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Raksha Bandhan

Raksha Bandhan 2026: राखी बांधने से पहले जान लें Bhadra का समय, ये है शुभ Muhurat

Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन के रिश्ते में प्यार, अपनापन और थोड़ी-सी नोकझोंक हमेशा बनी रहती है। इन्हीं खूबसूरत रिश्तों को सेलिब्रेट करने वाला रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। राखी को लेकर इस बार एक सवाल काफी लोगों के मन में है—27 अगस्त या 28 अगस्त, आखिर किस दिन भाई की कलाई पर राखी बांधना शुभ रहेगा? पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। Raksha Bandhan 2026 Date: 27 या 28 अगस्त? रक्षाबंधन सावन मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे के बाद शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे तक रहेगी। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए इसी दिन रक्षाबंधन मनाने की परंपरा रहेगी। यानी बहनें 28 अगस्त को भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। Rakhi Shubh Muhurat 2026: इस समय बांधें राखी 28 अगस्त को राखी बांधने के लिए सुबह का समय शुभ माना जा रहा है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार सुबह करीब 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का समय बताया गया है। हालांकि, शुभ मुहूर्त में शहर के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए अगर आप किसी खास शहर में हैं, तो वहां के पंचांग से समय जरूर मिला लें। Bhadra Kaal: इस बार नहीं होगी बड़ी परेशानी रक्षाबंधन पर भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता। यही वजह है कि हर साल राखी बांधने से पहले लोग भद्रा समाप्त होने का इंतजार करते हैं। इस बार राहत की बात यह है कि 28 अगस्त को राखी बांधने के प्रमुख समय में भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। ऐसे में बहनों को राखी बांधने के लिए भद्रा खत्म होने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। Raksha Bandhan 2026: एक नजर में पूरी जानकारी जानकारी विवरण रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार पर्व सावन पूर्णिमा पूर्णिमा शुरुआत 27 अगस्त की सुबह पूर्णिमा समाप्त 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे राखी बांधने का शुभ समय सुबह करीब 5:57 से 9:48 बजे तक भद्रा 28 अगस्त के प्रमुख राखी मुहूर्त में नहीं Rakhi बांधने की पूजा विधि रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करके भगवान का ध्यान करें और पूजा की तैयारी करें। राखी की थाली में रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, फूल, मिठाई और राखी रखें। भाई को आसन पर बैठाकर पहले तिलक लगाएं। इसके बाद अक्षत लगाकर आरती करें और शुभ मुहूर्त में उसकी कलाई पर राखी बांधें। फिर मिठाई खिलाकर भाई के सुखी और खुशहाल जीवन की कामना करें। भाई भी बहन को प्यार और सम्मान के साथ उपहार देता है और हर परिस्थिति में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प करता है। Raksha Bandhan का असली मतलब क्या है? राखी का धागा देखने में भले ही छोटा हो, लेकिन इसके पीछे छिपी भावना बहुत बड़ी है। बचपन में एक-दूसरे से लड़ने वाले भाई-बहन जब बड़े होते हैं तो यही रिश्ता सबसे मजबूत सहारा बन जाता है। रक्षाबंधन इसी भरोसे और अपनापन को फिर से महसूस करने का दिन है। इसलिए इस बार राखी बांधते समय सिर्फ मुहूर्त ही नहीं, बल्कि उस रिश्ते की मिठास को भी याद रखें, जो जिंदगी के हर पड़ाव पर साथ चलती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sawan

Sawan Somwar: उज्जैन से Devghar तक गूंजा हर-हर महादेव, Kanwar Yatra को लेकर खास इंतजाम

सावन (Sawan) के पहले सोमवार पर सोमवार की सुबह से ही देशभर के शिवालयों में हर-हर महादेव के जयकारे गूंज रहे हैं। भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों का रुख कर रहे हैं। मध्य प्रदेश के उज्जैन में बाबा महाकाल की सवारी को लेकर खास उत्साह है, तो झारखंड के देवघर में कांवड़ियों की लंबी कतार ने शहर की तस्वीर ही बदल दी है। वहीं उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में Kanwar Yatra को देखते हुए स्कूल-कॉलेज बंद रखने का फैसला लिया गया है। उज्जैन में Mahakal की सवारी को लेकर उत्साह सावन के पहले सोमवार पर उज्जैन का माहौल पूरी तरह शिवमय नजर आ रहा है। Mahakaleshwar Temple में बाबा महाकाल के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में सुबह से ही भक्तों की आवाजाही बनी हुई है। सोमवार को बाबा महाकाल की पारंपरिक सवारी निकाली जाएगी। इसे लेकर प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की तैयारियां की हैं। सवारी के रास्ते में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। बाबा महाकाल की सवारी उज्जैन की धार्मिक परंपरा का अहम हिस्सा है। सावन में इसे देखने और बाबा के दर्शन के लिए दूर-दूर से लोग शहर पहुंचते हैं। Devghar में 5 KM तक पहुंची Kanwariyon की लाइन झारखंड के देवघर में सावन के पहले सोमवार पर भक्तों की भीड़ अपने चरम पर पहुंचती दिखाई दे रही है। Baba Baidyanath Dham में जल चढ़ाने के लिए बड़ी संख्या में कांवड़िए पहुंच रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कांवड़ियों की कतार करीब 5 किलोमीटर तक लंबी हो गई है। कई श्रद्धालु घंटों इंतजार करने के बाद बाबा बैद्यनाथ के दर्शन कर रहे हैं। सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर देवघर पहुंचने वाले कांवड़ियों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। कतार में खड़े श्रद्धालुओं के बीच थकान के बावजूद उत्साह नजर आ रहा है। हर तरफ बोल बम और हर-हर महादेव के जयकारे सुनाई दे रहे हैं। Muzaffarnagar में School-College बंद उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में Kanwar Yatra को देखते हुए स्कूल और कॉलेज बंद रखने का निर्णय लिया गया है। कांवड़ मार्ग पर श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने यह कदम उठाया है। कांवड़ यात्रा के दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सड़कों पर श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ती है। ऐसे में कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव भी बढ़ जाता है। स्कूल-कॉलेज बंद रखने का उद्देश्य विद्यार्थियों की आवाजाही कम करना और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना है। शिव मंदिरों में सुबह से लंबी कतारें सावन के पहले सोमवार का असर सिर्फ उज्जैन, देवघर और मुजफ्फरनगर तक सीमित नहीं है। देश के अलग-अलग हिस्सों में शिव मंदिरों के बाहर सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें नजर आ रही हैं। श्रद्धालु बेलपत्र, फूल और जल लेकर भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। कई मंदिरों में विशेष पूजा और अभिषेक का आयोजन किया गया है। सावन के सोमवार को लेकर भक्तों में खास आस्था रहती है, इसलिए सुबह से ही मंदिरों में रौनक देखने को मिल रही है। आस्था के साथ प्रशासन की भी परीक्षा सावन और कांवड़ यात्रा के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए प्रशासन के सामने भीड़ संभालने, ट्रैफिक मैनेजमेंट और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती रहती है। उज्जैन और देवघर जैसे प्रमुख धार्मिक शहरों में श्रद्धालुओं की सुविधा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। फिलहाल सावन के पहले सोमवार पर देश के कई हिस्सों में एक ही तस्वीर दिखाई दे रही है—हाथों में कांवड़, जुबां पर भोलेनाथ का नाम और मंदिरों में दर्शन के लिए लंबी कतारें। आस्था के इस माहौल में महाकाल की सवारी और देवघर की कांवड़ यात्रा श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rath Yatra 2026

