अमेरिका के पूर्व ट्रेड सलाहकार और ट्रंप के करीबी सहयोगी पीटर नवारो (Peter Navarro) ने भारत के रूस से तेल आयात (India-Russia Oil Deal) पर फिर से तीखी टिप्पणी की है। नवारो का कहना है कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीदकर यूक्रेन युद्ध (Ukraine War) में अप्रत्यक्ष रूप से रूस का समर्थन कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस व्यापार से भारतीय रिफाइनर और खासकर ब्राह्मण (Brahmins) समुदाय लाभ उठा रहा है, जबकि आम जनता को नुकसान हो रहा है।
Peter Navarro की तीखी आलोचना
नवारो ने फॉक्स न्यूज इंटरव्यू में भारत को “क्रेमलिन के लिए लॉन्ड्रोमेट” तक कह डाला। उनके इस बयान ने सोशल मीडिया और मीडिया में भारी विवाद खड़ा कर दिया। आलोचकों का कहना है कि नवारो की टिप्पणियां जातिवादी और विभाजनकारी (divisive) हैं, क्योंकि उन्होंने आर्थिक मसलों को भारत की सामाजिक संरचना से जोड़ दिया।
भारत सरकार का जवाब
भारत सरकार (Indian Government) ने इन आरोपों को नकारा है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत की तेल खरीद ने अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार (Global Oil Market) को स्थिर रखने और कीमतों को बढ़ने से रोकने में मदद की है। भारत का उद्देश्य केवल ऊर्जा सुरक्षा और बाजार संतुलन बनाए रखना है, किसी विशेष समुदाय को लाभ पहुंचाना नहीं।
अमेरिका-भारत संबंधों पर असर
इस विवाद के चलते यूएस-इंडिया रिलेशन (US-India Relations) भी तनावपूर्ण हो गए हैं। ट्रंप प्रशासन ने भारत से आयातित वस्तुओं पर 50% तक का टैरिफ लगाया है। इसके पीछे एक कारण भारत का रूस से तेल व्यापार भी है। फिर भी, दोनों देशों ने डायलॉग और समाधान (dialogue & resolution) की इच्छा जताई है, और सितंबर में संयुक्त राष्ट्र (UN) की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप के बीच संभावित मुलाकात की उम्मीद है।
पीटर नवारो की टिप्पणी ने भारत में राजनीतिक और सामाजिक बहस को बढ़ा दिया है। जबकि भारत सरकार ने आर्थिक हित और अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी के पक्ष में अपनी नीति की सफाई दी है, अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव (Trade Tension) और आलोचनाओं का मामला अभी भी गर्म है।
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