नई दिल्ली: कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान वंदे मातरम् को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गई हैं। भाजपा ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी पर वंदे मातरम् के गायन को रोकने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कार्यक्रम का वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि गीत की शुरुआती पंक्तियों के बाद सोनिया गांधी ने इसे रोकने का संकेत दिया।
भाजपा ने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी पूरे गायन के दौरान असहज नजर आए।
कांग्रेस ने आरोपों को बताया गलत
कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को खारिज कर दिया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि सोनिया गांधी वंदे मातरम् रोकने की कोशिश नहीं कर रही थीं।
उनके मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे काफी देर से खड़े थे। सोनिया गांधी उनके लिए कुर्सी लाने का इशारा कर रही थीं। जयराम रमेश ने दावा किया कि कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् का पूरा संस्करण गाया गया और इसे रोकने की कोई कोशिश नहीं हुई।
1937 से कांग्रेस कार्यक्रमों में वंदे मातरम् की परंपरा
जयराम रमेश ने कहा कि 28 अक्टूबर 1937 को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में वंदे मातरम् के इस्तेमाल को लेकर चर्चा हुई थी। बैठक में महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, सरदार वल्लभभाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद, जवाहरलाल नेहरू और सी. राजगोपालाचारी समेत कई प्रमुख नेता मौजूद थे।
रमेश के अनुसार, रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह के बाद कांग्रेस के कार्यक्रमों में वंदे मातरम् की शुरुआती पंक्तियां गाने की परंपरा तय हुई थी।
वंदे मातरम् को लेकर नए नियमों पर भी विवाद
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब केंद्र सरकार ने वंदे मातरम् और राष्ट्रगान को लेकर नए निर्देश जारी किए हैं। निर्देशों में दोनों के गायन और बजाने के दौरान तय प्रोटोकॉल का पालन करने को कहा गया है।
सरकार के निर्देशों के अनुसार, अगर किसी कार्यक्रम में वंदे मातरम् और जन गण मन दोनों गाए जाते हैं, तो पहले वंदे मातरम् और उसके बाद राष्ट्रगान होगा। यदि किसी राज्य का अपना राज्य गीत भी हो, तो क्रम राज्य गीत, वंदे मातरम् और फिर जन गण मन का होगा।

1875 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था
वंदे मातरम् की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में की थी। बाद में इसे उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल किया गया।
1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने वंदे मातरम् गाया था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह गीत ब्रिटिश शासन के खिलाफ राष्ट्रीय चेतना और आंदोलन का प्रमुख प्रतीक बन गया।
संसद में भी हो चुकी है वंदे मातरम् पर बहस
वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर संसद में भी इस गीत को लेकर विशेष चर्चा हुई थी। उस दौरान भाजपा और कांग्रेस के बीच गीत के इतिहास और इसके इस्तेमाल को लेकर तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिली थी।
भाजपा ने कांग्रेस पर वंदे मातरम् के कुछ हिस्सों को लेकर आपत्ति जताने का आरोप लगाया था, जबकि कांग्रेस ने इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाया था।



