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सीहोर पहुंचीं मंत्री कृष्णा गौर, बंगाल हिंसा और ममता सरकार पर बोला हमला

Sehore प्रवास के दौरान मध्यप्रदेश सरकार की प्रभारी मंत्री Krishna Gaur ने मीडिया से चर्चा करते हुए पश्चिम बंगाल की कानून व्यवस्था और Mamata Banerjee सरकार पर तीखा हमला बोला। मंत्री कृष्णा गौर ने बंगाल में हो रही हिंसा को सत्ता खोने की “हताशा” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 15 वर्षों में तृणमूल कांग्रेस ने राज्य में “गुंडा राज” स्थापित कर दिया था। “डर के माहौल में नहीं कर पाते थे मतदान” मंत्री गौर ने कहा कि बंगाल की जनता लंबे समय से टीएमसी सरकार से परेशान थी। लोगों में डर का माहौल था, जिसकी वजह से वे खुलकर अपनी पसंद से मतदान नहीं कर पाते थे। उन्होंने चुनाव आयोग की तारीफ करते हुए कहा कि इस बार सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रही। आयोग ने सख्ती दिखाई, जिसके कारण जनता ने निर्भय होकर मतदान किया। “हार की हताशा में हो रही हिंसा” हालिया हिंसा की घटनाओं पर बोलते हुए मंत्री ने कहा कि टीएमसी अब हार की हताशा में ऐसी घटनाओं को अंजाम दे रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने बंगाल की कानून व्यवस्था को गंभीरता से लिया है। आने वाले समय में किसी भी तरह की हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मंत्री ने कहा कि हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। समीक्षा बैठक में भी हुई शामिल सीहोर दौरे के दौरान कृष्णा गौर ने कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में भी हिस्सा लिया। बैठक में जिले के विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा की गई। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं का लाभ समय पर पात्र लोगों तक पहुंचे और लंबित कार्य जल्द पूरे किए जाएं। बैठक में विधायक Sudesh Rai, Gopal Singh Engineer, जिला भाजपा अध्यक्ष नरेश मेवाड़ा, जिला पंचायत अध्यक्ष रचना सुरेंद्र अधिक जानकारी और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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इंदौर में भाजपा नेता और ट्रैफिक पुलिस के बीच विवाद, हंगामे के बाद दो पुलिसकर्मी निलंबित

Indore के महूनाका चौराहे पर शुक्रवार दोपहर भाजपा नेताओं और ट्रैफिक पुलिस के बीच विवाद हो गया। घटना के बाद मौके पर बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता पहुंच गए और जमकर हंगामा किया। भाजपा के विधानसभा-4 प्रभारी वीरेंद्र शेडगे ने ट्रैफिक पुलिसकर्मियों पर अभद्रता और मारपीट का आरोप लगाया है। वहीं ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि वीरेंद्र शेडगे मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चला रहे थे। चेकिंग के दौरान शुरू हुआ विवाद जानकारी के अनुसार, शुक्रवार दोपहर महूनाका चौराहे पर ट्रैफिक पुलिस हेलमेट चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान वीरेंद्र शेडगे दोपहिया वाहन से वहां से गुजर रहे थे। बताया जा रहा है कि एक पुलिसकर्मी ने हाथ देकर उनकी बाइक रोकने की कोशिश की। आरोप है कि बाइक नहीं रुकने पर पुलिसकर्मी ने चलती गाड़ी पर हाथ उठा दिया। इसके बाद दोनों पक्षों में विवाद बढ़ गया। वीरेंद्र शेडगे का आरोप है कि उन्हें रोकर थप्पड़ मारा गया। उन्होंने मामले में कार्रवाई की मांग की है। विरोध के बाद दो पुलिसकर्मी सस्पेंड मामला बढ़ने पर भाजपा कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए और पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने लगे। विरोध बढ़ता देख यातायात विभाग ने कार्रवाई करते हुए ट्रैफिक कॉन्स्टेबल शेखर और सूबेदार लक्ष्मी को निलंबित कर दिया। वहीं ट्रैफिक टीआई राधा यादव को कार्यालय अटैच किया गया है। CCTV फुटेज की जांच जारी एसीपी शिवेंदु जोशी ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। चौराहे के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं। फुटेज सामने आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। जानकारी के मुताबिक शुरुआती जांच में वीरेंद्र शेडगे मोबाइल पर बात करते हुए नजर नहीं आए हैं। भाजपा कार्यकर्ताओं ने किया चक्काजाम घटना के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने महूनाका चौराहे पर चक्काजाम कर दिया। कार्यकर्ता सड़क पर बैठ गए, जिससे इलाके में यातायात प्रभावित हो गया। सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। स्थिति को संभालने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा। काफी देर तक मौके पर तनाव का माहौल बना रहा। बाद में पुलिस अधिकारियों ने समझाइश देकर स्थिति को शांत कराया। अधिक जानकारी और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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अस्पताल में 4 दिन तक मर्चुरी में पड़ा रहा नवजात का शव, पिता बोला- कर्ज के कारण बंधक बना रखा था

