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WhatsApp

WhatsApp Username Feature को लेकर सरकार सख्त, Meta के पास अब 9 जुलाई तक का वक्त

WhatsApp अपने यूजर्स के लिए एक बड़ा बदलाव लाने की तैयारी में है। कंपनी जल्द ही Username Feature लॉन्च कर सकती है, जिसके बाद लोगों को चैट करने के लिए अपना मोबाइल नंबर साझा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। लेकिन यह नया फीचर भारत में लॉन्च होने से पहले ही विवादों में आ गया है। इसी मामले में अब केंद्र सरकार ने Meta को अपना पक्ष रखने के लिए 9 जुलाई तक का समय दिया है। WhatsApp का नया Username Feature क्या है? अभी तक WhatsApp पर किसी से बात करने के लिए उसका मोबाइल नंबर होना जरूरी होता है। लेकिन नए Username Feature के आने के बाद यूजर्स अपनी एक यूनिक आईडी (Username) बना सकेंगे। इसके जरिए बिना नंबर बताए भी दूसरे लोग उनसे संपर्क कर पाएंगे। यह फीचर Telegram और कुछ अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म की तरह काम करेगा। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि यूजर की निजी जानकारी पहले की तुलना में ज्यादा सुरक्षित रह सकती है। आखिर विवाद क्यों शुरू हुआ? जैसे ही इस फीचर की जानकारी सामने आई, इसे लेकर कई सवाल उठने लगे। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मजबूत सुरक्षा व्यवस्था नहीं बनाई गई, तो फर्जी अकाउंट, ऑनलाइन ठगी और पहचान छिपाकर गलत गतिविधियों की आशंका बढ़ सकती है। दूसरी ओर, कानून लागू करने वाली एजेंसियों का भी मानना है कि यदि किसी व्यक्ति की पहचान केवल Username तक सीमित रह जाएगी, तो जांच के दौरान चुनौतियां सामने आ सकती हैं। यही वजह है कि सरकार इस फीचर के हर पहलू को गंभीरता से देख रही है। सरकार ने Meta को क्यों दी अतिरिक्त मोहलत? मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने Meta को अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय दे दिया है। अब कंपनी 9 जुलाई तक यह बताएगी कि उसका नया Username सिस्टम भारतीय कानूनों, डेटा सुरक्षा नियमों और यूजर प्राइवेसी के बीच संतुलन कैसे बनाएगा। सरकार यह भी जानना चाहती है कि इस फीचर के लागू होने के बाद किसी भी तरह के साइबर अपराध या दुरुपयोग की स्थिति में जांच एजेंसियों को क्या तकनीकी सहयोग मिलेगा। यूजर्स के लिए क्या बदल सकता है? अगर WhatsApp यह फीचर लॉन्च करता है, तो यूजर्स को कई नए अनुभव मिल सकते हैं। फिलहाल क्या है स्थिति? अभी WhatsApp का Username Feature आम यूजर्स के लिए उपलब्ध नहीं है। Meta इस पर लगातार काम कर रही है और भारत में इसे लेकर कानूनी प्रक्रिया भी जारी है। अब सभी की नजर 9 जुलाई पर है, जब कंपनी सरकार के सामने अपना जवाब पेश करेगी। अगर सरकार और Meta के बीच सहमति बनती है, तो आने वाले समय में WhatsApp यूजर्स को नंबर के बजाय Username से चैट करने की नई सुविधा मिल सकती है। हालांकि, इसके साथ सुरक्षा और प्राइवेसी के नियमों का पालन सबसे अहम रहेगा।
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Amarnath Yatra

Amarnath Yatra 2026: बाबा बर्फानी का Shivling 90% पिघला, फिर भी उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़

देश की सबसे पवित्र धार्मिक यात्राओं में शामिल अमरनाथ यात्रा 2026 (Amarnath Yatra) इस समय पूरे उत्साह के साथ जारी है। एक ओर लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए कठिन रास्तों को पार कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पवित्र गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाले हिम शिवलिंग (Shivling) का आकार तेजी से घटने की खबर सामने आई है। ताजा जानकारी के मुताबिक, बाबा बर्फानी का प्राकृतिक हिम शिवलिंग लगभग 90 प्रतिशत तक पिघल चुका है। फिलहाल इसकी ऊंचाई करीब एक फीट ही बची है। हालांकि इस बदलाव के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं आई है और दर्शन के लिए लगातार भीड़ उमड़ रही है। 3 दिन में 56 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने किए दर्शन अमरनाथ यात्रा शुरू होने के बाद पहले तीन दिनों में 56 हजार से अधिक श्रद्धालु पवित्र गुफा में बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 18 प्रतिशत अधिक है। इससे साफ है कि इस बार यात्रा को लेकर लोगों में पहले से ज्यादा उत्साह देखने को मिल रहा है। यात्रा मार्ग पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें नजर आ रही हैं। देश के अलग-अलग राज्यों से आने वाले श्रद्धालु कठिन मौसम और पहाड़ी रास्तों के बावजूद पूरे विश्वास और श्रद्धा के साथ यात्रा पूरी कर रहे हैं। क्यों तेजी से पिघला हिम शिवलिंग? विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार क्षेत्र में तापमान सामान्य से अधिक रहने और मौसम में लगातार बदलाव के कारण हिम शिवलिंग का आकार तेजी से कम हुआ है। अमरनाथ गुफा में बनने वाला शिवलिंग पूरी तरह प्राकृतिक होता है और हर साल मौसम के अनुसार इसका आकार बदलता रहता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह प्रकृति का सामान्य चक्र है, इसलिए श्रद्धालु इसे आस्था से जोड़कर ही देखते हैं। प्रशासन ने किए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन ने यात्रा मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत किया है। मेडिकल टीम, राहत दल, सुरक्षा बल और अन्य आवश्यक सेवाएं लगातार तैनात हैं ताकि यात्रियों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे मौसम की जानकारी लेकर ही यात्रा करें, निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करें और स्वास्थ्य संबंधी सलाह को गंभीरता से लें। आस्था के आगे फीका पड़ा मौसम का असर शिवलिंग का आकार भले ही पहले की तुलना में काफी छोटा हो गया हो, लेकिन बाबा बर्फानी के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था पहले जैसी ही मजबूत बनी हुई है। हर दिन हजारों श्रद्धालु कठिन चढ़ाई तय कर पवित्र गुफा तक पहुंच रहे हैं और दर्शन कर खुद को सौभाग्यशाली मान रहे हैं। यात्रा के शुरुआती तीन दिनों में रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं का पहुंचना इस बात का संकेत है कि अमरनाथ यात्रा के प्रति लोगों की धार्मिक आस्था और विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है। आने वाले दिनों में भी श्रद्धालुओं की संख्या में और बढ़ोतरी होने की संभावना जताई जा रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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बारिश

