जब दुनिया को उम्मीद थी कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होगा, तब इस्लामाबाद से आई खबर ने सबको चौंका दिया। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची पाकिस्तान पहुंचे जरूर, लेकिन अमेरिका से मुलाकात किए बिना ही वापस लौट गए—और यहीं से शुरू होता है एक बड़ा ग्लोबल मिस्ट्री!
क्या हुआ इस्लामाबाद में?
- ईरान ने साफ कर दिया कि अमेरिका से कोई सीधी बातचीत नहीं होगी।
- पाकिस्तान सिर्फ एक मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभाता रहा।
- अमेरिकी प्रतिनिधि आने वाले थे, लेकिन मीटिंग हो ही नहीं पाई।
- नतीजा—वार्ता बिना किसी प्रगति के खत्म।
पहले भी फेल हो चुकी हैं “इस्लामाबाद टॉक्स”
- अप्रैल 2026 की पहली बातचीत भी 21 घंटे चली लेकिन कोई समझौता नहीं हुआ।
- विवाद के मुख्य मुद्दे:
- ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण
- दोनों देश अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े रहे।
क्यों नहीं बनी बात?
1. ईरान की शर्तें
- अमेरिका पहले प्रतिबंध हटाए
- सैन्य दबाव खत्म करे
2. अमेरिका की मांग
- ईरान न्यूक्लियर गतिविधियां रोके
- क्षेत्रीय प्रभाव कम करे
इन टकरावों ने बातचीत को शुरू होने से पहले ही खत्म कर दिया।
Global Impact: सिर्फ बातचीत नहीं, पूरी दुनिया दांव पर
- होर्मुज स्ट्रेट में तनाव से तेल सप्लाई प्रभावित
- एयरस्पेस और शिपिंग पर असर
- ग्लोबल मार्केट में अस्थिरता
यानी ये सिर्फ कूटनीति नहीं, आर्थिक युद्ध की शुरुआत भी हो सकती है।
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