Sehore जिला अस्पताल से गुरुवार को एक दर्दनाक तस्वीर सामने आई। एक पिता अपनी नवजात बेटी का शव गोद में लेकर अस्पताल से बाहर निकला। बच्ची का शव पिछले चार दिनों से अस्पताल की मर्चुरी में रखा हुआ था। पिता रवि रघुवंशी का आरोप है कि 70 हजार रुपए के कर्ज के कारण एक किसान ने उसे बंधक बनाकर रखा था। इसी वजह से वह बेटी की मौत के बाद भी अस्पताल नहीं पहुंच सका। जुड़वां बहनों में से एक थी बच्ची जानकारी के मुताबिक 24 मार्च को रवि और अंजलि रघुवंशी के यहां जुड़वां बच्चियों का जन्म हुआ था। जन्म के दौरान एक बच्ची की मौत हो गई थी। दूसरी बच्ची बेहद कमजोर हालत में पैदा हुई थी। उसका वजन सिर्फ 1.4 किलो था। बच्ची प्रीमैच्योर थी, इसलिए उसे जिला अस्पताल के ICU में भर्ती किया गया था। करीब 40 दिनों तक डॉक्टरों ने उसका इलाज किया, लेकिन 3 मई को उसकी मौत हो गई। चार दिन तक नहीं पहुंचे परिजन बच्ची की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों से कई बार संपर्क करने की कोशिश की। हालांकि, परिवार की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला। चार दिन तक कोई शव लेने नहीं पहुंचा, जिसके बाद अस्पताल ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ढूंढकर लाई माता-पिता को पुलिस पहले आष्टा तहसील के हकीमाबाद गांव पहुंची, जहां परिवार का घर है। वहां पता चला कि दंपती मजदूरी करने देवास जिले के जालेरिया गांव गए हैं। इसके बाद पुलिस टीम वहां पहुंची और दोनों को सीहोर लेकर आई। बाद में बच्ची का शव परिजनों को सौंप दिया गया। पिता ने लगाया बंधक बनाने का आरोप पूछताछ में पिता रवि रघुवंशी ने बताया कि वह किसान मनोज जाट के यहां मजदूरी करता था। उस पर करीब 70 हजार रुपए का कर्ज था। रवि का आरोप है कि किसान ने कर्ज के बदले उसे और उसके साथी को जबरन रोक रखा था। उसने कहा कि उसे अस्पताल जाने नहीं दिया गया। रवि ने दावा किया कि अगर वह समय पर अस्पताल पहुंच जाता, तो शायद उसकी बच्ची की जान बच सकती थी। पुलिस कर रही मामले की जांच पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि मजदूर को जबरन बंधक बनाकर रखा गया था या नहीं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अधिक जानकारी और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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बिलासपुर में आरक्षक की मौत पर बढ़ा विवाद, विधायक दिलीप लहरिया ने अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने की मांग की

Bilaspur के श्रीराम केयर अस्पताल में आरक्षक सत्यकुमार पाटले की मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इलाज में लापरवाही के आरोपों के बीच मस्तूरी विधायक Dilip Lahariya ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विधायक ने अस्पताल का लाइसेंस निरस्त करने और मृत आरक्षक के परिवार को न्याय दिलाने की मांग की है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि जरूरत पड़ने पर यह मामला विधानसभा में भी उठाया जाएगा। पथरी के इलाज के दौरान हुई थी मौत जानकारी के अनुसार, सरकंडा थाने में पदस्थ आरक्षक सत्यकुमार पाटले पेट दर्द की शिकायत के बाद इलाज के लिए श्रीराम केयर अस्पताल पहुंचे थे। जांच में डॉक्टरों ने पथरी की समस्या बताई और ऑपरेशन की सलाह दी। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद सत्यकुमार की तबीयत अचानक बिगड़ गई, लेकिन कई घंटों तक कोई विशेषज्ञ डॉक्टर देखने नहीं आया। समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण उनकी हालत गंभीर हो गई और बाद में मौत हो गई। मौत के कारण पर बना सस्पेंस परिवार का कहना है कि डॉक्टरों ने पहले किडनी में इंफेक्शन बताया था, लेकिन बाद में मौत का कारण हार्ट अटैक बताया गया। वहीं पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। इस मामले में सिम्स के चार डॉक्टरों की टीम ने बिसरा जांच कराने की सलाह दी है। विधायक परिजनों के साथ पहुंचे कलेक्ट्रेट बुधवार को विधायक दिलीप लहरिया मृतक आरक्षक के परिजनों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे। वहां उन्होंने कलेक्टर संजय अग्रवाल से मुलाकात कर मामले की शिकायत की। विधायक ने कहा कि यह अस्पताल में लापरवाही का पहला मामला नहीं है। पहले भी अस्पताल को लेकर शिकायतें सामने आ चुकी हैं। “सामान्य इलाज के लिए गया था आरक्षक” विधायक लहरिया ने कहा कि सत्यकुमार किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित नहीं थे। वे सिर्फ पथरी का इलाज कराने अस्पताल गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि गलत इलाज और लापरवाही के कारण एक जवान की जान चली गई। अब अस्पताल में हुई अन्य मौतों का रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है। कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी कलेक्टर संजय अग्रवाल ने मामले की जांच कराने और रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई का भरोसा दिया है। वहीं परिजनों ने आरोप लगाया है कि मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा। अधिक जानकारी और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें
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रायपुर में मकान से संदिग्ध विस्फोटक सामग्री बरामद, बम स्क्वॉड और फॉरेंसिक टीम जांच में जुटी

