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Twisha Sharma

Twisha Sharma भोपाल AIIMS में फिर हुआ पोस्टमार्टम, पति पुलिस रिमांड पर

भोपाल में चर्चित ट्विशा शर्मा (Twisha Sharma) केस लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। अब इस मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के बाद रविवार को AIIMS भोपाल में ट्विशा शर्मा का दूसरा पोस्टमार्टम शुरू किया गया। इस प्रक्रिया के लिए AIIMS दिल्ली से फॉरेंसिक विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम विशेष तौर पर भोपाल पहुंची है। Twisha Sharma की मौत के बाद से ही परिवार लगातार पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर सवाल उठा रहा था। परिवार का कहना था कि जांच में कई अहम पहलुओं को नजरअंदाज किया गया। इसी वजह से दोबारा पोस्टमार्टम की मांग की गई थी, जिसे कोर्ट ने मंजूरी दे दी। AIIMS Delhi की टीम करेगी सच की जांच जानकारी के मुताबिक, AIIMS दिल्ली के वरिष्ठ फॉरेंसिक विशेषज्ञों की एक टीम मेडिकल बोर्ड के रूप में भोपाल पहुंची है। डॉक्टरों की निगरानी में पूरे पोस्टमार्टम की प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई जा रही है, ताकि जांच पूरी तरह पारदर्शी रहे। माना जा रहा है कि दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत की असली वजह साफ हो सकती है। इसी रिपोर्ट पर आगे की पुलिस जांच और कानूनी कार्रवाई काफी हद तक निर्भर करेगी। परिवार ने लगाए गंभीर आरोप ट्विशा शर्मा के परिवार ने शुरुआत से ही ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का दावा है कि ट्विशा को मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान किया जाता था। उनका कहना है कि शरीर पर मिले कुछ निशानों को पहली रिपोर्ट में सही तरीके से दर्ज नहीं किया गया। ट्विशा के पिता ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें अब AIIMS की टीम से निष्पक्ष जांच की उम्मीद है और वे चाहते हैं कि उनकी बेटी को इंसाफ मिले। पति समर्थ सिंह पुलिस रिमांड पर इस मामले में पुलिस ने ट्विशा के पति समर्थ सिंह को गिरफ्तार किया है। कोर्ट ने उसे सात दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा है। पुलिस दहेज प्रताड़ना, घरेलू विवाद और मौत से जुड़े हर पहलू की जांच कर रही है। वहीं दूसरी ओर, ससुराल पक्ष ने अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि ट्विशा लंबे समय से तनाव में थीं। हालांकि पुलिस अभी हर एंगल से जांच कर रही है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। पूरे देश की नजर रिपोर्ट पर ट्विशा शर्मा केस अब सिर्फ भोपाल तक सीमित नहीं रह गया है। सोशल मीडिया से लेकर न्यूज चैनलों तक इस मामले पर लगातार चर्चा हो रही है। लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर ट्विशा की मौत के पीछे की सच्चाई क्या है। अब सभी की नजर AIIMS भोपाल में हो रहे दूसरे पोस्टमार्टम की रिपोर्ट पर टिकी हुई है, क्योंकि माना जा रहा है कि यही रिपोर्ट इस हाई-प्रोफाइल केस की दिशा तय करेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Petrol की बढ़ती कीमतों पर भाजपा सांसद की पत्नी का तंज, बोलीं- ‘अब EMI पर मिलेगा ईंधन’

Petrol की बढ़ती कीमतों पर भाजपा सांसद की पत्नी का तंज, बोलीं- ‘अब EMI पर मिलेगा ईंधन’

देश में लगातार बढ़ रहे Petrol और डीजल के दामों को लेकर लोगों की नाराजगी बढ़ती जा रही है। इसी बीच भाजपा सांसद की पत्नी का एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ गया है। उन्होंने बढ़ती कीमतों पर तंज कसते हुए कहा कि जल्द ही ऐसा समय आ सकता है जब पेट्रोल-डीजल भी EMI पर मिलने लगे और बैंक इसके लिए लोन देने लगें। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय आम लोगों के लिए बेहद मुश्किल भरा है। रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर सफर तक हर चीज महंगी होती जा रही है। उनका कहना था कि “इतिहास का यह बहुत खराब दौर है”, जहां आम आदमी महंगाई के बोझ से लगातार दबता जा रहा है। बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई लोगों ने इसे महंगाई पर कटाक्ष बताया, जबकि कुछ यूजर्स ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। दरअसल, पिछले कुछ दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक तनाव को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है। इसका असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से खाने-पीने और रोजमर्रा की चीजों के दाम भी बढ़ने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ईंधन की कीमतों में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही, तो आने वाले समय में महंगाई और ज्यादा बढ़ सकती है। ऐसे में सरकार पर टैक्स कम करने और लोगों को राहत देने का दबाव भी बढ़ रहा है।
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Twisha Case Update: समर्थ सिंह की बढ़ीं मुश्किलें, BCI ने वकालत लाइसेंस किया निलंबित