Rath Yatra 2026: अहमदाबाद में बदले सुरक्षा इंतजाम, हाथियों के पैर बांधकर निकाली यात्रा; Puri में निभेगी सदियों पुरानी रस्म

Rath Yatra 2026: भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा देशभर में आस्था और उत्साह के साथ मनाई जा रही है। गुजरात के अहमदाबाद और ओडिशा के पुरी में इस बार भी लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन के लिए उमड़े। हालांकि अहमदाबाद की रथयात्रा इस बार एक खास वजह से rerचर्चा में रही। पिछले साल हाथियों के बेकाबू होने की घटना के बाद प्रशासन ने सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यात्रा में शामिल हाथियों के पैरों को हल्के बंधन में रखा। दूसरी ओर पुरी में सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार गजपति महाराज सोने की झाड़ू से भगवान के रथों की सफाई करेंगे। पिछले साल की घटना के बाद बदली तैयारी अहमदाबाद की जगन्नाथ रथयात्रा देश की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक रथयात्राओं में से एक मानी जाती है। लेकिन वर्ष 2025 की यात्रा के दौरान तीन हाथी अचानक बेकाबू हो गए थे। भीड़ में अफरा-तफरी मच गई थी और कई श्रद्धालु घायल हुए थे। घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल उठे थे। इसी अनुभव से सीख लेते हुए इस बार प्रशासन, वन विभाग और पशु चिकित्सकों ने मिलकर विस्तृत सुरक्षा योजना तैयार की। हाथियों के आगे और पीछे के पैरों को हल्की रस्सियों से नियंत्रित रखा गया ताकि वे भीड़ में अचानक तेज़ी से न दौड़ सकें। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम केवल एहतियात के तौर पर उठाया गया है और इसमें पशुओं की सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा गया। सुरक्षा व्यवस्था रही हाई अलर्ट पर रथयात्रा के पूरे मार्ग पर हजारों पुलिसकर्मी तैनात किए गए। ड्रोन कैमरों, सीसीटीवी, कंट्रोल रूम और क्विक रिस्पॉन्स टीम के जरिए हर गतिविधि पर नजर रखी गई। हाथियों के साथ अनुभवी महावत, वन विभाग की टीम और पशु चिकित्सक भी लगातार मौजूद रहे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जगह-जगह मेडिकल कैंप, एम्बुलेंस, पेयजल केंद्र और हेल्प डेस्क बनाए गए। ट्रैफिक को भी पहले से तय डायवर्जन प्लान के अनुसार संचालित किया गया ताकि यात्रा बिना किसी बाधा के संपन्न हो सके। Puri में निभेगी ‘छेरा पहंरा’ की अनोखी परंपरा ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सदियों पुरानी संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है। यहां रथयात्रा के दौरान गजपति महाराज ‘छेरा पहंरा’ नामक विशेष अनुष्ठान करते हैं। इस रस्म में वे सोने की झाड़ू से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथों की सफाई करते हैं और चंदन मिश्रित पवित्र जल का छिड़काव करते हैं। यह परंपरा इस बात का संदेश देती है कि भगवान के सामने हर व्यक्ति समान है। चाहे वह राजा हो या आम भक्त, सभी भगवान के सेवक हैं। लाखों श्रद्धालुओं ने लगाए जयकारे अहमदाबाद और पुरी दोनों शहरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। भगवान जगन्नाथ के जयघोष के बीच भक्तों ने रथों को खींचकर अपनी आस्था व्यक्त की। पूरे वातावरण में भक्ति, उत्साह और पारंपरिक संस्कृति की झलक साफ दिखाई दी। आस्था के साथ सुरक्षा का भी संदेश इस बार की रथयात्रा ने दो महत्वपूर्ण संदेश दिए। पहला, धार्मिक परंपराओं का सम्मान और दूसरा, श्रद्धालुओं की सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं। अहमदाबाद में पिछले साल की घटना से सीख लेकर किए गए इंतजाम और पुरी में सदियों से चली आ रही परंपराओं का निर्वहन, दोनों ने इस आयोजन को और भी खास बना दिया। यही वजह है कि जगन्नाथ रथयात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का भी प्रतीक मानी जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Jagannath Rath Yatra

Jagannath Rath Yatra 2026: Tradition बनाम अलग आयोजन, ISKCON को लेकर पुरी राजा ने उठाई आवाज

भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक Jagannath Puri Rath Yatra को लेकर विवाद बढ़ता नजर आ रहा है। पुरी के राजा ने ISKCON (International Society for Krishna Consciousness) की ओर से अलग समय पर रथयात्रा आयोजित किए जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस मामले में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर भगवान जगन्नाथ की सदियों पुरानी परंपराओं और धार्मिक मर्यादाओं की रक्षा करने की अपील की है। पुरी राजा का कहना है कि Jagannath Rath Yatra सिर्फ एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। इसलिए इससे जुड़े नियमों और परंपराओं का पालन बेहद जरूरी है। ISKCON की अलग रथयात्रा पर क्यों उठा विवाद? ISKCON दुनिया के कई देशों में भगवान कृष्ण और भगवान जगन्नाथ से जुड़े धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करता है। संस्था की ओर से कई जगहों पर Rath Yatra का आयोजन भी किया जाता है। हालांकि, पुरी की मुख्य रथयात्रा की अपनी अलग धार्मिक मान्यता और परंपरागत व्यवस्था है। पुरी राजा ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि अलग-अलग समय पर रथयात्रा आयोजित होने से भगवान जगन्नाथ की परंपरा को लेकर भ्रम पैदा हो सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की है कि इस विषय पर ध्यान दिया जाए और सदियों से चली आ रही धार्मिक व्यवस्था को सुरक्षित रखा जाए। President और PM को लिखा पत्र, परंपरा बचाने की अपील पुरी राजा की ओर से लिखे गए पत्र में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से अनुरोध किया गया है कि भगवान जगन्नाथ से जुड़ी परंपराओं की गरिमा बनाए रखने के लिए उचित कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि पुरी की रथयात्रा केवल ओडिशा की पहचान नहीं है, बल्कि देश-विदेश में रहने वाले करोड़ों भक्तों की भावनाओं से जुड़ी हुई है। ऐसे में इससे जुड़े किसी भी बदलाव को संवेदनशीलता के साथ देखा जाना चाहिए। Jagannath Rath Yatra का है ऐतिहासिक महत्व पुरी की जगन्नाथ रथयात्रा भारत के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक आयोजनों में से एक है। हर साल लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन के लिए पुरी पहुंचते हैं। इस यात्रा में भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होकर गुंडिचा मंदिर की ओर जाते हैं। सदियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी उसी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जाती है। आस्था और Tradition के बीच बढ़ी बहस Jagannath Puri Rath Yatra से जुड़ा यह विवाद एक बार फिर इस बात को सामने लाता है कि धार्मिक परंपराओं और आधुनिक आयोजनों के बीच संतुलन कितना जरूरी है। जहां ISKCON दुनिया भर में भगवान जगन्नाथ और कृष्ण भक्ति का प्रचार करता है, वहीं पुरी की पारंपरिक व्यवस्था से जुड़े लोग मूल परंपराओं और धार्मिक नियमों को बनाए रखने की मांग कर रहे हैं। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि सरकार और संबंधित पक्ष इस मामले में आगे क्या कदम उठाते हैं। फिलहाल, Jagannath Puri Rath Yatra Controversy ने धार्मिक और सामाजिक स्तर पर नई चर्चा शुरू कर दी है।
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Yogini Ekadashi

Yogini Ekadashi 2026: दीपदान के ये 5 आसान उपाय, घर में सुख-समृद्धि आने की है मान्यता

हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व बताया गया है, लेकिन योगिनी एकादशी (Yogini Ekadashi) को भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने वाली प्रमुख एकादशियों में गिना जाता है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं तथा सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, योगिनी एकादशी की शाम घर के कुछ खास स्थानों पर दीपक जलाने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और आर्थिक परेशानियां दूर होने की प्रार्थना की जाती है। अगर आप भी इस शुभ अवसर पर पूजा-पाठ कर रहे हैं, तो जानिए वे पांच स्थान जहां दीपक जलाना शुभ माना जाता है। Yogini Ekadashi 2026 पर इन 5 जगहों पर जरूर जलाएं दीपक 1. मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं घर का मुख्य द्वार सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश द्वार माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि योगिनी एकादशी की शाम यहां घी या तिल के तेल का दीपक जलाने से घर में शुभता का आगमन होता है और मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। 2. तुलसी के पौधे के सामने तुलसी का पौधा भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय माना गया है। योगिनी एकादशी के दिन शाम के समय तुलसी के पास दीपक जलाकर पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आने की मान्यता है। कई परिवार इस दिन तुलसी की परिक्रमा भी करते हैं। 3. पूजा घर में भगवान विष्णु के समक्ष पूजा स्थल पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाना विशेष फलदायी माना जाता है। पूजा के दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना भी शुभ माना जाता है। 4. रसोईघर में वास्तु शास्त्र के अनुसार रसोईघर माता अन्नपूर्णा का स्थान माना जाता है। यहां दीपक जलाने की परंपरा को अन्न और धन की वृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि इससे घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती। 5. ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) घर का उत्तर-पूर्व भाग यानी ईशान कोण सबसे पवित्र दिशा मानी जाती है। इस स्थान पर दीपक जलाने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और परिवार के लिए सुख, शांति एवं आर्थिक उन्नति की कामना की जाती है। योगिनी एकादशी पर पूजा करते समय रखें इन बातों का ध्यान दान-पुण्य का भी है विशेष महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, योगिनी एकादशी के दिन अन्न, वस्त्र, फल, जल और दक्षिणा का दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन किए गए दान और सेवा का विशेष फल प्राप्त होता है तथा जीवन की कई बाधाएं दूर होने की कामना की जाती है। क्या सच में दूर होती है आर्थिक तंगी? धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में योगिनी एकादशी पर दीपदान, व्रत और भगवान विष्णु की आराधना का विशेष महत्व बताया गया है। हालांकि, इन मान्यताओं का आधार आस्था है। इसे धार्मिक विश्वास के रूप में ही देखा जाना चाहिए। नियमित पूजा, सकारात्मक सोच, मेहनत और सही आर्थिक योजना के साथ जीवन में सफलता के अवसर और भी मजबूत हो सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Adhik Maas