Raipur के रावाभाठा इलाके में एक मकान से संदिग्ध विस्फोटक सामग्री मिलने के बाद हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही पुलिस, बम स्क्वॉड और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। मामला खमतराई थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। पुलिस ने मौके से बैटरी, वायर, एयरगन, कैमिकल से भरी दो बोतलें और डेटोनेटर जैसी संदिग्ध सामग्री जब्त की है। बैग में मिला संदिग्ध सामान जानकारी के मुताबिक रावाभाठा इलाके में रहने वाली मितानिन पुष्पा साहू के घर बुधवार शाम एक युवक बैग लेकर पहुंचा था। युवक ने अपना नाम विनय देवांगन बताया और कुछ देर के लिए बैग रखने की बात कहकर वहां से चला गया। बैग को लेकर परिवार को शक हुआ। इसके बाद उन्होंने वार्ड पार्षद अश्वनी यादव को इसकी जानकारी दी। स्थानीय लोगों के साथ पहुंचे पार्षद सूचना मिलने के बाद पार्षद अश्वनी यादव स्थानीय लोगों के साथ मौके पर पहुंचे। गुरुवार सुबह बैग खोलकर देखा गया तो उसमें एयरगन, वायर, बैटरी और देसी बम बनाने में इस्तेमाल होने वाला संदिग्ध सामान मिला। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही नॉर्थ थाना पुलिस, बम स्क्वॉड और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंच गई। डीसीपी ने लिया जायजा मौके पर डीसीपी नॉर्थ जोन मयंक गुर्जर भी पहुंचे और जांच की स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने पूरे इलाके को घेरकर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार जब्त सामग्री की जांच की जा रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि सामान का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था। CCTV फुटेज खंगाल रही पुलिस पुलिस आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज भी खंगाल रही है। वहीं घर में मौजूद लोगों से पूछताछ की जा रही है। शुरुआती जानकारी में सामने आया है कि संदिग्ध सामान विनय देवांगन नाम के व्यक्ति का हो सकता है। हालांकि पुलिस ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। पुलिस अब विनय देवांगन से पूछताछ की तैयारी कर रही है। मामले में जल्द बड़ा खुलासा होने की संभावना जताई जा रही है।
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सीहोर जिला अस्पताल की मर्चुरी में 4 दिन से रखा नवजात बच्ची का शव, माता-पिता लेने नहीं पहुंचे

Sehore जिला अस्पताल की मर्चुरी में एक नवजात बच्ची का शव पिछले चार दिनों से रखा हुआ है। बच्ची की 3 मई को इलाज के दौरान मौत हो गई थी, लेकिन अब तक उसके माता-पिता शव लेने अस्पताल नहीं पहुंचे हैं। अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक बच्ची करीब 40 दिनों तक ICU में भर्ती रही। डॉक्टरों ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन उसकी हालत लगातार गंभीर बनी रही। जन्म के समय वजन था सिर्फ 1.4 किलो सिविल सर्जन डॉ. यू.के. श्रीवास्तव ने बताया कि हकीमाबाद निवासी अंजली और रवि के यहां 24 मार्च को जुड़वां बच्चों का जन्म हुआ था। प्रसव के दौरान एक बच्चे की मौत हो गई थी। वहीं दूसरी बच्ची बेहद कमजोर थी। जन्म के समय उसका वजन केवल 1.4 किलोग्राम था। इसी वजह से उसे तुरंत गहन चिकित्सा इकाई (ICU) में भर्ती किया गया था। बच्ची की मौत के बाद बंद कर दिया संपर्क डॉक्टरों के अनुसार इलाज के दौरान बच्ची के पिता सिर्फ एक-दो बार ही अस्पताल पहुंचे थे। 3 मई को बच्ची की मौत होने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों से कई बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने फोन उठाना बंद कर दिया। अस्पताल की ओर से उनके काम करने की जगह पर भी सूचना भेजी गई, फिर भी कोई शव लेने नहीं पहुंचा। पुलिस टीम हकीमाबाद रवाना चार दिन तक कोई नहीं आने पर अस्पताल प्रशासन ने मामले की जानकारी पुलिस को दी। अब पुलिस और अस्पताल प्रबंधन नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई कर रहे हैं। पुलिस की एक टीम हकीमाबाद रवाना हुई है। पुलिस परिजनों को अस्पताल बुलाकर बच्ची का शव सौंपने और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कराने की कोशिश
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खंडवा में 32 साल के युवक की हार्ट अटैक से मौत, दोस्तों के साथ कार्यक्रम से लौट रहे थे घर

Khandwa के रामनगर क्षेत्र निवासी 32 वर्षीय सौरभ मालवीय की बुधवार देर शाम हार्ट अटैक से मौत हो गई। वे दोस्तों के साथ ग्राम सिंगोट में एक कार्यक्रम में शामिल होने गए थे। लौटते समय अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। जानकारी के अनुसार, रास्ते में सौरभ ने सीने में तेज दर्द की शिकायत की। उनके दोस्त ने तुरंत कार रोकी, लेकिन कुछ ही देर में उनकी हालत और गंभीर हो गई। इसके बाद दोस्त उन्हें तुरंत शहर के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। हालांकि, डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के मुताबिक अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में उनकी मौत हो चुकी थी। “मां वैष्णो जल” नाम से चलाते थे RO प्लांट सौरभ मालवीय रामनगर क्षेत्र में “मां वैष्णो जल” नाम से RO वाटर प्लांट संचालित करते थे। वे अपने मिलनसार और शांत स्वभाव के कारण इलाके में अच्छी पहचान रखते थे। उनके परिवार में मां, पत्नी और सात साल की बेटी है। सौरभ के अचानक निधन की खबर से परिवार और परिचित गहरे सदमे में हैं। 7 दिन पहले मनाई थी शादी की सालगिरह परिजनों ने बताया कि सौरभ की शादी की सालगिरह सिर्फ सात दिन पहले ही मनाई गई थी। वहीं उनकी मां पिछले एक साल से बीमार चल रही हैं। उनका इलाज मुंबई में चल रहा था और इसी महीने उन्हें वापस घर लाया गया था। ऐसे में सौरभ की अचानक मौत ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया है। घटना के बाद रामनगर क्षेत्र में शोक का माहौल है। अधिक जानकारी और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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भोपाल में 1.40 लाख के नकली नोटों के साथ युवक गिरफ्तार, खुद को बताता था MBBS डॉक्टर