Rain Alert India: महाराष्ट्र में लगातार बारिश से सड़क-रेल यातायात प्रभावित, Kishtwar Landslide ने बढ़ाई चिंता

देशभर में मानसून अब अपने रौद्र रूप में नजर आ रहा है। महाराष्ट्र में पिछले तीन दिनों से लगातार हो रही तेज बारिश ने आम लोगों की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। कई शहरों में सड़कें पानी में डूब गई हैं, रेलवे ट्रैक पर जलभराव हो गया है और मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे सहित कई प्रमुख रास्तों पर यातायात बाधित रहा। वहीं, जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में भारी बारिश के बीच हुए भूस्खलन (Landslide) ने हालात और गंभीर कर दिए। सड़क पर चल रहे कई वाहन मलबे की चपेट में आ गए, जिसके बाद राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया। महाराष्ट्र में लगातार तीसरे दिन बारिश का कहर मुंबई, पुणे, रायगढ़, ठाणे, पालघर और कोंकण के कई इलाकों में लगातार तीसरे दिन भी तेज बारिश जारी रही। कई निचले इलाकों में पानी भर जाने से लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया। कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों, छात्रों और रोजमर्रा के कामकाज पर भी इसका सीधा असर देखने को मिला। कई जगहों पर सड़कें तालाब जैसी नजर आईं, जबकि कुछ इलाकों में पानी घरों और दुकानों तक पहुंच गया। स्थानीय प्रशासन लगातार जलनिकासी और राहत कार्य में जुटा हुआ है। Railway Track पर पानी, कई ट्रेनें हुईं प्रभावित लगातार बारिश का असर रेल सेवाओं पर भी पड़ा। कई रेलवे ट्रैक पर पानी भरने के कारण ट्रेनों की रफ्तार धीमी करनी पड़ी। कुछ ट्रेनों के समय में बदलाव किया गया, जबकि कई सेवाएं देरी से संचालित हुईं। रेलवे अधिकारियों ने यात्रियों से सफर शुरू करने से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति की जानकारी लेने की अपील की है। Mumbai-Pune Expressway पर Landslide, यातायात प्रभावित भारी बारिश के कारण मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे और पुराने मुंबई-पुणे हाईवे के कुछ हिस्सों में भूस्खलन हुआ। पहाड़ियों से मलबा और पत्थर सड़क पर आ गिरने से वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कुछ समय के लिए यातायात रोक दिया गया। बाद में राहत टीमों ने मलबा हटाकर धीरे-धीरे रास्ता चालू कराया। प्रशासन ने लोगों से घर में रहने की अपील मौसम विभाग की चेतावनी के बाद महाराष्ट्र सरकार और जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे बिना जरूरी काम के घरों से बाहर न निकलें। खासकर नदी, समुद्र और पहाड़ी इलाकों के आसपास रहने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। आपदा प्रबंधन की टीमें लगातार संवेदनशील इलाकों पर नजर बनाए हुए हैं और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। Kishtwar Landslide: मलबे में दबी कई गाड़ियां जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में लगातार बारिश के बीच अचानक पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा सड़क पर आ गिरा। इस दौरान वहां से गुजर रहे कई वाहन उसकी चपेट में आ गए और कुछ गाड़ियां मलबे में दब गईं। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, SDRF और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं। राहत और बचाव अभियान तेजी से चलाया गया और सड़क से मलबा हटाने का काम शुरू किया गया। IMD Alert: अगले कुछ दिन भी भारी बारिश की संभावना भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने महाराष्ट्र, कोंकण, गोवा, मध्य भारत और जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान जताया है। कई जिलों में ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बारिश के कारण बाढ़, जलभराव और भूस्खलन जैसी घटनाओं का खतरा बना रहेगा। ऐसे में लोगों को प्रशासन की सलाह का पालन करना चाहिए और मौसम से जुड़े आधिकारिक अपडेट पर नजर रखनी चाहिए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sia

Sia Mobile History Reveal: Murder से पहले Raja Raghuvanshi Case और Police Custody पर किए कई Search

चर्चित Sia-Ketan Murder Case में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। अब जांच के दौरान सामने आई मोबाइल हिस्ट्री ने पुलिस का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। शुरुआती जांच में पता चला है कि मुख्य आरोपी सिया ने कथित तौर पर केतन की हत्या से पहले इंटरनेट पर कई ऐसी जानकारियां खोजी थीं, जो अब जांच का अहम हिस्सा बन गई हैं। पुलिस के मुताबिक, सिया ने हत्या से पहले चर्चित Raja Raghuvanshi Murder Case से जुड़ी खबरें पढ़ीं। इतना ही नहीं, उसने यह भी सर्च किया कि पुलिस हिरासत में महिलाओं से पूछताछ कैसे होती है, उनके कानूनी अधिकार क्या हैं और गिरफ्तारी के बाद क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है। इन सभी डिजिटल गतिविधियों की अब फॉरेंसिक टीम विस्तार से जांच कर रही है। Mobile History में क्या मिला? जांच एजेंसियों को मोबाइल फोन की हिस्ट्री से कई ऐसे सर्च मिले हैं, जो अब पूरे मामले में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इनमें शामिल हैं— हालांकि, पुलिस ने अभी यह साफ नहीं किया है कि इन सर्च का हत्या से सीधा संबंध है या नहीं। फिलहाल इन्हें अन्य सबूतों के साथ मिलाकर देखा जा रहा है। Raja Raghuvanshi Case क्यों आया चर्चा में? सूत्रों के अनुसार, जिस समय ये इंटरनेट सर्च किए गए, उस दौरान Raja Raghuvanshi Murder Case देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ था। ऐसे में जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि सिया ने सिर्फ खबरें पढ़ीं या फिर उस केस से किसी तरह की जानकारी हासिल करने का प्रयास किया। पुलिस का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों की पुष्टि की जाएगी। Digital Evidence पर टिकी पूरी जांच इस केस में पुलिस अब डिजिटल सबूतों पर सबसे ज्यादा भरोसा कर रही है। मोबाइल फोन के अलावा चैट, कॉल डिटेल, लोकेशन हिस्ट्री और सोशल मीडिया गतिविधियों की भी जांच की जा रही है। फॉरेंसिक विशेषज्ञ यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि घटना से पहले और बाद में आरोपी किन लोगों के संपर्क में थी और उसकी ऑनलाइन गतिविधियां क्या थीं। इन जानकारियों के आधार पर पूरी टाइमलाइन तैयार की जा रही है। पूछताछ में कई सवालों के जवाब तलाश रही पुलिस जांच टीम लगातार सिया से पूछताछ कर रही है। मोबाइल में मिले इंटरनेट सर्च, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल सबूतों के बारे में उससे सवाल पूछे जा रहे हैं। इसके साथ ही मामले से जुड़े अन्य लोगों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं ताकि हर पहलू की जांच की जा सके। अभी जांच जारी, अंतिम निष्कर्ष बाकी पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मोबाइल हिस्ट्री में मिले सर्च अपने आप में अपराध साबित नहीं करते। डिजिटल डेटा केवल जांच का एक हिस्सा है। जब तक सभी सबूतों का मिलान नहीं हो जाता, तब तक किसी भी तरह का अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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PM Modi

