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Instagram Child Safety: बच्चों की सुरक्षा को लेकर Meta का बड़ा फैसला, Government से बातचीत के बाद बनी सहमति

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सोशल मीडिया पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। इसी बीच Meta ने भारत में बच्चों से जुड़े यौन शोषण के मामलों की जानकारी संबंधित भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों को देने पर सहमति जताई है। सरकार और कंपनी के बीच हुई बातचीत के बाद यह फैसला सामने आया है।

यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। सरकार चाहती है कि ऐसे गंभीर मामलों में सिर्फ कंटेंट हटाने तक बात सीमित न रहे, बल्कि जरूरत पड़ने पर संबंधित जांच एजेंसियों को भी जानकारी दी जाए।

Government से बातचीत के बाद Meta की सहमति

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार और Meta के बीच बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर बातचीत हुई थी। इसी चर्चा के बाद Meta ने ऐसे मामलों में भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ जरूरी जानकारी साझा करने पर सहमति जताई।

सरकार का मानना है कि बच्चों से संबंधित मामलों में तेजी से कार्रवाई बेहद जरूरी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी सामने आने के बाद जांच एजेंसियों तक सूचना पहुंचना जांच प्रक्रिया के लिए अहम हो सकता है।

Instagram को लेकर पहले से जांच

Meta का यह फैसला उस समय आया है जब Instagram को लेकर भी बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामले चर्चा में हैं। National Commission for Protection of Child Rights यानी NCPCR ने Instagram पर बच्चों से संबंधित आपत्तिजनक कंटेंट के आरोपों को गंभीरता से लिया है।

इस मामले में Meta के अधिकारियों से भी जानकारी मांगी गई है। आयोग यह जानने की कोशिश कर रहा है कि प्लेटफॉर्म पर बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए कौन-कौन से सिस्टम मौजूद हैं और शिकायत मिलने पर कंपनी किस तरह कार्रवाई करती है।

सिर्फ Content हटाना ही काफी नहीं

बच्चों से जुड़े मामलों में सरकार का जोर अब केवल आपत्तिजनक पोस्ट या कंटेंट हटाने पर नहीं है। गंभीर मामलों की जानकारी संबंधित एजेंसियों तक पहुंचाना भी इस प्रक्रिया का हिस्सा बन रहा है।

Meta की ओर से भारतीय एजेंसियों के साथ सहयोग की सहमति को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे जरूरत पड़ने पर जांच एजेंसियां उपलब्ध जानकारी के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई कर सकती हैं।

दूसरे Social Media Platforms पर भी नजर

बच्चों की Online Safety को लेकर सरकार का फोकस केवल Meta तक सीमित नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार, दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ भी ऐसे कंटेंट की पहचान, रोकथाम और रिपोर्टिंग को लेकर बातचीत की जा रही है।

सरकार की कोशिश है कि सोशल मीडिया कंपनियां अपने प्लेटफॉर्म को बच्चों के लिए ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए मजबूत व्यवस्था तैयार करें। खासकर ऐसे मामलों में जहां बच्चों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है, वहां प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।

आगे क्या बदलेगा?

Meta के इस फैसले के बाद भारत में बच्चों से जुड़े गंभीर मामलों की रिपोर्टिंग और जांच प्रक्रिया को लेकर एक नई व्यवस्था देखने को मिल सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनी और भारतीय एजेंसियों के बीच जानकारी साझा करने की प्रक्रिया कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से लागू होती है।

बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में जागरूकता के साथ-साथ सोशल मीडिया कंपनियों, सरकार और जांच एजेंसियों के बीच बेहतर coordination जरूरी है। ऐसे में Meta का यह कदम आने वाले समय में Online Child Safety को लेकर भारत की नीति में अहम भूमिका निभा सकता है।

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Yukta

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पानीपत के मिठाई हब उरलाना कलां में CM फ्लाइंग की छापेमारी, कई दुकानों से सैंपल लिए

