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हर्ष दुबे को भारतीय टीम में मौका, वॉशिंगटन सुंदर चोट के कारण वनडे सीरीज से बाहर

नई दिल्ली। इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे और अंतिम वनडे मैच से पहले भारतीय टीम में बड़ा बदलाव किया गया है। ऑलराउंडर हर्ष दुबे को टीम में शामिल किया गया है। वह चोटिल वॉशिंगटन सुंदर की जगह अंतिम वनडे के लिए भारतीय स्क्वॉड का हिस्सा होंगे। भारत और इंग्लैंड के बीच सीरीज का आखिरी मुकाबला शनिवार को लॉर्ड्स में खेला जाएगा। हैमस्ट्रिंग चोट के कारण बाहर हुए सुंदर वॉशिंगटन सुंदर को कार्डिफ में खेले गए दूसरे वनडे के दौरान रन लेते समय दाहिने पैर की हैमस्ट्रिंग में चोट लग गई थी। चोट के चलते वह सीरीज के आखिरी मुकाबले से बाहर हो गए हैं। भारतीय टीम का मेडिकल स्टाफ उनकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। चोट की गंभीरता का आकलन करने के लिए उनका स्कैन कराया जाएगा और आगे के उपचार के लिए विशेषज्ञों की सलाह ली जाएगी। हर्ष दुबे को मिला मौका हर्ष दुबे ने 13 जून 2026 को धर्मशाला में अफगानिस्तान के खिलाफ अपना वनडे डेब्यू किया था। अपने पहले ही मुकाबले में उन्होंने 5 ओवर में 47 रन देकर 3 विकेट लेकर प्रभावित किया था। अब उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ निर्णायक मुकाबले में टीम का हिस्सा बनाया गया है। बल्लेबाजी कोच ने जताई थी चिंता दूसरे वनडे के बाद बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक ने भी वॉशिंगटन सुंदर की चोट को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने बताया था कि रन लेते समय सुंदर की हैमस्ट्रिंग में खिंचाव आया था और शुरुआती संकेतों के अनुसार चोट गंभीर लग रही थी। तीसरे वनडे के लिए भारतीय टीम शुभमन गिल (कप्तान), रोहित शर्मा, विराट कोहली, श्रेयस अय्यर (उपकप्तान), केएल राहुल (विकेटकीपर), ईशान किशन (विकेटकीपर), अक्षर पटेल, शिवम दुबे, कुलदीप यादव, जसप्रीत बुमराह, प्रसिद्ध कृष्णा, अर्शदीप सिंह, गुरनूर बरार, प्रिंस यादव और हर्ष दुबे। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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NCP के दोनों गुटों के विलय की अटकलें तेज, NDA में शामिल होने की चर्चा; आधिकारिक पुष्टि नहीं

नई दिल्ली/मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों के संभावित विलय और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल होने को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि, इस संबंध में भाजपा, एनसीपी या एनसीपी (शरदचंद्र पवार) की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र सरकार आगामी संसद सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक लाने की तैयारी कर रही है। इसी बीच यह दावा किया जा रहा है कि एनडीए नेतृत्व ने सुझाव दिया है कि एनसीपी के दोनों गुट एकजुट होकर गठबंधन में शामिल हों, बजाय इसके कि कोई एक गुट अलग से सत्ता पक्ष में शामिल हो। परिसीमन विधेयक पर रुख बदलने की चर्चा राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि एनसीपी (शरदचंद्र पवार) परिसीमन विधेयक पर अपने रुख पर पुनर्विचार कर सकती है। इसे संभावित राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। कैबिनेट में प्रतिनिधित्व का प्रस्ताव होने का दावा सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि दोनों गुटों के विलय की स्थिति में केंद्रीय मंत्रिमंडल में दो पद देने का प्रस्ताव रखा गया है। बताया जा रहा है कि इसका उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक संतुलन बनाए रखना है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। एनसीपी के भीतर मतभेद की भी चर्चा रिपोर्ट्स के अनुसार, पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक जिम्मेदारियों को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ नेताओं के सत्ता में भागीदारी को लेकर अलग विचार हैं, जबकि कुछ संगठनात्मक संतुलन बनाए रखने की बात कर रहे हैं। इन चर्चाओं पर भी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। शरद पवार गुट के सामने कई विकल्प सूत्रों के मुताबिक, एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के भीतर भविष्य की राजनीतिक रणनीति को लेकर अलग-अलग मत हैं। कुछ नेता एनडीए के साथ जाने के पक्ष में बताए जा रहे हैं, जबकि कुछ कांग्रेस के साथ तालमेल बनाए रखने के समर्थक हैं। हालांकि, इस संबंध में भी कोई आधिकारिक निर्णय या घोषणा नहीं हुई है। 1999 में हुआ था NCP का गठन राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की स्थापना 10 जून 1999 को शरद पवार, पी.ए. संगमा और तारिक अनवर ने कांग्रेस से अलग होकर की थी। इसके बाद से पार्टी महाराष्ट्र की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है। संख्या बल पर टिकी नजर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भविष्य में एनसीपी के दोनों गुट एकजुट होकर एनडीए का हिस्सा बनते हैं, तो संसद में सत्तापक्ष का संख्या बल बढ़ सकता है। हालांकि, फिलहाल यह पूरा घटनाक्रम मीडिया रिपोर्ट्स और राजनीतिक अटकलों पर आधारित है तथा किसी भी पक्ष ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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राम मंदिर ट्रस्ट पर कांग्रेस के गंभीर आरोप: चढ़ावे में अनियमितता की निष्पक्ष जांच की मांग

