महाराष्ट्र में स्कूलों में Hindi Language को Class 1 से Compulsory बनाने के फैसले पर राजनीति गरमा गई है। Sharad Pawar, Uddhav Thackeray और Raj Thackeray सभी ने इसका विरोध करते हुए कहा है कि बच्चों पर Hindi थोपना सही नहीं है। उन्होंने मातृभाषा Marathi को प्राथमिकता देने की बात कही और हिंदी को बाद में सिखाने की सलाह दी।
नया सरकारी आदेश (GR) क्या कहता है?
17 जून को महाराष्ट्र सरकार ने एक GR (Government Resolution) जारी किया, जिसके तहत Class 1 से 5 तक की Marathi और English medium schools में तीसरी भाषा के रूप में Hindi पढ़ाई जाएगी।
हालांकि, अगर किसी अन्य भारतीय भाषा को कम से कम 20 छात्र चुनते हैं, तो वह भाषा वैकल्पिक रूप में उपलब्ध हो सकती है।
Thackeray Brothers ने किया आंदोलन का ऐलान
Shiv Sena (UBT) प्रमुख Uddhav Thackeray और MNS प्रमुख Raj Thackeray ने इस फैसले को “भाषाई आपातकाल” (Language Emergency) बताया है। दोनों नेताओं ने 5 और 7 जुलाई को मुंबई में बड़े Protest March की घोषणा की है।
राज ठाकरे ने कहा:
“हम Hindi के खिलाफ नहीं, लेकिन इसे जबरन लागू करना Maharashtra की अस्मिता पर चोट है।”
उद्धव ठाकरे बोले:
“हिंदी को अनिवार्य बनाकर Marathi भाषा को दबाया जा रहा है।”
Sharad Pawar का Balanced Statement
NCP नेता Sharad Pawar ने कहा कि:
- महाराष्ट्र हिंदी विरोधी नहीं है, लेकिन बच्चों पर भाषा थोपना गलत है।
- Hindi Class 5 के बाद पढ़ाई जा सकती है, ताकि बच्चों की मातृभाषा मजबूत हो सके।
- उन्होंने Uddhav और Raj Thackeray की एकजुटता की सराहना करते हुए इसे मराठी हित में सही कदम बताया।
अन्य नेताओं की राय
- Ajit Pawar ने कहा कि यह आदेश जल्दबाज़ी में लिया गया है और इससे बच्चों पर पढ़ाई का बोझ बढ़ेगा।
- Congress नेता Harshwardhan Sapkal ने इसे संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ बताया।
National Education Policy (NEP 2020) का तर्क
सरकार का कहना है कि यह फैसला तीन-भाषा फॉर्मूले (Three Language Formula) के तहत लिया गया है, जो NEP 2020 का हिस्सा है।
लेकिन भाषा विशेषज्ञों का मानना है कि हिंदी को “Default Option” बनाना राज्य की भाषाई स्वतंत्रता पर हमला है।
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस पर अंतिम निर्णय सभी पक्षों से चर्चा के बाद लिया जाएगा।
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