Twisha Case Update: समर्थ सिंह की बढ़ीं मुश्किलें, BCI ने वकालत लाइसेंस किया निलंबित

भोपाल की चर्चित Twisha मौत मामले में आरोपी समर्थ सिंह की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। कोर्ट में सरेंडर करने के बाद अब बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने समर्थ सिंह के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए उसकी वकालत प्रैक्टिस पर रोक लगा दी है। BCI ने उसका एडवोकेट लाइसेंस अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद समर्थ सिंह फिलहाल किसी भी अदालत में वकालत नहीं कर सकेगा। मामले को लेकर कानूनी और सामाजिक दोनों स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। सरेंडर के बाद बढ़ा दबाव ट्विषा शर्मा केस में लगातार बढ़ते विवाद और जनदबाव के बीच समर्थ सिंह ने हाल ही में कोर्ट में सरेंडर किया था। इसके बाद जांच एजेंसियां मामले की हर एंगल से पड़ताल कर रही हैं। अब BCI की कार्रवाई को भी इसी मामले से जोड़कर देखा जा रहा है। BCI ने क्यों लिया फैसला? सूत्रों के मुताबिक, बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने गंभीर आरोपों और चल रही जांच को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है। BCI का मानना है कि जब तक मामले की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक समर्थ सिंह को वकालत प्रैक्टिस की अनुमति देना उचित नहीं होगा। परिवार और लोगों में आक्रोश ट्विषा शर्मा की मौत के बाद से परिवार लगातार न्याय की मांग कर रहा है। सोशल मीडिया पर भी इस केस को लेकर लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। कई संगठनों और लोगों ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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Twisha Sharma

CBI जांच की मांग के बीच Twisha Sharma के पति ने किया आत्मसमर्पण

मध्य प्रदेश के चर्चित ट्विशा शर्मा (Twisha Sharma) मौत मामले में आखिरकार बड़ा अपडेट सामने आ गया है। करीब 10 दिनों से फरार चल रहा ट्विशा शर्मा का पति शुक्रवार को कोर्ट पहुंचा और उसने सरेंडर कर दिया। इस खबर के सामने आते ही केस एक बार फिर चर्चा में आ गया है। Twisha की मौत के बाद से परिवार लगातार इंसाफ की मांग कर रहा था। परिजनों का आरोप है कि शादी के बाद से ही ट्विशा मानसिक तनाव में थीं और उन्हें लगातार परेशान किया जाता था। इसी वजह से परिवार शुरू से ही पति और ससुराल पक्ष पर सवाल उठाता रहा है। Police की लगातार दबिश के बाद किया Surrender मामले में पुलिस कई दिनों से आरोपी की तलाश कर रही थी। अलग-अलग जगहों पर दबिश भी दी गई, लेकिन आरोपी हाथ नहीं आ रहा था। सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तारी से बचने के लिए वह लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था। अब कोर्ट में सरेंडर के बाद पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं। जांच एजेंसियां पूरे घटनाक्रम को जोड़कर यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि आखिर ट्विशा के साथ क्या हुआ था। CBI जांच की मांग ने बढ़ाया दबाव ट्विशा शर्मा केस में परिवार ने CBI जांच की मांग भी उठाई है। मामला लगातार सुर्खियों में रहने के कारण सरकार पर भी दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। परिवार का कहना है कि उन्हें निष्पक्ष जांच चाहिए ताकि सच सामने आ सके। बीते कुछ दिनों में सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर काफी नाराजगी देखने को मिली। लोग आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई और तेज जांच की मांग कर रहे हैं। कई सामाजिक संगठनों ने भी पीड़ित परिवार के समर्थन में आवाज उठाई है। अब आगे क्या? आरोपी के सरेंडर के बाद अब सबसे अहम कड़ी पुलिस पूछताछ होगी। जांच एजेंसियां यह जानने की कोशिश करेंगी कि घटना वाले दिन क्या हुआ था और क्या इस मामले में कोई और भी शामिल है। आने वाले दिनों में केस में नए खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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MP में ‘कॉकरोच पार्टी’ की एंट्री, भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सिस्टम के खिलाफ खोला मोर्चा

MP में ‘कॉकरोच पार्टी’ की एंट्री, भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सिस्टम के खिलाफ खोला मोर्चा

MP की राजनीति में एक नया और अनोखा नाम सामने आया है। “कॉकरोच पार्टी” ने भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर खुद को जनता की आवाज बताते हुए सिस्टम के खिलाफ आंदोलन शुरू करने का दावा किया। पार्टी के सदस्यों का कहना है कि यह सिर्फ राजनीतिक संगठन नहीं, बल्कि उन लोगों की लड़ाई है जो लंबे समय से भ्रष्ट और शिथिल व्यवस्था से परेशान हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पार्टी से जुड़े युवाओं ने कहा कि देश में शिक्षा, रोजगार और पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर लगातार सवाल उठ रहे हैं, लेकिन आम लोगों की आवाज को नजरअंदाज किया जा रहा है। खास बात यह रही कि NEET पेपर लीक से प्रभावित कुछ युवा भी इस पार्टी के साथ नजर आए। उनका कहना था कि मेहनत करने वाले छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है और अब युवाओं को खुद आगे आकर बदलाव की लड़ाई लड़नी होगी। पार्टी के प्रतिनिधियों ने कहा कि “कॉकरोच” नाम प्रतीक है उस संघर्ष का, जो हर मुश्किल हालात में भी खत्म नहीं होता। उनका दावा है कि वे आम जनता, छात्रों और बेरोजगार युवाओं के मुद्दों को मजबूती से उठाएंगे। भोपाल में हुई इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद सोशल मीडिया पर भी “कॉकरोच पार्टी” को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोग इसे सिस्टम के खिलाफ नई आवाज बता रहे हैं, तो कुछ इसे अलग तरह की राजनीतिक पहल मान रहे हैं।
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Twisha Sharma