Bhopal की कोहेफिजा पुलिस ने पश्चिम बंगाल के एक युवक को नकली नोटों के साथ गिरफ्तार किया है। आरोपी के पास से 500 रुपए के 280 नकली नोट बरामद हुए हैं। इनकी कुल कीमत करीब 1.40 लाख रुपए बताई जा रही है। पुलिस के मुताबिक आरोपी खुद को MBBS डॉक्टर बताता था। उसके पास से एक आईफोन, पेन ड्राइव और विदेशी सीरीज (+44) का मोबाइल नंबर भी मिला है। शुरुआती जांच में पुलिस को कुछ संदिग्ध गतिविधियों के संकेत मिले हैं। इसी वजह से आरोपी को कोर्ट में पेश कर 7 दिन की रिमांड पर लिया गया है। सैफिया कॉलेज ग्राउंड के पास हुई गिरफ्तारी कोहेफिजा थाना प्रभारी केजी शुक्ला ने बताया कि बुधवार दोपहर पुलिस को सूचना मिली थी कि एक युवक सैफिया कॉलेज ग्राउंड के पास कम कीमत में नकली नोट बेचने की कोशिश कर रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने घेराबंदी कर आरोपी को पकड़ लिया। पूछताछ में उसने अपना नाम सैफुल इस्लाम (27) निवासी पश्चिम बंगाल बताया। 2024 से कर रहा था नकली नोटों का कारोबार पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह साल 2024 से नकली नोटों के कारोबार में शामिल है। वह पहले भी दो बार भोपाल आकर नकली नोट चला चुका है। मई 2025 से वह भोपाल की गुलमोहर कॉलोनी में किराए से रह रहा था। इसी दौरान उसने शादी भी की थी। 300 रुपए लेकर देता था 500 का नकली नोट आरोपी ने पुलिस को बताया कि वह 2 लाख रुपए की नकली करेंसी करीब 60 हजार रुपए में खरीदकर लाया था। पिछले 10 दिनों में वह करीब 60 हजार रुपए के नकली नोट बाजार में चला चुका है। वह लोगों से 300 रुपए असली लेकर बदले में 500 रुपए का नकली नोट देता था। जल्दी अमीर बनने की चाह में उसने यह काम शुरू किया था। नेपाल और पाकिस्तान जैसे पेपर पर छपे नोट पुलिस के अनुसार जब्त किए गए नोट नेपाल और पाकिस्तान में इस्तेमाल होने वाले कागज जैसे पेपर पर छपे हैं। इसी वजह से पुलिस अब मामले की जांच अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय एंगल से भी कर रही है। साइबर ठगी से भी जुड़ सकते हैं तार जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी विदेशी नंबरों पर बातचीत करता था। पुलिस को शक है कि उसका संबंध साइबर ठगी गिरोह से भी हो सकता है। पुलिस के मुताबिक आरोपी फर्जी बैंक खाते उपलब्ध कराने का काम भी करता था। फिलहाल उससे पूछताछ जारी है और उसके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है। अधिक जानकारी और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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भोपाल नगर निगम को मिला नया मुख्यालय, ‘अटल भवन’ का CM मोहन यादव ने किया लोकार्पण

Bhopal के तुलसी नगर सेकंड स्टॉप पर भोपाल नगर निगम का नया मुख्यालय बनकर तैयार हो गया है। 43 करोड़ रुपए की लागत से बने इस भवन का नाम ‘अटल भवन’ रखा गया है। गुरुवार को मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने इसका लोकार्पण किया। अब शहरवासियों को नगर निगम के अलग-अलग कामों के लिए कई जगह भटकना नहीं पड़ेगा। निगम के ज्यादातर विभाग एक ही बिल्डिंग में काम करेंगे। प्रदेश की पहली जियोथर्मल तकनीक वाली नगरीय बिल्डिंग नगर निगम का यह नया मुख्यालय प्रदेश की पहली ऐसी नगरीय निकाय बिल्डिंग है, जिसमें जियोथर्मल तकनीक का उपयोग किया गया है। परिसर में लगाए गए सोलर पैनलों से करीब 300 किलोवाट बिजली तैयार होगी। लोकार्पण के साथ ही नीमच जिले में भोपाल निगम द्वारा स्थापित 10.5 मेगावॉट सोलर प्रोजेक्ट का भी शुभारंभ किया गया। एक जगह मिलेंगी सभी सुविधाएं नई बिल्डिंग में जनसुविधा केंद्र बनाया गया है, जहां नागरिकों को सभी विभागों से जुड़ी जानकारी और सेवाएं एक ही स्थान पर मिलेंगी। यहां बिल्डिंग परमिशन, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, विवाह पंजीयन, जल कार्य, सीवेज, राजस्व, स्वच्छ भारत मिशन, स्वास्थ्य, आईटी और स्मार्ट सिटी समेत कई विभाग संचालित होंगे। अभी अलग-अलग जगह चल रहे थे ऑफिस अब तक नगर निगम की कई शाखाएं शहर के अलग-अलग इलाकों में संचालित हो रही थीं। आईएसबीटी, माता मंदिर, शाहपुरा और फतेहगढ़ समेत कई जगहों पर विभागों के ऑफिस थे। नए मुख्यालय के शुरू होने से कामकाज आसान होने की उम्मीद है। नई बिल्डिंग में सामने आईं कुछ खामियां करीब 5 एकड़ जमीन पर बनी इस बिल्डिंग में कुछ कमियां भी सामने आई हैं। सबसे बड़ी कमी मीटिंग हॉल को लेकर बताई जा रही है। करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद मीटिंग हॉल नहीं बनाया गया। अब इसके लिए पास की 0.25 एकड़ जमीन मांगी गई है, जिस पर करीब 10 करोड़ रुपए खर्च होंगे। ग्रीन कॉन्सेप्ट पर तैयार हुआ भवन ‘अटल भवन’ को ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट पर तैयार किया गया है। परिसर में सोलर पैनल लगाए गए हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि पैनलों की दिशा उत्तर-दक्षिण होने से बिजली उत्पादन प्रभावित हो सकता है। किस फ्लोर पर कौन-सा विभाग? अधिक जानकारी और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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रायपुर पुलिस में बड़ा फेरबदल: 136 अधिकारियों-कर्मचारियों के तबादले, तुरंत लागू आदेश

