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बारातियों से भरी बस पलटी, एक की मौत, पांच गंभीर घायल

सारण। बिहार के सारण जिले में रविवार देर रात बारातियों से भरी एक बस सड़क हादसे का शिकार हो गई। तरैया थाना क्षेत्र में अनियंत्रित होकर बस पलटने से एक बाराती की मौत हो गई, जबकि पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे में कई अन्य बारातियों को भी चोटें आई हैं। जानकारी के अनुसार, बस वैशाली जिले के लालगंज से जगदीशपुर जा रही बारात का हिस्सा थी। तरैया थाना क्षेत्र में एसएच-73 पर गंडार गांव के पास बने स्पीड ब्रेकर पर चालक बस से नियंत्रण खो बैठा। तेज रफ्तार बस पहले सड़क किनारे एक सूखे पेड़ से टकराई, फिर बिजली के पोल से भिड़ने के बाद पलट गई। ग्रामीणों ने चलाया राहत अभियान हादसे के बाद आसपास के ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्य शुरू किया। बस के शीशे तोड़कर और दरवाजे खोलकर घायलों को बाहर निकाला गया। एक बाराती बस के नीचे दब गया था, जिसे बाहर निकालने के लिए जेसीबी मशीन की मदद लेनी पड़ी। घायल को रेफरल अस्पताल तरैया ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक की पहचान वैशाली जिले के बिशुनपुर अररा गैरोल निवासी मोहम्मद असगर के रूप में हुई है। पांच गंभीर घायलों को किया रेफर हादसे में गंभीर रूप से घायल पांच लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर किया गया है। अन्य घायलों का इलाज स्थानीय अस्पताल में जारी है। पुलिस ने शुरू की जांच सूचना मिलते ही तरैया थाना पुलिस मौके पर पहुंची और राहत कार्य में सहयोग किया। दुर्घटनाग्रस्त बस को सड़क से हटाकर यातायात बहाल कराया गया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। प्रारंभिक जांच में हादसे की वजह स्पीड ब्रेकर पर चालक का बस से नियंत्रण खो देना बताया जा रहा है। हालांकि पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। इस हादसे के बाद मृतक के परिवार में मातम पसरा हुआ है, जबकि घायलों के परिजन अस्पताल पहुंचकर उनका हालचाल ले रहे हैं। अधिक जानकारी और ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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खंडवा में सागर आरतानी बने भाजयुमो जिलाध्यक्ष, शुभम पटेल को मिली जिला महामंत्री की जिम्मेदारी

खंडवा। लंबे समय से लंबित भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के जिला अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर जारी इंतजार आखिरकार खत्म हो गया। भाजपा युवा मोर्चा ने सागर आरतानी को खंडवा जिले का नया जिलाध्यक्ष नियुक्त किया है। वहीं, अध्यक्ष पद के प्रमुख दावेदार रहे शुभम पटेल को संगठन ने जिला महामंत्री की जिम्मेदारी सौंपी है। सागर आरतानी, पूर्व जिलाध्यक्ष अनूप पटेल की जगह अब युवा मोर्चा की कमान संभालेंगे। उनकी नियुक्ति को लेकर पिछले कई दिनों से राजनीतिक और संगठनात्मक स्तर पर चर्चाएं चल रही थीं। सांसद गुट के समर्थन से मिली जिम्मेदारी जानकारी के मुताबिक, सागर आरतानी को सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल का समर्थन प्राप्त था। संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर पहले से नाराज चल रहे सांसद पाटिल ने पार्टी नेतृत्व के समक्ष गुटबाजी की शिकायत भी की थी। उन्होंने स्पष्ट तौर पर सागर आरतानी के नाम का समर्थन करते हुए प्रदेश संगठन को उनका नाम भेजा था। शुभम पटेल को बनाया गया जिला महामंत्री दूसरी ओर, अध्यक्ष पद की दौड़ में एबीवीपी से जुड़े शुभम पटेल भी मजबूत दावेदार माने जा रहे थे। उनके नाम पर संगठन के भीतर व्यापक सहमति बताई जा रही थी। हालांकि, अंतिम निर्णय में सागर आरतानी को जिलाध्यक्ष बनाया गया, जबकि संगठनात्मक संतुलन बनाए रखने के लिए शुभम पटेल को जिला महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई। नियुक्ति को लेकर चली थी लंबी कवायद सागर आरतानी की दावेदारी के दौरान कुछ नेताओं ने उनके कारोबारी होने और संगठनात्मक अनुभव को लेकर सवाल उठाए थे। वहीं, समर्थकों ने तर्क दिया कि भाजपा पहले भी विभिन्न व्यापारिक पृष्ठभूमि के कार्यकर्ताओं को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देती रही है। अंततः प्रदेश नेतृत्व ने दोनों प्रमुख दावेदारों को संगठन में अहम जिम्मेदारी देकर संतुलन साधने की कोशिश की है। अधिक जानकारी और ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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शराब पार्टी के बाद विवाद में युवक की मौत, परिजनों ने थाने के सामने किया चक्काजाम

