहम मंच भी बन गई है। भारत की Balanced Diplomacy पर टिकी नजर ईरान के साथ बातचीत के दौरान भारत के सामने एक तरफ अपने रणनीतिक और आर्थिक हित हैं, तो दूसरी ओर पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता की जरूरत। मोदी सरकार पहले भी अलग-अलग पक्षों के साथ संवाद बनाए रखने की नीति पर आगे बढ़ती रही है। ऐसे में बिश्केक में मोदी और पेजेश्कियान की मुलाकात को भारत की Balanced Foreign Policy के नजरिए से भी देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति किस दिशा में जाती है और भारत इस संकट में अपनी कूटनीतिक भूमिका को किस तरह आगे बढ़ाता है, यह देखना दिलचस्प होगा। क्यों खास है यह मुलाकात? इस मुलाकात ने साफ कर दिया है कि पश्चिम एशिया के बदलते समीकरणों के बीच भारत ईरान समेत सभी प्रमुख पक्षों के साथ अपना संवाद बनाए रखना चाहता है। बिश्केक से हुई यह बैठक आने वाले समय में भारत की West Asia Policy के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत दे सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CJP

5 सितंबर को Delhi March करेगा CJP, Supreme Court ने रोक लगाने से किया इनकार

राजधानी दिल्ली में 5 सितंबर को प्रस्तावित CJP March को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने फिलहाल इस प्रदर्शन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसी कोई ठोस परिस्थिति सामने नहीं है, जिसके आधार पर अभी से यह मान लिया जाए कि मार्च के दौरान कोई अप्रिय घटना होगी। साथ ही अदालत ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी संबंधित प्रशासन और पुलिस पर छोड़ दी। CJP यानी Cockroach Janata Party ने 5 सितंबर को दिल्ली में शांतिपूर्ण मार्च निकालने का ऐलान किया है। संगठन के मुताबिक मार्च India Gate से Delhi Police Headquarters तक प्रस्तावित है। इस प्रदर्शन को लेकर पहले से ही सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे थे। Supreme Court ने क्यों नहीं लगाई रोक? 5 सितंबर के मार्च पर पाबंदी लगाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। याचिका में दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं जताई गई थीं। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल हस्तक्षेप से इनकार करते हुए कहा कि फिलहाल ऐसी कोई “compelling circumstance” नहीं है, जिससे यह अनुमान लगाया जा सके कि प्रदर्शन के दौरान कुछ अप्रिय होगा। कोर्ट ने सभी पक्षों से कानून के दायरे में रहकर जिम्मेदारी से काम करने की उम्मीद जताई। अदालत ने याचिकाकर्ता को अपनी चिंताएं संबंधित पुलिस और प्रशासन के सामने रखने को भी कहा। यानी फिलहाल कोर्ट ने मार्च को रोकने के बजाय कानून-व्यवस्था से जुड़ा फैसला प्रशासन पर छोड़ दिया है। 5 सितंबर को क्यों निकलेगा CJP March? CJP ने यह मार्च सरकार पर पहले किए गए कथित वादों को पूरा नहीं करने के आरोपों के बीच घोषित किया है। संगठन का कहना है कि 25 जुलाई के आंदोलन के दौरान सरकार की ओर से कुछ आश्वासन दिए गए थे, लेकिन उन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। CJP ने खास तौर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR और युवाओं से जुड़े मुद्दों को उठाया है। संगठन का दावा है कि इन मामलों में कार्रवाई में देरी के कारण दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। March में कौन शामिल हो सकता है? CJP के अनुसार प्रस्तावित मार्च में छात्र और युवा संगठनों के अलावा NEET से जुड़े मामलों में प्रभावित परिवारों तथा कथित पुलिस कार्रवाई से प्रभावित लोगों के शामिल होने की बात कही गई है। संगठन ने इसे शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन बताया है। वहीं, दिल्ली पुलिस ने पहले कहा था कि प्रस्तावित मार्च के लिए उसकी अनुमति मांगी गई थी या नहीं, इस संबंध में प्रक्रिया अलग से देखी जा रही है। पुलिस सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए तैयारियों का आकलन कर रही है। अब प्रशासन के सामने बड़ी जिम्मेदारी सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद 5 सितंबर के मार्च को लेकर अब नजर दिल्ली पुलिस और प्रशासन की तैयारियों पर रहेगी। India Gate और Delhi Police Headquarters के बीच प्रस्तावित रूट पर भीड़, ट्रैफिक और सुरक्षा व्यवस्था को संभालना प्रशासन के लिए अहम चुनौती होगी। कोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध का अधिकार अपनी जगह है, लेकिन प्रदर्शन के दौरान कानून का पालन करना भी उतना ही जरूरी है। अगर स्थिति भविष्य में गंभीर होती है, तो संबंधित पक्ष कानूनी उपाय अपना सकते हैं। 10 सितंबर को फिर होगी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ने मामले को लंबित याचिकाओं के साथ 10 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। फिलहाल 5 सितंबर के मार्च पर कोई तत्काल रोक नहीं है और अदालत ने सभी पक्षों से शांतिपूर्ण तथा जिम्मेदार व्यवहार की अपेक्षा की है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Hanuman Ansh