PM Modi Statement: Global War में भी भारत ने कैसे टाला Energy Crisis

Global War के बीच भारत की मजबूत Energy Strategy वैश्विक युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के बीच जब दुनिया के कई देश ऊर्जा संकट से जूझ रहे थे, उसी समय भारत ने अपनी रणनीतिक कूटनीति और समझदारी भरी ऊर्जा नीति के दम पर स्थिति को संभाल लिया। PM Modi ने बताया कि भारत को इस कठिन दौर में भी करीब 40 देशों से लगातार तेल (Crude Oil) की सप्लाई मिलती रही, जिससे देश में ईंधन संकट नहीं पैदा हुआ। 🇮🇳 PM Modi का बड़ा बयान: India ने अपनाई “Diversification” नीति Narendra Modi ने कहा कि भारत ने समय रहते यह समझ लिया था कि केवल एक या दो देशों पर निर्भर रहना भविष्य में बड़ा जोखिम बन सकता है। इसी वजह से देश ने अपनी तेल आपूर्ति को कई देशों में बांटकर “डायवर्सिफिकेशन” की नीति अपनाई। LPG कीमतों में बड़ा खतरा टला प्रधानमंत्री के अनुसार, अगर यह रणनीति नहीं अपनाई जाती तो हालात काफी गंभीर हो सकते थे और घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतें 2000 रुपये तक पहुंच सकती थीं। लेकिन सरकार की सक्रिय कूटनीति और ऊर्जा नीति ने आम लोगों को महंगाई के बड़े झटके से बचा लिया। कई देशों से मजबूत हुई सप्लाई चेन इस दौरान भारत ने न सिर्फ अपने पारंपरिक सप्लाई पार्टनर्स पर भरोसा बनाए रखा, बल्कि नए देशों से भी ऊर्जा समझौते किए। इससे सप्लाई चेन मजबूत रही और अंतरराष्ट्रीय संकट का असर भारतीय बाजार पर सीमित रहा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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चंद्रिमा भट्टाचार्य

West Bengal Political Crisis: TMC नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य ने दिया इस्तीफा, बढ़ी अंदरूनी हलचल

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है, जिसने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर हलचल बढ़ा दी है। ममता बनर्जी को उस समय तगड़ा झटका लगा जब उनकी पार्टी की वरिष्ठ नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य (Chandrima Bhattacharya) ने TMC के सभी महत्वपूर्ण पदों से इस्तीफा दे दिया। उनके इस फैसले के बाद राज्य की राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है और पार्टी संगठन में अंदरूनी तनाव की अटकलें और मजबूत हो गई हैं। लंबे समय से अहम भूमिका में थीं चंद्रिमा भट्टाचार्य चंद्रिमा भट्टाचार्य TMC की अनुभवी और भरोसेमंद नेताओं में गिनी जाती हैं। वे राज्य सरकार में मंत्री रह चुकी हैं और संगठन से लेकर प्रशासन तक कई अहम जिम्मेदारियां संभाल चुकी हैं। पार्टी के भीतर उनकी पकड़ और सक्रिय भूमिका हमेशा से महत्वपूर्ण रही है। इस्तीफे के पीछे क्या वजह? हालांकि उनके इस्तीफे को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेद और निर्णय प्रक्रिया को लेकर असंतोष से जोड़कर देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ समय से संगठनात्मक स्तर पर भूमिका और कार्यशैली को लेकर असहमति की स्थिति बनी हुई थी, जो अब इस बड़े फैसले के रूप में सामने आई है। TMC के लिए क्यों है यह बड़ा झटका? चंद्रिमा भट्टाचार्य को ममता बनर्जी के बेहद करीबी नेताओं में माना जाता है। ऐसे में उनका सभी पदों से हटना पार्टी संगठन के लिए एक गंभीर संकेत माना जा रहा है। पश्चिम बंगाल में पहले से ही राजनीतिक माहौल काफी गर्म है और ऐसे समय में यह इस्तीफा TMC के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर सकता है। बंगाल की सियासत में बढ़ी हलचल इस घटनाक्रम के बाद विपक्षी दलों को भी सरकार और TMC पर सवाल उठाने का नया मौका मिल सकता है। वहीं पार्टी के भीतर इस फैसले को लेकर मंथन शुरू होने की संभावना है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में TMC को अपने संगठन को फिर से मजबूत करने और अंदरूनी मतभेदों को संभालने की जरूरत होगी। आगे क्या हो सकता है? फिलहाल सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि चंद्रिमा भट्टाचार्य आगे क्या कदम उठाती हैं—क्या वे पार्टी में किसी नई भूमिका में नजर आएंगी या पूरी तरह से दूरी बनाएंगी। TMC नेतृत्व की ओर से भी इस पूरे मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Punjab Congress

