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रायपुर में भक्ति और उल्लास के साथ निकली भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा, हजारों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

रायपुर। राजधानी रायपुर गुरुवार को भगवान जगन्नाथ की भक्ति में पूरी तरह सराबोर नजर आई। गायत्री नगर स्थित ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ मंदिर से भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की भव्य रथयात्रा श्रद्धा, आस्था और सनातन परंपराओं के बीच निकाली गई। “जय जगन्नाथ” के जयघोष, शंखध्वनि, वैदिक मंत्रोच्चार, हरिनाम संकीर्तन और भजन-कीर्तन से पूरा शहर भक्तिमय वातावरण में डूब गया। हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर पुष्पवर्षा के साथ स्वागत किया। राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने निभाई ‘छेरा पहरा’ की परंपरा रथयात्रा के शुभारंभ अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका अपनी धर्मपत्नी के साथ तथा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मौजूद रहे। दोनों ने भगवान जगन्नाथ की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इसके बाद उन्होंने सनातन परंपरा के अनुसार स्वर्ण झाड़ू से रथ मार्ग की प्रतीकात्मक सफाई कर ‘छेरा पहरा’ की ऐतिहासिक परंपरा निभाई। यह परंपरा सेवा, समानता और विनम्रता का प्रतीक मानी जाती है। सनातन संस्कृति और सामाजिक समरसता का महापर्व जगन्नाथ मंदिर सेवा समिति के अध्यक्ष एवं रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा ने कहा कि भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, सामाजिक समरसता, सेवा और जनभागीदारी का महापर्व है। उन्होंने कहा कि यह परंपरा समाज को जोड़ने और नई पीढ़ी को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम है। मंदिर से मौसी मंदिर तक निकली रथयात्रा रथयात्रा गायत्री नगर स्थित जगन्नाथ मंदिर से शुरू होकर खम्हारडीह थाना, बीटीआई ग्राउंड होते हुए मौसी मंदिर पहुंची। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं, सामाजिक संगठनों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों ने पुष्पवर्षा, आरती और भजन-कीर्तन के साथ भगवान का स्वागत किया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां रथयात्रा के दौरान महिला मंडलों के भजन-कीर्तन, आकर्षक झांकियां, ओडिशा और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, झूमर, करमा और सुवा नृत्य श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहे। सजे-धजे रथों और भक्तों की अपार आस्था ने राजधानी रायपुर में पुरी धाम जैसा आध्यात्मिक माहौल बना दिया। श्रद्धालुओं के लिए विशेष इंतजाम यात्रा मार्ग पर पेयजल, चिकित्सा सहायता, विश्राम स्थल और महाप्रसाद वितरण के लिए कई सेवा शिविर लगाए गए। नगर निगम, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और स्वयंसेवकों ने समन्वय के साथ व्यवस्थाएं संभालीं, जिससे रथयात्रा शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हुई। मौसी मंदिर में महाआरती और महाप्रसाद रथयात्रा के अंतिम पड़ाव पर भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के विग्रह मौसी मंदिर पहुंचे। यहां वैदिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना, महाआरती और महाप्रसाद वितरण किया गया। श्रद्धालुओं ने विश्व शांति, राष्ट्र की समृद्धि और मानव कल्याण की कामना करते हुए भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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छत्तीसगढ़ में कारोबार करना होगा आसान: विधानसभा से ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम-2026’ पारित, MSME को बड़ी राहत