₹2 करोड़ की Hanuman Ansh ने किया कमाल, शानदार Collection के बाद डायरेक्टर हुए भावुक

बॉक्स ऑफिस पर कई बार ऐसी फिल्में आ जाती हैं, जिनकी शुरुआत देखकर कोई अंदाजा नहीं लगा पाता कि आगे चलकर कहानी इतनी बदल जाएगी। ‘हनुमान अंश’ (Hanuman Ansh) भी कुछ ऐसी ही फिल्म साबित हो रही है। शुरुआत में धीमी रफ्तार से आगे बढ़ी इस फिल्म ने तीसरे हफ्ते के बाद ऐसी छलांग लगाई कि अब इसकी चर्चा हर तरफ हो रही है। नीम करौली बाबा के जीवन और आध्यात्मिक विचारों से प्रेरित ‘हनुमान अंश’ को विशाल चतुर्वेदी ने लिखा और डायरेक्ट किया है। करीब 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म की कमाई अब उसके शुरुआती प्रदर्शन से बिल्कुल अलग तस्वीर दिखा रही है। 10 लाख की Opening से शुरू हुआ सफर Hanuman Ansh ने सिनेमाघरों में पहले दिन करीब 10 लाख रुपये की कमाई की थी। पहले दो हफ्तों में भी फिल्म की रफ्तार काफी धीमी रही। यही वजह थी कि शुरुआत में कुछ लोगों ने फिल्म के बॉक्स ऑफिस भविष्य पर सवाल उठाने शुरू कर दिए थे। लेकिन फिल्म ने हार नहीं मानी। तीसरे हफ्ते में दर्शकों की संख्या बढ़ने लगी और Word of Mouth ने पूरा खेल बदल दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तीसरे हफ्ते में फिल्म ने करीब 10 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार किया, जो शुरुआती प्रदर्शन के मुकाबले जबरदस्त उछाल था। 24वें दिन Box Office पर बड़ा उछाल फिल्म की सबसे ज्यादा चर्चा उसके चौथे हफ्ते के प्रदर्शन को लेकर हो रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 24वें दिन ‘हनुमान अंश’ ने करीब ₹12.75 करोड़ का India Net Collection किया और कुल कमाई ₹40 करोड़ के पार पहुंच गई। वहीं कुछ अन्य ट्रेड रिपोर्ट्स में आंकड़े अलग बताए गए हैं, इसलिए अंतिम कलेक्शन में अंतर संभव है। यह उछाल इसलिए भी खास है क्योंकि फिल्म की शुरुआत महज 10 लाख रुपये से हुई थी। यानी कुछ ही हफ्तों में फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर पूरी तरह अपना रंग बदल दिया। डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी हुए Emotional फिल्म की बढ़ती सफलता से डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी भी भावुक नजर आए। उन्होंने शुरुआती दौर को याद करते हुए बताया कि एक समय फिल्म के शो कम होने की स्थिति बन गई थी। लेकिन दर्शकों के रिस्पॉन्स ने हालात बदल दिए। फिल्म को मिल रहे प्यार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शो की संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है। डायरेक्टर का कहना है कि अभी फिल्म के शोज और बढ़ सकते हैं। कम बजट, लेकिन बड़ा असर ‘हनुमान अंश’ की कहानी सिर्फ कमाई की वजह से चर्चा में नहीं है। फिल्म की खासियत यह है कि इसे बड़े स्टार्स और भारी-भरकम बजट वाली फिल्मों के बीच अपनी अलग जगह बनाने में सफलता मिली है। फिल्म के विषय और आध्यात्मिक कहानी से जुड़े दर्शकों ने इसे पसंद किया। सोशल मीडिया और दर्शकों की आपसी चर्चाओं ने भी फिल्म को धीरे-धीरे ज्यादा लोगों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। यही Word of Mouth फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आया है। ‘हनुमान अंश’ ने बदल दी Box Office की कहानी जिस फिल्म की शुरुआत बेहद मामूली रही, वही अब चौथे हफ्ते में बड़ी फिल्मों को टक्कर देती नजर आ रही है। रिपोर्ट्स में इसे 2026 की चौंकाने वाली Sleeper Hit में गिना जा रहा है। ‘हनुमान अंश’ की कहानी बॉक्स ऑफिस पर एक बात जरूर साबित करती है—हर फिल्म को पहले दिन करोड़ों की Opening की जरूरत नहीं होती। अगर कहानी दर्शकों के दिल तक पहुंच जाए, तो उसका असर देर से सही, लेकिन काफी दूर तक जा सकता है। फिलहाल फिल्म के बढ़ते शोज और दर्शकों की दिलचस्पी ने मेकर्स की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। डायरेक्टर के मुताबिक, सिनेमाघरों में फिल्म का सफर अभी जारी है और आने वाले दिनों में शोज की संख्या और बढ़ सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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