ग्वालियर। ग्वालियर में दोस्तों के साथ हुई शराब पार्टी के बाद हुए विवाद ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। मामूली पैसों के विवाद में कथित धक्का लगने से घायल हुए 46 वर्षीय युवक की तीन दिन बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद आक्रोशित परिजनों ने शव को थाने के सामने रखकर चक्काजाम किया और आरोपियों पर हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की। माधोगंज थाना क्षेत्र के जामदार का बाड़ा निवासी मनोज सिसोदिया ने 17 जुलाई को अपने दोस्तों प्रवीण और सोनू काका के साथ शराब पार्टी की थी। पार्टी के बाद घर लौटे मनोज को याद आया कि उनके कुछ पैसे वहीं छूट गए हैं। जब वह पैसे लेने वापस पहुंचे तो इसी बात को लेकर तीनों के बीच विवाद हो गया। परिजनों का आरोप है कि कहासुनी के दौरान दोनों आरोपियों ने मनोज को धक्का दे दिया, जिससे वह नाली में गिर पड़े और उनका सिर पत्थर से टकरा गया। गंभीर रूप से घायल मनोज को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां तीन दिन तक उपचार के बाद रविवार को उनकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम के बाद परिजन शव लेकर सीधे माधोगंज थाने पहुंचे और सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन करते हुए पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ हत्या की एफआईआर दर्ज कर तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। जांच के दौरान सामने आए CCTV फुटेज में तीनों दोस्त एक साथ जाते दिखाई दे रहे हैं। फुटेज में विवाद के बाद मनोज को धक्का लगने की घटना भी नजर आती है। वहीं, मनोज के गिरने के बाद दोनों आरोपी उन्हें उठाकर सहारा देते हुए भी दिखाई दे रहे हैं। पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी दिव्या तिवारी ने बताया कि CCTV फुटेज, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच की जा रही है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उसी के अनुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिक जानकारी और ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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गुना में रिश्तेदारों ने पैन कार्ड का किया दुरुपयोग, ट्रैक्टर लोन में फर्जी गारंटर बनाकर लाखों का कर्ज चढ़ाया

गुना। मध्यप्रदेश के गुना जिले में धोखाधड़ी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक व्यक्ति के रिश्तेदारों ने उसकी जानकारी के बिना पैन कार्ड का इस्तेमाल कर ट्रैक्टर लोन में फर्जी गारंटर बना दिया। इस जालसाजी के कारण पीड़ित का सिबिल (CIBIL) स्कोर खराब हो गया और उसे वाहन फाइनेंस तक नहीं मिल सका। सिटी कोतवाली थाना पुलिस ने मामले की जांच के बाद पीड़ित के सगे जीजा सहित दो आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। स्कूटी खरीदने पहुंचे तो हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा पुलिस के अनुसार, आसमानी माता मंदिर के पास रहने वाले जगमोहन प्रजापति अक्टूबर 2024 में स्कूटी खरीदने एक शोरूम पहुंचे थे। फाइनेंस प्रक्रिया के दौरान जब उनका सिबिल स्कोर जांचा गया तो पता चला कि उनके नाम पर पहले से ट्रैक्टर और अन्य लोन चल रहे हैं, जिनकी कई किश्तें बकाया थीं। खराब सिबिल स्कोर के कारण उन्हें फाइनेंस नहीं मिला और अंततः पत्नी के नाम पर स्कूटी खरीदनी पड़ी। 2017 और 2021 में किया गया फर्जीवाड़ा बाद में इंडसइंड बैंक से जानकारी लेने पर सामने आया कि वर्ष 2017 में आरोपी देवेंद्र प्रजापति ने ट्रैक्टर खरीदते समय गारंटर के रूप में पीड़ित के पैन कार्ड का कथित रूप से गलत इस्तेमाल किया। इसके बाद 2021 में उसी ट्रैक्टर पर करीब 3.38 लाख रुपये का री-फाइनेंस लोन भी लिया गया, जिसमें भी पीड़ित के दस्तावेजों का उपयोग किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि लोन की किश्तें समय पर जमा नहीं होने से पूरा वित्तीय बोझ पीड़ित के रिकॉर्ड पर दर्ज हो गया। पुलिस ने दर्ज किया मामला पीड़ित की शिकायत पर पुलिस अधीक्षक कार्यालय के निर्देश पर मामले की विस्तृत जांच की गई। बैंक से प्राप्त दस्तावेजों और जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने आरोपी देवेंद्र प्रजापति और पीड़ित के जीजा जगमोहन प्रजापति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) और 319(2) के तहत धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना जारी है और जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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CSMCL ओवरटाइम भुगतान मामले में पूर्व MD अरुणपति त्रिपाठी गिरफ्तार, 172 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता की जांच तेज

रायपुर। छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) में कथित 172 करोड़ रुपये के ओवरटाइम भुगतान घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तत्कालीन प्रबंध संचालक (MD) अरुणपति त्रिपाठी को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि फर्जी भुगतान के बदले कमीशन लेने में उनकी भूमिका सामने आई है। अरुणपति त्रिपाठी को 17 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। शनिवार को उन्हें रायपुर की अदालत में पेश किया गया, जहां से कोर्ट ने 20 जुलाई तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया। मैनपावर एजेंसियों को करोड़ों का अतिरिक्त भुगतान EOW-ACB की जांच के अनुसार वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच कई मैनपावर एजेंसियों को कर्मचारियों के नाम पर नियमों से परे अतिरिक्त भुगतान किया गया। जांच के दायरे में सुमित फैसिलिटीज, प्राइमवन वर्कफोर्स, ए-टू-जेड इंफ्रासर्विसेज, अलर्ट कमांडोज और ईगल हंटर सॉल्यूशंस जैसी कंपनियां शामिल हैं। जांच में सामने आया कि: का अतिरिक्त भुगतान किया गया। एजेंसियों के अनुसार कुल भुगतान लगभग 182.98 करोड़ रुपये तक पहुंचता है, जबकि प्राथमिकी में करीब 172 करोड़ रुपये की कथित अनियमितता की जांच की जा रही है। ED की कार्रवाई के बाद दर्ज हुई थी FIR प्रवर्तन निदेशालय (ED) के रायपुर कार्यालय ने 29 नवंबर 2023 को तीन लोगों से 28.80 लाख रुपये नकद जब्त किए थे। इसके बाद राज्य सरकार को भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर EOW ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच एजेंसियों का आरोप है कि फर्जी बिल, बढ़े हुए भुगतान और कथित कमीशन नेटवर्क के जरिए सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया और इसका बड़ा हिस्सा नकद कमीशन के रूप में वापस लिया गया। 12 आरोपियों के खिलाफ पहले ही चार्जशीट इस मामले में पहले ही 12 आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र पेश किया जा चुका है। अब अरुणपति त्रिपाठी से पूछताछ के दौरान जांच एजेंसियों को घोटाले से जुड़े अन्य लोगों और वित्तीय लेनदेन के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और एजेंसियां कथित वित्तीय अनियमितताओं की पूरी श्रृंखला की पड़ताल कर रही हैं। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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ग्वालियर में निकली भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा, 42 फीट ऊंचे हाइड्रोलिक रथ पर नगर भ्रमण