किसान यूनियन की शिकायत के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग और सीएम फ्लाइंग स्क्वाड की संयुक्त टीम ने बुधवार को पानीपत जिले के प्रसिद्ध मिठाई हब गांव उरलाना कलां में ताबड़तोड़ छापेमारी की। टीम ने पांच राज्यों में मिठाइयों की सप्लाई करने वाले कारोबारी संदीप सिंह के पांच ठिकानों सहित अन्य मिठाई दुकानों और भट्टियों से खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए। छापेमारी के दौरान टीम ने कई स्थानों से मावा और अन्य खाद्य सामग्री भी कब्जे में ली। कार्रवाई की खबर फैलते ही इलाके के हलवाइयों और दुकानदारों में हड़कंप मच गया। पांच राज्यों में होती है मिठाइयों की सप्लाई गांव उरलाना कलां को पानीपत के प्रमुख मिठाई हब के रूप में जाना जाता है। यहां से हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और पंजाब सहित पांच राज्यों में बड़े पैमाने पर मिठाइयों की थोक सप्लाई की जाती है। थोक में मिठाइयों की बिक्री होने के कारण यहां के उत्पादों के दाम अन्य दुकानों की तुलना में करीब 40 प्रतिशत तक कम बताए जाते हैं। किसान यूनियन ने की थी जांच की मांग जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले गांव उरलाना खुर्द में मिठाई भट्टी संचालकों के खिलाफ किसान यूनियन की पंचायत हुई थी। पंचायत में कथित नकली दूध और दूध से बनने वाली मिठाइयों पर रोक लगाने की मांग उठाई गई थी। किसान यूनियन की ओर से जिला अधिकारियों को शिकायत भी दी गई थी। शिकायत में कार्रवाई नहीं होने पर 22 सितंबर को बड़े प्रदर्शन की चेतावनी दी गई थी। इसी शिकायत के आधार पर बुधवार को खाद्य सुरक्षा विभाग और सीएम फ्लाइंग की टीम ने मिठाई हब में अचानक जांच अभियान चलाया। पांच ठिकानों और अन्य दुकानों पर छापेमारी संयुक्त टीम ने संदीप सिंह, गुरप्रीत, गुलाब और संजू खुराना समेत अन्य मिठाई कारोबारियों की दुकानों और भट्टियों पर जांच की। अधिकारियों ने विभिन्न स्थानों से मिठाइयों, मावा और अन्य खाद्य उत्पादों के सैंपल एकत्र किए। कई जगहों से खाद्य सामग्री को कब्जे में लेकर उसकी जांच की प्रक्रिया शुरू की गई। कार्रवाई के दौरान टीम ने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, निर्माण प्रक्रिया और अन्य संबंधित मानकों की भी जांच की। सरकारी लैब में होगी सैंपलों की जांच टीम के अधिकारी ने बताया कि त्योहारी सीजन शुरू होने के साथ मिठाइयों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में मिलावटी या निम्न गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री की आशंका को देखते हुए जांच अभियान चलाया जा रहा है। एकत्र किए गए सभी सैंपल जांच के लिए सरकारी लैब भेजे जाएंगे। यदि जांच रिपोर्ट में किसी खाद्य पदार्थ में मिलावट या गुणवत्ता में कमी पाई जाती है, तो संबंधित निर्माता और दुकानदार के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दुकानदार ने कहा- सात साल से लिए जा रहे हैं सैंपल कार्रवाई को लेकर दुकानदार संदीप सिंह ने कहा कि पिछले सात वर्षों से उनकी दुकानों से खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए जा रहे हैं। उनके अनुसार, अब तक किसी भी जांच में मिलावट नहीं मिली है। फिलहाल खाद्य सुरक्षा विभाग की रिपोर्ट आने के बाद ही सैंपलों की गुणवत्ता और किसी संभावित मिलावट को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।

दिल्ली जल बोर्ड के जल मंथन 2026 का समापन, 24×7 जल आपूर्ति और यमुना कायाकल्प का रोडमैप तैयार