रायपुर। रायपुर पश्चिम के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कथित चढ़ावे की चोरी और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर केंद्र सरकार, भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम करोड़ों लोगों की आस्था के प्रतीक हैं और उनके नाम पर एकत्र किए गए चंदे में यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो इसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जानी चाहिए। गुरुवार को छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कांग्रेस भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में विकास उपाध्याय ने कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं ने विश्वास और श्रद्धा के साथ दान दिया था। ऐसे में चंदे के उपयोग को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब मिलना जरूरी है। आस्था और विश्वास का विषय बताया विकास उपाध्याय ने कहा कि यह केवल आर्थिक अनियमितता का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने कहा कि यदि चंदे या चढ़ावे में किसी तरह की वित्तीय गड़बड़ी हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। इस्तीफों पर भी उठाए सवाल कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कुछ पदाधिकारियों के इस्तीफों और मीडिया में सामने आई खबरों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। उन्होंने सवाल किया कि यदि ट्रस्ट का संचालन पूरी तरह पारदर्शी है तो स्वतंत्र जांच कराने में संकोच क्यों किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे और किसी भी तरह के संदेह का समाधान हो सके। नोट: यह आरोप कांग्रेस नेता विकास उपाध्याय द्वारा प्रेस वार्ता में लगाए गए हैं। संबंधित ट्रस्ट, भाजपा, आरएसएस या केंद्र सरकार की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया खबर लिखे जाने तक सामने नहीं आई है। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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भोपाल के 40 से अधिक इलाकों में शनिवार को 6 घंटे तक बिजली कटौती, मेंटेनेंस के चलते सप्लाई रहेगी प्रभावित

भोपाल। राजधानी भोपाल के 40 से अधिक इलाकों में शनिवार को बिजली कंपनी के निर्धारित मेंटेनेंस कार्य के कारण 3 से 6 घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रहेगी। बिजली कंपनी ने नागरिकों से अपील की है कि वे बिजली से जुड़े जरूरी कार्य पहले ही निपटा लें, ताकि असुविधा से बचा जा सके। प्रभावित क्षेत्रों में चूना भट्टी, जनता नगर, चाणक्यपुरी, कमला नगर, मक्सी, बागली समेत कई प्रमुख इलाके शामिल हैं। इन इलाकों में रहेगी बिजली बंद सुबह 10:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक सुबह 11:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक सुबह 10:00 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक सुबह 10:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक सुबह 10:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक बिजली कंपनी के अनुसार, मेंटेनेंस कार्य पूरा होने के बाद सभी प्रभावित इलाकों में बिजली आपूर्ति सामान्य कर दी जाएगी। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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₹70 करोड़ की MDMA ड्रग्स तस्करी मामले में ED की बड़ी कार्रवाई, इंदौर-मंदसौर समेत कई ठिकानों पर छापे

इंदौर। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के इंदौर सब-जोनल कार्यालय ने करीब ₹70 करोड़ मूल्य की 70 किलोग्राम एमडीएमए (मेफेड्रोन) ड्रग्स तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में इंदौर, मंदसौर और अन्य स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान एजेंसी ने कई अहम दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और वित्तीय रिकॉर्ड जब्त किए हैं। ED ने बताया कि यह जांच इंदौर क्राइम ब्रांच द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। मामला एनडीपीएस अधिनियम, 1985 की धारा 8 और 22 के तहत दर्ज किया गया था। फरार आरोपी को ट्रैक कर की गई कार्रवाई जांच के दौरान पता चला कि मामले का एक प्रमुख आरोपी अपने ठिकानों से फरार था। ED ने खुफिया सूचनाओं और आधुनिक तकनीकों की मदद से हैदराबाद, बीकानेर और इंदौर में उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी। कई दिनों की निगरानी के बाद आरोपी को इंदौर के एक गुप्त ठिकाने पर चिन्हित किया गया, जिसके बाद तलाशी अभियान चलाया गया। दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त तलाशी के दौरान एजेंसी को आरोपियों की संपत्तियों, बैंकिंग लेन-देन और वित्तीय नेटवर्क से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। ED अब इन साक्ष्यों के आधार पर अपराध से अर्जित संपत्ति (Proceeds of Crime), मनी ट्रेल और कथित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क की विस्तृत जांच कर रही है। रिश्तेदार के नाम मिला बैंक लॉकर कार्रवाई के दौरान एक आरोपी के रिश्तेदार के नाम पर बैंक लॉकर होने की जानकारी भी सामने आई है। एजेंसी ने लॉकर की तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। वित्तीय नेटवर्क की जांच जारी ED का कहना है कि तलाशी में मिले साक्ष्यों से ड्रग्स तस्करी से जुड़े वित्तीय नेटवर्क, संपत्तियों और अन्य सहयोगियों के बारे में महत्वपूर्ण सुराग मिलने की संभावना है। एजेंसी मामले में शामिल सभी लोगों की भूमिका और अवैध धन के लेन-देन की गहन जांच कर रही है। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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FIFA वर्ल्ड कप 2026: चैंपियन टीम को मिलेंगे करीब ₹490 करोड़, पहली बार खिलाड़ियों को मिलेगी चैंपियनशिप रिंग