ग्वालियर। मध्यप्रदेश के ग्वालियर में शनिवार को इस्कॉन (ISKCON) की ओर से भगवान श्रीजगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा की भव्य रथयात्रा श्रद्धा और उत्साह के साथ निकाली गई। 42 फीट ऊंचे विशेष हाइड्रोलिक रथ पर सवार भगवान के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु उमड़े। “जय जगन्नाथ” और “हरे कृष्ण” के जयघोष से पूरा शहर भक्तिमय माहौल में डूब गया। रथयात्रा का शुभारंभ जीवाजी क्लब से हुआ। मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने भगवान की पूजा-अर्चना की और पारंपरिक छेरा पहंरा (स्वर्ण झाड़ू) सेवा निभाकर यात्रा को रवाना किया। 200 किलो प्राकृतिक फूलों से सजा रथ इस वर्ष की रथयात्रा कई मायनों में विशेष रही। 42 फीट ऊंचे हाइड्रोलिक रथ को लगभग 200 किलोग्राम प्राकृतिक फूलों से आकर्षक ढंग से सजाया गया। श्रद्धालुओं ने रस्सियों से रथ खींचते हुए भगवान जगन्नाथ की आराधना की। यात्रा में रूस से आए कीर्तन मंडल, वृंदावन के श्रद्धालु और दिल्ली का प्रसिद्ध माधवास रॉक बैंड हरे नाम संकीर्तन प्रस्तुत कर रहे हैं। इसके अलावा भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु और पंचतत्त्व की भव्य पालकी भी आकर्षण का केंद्र रही। इन मार्गों से होकर निकली रथयात्रा रथयात्रा जीवाजी क्लब से शुरू होकर अचलेश्वर, इंदरगंज, दाल बाजार, नया बाजार, लोहिया बाजार, महाराज बाड़ा, नई सड़क और लक्ष्मीगंज होते हुए गोयल वाटिका पहुंचेगी। यहां महाआरती, विशाल भंडारे और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ रथयात्रा का समापन होगा। हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी और भक्ति भाव से सराबोर इस आयोजन ने ग्वालियर में आध्यात्मिक उत्सव का माहौल बना दिया। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ा, डिसैलिनेशन प्लांट बने निशाना; ईरान ने अमेरिकी हमले का लगाया आरोप

तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब समुद्र के खारे पानी को पीने योग्य बनाने वाले डिसैलिनेशन (जल शोधन) प्लांटों तक पहुंच गया है। ईरान ने शनिवार को दावा किया कि अमेरिकी हवाई हमले में होर्मोजगान प्रांत स्थित बोंजी डिसैलिनेशन प्लांट पूरी तरह तबाह हो गया, जिससे करीब 20 गांवों के 10 हजार लोगों की पेयजल आपूर्ति प्रभावित हुई है। दूसरी ओर, कुवैत ने भी आरोप लगाया है कि लगातार दूसरे दिन उसके जल शोधन संयंत्र को निशाना बनाया गया। कुवैत में लगभग 90 प्रतिशत पेयजल समुद्री पानी को मीठा बनाने वाले डिसैलिनेशन प्लांटों से प्राप्त होता है। ऐसे में इन संयंत्रों पर किसी भी तरह का हमला देश की जल सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माना जा रहा है। पिछले 24 घंटे के प्रमुख घटनाक्रम बढ़ते सैन्य तनाव के बीच पश्चिम एशिया में जल, ऊर्जा और रणनीतिक ठिकानों पर हमलों ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। हालांकि, दोनों पक्षों के कई दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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अहमदाबाद में अवैध पटाखा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट, 8 कर्मचारियों की मौत; 15 घायल

अहमदाबाद। गुजरात के अहमदाबाद जिले के वस्त्राल क्षेत्र में शनिवार को एक अवैध पटाखा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट के बाद आग लग गई। हादसे में 8 कर्मचारियों की मौत हो गई, जबकि करीब 15 लोग घायल हुए हैं। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। यह हादसा रामोल-गटराड रोड पर महमूदपुरा टैलेंट के पास स्थित फैक्ट्री में हुआ। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि इसकी आवाज करीब 5 किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। घटना के समय फैक्ट्री में लगभग 25 कर्मचारी काम कर रहे थे। RAF जवानों ने संभाला मोर्चा घटनास्थल के पास ही रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) का कैंप होने के कारण धमाके की आवाज सुनते ही जवान मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। सूचना मिलते ही दमकल विभाग और एम्बुलेंस भी मौके पर पहुंच गईं। लाइसेंस रद्द होने के बावजूद चल रही थी फैक्ट्री संयुक्त पुलिस आयुक्त जयपाल सिंह राठौड़ ने बताया कि फैक्ट्री संचालक मेहुल डोडिया का लाइसेंस पहले ही रद्द किया जा चुका था। इसके बावजूद खुले मैदान में तिरपाल और अस्थायी ढांचे बनाकर अवैध रूप से पटाखों का निर्माण किया जा रहा था। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि लाइसेंस निरस्त होने के बाद भी फैक्ट्री का संचालन कैसे जारी रहा और संबंधित अधिकारियों की भूमिका क्या रही। घायलों का अस्पताल में इलाज घायलों को एलजी अस्पताल और असरवा सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कई घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है। प्रधानमंत्री ने जताया शोक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से 2-2 लाख रुपये और घायलों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। जांच शुरू पुलिस और प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में फैक्ट्री के अवैध संचालन और सुरक्षा नियमों की अनदेखी की बात सामने आई है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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भूख हड़ताल के 21वें दिन अस्पताल ले जाए गए सोनम वांगचुक, डिहाइड्रेशन की पुष्टि; इलाज लेने से किया इनकार

नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर 21 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह पुलिस सफदरजंग अस्पताल ले गई। अस्पताल प्रशासन की ओर से जारी मेडिकल बुलेटिन में बताया गया कि वांगचुक डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) से पीड़ित हैं। साथ ही उनके शरीर में पोटैशियम का स्तर कम पाया गया है और यूरिन कीटोन 3+ दर्ज किया गया है। अस्पताल के अनुसार, उन्होंने फिलहाल दवा लेने से इनकार कर दिया है। डॉक्टरों को नहीं मिलने देने का दावा वांगचुक के निजी डॉक्टर डॉ. नितिन दीघे ने दावा किया कि अस्पताल में गृह मंत्रालय के एक अधिकारी की मौजूदगी के कारण उनकी मेडिकल टीम को सोनम वांगचुक से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। वहीं, उनकी पत्नी गीतांजलि जे. अंग्मो ने भी कहा कि पोटैशियम की कमी का उपचार धरना स्थल पर भी संभव था और इसके लिए अस्पताल में भर्ती करना जरूरी नहीं था। पेपर लीक मामले को लेकर कर रहे हैं अनशन सोनम वांगचुक कथित पेपर लीक मामले की जांच और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे हैं। लंबे अनशन के कारण उनकी सेहत लगातार बिगड़ रही थी और उनका वजन भी करीब 9.5 किलोग्राम कम हो चुका है। वांगचुक के बाद अभिजीत दीपके ने शुरू की भूख हड़ताल सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी भूख हड़ताल शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि जब तक वांगचुक दोबारा धरना स्थल पर नहीं लौटते, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा। इसी दौरान प्रदर्शन स्थल पर एक महिला ने अभिजीत दीपके पर स्याही फेंक दी। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने स्थिति को संभाला। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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HDFC बैंक का पहली तिमाही मुनाफा 5% बढ़कर ₹19,060 करोड़, बाजार के अनुमान से रहा कम

नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े निजी बैंक HDFC बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 (Q1 FY27) की पहली तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। अप्रैल-जून तिमाही में बैंक का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट 4.98% बढ़कर 19,059.72 करोड़ रुपए रहा। हालांकि, यह आंकड़ा बाजार के अनुमान से कम रहा। CNBC-TV18 के पोल में बैंक के मुनाफे का अनुमान 19,332 करोड़ रुपए लगाया गया था। नेट इंटरेस्ट इनकम में 6.7% की बढ़ोतरी तिमाही के दौरान बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) सालाना आधार पर 6.7% बढ़कर 33,535.95 करोड़ रुपए हो गई। हालांकि यह भी बाजार के 34,353 करोड़ रुपए के अनुमान से कम रही। नेट इंटरेस्ट मार्जिन 3.26% HDFC बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) कुल एसेट्स के आधार पर 3.26% दर्ज किया गया। वहीं, ब्याज अर्जित करने वाली संपत्तियों (Interest Earning Assets) के आधार पर यह 3.40% रहा। एसेट क्वालिटी में मामूली बदलाव 30 जून 2026 तक बैंक का ग्रॉस एनपीए (GNPA) बढ़कर 1.17% हो गया, जो मार्च 2026 में 1.15% था। हालांकि, पिछले साल की समान अवधि में यह 1.40% था। वहीं, नेट एनपीए (NNPA) 30 जून 2026 तक 0.41% दर्ज किया गया। प्रोविजनिंग और क्रेडिट कॉस्ट पहली तिमाही में बैंक ने 3,060 करोड़ रुपए का प्रावधान (Provisioning & Contingencies) किया। इस दौरान बैंक का क्रेडिट कॉस्ट रेशियो 0.40% रहा। इस साल 17% से ज्यादा टूटा शेयर शुक्रवार को HDFC बैंक का शेयर 1.4% की बढ़त के साथ 819.60 रुपए पर बंद हुआ। हालांकि, वर्ष 2026 में अब तक बैंक का शेयर करीब 17.2% गिर चुका है। इसी अवधि में निफ्टी-50 इंडेक्स में लगभग 6.9% की गिरावट दर्ज की गई है। नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) क्या होती है? नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) वह आय है जो बैंक को ग्राहकों को दिए गए लोन से मिलने वाले ब्याज और जमाकर्ताओं को दिए गए ब्याज के अंतर के रूप में प्राप्त होती है। यह बैंक की मुख्य कमाई का प्रमुख स्रोत होती है। नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) क्या है? नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) बैंक की लाभप्रदता का महत्वपूर्ण पैमाना है। यह बताता है कि बैंक अपनी ब्याज अर्जित करने वाली संपत्तियों से कितना शुद्ध ब्याज कमा रहा है। NPA क्या होता है? नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) वह लोन होता है जिसकी किस्त 90 दिनों तक जमा नहीं होती। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के अनुसार, लगातार 90 दिन तक भुगतान नहीं होने पर बैंक उस लोन को NPA घोषित कर देता है। deshharpal.comअधिक खबरों के लिए विजिट करें:
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Dharmendra Pradhan