Adhik Maas 2026: भक्ति का महीना शुरू, जानें शुभ मंत्र और धार्मिक महत्व

आज से हिंदू पंचांग का सबसे पवित्र और खास समय Adhik Maas 2026 (Purushottam Maas) शुरू हो गया है। इसे सामान्य भाषा में मलमास भी कहा जाता है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह कोई अशुभ समय नहीं, बल्कि भगवान विष्णु को समर्पित अत्यंत शुभ महीना माना जाता है। इस महीने को “पुरुषोत्तम मास” इसलिए कहा जाता है क्योंकि स्वयं भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम देकर सम्मानित किया था। Adhik Maas 2026 क्या है और क्यों खास माना जाता है? अधिकमास हर 2–3 साल में आता है, जब चंद्र और सौर कैलेंडर के बीच अंतर को संतुलित करने के लिए एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार जब किसी देवता ने इस अतिरिक्त महीने को स्वीकार नहीं किया, तब भगवान विष्णु ने इसे अपनाकर इसे भक्ति और साधना का सर्वोच्च समय बना दिया। यही कारण है कि इस महीने में भौतिक कार्यों से ज्यादा आध्यात्मिक गतिविधियों को महत्व दिया जाता है। Purushottam Maas में क्या करना चाहिए (Do’s) इस पूरे महीने में किए गए अच्छे कर्म कई गुना फल देने वाले माने जाते हैं: अधिकमास में क्या नहीं करना चाहिए (Don’ts) इस पवित्र अवधि में कुछ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है: Adhik Maas 2026 के शक्तिशाली मंत्र इस महीने में मंत्र जप का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि इससे मन शांत होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। 1. विष्णु मंत्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”रोज 108 बार जप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। 2. महामंत्र हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरेहरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे 3. शांति मंत्र “शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम्…” Adhik Maas 2026 का महत्व (Human Touch) आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में यह महीना एक तरह से “pause” लेने का मौका देता है। भागदौड़ के बीच कुछ समय अपने मन, विचार और आध्यात्म से जुड़ने का अवसर मिलता है। कई लोग इस महीने में व्रत रखते हैं, पूजा-पाठ बढ़ाते हैं और अपने जीवन में सरलता लाने की कोशिश करते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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वट सावित्री

वट सावित्री 2026: सुहागिन महिलाओं में दिखी आस्था, मंदिरों में उमड़ी भीड़

ज्येष्ठ अमावस्या के मौके पर शनिवार को देशभर में वट सावित्री व्रत श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया गया। सुबह से ही मंदिरों और बरगद के पेड़ों के पास सुहागिन महिलाओं की भीड़ देखने को मिली। महिलाओं ने पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली के लिए व्रत रखकर वट वृक्ष की पूजा की। इस दौरान महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में पूजा-अर्चना की, बरगद के पेड़ के चारों ओर धागा बांधा और सावित्री-सत्यवान की कथा सुनी। कई जगहों पर सामूहिक पूजा का आयोजन भी किया गया, जहां महिलाओं ने पूरे विधि-विधान से व्रत किया। क्यों खास माना जाता है Vat Savitri Vrat? हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत को सुहाग और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार माता सावित्री ने अपने तप, प्रेम और दृढ़ निश्चय से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। तभी से यह व्रत पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य के लिए रखा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि बरगद का पेड़ त्रिदेवों का स्वरूप होता है। इसकी जड़ों में ब्रह्मा, तने में भगवान विष्णु और शाखाओं में भगवान शिव का वास माना जाता है। यही कारण है कि इस दिन वट वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व होता है। परिक्रमा के समय बोलें ये शुभ मंत्र बरगद के पेड़ की परिक्रमा करते समय महिलाएं इस मंत्र का जाप करती हैं— “वट वृक्ष त्वं देववृक्षः त्वं च विष्णुस्वरूपधृक्।पति आयुः प्रदेहि त्वं नमस्ते वटवृक्षाय॥” मान्यता है कि श्रद्धा से इस मंत्र का जाप करने पर वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। ऐसे की जाती है वट सावित्री की पूजा बाजारों में भी दिखी रौनक वट सावित्री व्रत को लेकर पूजा सामग्री, फल, मिठाई और सजावटी सामान की दुकानों पर भी अच्छी भीड़ देखने को मिली। महिलाओं ने पूजा के लिए विशेष रूप से लाल और पीले रंग की सामग्री खरीदी। कई जगहों पर बरगद के पेड़ों को फूलों और रंगोली से सजाया गया। परिवार और रिश्तों से जुड़ा त्योहार वट सावित्री व्रत सिर्फ धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि पति-पत्नी के रिश्ते में विश्वास, प्रेम और समर्पण का प्रतीक भी माना जाता है। बदलते दौर में भी यह पर्व भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों को मजबूती से जोड़कर रखे हुए है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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अक्षय तृतीया

अक्षय तृतीया 2026 Gold नहीं, ये 1 दान दिलाएगा सुख-समृद्धि और Good Luck

अक्षय तृतीया का दिन हिंदू धर्म में बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किया गया हर अच्छा काम—चाहे वो पूजा हो, दान हो या नई शुरुआत—उसका फल कभी खत्म नहीं होता। यही वजह है कि लोग इस दिन को अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के मौके के रूप में देखते हैं। इस साल भी अक्षय तृतीया को लेकर लोगों में खास उत्साह है। जहां एक तरफ बाजारों में सोना-चांदी खरीदने की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दान-पुण्य करने का महत्व भी काफी बढ़ जाता है। क्यों खास है “Ann Daan”? प्रसिद्ध संत Premanand Maharaj का कहना है कि अगर आप अक्षय तृतीया पर सिर्फ एक काम करना चाहते हैं, तो वो है अन्न दान। उनके अनुसार, जरूरतमंद को भोजन या अनाज देना सबसे बड़ा पुण्य है। उनका मानना है कि जो व्यक्ति इस दिन सच्चे मन से गेहूं, चावल या दाल का दान करता है, उसके घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती। ये सिर्फ धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि इंसानियत का सबसे सरल और असरदार तरीका भी है। कैसे करें ये आसान उपाय? अक्षय तृतीया के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की पूजा करें। इसके बाद अपनी क्षमता के अनुसार अन्न का दान करें। आप चाहें तो किसी गरीब परिवार को राशन दे सकते हैं या किसी भूखे व्यक्ति को भोजन करा सकते हैं। ध्यान रखने वाली बात ये है कि दान दिखावे के लिए नहीं, बल्कि सच्चे मन से किया जाए—तभी उसका सही फल मिलता है। सिर्फ सोना खरीदना ही नहीं, ये भी करें अक्सर लोग अक्षय तृतीया को सिर्फ गोल्ड खरीदने से जोड़कर देखते हैं, लेकिन इसका असली महत्व दान और अच्छे कर्मों में छिपा है। इस दिन: दिल से किया छोटा काम, बड़ा असर अक्षय तृतीया हमें ये सिखाती है कि छोटे-छोटे अच्छे काम भी जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। अगर आप इस दिन किसी की मदद करते हैं, तो उसका असर सिर्फ सामने वाले पर ही नहीं, बल्कि आपके जीवन पर भी पड़ता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ram Navami

