ईरान-इज़राइल युद्ध (Iran Israel Conflict) के बीच फंसे भारतीय छात्रों (Indian Students in Iran) को सुरक्षित वापस लाने के लिए भारत सरकार ने “Operation Sindhu” नाम का विशेष मिशन चलाया। इस मिशन के तहत 110 छात्रों को ईरान से निकाला गया और वे 18 जून को भारत पहुंच गए।
ऑपरेशन Sindhu: ईरान से भारत तक का सफर
भारतीय छात्रों को पहले सड़क मार्ग से तेहरान (Tehran) से येरेवन (Yerevan, Armenia) ले जाया गया। वहां से विशेष फ्लाइट के ज़रिए सभी छात्रों को नई दिल्ली (New Delhi) लाया गया। इस ऑपरेशन को विदेश मंत्रालय (MEA) और ईरान स्थित भारतीय दूतावास ने मिलकर अंजाम दिया।
छात्रों की जुबानी: “हमने Drone और Missile अपनी आंखों से देखे”
वतन लौटे छात्रों ने बताया कि युद्ध का माहौल बेहद डरावना था।
- एक छात्रा ने कहा, “रात भर धमाकों की आवाज़ आती थी। हॉस्टल की खिड़की से हमने मिसाइलें और ड्रोन उड़ते देखे। बहुत डर लग रहा था।”
- छात्र यासिर गफ्फार ने बताया, “मैंने सपना देखा है डॉक्टर बनने का। हालात सामान्य होंगे तो मैं वापस ईरान जाऊंगा।”
- एक अन्य छात्र ने कहा, “बिजली कट जाती थी, हम बेसमेंट में छिपते थे। चारों ओर सिर्फ डर और सन्नाटा था।”
Iran Israel Conflict: क्यों बिगड़ा मामला?
13 जून 2025 को इज़राइल ने ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की। जवाब में ईरान ने इज़राइल पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया। इससे Middle East का हवाई क्षेत्र बंद हो गया और हजारों लोग फंस गए।
भारत सरकार की तैयारियां
- दिल्ली में 24×7 कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन शुरू की गई है।
- अभी भी ईरान में करीब 4,000 भारतीय नागरिक, जिनमें 2,000 छात्र शामिल हैं, मौजूद हैं।
- अगली उड़ानों की तैयारी भी जारी है।
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