Punjab Congress टूट की अटकलों के बीच Channi पर High Command का ब्रेक

पंजाब कांग्रेस (Punjab Congress) में अंदरूनी कलह एक बार फिर खुलकर सामने आती दिख रही है। पार्टी के भीतर बढ़ती बयानबाजी और नेताओं के अलग-अलग रुख ने कांग्रेस हाईकमान की चिंता बढ़ा दी है। यही वजह है कि दिल्ली में बैठे शीर्ष नेतृत्व ने हालात पर नजर रखते हुए पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi) को फिलहाल कोई बड़ा राजनीतिक कदम उठाने से रोकने का फैसला किया है। दूसरी ओर, कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा (Sukhjinder Singh Randhawa) का बयान भी चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने पार्टी की मौजूदा स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर संगठन इस मोड़ पर पहुंच गया है तो आखिर “ये किसका फेलियर है?” उनके इस सवाल को पार्टी नेतृत्व और प्रदेश संगठन पर सीधी टिप्पणी माना जा रहा है। Delhi तक पहुंचा Punjab Congress का विवाद सूत्रों के मुताबिक, पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चल रही गुटबाजी और नेताओं के बीच मतभेद अब केंद्रीय नेतृत्व के लिए भी चिंता का कारण बन चुके हैं। इसी वजह से दिल्ली में लगातार बैठकों का दौर जारी है और वरिष्ठ नेताओं से फीडबैक लिया जा रहा है। बताया जा रहा है कि हाईकमान चाहता है कि पंजाब में कोई भी नेता ऐसा कदम न उठाए, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष और बढ़े या चुनाव से पहले गलत राजनीतिक संदेश जाए। Channi को क्यों दी गई सलाह? जानकारी के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी कुछ अहम राजनीतिक फैसलों पर आगे बढ़ने की तैयारी में थे। हालांकि, पार्टी नेतृत्व ने उन्हें फिलहाल इंतजार करने और सभी निर्णय केंद्रीय नेतृत्व से चर्चा के बाद ही लेने की सलाह दी है। कांग्रेस का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में किसी भी तरह का जल्दबाजी में लिया गया फैसला पार्टी की एकजुटता को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, इस पूरे मामले पर अभी तक कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। Randhawa के बयान ने बढ़ाई सियासी हलचल सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने पंजाब कांग्रेस की स्थिति को लेकर खुलकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर पार्टी के भीतर ऐसी नौबत आ गई है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उनका “ये किसका फेलियर है?” वाला बयान अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रंधावा का यह बयान केवल व्यक्तिगत नाराजगी नहीं, बल्कि संगठन के कामकाज पर भी सवाल खड़ा करता है। चुनाव से पहले Congress के सामने बड़ी चुनौती पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस किसी भी तरह की अंदरूनी टूट या सार्वजनिक विवाद से बचना चाहती है। पार्टी नेतृत्व का पूरा फोकस नेताओं को एक मंच पर लाने और संगठन को मजबूत बनाए रखने पर है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि गुटबाजी समय रहते खत्म नहीं हुई तो इसका सीधा असर चुनावी तैयारियों और पार्टी के प्रदर्शन पर पड़ सकता है। आगे क्या? फिलहाल पंजाब कांग्रेस की सियासत पर सभी की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में हाईकमान की बैठकें, वरिष्ठ नेताओं की भूमिका और संगठनात्मक फैसले यह तय करेंगे कि पार्टी इस संकट से कितनी जल्दी बाहर निकल पाती है। चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए एकजुटता बनाए रखना सबसे बड़ी परीक्षा मानी जा रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Nitin Navin

Nitin Navin in Lucknow: 2027 विधानसभा चुनाव से पहले BJP ने तेज की तैयारी, कई अहम बैठकों का दौर

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नवीन (Nitin Navin) पहली बार उत्तर प्रदेश पहुंचे हैं। उनका यह दौरा राजनीतिक लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि अगले सालों में होने वाले UP Assembly Election 2027 की तैयारियों का रोडमैप यहीं से तय होता नजर आ रहा है। भाजपा ने चुनावी मोर्चे पर अभी से कमर कसनी शुरू कर दी है और संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत बनाने पर पूरा जोर दिया जा रहा है। लखनऊ पहुंचने पर Nitin Navin का पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। एयरपोर्ट से लेकर भाजपा प्रदेश कार्यालय तक कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिला। प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं, मंत्रियों और संगठन से जुड़े पदाधिकारी भी इस मौके पर मौजूद रहे। 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर होगा मंथन दो दिवसीय दौरे के दौरान Nitin Navin प्रदेश पदाधिकारियों, सांसदों, विधायकों, जिला अध्यक्षों और संगठन के प्रमुख नेताओं के साथ कई दौर की बैठकें करेंगे। इन बैठकों में विधानसभा चुनाव 2027 की रणनीति, बूथ मैनेजमेंट, संगठन विस्तार, जनसंपर्क अभियान और कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। भाजपा का मानना है कि मजबूत संगठन किसी भी चुनाव में सबसे बड़ी ताकत होता है। यही वजह है कि पार्टी चुनावी साल से काफी पहले संगठन को नई ऊर्जा देने की कोशिश में जुट गई है। बूथ से लेकर गांव तक मजबूत होगी पकड़ सूत्रों के मुताबिक भाजपा हर बूथ पर अपनी मौजूदगी और मजबूत करना चाहती है। शक्ति केंद्रों को सक्रिय करने, नए कार्यकर्ताओं को जोड़ने और सरकारी योजनाओं की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने के लिए विस्तृत रणनीति तैयार की जा रही है। इसी क्रम में नितिन नवीन अवध क्षेत्र के शक्ति केंद्र संयोजकों के सम्मेलन को भी संबोधित करेंगे। यहां वे कार्यकर्ताओं को चुनावी तैयारियों, सेवा कार्यों और जनसंपर्क अभियान को लेकर दिशा-निर्देश देंगे। जिलों से मिलेगा सीधा फीडबैक दौरे का एक अहम उद्देश्य संगठन की जमीनी स्थिति का आकलन करना भी है। बताया जा रहा है कि अलग-अलग जिलों से आए पदाधिकारियों से सीधा फीडबैक लिया जाएगा। संगठन की मजबूती, स्थानीय चुनौतियों और क्षेत्रवार राजनीतिक समीकरणों पर भी विस्तार से चर्चा होगी। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि चुनावी अभियान शुरू होने से पहले ही हर जिले और हर मंडल में संगठन पूरी तरह सक्रिय नजर आए। विपक्ष की रणनीति पर भी रहेगी नजर भाजपा केवल अपने संगठन को मजबूत करने तक सीमित नहीं रहना चाहती। पार्टी विपक्ष की गतिविधियों और बदलते राजनीतिक समीकरणों पर भी लगातार नजर बनाए हुए है। ऐसे में बैठकों के दौरान सामाजिक, क्षेत्रीय और राजनीतिक मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है, ताकि समय रहते चुनावी रणनीति को धार दी जा सके। क्यों खास है नितिन नवीन का यह दौरा? राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद उत्तर प्रदेश का यह पहला दौरा कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश भाजपा के लिए सबसे अहम राज्यों में शामिल है और 2027 का विधानसभा चुनाव पार्टी के भविष्य की राजनीति तय करने वाला माना जा रहा है। ऐसे में नितिन नवीन की यह यात्रा सिर्फ संगठनात्मक बैठक तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे भाजपा के आगामी चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत के रूप में भी देखा जा रहा है। BJP की आगे की रणनीति क्या होगी? पार्टी का फोकस आने वाले महीनों में बूथ सशक्तिकरण, संगठन विस्तार, नए मतदाताओं तक पहुंच, सोशल मीडिया की सक्रियता और जनसंपर्क कार्यक्रमों को तेज करने पर रहेगा। भाजपा चाहती है कि चुनावी माहौल बनने से पहले ही उसका संगठन हर विधानसभा क्षेत्र में पूरी मजबूती के साथ सक्रिय दिखाई दे। Highlights उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह दौरा आने वाले समय की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि बैठकों के बाद भाजपा संगठन और चुनावी रणनीति को लेकर कौन-कौन से बड़े फैसले सामने आते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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UAPA

