कांग्रेस सांसद शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने हाल ही में एक लेख में भारत की राजनीति को “Family Business” बताते हुए बड़ा बयान दिया है। Tharoor ने कहा कि भारत में राजनीति अब परिवारों की विरासत बन चुकी है, जहां पद और सत्ता एक ही खानदान में घूमती रहती है।
Shashi Tharoor का बयान: “नेता पद को विरासत समझते हैं”
थरूर ने अपने अंतरराष्ट्रीय लेख “Indian Politics Are a Family Business” में लिखा –
“भारत में यह मान्यता बन गई है कि राजनीतिक परिवारों के सदस्य स्वाभाविक रूप से शासन के योग्य होते हैं। लेकिन जब सार्वजनिक पदों को पारिवारिक विरासत बना दिया जाता है, तो लोकतंत्र की आत्मा कमजोर पड़ जाती है।”
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि नेहरू-गांधी परिवार के प्रभाव ने यह सोच गहराई से जड़ दी है कि “नेतृत्व भी एक पारिवारिक अधिकार है”।
थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि यह समस्या सिर्फ कांग्रेस की नहीं, बल्कि लगभग हर राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टी में फैली हुई है — चाहे वह उत्तर प्रदेश की यादव फैमिली, महाराष्ट्र की ठाकरे फैमिली, या तमिलनाडु की करुणानिधि फैमिली क्यों न हो।
Dynasty Politics लोकतंत्र के लिए खतरा” – Tharoor
थरूर ने साफ कहा कि वंशवाद भारतीय लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने कहा,
“अब समय आ गया है कि भारत वंशवाद छोड़कर Meritocracy (योग्यता आधारित राजनीति) को अपनाए।”
थरूर ने सुधार के लिए कुछ ठोस सुझाव दिए —
- हर राजनीतिक दल में आंतरिक चुनावअनिवार्य किए जाएं,
- नेताओं के लिए कार्यकाल सीमा तय की जाए,
- और जनता को ऐसे नेताओं को चुनना चाहिए जो काम और योग्यता के आधार पर आगे आएं, न कि परिवार के नाम पर।
Political Reactions: बीजेपी ने की तारीफ, कांग्रेस में मचा हलचल
थरूर के इस बयान के बाद सियासी गलियारों में हलचल मच गई।
- बीजेपी नेताओं ने शशि थरूर की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने सच्चाई उजागर की है और कांग्रेस पर सीधा प्रहार किया है।
- वहीं, कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि थरूर के बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है।
- कुछ विश्लेषकों के मुताबिक, थरूर ने वह मुद्दा छेड़ा है जिस पर बात करना कांग्रेस जैसे पुराने दलों में भी आसान नहीं होता।
भारत में Family Politics की गहरी जड़ें
भारत में परिवारवाद कोई नई बात नहीं है। देश की लगभग हर बड़ी पार्टी में परिवार का प्रभाव दिखता है —
- उत्तर प्रदेश – मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव परिवार
- बिहार – लालू यादव परिवार
- महाराष्ट्र – ठाकरे परिवार
- तमिलनाडु – करुणानिधि परिवार
- आंध्र प्रदेश – रेड्डी परिवार
थरूर का लेख ऐसे समय आया है जब युवा पीढ़ी राजनीति में बदलाव और पारदर्शिता की मांग कर रही है।
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