Twisha Sharma Case परिवार की मांग पर CBI जांच की सिफारिश

मध्य प्रदेश में ट्विशा शर्मा (Twisha Sharma) की संदिग्ध मौत का मामला अब एक नए और अहम मोड़ पर पहुंच गया है। लगातार न्याय और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे परिवार की बात को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार ने अब इस केस को केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपने की सिफारिश कर दी है। सरकार की ओर से यह सिफारिश Central Bureau of Investigation (CBI) को भेजी गई है, जिससे अब इस केस की जांच के राष्ट्रीय स्तर पर जाने का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है। परिवार की मांग के बाद बड़ा एक्शन ट्विशा शर्मा के परिजन लंबे समय से यह मांग कर रहे थे कि मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। उनका कहना था कि स्थानीय जांच पर उन्हें पूरा भरोसा नहीं है, इसलिए उन्होंने CBI जांच की अपील की थी। परिवार की इसी भावना और मामले की गंभीरता को देखते हुए Government of Madhya Pradesh ने यह कदम उठाया है। सरकार का कहना है कि मामले की जांच पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए। अब केस CBI के हाथ में जाने की तैयारी अब इस मामले में अंतिम फैसला केंद्र सरकार और CBI द्वारा लिया जाएगा। यदि CBI इस केस को अपने हाथ में लेती है, तो पूरे मामले की गहराई से जांच की जाएगी और हर पहलू को दोबारा खंगाला जाएगा। परिवार की भावनाएं और उम्मीदें सरकारी फैसले के बाद परिवार ने राहत की भावना जताई है। उनका कहना है कि यह कदम उनके लिए न्याय की दिशा में एक उम्मीद की किरण है, हालांकि वे अब CBI जांच की आधिकारिक शुरुआत का इंतजार कर रहे हैं। परिवार अभी भी यही चाहता है कि उनकी बेटी की मौत के पीछे की सच्चाई सामने आए और जिम्मेदार लोगों को सजा मिले।
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Bhojshala

Bhojshala 721 साल बाद बने खास योग पर भक्तों से भरी धार की सड़कें

मध्य प्रदेश के धार में स्थित भोजशाला (Bhojshala) शुक्रवार सुबह से ही आस्था का बड़ा केंद्र बनी हुई है। 721 साल बाद आए इस विशेष शुक्रवार को लेकर हजारों श्रद्धालु अखंड पूजा और दर्शन के लिए भोजशाला पहुंचे। सुबह से ही परिसर के बाहर लंबी कतारें देखने को मिलीं और पूरा इलाका “जय मां वाग्देवी” के जयकारों से गूंज उठा। सुबह से उमड़ी भक्तों की भीड़ भोजशाला में पूजा-अर्चना के लिए लोग देर रात से ही धार पहुंचने लगे थे। जैसे ही सुबह हुई, श्रद्धालुओं की भीड़ तेजी से बढ़ने लगी। महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने बड़ी संख्या में पूजा में हिस्सा लिया। कई लोगों ने इसे अपने जीवन का यादगार और भावुक पल बताया। स्थानीय लोगों के मुताबिक, वर्षों बाद शहर में ऐसा धार्मिक माहौल देखने को मिला है। बाजारों, होटल और आसपास की दुकानों में भी भारी भीड़ नजर आई। क्यों खास माना जा रहा है यह शुक्रवार? धार्मिक मान्यताओं और पंचांग गणना के आधार पर श्रद्धालु इस शुक्रवार को बेहद दुर्लभ संयोग मान रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि करीब 721 साल बाद ऐसा अवसर आया है, जब भोजशाला में इस तरह अखंड पूजा और विशेष धार्मिक आयोजन हो रहा है। यही वजह है कि मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों से लोग यहां पहुंचे हैं। भोजशाला को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद भोजशाला लंबे समय से धार्मिक और ऐतिहासिक विवाद का केंद्र रही है। हिंदू पक्ष इसे मां वाग्देवी का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। इसी कारण यहां हर बड़े आयोजन के दौरान प्रशासन अतिरिक्त सतर्कता बरतता है। हाल के महीनों में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा किए गए सर्वे के बाद भोजशाला फिर राष्ट्रीय चर्चा में आ गई थी। अब इस विशेष शुक्रवार के आयोजन ने एक बार फिर लोगों का ध्यान इस ऐतिहासिक स्थल की ओर खींच लिया है। सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर दिखाई दिया। भोजशाला परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी से निगरानी की जा रही है ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो। अधिकारियों ने श्रद्धालुओं से शांति बनाए रखने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। श्रद्धालुओं ने बताया ऐतिहासिक दिन भोजशाला पहुंचे कई श्रद्धालुओं का कहना है कि वे इस दिन का लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। लोगों के चेहरों पर उत्साह और भक्ति साफ नजर आई। पूरे परिसर में धार्मिक वातावरण बना रहा और पूजा-अर्चना लगातार जारी रही। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bhopal के अयोध्या बायपास को NGT की मंजूरी, पर्यावरण नियमों का पालन करना होगा  Bhopal के अयोध्या बायपास को NGT की मंजूरी, पर्यावरण नियमों का पालन करना होगा 

