छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) राज्य सेवा परीक्षा 2021 पेपर लीक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के तत्कालीन OSD रहे चेतन बोरघरिया को PMLA की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया है। ED की जांच में उनके बैंक खाते में 170 अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए 66.64 लाख रुपए नकद जमा होने की जानकारी सामने आई है।
जांच एजेंसी के अनुसार, चेतन बोरघरिया और उत्कर्ष चंद्राकर के बीच भी कई वित्तीय लेन-देन पाए गए हैं। ED ने डिजिटल साक्ष्यों, बैंकिंग रिकॉर्ड और पूछताछ के आधार पर यह कार्रवाई की है।
परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को मिला था कथित लीक पेपर
ED के मुताबिक, CGPSC राज्य सेवा परीक्षा 2021 में कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले ही कथित तौर पर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया था। जांच में सामने आया कि प्रिलिम्स परीक्षा से पहले रायपुर के सिद्धि विनायक मैरिज पैलेस में कुछ अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र बांटे गए।
इसके बाद अभ्यर्थियों को बरनवापारा अभयारण्य के एक रिसॉर्ट में ठहराया गया, जहां कथित तौर पर मुख्य परीक्षा के लीक प्रश्नपत्र के आधार पर उन्हें तैयारी कराई गई।
3 करोड़ से ज्यादा की रकम जुटाने का आरोप
ED की जांच के अनुसार, उत्कर्ष चंद्राकर, अनिल चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने CGPSC राज्य सेवा परीक्षा 2021 के अलग-अलग अभ्यर्थियों से कथित तौर पर 3 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध रकम जुटाई।
आरोप है कि अभ्यर्थियों को परीक्षा का प्रश्नपत्र पहले उपलब्ध कराने और चयन कराने का भरोसा दिया गया था। इसके लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में अपने कथित संपर्क और प्रभाव का इस्तेमाल करने की बात कही गई।
जांच एजेंसी के अनुसार, इन आश्वासनों के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में OSD रहे चेतन बोरघरिया के नाम और उनके आधिकारिक पद का कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया।
मोबाइल की फोरेंसिक जांच में सामने आई बातचीत
ED ने जब्त डिजिटल डिवाइस की फोरेंसिक जांच के दौरान चेतन बोरघरिया और उत्कर्ष चंद्राकर के बीच हुई बातचीत मिलने की बात कही है। एजेंसी के अनुसार, बातचीत में वित्तीय लेन-देन के अलावा रकम लौटाने और भुगतान की मांग से संबंधित चर्चाएं भी शामिल थीं।
जांच में M/s Figurecave E-Com (OPC) Private Limited से जुड़े कई वित्तीय लेन-देन भी सामने आए हैं। ED को संदेह है कि इस कंपनी का इस्तेमाल रकम को अलग-अलग स्तर पर ट्रांसफर करने और फंड की लेयरिंग के लिए किया गया।
PMLA के तहत हुई गिरफ्तारी
ED के अनुसार, जांच के दौरान सामने आए डिजिटल साक्ष्य, बैंकिंग लेन-देन और PMLA के तहत दर्ज बयानों से चेतन बोरघरिया की कथित तौर पर अपराध से अर्जित रकम से जुड़े लेन-देन में संलिप्तता के संकेत मिले।
एजेंसी के मुताबिक, इसमें रकम हासिल करना, अपने कब्जे में रखना, छिपाना और उसका इस्तेमाल करना शामिल है। इन आधारों पर चेतन बोरघरिया को 11 सितंबर 2026 को PMLA की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया।
ED के अनुसार, चेतन बोरघरिया वर्तमान में बलरामपुर-रामानुजगंज में अतिरिक्त कलेक्टर के पद पर पदस्थ हैं।
क्या है CGPSC घोटाला?
CGPSC से जुड़ा यह मामला वर्ष 2020 से 2022 के बीच हुई भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर लगाए गए कथित अनियमितताओं के आरोपों से जुड़ा है। आरोप है कि परीक्षा और इंटरव्यू प्रक्रिया में पारदर्शिता का पालन नहीं किया गया और राजनीतिक एवं प्रशासनिक प्रभाव वाले परिवारों से जुड़े अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाया गया।
मामले में डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी समेत अन्य राजपत्रित पदों पर चयन को लेकर भी सवाल उठे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंपी गई। जांच के दौरान एजेंसी ने विभिन्न ठिकानों पर कार्रवाई कर दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जुटाए हैं।


