टेक्नोलॉजी की दुनिया में Meta ने एक नया इतिहास रच दिया है। कंपनी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की रेस में सबसे बड़ा दांव खेलते हुए लगभग ₹1.19 लाख करोड़ ($14.3 Billion) का निवेश किया है। इस डील के तहत Meta को Scale AI में 49% non-voting हिस्सेदारी मिली है।
सिर्फ इतना ही नहीं, Scale AI के फाउंडर और सीईओ Alexandr Wang को अपनी नई Superintelligence टीम का हेड भी बना लिया है। यह डील Meta को AI की रेस में Google, OpenAI और Microsoft जैसी कंपनियों की बराबरी में लाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
कौन हैं Alexandr Wang? – AI Superpower
सिर्फ 28 साल की उम्र में अरबों डॉलर की कंपनी बनाने वाले Alexandr Wang अब Meta में AI के भविष्य को दिशा देंगे। उन्हें Meta की नई Superintelligence Team का नेतृत्व करने की ज़िम्मेदारी दी गई है।
इस टीम का मकसद केवल LLM (Large Language Models) से आगे जाकर ऐसी AI बनाना है जो सोचने, समझने, याद रखने और निर्णय लेने में सक्षम हो — बिल्कुल इंसानों जैसी।
Scale AI क्या करता है? – Strategic Choice
Scale AI एक अग्रणी AI डेटा कंपनी है जो OpenAI, Google, Amazon और अमेरिकी रक्षा मंत्रालय को डेटा एनोटेशन और मॉडल ट्रेनिंग सेवाएं देती है। Meta को उम्मीद है कि Scale AI की टेक्नोलॉजी से उसके Llama मॉडल्स को बेहतर बनाया जा सकेगा।
डील के बाद भी Scale AI स्वतंत्र रूप से काम करता रहेगा और Jason Droege को इसका अंतरिम सीईओ नियुक्त किया गया है। Wang अब केवल कंपनी के बोर्ड में शामिल रहेंगे।
Meta की Superintelligence रणनीति
Meta के लिए यह डील सिर्फ एक निवेश नहीं, बल्कि AI की अगली पीढ़ी में प्रवेश करने का एक मास्टरप्लान है।
कंपनी की पिछली AI पेशकश — Llama 4 — उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी थी, और इसके नए मॉडल Behemoth में भी देरी हो रही है। ऐसे में Wang की भर्ती को फिर से लीडर की दौड़ में शामिल करने की कोशिश है।
Wang 50 से ज़्यादा टॉप AI रिसर्चर्स की एक नई टीम बनाएंगे जो reasoning, planning और memory capabilities जैसी सुपर एडवांस्ड टेक्नोलॉजी पर काम करेगी।
Regulatory चिंता और Industry Reaction
हालांकि Meta ने पूरी कंपनी नहीं खरीदी है, बल्कि non-voting हिस्सेदारी ली है, लेकिन फिर भी यह डील Big Tech के एकाधिकार और टैलेंट एक्विजिशन की नई बहस छेड़ सकती है।
Microsoft और Google की तरह, Meta ने भी सीधे अधिग्रहण के बजाय हिस्सेदारी और टैलेंट को प्राथमिकता दी है, ताकि Antitrust नियमों से बचा जा सके।
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