Bhopal के अयोध्या बायपास को NGT की मंजूरी, पर्यावरण नियमों का पालन करना होगा

मध्य प्रदेश की राजधानी Bhopal के अयोध्या बायपास परियोजना को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की दिल्ली बेंच ने बायपास निर्माण को अनुमति दे दी है। हालांकि ट्रिब्यूनल ने साफ कहा है कि परियोजना से जुड़े सभी पर्यावरणीय नियमों और शर्तों का सख्ती से पालन करना होगा। इस फैसले के बाद लंबे समय से अटकी परियोजना को राहत मिली है। माना जा रहा है कि बायपास बनने से भोपाल शहर के ट्रैफिक दबाव को काफी हद तक कम करने में मदद मिलेगी। पर्यावरण शर्तों के साथ मिली मंजूरी NGT की दिल्ली बेंच ने अपने आदेश में कहा कि निर्माण कार्य के दौरान पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे, इसके लिए तय मानकों का पालन जरूरी होगा। परियोजना से जुड़े विभागों को प्रदूषण नियंत्रण, हरियाली संरक्षण और जल स्रोतों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना होगा। ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि यदि किसी शर्त का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। लंबे समय से चल रहा था विवाद अयोध्या बायपास परियोजना को लेकर पर्यावरणीय प्रभाव और पेड़ों की कटाई जैसे मुद्दों पर आपत्तियां उठाई गई थीं। इसी वजह से मामला NGT तक पहुंचा था। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दिल्ली बेंच ने यह फैसला सुनाया।
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सागर में हाई वोल्टेज ड्रामा: पति-पत्नी ढाई साल की बेटी संग BSNL टावर पर चढ़े, पुलिस-एनडीआरएफ मौके पर

मध्य प्रदेश के सागर जिले में गुरुवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब एक पति-पत्नी अपनी ढाई साल की मासूम बेटी के साथ BSNL के ऊंचे टावर पर चढ़ गए। मामला कैंट थाना क्षेत्र स्थित पीली कोठी के पीछे टेकरी का है। 800 फीट ऊंचे टावर पर बैठा परिवार जानकारी के मुताबिक बलराम अहिरवार अपनी पत्नी कृष्णा देवी अहिरवार और ढाई साल की बेटी को लेकर करीब 800 फीट ऊंचे BSNL टावर पर चढ़ गया। तेज गर्मी और तपती दोपहरी में परिवार को टावर पर बैठे देख इलाके में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस ने समझाने की कोशिश की घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और युवक को फोन कर नीचे उतरने के लिए समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह नहीं माना। स्थिति गंभीर होती देख पुलिस ने तुरंत NDRF टीम को बुलाया और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। पुलिस कार्रवाई से नाराज था परिवार प्रारंभिक जानकारी के अनुसार परिवार पुलिस की कार्रवाई से परेशान था। आरोप है कि मोतीनगर पुलिस ने उन पर झूठा मामला दर्ज किया और मारपीट कर जेल भेजा। भाई ने सुनाई पूरी कहानी बलराम के भाई ने बताया कि टावर पर चढ़ने से पहले उसकी मुलाकात हुई थी। उस दौरान बलराम ने कहा था कि पुलिस ने उनके साथ मारपीट की और बेवजह जेल भेज दिया। इसी से नाराज होकर उसने यह कदम उठाया। फिलहाल पुलिस और प्रशासन परिवार को सुरक्षित नीचे उतारने की कोशिश में जुटा है। मध्य प्रदेश की हर बड़ी खबर सबसे पहले पढ़ें:www.deshharpal.com
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इंदौर में शर्मनाक बाल विवाह: 13 साल की बच्ची की 42 वर्षीय युवक से जबरन शादी, 13 लोगों पर केस

