मध्यप्रदेश के खंडवा में किसानों का गुस्सा अब सड़कों पर खुलकर नजर आने लगा है। संयुक्त कृषक संगठन के बैनर तले किसानों ने सरकार के खिलाफ अनोखा विरोध प्रदर्शन करते हुए ‘सरकार की अर्थी’ निकाल दी।
यह अर्थी यात्रा शहर की पुरानी अनाज मंडी से शुरू होकर राजा हरिश्चंद्र मुक्तिधाम तक पहुंची, जहां किसानों ने प्रतीकात्मक रूप से अर्थी फेंककर अपना विरोध जताया। इस प्रदर्शन में करीब 300 किसान शामिल हुए।
सैटेलाइट सर्वे बना किसानों की परेशानी
किसानों का कहना है कि सरकार द्वारा खेतों की सैटेलाइट से निगरानी में भारी गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। संगठन के प्रवक्ता जय पटेल के मुताबिक, “खेत में गेहूं खड़ा है, नरवाई भी दिख रही है, लेकिन सैटेलाइट रिपोर्ट में फसल ही नहीं दिखा रहा। ऐसे में किसानों का स्लॉट बुक नहीं हो पा रहा।”
उन्होंने आरोप लगाया कि इस तकनीकी खामी के कारण किसान अपनी उपज समर्थन मूल्य पर बेचने से वंचित हो रहे हैं।
खरीदी व्यवस्था पर भी सवाल
किसानों ने सरकार के उस दावे पर भी सवाल उठाया, जिसमें कहा गया था कि गेहूं का एक-एक दाना खरीदा जाएगा। किसानों के अनुसार, जिले में अभी तक 5% खरीदी भी नहीं हो पाई है।
स्लॉट बुकिंग न होने के कारण किसान मजबूरी में अपनी फसल कम दाम पर मंडी में बेचने को मजबूर हैं।
गलत जुर्माने का आरोप
किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि कई मामलों में खेत में आग शॉर्ट सर्किट से लगती है, लेकिन सैटेलाइट सर्वे इसे नरवाई जलाना बताकर भारी जुर्माना वसूल लिया जाता है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति और खराब हो रही है।
100 गांवों के किसान हुए शामिल
इस विरोध प्रदर्शन में करीब 100 गांवों के 300 किसान शामिल हुए। कई किसान शादी-ब्याह जैसे पारिवारिक कार्यक्रम छोड़कर इस ‘अंतिम यात्रा’ में पहुंचे।
करीब दो घंटे तक तेज धूप में किसानों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया और अपनी मांगों को जोरदार तरीके से उठाया।
किसानों का कहना है कि जब तक सैटेलाइट सर्वे की खामियां दूर नहीं होतीं और खरीदी व्यवस्था सुधरती नहीं, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
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