नई दिल्ली। FIFA वर्ल्ड कप 2026 दुनिया का सबसे महंगा फुटबॉल टूर्नामेंट बनने जा रहा है। FIFA ने ऐलान किया है कि इस बार विश्व चैंपियन टीम को 51 मिलियन डॉलर (करीब ₹490 करोड़) की रिकॉर्ड इनामी राशि दी जाएगी। यह पहली बार होगा जब वर्ल्ड कप विजेता को इतनी बड़ी रकम मिलेगी। FIFA के अनुसार, पूरे टूर्नामेंट में कुल 871 मिलियन डॉलर (करीब ₹8,400 करोड़) की प्राइज मनी वितरित की जाएगी। वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई करने वाली हर टीम को न्यूनतम 12.5 मिलियन डॉलर (करीब ₹120 करोड़) मिलेंगे। पहली बार मिलेगी चैंपियनशिप रिंग FIFA ने एक और बड़ा बदलाव करते हुए घोषणा की है कि वर्ल्ड कप विजेता टीम के खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ को ट्रॉफी और गोल्ड मेडल के साथ चैंपियनशिप रिंग भी दी जाएगी। फाइनल के तुरंत बाद कप्तान और हेड कोच को टेंपरेरी रिंग दी जाएगी। इसके बाद पूरी विजेता टीम के लिए 30 कस्टमाइज्ड रिंग तैयार कर सौंपे जाएंगे। कुल 2,026 रिंग बनाई जाएंगी FIFA ने बताया कि यह लिमिटेड एडिशन होगा। कुल 2,026 रिंग बनाई जाएंगी। टॉप-4 टीमों को मिलेगी सबसे बड़ी रकम FIFA वर्ल्ड कप 2026 में अंतिम चार टीमों को सबसे अधिक इनामी राशि मिलेगी। उपविजेता टीम को 33 मिलियन डॉलर (करीब ₹317 करोड़) मिलेंगे। स्पेन और अर्जेंटीना के बीच होगा फाइनल वर्ल्ड कप 2026 का फाइनल यूरोपीय चैंपियन स्पेन और मौजूदा विश्व चैंपियन अर्जेंटीना के बीच खेला जाएगा। 2022 की तुलना में बड़ी बढ़ोतरी FIFA वर्ल्ड कप 2022 में चैंपियन अर्जेंटीना को 42 मिलियन डॉलर (करीब ₹348 करोड़) मिले थे, जबकि रनर-अप फ्रांस को लगभग ₹248 करोड़ की प्राइज मनी मिली थी। उस टूर्नामेंट में कुल 440 मिलियन डॉलर की इनामी राशि बांटी गई थी। 2026 में प्राइज पूल को बढ़ाकर 871 मिलियन डॉलर कर दिया गया है, जो FIFA इतिहास की सबसे बड़ी इनामी राशि होगी। अधिक खेल समाचारों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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मध्यप्रदेश में UCC लागू करने की तैयारी तेज, मानसून सत्र में विधेयक लाएगी सरकार: मुख्यमंत्री मोहन यादव

भोपाल/कटनी। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) लागू करने को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि सरकार आगामी विधानसभा के मानसून सत्र में UCC विधेयक पेश करेगी। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को कटनी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि प्रदेश में सभी नागरिकों के लिए समान कानून लागू करने की दिशा में सरकार निर्णायक कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिंदू और मुस्लिम समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून होने के बजाय सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि एक व्यक्ति एक ही विवाह करता है, तो यही व्यवस्था सभी पर समान रूप से लागू होनी चाहिए। मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों का भी किया जिक्र मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा भी सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि तीन तलाक की प्रथा अब समाप्त हो चुकी है और यदि कोई व्यक्ति इस तरह का कृत्य करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अगली कैबिनेट बैठक में मिलेगी मसौदे को मंजूरी मुख्यमंत्री के अनुसार, भोपाल के जगदीशपुर में प्रस्तावित अगली कैबिनेट बैठक में UCC के मसौदे को मंजूरी दी जाएगी। इसके बाद इसे विधानसभा के मानसून सत्र में विधेयक के रूप में पेश किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करना और भेदभाव समाप्त करना है। संविधान में क्या है UCC का प्रावधान? भारतीय संविधान के अनुच्छेद-44 में समान नागरिक संहिता का उल्लेख किया गया है। यह राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों का हिस्सा है, जिसमें कहा गया है कि राज्य देशभर के नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करेगा। हालांकि, यह प्रावधान न्यायालय में लागू कराने योग्य नहीं है, बल्कि सरकारों के लिए एक मार्गदर्शक सिद्धांत माना जाता है। किन राज्यों में लागू है UCC? फिलहाल देश में उत्तराखंड, गुजरात और असम में समान नागरिक संहिता लागू की जा चुकी है। उत्तराखंड पहला राज्य था जिसने इसे लागू किया। इसके बाद गुजरात और असम ने भी इस दिशा में कदम उठाए। अब मध्यप्रदेश भी इस सूची में शामिल होने की तैयारी कर रहा है। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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रिलायंस इंडस्ट्रीज का पहली तिमाही मुनाफा 22.4% घटा, रेवेन्यू में 25% की बढ़ोतरी; जियो और रिटेल बिजनेस ने दिखाई मजबूती