इंदौर के रंगवासा क्षेत्र से मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां पारिवारिक दबाव और रिश्तों की अजीब शर्तों के चलते महज 13 साल की बच्ची की शादी 42 साल के युवक से जबरन करा दी गई। मामले का खुलासा होने के बाद राऊ पुलिस ने दूल्हे, उसके परिजनों और बच्ची के दादा-दादी समेत 13 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पोते की शादी के लिए पोती का “सौदा” महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी रजनीश सिन्हा के अनुसार, बच्ची के दादा अपने 19 वर्षीय पोते की शादी करवाना चाहते थे। लेकिन पोते की होने वाली पत्नी ने शर्त रखी कि वह शादी तभी करेगी, जब उसकी ननद यानी 13 वर्षीय बच्ची की शादी उसके 42 वर्षीय सगे चाचा से कराई जाए। परिवार ने इस शर्त को मान लिया और मासूम बच्ची की जिंदगी दांव पर लगा दी। पहले दी थी शादी नहीं करने की लिखित सहमति विभाग को पहले ही बाल विवाह की सूचना मिल गई थी। 25 अप्रैल को होने वाली शादी को लेकर फ्लाइंग स्क्वाड ने दोनों पक्षों को बुलाकर समझाइश दी थी। उस समय परिवार ने लिखित में भरोसा दिया था कि शादी नहीं कराई जाएगी। चोरी-छिपे उज्जैन ले जाकर कराई शादी इसके बावजूद 26 अप्रैल की रात आरोपी बच्ची और उसके 19 वर्षीय भाई को चोरी-छिपे उज्जैन ले गए। चिंतामन गणेश मंदिर के बाहर दोनों को दूल्हा-दुल्हन के कपड़े पहनाए गए और रात में मांग भरकर शादी करा दी गई। शादी के बाद दोनों बच्चों को वापस इंदौर छोड़ दिया गया, जबकि दूल्हे अपने गांव दयाखेड़ा लौट गए। विरोध करने पर दादी ने की पिटाई फ्लाइंग स्क्वाड प्रभारी महेंद्र पाठक के मुताबिक, शादी के बाद परिवार बच्ची पर ससुराल जाने का दबाव बना रहा था। जब बच्ची ने विरोध किया तो उसकी दादी ने बेरहमी से मारपीट की। आखिरकार बच्ची की मां ने हिम्मत दिखाते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग और बाल कल्याण समिति से शिकायत की, जिसके बाद पूरा मामला उजागर हुआ। उम्र छिपाने के लिए बनाई फर्जी मार्कशीट जांच में सामने आया कि बच्ची और उसके भाई की उम्र छिपाने के लिए कथित तौर पर फर्जी अंकसूची तैयार करवाई गई थी।अधिकारियों के मुताबिक, शिक्षा विभाग इस मामले की अलग से जांच कर रहा है। रिपोर्ट आने के बाद आरोपियों पर जालसाजी और सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर की धाराएं भी लगाई जा सकती हैं। पुलिस ने शुरू की कार्रवाई बाल कल्याण समिति के निर्देश पर पुलिस ने 13 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। प्रशासन का कहना है कि बाल विवाह और दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। समाज और प्रदेश की ऐसी ही बड़ी खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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रानी कमलापति स्टेशन पर दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट, 29 मिनट खड़ी रही ट्रेन

भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर मंगलवार सुबह दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट हो गई। घटना सुबह करीब 11:30 बजे की बताई जा रही है। सामान चढ़ाने और यात्रियों के आने-जाने को लेकर शुरू हुआ विवाद बढ़ गया, जिसके चलते ट्रेन करीब 29 मिनट तक स्टेशन पर खड़ी रही। आरोप है कि पैंट्री कर्मचारियों ने एकजुट होकर यात्रियों पर हमला किया। विवाद के दौरान कर्मचारियों द्वारा चेन पुलिंग किए जाने की बात भी सामने आई है। बताया गया कि ट्रेन रानी कमलापति स्टेशन पर पहले ही निर्धारित समय से 3 घंटे 33 मिनट की देरी से पहुंची थी। जीआरपी ने मौके पर पहुंचकर शांत कराया विवाद घटना की सूचना मिलने पर जीआरपी मौके पर पहुंची और यात्रियों व पैंट्री कर्मचारियों के बीच चल रहे विवाद को शांत कराया। जीआरपी टीआई अमित शर्मा के मुताबिक, पीड़ित यात्री बेंगलुरु जा रहा था। उन्होंने बताया कि रानी कमलापति स्टेशन पर इस मामले में शिकायत नहीं मिली। वहीं, नागपुर में जीरो पर प्रकरण दर्ज किए जाने की सूचना है। मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित जीआरपी के स्तर पर की जाएगी।

मध्यप्रदेश में पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए खर्च होंगे 7.5 करोड़ रुपए, 330 विकासखंडों में होगा खेल महोत्सव