Ram Navami 2026 सही Date,शुभ मुहूर्त और Puja Samagri पूरी जानकारी

राम नवमी (Ram Navami) हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण त्योहार है। यह दिन भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है और भक्त इस दिन व्रत, पूजा और आरती करके भगवान की कृपा पाने का प्रयास करते हैं। साल 2026 में राम नवमी की तारीख को लेकर लोगों के बीच थोड़ी कन्फ्यूजन है कि यह 26 मार्च को है या 27 मार्च को। आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं। Ram Navami 2026 Date: 26 या 27 मार्च? वर्ष 2026 में राम नवमी 26 मार्च, गुरुवार को पड़ रही है। कई लोग सोचते हैं कि 27 मार्च को मनाना चाहिए, लेकिन हिंदू पंचांग के अनुसार जिस दिन मध्याह्न (दोपहर) में नवमी तिथि आती है, उसी दिन राम नवमी मनाई जाती है, क्योंकि भगवान श्रीराम का जन्म दोपहर में हुआ था। इस कारण 26 मार्च ही मुख्य और शुभ दिन माना जाता है। Shubh Muhurat for Ram Navami 2026 राम नवमी पूजा का सबसे महत्वपूर्ण समय मध्याह्न होता है। इस समय भगवान श्रीराम की पूजा और अभिषेक करना सबसे शुभ माना जाता है। Ram Navami Puja Samagri List राम नवमी की पूजा में निम्न सामग्रियों की आवश्यकता होती है। इन्हें पहले से तैयार करना शुभ माना जाता है: मुख्य सामग्री Ram Navami Puja Vidhi (संक्षेप में) हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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शैलपुत्री

चैत्र नवरात्रि 2026 Day 1 शैलपुत्री माता की आराधना, व्रत और शुभ मुहूर्त

चैत्र नवरात्रि 2026 का पहला दिन 12 मार्च को मनाया जाएगा। यह नवरात्रि वसंत ऋतु के आगमन और माँ दुर्गा के नौ रूपों की आराधना का शुभ समय है। हर दिन माँ के अलग रूप की पूजा की जाती है, और पहले दिन शैलपुत्री माता की उपासना होती है। शैलपुत्री माता – पहला दिन का महत्व ‘शैलपुत्री’ का अर्थ है “पर्वत की कन्या”। माता शैलपुत्री भगवान शिव और पार्वती की पुत्री हैं। उनके वाहन बैल हैं और हाथ में त्रिशूल और कमल धारण है। शैलपुत्री माता धैर्य, साहस और मानसिक स्थिरता का प्रतीक हैं। उनके आशीर्वाद से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति का विकास होता है। शैलपुत्री माता का पूजन और मंत्र व्रत और अनुष्ठान शैलपुत्री माता के दिन विशेष सुझाव हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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T20