नई दिल्ली: दिल्ली जल बोर्ड के दो दिवसीय सम्मेलन ‘जल मंथन 2026’ का बुधवार को समापन हो गया। 15 और 16 सितंबर को आयोजित इस सम्मेलन में दिल्ली को जल सुरक्षा प्रदान करने, हर घर तक 24×7 गुणवत्तापूर्ण पानी पहुंचाने और यमुना के कायाकल्प के लिए व्यापक रोडमैप तैयार करने पर चर्चा हुई। सम्मेलन में भारत के अलावा इजराइल, ब्रिटेन, नीदरलैंड और फ्रांस के जल विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। इसके साथ ही विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक के प्रतिनिधि भी कार्यक्रम में शामिल हुए। जल नेटवर्क में AI और डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल पर जोर जल मंथन 2026 के दौरान पानी की लीकेज रोकने और जल आपूर्ति नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर जोर दिया गया। इनमें शामिल हैं: इन तकनीकों की मदद से जल नेटवर्क की निगरानी, लीकेज की पहचान और पानी की आपूर्ति व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर विचार किया गया। उपचारित अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग पर सहमति सम्मेलन में उपचारित अपशिष्ट जल और कीचड़ के पुन: उपयोग तथा पुनर्चक्रण की रणनीति पर भी चर्चा हुई। इसके तहत उपचारित पानी का इस्तेमाल गैर-पेय जरूरतों के लिए करने पर जोर दिया गया। इससे ताजे पानी की मांग को कम करने और यमुना पर पड़ने वाले दबाव को घटाने में मदद मिलने की उम्मीद है। 24×7 जल आपूर्ति और सर्कुलर वॉटर इकोनॉमी पर चर्चा जल मंथन में दिल्ली की जल व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। इनमें प्रमुख रूप से शामिल रहे: विभिन्न कार्य समूहों की सिफारिशों को ‘जल संकल्प’ के रूप में संकलित किया गया है। इन सुझावों को दिल्ली की जल व्यवस्था में लागू करने के लिए आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। जल मंत्री ने बताया सम्मेलन का उद्देश्य दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि ‘जल मंथन’ का उद्देश्य केवल चर्चा तक सीमित रहना नहीं है। इसका लक्ष्य दुनिया में इस्तेमाल हो रही बेहतर तकनीकों और विचारों को दिल्ली की जरूरतों के अनुसार जमीन पर लागू करना है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य हर घर तक गुणवत्तापूर्ण पानी पहुंचाना और यमुना की स्थिति में स्पष्ट सुधार लाना है। सम्मेलन में सामने आए सुझावों के आधार पर दिल्ली की जल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने और यमुना पुनरुद्धार के लिए आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।

सपा नेता पवन यादव की हत्या के बाद हाईवे जाम, 2 करोड़ मुआवजे और नौकरी की मांग; पुलिस मुठभेड़ में 2 आरोपी घायल