मुंबई। देश की सबसे बड़ी निजी क्षेत्र की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 22.40% घटकर 20,946 करोड़ रुपये रहा। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी ने 26,994 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था। हालांकि, तिमाही आधार पर कंपनी के मुनाफे में 23% की बढ़ोतरी हुई है। पिछली तिमाही (जनवरी-मार्च) में रिलायंस का शुद्ध लाभ 16,971 करोड़ रुपये था। रेवेन्यू में 25% की मजबूत बढ़त रिलायंस का कुल कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 25% बढ़कर 3.11 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। एक साल पहले यह 2.48 लाख करोड़ रुपये था। हालांकि, पिछली तिमाही की तुलना में कंपनी के रेवेन्यू में करीब 4% की गिरावट दर्ज की गई। जियो का प्रदर्शन मजबूत रिलायंस जियो ने पहली तिमाही में बेहतर प्रदर्शन किया। कंपनी ने बताया कि 5G नेटवर्क विस्तार और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश जारी है। हालांकि, 5G एसेट्स के कैपिटलाइजेशन के कारण ब्याज और डेप्रिसिएशन खर्च बढ़ने से मुनाफे की वृद्धि सीमित रही। अन्य कारोबारों में भी बढ़ी आय रिलायंस के अन्य प्रमुख बिजनेस सेगमेंट्स का प्रदर्शन भी सकारात्मक रहा। शेयर बाजार में प्रदर्शन तिमाही नतीजों से पहले शुक्रवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर 2.48% बढ़कर 1,328 रुपये पर बंद हुआ। हालांकि, वर्ष 2026 में अब तक कंपनी के शेयर में लगभग 15% की गिरावट दर्ज की गई है। कंपनी का मौजूदा मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब 17.95 लाख करोड़ रुपये है। आम लोगों पर क्या होगा असर? रिलायंस के तिमाही नतीजों का असर सीधे तौर पर उपभोक्ताओं और निवेशकों पर भी देखने को मिल सकता है। रिलायंस इंडस्ट्रीज का कहना है कि वह डिजिटल सेवाओं, रिटेल, ऊर्जा और नई तकनीकों में निवेश जारी रखेगी, जिससे आने वाले समय में विकास की गति बनाए रखने में मदद मिलेगी। अधिक बिजनेस और शेयर बाजार की खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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पूर्व भारतीय अंडर-19 क्रिकेटर मनजोत कालरा श्रीलंका में गिरफ्तार, LPL में रिश्वत देने के आरोप में भेजे गए न्यायिक हिरासत

नई दिल्ली/कोलंबो। भारत की 2018 अंडर-19 विश्व कप विजेता टीम के सदस्य रहे पूर्व क्रिकेटर मनजोत कालरा को श्रीलंका में लंका प्रीमियर लीग (LPL) के दौरान कथित रिश्वतखोरी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। कालरा पर एक खिलाड़ी को पैसे देकर प्रभावित करने की कोशिश करने का आरोप है। उन्हें श्रीलंका की विशेष जांच इकाई ने हिरासत में लेकर अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें 31 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। टूर्नामेंट शुरू होने से पहले हुई गिरफ्तारी 27 वर्षीय मनजोत कालरा लंका प्रीमियर लीग की फ्रेंचाइजी जाफना किंग्स के सह-मालिक (Co-owner) हैं। उनकी गिरफ्तारी LPL 2026 के पहले मुकाबले से कुछ घंटे पहले की गई। पुलिस ने इस मामले में उनके सहयोगी युवराज पुष्पा को भी गिरफ्तार किया है। खिलाड़ियों की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच श्रीलंका पुलिस के अनुसार, कालरा पर लीग में खेल रहे एक खिलाड़ी को कथित तौर पर रिश्वत की पेशकश करने का आरोप है। संबंधित खिलाड़ी ने करीब 10 दिन पहले हुई इस घटना की शिकायत अधिकारियों से की थी। जांच के दौरान अदालत को बताया गया कि इस मामले में भानुका राजपक्षे, अविष्का फर्नांडो, दुनिथ वेलालागे समेत पांच खिलाड़ियों की शिकायत दर्ज की गई है। खेल से जुड़े अपराधों की जांच करने वाली विशेष इकाई पूरे मामले की जांच कर रही है। श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड ने दिया बयान घटना के बाद श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड (SLC) ने कहा कि वह जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग करेगा। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले का टूर्नामेंट के आयोजन पर कोई असर नहीं पड़ेगा और LPL तय कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगा। 2018 अंडर-19 विश्व कप के हीरो रहे थे कालरा मनजोत कालरा ने 2018 अंडर-19 विश्व कप फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ नाबाद 101 रन की शानदार पारी खेलकर भारत को चौथा अंडर-19 विश्व कप खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। उस समय टीम के कोच राहुल द्रविड़ और कप्तान पृथ्वी शॉ थे। टीम में शुभमन गिल, शिवम मावी, कमलेश नागरकोटी और इशान पोरेल जैसे खिलाड़ी भी शामिल थे। IPL और घरेलू क्रिकेट में नहीं मिला बड़ा मौका विश्व कप में शानदार प्रदर्शन के बाद IPL 2018 की नीलामी में दिल्ली डेयरडेविल्स (अब दिल्ली कैपिटल्स) ने मनजोत कालरा को अपनी टीम में शामिल किया था। हालांकि उन्हें ज्यादा मैच खेलने का मौका नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने दिल्ली के लिए फर्स्ट क्लास, लिस्ट-ए और टी-20 क्रिकेट खेला, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपनी जगह नहीं बना सके। अधिक खेल समाचार पढ़ने के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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विराट-गंभीर विवाद की अटकलों पर विराम, बैटिंग कोच सितांशु कोटक बोले- ‘दोनों दिन में कई बार करते हैं बातचीत’