Dharmendra Pradhan on CJP: राहुल गांधी पर सवाल, Regime Change को लेकर सियासत तेज

दिल्ली में CJP के विरोध प्रदर्शन को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग से शुरू हुआ यह विवाद अब राहुल गांधी, कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गया है। धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) समेत बीजेपी के नेताओं ने आंदोलन को लेकर विपक्ष की मंशा पर सवाल उठाए हैं। वहीं, प्रदर्शन से जुड़े नेताओं का कहना है कि उनकी लड़ाई चुनावी पारदर्शिता और चुनाव आयोग की जवाबदेही को लेकर है। विवाद तब और बढ़ गया, जब आंदोलन को बांग्लादेश में हुए राजनीतिक बदलाव और ‘Regime Change’ यानी सत्ता परिवर्तन की बहस से जोड़कर देखा जाने लगा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि CJP का प्रदर्शन अब केवल चुनाव सुधार तक सीमित है या इसके राजनीतिक मायने भी हैं? धर्मेंद्र प्रधान ने राहुल गांधी और CJP पर क्यों साधा निशाना? CJP के आंदोलन को लेकर बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस और राहुल गांधी की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। बीजेपी का आरोप है कि विपक्ष चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को उठाकर केंद्र सरकार के खिलाफ राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। Dharmendra Pradhan के बयान को भी इसी राजनीतिक टकराव के संदर्भ में देखा जा रहा है। बीजेपी नेताओं ने आंदोलन और बांग्लादेश के राजनीतिक घटनाक्रम के बीच समानताएं बताते हुए विपक्ष की रणनीति पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, ये राजनीतिक आरोप हैं। बांग्लादेश जैसे घटनाक्रम को भारत में दोहराने की किसी कथित योजना को स्थापित तथ्य के रूप में पेश नहीं किया जा सकता। ‘Regime Change’ बयान से क्यों शुरू हुई नई बहस? CJP आंदोलन के दौरान सत्ता परिवर्तन को लेकर दिए गए बयानों ने विवाद को नया मोड़ दिया। आंदोलन से जुड़े कुछ नेताओं की टिप्पणियों को बीजेपी ने सरकार बदलने की मंशा से जोड़कर देखा। दूसरी ओर, CJP की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग उठाई गई है। यही वजह है कि अब इस आंदोलन को लेकर दो अलग-अलग दावे सामने हैं। बीजेपी इसे राजनीतिक अभियान बता रही है, जबकि आंदोलनकारी पक्ष चुनाव आयोग की जवाबदेही का मुद्दा उठा रहा है। इन बयानों के बीच किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए संबंधित नेताओं के पूरे वक्तव्य और उपलब्ध तथ्यों को देखना जरूरी है। राहुल गांधी ने CJP आंदोलन को लेकर क्या रुख अपनाया? कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रदर्शन से जुड़े नेताओं की गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थन में बयान दिया था। उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन और तिरंगा फहराने के अधिकार का मुद्दा उठाया। राहुल गांधी और कांग्रेस लगातार चुनावी प्रक्रिया तथा मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। वहीं, बीजेपी का कहना है कि विपक्ष इन मुद्दों का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए कर रहा है। इस तरह CJP आंदोलन को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच टकराव बढ़ता दिखाई दे रहा है। एक तरफ चुनावी पारदर्शिता की मांग है, तो दूसरी तरफ आंदोलन के राजनीतिक उद्देश्य पर सवाल उठाए जा रहे हैं। SIR विवाद क्या है और चुनाव आयोग पर क्यों उठ रहे सवाल? इस पूरे विवाद के केंद्र में मतदाता सूची का Special Intensive Revision यानी SIR भी है। यह मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा की प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य सूची को अपडेट करना और पात्र मतदाताओं का विवरण सही रखना है। विपक्ष ने इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठाए हैं। कुछ रिपोर्टों और राजनीतिक बयानों में 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने का दावा भी चर्चा में रहा है। हालांकि, ऐसे आंकड़ों को संबंधित राज्यों के आधिकारिक आंकड़ों और चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के आधार पर समझना जरूरी है। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि किसी पात्र मतदाता का नाम न छूटे। दूसरी ओर, चुनाव आयोग की प्रक्रिया और उसके फैसलों को लेकर उठाए गए राजनीतिक आरोपों का आकलन तथ्यों के आधार पर किया जाना चाहिए। Delhi CJP Protest: तिरंगा मार्च और सुरक्षा व्यवस्था पर नजर दिल्ली में CJP के प्रस्तावित तिरंगा मार्च को लेकर भी विवाद सामने आया। प्रदर्शनकारियों की योजना कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा फहराने की थी। प्रशासन ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था में बदलाव किए। प्रदर्शन स्थल, नेताओं की हिरासत और मार्च की अनुमति को लेकर भी सवाल उठे। इस बीच, अदालत में प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग से जुड़ा मामला भी चर्चा में रहा। अदालत की टिप्पणियों और पुलिस के आश्वासनों को पूरे संदर्भ में समझना जरूरी है; इन्हें प्रदर्शन के हर पहलू पर अंतिम फैसला नहीं माना जाना चाहिए। तिरंगा मार्च को लेकर विवाद ने एक बार फिर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी के बीच संतुलन का सवाल खड़ा किया है। CJP Protest पर आगे क्या होगा? फिलहाल CJP आंदोलन के साथ तीन बड़े मुद्दे जुड़े हुए हैं—SIR के तहत मतदाता सूची में बदलाव, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग और ‘Regime Change’ को लेकर बीजेपी तथा विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप। आने वाले दिनों में चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया, आंदोलनकारियों की अगली रणनीति और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर नजर रहेगी। यह भी देखना होगा कि राजनीतिक दल चुनावी पारदर्शिता से जुड़े सवालों पर किस तरह अपनी बात रखते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
अभिजीत दिपके

CJP Tiranga March: अभिजीत दिपके के घर पहुंची दिल्ली पुलिस, कनॉट प्लेस में 25 हजार जवान तैनात