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नरेट ने प्रशासनिक कसावट लाने के लिए बड़े स्तर पर तबादले किए हैं।जारी आदेश के अनुसार कुल 136 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को एक थाने से दूसरे थाने में ट्रांसफर किया गया है। किन-किन पदों पर हुआ ट्रांसफर? सूची के मुताबिक तबादले में शामिल हैं: इन सभी को अलग-अलग थानों और यूनिट्स में नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। क्यों किया गया फेरबदल? पुलिस विभाग के अनुसार यह कदम: के उद्देश्य से उठाया गया है। तुरंत लागू हुआ आदेश पुलिस कमिश्नर कार्यालय की ओर से जारी यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।इस फैसले के बाद पुलिस विभाग में हलचल तेज हो गई है। 👉 ताजा खबरों के लिए जुड़े रहें: www.deshharpal.com
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E20 Petrol

E20 Petrol पर Supreme Court का फैसला, Ethanol Percentage और पुराने वाहनों पर बढ़ी चिंता

पेट्रोल पंप पर गाड़ी में डाला जा रहा E20 Petrol आखिर कितना Ethanol वाला है? इस सवाल का सीधा जवाब मांगने वाली याचिका पर Supreme Court ने सोमवार को सुनवाई करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अपनी शिकायत संबंधित सक्षम अथॉरिटी या क्षेत्राधिकार वाले हाईकोर्ट के सामने रखने की छूट दी है। मामला सिर्फ पेट्रोल पंप पर Ethanol Percentage लिखने तक सीमित नहीं था। याचिका में पुराने वाहनों के लिए E20 Fuel की compatibility, fuel bills पर जानकारी और एक official vehicle-wise database बनाने जैसी कई मांगें भी उठाई गई थीं। ऐसे में इस फैसले के बाद E20 Petrol को लेकर वाहन मालिकों की चिंता एक बार फिर चर्चा में आ गई है। Petrol Pump पर Ethanol Percentage बताने की मांग याचिका दाखिल करने वाले नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने मांग की थी कि देश के सभी पेट्रोल पंपों पर dispensing nozzle के पास पेट्रोल में मौजूद Ethanol की exact percentage साफ तौर पर दिखाई जाए। उनका कहना था कि ग्राहक को यह पता होना चाहिए कि वह जिस fuel के लिए पैसे दे रहा है, उसकी composition क्या है। याचिका में यह भी कहा गया था कि पेट्रोल खरीदने के बाद मिलने वाले bill, invoice या receipt पर भी Ethanol की मात्रा दर्ज होनी चाहिए। इससे वाहन मालिकों को अपने वाहन के लिए fuel को लेकर बेहतर जानकारी मिल सकेगी। E20 Petrol को लेकर क्यों हो रही है चर्चा? E20 का मतलब ऐसे पेट्रोल से है जिसमें करीब 20 प्रतिशत Ethanol blending होती है। भारत में Ethanol blending को बढ़ावा देने की नीति का उद्देश्य imported crude oil पर निर्भरता कम करना और घरेलू biofuel के इस्तेमाल को बढ़ाना है। लेकिन इस बदलाव के बीच सबसे ज्यादा सवाल उन गाड़ियों को लेकर उठ रहे हैं जो E20 standards को ध्यान में रखकर तैयार नहीं की गई थीं। याचिका में पुराने और non-compatible vehicles के लिए अलग transition framework की मांग भी की गई थी। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि हर पुरानी गाड़ी में E20 Petrol डालने से खराबी होगी। किसी वाहन की compatibility उसके model, engine, manufacturing year और manufacturer की specifications पर निर्भर करती है। Vehicle-wise E20 Compatibility Database की मांग याचिका में एक ऐसा official और publicly searchable database बनाने की मांग की गई थी, जिसमें वाहन मालिक अपने वाहन की जानकारी डालकर यह देख सकें कि वह किस ethanol blend के लिए suitable है। इस database में manufacturer, model, engine type और manufacturing year के आधार पर जानकारी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव था। इससे खासकर पुराने वाहन मालिकों को अपने वाहन के लिए fuel compatibility समझने में आसानी हो सकती है। E20 पर Expert Committee बनाने की भी मांग याचिका में E20 के असर का व्यापक अध्ययन करने के लिए एक independent expert committee बनाने की मांग भी की गई थी। प्रस्तावित committee में Petroleum Ministry, Road Transport Ministry, Bureau of Indian Standards और automobile experts को शामिल करने की बात कही गई थी। समिति से vehicle compatibility, fuel efficiency, engine life, maintenance cost, warranty और insurance जैसे मुद्दों का अध्ययन कराने की मांग की गई थी। याचिका में E20 के environmental impact और ethanol production से जुड़े water use तथा food-security जैसे पहलुओं पर भी expert assessment की मांग की गई थी। Supreme Court ने क्या कहा? Supreme Court की जस्टिस एमएम सुंदरैश और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने याचिका को Article 32 के तहत entertain करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अपनी शिकायत के लिए संबंधित High Court का दरवाजा खटखटाने की स्वतंत्रता दी। इसका सीधा मतलब यह है कि फिलहाल Supreme Court ने पेट्रोल पंपों पर Ethanol Percentage लिखना अनिवार्य करने का कोई नया आदेश नहीं दिया है। अब आम Vehicle Owners के लिए क्या मायने हैं? इस मामले की सबसे बड़ी बात यह है कि E20 को लेकर बहस अब केवल सरकार की ethanol blending policy तक सीमित नहीं है। मामला consumer awareness और transparency से भी जुड़ गया है। वाहन मालिकों के लिए यह जानना अहम है कि उनके वाहन के लिए manufacturer ने किस ethanol blend को suitable बताया है। वहीं, याचिका ने यह सवाल जरूर सामने ला दिया है कि पेट्रोल खरीदते समय consumer को fuel की composition की स्पष्ट जानकारी कितनी आसानी से मिलनी चाहिए। फिलहाल Supreme Court से इस मामले में कोई mandatory labelling order नहीं आया है। आगे की कार्रवाई के लिए याचिकाकर्ता सक्षम अथॉरिटी या संबंधित High Court का रुख कर सकता है। E20 Petrol पर Supreme Court का यह फैसला भले ही याचिका को आगे नहीं बढ़ाता, लेकिन इसने एक आम सवाल जरूर सामने रख दिया है—जब fuel बदल रहा है, तो क्या consumer को भी उसके बारे में पूरी और साफ जानकारी नहीं मिलनी चाहिए?
SIR