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के बैटिंग कोच सितांशु कोटक ने विराट कोहली और मुख्य कोच गौतम गंभीर के बीच कथित मतभेद की खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों के बीच किसी तरह की अनबन नहीं है और वे दिनभर में कई बार एक-दूसरे से बातचीत करते हैं। हाल के दिनों में कार्डिफ में भारत-इंग्लैंड दूसरे वनडे से पहले नेट्स के दौरान विराट कोहली और गौतम गंभीर के बीच बातचीत न दिखने के बाद सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दोनों के रिश्तों को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं। यहां तक दावा किया गया कि दोनों के बीच संवाद बहाल कराने के लिए बीसीसीआई को हस्तक्षेप करना पड़ सकता है। ‘विराट और गंभीर को किसी मध्यस्थ की जरूरत नहीं’ इन अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए सितांशु कोटक ने कहा कि विराट कोहली और गौतम गंभीर के बीच किसी “ब्रिज” या संदेशवाहक की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसी खबरें पूरी तरह अफवाह हैं और समझ से परे हैं। कोटक ने कहा कि विराट और गंभीर नियमित रूप से टीम की रणनीति और अन्य विषयों पर चर्चा करते हैं। उन्होंने साफ किया कि नेट्स में उनकी विराट से हुई बातचीत केवल बल्लेबाजी और तकनीकी पहलुओं को लेकर थी। विराट को बिना मांगे सलाह नहीं देते कोटक बैटिंग कोच ने कहा कि विराट जैसे अनुभवी बल्लेबाज को बिना जरूरत सलाह देना उचित नहीं होता। यदि विराट स्वयं किसी तकनीकी पहलू पर सुझाव मांगते हैं या कोई बड़ी तकनीकी समस्या दिखाई देती है, तभी वे अपनी राय साझा करते हैं। कोटक के मुताबिक, उनकी और विराट की बातचीत मुख्य रूप से फुटवर्क, शॉट चयन और बल्लेबाजी की तकनीकी बारीकियों पर केंद्रित रहती है। नेट्स से पहले और अभ्यास के बाद भी दोनों के बीच इसी विषय पर चर्चा हुई थी। अफवाहों पर लगा विराम बैटिंग कोच के इस बयान के बाद विराट कोहली और गौतम गंभीर के बीच मतभेद की चर्चाओं पर फिलहाल विराम लग गया है। टीम प्रबंधन ने भी संकेत दिया है कि ड्रेसिंग रूम का माहौल सामान्य है और खिलाड़ी आगामी मुकाबलों पर पूरा ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। अधिक खबरों के लिए पढ़ें: Deshharpal –deshharpal.com
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Meerut

Meerut Murder Case: सांप के काटने का नाटक पड़ा भारी, रविता को Death Penalty

उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut) में पति की हत्या को सांप के काटने से हुई मौत दिखाने के चर्चित मामले में अदालत ने रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को मौत की सजा सुनाई है। इस मामले ने उस समय सबको चौंका दिया था, जब शुरुआत में अमित कश्यप की मौत को सर्पदंश माना जा रहा था। लेकिन जांच आगे बढ़ी तो कहानी कुछ और ही निकली। पुलिस की जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और दूसरे सबूतों के आधार पर मामले की परतें खुलती चली गईं। अदालत के फैसले के बाद मेरठ का यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। Meerut Murder Case: क्या है पूरा मामला? यह मामला मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के अकबरपुर सादात गांव का है। यहां रहने वाले अमित कश्यप उर्फ मिक्की की अप्रैल 2025 में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। उनका शव घर में बिस्तर पर मिला था। शुरुआती तौर पर मौत की वजह सांप का काटना मानी गई। हालांकि, मामले की जांच के दौरान कुछ ऐसे तथ्य सामने आए, जिनसे पुलिस को शक हुआ। इसके बाद घटना की गहराई से जांच शुरू की गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह दम घुटना सामने आने के बाद पुलिस ने हत्या के एंगल से जांच आगे बढ़ाई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से बदली जांच की दिशा अमित की मौत के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट अहम साबित हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी मौत सर्पदंश से नहीं, बल्कि दम घुटने से हुई थी। इसके बाद पुलिस ने घटना से जुड़े लोगों और परिस्थितियों की जांच की। जांच में अमित की पत्नी रविता और अमरदीप की भूमिका सामने आई। अभियोजन पक्ष ने अदालत में मामले से जुड़े सबूत और गवाहों के बयान पेश किए। इन्हीं तथ्यों के आधार पर अदालत ने दोनों को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई। रविता और अमरदीप को Death Penalty अदालत के फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। पति की मौत को सांप के काटने की घटना दिखाने के आरोपों से शुरू हुई जांच हत्या के मामले तक पहुंची। इस पूरे घटनाक्रम में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की जांच ने अहम भूमिका निभाई। ऐसे मामलों में फॉरेंसिक जांच, गवाहों के बयान और अन्य सबूत यह समझने में मदद करते हैं कि घटना के पीछे की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं। मेरठ में तीन दिन में चार दोषियों को फांसी की सजा की चर्चा मेरठ में हाल के दिनों में दो चर्चित हत्याकांडों में मृत्युदंड सुनाए जाने की वजह से भी चर्चा तेज हुई है। अमित कश्यप हत्याकांड के अलावा सौरभ राजपूत हत्याकांड भी सुर्खियों में रहा। सौरभ की हत्या के मामले में उसकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को भी अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी। दोनों मामलों की घटनाएं अलग-अलग हैं, लेकिन इन फैसलों ने हत्या के मामलों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर लोगों का ध्यान खींचा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

ग्वालियर के वेंकटेश्वर अपार्टमेंट में युवक का शव मिला, रजिस्टर में युवती का जिक्र; पुलिस जांच में जुटी

