प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) 31 अगस्त से 1 सितंबर 2025 तक चीन (China) के तियानजिन शहर में आयोजित होने वाले SCO Summit 2025 में हिस्सा लेने जा रहे हैं। यह उनकी सात साल बाद पहली चीन यात्रा है और 2020 गलवान घाटी विवाद (Galwan Clash) के बाद पहली बार दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच आमने-सामने मुलाकात होगी।
SCO Summit 2025 की खासियत
- इस शिखर सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping, रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin समेत 20 से अधिक देशों के नेता मौजूद रहेंगे।
- सम्मेलन में सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।
- SCO की 2035 तक की विकास रणनीति पर मुहर लगने और कई आर्थिक-सुरक्षा समझौते होने की उम्मीद है।
India-China Relations पर बड़ा संदेश
मोदी का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत-चीन संबंध (India-China Relations) सीमा विवाद और अविश्वास से जूझ रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच रिश्तों को पटरी पर लाने का अवसर हो सकती है।
India-US Tension और Global Diplomacy
भारत और अमेरिका (India-US) के बीच डोनाल्ड ट्रंप सरकार की Tariff Policy को लेकर हाल ही में तनाव बढ़ा है। ऐसे में भारत का SCO Summit में सक्रिय भागीदारी दिखाती है कि वह अपनी Geopolitical Strategy को संतुलित करने और बहुपक्षीय मंचों के जरिए नए विकल्प तलाशने में जुटा है।
China की Strategy
चीन इस सम्मेलन का उपयोग खुद को Global Stability का चेहरा और अमेरिकी दबाव के विकल्प के रूप में पेश करने में कर रहा है। भारत, रूस और मध्य एशियाई देशों की उपस्थिति बीजिंग के लिए अपनी पकड़ मजबूत करने का बड़ा मौका मानी जा रही है।
PM Modi China Visit 2025 सिर्फ एक राजनयिक दौरा नहीं, बल्कि भारत की बदलती Foreign Policy और Geopolitical Strategy का प्रतीक है। अब सबकी नजर इस पर होगी कि मोदी-शी जिनपिंग और पुतिन की मुलाकात से एशिया की राजनीति में क्या नया मोड़ आता है।
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