Delhi SIR Draft Voter List: 47.7 लाख नाम बाहर, ऐसे Check करें अपना नाम

दिल्ली में SIR (Special Intensive Revision) के तहत Draft Voter List जारी होने के बाद मतदाताओं के बीच हलचल बढ़ गई है। नई सूची में करीब 47.7 लाख लोगों के नाम शामिल नहीं किए गए हैं। यह आंकड़ा सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतने नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बाहर क्यों रह गए और जिन लोगों का नाम नहीं है, वे अब क्या करें? सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि ड्राफ्ट लिस्ट में नाम नहीं होना अंतिम रूप से वोटर लिस्ट से नाम कटने का मतलब नहीं है। पात्र मतदाताओं को अपना नाम वापस शामिल कराने के लिए दावा और आपत्ति दर्ज कराने का मौका दिया गया है। दिल्ली में कितने मतदाता, कितने नाम Draft List में? SIR से पहले दिल्ली में कुल 1,45,10,299 मतदाता दर्ज थे। Revision के दौरान करीब 97.5 लाख मतदाताओं के Enumeration Forms प्राप्त हुए और उन्हें डिजिटल किया गया। इसके आधार पर करीब 97.5 लाख नाम Draft Electoral Roll में शामिल किए गए हैं। दूसरी ओर, करीब 47.7 लाख नाम फिलहाल ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं दिखाई दे रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक इन मामलों को मुख्य रूप से Absent, Shifted, Dead, Duplicate and Others (ASDDO) जैसी श्रेणियों में रखा गया है। यानी कई मामलों में मतदाता का पता बदल चुका हो सकता है, किसी व्यक्ति की मृत्यु हो चुकी हो सकती है या रिकॉर्ड में एक से ज्यादा एंट्री होने की संभावना हो सकती है। नाम नहीं मिला तो क्या करें? अगर आपने SIR के दौरान अपना Enumeration Form जमा किया था, लेकिन Draft Voter List में नाम नहीं दिख रहा है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। Election authorities ने ऐसे लोगों को Claim और Objection दाखिल करने का मौका दिया है। दावा-आपत्ति की प्रक्रिया 31 अगस्त से 30 सितंबर 2026 तक चलेगी। पात्र व्यक्ति अपना नाम वोटर लिस्ट में शामिल कराने के लिए Form 6 के जरिए आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद अधिकारियों की ओर से दस्तावेजों और दावे की जांच की जाएगी। जरूरी होने पर संबंधित व्यक्ति से अतिरिक्त जानकारी या दस्तावेज भी मांगे जा सकते हैं। Final Voter List कब आएगी? Draft Electoral Roll जारी होने के बाद अब अगला चरण claims और objections का है। इस दौरान जिन लोगों के नाम गलती से छूट गए हैं, उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 29 अक्टूबर 2026 तक नोटिस और दावों के निपटारे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद 4 नवंबर 2026 को Delhi की Final Voter List जारी की जाएगी। SIR में क्यों हटाए गए इतने नाम? SIR का उद्देश्य वोटर लिस्ट को अपडेट करना और उसमें मौजूद गलत या पुराने रिकॉर्ड की पहचान करना है। लंबे समय से दिल्ली में रह रहे लेकिन पता बदल चुके मतदाताओं, मृत व्यक्तियों के नाम, डुप्लीकेट एंट्री और अन्य संदिग्ध रिकॉर्ड की जांच इस प्रक्रिया का हिस्सा है। हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में नाम Draft List से बाहर होने के बाद अब यह भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि कोई वास्तविक और पात्र मतदाता गलती से मतदान के अधिकार से वंचित न रह जाए। अलग-अलग इलाकों में अलग रहा Verification दिल्ली की अलग-अलग विधानसभा सीटों पर Enumeration Forms के digitisation का प्रतिशत भी एक जैसा नहीं रहा। रिपोर्ट के मुताबिक रोहिणी में करीब 83.43% फॉर्म डिजिटाइज हुए, जबकि तुगलकाबाद में यह आंकड़ा करीब 52.15% रहा। इसी वजह से अब Draft Roll के बाद शुरू होने वाली Claim और Objection प्रक्रिया काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। Delhi Voter List में नाम जरूर Check करें अगर आप दिल्ली के मतदाता हैं, तो इस समय सबसे जरूरी काम है कि Draft Voter List में अपना नाम जरूर चेक करें। खासकर उन लोगों को ध्यान देना चाहिए जिनका पता हाल के वर्षों में बदला है या जिनके Enumeration Form को लेकर कोई समस्या हुई थी। अगर नाम नहीं मिलता है और आप मतदान के लिए पात्र हैं, तो 30 सितंबर 2026 से पहले Claim दाखिल करना जरूरी होगा। Final Voter List में नाम शामिल होने के बाद ही आगामी चुनाव में मतदान का अधिकार सुनिश्चित होगा। Delhi SIR Voter List की Important Dates हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
BJP

