भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 6 अगस्त 2025 को हुई मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में Repo Rate को 5.50% पर स्थिर रखने का फैसला किया। इस साल पहले ही तीन बार कुल 1% की दर कटौती हो चुकी है। RBI का कहना है कि फिलहाल दरों को स्थिर रखकर अर्थव्यवस्था पर पिछले कटौती के असर को देखने का समय है।
मुद्रास्फीति और GDP Growth Update
- वित्त वर्ष 2025-26 के लिए Inflation Forecast घटकर 3.1% हो गया है, जो पहले 3.7% था।
- जून 2025 में खुदरा महंगाई 2.10% (6 साल का न्यूनतम स्तर) पर रही।
- जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.5% पर स्थिर रखा गया है।
Trump Tariff का असर
अमेरिका ने 1 अगस्त से भारतीय निर्यात पर 25% टैरिफ लगा दिया है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह कदम GDP Growth को 40 बेसिस पॉइंट तक कम कर सकता है और निवेशकों का भरोसा प्रभावित हो सकता है।
Stock Market Reaction
RBI के फैसले का बाजार पर मिला-जुला असर दिखा:
- निफ्टी लगभग 0.25% गिरा
- सेंसेक्स में 0.16% की गिरावट आई।
Loans और EMI पर असर
Repo Rate में बदलाव न होने से Home Loan, Personal Loan और EMI में तत्काल राहत नहीं मिलेगी। हालांकि, यदि आने वाले महीनों में महंगाई नियंत्रित रहती है और वैश्विक जोखिम कम होते हैं, तो आगे Rate Cut संभव है।
मुख्य Highlights
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| Repo Rate | 5.50% (यथावत) |
| मौद्रिक नीति रुख | Neutral |
| FY26 मुद्रास्फीति अनुमान | 3.1% |
| FY26 जीडीपी ग्रोथ अनुमान | 6.5% |
| प्रमुख जोखिम | अमेरिकी टैरिफ, विदेशी दबाव |
| EMI पर असर | तुरंत राहत नहीं |
आरबीआई का यह निर्णय दर्शाता है कि वह मौद्रिक नीति में स्थिरता बनाए रखते हुए Global Trade War और Domestic Inflation पर करीबी नजर रख रहा है।
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