दिल्ली में आज, 16 अक्टूबर को CJP के ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को लेकर माहौल गर्म है। मार्च से पहले दिल्ली पुलिस अभिजीत दिपके के घर पहुंची। वहीं, कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इलाके में करीब 25 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की तैयारी है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच अब सबकी नजर इस बात पर है कि CJP का प्रस्तावित मार्च आगे किस तरह बढ़ता है। अभिजीत दिपके के घर पहुंची दिल्ली पुलिस CJP के प्रस्तावित मार्च से पहले दिल्ली पुलिस की टीम अभिजीत दिपके के घर पहुंची। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने उन्हें मार्च को लेकर नोटिस दिया। संगठन की ओर से इस कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। CJP का कहना है कि वह अपने नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में तिरंगा मार्च निकालना चाहता है। हालांकि, दिल्ली में लागू प्रतिबंधों और सुरक्षा व्यवस्था के चलते कार्यक्रम को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। Connaught Place में कड़ी सुरक्षा, 25 हजार जवान तैनात ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को देखते हुए कनॉट प्लेस और आसपास के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। रिपोर्ट्स में करीब 25 हजार पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों की तैनाती का जिक्र है। सेंट्रल पार्क और आसपास के प्रमुख स्थानों पर भी निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबंधात्मक कदम उठाए हैं। सेंट्रल पार्क को 16 और 17 अक्टूबर को बंद रखने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे में कनॉट प्लेस आने-जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। क्यों हो रहा है CJP का ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च? CJP ने इस मार्च का ऐलान अपने नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के विरोध में किया है। संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठा रहा है। 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान CJP समर्थकों ने बैरिकेडिंग पार कर नारेबाजी की थी। इसके बाद पुलिस ने संगठन के कुछ नेताओं को हिरासत में लिया। इसी कार्रवाई के विरोध में CJP ने तिरंगा मार्च निकालने की घोषणा की। SIR विवाद ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल इस पूरे विवाद के पीछे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) का मुद्दा भी है। CJP और कुछ विपक्षी समूहों ने मतदाता सूची में बदलावों को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया से मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। वहीं, चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची को लेकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत काम किए जाने की बात कही जाती रही है। SIR को लेकर राजनीतिक बहस लगातार जारी है और अब यह विवाद सड़कों पर हो रहे प्रदर्शनों तक पहुंच गया है। दिल्ली में Traffic Advisory, लोगों को सतर्क रहने की सलाह मार्च के चलते कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में ट्रैफिक प्रभावित होने की आशंका है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे घर से निकलने से पहले यातायात संबंधी अपडेट देख लें और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करें। दिल्ली पुलिस की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, जबकि CJP अपने विरोध प्रदर्शन को लेकर आगे बढ़ना चाहता है। ऐसे में शुक्रवार शाम का घटनाक्रम महत्वपूर्ण रहने वाला है। अब आगे क्या होगा? CJP के ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को लेकर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था सख्त है। एक तरफ संगठन अपने नेताओं की गिरफ्तारी और SIR के मुद्दे पर विरोध दर्ज कराना चाहता है, तो दूसरी तरफ प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबंध लागू कर रहा है। अब देखना होगा कि पुलिस की पाबंदियों के बीच मार्च को लेकर क्या स्थिति बनती है और CJP आगे क्या कदम उठाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Supreme Court

Supreme Court on CJP Protest: प्रदर्शन पर रोक से इनकार, ₹200 करोड़ के कारोबार पर असर का दावा

दिल्ली में CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई के दौरान प्रदर्शन के अधिकार और व्यापारियों की रोजी-रोटी का मुद्दा चर्चा में रहा। अदालत ने फिलहाल प्रदर्शन रोकने का आदेश देने से इनकार कर दिया। वहीं, व्यापारियों की ओर से दावा किया गया कि प्रदर्शन और उससे जुड़ी पाबंदियों के कारण रोजाना करीब ₹200 करोड़ के कारोबार पर असर पड़ सकता है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के सामने यह मामला रखा गया। याचिकाकर्ताओं ने दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क और आसपास के बाजारों में कारोबार प्रभावित होने की आशंका जताई। उनका कहना था कि बाजारों में लोगों की आवाजाही बाधित होने से छोटे दुकानदारों और दूसरे कारोबारियों को परेशानी हो सकती है। CJI की टिप्पणी: किसी के लिए प्रदर्शन, किसी के लिए मूंगफली बेचना जरूरी सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रदर्शन के अधिकार और आम लोगों की आजीविका के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने टिप्पणी की कि किसी व्यक्ति के लिए प्रदर्शन करना जरूरी हो सकता है, जबकि किसी दूसरे के लिए मूंगफली बेचकर अपना परिवार चलाना महत्वपूर्ण है। CJI सूर्यकांत ने भी छोटे व्यापारियों की आर्थिक स्थिति का जिक्र किया। त्योहारों के समय दुकानदारों की कमाई बढ़ने की उम्मीद रहती है। ऐसे में यदि बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो इसका असर उनकी रोजाना की आमदनी पर पड़ सकता है। अदालत की टिप्पणियों से साफ है कि इस मामले में केवल प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि आम लोगों की आजीविका और कानून-व्यवस्था से जुड़े पहलुओं पर भी विचार किया जा रहा है। Delhi Business Loss: रोजाना ₹200 करोड़ के नुकसान का दावा व्यापारियों की ओर से अदालत में दलील दी गई कि कनॉट प्लेस और आसपास के व्यावसायिक इलाकों में प्रदर्शन के कारण रोजाना करीब ₹200 करोड़ के कारोबार पर असर पड़ सकता है। इसका प्रभाव बड़े कारोबारियों के साथ-साथ छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों, कर्मचारियों और दिहाड़ी मजदूरों पर भी पड़ सकता है। बाजार में ग्राहकों की संख्या कम होने या आवाजाही प्रभावित होने से उनकी कमाई पर असर पड़ने की आशंका जताई गई। हालांकि, ₹200 करोड़ का आंकड़ा व्यापारियों की ओर से पेश किया गया दावा है। इसे वास्तविक नुकसान का प्रमाणित आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए। Central Park को बंद करने का मुद्दा भी उठा सुनवाई के दौरान कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क को बंद करने से जुड़े प्रशासनिक फैसले का मुद्दा भी उठाया गया। याचिकाकर्ताओं ने आशंका जताई कि इस कदम से आसपास के बाजारों और व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। अदालत ने संकेत दिया कि यदि किसी प्रतिबंध के कारण कारोबार या लोगों की आजीविका को अनुचित नुकसान पहुंचता है, तो उचित राहत देने के सवाल पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, तत्काल सुनवाई में प्रदर्शन पर रोक लगाने का कोई आदेश जारी नहीं किया गया। CJP Protest: क्यों किया गया प्रदर्शन का ऐलान? CJP ने 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च और प्रदर्शन का आह्वान किया था। पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के विरोध में यह कदम उठाने की बात कही थी। प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था, बाजारों में आवाजाही और कारोबार पर संभावित असर को लेकर चिंता जताई गई। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट में भी प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की गई थी। हाईकोर्ट ने रोक लगाने से इनकार किया था, जबकि दिल्ली पुलिस ने कानून के अनुसार जरूरी कदम उठाने की बात कही थी। Supreme Court Hearing: अब आगे क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट ने मामले को तत्काल आदेश के जरिए निपटाने के बजाय दशहरा अवकाश के बाद 26 या 27 अक्टूबर को सूचीबद्ध किए जाने का संकेत दिया। फिलहाल, प्रदर्शन पर रोक लगाने का आदेश नहीं दिया गया है। आगे की सुनवाई में प्रदर्शन के अधिकार, सार्वजनिक व्यवस्था और व्यापारियों की आजीविका से जुड़े पहलुओं पर चर्चा महत्वपूर्ण रहेगी। इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि विरोध दर्ज कराने के अधिकार और आम लोगों की रोजी-रोटी के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। अदालत की अगली सुनवाई से इस मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
PM Modi