Maharashtra में फिर बढ़ी सियासी गर्मी, Mumbai Bank Election में BJP और शिंदे सेना की भिड़ंत

महाराष्ट्र की राजनीति में BJP और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना एक बार फिर आमने-सामने नजर आ सकती है। इस बार मामला किसी विधानसभा सीट या बड़े राजनीतिक चुनाव का नहीं, बल्कि Mumbai Bank Election का है। मुंबई जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के चुनाव में शिंदे गुट के उतरने की चर्चा ने महायुति के भीतर सियासी हलचल बढ़ा दी है। BJP और शिंदे की शिवसेना राज्य में महायुति सरकार की सहयोगी हैं, लेकिन स्थानीय चुनावों में दोनों दलों के बीच वर्चस्व की लड़ाई कई बार सामने आती रही है। ऐसे में मुंबई बैंक चुनाव को भी सिर्फ सहकारी संस्था का चुनाव मानकर नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा। Mumbai Bank Election में सीधा मुकाबला? मुंबई बैंक का चुनाव सहकारिता क्षेत्र में काफी अहम माना जाता है। बैंक से जुड़े चुनाव में अलग-अलग राजनीतिक गुटों की सक्रियता रहती है। यही वजह है कि अगर BJP और शिंदे सेना अपने-अपने पैनल के साथ मैदान में उतरती हैं तो मुकाबला दिलचस्प हो सकता है। शिंदे गुट की ओर से चुनाव लड़ने की तैयारी की खबर के बाद अब सबकी नजर इस बात पर है कि BJP की रणनीति क्या रहती है। दोनों दलों के अलग-अलग उम्मीदवार मैदान में आने पर चुनाव सीधे तौर पर राजनीतिक ताकत के प्रदर्शन में बदल सकता है। महायुति में साथ, चुनाव में अलग राह महाराष्ट्र में BJP और शिवसेना का शिंदे गुट सत्ता में साझेदार हैं। दोनों दलों ने कई बड़े चुनावों में साथ मिलकर रणनीति बनाई है। लेकिन स्थानीय स्तर पर परिस्थितियां हमेशा इतनी आसान नहीं रहतीं। मुंबई और ठाणे जैसे इलाकों में संगठन और राजनीतिक प्रभाव को लेकर दोनों पक्षों के बीच प्रतिस्पर्धा पहले भी देखने को मिली है। सहकारी संस्थाओं के चुनाव इस लिहाज से खास होते हैं, क्योंकि इनके नतीजे स्थानीय संगठन की पकड़ और नेताओं के प्रभाव का संकेत भी देते हैं। Thane Bank Election ने भी दिखाया था टकराव मुंबई बैंक से पहले ठाणे जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक का चुनाव भी BJP और शिंदे सेना के बीच चर्चा में रहा था। दोनों दलों के बीच राजनीतिक समीकरणों को लेकर अलग-अलग दावे और रणनीतियां सामने आई थीं। हालांकि बाद में कुछ मौकों पर दोनों पक्षों ने मिलकर भी काम किया। यही महाराष्ट्र की महायुति की राजनीति की खासियत है—जहां सत्ता में गठबंधन कायम है, वहीं स्थानीय स्तर पर राजनीतिक मुकाबला भी चलता रहता है। Mumbai Politics के लिए क्यों अहम है यह चुनाव? मुंबई सिर्फ महाराष्ट्र की आर्थिक राजधानी नहीं है, बल्कि प्रदेश की राजनीति का भी बड़ा केंद्र है। यहां किसी भी चुनाव में संगठनात्मक प्रदर्शन को राजनीतिक नजरिए से देखा जाता है। अगर मुंबई बैंक चुनाव में BJP और शिंदे सेना अलग-अलग खेमों में उतरती हैं, तो इससे दोनों दलों को अपनी जमीनी ताकत परखने का मौका मिलेगा। साथ ही चुनाव के नतीजे आने वाले स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के लिए भी संकेत दे सकते हैं। अब सबकी नजर चुनावी रणनीति पर फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या BJP और शिंदे सेना Mumbai Bank Election में अलग-अलग चुनाव लड़ेंगी या आखिरी समय में कोई समझौता हो जाएगा? शिंदे गुट की संभावित एंट्री ने मुकाबले को पहले ही दिलचस्प बना दिया है। अगर दोनों पक्ष आमने-सामने आते हैं तो यह सिर्फ बैंक के बोर्ड पर कब्जे की लड़ाई नहीं होगी, बल्कि मुंबई में अपने राजनीतिक प्रभाव का संदेश देने की कोशिश भी मानी जाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
UP के झरने में फंसे पर्यटक, चित्रकूट में घरों में घुसा 5 फीट तक कीचड़