मध्यप्रदेश में पारंपरिक और आंचलिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार करीब साढ़े सात करोड़ रुपए खर्च करने की तैयारी कर रही है। खेल विभाग ने इसके लिए छोटे शहरों में प्रशिक्षण केंद्र खोलने की योजना बनाई है। इसके साथ ही प्रदेश के सभी 330 विकासखंडों में हर साल पारंपरिक खेल महोत्सव आयोजित किए जाएंगे। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक खेलों को संरक्षण देना और ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं की पहचान करना है। सरकार की इस पहल से स्थानीय खेलों को प्रतियोगिताओं और व्यवस्थित प्रशिक्षण के जरिए आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। पिट्ठू से मलखंभ तक, कई खेल होंगे शामिल प्रस्तावित योजना में पिट्ठू, गदा और साइकिल रेस जैसे पारंपरिक व आंचलिक खेलों को शामिल किया गया है। इसके अलावा कबड्डी, खो-खो, पैदल चाल, तीरंदाजी और मलखंभ जैसे खेलों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। खेल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पारंपरिक खेल महोत्सव में विकासखंड स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इन स्पर्धाओं के लिए पूरे प्रदेश में एक समान नियम तैयार किए जाएंगे, ताकि खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं में भाग लेने के समान अवसर मिल सकें। छोटे शहरों में खुलेंगे प्रशिक्षण केंद्र खेल विभाग का मानना है कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में कई पारंपरिक खेल लंबे समय से स्थानीय संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। हालांकि, इन खेलों से जुड़े खिलाड़ियों को अक्सर औपचारिक प्रशिक्षण और बड़े स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का अवसर नहीं मिल पाता। प्रस्तावित प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से ऐसे खिलाड़ियों को व्यवस्थित प्रशिक्षण देने की योजना है। इससे स्थानीय स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान करने और उन्हें आगे बढ़ने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। आधुनिक खेलों से जोड़ने की भी तैयारी खेल विभाग इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करेगा। इसके बाद उन्हें आगे के प्रशिक्षण के लिए तैयार करने की योजना है। विभाग पारंपरिक खेलों से जुड़ी प्रतिभाओं को आधुनिक खेल व्यवस्था से जोड़ने के विकल्पों पर भी काम कर रहा है। इस पहल के जरिए पारंपरिक खेलों को नई पहचान देने के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं की खेलों में भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। पारंपरिक खेलों के केंद्र स्थापित किए जाएंगे: विश्वास सारंग खेल मंत्री विश्वास सारंग के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न अंचलों में कई देशी खेल प्रचलित हैं, लेकिन उन्हें बड़े पैमाने पर खेलने के अवसर सीमित हैं। अब इनके केंद्र स्थापित कर इन खेलों को बढ़ावा देने की योजना है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित योजना में टीम आधारित और व्यक्तिगत, दोनों तरह के खेलों को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

एशियन पैरा गेम्स में भारत का धमाकेदार प्रदर्शन, दूसरे दिन जीते 24 मेडल; कुल पदक 35 हुए

जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन पैरा गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी है। प्रतियोगिता के दूसरे दिन भारतीय खिलाड़ियों ने 24 मेडल जीते, जिनमें 5 गोल्ड, 6 सिल्वर और 13 ब्रॉन्ज शामिल हैं। इसके साथ ही भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक 9 गोल्ड, 11 सिल्वर और 15 ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए हैं। दूसरे दिन एथलेटिक्स में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला। पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारत ने गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज तीनों मेडल जीतकर शानदार उपलब्धि हासिल की। वहीं, निषाद कुमार ने हाई जंप में गेम्स रिकॉर्ड के साथ गोल्ड जीता। सिमरन शर्मा और दीप्ति जीवनजी ने भी क्रमशः 200 मीटर और 400 मीटर रेस में गोल्ड मेडल अपने नाम किए। शूटिंग में मनीष नरवाल ने सिल्वर मेडल जीता। इसके साथ ही उन्होंने 2028 में होने वाले लॉस एंजिलिस पैरालिंपिक्स के लिए कोटा भी हासिल किया। डिस्कस थ्रो में भारत का क्लीन स्वीप पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों ने तीनों पदक जीतकर अपना दबदबा कायम किया। देवेंद्र कुमार ने 781 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल हासिल किया। राकेश ने 771 पॉइंट्स लेकर सिल्वर, जबकि प्रदीप कुमार ने 669 पॉइंट्स के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता। इस मुकाबले की खास बात यह रही कि प्रदीप कुमार ने 51.15 मीटर का सबसे लंबा थ्रो किया, इसके बावजूद उन्हें ब्रॉन्ज मेडल मिला। इसकी वजह यह है कि इस स्पर्धा में अलग-अलग तरह की शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी एक साथ मुकाबला करते हैं। इसमें F43, F44, F62 और F64 कैटेगरी के खिलाड़ी शामिल थे। खिलाड़ियों की शारीरिक स्थिति और थ्रो करने की क्षमता में अंतर होने के कारण उनके प्रदर्शन का आकलन रजा पॉइंट्स सिस्टम के आधार पर किया जाता है। इस प्रणाली में खिलाड़ी की कैटेगरी के अनुसार प्रदर्शन को अंक दिए जाते हैं, जिससे अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के परिणामों की निष्पक्ष तुलना की जा सके। निषाद कुमार ने हाई जंप में जीता दूसरा गोल्ड भारतीय पैरा-एथलीट निषाद कुमार ने पुरुषों की हाई जंप T47 स्पर्धा में 2.02 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड मेडल जीता। यह इन गेम्स में उनका दूसरा गोल्ड है। इससे पहले वह लॉन्ग जंप में भी पहला स्थान हासिल कर चुके हैं। हाई जंप में खिलाड़ियों को एक निश्चित ऊंचाई पर रखी बार को बिना गिराए पार करना होता है। हर सफल प्रयास के बाद बार की ऊंचाई बढ़ाई जाती है और सबसे अधिक ऊंचाई पार करने वाला खिलाड़ी विजेता बनता है। T47 पैरा-एथलेटिक्स की वह श्रेणी है, जिसमें हाथ से जुड़ी शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। निषाद की इस उपलब्धि से भारत के पदक अभियान को मजबूती मिली है। प्रणव सूरमा को गोल्ड, राम रतन सिंह ने जीता सिल्वर पुरुषों की डिस्कस थ्रो F51/F52/F53 स्पर्धा में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। प्रणव सूरमा ने 932 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि राम रतन सिंह 809 पॉइंट्स लेकर दूसरे स्थान पर रहे और उन्हें सिल्वर मेडल मिला। प्रणव ने अपने छह प्रयासों में 11.66 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया। इस स्पर्धा में भी अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की तुलना रजा पॉइंट्स के आधार पर की जाती है। इसलिए केवल थ्रो की दूरी के आधार पर विजेता तय नहीं होता। प्रणव और राम रतन के अंकों ने उन्हें क्रमशः पहला और दूसरा स्थान दिलाया। भारत की पदक तालिका पर नजर दूसरे दिन के शानदार प्रदर्शन के बाद भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। एथलेटिक्स में लगातार मिल रही सफलताओं और शूटिंग में मनीष नरवाल की उपलब्धि ने भारतीय अभियान को नई गति दी है। प्रतियोगिता के अगले दिनों में भी भारतीय खिलाड़ियों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी।
SBI