ग्वालियर: शहर के सिटी सेंटर स्थित वेंकटेश्वर अपार्टमेंट में गुरुवार देर रात एक युवक का शव फ्लैट के कमरे में पंखे से लटका मिला। मृतक की पहचान अंबाह निवासी संतोष शर्मा के रूप में हुई है। वह ग्वालियर की एक बीमा कंपनी में नौकरी करता था। सूचना मिलने पर विश्वविद्यालय थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। घटनास्थल से मिले एक रजिस्टर में युवती का जिक्र करते हुए कुछ पंक्तियां लिखी मिली हैं। इनमें संतोष ने युवती के साथ काफी समय बिताने और उसे अच्छा बताने की बात लिखी है। साथ ही, अपनी मौत के लिए उसे जिम्मेदार नहीं ठहराने का भी उल्लेख किया है। पुलिस इन पंक्तियों समेत सभी साक्ष्यों की जांच कर रही है। बी-ब्लॉक के जी-8 फ्लैट में मिला शव घटना वेंकटेश्वर अपार्टमेंट के बी-ब्लॉक स्थित जी-8 फ्लैट की है। गुरुवार रात करीब 11 बजे पुलिस को युवक का शव कमरे में पंखे से लटका होने की सूचना मिली। इसके बाद विश्वविद्यालय थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए। मामले की जांच के लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. कोक सिंह को भी बुलाया गया। पुलिस ने मृतक का मोबाइल फोन कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। कॉल रिकॉर्ड और चैट हिस्ट्री की पड़ताल के जरिए घटना से जुड़े तथ्यों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। युवती के साथ फ्लैट में रहने की जानकारी पुलिस के अनुसार, जिस फ्लैट में संतोष का शव मिला, वह एक युवती ने किराए पर लिया था। अपार्टमेंट में रहने वाले लोगों ने पुलिस को बताया कि युवती संतोष के साथ इसी फ्लैट में रहती थी। पुलिस ने युवती से संपर्क किया तो उसने बताया कि वह पीएचडी के काम से बाहर गई हुई है। फिलहाल पुलिस संतोष और युवती के बीच संबंधों तथा घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। ऑनलाइन गेमिंग की आदत की भी पड़ताल शुरुआती जानकारी में संतोष के ऑनलाइन गेमिंग में सक्रिय रहने की बात सामने आई है। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या ऑनलाइन गेमिंग में पैसों के लेनदेन या किसी अन्य कारण से वह तनाव में था। हालांकि, फिलहाल इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि संतोष को गेमिंग में बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ था, उस पर कर्ज था या उसकी मौत का संबंध ऑनलाइन गेमिंग से था। पुलिस सभी पहलुओं की कर रही जांच विश्वविद्यालय थाना प्रभारी रविंद्र जाटव के मुताबिक, पुलिस मामले की हर संभावित पहलू से जांच कर रही है। घटनास्थल से मिले रजिस्टर, मोबाइल फोन और अन्य साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। संबंधित लोगों से पूछताछ के आधार पर भी जानकारी जुटाई जा रही है। फिलहाल युवक की मौत के पीछे किसी एक कारण की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस जांच पूरी होने और साक्ष्य सामने आने के बाद ही घटना की परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।
Dharmendra Pradhan