समाजवादी पार्टी के नेता पवन यादव की हत्या के बाद बुधवार शाम प्रयागराज में तनाव की स्थिति बन गई। पोस्टमॉर्टम के बाद शाम करीब 4 बजे शव घर पहुंचा, जिसके बाद सैकड़ों की संख्या में लोग सड़क पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने शव रखकर वाराणसी-प्रयागराज नेशनल हाईवे जाम कर दिया। हाईवे जाम होने से सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई और यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोपियों को फांसी देने की मांग की। बैरिकेडिंग तोड़ी, बोर्ड उखाड़कर फेंके प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने हाईवे पर लगी पुलिस बैरिकेडिंग तोड़ दी। इसके अलावा मौके पर लगे कुछ बोर्ड भी उखाड़कर फेंक दिए गए। इससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। सूचना मिलने के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया। अधिकारियों ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया, लेकिन परिजन और ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे। मौके पर करीब 200 पुलिसकर्मी, 10 एसीपी, 9 थानों की फोर्स और पीएसी की पांच गाड़ियां तैनात होने की जानकारी है। फिलहाल शव को जमीन पर रखकर अधिकारियों और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत चल रही है। डीएम को बुलाने और लिखित आश्वासन की मांग परिजन और ग्रामीण जिलाधिकारी को मौके पर बुलाने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में शामिल हैं: लोगों का कहना है कि जब तक लिखित रूप से आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा। पुलिस मुठभेड़ में दो आरोपी घायल पवन यादव हत्याकांड के आरोपियों की तलाश के दौरान बुधवार दोपहर हंडिया थाना क्षेत्र के बरौत इलाके में पुलिस की हिस्ट्रीशीटर लल्ला यादव और निहाल से मुठभेड़ हो गई। पुलिस के अनुसार, मुठभेड़ में दोनों आरोपियों के पैर में गोली लगी। पुलिस ने घायल लल्ला यादव और निहाल के अलावा प्रधानपति समेत कुल चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दोनों घायलों को हंडिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में भर्ती कराया गया है। अन्य आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हत्याकांड से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। आरोपियों के कब्जे से हथियार और अन्य साक्ष्य मिलने की भी जांच की जा रही है। लल्ला यादव पर 12 से ज्यादा मुकदमे दर्ज पुलिस के अनुसार, जितेंद्र यादव उर्फ लल्ला हंडिया थाना क्षेत्र के मुगरांव गांव का रहने वाला है। उसके खिलाफ जिले के कई थानों में हत्या, हत्या के प्रयास और लूट समेत गंभीर धाराओं में 12 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पवन यादव पर गोली लल्ला यादव ने चलाई थी। पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के इलाकों के 42 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। इसके बाद संदिग्धों की पहचान कर कार्रवाई की गई। एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें बाइक पर सवार हमलावर दिखाई दे रहे हैं। वारदात में इस्तेमाल बाइक और दो तमंचे बरामद जांच के आधार पर पुलिस ने लल्ला यादव, बृजेश यादव और निहाल अली को हिरासत में लिया। पूछताछ में पुलिस को जानकारी मिली कि तीनों बाइक से वारदात को अंजाम देने पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि निहाल बाइक चला रहा था, बृजेश बीच में बैठा था और लल्ला यादव सबसे पीछे बैठा था। आरोप है कि लल्ला यादव ने पवन यादव पर गोली चलाई। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल बाइक और दो तमंचे बरामद किए हैं। पूछताछ में दोनों तमंचे और कारतूस करीब 20 हजार रुपए में खरीदे जाने की जानकारी सामने आने की बात कही गई है। पुलिस के अनुसार, पवन यादव और लल्ला यादव के बीच पुरानी रंजिश की बात भी जांच में सामने आई है। छोटे भाई ने की बुलडोजर कार्रवाई की मांग पवन यादव के छोटे भाई बृजेश यादव ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि उनके बड़े भाई की हत्या हुई है और परिवार न्याय चाहता है। बृजेश यादव ने कहा कि जो आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं, उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने आरोपियों के घरों पर बुलडोजर चलाने की भी मांग की। सपा प्रवक्ता ने सरकार पर साधा निशाना समाजवादी पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता निधि यादव ने घटना को लेकर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि हंडिया टाउन एरिया जैसे व्यस्त इलाके में दिनदहाड़े पूर्व प्रधान संघ के अध्यक्ष की हत्या होना गंभीर मामला है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब है और सरकार लोगों को सुरक्षा देने में असफल रही है। क्या है पूरा मामला? पवन यादव प्रयागराज के मुगरांव गांव के रहने वाले थे। वह पहले प्रधान रह चुके थे और वर्तमान में समाजवादी पार्टी के जिला सचिव के पद पर थे। उनके परिवार में पत्नी नीतू, तीन बेटियां खुशी, मुस्कान और छोटी तथा एक बेटा प्रिंस है। मंगलवार दोपहर करीब 3 बजे पवन यादव अपनी कार से हंडिया कस्बे पहुंचे थे। उन्होंने कर्मनाशा मोहल्ले में सड़क किनारे कार खड़ी की और पास के एक कैफे में दोस्तों से बातचीत करने चले गए। करीब दो घंटे बाद शाम 5:20 बजे वह कैफे से बाहर निकले और अपनी कार के पास पहुंचे। इसी दौरान प्रयागराज की ओर से बाइक पर सवार तीन बदमाश वहां पहुंचे। इनमें से दो ने हेलमेट पहन रखा था। पुलिस के मुताबिक, बाइक की रफ्तार धीमी करने के बाद पीछे बैठे बदमाश ने पवन यादव को नजदीक से गोली मार दी। गोली उनकी पीठ में लगी, जिसके बाद वह सड़क पर गिर पड़े। गोली चलने की आवाज सुनकर आसपास अफरा-तफरी मच गई। वारदात हंडिया थाने से करीब 500 मीटर की दूरी पर हुई। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और घायल पवन यादव को हंडिया के एक निजी अस्पताल ले गई। हालत गंभीर होने पर उन्हें टैगोर स्थित निजी अस्पताल और फिर एसआरएन अस्पताल रेफर किया गया। वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है और मामले की जांच जारी है।

पूर्णिया के सुपरिटेंडेंट इंजीनियर पर आय से अधिक संपत्ति का केस, चार ठिकानों पर निगरानी की छापेमारी