IND vs NZ T20 Record: भारत ने Powerplay में बनाए 118 रन, न्यूजीलैंड की करारी हार

भारतीय क्रिकेट टीम ने न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरे T20 इंटरनेशनल मुकाबले में ऐसी बल्लेबाजी की, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा। वेलिंगटन में खेले गए मैच में भारत ने 199 रन का लक्ष्य महज 13.2 ओवर में हासिल कर लिया। अभिषेक शर्मा और वैभव सूर्यवंशी की विस्फोटक बल्लेबाजी के सामने न्यूजीलैंड के गेंदबाज बेबस नजर आए। भारत ने यह मुकाबला 6 विकेट से जीतकर पांच मैचों की सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त बना ली। इस मैच में सिर्फ भारत की जीत ही चर्चा का विषय नहीं रही, बल्कि कई बड़े रिकॉर्ड भी बने। अभिषेक शर्मा ने शतक जड़कर अपनी बल्लेबाजी का दम दिखाया, वहीं युवा वैभव सूर्यवंशी ने छोटी लेकिन बेहद आक्रामक पारी खेलकर दर्शकों का ध्यान खींचा। Abhishek Sharma Century: 38 गेंदों में 113 रन 199 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरे अभिषेक शर्मा ने शुरुआत से ही न्यूजीलैंड के गेंदबाजों पर दबाव बना दिया। उन्होंने सिर्फ 38 गेंदों में 113 रन ठोक दिए। उनकी पारी में 9 चौके और 11 छक्के शामिल रहे। इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 297 से भी ज्यादा रहा। अभिषेक ने मैदान के चारों ओर शॉट लगाए और न्यूजीलैंड की गेंदबाजी रणनीति को पूरी तरह बिगाड़ दिया। उन्होंने महज 35 गेंदों में अपना शतक पूरा किया। यह उनके T20 इंटरनेशनल करियर का चौथा शतक था। इस पारी के साथ अभिषेक के नाम T20 क्रिकेट में कुल 11 शतक हो गए। उन्होंने भारतीय खिलाड़ियों में विराट कोहली के 10 T20 शतकों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। भारतीय बल्लेबाजों में उनसे आगे रोहित शर्मा और सूर्यकुमार यादव के नाम भी T20 इंटरनेशनल शतकों का रिकॉर्ड दर्ज है। Vaibhav Sooryavanshi की तूफानी पारी ने बढ़ाया रोमांच अभिषेक शर्मा के साथ पारी की शुरुआत करने उतरे वैभव सूर्यवंशी ने भी अपने बल्ले से शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने केवल 19 गेंदों में 45 रन बनाए। उनकी पारी ने भारत को शुरुआत से ही बड़े स्कोर की राह पर बनाए रखा। वैभव को इस मुकाबले में ओपनिंग का मौका मिला और उन्होंने इसका पूरा फायदा उठाया। न्यूजीलैंड के खिलाफ पिछले मैच में बड़ी पारी नहीं खेल पाने के बाद इस प्रदर्शन ने उनके आत्मविश्वास को भी मजबूती दी होगी। दोनों बल्लेबाजों ने शुरुआती ओवरों में तेजी से रन बनाकर मुकाबले को एकतरफा बना दिया। हालांकि वैभव 45 रन बनाकर आउट हो गए, लेकिन तब तक भारतीय टीम लक्ष्य के काफी करीब पहुंच चुकी थी। भारत ने Powerplay में बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड इस मुकाबले का सबसे खास पहलू भारतीय टीम की शुरुआती बल्लेबाजी रही। भारत ने पावरप्ले यानी पहले छह ओवर में बिना विकेट गंवाए 118 रन बना दिए। पुरुष T20 इंटरनेशनल क्रिकेट में यह पावरप्ले का नया सर्वोच्च टीम स्कोर बना। भारत ने सिर्फ 14 गेंदों में 50 रन पूरे किए। इसके बाद टीम ने पांच ओवर में ही 100 रन का आंकड़ा पार कर लिया। किसी पूर्ण सदस्य देश की टीम द्वारा T20 इंटरनेशनल में इतनी तेजी से 100 रन बनाना भी एक नया रिकॉर्ड रहा। इन उपलब्धियों ने दिखाया कि भारतीय टीम ने लक्ष्य का पीछा करते समय किस तरह आक्रामक रुख अपनाया। न्यूजीलैंड के गेंदबाजों को शुरुआती ओवरों में विकेट लेने का मौका नहीं मिला और रन लगातार तेजी से बनते रहे। Daryl Mitchell की पारी भी नहीं दिला सकी न्यूजीलैंड को जीत इससे पहले न्यूजीलैंड ने टॉस के बाद पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 20 ओवर में 3 विकेट पर 198 रन बनाए थे। टीम की ओर से डेरिल मिचेल ने नाबाद 89 रन की शानदार पारी खेली। उन्होंने 52 गेंदों का सामना किया और न्यूजीलैंड को मजबूत स्कोर तक पहुंचाया। फिन एलन ने 25 गेंदों में 40 रन बनाए, जबकि बेवन जैकब्स ने 23 गेंदों में नाबाद 39 रन का योगदान दिया। एक समय न्यूजीलैंड की टीम 200 से ज्यादा रन बनाने की स्थिति में दिखाई दे रही थी, लेकिन भारतीय गेंदबाजों ने आखिरी सात ओवर में रन बनाने की रफ्तार पर लगाम लगाई। भारत की ओर से अर्शदीप सिंह और अक्षर पटेल ने एक-एक विकेट लिया। न्यूजीलैंड की पारी के अंतिम ओवरों में भारतीय गेंदबाजों ने बेहतर लाइन और लेंथ के साथ गेंदबाजी की, जिससे मेजबान टीम 198 रन तक ही पहुंच सकी। 13.2 ओवर में खत्म हुआ मुकाबला 199 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत ने केवल 13.2 ओवर में 199/4 का स्कोर बना लिया। अभिषेक शर्मा के आउट होने के बाद न्यूजीलैंड ने कुछ विकेट लेकर वापसी की कोशिश की, लेकिन तब तक मैच का रुख काफी हद तक भारत के पक्ष में जा चुका था। अभिषेक को 113 रन की शानदार पारी के लिए Player of the Match चुना गया। भारत ने 40 गेंद शेष रहते मुकाबला अपने नाम कर लिया। यह जीत भारतीय टीम के लिए इसलिए भी अहम रही, क्योंकि इसके साथ ही टीम ने पांच मैचों की T20 इंटरनेशनल सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली। अब न्यूजीलैंड के पास बाकी दो मुकाबलों में सीरीज का अंतर कम करने का मौका रहेगा, जबकि भारत की नजरें अपना विजयी अभियान जारी रखने पर होंगी। IND vs NZ: मैच का पूरा Scorecard निष्कर्ष अभिषेक शर्मा की रिकॉर्डतोड़ पारी और वैभव सूर्यवंशी की आक्रामक बल्लेबाजी ने तीसरे T20 मुकाबले को भारतीय क्रिकेट के लिए यादगार बना दिया। 199 रन जैसे बड़े लक्ष्य को इतनी तेजी से हासिल करना टीम की बल्लेबाजी क्षमता को दिखाता है। अब सभी की नजरें सीरीज के अगले मुकाबले पर रहेंगी, जहां भारतीय टीम अपनी जीत की लय बनाए रखने की कोशिश करेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

खड़गे की कथित टिप्पणी के विरोध में दिल्ली BJP का प्रदर्शन, हर्ष मल्होत्रा समेत 200 कार्यकर्ता हिरासत में