UP के झरने में फंसे पर्यटक, चित्रकूट में घरों में घुसा 5 फीट तक कीचड़

UP और बिहार में लगातार हो रही बारिश के कारण कई इलाकों में हालात बिगड़ गए हैं। कहीं तेज बहाव के चलते पर्यटक घंटों फंसे रहे तो कहीं बाढ़ और जलभराव ने लोगों के घरों को अपनी चपेट में ले लिया। कई परिवारों के सामने अपना सामान बचाने और सुरक्षित जगह जाने की चुनौती खड़ी हो गई है। यूपी के वाटरफॉल में 3 घंटे फंसे पर्यटक उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में बारिश के बाद झरनों और आसपास के इलाकों में पानी का बहाव अचानक बढ़ गया। वाटरफॉल घूमने पहुंचे कई पर्यटक तेज पानी के बीच फंस गए। बताया जा रहा है कि पर्यटक करीब 3 घंटे तक वहां फंसे रहे। पानी का बहाव कम होने के बाद उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला गया। बारिश के कारण पर्यटन स्थलों पर भी लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं। जिस जगह लोग परिवार और दोस्तों के साथ घूमने और प्रकृति का आनंद लेने पहुंचे थे, वहीं कुछ समय के लिए डर और चिंता का माहौल बन गया। चित्रकूट में घरों में घुसा 5 फीट तक कीचड़ चित्रकूट के कई इलाकों में भारी बारिश के बाद जलभराव और कीचड़ की समस्या पैदा हो गई। कुछ घरों में करीब 5 फीट तक कीचड़ भर गया। इससे लोगों के घरों में रखा सामान खराब हो गया और रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि अचानक आई बाढ़ और पानी के तेज बहाव ने उनकी परेशानियां बढ़ा दीं। कई परिवारों को घरों से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। बिहार में गंगा ने 8 घरों को निगला बिहार में भी गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से हालात चिंताजनक हो गए हैं। नदी के कटाव की वजह से कई इलाकों में घरों पर खतरा मंडरा रहा है। जानकारी के मुताबिक, गंगा के तेज कटाव में 8 घर नदी में समा गए। घर खोने वाले परिवारों के लिए यह किसी बड़े सदमे से कम नहीं है। लोगों की आंखों के सामने उनका आशियाना नदी में समा गया। प्रभावित परिवार अब सुरक्षित ठिकाने और प्रशासन से मदद की उम्मीद कर रहे हैं। बारिश और बाढ़ ने बढ़ाई लोगों की चिंता यूपी और बिहार में बारिश के बाद बने हालात ने एक बार फिर नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें सामने ला दी हैं। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर नजर रखी जा रही है और लोगों को सुरक्षित रहने की सलाह दी जा रही है। बारिश जहां किसानों और जलस्रोतों के लिए राहत लेकर आती है, वहीं ज्यादा बारिश कई परिवारों के लिए मुसीबत बन जाती है। इस बार भी कई लोगों को अपने घर, सामान और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी चीजों का नुकसान उठाना पड़ा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Delhi में 16 साल की छात्रा से बस में Gang Rape, ड्राइवर-कंडक्टर गिरफ्तार

Delhi में 16 साल की छात्रा से बस में Gang Rape, ड्राइवर-कंडक्टर गिरफ्तार

Delhi में एक 16 साल की छात्रा के साथ चलती बस में गैंगरेप का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि छात्रा को ग्रेटर नोएडा से बस में बैठाया गया और इसके बाद बस करीब 47 किलोमीटर तक चलती रही। बस के शीशों पर पर्दे लगे हुए थे, जिससे अंदर क्या हो रहा है, इसका बाहर से पता नहीं चल सका। मामले में पुलिस ने बस के ड्राइवर और कंडक्टर को गिरफ्तार किया है। ग्रेटर नोएडा से बस में बैठी थी छात्रा पुलिस के मुताबिक, नाबालिग छात्रा ग्रेटर नोएडा से बस में सवार हुई थी। आरोप है कि बस में मौजूद ड्राइवर और कंडक्टर ने उसके साथ कथित तौर पर गैंगरेप किया। घटना के दौरान बस को लगातार चलाया जाता रहा और वह करीब 47 किलोमीटर तक पहुंच गई। शीशों पर लगे थे पर्दे बताया जा रहा है कि बस के शीशों पर पर्दे लगे हुए थे। इस वजह से बस के अंदर होने वाली गतिविधियां बाहर से दिखाई नहीं दे रही थीं। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। नाबालिग पीड़िता की सुरक्षा सबसे जरूरी घटना ने एक बार फिर सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिवार के लिए यह बेहद मुश्किल और दर्दनाक समय है। पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि घटना के दौरान बस में और कौन-कौन लोग मौजूद थे। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में कार्रवाई शुरू कर दी है। नाबालिग पीड़िता की पहचान कानून के तहत गोपनीय रखी गई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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