बिहार के पूर्णिया में भवन निर्माण विभाग के सुपरिटेंडेंट इंजीनियर सत्येंद्र कुमार चौधरी के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (VIB) ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में केस दर्ज किया है। उन पर करीब 1 करोड़ 97 लाख 58 हजार 70 रुपए की आय से अधिक संपत्तिअर्जित करने का आरोप है। बुधवार, 16 सितंबर को निगरानी विभाग की टीम ने सत्येंद्र कुमार चौधरी के चार ठिकानों पर छापेमारी की। कार्रवाई पूर्णिया और पटना में की गई। पूर्णिया और पटना में चार ठिकानों पर छापेमारी निगरानी टीम ने पूर्णिया स्थित सत्येंद्र कुमार चौधरी के सरकारी आवास और कार्यालय में तलाशी ली। वहीं, पटना के शास्त्री नगर थाना क्षेत्र के कृषि नगर, शेखपुरा स्थित आवास और पटना एम्स से करीब एक किलोमीटर पहले इंडियन बैंक के पास स्थित स्वास्तिक भवन में भी छापेमारी की गई। जानकारी के अनुसार, स्वास्तिक भवन की अनुमानित कीमत करीब 10 करोड़ रुपए बताई जा रही है। छापेमारी के दौरान सत्येंद्र चौधरी पूर्णिया स्थित सरकारी आवास में मौजूद थे। जुलाई 2026 में बने थे सुपरिटेंडेंट इंजीनियर सत्येंद्र कुमार चौधरी जुलाई 2026 में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के पद से प्रमोट होकर सुपरिटेंडेंट इंजीनियर बने थे। प्रमोशन के बाद उनका तबादला पटना से पूर्णिया कर दिया गया था। निगरानी विभाग की कार्रवाई विशेष निगरानी न्यायालय से सर्च वारंट मिलने के बाद शुरू की गई। तीन टीमों ने पटना में दो और पूर्णिया में एक ठिकाने पर तलाशी अभियान चलाया। पत्नी और परिजनों के नाम पर भी संपत्तियां जांच एजेंसी के अनुसार, सत्येंद्र कुमार चौधरी, उनकी पत्नी उषा देवी और अन्य परिजनों के नाम पर कई अचल संपत्तियां मिली हैं। परिवार के नाम पर कुल सात अचल संपत्तियां होने की बात सामने आई है, जिनमें पटना और पूर्णिया में स्थित मकान और जमीन शामिल हैं। तलाशी के दौरान मकान, जमीन, बैंक खाते, निवेश और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की जांच की जा रही है। कार्यालय में फाइलों और कंप्यूटर रिकॉर्ड की जांच पूर्णिया में बुधवार सुबह करीब 7 बजे निगरानी टीम ने सुपरिटेंडेंट इंजीनियर के आवास और कार्यालय पर एक साथ कार्रवाई की। यह छापेमारी डीएसपी संतोष कुमार और बिनोद कुमार के नेतृत्व में नौ सदस्यीय टीम ने की। कार्यालय में अधिकारियों ने फाइलों, कंप्यूटर रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच की। वहीं, आवास पर बैंक खातों, पासबुक, वित्तीय लेनदेन, जमीन-मकान और चल-अचल संपत्तियों से संबंधित कागजात खंगाले गए। तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों को जब्त कर सीलबंद किया गया और टीम अपने साथ ले गई। जब्त दस्तावेजों तथा संपत्तियों का मूल्यांकन किया जा रहा है। बैंक खातों और निवेश से जुड़े रिकॉर्ड भी मिले छापेमारी के दौरान निगरानी टीम को संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, बैंक खातों का विवरण, निवेश संबंधी कागजात और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड मिलने की जानकारी है। अधिकारी इन दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं, ताकि संपत्तियों के स्रोत और सत्येंद्र कुमार चौधरी की घोषित आय के बीच संबंधों का सत्यापन किया जा सके। बैंकिंग लेनदेन और अन्य वित्तीय गतिविधियों की भी जांच जारी है। निगरानी विभाग की तलाशी कार्रवाई अभी जारी है। आगे की जांच के बाद मामले में और जानकारी सामने आने की संभावना है।

अमेरिका से तनाव के बीच कनाडा को EU का पहला एसोसिएट मेंबर बनाने का प्रस्ताव, रक्षा और AI समेत कई क्षेत्रों में बढ़ेगा सहयोग