SBI ग्राहकों का डेटा Dark Web पर मिलने से बढ़ी चिंता, जांच में जुटा बैंक

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के ग्राहकों की निजी जानकारी डार्क वेब पर मिलने का मामला सामने आया है। बैंक की शुरुआती जांच में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड में व्यक्तिगत जानकारी उजागर होने की पहचान की गई है। इनमें नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और पते जैसी जानकारियां शामिल हैं। इस खबर के सामने आने के बाद ग्राहकों की डेटा सिक्योरिटी को लेकर चिंता बढ़ गई है। SBI ने कहा है कि इस घटना से बैंक के सामान्य कामकाज, वित्तीय प्रदर्शन और सेवाओं पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। वहीं, डेटा कहां से आया, कितने ग्राहकों की जानकारी प्रभावित हुई और इसके पीछे क्या वजह रही, इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए जांच की जा रही है। SBI Data Leak: कैसे सामने आया डेटा लीक का मामला? बैंक के अनुसार, 16 अक्टूबर 2026 को उसे अपने Threat Intelligence Service Provider, Defence Cyber Agency और भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) से डार्क वेब पर ग्राहकों का डेटा उपलब्ध होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद SBI ने शुरुआती स्तर पर करीब 3.75 लाख रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। इस प्रक्रिया में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड ऐसे मिले, जिनमें व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी मौजूद थी। हालांकि, डार्क वेब पर मिले सभी रिकॉर्ड के बारे में अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। बैंक जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि डेटा कितना वास्तविक है और किस माध्यम से बाहर पहुंचा। ग्राहकों की कौन-सी निजी जानकारी हुई उजागर? शुरुआती जांच में सामने आए रिकॉर्ड में ग्राहकों से जुड़ी कई तरह की जानकारियां शामिल बताई गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं: इनमें से कुछ जानकारियों का इस्तेमाल साइबर ठग लोगों को निशाना बनाने के लिए कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी ग्राहक का नाम, मोबाइल नंबर और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी पता होने पर ठग खुद को बैंक कर्मचारी बताकर भरोसा जीतने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, इस मामले में ग्राहकों के बैंक खातों से पैसे निकलने या किसी खास तरह की धोखाधड़ी होने की पुष्टि नहीं हुई है। SBI ने जांच के लिए उठाए जरूरी कदम डेटा लीक की जानकारी मिलने के बाद बैंक ने अपने साइबर सिक्योरिटी प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए। साथ ही, मामले की विस्तृत जांच के लिए CERT-In से सूचीबद्ध एक स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी को नियुक्त किया गया है। जांच में यह पता लगाने पर ध्यान दिया जा रहा है कि डेटा का स्रोत क्या था, जानकारी कैसे उजागर हुई और इससे ग्राहकों की सुरक्षा पर कितना असर पड़ सकता है। बैंक के अनुसार, जांच के नतीजों के आधार पर जरूरी सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल डेटा लीक के पीछे किसी व्यक्ति या समूह की भूमिका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। क्या SBI ग्राहकों के बैंक खाते खतरे में हैं? डेटा लीक की खबर सुनकर ग्राहकों के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि क्या उनके बैंक खाते सुरक्षित हैं? यहां एक बात समझना जरूरी है। ग्राहकों का नाम, मोबाइल नंबर या पता सामने आने का मतलब यह नहीं है कि उनके बैंक खाते भी हैक हो गए हैं। निजी जानकारी का उजागर होना और खाते से पैसे निकलना दो अलग-अलग बातें हैं। SBI ने कहा है कि इस घटना से उसके मुख्य कामकाज और सेवाओं पर कोई महत्वपूर्ण असर नहीं पड़ा है। हालांकि, निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल करके फर्जी कॉल, मैसेज और ऑनलाइन ठगी की कोशिश की जा सकती है। इसलिए ग्राहकों को सावधानी बरतने की जरूरत है। Data Leak के बाद ग्राहकों को क्या करना चाहिए? डिजिटल बैंकिंग के दौर में थोड़ी सी लापरवाही भी परेशानी बढ़ा सकती है। ऐसे में SBI ग्राहकों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। 1. OTP और PIN किसी को न बताएं: बैंक अधिकारी बनकर फोन करने वाला व्यक्ति भी आपसे OTP, ATM PIN या CVV मांगे, तो जानकारी साझा न करें। 2. संदिग्ध लिंक से बचें: KYC अपडेट, बैंक खाता बंद होने या रिफंड मिलने के नाम पर आए अनजान लिंक पर क्लिक न करें। 3. बैंक खाते पर नजर रखें: अपने खाते के लेनदेन की नियमित जांच करें। कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन दिखे तो तुरंत बैंक से संपर्क करें। 4. फर्जी कॉल से सावधान रहें: अगर कोई व्यक्ति बैंकिंग जानकारी बताकर आपका भरोसा जीतने की कोशिश करे, तो उसकी पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। 5. साइबर ठगी होने पर शिकायत करें: वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 हेल्पलाइन या भारत सरकार के आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। ध्यान रखें कि किसी ठग के पास आपकी कुछ निजी जानकारी होने का मतलब यह नहीं है कि वह बैंक का अधिकृत प्रतिनिधि है। SBI Data Leak मामले में अब आगे क्या होगा? फिलहाल SBI डेटा लीक मामले की जांच जारी है। बैंक यह पता लगाने में जुटा है कि डार्क वेब पर उपलब्ध जानकारी कहां से आई और घटना का वास्तविक दायरा कितना बड़ा है। जांच पूरी होने के बाद ही डेटा लीक की वजह और ग्राहकों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर ज्यादा स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। तब तक ग्राहकों के लिए अपनी बैंकिंग जानकारी सुरक्षित रखना और संदिग्ध गतिविधियों से सतर्क रहना सबसे जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Delhi HighCourt