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता को लेकर कथित टिप्पणी के विरोध में सोमवार को दिल्ली भाजपा ने प्रदर्शन किया। प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा के नेतृत्व में करीब 2 हजार कार्यकर्ता राजाजी मार्ग स्थित खड़गे के आवास की ओर मार्च करने निकले। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया। इस दौरान हर्ष मल्होत्रा समेत करीब 200 पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर पांच बसों से मंदिर मार्ग थाने ले जाया गया। सेना भवन के पास जुटे भाजपा कार्यकर्ता भाजपा के मुताबिक, पटना में एक सभा के दौरान मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसके विरोध में भाजपा के पूर्वांचल, युवा और ओबीसी मोर्चा के कार्यकर्ता सेना भवन के पास एकत्र हुए। प्रदर्शन में भाजपा के प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे सहित अन्य नेता भी शामिल हुए। नेताओं ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करने के बाद खड़गे के आवास की ओर मार्च शुरू किया। बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश, पुलिस ने हिरासत में लिया मार्च के दौरान पुलिस ने कुशक रोड मोड़ पर बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया। कुछ कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड पार कर आगे बढ़ने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक लिया और हिरासत में ले लिया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा समेत करीब 200 लोगों को पांच बसों में बैठाकर मंदिर मार्ग थाने ले जाया गया। हर्ष मल्होत्रा बोले- खड़गे को माफी मांगनी चाहिए हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष को अपनी कथित टिप्पणी के लिए माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार चुनावी हार के कारण कांग्रेस नेतृत्व हताश है और मर्यादाहीन बयानबाजी कर रहा है। वहीं, भाजपा के प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि प्रधानमंत्री किसी एक राजनीतिक दल के नहीं, बल्कि पूरे देश के हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के परिवार के प्रति अपमानजनक टिप्पणी स्वीकार नहीं की जा सकती। सहस्त्रबुद्धे ने कांग्रेस पर वंशवाद की राजनीति करने का आरोप भी लगाया। फिलहाल यह प्रदर्शन भाजपा की ओर से खड़गे की कथित टिप्पणी के विरोध में किया गया, जबकि टिप्पणी को लेकर लगाए गए आरोपों को संबंधित बयान और उसके संदर्भ के आधार पर देखा जाना जरूरी है।

छठ की तैयारियों का जायजा लेने सुर घाट पहुंचीं CM रेखा गुप्ता, अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

नई दिल्ली। लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा को लेकर दिल्ली में तैयारियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अधिकारियों के साथ बैठक के बाद सुर घाट पहुंचकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि घाट पर आने वाले किसी भी श्रद्धालु और व्रती को असुविधा नहीं होनी चाहिए। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री के साथ कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने घाट पर साफ-सफाई, सुरक्षा, प्रकाश व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए किए जा रहे इंतजामों का जायजा लिया। सुरक्षा और बैरिकेडिंग के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अधिकारियों से कहा कि छठ पूजा के दौरान घाट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए जाएं। भीड़ को व्यवस्थित रखने के लिए उचित बैरिकेडिंग सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने शाम और सुबह भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के दौरान घाट परिसर में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था रखने को कहा। इसके साथ ही घाट और आसपास के क्षेत्रों में नियमित साफ-सफाई, पीने के पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। स्वच्छ और सुरक्षित माहौल में कर सकेंगे छठ पूजा मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि छठ केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और आस्था का प्रतीक है। सरकार की प्राथमिकता है कि सभी व्रतियों और श्रद्धालुओं को स्वच्छ, सुरक्षित और सुव्यवस्थित वातावरण मिले। उन्होंने अधिकारियों को सभी व्यवस्थाएं समय पर पूरी करने और श्रद्धालुओं की सुविधा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए, ताकि लोग शांतिपूर्ण माहौल में भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित कर सकें।

छत्तीसगढ़ में भीषण सड़क हादसा: यात्री बस ट्रक से टकराई, 5 की मौत, 14 घायल

बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में सोमवार तड़के नेशनल हाईवे-130 पर भीषण सड़क हादसा हो गया। अंबिकापुर से रायपुर आ रही यात्री बस सड़क पर खड़े खराब ट्रक के पिछले हिस्से से टकरा गई। हादसे में बस ड्राइवर और हेल्पर समेत पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि 14 यात्री घायल हुए हैं। घायलों में छह की हालत गंभीर होने पर उन्हें रायपुर रेफर किया गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कुछ यात्री बस के अंदर फंस गए। उन्हें बाहर निकालने के लिए गैस कटर और अन्य उपकरणों की मदद लेनी पड़ी। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, हादसे की वजह ड्राइवर को झपकी आना बताई जा रही है। हालांकि, दुर्घटना के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है। सुबह 5:30 बजे ट्रक से टकराई बस पुलिस के मुताबिक, रॉयल कंपनी की यात्री बस (CG 04 NM 0859) अंबिकापुर से रायपुर जा रही थी। बस में 22 यात्री सवार थे। सोमवार सुबह करीब 5:30 बजे सिमगा के पास ग्राम दरचुरा से पहले इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप के नजदीक बस सड़क पर खड़े खराब ट्रक (CG 07 BL 4370) से टकरा गई। बताया गया है कि खराब ट्रक के पास वाहन चालकों को सतर्क करने के लिए ट्रैफिक कोन भी लगाए गए थे। इसके बावजूद बस ट्रक के पिछले हिस्से में जा घुसी। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और स्थानीय लोगों ने राहत-बचाव कार्य में मदद की। ड्राइवर और हेल्पर समेत पांच की मौत हादसे में बस ड्राइवर जशपुर निवासी भागीरथी यादव, हेल्पर पवन देवांगन और समीम मोहम्मद की मौके पर ही मौत हो गई। गंभीर रूप से घायल अतुल और सुंदरलाल ने रायपुर ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया। सूचना मिलते ही सिमगा पुलिस, एंबुलेंस और बचाव दल मौके पर पहुंचे। बस में फंसे यात्रियों को निकालने के लिए गैस कटर का इस्तेमाल किया गया। घायलों को सिमगा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर घायलों को रायपुर रेफर किया गया। रेफर किए गए छह घायलों में वासुदेव राव, निर्मला यादव, सुमन दीक्षित, अमन गुप्ता, सतीश भगत और अनिल यादव शामिल हैं। अन्य घायलों में राजेंद्र ठाकुर, सविता केंवट, बुधराम केंवट, दुलेश्वर यादव, अनुराग वेद, दिलीप तिवारी, कमल दास गुप्ता और पूनम टोप्पो के नाम सामने आए हैं। हाईवे की सुरक्षा पर उठे सवाल हादसे के बाद हाईवे पर खराब वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जिस ट्रक से बस टकराई, वह खराब होने के कारण सड़क पर खड़ा था। उसके आसपास चेतावनी देने के लिए ट्रैफिक कोन लगाए गए थे। अब जांच में यह पता लगाना जरूरी होगा कि ट्रक कितनी देर से सड़क पर खड़ा था, कोन पर्याप्त दूरी पर लगाए गए थे या नहीं और अंधेरे में वे बस चालक को स्पष्ट दिखाई दे रहे थे या नहीं। इसके अलावा हाईवे पेट्रोलिंग टीम को ट्रक के खराब होने की जानकारी थी या नहीं, इसकी भी पड़ताल की जा सकती है। इसी इलाके में मार्च में भी हुई थी पांच लोगों की मौत ग्राम दरचुरा के पास इसी साल 6 मार्च 2026 को भी बड़ा सड़क हादसा हुआ था। उस दुर्घटना में पांच लोगों की मौत हुई थी, जबकि 29 लोग घायल हुए थे। घायलों में से 17 को बेहतर इलाज के लिए रायपुर भेजना पड़ा था। अब एक बार फिर इसी क्षेत्र में यात्री बस और खड़े ट्रक की टक्कर में पांच लोगों की मौत होने से सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। धमतरी में दो अलग-अलग हादसे, एक युवक की मौत छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में भी दो अलग-अलग सड़क दुर्घटनाओं में एक युवक की मौत हो गई, जबकि चार लोग घायल हुए हैं। पहला हादसा सुबह करीब 10 बजे भखारा के हंचलपुर के पास हुआ। द्वारिका यादव (17) अपने दोस्त गौरव के साथ बाइक से जा रहा था। इसी दौरान उसकी बाइक दूसरी बाइक से टकरा गई। हादसे में द्वारिका की मौत हो गई। दूसरी दुर्घटना दोपहर करीब 2 बजे नेशनल हाईवे बाईपास पर मुजगहन और बागतराई के बीच हुई। यहां एक कार अनियंत्रित होकर खेत में जा घुसी। दुर्घटना में रायपुर निवासी शिवम मिश्रा और अनिल अग्रवाल घायल हो गए। दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं ने एक बार फिर वाहन चालकों की सतर्कता, खराब वाहनों को सुरक्षित तरीके से खड़ा करने और हाईवे पर चेतावनी संकेतों की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