अमेरिका के साथ बढ़ते व्यापारिक और कूटनीतिक तनाव के बीच कनाडा यूरोपीय संघ (EU) के साथ अपने संबंध मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने बुधवार को कनाडा को यूरोपीय संघ का पहला ‘एसोसिएट मेंबर’ बनाने की दिशा में काम करने का प्रस्ताव रखा। यह प्रस्ताव कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की मौजूदगी में यूरोपीय संसद में दिया गया। हालांकि, एसोसिएट सदस्यता का दर्जा अभी यूरोपीय संघ के मौजूदा नियमों में मौजूद नहीं है। इसके लिए नए नियमों और सदस्य देशों की सहमति की जरूरत होगी। कनाडा को क्या फायदा हो सकता है? एसोसिएट मेंबर बनने की स्थिति में कनाडा यूरोपीय संघ के 27 पूर्ण सदस्य देशों का हिस्सा नहीं होगा। उसे EU के फैसलों पर मतदान का अधिकार भी मिलने की पुष्टि नहीं हुई है। प्रस्तावित साझेदारी के तहत रक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), तकनीक, ऊर्जा, जरूरी खनिज, साइबर सुरक्षा और व्यापार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की योजना है। इसमें उन्नत विनिर्माण, बैटरी और आर्कटिक क्षेत्र से जुड़े प्रोजेक्ट भी शामिल हो सकते हैं। वॉन डेर लेयेन ने इस व्यापक साझेदारी को ‘एलायंस फॉर द फ्यूचर’ यानी भविष्य के लिए गठबंधन से जोड़कर पेश किया। मार्क कार्नी ने पहले भी जताई थी विशेष गठबंधन की इच्छा कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इससे पहले यूरोपीय संघ के साथ एक ‘विशेष गठबंधन’ बनाने की इच्छा जताई थी। उन्होंने स्पष्ट किया था कि कनाडा पूर्ण रूप से EU का सदस्य बनने की मांग नहीं कर रहा, बल्कि आर्थिक और सुरक्षा सहयोग का एक अलग मॉडल चाहता है। कनाडा अमेरिका पर अपनी व्यापारिक निर्भरता कम करने और यूरोप के साथ संबंधों को व्यापक बनाने की कोशिश कर रहा है। दोनों पक्ष अक्टूबर में होने वाले कनाडा-EU शिखर सम्मेलन में सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर आगे चर्चा कर सकते हैं। यूरोप के लिए नई सिक्योरिटी काउंसिल का प्रस्ताव वॉन डेर लेयेन ने यूरोप की सुरक्षा मजबूत करने के लिए एक नई यूरोपीय सिक्योरिटी काउंसिल बनाने का विचार भी रखा है। इसमें यूरोपीय संघ से बाहर के साझेदार देशों को शामिल किया जा सकता है। प्रस्तावित व्यवस्था में ब्रिटेन, कनाडा, नॉर्वे और यूक्रेन जैसे देशों की भागीदारी पर विचार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य ड्रोन हमलों, साइबर हमलों, तोड़फोड़ और अन्य सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाना है। EU और कनाडा के बीच पहले से है CETA समझौता यूरोपीय संघ और कनाडा के बीच पहले से ही CETA नाम का व्यापार समझौता लागू है। इस समझौते के तहत दोनों पक्षों के बीच अधिकांश वस्तुओं पर आयात शुल्क कम या समाप्त किया गया है। अब दोनों पक्ष मौजूदा व्यापार संबंधों को रक्षा, तकनीक, ऊर्जा और रणनीतिक आपूर्ति श्रृंखलाओं तक विस्तार देने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, CETA को लेकर यूरोपीय संघ के सभी सदस्य देशों की घरेलू मंजूरी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार तनाव जारी अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार संबंधों को लेकर पिछले कई महीनों से तनाव बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों और कनाडा से जुड़े बयानों के बाद दोनों देशों के संबंधों में खिंचाव बढ़ा है। टैरिफ विवाद के बीच कनाडा यूरोप सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ व्यापार और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहा है। वहीं, यूरोपीय संघ भी वैश्विक अस्थिरता और व्यापारिक चुनौतियों के बीच नए रणनीतिक साझेदारों के साथ संबंध मजबूत करना चाहता है। एसोसिएट सदस्यता पर अभी अंतिम फैसला नहीं कनाडा को यूरोपीय संघ का एसोसिएट मेंबर बनाने का प्रस्ताव अभी शुरुआती चरण में है। EU के नियमों में इस तरह की सदस्यता का स्पष्ट प्रावधान नहीं है। इसलिए आगे की प्रक्रिया में कानूनी, राजनीतिक और सदस्य देशों की सहमति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। प्रस्ताव के अंतिम स्वरूप, अधिकारों और जिम्मेदारियों को लेकर अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

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