Delhi HighCourt: सौरव दास-आशुतोष रांका ने वापस ली याचिका, Bond की शर्तों पर कोर्ट के सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi HighCourt) में बुधवार, 21 अक्टूबर को CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर सुनवाई हुई। दोनों नेताओं ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ाई गई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट की टिप्पणियों के बाद दोनों ने अपनी याचिका वापस ले ली। जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद की बेंच ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि जब इस मामले में दूसरी कानूनी प्रक्रिया अपनाने का विकल्प मौजूद है, तो सीधे हाईकोर्ट का रुख क्यों किया गया। कोर्ट ने दोनों नेताओं की ओर से शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन के आरोपों पर भी टिप्पणी की। Jantar Mantar Protest Case: क्या है पूरा मामला? सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिया गया था। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किया गया था। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार कर उस स्थान पर प्रवेश किया था, जिसे प्रदर्शन स्थल के रूप में पहले ही अधिसूचित सूची से हटा दिया गया था। इसके बाद दोनों नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेजा गया। शुरुआत में उनकी हिरासत पांच दिन के लिए तय की गई थी। 19 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ाने का आदेश दिया था। इसी फैसले को चुनौती देते हुए दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। Court Remarks: बॉन्ड की शर्तों पर क्या कहा? सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड और उसके कथित उल्लंघन को लेकर सवाल उठाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि बैरिकेडिंग तोड़ने जैसी घटना के बाद दूसरे लोगों के भी नियमों का उल्लंघन करने की आशंका बढ़ सकती है। दोनों नेताओं की ओर से पेश वकील ने हिरासत बढ़ाने के आदेश और जमानतदारों से जुड़ी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका पक्ष था कि दोनों ने आवश्यक जमानतदार पेश किए थे, इसके बावजूद उन्हें हिरासत में रखा गया। हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले में उपलब्ध वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाने की बात कही। इसके बाद दोनों नेताओं की ओर से याचिका वापस लेने का फैसला किया गया। याचिका वापस लेने का क्या मतलब है? सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका वापस लिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि हाईकोर्ट ने हिरासत बढ़ाने के आदेश को सही ठहरा दिया है। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय दिए बिना याचिका वापस लेने की अनुमति दी। कोर्ट ने दोनों पक्षों को पहले स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष चल रही प्रक्रिया के नतीजे का इंतजार करने और जरूरत पड़ने पर उचित अपीलीय मंच का रुख करने की सलाह दी। इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और मजिस्ट्रेट के समक्ष होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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