Dharmendra Pradhan on CJP: राहुल गांधी पर सवाल, Regime Change को लेकर सियासत तेज

दिल्ली में CJP के विरोध प्रदर्शन को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग से शुरू हुआ यह विवाद अब राहुल गांधी, कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गया है। धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) समेत बीजेपी के नेताओं ने आंदोलन को लेकर विपक्ष की मंशा पर सवाल उठाए हैं। वहीं, प्रदर्शन से जुड़े नेताओं का कहना है कि उनकी लड़ाई चुनावी पारदर्शिता और चुनाव आयोग की जवाबदेही को लेकर है। विवाद तब और बढ़ गया, जब आंदोलन को बांग्लादेश में हुए राजनीतिक बदलाव और ‘Regime Change’ यानी सत्ता परिवर्तन की बहस से जोड़कर देखा जाने लगा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि CJP का प्रदर्शन अब केवल चुनाव सुधार तक सीमित है या इसके राजनीतिक मायने भी हैं? धर्मेंद्र प्रधान ने राहुल गांधी और CJP पर क्यों साधा निशाना? CJP के आंदोलन को लेकर बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस और राहुल गांधी की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। बीजेपी का आरोप है कि विपक्ष चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को उठाकर केंद्र सरकार के खिलाफ राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। Dharmendra Pradhan के बयान को भी इसी राजनीतिक टकराव के संदर्भ में देखा जा रहा है। बीजेपी नेताओं ने आंदोलन और बांग्लादेश के राजनीतिक घटनाक्रम के बीच समानताएं बताते हुए विपक्ष की रणनीति पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, ये राजनीतिक आरोप हैं। बांग्लादेश जैसे घटनाक्रम को भारत में दोहराने की किसी कथित योजना को स्थापित तथ्य के रूप में पेश नहीं किया जा सकता। ‘Regime Change’ बयान से क्यों शुरू हुई नई बहस? CJP आंदोलन के दौरान सत्ता परिवर्तन को लेकर दिए गए बयानों ने विवाद को नया मोड़ दिया। आंदोलन से जुड़े कुछ नेताओं की टिप्पणियों को बीजेपी ने सरकार बदलने की मंशा से जोड़कर देखा। दूसरी ओर, CJP की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग उठाई गई है। यही वजह है कि अब इस आंदोलन को लेकर दो अलग-अलग दावे सामने हैं। बीजेपी इसे राजनीतिक अभियान बता रही है, जबकि आंदोलनकारी पक्ष चुनाव आयोग की जवाबदेही का मुद्दा उठा रहा है। इन बयानों के बीच किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए संबंधित नेताओं के पूरे वक्तव्य और उपलब्ध तथ्यों को देखना जरूरी है। राहुल गांधी ने CJP आंदोलन को लेकर क्या रुख अपनाया? कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रदर्शन से जुड़े नेताओं की गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थन में बयान दिया था। उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन और तिरंगा फहराने के अधिकार का मुद्दा उठाया। राहुल गांधी और कांग्रेस लगातार चुनावी प्रक्रिया तथा मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। वहीं, बीजेपी का कहना है कि विपक्ष इन मुद्दों का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए कर रहा है। इस तरह CJP आंदोलन को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच टकराव बढ़ता दिखाई दे रहा है। एक तरफ चुनावी पारदर्शिता की मांग है, तो दूसरी तरफ आंदोलन के राजनीतिक उद्देश्य पर सवाल उठाए जा रहे हैं। SIR विवाद क्या है और चुनाव आयोग पर क्यों उठ रहे सवाल? इस पूरे विवाद के केंद्र में मतदाता सूची का Special Intensive Revision यानी SIR भी है। यह मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा की प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य सूची को अपडेट करना और पात्र मतदाताओं का विवरण सही रखना है। विपक्ष ने इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठाए हैं। कुछ रिपोर्टों और राजनीतिक बयानों में 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने का दावा भी चर्चा में रहा है। हालांकि, ऐसे आंकड़ों को संबंधित राज्यों के आधिकारिक आंकड़ों और चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के आधार पर समझना जरूरी है। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि किसी पात्र मतदाता का नाम न छूटे। दूसरी ओर, चुनाव आयोग की प्रक्रिया और उसके फैसलों को लेकर उठाए गए राजनीतिक आरोपों का आकलन तथ्यों के आधार पर किया जाना चाहिए। Delhi CJP Protest: तिरंगा मार्च और सुरक्षा व्यवस्था पर नजर दिल्ली में CJP के प्रस्तावित तिरंगा मार्च को लेकर भी विवाद सामने आया। प्रदर्शनकारियों की योजना कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा फहराने की थी। प्रशासन ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था में बदलाव किए। प्रदर्शन स्थल, नेताओं की हिरासत और मार्च की अनुमति को लेकर भी सवाल उठे। इस बीच, अदालत में प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग से जुड़ा मामला भी चर्चा में रहा। अदालत की टिप्पणियों और पुलिस के आश्वासनों को पूरे संदर्भ में समझना जरूरी है; इन्हें प्रदर्शन के हर पहलू पर अंतिम फैसला नहीं माना जाना चाहिए। तिरंगा मार्च को लेकर विवाद ने एक बार फिर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी के बीच संतुलन का सवाल खड़ा किया है। CJP Protest पर आगे क्या होगा? फिलहाल CJP आंदोलन के साथ तीन बड़े मुद्दे जुड़े हुए हैं—SIR के तहत मतदाता सूची में बदलाव, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग और ‘Regime Change’ को लेकर बीजेपी तथा विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप। आने वाले दिनों में चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया, आंदोलनकारियों की अगली रणनीति और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर नजर रहेगी। यह भी देखना होगा कि राजनीतिक दल चुनावी पारदर्शिता से जुड़े सवालों पर किस तरह अपनी बात रखते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
अभिजीत दिपके

CJP Tiranga March: अभिजीत दिपके के घर पहुंची दिल्ली पुलिस, कनॉट प्लेस में 25 हजार जवान तैनात

दिल्ली में आज, 16 अक्टूबर को CJP के ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को लेकर माहौल गर्म है। मार्च से पहले दिल्ली पुलिस अभिजीत दिपके के घर पहुंची। वहीं, कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इलाके में करीब 25 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की तैयारी है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच अब सबकी नजर इस बात पर है कि CJP का प्रस्तावित मार्च आगे किस तरह बढ़ता है। अभिजीत दिपके के घर पहुंची दिल्ली पुलिस CJP के प्रस्तावित मार्च से पहले दिल्ली पुलिस की टीम अभिजीत दिपके के घर पहुंची। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने उन्हें मार्च को लेकर नोटिस दिया। संगठन की ओर से इस कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। CJP का कहना है कि वह अपने नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में तिरंगा मार्च निकालना चाहता है। हालांकि, दिल्ली में लागू प्रतिबंधों और सुरक्षा व्यवस्था के चलते कार्यक्रम को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। Connaught Place में कड़ी सुरक्षा, 25 हजार जवान तैनात ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को देखते हुए कनॉट प्लेस और आसपास के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। रिपोर्ट्स में करीब 25 हजार पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों की तैनाती का जिक्र है। सेंट्रल पार्क और आसपास के प्रमुख स्थानों पर भी निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबंधात्मक कदम उठाए हैं। सेंट्रल पार्क को 16 और 17 अक्टूबर को बंद रखने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे में कनॉट प्लेस आने-जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। क्यों हो रहा है CJP का ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च? CJP ने इस मार्च का ऐलान अपने नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के विरोध में किया है। संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठा रहा है। 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान CJP समर्थकों ने बैरिकेडिंग पार कर नारेबाजी की थी। इसके बाद पुलिस ने संगठन के कुछ नेताओं को हिरासत में लिया। इसी कार्रवाई के विरोध में CJP ने तिरंगा मार्च निकालने की घोषणा की। SIR विवाद ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल इस पूरे विवाद के पीछे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) का मुद्दा भी है। CJP और कुछ विपक्षी समूहों ने मतदाता सूची में बदलावों को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया से मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। वहीं, चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची को लेकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत काम किए जाने की बात कही जाती रही है। SIR को लेकर राजनीतिक बहस लगातार जारी है और अब यह विवाद सड़कों पर हो रहे प्रदर्शनों तक पहुंच गया है। दिल्ली में Traffic Advisory, लोगों को सतर्क रहने की सलाह मार्च के चलते कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में ट्रैफिक प्रभावित होने की आशंका है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे घर से निकलने से पहले यातायात संबंधी अपडेट देख लें और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करें। दिल्ली पुलिस की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, जबकि CJP अपने विरोध प्रदर्शन को लेकर आगे बढ़ना चाहता है। ऐसे में शुक्रवार शाम का घटनाक्रम महत्वपूर्ण रहने वाला है। अब आगे क्या होगा? CJP के ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को लेकर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था सख्त है। एक तरफ संगठन अपने नेताओं की गिरफ्तारी और SIR के मुद्दे पर विरोध दर्ज कराना चाहता है, तो दूसरी तरफ प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबंध लागू कर रहा है। अब देखना होगा कि पुलिस की पाबंदियों के बीच मार्च को लेकर क्या स्थिति बनती है और CJP आगे क्या कदम उठाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Supreme Court