Modi Government UAPA Action: पाकिस्तान के 23 आतंकियों पर कसा शिकंजा, Jaish-LeT नेटवर्क को बड़ा झटका

आतंकवाद के खिलाफ लगातार सख्त रुख अपनाने वाली केंद्र सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। गृह मंत्रालय (MHA) ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठनों जैश-ए-मोहम्मद (JeM), लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और उनके सहयोगी नेटवर्क से जुड़े 23 लोगों को आधिकारिक तौर पर आतंकवादी (Individual Terrorist) घोषित कर दिया है। सरकार का कहना है कि ये सभी व्यक्ति लंबे समय से भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे हैं। इन पर जम्मू-कश्मीर में आतंक फैलाने, युवाओं की भर्ती करने, हथियारों और विस्फोटकों की सप्लाई कराने, घुसपैठ की साजिश रचने और आतंकी नेटवर्क को मजबूत करने जैसे गंभीर आरोप हैं। आतंकवाद पर सरकार का बड़ा संदेश हाल के वर्षों में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी रणनीति को और अधिक आक्रामक बनाया है। इसी कड़ी में गृह मंत्रालय ने यह कार्रवाई की है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि आतंकियों को UAPA के तहत सूचीबद्ध करने से उनके आर्थिक नेटवर्क, संपत्तियों और अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों पर कानूनी शिकंजा कसना आसान हो जाएगा। सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब सीमा पार से आतंकी गतिविधियों को रोकने और आतंकवाद की फंडिंग पर लगाम लगाने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। क्यों हुई यह कार्रवाई? गृह मंत्रालय के अनुसार, सूची में शामिल अधिकांश लोग पाकिस्तान से संचालित आतंकी संगठनों के सक्रिय सदस्य या सहयोगी हैं। जांच एजेंसियों की रिपोर्ट में सामने आया कि ये लोग आतंकियों की भर्ती, ट्रेनिंग, फंडिंग, सीमा पार से घुसपैठ कराने और ड्रोन के जरिए हथियार व विस्फोटक पहुंचाने जैसे कामों में शामिल रहे हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को कट्टरपंथ की ओर प्रेरित करने में भी इनकी भूमिका सामने आई है। इन आतंकी संगठनों से जुड़े हैं आरोपी सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, घोषित किए गए आतंकियों का संबंध मुख्य रूप से इन संगठनों से है— देखें 23 घोषित आतंकवादियों की पूरी List UAPA के तहत आतंकवादी घोषित होने का क्या मतलब है? किसी व्यक्ति को UAPA के तहत आतंकवादी घोषित किए जाने के बाद सरकार को उसके खिलाफ व्यापक कानूनी कार्रवाई का अधिकार मिल जाता है। ऐसे व्यक्ति की संपत्तियां जब्त की जा सकती हैं, बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन पर नजर रखी जा सकती है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ जानकारी साझा कर उसके खिलाफ कार्रवाई का रास्ता भी मजबूत होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे आतंकवादी संगठनों की फंडिंग और उनके सहयोगी नेटवर्क पर भी असर पड़ता है। आगे क्या होगा? सुरक्षा एजेंसियां अब इन घोषित आतंकवादियों से जुड़े नेटवर्क, फंडिंग चैनल और सहयोगियों की गतिविधियों पर और अधिक नजर रखेंगी। सरकार का उद्देश्य केवल व्यक्तियों को सूचीबद्ध करना नहीं, बल्कि आतंकवाद के पूरे तंत्र को कमजोर करना है। केंद्र सरकार पहले भी कई संगठनों और व्यक्तियों को UAPA के तहत आतंकवादी घोषित कर चुकी है। ताजा फैसला उसी नीति की अगली कड़ी माना जा रहा है, जिसके जरिए भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी कार्रवाई को लगातार मजबूत कर रहा है।
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Heavy Rain

Heavy Rain Alert: महाराष्ट्र से गुजरात तक बारिश का कहर, 19 लोगों का Rescue; भिवंडी में दुकानें बंद

देश के कई राज्यों में मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है और इसके साथ ही बारिश (Heavy Rain) का कहर भी देखने को मिल रहा है। महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रही भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। कहीं सड़कों पर तीन फीट तक पानी भर गया है, तो कहीं बाढ़ और भूस्खलन ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राहत और बचाव एजेंसियां लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। भिवंडी में तीन फीट पानी, बाजार और दुकानें बंद महाराष्ट्र के ठाणे जिले के भिवंडी शहर में मूसलाधार बारिश के कारण कई इलाकों में करीब तीन फीट तक पानी भर गया। मुख्य सड़कें, बाजार और रिहायशी कॉलोनियां जलमग्न हो गईं। जलभराव की वजह से लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई और कई व्यापारियों ने सुरक्षा के मद्देनजर अपनी दुकानें बंद रखीं। स्थानीय प्रशासन ने जल निकासी के लिए मशीनें लगाई हैं और नागरिकों से अपील की है कि बेहद जरूरी होने पर ही घरों से बाहर निकलें। गुजरात में बाढ़ जैसे हालात, 19 लोगों का रेस्क्यू गुजरात के कई जिलों में लगातार बारिश से नदियां उफान पर हैं। निचले इलाकों में पानी भरने से बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। कई गांवों का संपर्क आसपास के क्षेत्रों से टूट गया। राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और स्थानीय प्रशासन ने संयुक्त अभियान चलाकर अब तक 19 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है। प्रशासन लगातार संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी कर रहा है और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। उज्जैन में तेज बहाव में बहा युवक मध्य प्रदेश के उज्जैन में भारी बारिश के बीच एक युवक नदी के तेज बहाव में बह गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और राहत दल मौके पर पहुंचे और युवक की तलाश शुरू कर दी गई। लगातार बारिश के कारण नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बारिश के दौरान नदी, नाले और पुलों के आसपास जाने से बचें। जम्मू-कश्मीर में Landslide से सड़कें बंद जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के चलते कई जगह भूस्खलन हुआ। पहाड़ों से मलबा और बड़े पत्थर गिरने के कारण कई अहम सड़कें बंद करनी पड़ीं। इससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन और सड़क निर्माण एजेंसियां मलबा हटाकर रास्ते खोलने में जुटी हैं। मौसम सामान्य होने तक लोगों को पहाड़ी मार्गों पर यात्रा टालने की सलाह दी गई है। कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अगले कुछ दिनों तक महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर समेत कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग ने लोगों से नदी-नालों से दूर रहने, जलभराव वाले इलाकों में सावधानी बरतने और स्थानीय प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। राहत कार्य लगातार जारी बारिश से प्रभावित इलाकों में प्रशासन, SDRF और अन्य बचाव एजेंसियां लगातार राहत कार्य चला रही हैं। जलभराव वाले क्षेत्रों से पानी निकालने, फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और बंद सड़कों को दोबारा चालू करने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं। फिलहाल मौसम का मिजाज जल्द बदलने के संकेत नहीं हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को सतर्क रहने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की जरूरत है। छोटी-सी लापरवाही भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sugar

