Islamabad में होने वाली अहम शांति वार्ता एक बार फिर बेनतीजा साबित हुई। हालात ऐसे बने कि ईरान के विदेश मंत्री बिना किसी ठोस बातचीत के ही वापस लौट गए। इससे क्षेत्रीय कूटनीति पर सवाल खड़े हो गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, बैठक को लेकर पहले से ही अनिश्चितता बनी हुई थी। लेकिन आखिरी वक्त पर बातचीत शुरू ही नहीं हो पाई। ऐसे में ईरानी विदेश मंत्री का यूं अचानक लौटना इस बात का संकेत देता है कि दोनों देशों के बीच मतभेद अभी भी गहरे हैं।
इसी बीच अमेरिका ने भी पाकिस्तान का अपना प्रस्तावित दौरा रद्द कर दिया है। यह कदम इस्लामाबाद के लिए एक और कूटनीतिक झटका माना जा रहा है। माना जा रहा है कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव और अस्थिरता के कारण अमेरिका ने यह फैसला लिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इन घटनाओं से साफ है कि पाकिस्तान फिलहाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव में है। एक तरफ ईरान के साथ बातचीत ठप हो गई, तो दूसरी तरफ अमेरिका का दौरा रद्द होना स्थिति को और गंभीर बना रहा है।
आम लोगों के लिए यह खबर इसलिए भी अहम है क्योंकि इसका असर क्षेत्र की शांति और सुरक्षा पर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या पाकिस्तान इन कूटनीतिक चुनौतियों से उबर पाता है या नहीं।