देवास शराब कांड में 10 आरोपी गिरफ्तार, 20 दिन में 13 मौतों से मचा हड़कंप

देवास। मध्य प्रदेश के देवास जिले के चंदाना और बिंजाना गांवों में 20 दिन के भीतर 13 लोगों की मौत के मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें गांव में अवैध शराब बेचने का आरोपी विनोद जायसवाल भी शामिल है, जो नौ दिन से फरार था। पुलिस के मुताबिक, विनोद से पूछताछ के आधार पर दो वाइन शॉप के मैनेजर, दो सेल्समैन और अन्य आरोपियों को भी पकड़ा गया है। पुलिस ने आरोपियों से करीब 7.25 लाख रुपए का सामान जब्त किया है। यह मामला अवैध और कथित जहरीली शराब से मौतों की घटनाओं को लेकर चर्चा में है। हालांकि, सभी 13 मौतों का जहरीली शराब से संबंध अभी स्पष्ट नहीं हुआ है। 27 सितंबर से 16 अक्टूबर के बीच हुईं 13 मौतें चंदाना और बिंजाना गांवों में 27 सितंबर से 16 अक्टूबर के बीच 13 लोगों की मौत हुई थी। मृतकों में से 10 के परिजनों ने आरोप लगाया था कि शराब पीने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ी। परिजनों के मुताबिक, कुछ लोगों को उल्टियां हुईं और दिखाई देना बंद हो गया, जिसके बाद उनकी मौत हो गई। वहीं, तीन मृतकों के परिजनों ने बताया था कि उनके परिवार के सदस्यों ने उस दिन शराब नहीं पी थी। पुलिस के अनुसार, 15 और 18 अक्टूबर को चंदाना के दो लोगों की मौत की सूचना मिलने के बाद सिविल लाइन थाने में मर्ग दर्ज किया गया था। परिजनों के बयान में विनोद जायसवाल द्वारा गांव में अवैध शराब बेचने की बात सामने आई। इसके बाद पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई। वाइन शॉप के मैनेजर और सेल्समैन भी गिरफ्तार पुलिस ने विनोद जायसवाल के अलावा अजय राठौर, रामेश्वर सोनगरा, भाड़ा पिपल्या वाइन शॉप के मैनेजर नितिन सोलंकी, क्षिप्रा वाइन शॉप के मैनेजर चंद्रशेखर बैरागी, अरबिंदो इंदौर वाइन शॉप के सेल्समैन सत्येंद्र ओझा और क्षिप्रा वाइन शॉप के सेल्समैन राजदेव पटेल को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा जुगल सिंह, राजेंद्र निनामा और विशाल चौहान को भी पकड़ा गया है। पुलिस के मुताबिक, मामले में इंदौर और उत्तर प्रदेश तक आरोपियों के संपर्कों की जांच की जा रही है। हालांकि, गिरफ्तारी के बाद भी पुलिस ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि विनोद गांव में किस शराब दुकान या ठेकेदार के लिए शराब बेचता था। उसकी डायरी में दर्ज बिक्री का हिसाब किस दुकान से जुड़ा था, इसकी जानकारी भी अभी सामने नहीं आई है। आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) में केस मुख्य आरोपी विनोद जायसवाल के खिलाफ मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम, 1915 की धारा 34(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह धारा निर्धारित सीमा से अधिक शराब के अवैध कब्जे, परिवहन या बिक्री जैसे मामलों में लागू होती है। इस प्रावधान के तहत दोष सिद्ध होने पर एक से तीन साल तक की जेल और 25 हजार से एक लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान बताया गया है। उमंग सिंघार ने मांगा 25-25 लाख रुपए मुआवजा मामले को लेकर मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोमवार को पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने मौके से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को फोन कर प्रत्येक मृतक के परिवार को 25 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग की। सिंघार ने कांग्रेस की ओर से प्रत्येक पीड़ित परिवार को 50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा भी की। कांग्रेस इस मामले को लेकर मंगलवार को देवास कलेक्टर कार्यालय का घेराव करेगी। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। मौतों के कारण, शराब के स्रोत और आरोपियों के बीच संभावित संबंधों को लेकर जांच के निष्कर्ष सामने आने बाकी हैं।

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