Sugar Rate Hike: त्योहारों से पहले चीनी के दाम बढ़े, Blinkit-Swiggy पर खरीदना हुआ Limited

चीनी (Sugar), जो हर घर की रसोई की रोजमर्रा की जरूरत है, इन दिनों लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है। पिछले कुछ हफ्तों में चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसी बीच Blinkit, Swiggy Instamart, BigBasket और D-Mart जैसे रिटेल और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर चीनी की खरीद को लेकर लिमिट लगाई गई है। कई जगहों पर ग्राहक एक बार में 3 से 5 किलो तक ही चीनी खरीद पा रहे हैं। यानी अगर घर में ज्यादा मात्रा में चीनी खरीदने की जरूरत है, तो एक साथ बड़ी खरीदारी करना अब आसान नहीं है। Sugar Price: एक महीने में तेजी से बढ़े दाम Sugar की कीमतों में हालिया तेजी ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब ₹48 प्रति किलो के आसपास थी, जो अगस्त में बढ़कर ₹55 से ऊपर पहुंच गई। इसके बाद कुछ बाजारों में कीमतें और ऊपर गई हैं। शहर और बाजार के हिसाब से कीमतों में अंतर जरूर है, लेकिन जिस रफ्तार से दाम बढ़े हैं, उसका असर घर के मासिक बजट पर साफ दिखाई दे रहा है। Online Grocery पर क्यों लगाई गई खरीद Limit? Blinkit और Swiggy Instamart जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर खरीदारी की लिमिट लगाए जाने के पीछे मुख्य वजह उपलब्ध स्टॉक को संतुलित रखना मानी जा रही है। त्योहारी सीजन में चीनी की मांग अचानक बढ़ जाती है। मिठाइयों से लेकर घर में बनने वाले पकवानों तक, इस दौरान चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसे में कंपनियां ज्यादा मात्रा में खरीदारी को रोककर स्टॉक को ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, यह लिमिट हर जगह एक जैसी नहीं है। कुछ स्थानों पर 5 किलो तक की खरीद की अनुमति है, जबकि कुछ जगहों पर इससे कम मात्रा की सीमा दिखाई दे रही है। चीनी महंगी होने की क्या है वजह? चीनी के दाम बढ़ने के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। घरेलू उत्पादन में कमी, मौसम से जुड़ी परेशानियां, बढ़ती मांग और बाजार में स्टॉक को लेकर गतिविधियां कीमतों पर दबाव बना रही हैं। त्योहारी सीजन भी इस समय एक बड़ा फैक्टर है। रक्षाबंधन के बाद अब आने वाले त्योहारों में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने की उम्मीद है। इसका सीधा असर चीनी की खपत पर पड़ सकता है। सरकार ने Duty-Free Sugar Import को दी मंजूरी बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने और घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के Duty-Free Import की अनुमति दी है। सरकार का लक्ष्य बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों पर दबाव कम करना है। इसके अलावा बड़े थोक खरीदारों के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा में भी बदलाव किया गया है। इससे बाजार में जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करने की गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है। आम लोगों के लिए क्या मतलब? फिलहाल इसका सबसे सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो महीने का राशन एक साथ खरीदते हैं। जहां दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खरीद सीमा लागू है, वहां लोगों को जरूरत के हिसाब से छोटी मात्रा में चीनी खरीदनी पड़ सकती है। दूसरी तरफ, सरकार की ओर से सप्लाई बढ़ाने के कदमों के बाद बाजार में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। अगर नई चीनी समय पर बाजार में पहुंचती है और त्योहारी मांग के मुताबिक स्टॉक उपलब्ध रहता है, तो कीमतों में आगे राहत मिल सकती है। Sugar Price पर आगे रहेगी नजर चीनी के बढ़ते दाम इस समय सिर्फ घरेलू बजट का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि आने वाले त्योहारी सीजन के लिए भी अहम हैं। सरकार, मिलों और रिटेल कंपनियों के फैसलों पर अब बाजार की नजर रहेगी। फिलहाल ग्राहकों के लिए बेहतर यही है कि जरूरत के मुताबिक ही खरीदारी करें और अलग-अलग दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कीमतों की तुलना कर लें। आने वाले दिनों में सप्लाई की स्थिति साफ होने के साथ चीनी के दाम में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
Gold-Silver

Gold-Silver Price: त्योहार से पहले मिली राहत, सोना-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट

Gold-Silver Price Today: रक्षाबंधन की खरीदारी के बीच सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए बाजार से राहत वाली खबर आई है। 27 अगस्त 2026 को सोने और चांदी दोनों के भाव में गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम सस्ता होकर ₹1,58,477 पर आ गया। वहीं, 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 घटकर करीब ₹2,40,168 रह गया। त्योहार से ठीक पहले कीमतों में आई इस कमी से उन लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है, जो राखी के मौके पर बहन या परिवार के लिए सोने-चांदी की ज्वेलरी खरीदने का मन बना रहे हैं। Gold Price Today: सोने के भाव में ₹2,860 की गिरावट 27 अगस्त को 24 कैरेट सोने की कीमत में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली। IBJA आधारित आंकड़ों के अनुसार, सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम टूटकर ₹1,58,477 पर पहुंच गया। वहीं, 23 कैरेट सोना करीब ₹1,57,842, 22 कैरेट सोना लगभग ₹1,45,165 और 18 कैरेट सोना करीब ₹1,18,858 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर रहा। हालांकि, यहां एक बात ध्यान रखना जरूरी है कि शहर और ज्वेलर के हिसाब से Gold Rate थोड़ा अलग हो सकता है। ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और दूसरे शुल्क भी जुड़ते हैं। Silver Price Today: चांदी भी हुई ₹2,791 सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट आई है। 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 कम होकर करीब ₹2,40,168 पर आ गया। चांदी में पिछले दिनों तेजी देखने को मिली थी, इसलिए मौजूदा गिरावट के बावजूद इसका भाव काफी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में चांदी की मांग बढ़ने से इसकी कीमत पर भी असर पड़ सकता है। Raksha Bandhan से पहले क्यों खास है Gold-Silver Price? रक्षाबंधन के मौके पर लोग सिर्फ राखी और मिठाई ही नहीं खरीदते, बल्कि कई परिवार इस दिन सोने या चांदी की छोटी ज्वेलरी खरीदना भी पसंद करते हैं। ऐसे में त्योहार से एक दिन पहले Gold और Silver के दाम में आई गिरावट खरीदारों के लिए अच्छी खबर मानी जा रही है। अगर आप भी खरीदारी की तैयारी कर रहे हैं तो बाजार में जाने से पहले अपने शहर का ताजा रेट जरूर देख लें। ऑनलाइन दिखने वाला IBJA या बुलियन रेट और ज्वेलरी शॉप का अंतिम बिल एक जैसा होना जरूरी नहीं है। सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान सोने की ज्वेलरी खरीदते समय केवल Gold Rate देखना काफी नहीं है। बिल बनते समय मेकिंग चार्ज, GST और अन्य शुल्क जुड़ सकते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले ज्वेलर से पूरी कीमत का ब्रेकअप मांगना बेहतर रहेगा। साथ ही, सोने की शुद्धता के लिए BIS Hallmark जरूर जांचें। इससे आपको खरीदे जा रहे सोने की शुद्धता के बारे में भरोसा मिलता है। आगे क्या हो सकता है Gold और Silver का भाव? सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, ब्याज दरों की उम्मीद और निवेशकों की खरीदारी जैसे कई फैक्टर कीमती धातुओं के भाव को प्रभावित करते हैं। इसलिए आज आई गिरावट को देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि आने वाले दिनों में कीमतें लगातार नीचे जाएंगी। बाजार की चाल बदलने में ज्यादा समय नहीं लगता। Gold-Silver Price Today का सीधा अपडेट रक्षाबंधन से पहले 24 कैरेट Gold करीब ₹2,860 सस्ता होकर ₹1,58,477 प्रति 10 ग्राम और Silver करीब ₹2,791 गिरकर ₹2,40,168 प्रति किलो पर आ गई है। अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने जा रहे हैं, तो अंतिम खरीदारी से पहले अपने स्थानीय बाजार का लेटेस्ट रेट जरूर जांचें।
Raksha Bandhan

Raksha Bandhan 2026: राखी बांधने से पहले जान लें Bhadra का समय, ये है शुभ Muhurat

Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन के रिश्ते में प्यार, अपनापन और थोड़ी-सी नोकझोंक हमेशा बनी रहती है। इन्हीं खूबसूरत रिश्तों को सेलिब्रेट करने वाला रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। राखी को लेकर इस बार एक सवाल काफी लोगों के मन में है—27 अगस्त या 28 अगस्त, आखिर किस दिन भाई की कलाई पर राखी बांधना शुभ रहेगा? पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। Raksha Bandhan 2026 Date: 27 या 28 अगस्त? रक्षाबंधन सावन मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे के बाद शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे तक रहेगी। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए इसी दिन रक्षाबंधन मनाने की परंपरा रहेगी। यानी बहनें 28 अगस्त को भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। Rakhi Shubh Muhurat 2026: इस समय बांधें राखी 28 अगस्त को राखी बांधने के लिए सुबह का समय शुभ माना जा रहा है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार सुबह करीब 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का समय बताया गया है। हालांकि, शुभ मुहूर्त में शहर के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए अगर आप किसी खास शहर में हैं, तो वहां के पंचांग से समय जरूर मिला लें। Bhadra Kaal: इस बार नहीं होगी बड़ी परेशानी रक्षाबंधन पर भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता। यही वजह है कि हर साल राखी बांधने से पहले लोग भद्रा समाप्त होने का इंतजार करते हैं। इस बार राहत की बात यह है कि 28 अगस्त को राखी बांधने के प्रमुख समय में भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। ऐसे में बहनों को राखी बांधने के लिए भद्रा खत्म होने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। Raksha Bandhan 2026: एक नजर में पूरी जानकारी जानकारी विवरण रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार पर्व सावन पूर्णिमा पूर्णिमा शुरुआत 27 अगस्त की सुबह पूर्णिमा समाप्त 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे राखी बांधने का शुभ समय सुबह करीब 5:57 से 9:48 बजे तक भद्रा 28 अगस्त के प्रमुख राखी मुहूर्त में नहीं Rakhi बांधने की पूजा विधि रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करके भगवान का ध्यान करें और पूजा की तैयारी करें। राखी की थाली में रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, फूल, मिठाई और राखी रखें। भाई को आसन पर बैठाकर पहले तिलक लगाएं। इसके बाद अक्षत लगाकर आरती करें और शुभ मुहूर्त में उसकी कलाई पर राखी बांधें। फिर मिठाई खिलाकर भाई के सुखी और खुशहाल जीवन की कामना करें। भाई भी बहन को प्यार और सम्मान के साथ उपहार देता है और हर परिस्थिति में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प करता है। Raksha Bandhan का असली मतलब क्या है? राखी का धागा देखने में भले ही छोटा हो, लेकिन इसके पीछे छिपी भावना बहुत बड़ी है। बचपन में एक-दूसरे से लड़ने वाले भाई-बहन जब बड़े होते हैं तो यही रिश्ता सबसे मजबूत सहारा बन जाता है। रक्षाबंधन इसी भरोसे और अपनापन को फिर से महसूस करने का दिन है। इसलिए इस बार राखी बांधते समय सिर्फ मुहूर्त ही नहीं, बल्कि उस रिश्ते की मिठास को भी याद रखें, जो जिंदगी के हर पड़ाव पर साथ चलती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Kanpur