PM Modi Canada Tour दिसंबर में होगी अहम बातचीत, Trade Deal से दोनों देशों को उम्मीद

PM Modi 11 दिसंबर को कनाडा के दौरे पर जा सकते हैं। इस यात्रा को भारत और कनाडा के बीच व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने के लिहाज से अहम माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच ट्रेड डील यानी व्यापार समझौते को लेकर बातचीत होने की संभावना है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों के बीच कनाडा भी अपने कारोबार के लिए नए बाजार तलाश रहा है। कनाडा लंबे समय से अमेरिकी बाजार पर काफी हद तक निर्भर रहा है। ऐसे में भारत जैसे बड़े और तेजी से बढ़ते बाजार के साथ व्यापार बढ़ाना उसके लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। दूसरी ओर, भारत की भी कोशिश है कि दूसरे देशों के साथ आर्थिक सहयोग बढ़े और भारतीय कारोबारियों को नए अवसर मिलें। India-Canada Trade Deal पर क्यों है सबकी नजर? भारत और कनाडा के बीच प्रस्तावित Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) को लेकर काफी उम्मीदें हैं। इस समझौते का मकसद दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ाना, निवेश के अवसर खोलना और कारोबार से जुड़ी बाधाओं को कम करना है। अगर ट्रेड डील पर सहमति बनती है, तो दोनों देशों की कंपनियों को एक-दूसरे के बाजार में कारोबार बढ़ाने का मौका मिल सकता है। इससे कृषि, ऊर्जा, तकनीक, शिक्षा और कई दूसरे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 70 अरब कनाडाई डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। ऐसे में प्रस्तावित समझौता इस लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभा सकता है। Trump के Tariff दबाव के बीच कनाडा क्यों खोज रहा नए बाजार? डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर अनिश्चितता बढ़ाई है। इसका असर उन देशों पर भी पड़ता है, जिनका कारोबार अमेरिकी बाजार पर ज्यादा निर्भर है। कनाडा भी अपने व्यापारिक रिश्तों में विविधता लाने और नए बाजारों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहा है। भारत इस लिहाज से कनाडा के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प बन सकता है। भारत की बड़ी आबादी, बढ़ती अर्थव्यवस्था और अलग-अलग क्षेत्रों में बढ़ती मांग कनाडाई कंपनियों को आकर्षित करती है। हालांकि, भारत के साथ व्यापार बढ़ाना केवल अमेरिका पर निर्भरता कम करने तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच निवेश और कारोबारी सहयोग बढ़ने से लंबे समय में आर्थिक रिश्तों को भी मजबूती मिल सकती है। Energy और Technology सेक्टर में भी बढ़ सकते हैं मौके भारत और कनाडा के बीच कारोबार की संभावनाएं केवल ट्रेड डील तक सीमित नहीं हैं। ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, शिक्षा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाया जा सकता है। कनाडा के पास प्राकृतिक संसाधन और ऊर्जा क्षेत्र में अनुभव है, जबकि भारत तेजी से बढ़ता हुआ बड़ा बाजार है। दोनों देश अपनी जरूरतों और क्षमताओं के आधार पर साझेदारी को आगे बढ़ा सकते हैं। व्यापार समझौते पर बातचीत आगे बढ़ने से कंपनियों और निवेशकों को भी सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं। हालांकि, वास्तविक फायदा समझौते की शर्तों और उसके लागू होने पर निर्भर करेगा। पुराने तनाव के बाद रिश्तों को नई दिशा देने की कोशिश भारत और कनाडा के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कूटनीतिक तनाव भी देखने को मिला। इस वजह से दोनों देशों के बीच भरोसे और सहयोग को लेकर कई सवाल उठे थे। अब व्यापार और आर्थिक सहयोग जैसे साझा हितों पर बातचीत बढ़ाना दोनों देशों के लिए अहम हो सकता है। प्रधानमंत्री मोदी की प्रस्तावित यात्रा इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। फिर भी, व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए कई मुद्दों पर सहमति जरूरी होगी। इसलिए इस दौरे के दौरान होने वाली बातचीत और आधिकारिक घोषणाओं पर सबकी नजर रहेगी। भारत और कनाडा के लिए क्या होंगे इसके मायने? भारत-कनाडा ट्रेड डील आगे बढ़ती है, तो इससे दोनों देशों के कारोबारियों को नए बाजार मिल सकते हैं। निवेश बढ़ने, व्यापारिक अवसर पैदा होने और अलग-अलग क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत होने की संभावना भी रहेगी। कनाडा के लिए भारत के साथ व्यापार बढ़ाना अपने आर्थिक रिश्तों में विविधता लाने का अवसर है। वहीं, भारत के लिए यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश के क्षेत्र में अपनी पहुंच मजबूत करने का एक और रास्ता हो सकता है। अब नजर 11 दिसंबर की प्रस्तावित यात्रा पर है। क्या प्रधानमंत्री मोदी और कनाडा के नेतृत्व के बीच ट्रेड डील को लेकर कोई ठोस सहमति बन पाएगी? इसका जवाब दोनों देशों की बातचीत और आगे होने वाली आधिकारिक घोषणाओं से ही साफ होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Starlink