Supreme Court on CJP Protest: प्रदर्शन पर रोक से इनकार, ₹200 करोड़ के कारोबार पर असर का दावा

दिल्ली में CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई के दौरान प्रदर्शन के अधिकार और व्यापारियों की रोजी-रोटी का मुद्दा चर्चा में रहा। अदालत ने फिलहाल प्रदर्शन रोकने का आदेश देने से इनकार कर दिया। वहीं, व्यापारियों की ओर से दावा किया गया कि प्रदर्शन और उससे जुड़ी पाबंदियों के कारण रोजाना करीब ₹200 करोड़ के कारोबार पर असर पड़ सकता है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के सामने यह मामला रखा गया। याचिकाकर्ताओं ने दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क और आसपास के बाजारों में कारोबार प्रभावित होने की आशंका जताई। उनका कहना था कि बाजारों में लोगों की आवाजाही बाधित होने से छोटे दुकानदारों और दूसरे कारोबारियों को परेशानी हो सकती है। CJI की टिप्पणी: किसी के लिए प्रदर्शन, किसी के लिए मूंगफली बेचना जरूरी सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रदर्शन के अधिकार और आम लोगों की आजीविका के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने टिप्पणी की कि किसी व्यक्ति के लिए प्रदर्शन करना जरूरी हो सकता है, जबकि किसी दूसरे के लिए मूंगफली बेचकर अपना परिवार चलाना महत्वपूर्ण है। CJI सूर्यकांत ने भी छोटे व्यापारियों की आर्थिक स्थिति का जिक्र किया। त्योहारों के समय दुकानदारों की कमाई बढ़ने की उम्मीद रहती है। ऐसे में यदि बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो इसका असर उनकी रोजाना की आमदनी पर पड़ सकता है। अदालत की टिप्पणियों से साफ है कि इस मामले में केवल प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि आम लोगों की आजीविका और कानून-व्यवस्था से जुड़े पहलुओं पर भी विचार किया जा रहा है। Delhi Business Loss: रोजाना ₹200 करोड़ के नुकसान का दावा व्यापारियों की ओर से अदालत में दलील दी गई कि कनॉट प्लेस और आसपास के व्यावसायिक इलाकों में प्रदर्शन के कारण रोजाना करीब ₹200 करोड़ के कारोबार पर असर पड़ सकता है। इसका प्रभाव बड़े कारोबारियों के साथ-साथ छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों, कर्मचारियों और दिहाड़ी मजदूरों पर भी पड़ सकता है। बाजार में ग्राहकों की संख्या कम होने या आवाजाही प्रभावित होने से उनकी कमाई पर असर पड़ने की आशंका जताई गई। हालांकि, ₹200 करोड़ का आंकड़ा व्यापारियों की ओर से पेश किया गया दावा है। इसे वास्तविक नुकसान का प्रमाणित आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए। Central Park को बंद करने का मुद्दा भी उठा सुनवाई के दौरान कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क को बंद करने से जुड़े प्रशासनिक फैसले का मुद्दा भी उठाया गया। याचिकाकर्ताओं ने आशंका जताई कि इस कदम से आसपास के बाजारों और व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। अदालत ने संकेत दिया कि यदि किसी प्रतिबंध के कारण कारोबार या लोगों की आजीविका को अनुचित नुकसान पहुंचता है, तो उचित राहत देने के सवाल पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, तत्काल सुनवाई में प्रदर्शन पर रोक लगाने का कोई आदेश जारी नहीं किया गया। CJP Protest: क्यों किया गया प्रदर्शन का ऐलान? CJP ने 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च और प्रदर्शन का आह्वान किया था। पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के विरोध में यह कदम उठाने की बात कही थी। प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था, बाजारों में आवाजाही और कारोबार पर संभावित असर को लेकर चिंता जताई गई। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट में भी प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की गई थी। हाईकोर्ट ने रोक लगाने से इनकार किया था, जबकि दिल्ली पुलिस ने कानून के अनुसार जरूरी कदम उठाने की बात कही थी। Supreme Court Hearing: अब आगे क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट ने मामले को तत्काल आदेश के जरिए निपटाने के बजाय दशहरा अवकाश के बाद 26 या 27 अक्टूबर को सूचीबद्ध किए जाने का संकेत दिया। फिलहाल, प्रदर्शन पर रोक लगाने का आदेश नहीं दिया गया है। आगे की सुनवाई में प्रदर्शन के अधिकार, सार्वजनिक व्यवस्था और व्यापारियों की आजीविका से जुड़े पहलुओं पर चर्चा महत्वपूर्ण रहेगी। इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि विरोध दर्ज कराने के अधिकार और आम लोगों की रोजी-रोटी के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। अदालत की अगली सुनवाई से इस मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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