Kanpur Plane Crash: अचानक नीचे गिरा Training Plane, दो पायलटों की मौत

उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur) से गुरुवार को एक बेहद दुखद खबर सामने आई। गंगा बैराज के पास नत्थूपुरवा गांव के नजदीक एक Twin-Engine Training Aircraft खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में सवार इंस्ट्रक्टर पायलट और ट्रेनी पायलट की मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने इलाके को घेरकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। Training Flight के दौरान हुआ हादसा मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विमान ट्रेनिंग उड़ान पर था और इसी दौरान हादसे का शिकार हो गया। यह चार सीटों वाला ट्विन-इंजन विमान था। शुरुआती जानकारी में बताया गया कि विमान नीचे गिरने से पहले आसपास के लोगों ने तेज आवाज सुनी थी। हालांकि, उस आवाज की वजह क्या थी, इसे लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि विमान गंगा बैराज के करीब नत्थूपुरवा गांव के पास खुले खेत में गिरा। हादसा आबादी वाले इलाके से कुछ दूरी पर हुआ, जिसके बाद स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। हादसे के बाद मची अफरा-तफरी विमान के खेत में गिरने की सूचना मिलते ही पुलिस और इमरजेंसी टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। दुर्घटनाग्रस्त विमान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था और उसका मलबा खेत में बिखरा मिला। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित किया और दोनों पायलटों को मलबे से बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। शुरुआती रिपोर्टों में एक पायलट की मौत और दूसरे के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई थी। बाद में पुलिस अधिकारियों के हवाले से दोनों पायलटों की मौत की पुष्टि हुई। Crash की असली वजह अभी सामने नहीं आई कानपुर Plane Crash की वजह फिलहाल साफ नहीं है। शुरुआती स्तर पर विमान के अचानक नियंत्रण खोने और नीचे गिरने की बात सामने आई है, लेकिन तकनीकी खराबी, इंजन से जुड़ी समस्या या किसी अन्य कारण की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अधिकारियों की ओर से दुर्घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। विमान के मलबे, उड़ान से जुड़ी जानकारी और घटनास्थल से मिले सबूतों की जांच के बाद ही Crash की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी। Aviation Safety पर फिर उठे सवाल कानपुर में हुआ यह हादसा Flight Training के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल खड़े करता है। हालांकि, अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसा किस वजह से हुआ और क्या इसके पीछे कोई तकनीकी या संचालन संबंधी कारण था। फिलहाल प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर मौजूद हैं और मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। कानपुर विमान हादसे से जुड़ी नई जानकारी जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी। Kanpur Plane Crash Latest Update: गंगा बैराज के पास Training Aircraft के क्रैश होने से दो पायलटों की मौत ने इलाके में शोक का माहौल पैदा कर दिया है। हादसे की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही साफ होगी।
Share Market

Share Market Today: Sensex 77,250 के करीब, Nifty भी टूटा; जानें बाजार में क्यों आई गिरावट

भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) में गुरुवार, 27 अगस्त को कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty बढ़त के साथ खुले, लेकिन कुछ ही देर बाद बाजार की चाल बदल गई। बिकवाली बढ़ने से दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में पहुंच गए। सुबह 10:30 बजे Sensex 123.89 अंक की गिरावट के साथ 77,349.05 पर था, जबकि Nifty 24.60 अंक टूटकर 24,183.15 पर कारोबार कर रहा था। Sensex-Nifty पर बढ़ा दबाव गुरुवार की शुरुआत बाजार के लिए सकारात्मक रही। Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से निवेशकों को कुछ राहत मिली, लेकिन यह बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं पाई। Nifty 24,200 के स्तर के नीचे चला गया, वहीं Sensex भी शुरुआती बढ़त गंवाकर कमजोर हो गया। इससे पहले सुबह 10:13 बजे Reuters के आंकड़ों में Sensex 77,379.50 और Nifty 24,191.85 पर था। यानी उस समय दोनों इंडेक्स में हल्की गिरावट दर्ज की जा रही थी। FMCG और Media Shares में बिकवाली सेक्टोरल कारोबार की बात करें तो FMCG शेयरों पर दबाव नजर आया। शुरुआती कारोबार में Nifty FMCG इंडेक्स भी लाल निशान में था। इसके साथ ही Media शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। सुबह 10:30 बजे Nifty Media करीब 0.60 फीसदी नीचे 1,601.30 पर कारोबार कर रहा था। Media इंडेक्स इससे पहले लगातार दो कारोबारी सत्रों में बढ़त दर्ज कर चुका था। ऐसे में आज की गिरावट को कुछ हद तक मुनाफावसूली से भी जोड़कर देखा जा रहा है। HDFC Bank बना बाजार पर दबाव का बड़ा कारण आज बाजार में HDFC Bank का प्रदर्शन भी निवेशकों के रडार पर रहा। शेयर में करीब 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। Reuters के मुताबिक, अमेरिका में बैंक और उसके दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ दायर एक securities lawsuit की खबर के बाद शेयर पर दबाव बढ़ा। Upstox के अनुसार, HDFC Bank में बिकवाली के चलते Sensex दिन के ऊपरी स्तर से करीब 300 अंक नीचे आया, जबकि Nifty 24,200 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे फिसल गया। Global Market से मिले-जुले संकेत भारतीय बाजार को एक तरफ Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से सहारा मिला। Brent crude करीब 87.4 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया था। ईरान और ओमान के बीच Strait of Hormuz को लेकर बातचीत आगे बढ़ने की खबरों से तेल आपूर्ति को लेकर चिंता कुछ कम हुई है। दूसरी ओर, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों को लेकर बनी चिंता ने निवेशकों को थोड़ा सतर्क रखा। यही वजह रही कि एशियाई बाजारों में मजबूती के बावजूद भारतीय बाजार में तेजी टिक नहीं सकी। निवेशकों की नजर अब बाजार की अगली चाल पर फिलहाल घरेलू बाजार में तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। एक तरफ कच्चे तेल में नरमी और मजबूत ग्लोबल टेक्नोलॉजी संकेत सकारात्मक हैं, तो दूसरी तरफ HDFC Bank जैसे बड़े शेयरों में कमजोरी और सेक्टोरल बिकवाली बाजार पर दबाव बना रही है। ऐसे माहौल में Sensex और Nifty की आगे की दिशा, 24,200 के आसपास Nifty की चाल और प्रमुख सेक्टर्स में खरीदारी-बिकवाली पर निवेशकों की नजर रहेगी। बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय लेना बेहतर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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