Reliance-Starlink Controversy: मस्क के आरोपों पर अंबानी की कंपनी का जवाब, कहा- Competition से नहीं डरते

भारत में सैटेलाइट इंटरनेट को लेकर रिलायंस (Reliance) इंडस्ट्रीज और एलन मस्क की कंपनी Starlink के बीच चर्चा तेज हो गई है। स्टारलिंक की भारत में एंट्री में देरी को लेकर मस्क ने सवाल उठाए थे। अब मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस ने अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि वह प्रतिस्पर्धा से कभी नहीं डरी और भारत में स्टारलिंक का स्वागत करती है। Reliance के इस बयान के बाद देश के टेलीकॉम और सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में मुकाबले को लेकर चर्चा बढ़ गई है। एक तरफ एलन मस्क की स्टारलिंक भारतीय बाजार में अपनी सेवाएं शुरू करना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ जियो भी सैटेलाइट इंटरनेट के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की तैयारी कर रहा है। Reliance ने Starlink को लेकर क्या कहा? Reliance इंडस्ट्रीज ने अपने बयान में कहा कि कंपनी ने हमेशा प्रतिस्पर्धा का सामना किया है और वह नई कंपनियों के बाजार में आने से नहीं घबराती। कंपनी के मुताबिक, भारत में कारोबार करने वाली सभी कंपनियों को देश के नियमों का पालन करना चाहिए। रिलायंस ने स्टारलिंक का स्वागत करते हुए यह भी संकेत दिया कि सैटेलाइट इंटरनेट के क्षेत्र में मुकाबला ग्राहकों के लिए फायदेमंद हो सकता है। कंपनी का मानना है कि बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से सेवाओं की गुणवत्ता और ग्राहकों के अनुभव में सुधार की गुंजाइश बनती है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की शुरुआत को लेकर कई कंपनियां तैयारी कर रही हैं। Elon Musk ने Mukesh Ambani पर क्यों उठाए सवाल? एलन मस्क ने भारत में स्टारलिंक की लॉन्चिंग में हो रही देरी को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ प्रभावशाली कारोबारी हित कंपनी की भारतीय बाजार में एंट्री को मुश्किल बना रहे हैं। इस विवाद में रिलायंस और मुकेश अंबानी का नाम भी सामने आया। मस्क का कहना है कि स्टारलिंक जैसी कंपनियों को भारतीय बाजार में काम करने का अवसर मिलना चाहिए, ताकि ग्राहकों के पास इंटरनेट सेवा चुनने के अधिक विकल्प हों। हालांकि, इन आरोपों से यह साबित नहीं होता कि स्टारलिंक की लॉन्चिंग में देरी के पीछे रिलायंस की भूमिका है। इसके लिए किसी ठोस प्रमाण की जरूरत होगी। भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने के लिए कंपनियों को लाइसेंस के साथ-साथ दूसरी जरूरी मंजूरियां भी हासिल करनी होती हैं। Jio भी Satellite Internet Market में उतरने को तैयार Reliance जियो ने साल 2016 में भारतीय टेलीकॉम बाजार में कदम रखा था। सस्ते डेटा और किफायती सेवाओं के कारण कंपनी ने तेजी से ग्राहक जोड़े और देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों में अपनी जगह बनाई। अब जियो की नजर सैटेलाइट इंटरनेट बाजार पर भी है। इस तकनीक के जरिए उन इलाकों तक इंटरनेट पहुंचाने में मदद मिल सकती है, जहां सामान्य मोबाइल नेटवर्क या ब्रॉडबैंड कनेक्शन उपलब्ध कराना मुश्किल है। दूसरी तरफ, स्टारलिंक अपने सैटेलाइट नेटवर्क के जरिए भारत में इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध कराना चाहती है। ऐसे में आने वाले समय में दोनों कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है। Starlink की India Launch में देरी की वजह क्या है? भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करना केवल लाइसेंस मिलने तक सीमित नहीं है। कंपनियों को सुरक्षा मानकों, तकनीकी आवश्यकताओं और सरकारी नियमों से जुड़ी प्रक्रियाएं भी पूरी करनी होती हैं। स्टारलिंक के अलावा जियो और भारती समूह से जुड़ी Eutelsat OneWeb भी इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन कंपनियों की सेवाओं की शुरुआत जरूरी मंजूरियों और नियामकीय शर्तों पर निर्भर करती है। इसलिए स्टारलिंक की लॉन्चिंग में देरी को किसी एक कंपनी से जोड़कर देखना जल्दबाजी होगी। वास्तविक स्थिति समझने के लिए सरकारी मंजूरियों और संबंधित कंपनियों की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखना जरूरी है। आम लोगों को क्या होगा फायदा? अगर भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू होती हैं, तो इसका फायदा खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को मिल सकता है। पहाड़ी क्षेत्रों और उन जगहों पर, जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर है, यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। हालांकि, ग्राहकों के लिए सबसे अहम सवाल इंटरनेट की कीमत, स्पीड और उपलब्धता का होगा। स्टारलिंक और जियो की सेवाएं कितनी किफायती होंगी, यह उनकी व्यावसायिक योजनाओं और लॉन्च के समय घोषित किए जाने वाले प्लान पर निर्भर करेगा। अब आगे क्या? रिलायंस के बयान से साफ है कि कंपनी सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार है। वहीं, एलन मस्क की स्टारलिंक भारतीय बाजार में अपनी सेवाएं शुरू करने का इंतजार कर रही है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि जरूरी सरकारी प्रक्रियाएं कब पूरी होती हैं और कंपनियां ग्राहकों के लिए अपनी सेवाएं कब पेश करती हैं। अगर बाजार में कई कंपनियां उतरती हैं, तो भारतीय ग्राहकों को इंटरनेट के नए विकल्प मिल सकते हैं। फिलहाल, रिलायंस और स्टारलिंक के बीच जारी यह बहस भारत के तेजी से बदलते डिजिटल और टेलीकॉम बाजार की एक अहम तस्वीर पेश करती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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