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने उद्योग और निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। विधानसभा ने ‘छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026’ को पारित कर दिया है। इस कानून के लागू होने के बाद छत्तीसगढ़ रिस्क बेस्ड (Risk-Based) और ट्रस्ट बेस्ड (Trust-Based) बिजनेस परमिशन सिस्टम लागू करने वाला देश का पहला राज्य बनने जा रहा है। सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था से उद्योग स्थापित करने और कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध होगी, जिससे खासकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को बड़ा लाभ मिलेगा। जोखिम के आधार पर मिलेगी अनुमति नई व्यवस्था के तहत उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का वर्गीकरण उनके आकार और गतिविधियों के आधार पर किया जाएगा। इससे छोटे कारोबारियों को अनावश्यक जटिल प्रक्रियाओं से राहत मिलेगी। सेल्फ सर्टिफिकेशन को मिलेगा बढ़ावा अधिनियम के तहत कम जोखिम वाले उद्यमों में बार-बार विभागीय निरीक्षण की आवश्यकता कम होगी। ऐसे मामलों में सेल्फ सर्टिफिकेशन या लाइसेंसधारी इंजीनियर, आर्किटेक्ट अथवा अधिकृत विशेषज्ञ के प्रमाणन के आधार पर अनुमति दी जा सकेगी। सरकार का दावा है कि इससे अनुमति प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी। हर साल लाइसेंस नवीनीकरण की बाध्यता खत्म नए कानून के तहत उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को हर वर्ष लाइसेंस या अनुमति का नवीनीकरण कराने की अनिवार्यता से राहत मिलेगी। जोखिम आधारित अनुमति प्रणाली लागू होने से उद्यमियों का समय और लागत दोनों कम होंगे तथा वे कारोबार के विस्तार पर अधिक ध्यान दे सकेंगे। MSME को मिलेंगी कई अहम सुविधाएं नई व्यवस्था में MSME इकाइयों को कई महत्वपूर्ण सुविधाएं प्रदान की जाएंगी, जिनमें शामिल हैं— हालांकि, अधिक जोखिम वाली परियोजनाओं में तकनीकी जांच और भौतिक निरीक्षण की प्रक्रिया जारी रहेगी। 8 विभागों की 43 सेवाएं होंगी शामिल इस अधिनियम के तहत राज्य सरकार के 8 विभागों की 43 सेवाओं को जोखिम आधारित अनुमति प्रणाली में शामिल किया गया है। भविष्य में आवश्यकता के अनुसार कार्यपालिका परिषद की मंजूरी से नई सेवाओं को भी जोड़ा जा सकेगा। तीन स्तर पर होगी निगरानी कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए तीन स्तरीय निगरानी व्यवस्था बनाई गई है। 15 लाख से अधिक MSME को होगा लाभ सरकार का अनुमान है कि इस सुधार का लाभ राज्य के 15 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को मिलेगा। भरोसे, स्व-घोषणा और समयबद्ध सेवाओं पर आधारित नई व्यवस्था से कारोबार शुरू करने में लगने वाला समय और लागत कम होगी, जबकि उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में सुरक्षा और निगरानी के सभी आवश्यक प्रावधान पहले की तरह लागू रहेंगे। निवेश को मिलेगा बढ़ावा राज्य सरकार का मानना है कि ‘छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026’ राज्य में निवेश को आकर्षित करने, उद्योगों के विस्तार और रोजगार सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके माध्यम से छत्तीसगढ़ में अधिक पारदर्शी, सरल और निवेश-अनुकूल कारोबारी वातावरण विकसित होने की उम्मीद है। छत्तीसगढ़, उद्योग, निवेश और कारोबार से जुड़ी ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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महादेव बेटिंग ऐप केस: स्पोर्ट्स प्रेजेंटर शेफाली बग्गा से ED की पूछताछ, हवाला कनेक्शन की जांच तेज

महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप और उससे जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने स्पोर्ट्स प्रेजेंटर और टीवी हस्ती शेफाली बग्गा से रायपुर स्थित अपने जोनल कार्यालय में पूछताछ की। जांच एजेंसी उनके कथित वित्तीय और डिजिटल संबंधों की पड़ताल कर रही है। ईडी के अनुसार, जांच का केंद्र बिंदु शेफाली बग्गा और महादेव ऑनलाइन बुक नेटवर्क से जुड़े बताए जा रहे कथित हवाला ऑपरेटर खंजन जगदीश कुमार ठक्कर के बीच संभावित संबंध हैं। हालांकि, एजेंसी ने अभी तक इस मामले में किसी भी आरोप को अदालत में सिद्ध नहीं बताया है। ऑनलाइन बेटिंग ऐप्स के प्रचार की जांच जांच एजेंसी का दावा है कि शेफाली बग्गा कथित तौर पर विदेश, विशेषकर दुबई और लंदन से संचालित होने वाले कुछ ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म्स के प्रचार से जुड़ी रही हैं। ईडी को जांच के दौरान कुछ डिजिटल सामग्री और प्रमोशनल कंटेंट मिले हैं, जिनमें कथित रूप से बेटिंग ऐप्स का प्रचार दिखाई देता है। एजेंसी इन डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। बेटिंग टिप्स देने के आरोपों की भी जांच सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि क्या शेफाली बग्गा केवल प्रचार तक सीमित थीं या कथित तौर पर ऑनलाइन बेटिंग से जुड़े खिलाड़ियों को टिप्स भी उपलब्ध कराती थीं। ईडी इन दावों से जुड़े ऑनलाइन कंटेंट और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड का विश्लेषण कर रही है। टेलीग्राम चैनल भी जांच के दायरे में ईडी सूत्रों के अनुसार, शेफाली बग्गा से जुड़े एक टेलीग्राम चैनल की भी जांच की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कथित तौर पर ऑनलाइन बेटिंग के प्रचार-प्रसार या अन्य गतिविधियों के लिए किया गया था। साथ ही चैनल से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड और संभावित वित्तीय लेन-देन की भी जांच जारी है। हवाला नेटवर्क की कड़ियां खंगाल रही ED ईडी का दावा है कि खंजन जगदीश कुमार ठक्कर महादेव ऑनलाइन बुक नेटवर्क से जुड़े कथित हवाला लेन-देन का प्रमुख संचालक रहा है। एजेंसी अब शेफाली बग्गा और ठक्कर के बीच कथित आर्थिक लेन-देन तथा अन्य संभावित संबंधों की जांच कर रही है। स्पोर्ट्स एंकरिंग और टीवी से जुड़ा है नाम शेफाली बग्गा स्पोर्ट्स एंकरिंग की दुनिया का जाना-पहचाना चेहरा हैं। वह टीवी रियलिटी शो ‘बिग बॉस 13’ में भी बतौर प्रतिभागी नजर आ चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने कई प्रमुख क्रिकेट आयोजनों की एंकरिंग की है और सोशल मीडिया पर भी उनकी अच्छी-खासी मौजूदगी है। नोट: फिलहाल इस मामले में जांच जारी है। एजेंसी द्वारा की जा रही पूछताछ और जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी। छत्तीसगढ़, अपराध और देशभर की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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स्पंज आयरन से भरे ट्रक की हेराफेरी: 7 लाख की ठगी में दो आरोपी गिरफ्तार, फर्जी नंबर प्लेट लगाकर छिपाई पहचान

रायपुर। राजधानी रायपुर के उरला थाना क्षेत्र में स्पंज आयरन से भरे ट्रक की हेराफेरी कर लाखों रुपये की ठगी करने के मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने महाराष्ट्र भेजे जा रहे माल को रास्ते में ही बेच दिया और ट्रक की पहचान छिपाने के लिए उस पर फर्जी नंबर प्लेट लगा दी। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 50 हजार रुपये नकद, फर्जी नंबर प्लेट लगा ट्रक और अन्य सामान सहित करीब 15 लाख रुपये का मशरूका बरामद किया है। महाराष्ट्र भेजने के बजाय उरला में बेच दिया माल पुलिस के अनुसार, एक निजी कंपनी ने ट्रक क्रमांक CG 08 AT 3321 में करीब 35 टन 870 किलोग्राम स्पंज आयरन, जिसकी कीमत लगभग 7.07 लाख रुपये थी, महाराष्ट्र भेजने के लिए लोड किया था। लेकिन ट्रक चालक ने रास्ते में बीमारी सहित अन्य बहाने बनाकर वाहन को निर्धारित स्थान तक नहीं पहुंचाया। कुछ समय बाद चालक और वाहन मालिक दोनों से संपर्क भी टूट गया। शिकायत मिलने पर उरला थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। तकनीकी जांच से मिले अहम सुराग पुलिस उपायुक्त (उत्तर) दीपमाला कश्यप के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर वाहन मालिक गुमान साहू और उसके साथी मोहम्मद मुख्तार को हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने चालक रहीमान साहू के साथ मिलकर स्पंज आयरन को रास्ते में ही बेच दिया था। इसके बाद ट्रक पर फर्जी नंबर प्लेट लगाकर उसकी असली पहचान छिपा दी गई। फाइनेंस की किश्त जमा करने से खुला मामला जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी चोरी में इस्तेमाल किए गए वाहन की फाइनेंस किश्त जमा कर रहे थे। इसी जानकारी के आधार पर पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिले और पूरे मामले का खुलासा हो गया। फरार चालक की तलाश जारी पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश कर दिया है। वहीं, इस मामले में शामिल चालक रहीमान साहू सहित अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है। छत्तीसगढ़ की ताजा खबरों और अपराध से जुड़ी हर अपडेट के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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पुरी जगन्नाथ रथयात्रा में भगदड़: एक श्रद्धालु की मौत, बारिश के बीच 10 लाख से अधिक लोग पहुंचे

ओडिशा के पुरी में गुरुवार को आयोजित विश्वप्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथयात्रा के दौरान भगदड़ मच गई। हादसे में एक श्रद्धालु की मौत हो गई, जबकि कई लोगों की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना शाम करीब 5 बजे उस समय हुई, जब पारंपरिक पहांडी रस्म के दौरान भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु रथों की ओर बढ़ने लगे। भीड़ बढ़ने से मची अफरा-तफरी प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यात्रा मार्ग पर तैनात स्वयंसेवक (वॉलेंटियर) भीड़ को नियंत्रित करने और लोगों को पीछे हटाने का प्रयास कर रहे थे। इसी दौरान अचानक धक्का-मुक्की शुरू हो गई, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। अफरा-तफरी में कई लोग एक-दूसरे पर गिर पड़े और कुछ श्रद्धालुओं को सांस लेने में तकलीफ होने लगी। उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। तेज बारिश के बीच उमड़ी भारी भीड़ हादसे के समय पुरी में तेज बारिश हो रही थी। इसके बावजूद रथयात्रा मार्ग पर 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं की मौजूदगी रही। भारी भीड़ और खराब मौसम के कारण व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी। शाम को आगे बढ़ा भगवान जगन्नाथ का रथ भगदड़ की घटना के बाद कुछ समय के लिए रथयात्रा प्रभावित रही। शाम करीब 7:30 बजे भगवान जगन्नाथ का रथ आगे बढ़ाया गया, लेकिन कुछ ही दूरी तय करने के बाद पहले दिन की यात्रा रोक दी गई। अब यात्रा शुक्रवार सुबह दोबारा शुरू होगी और लगभग 3 किलोमीटर दूर स्थित गुंडीचा मंदिर तक पहुंचेगी। पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे पुरी की जगन्नाथ रथयात्रा के दौरान इससे पहले भी भगदड़ की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। 18 जुलाई 2015 नवकलेवर वर्ष होने के कारण लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचे थे। भगवान बलभद्र के रथ के पास अचानक भीड़ बढ़ने से भगदड़ मच गई थी। हादसे में दो महिलाओं की मौत हुई थी, जबकि छह लोग घायल हुए थे। 29 जून 2025 गुंडिचा मंदिर के बाहर सरधाबली क्षेत्र में दर्शन के लिए जुटी भारी भीड़ के बीच भगदड़ मच गई थी। इस हादसे में तीन श्रद्धालुओं की मौत हुई थी और 50 से अधिक लोग घायल हुए थे। घटना के बाद राज्य सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश दिए थे तथा लापरवाही के आरोप में कई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई थी। देश-दुनिया, धर्म और ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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ISRO में वैज्ञानिकों के इस्तीफों पर सख्ती: गगनयान समेत अहम मिशनों को देखते हुए DoS ने बदले नियम

नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों के इस्तीफों तथा स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) को लेकर सरकार ने नई व्यवस्था लागू की है। अंतरिक्ष विभाग (Department of Space – DoS) ने 14 जुलाई को जारी निर्देश में कहा है कि अब ग्रुप-ए वैज्ञानिक एवं तकनीकी कर्मचारियों के इस्तीफे या VRS आवेदन पहले की तरह सामान्य प्रक्रिया के तहत मंजूर नहीं किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि हाल के महीनों में वैज्ञानिकों के बढ़ते इस्तीफों का असर गगनयान सहित कई राष्ट्रीय महत्व की अंतरिक्ष परियोजनाओं पर पड़ सकता है। अब अंतिम फैसला करेगा अंतरिक्ष विभाग नए आदेश के अनुसार, ISRO के विभिन्न केंद्रों से आने वाले वैज्ञानिकों और तकनीकी अधिकारियों के इस्तीफे या VRS आवेदन अब संबंधित केंद्र निदेशक की स्पष्ट सिफारिश के साथ सीधे अंतरिक्ष विभाग को भेजे जाएंगे। इन मामलों में अंतिम मंजूरी अब विभाग स्तर पर ही दी जाएगी। इससे पहले वर्ष 2020 में ISRO के केंद्र निदेशकों को ऐसे मामलों में निर्णय लेने का अधिकार दिया गया था। किन केंद्रों पर लागू होंगे नए नियम यह निर्देश ISRO के कई प्रमुख संस्थानों को भेजा गया है, जिनमें शामिल हैं— 10 महीनों में 100 से ज्यादा वैज्ञानिकों ने छोड़ी नौकरी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले लगभग 10 महीनों में 100 से अधिक वैज्ञानिक और तकनीकी कर्मचारी ISRO छोड़ चुके हैं। सबसे अधिक इस्तीफे बेंगलुरु स्थित यूआर राव सैटेलाइट सेंटर (URSC) और तिरुवनंतपुरम के विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC) से सामने आए हैं। इस्तीफा देने वालों में वरिष्ठ वैज्ञानिक विक्टर जोसेफ टी भी शामिल हैं। वे VSSC में GSLV Mk-III (LVM3) परियोजना के प्रोजेक्ट डायरेक्टर रह चुके हैं। यही लॉन्च व्हीकल भविष्य के गगनयान मिशन में इस्तेमाल किया जाएगा। निजी स्पेस स्टार्टअप्स की ओर बढ़ रहा रुझान रिपोर्ट्स के मुताबिक, ISRO छोड़ने वाले कई वैज्ञानिक अब निजी अंतरिक्ष कंपनियों से जुड़ रहे हैं। वर्ष 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने और भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 लागू होने के बाद देश में स्पेस स्टार्टअप्स की संख्या तेजी से बढ़ी है। वर्तमान में भारत में 400 से अधिक पंजीकृत स्पेस स्टार्टअप्स कार्यरत हैं, जिनमें अब तक करीब 500 मिलियन डॉलर का निवेश हो चुका है। केवल वर्ष 2025 में ही इस क्षेत्र में लगभग 150 मिलियन डॉलर का निवेश दर्ज किया गया। प्रमुख भारतीय स्पेस स्टार्टअप्स में शामिल हैं— पूर्व ISRO प्रमुख भी स्टार्टअप से जुड़े ISRO के पूर्व चेयरमैन एस. सोमनाथ भी अब चेन्नई स्थित स्पेस स्टार्टअप अग्निकुल कॉसमॉस के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में ऑब्जर्वर के रूप में शामिल हो चुके हैं। उन्होंने जनवरी 2025 तक ISRO का नेतृत्व किया और उनके कार्यकाल में चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता तथा आदित्य-L1 मिशन का प्रक्षेपण हुआ। लगातार दो PSLV मिशन रहे असफल हाल के समय में ISRO को कुछ तकनीकी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा है। इन घटनाओं ने ISRO की भविष्य की परियोजनाओं को लेकर चुनौतियां बढ़ा दी हैं। कई बड़े मिशनों पर जारी है काम चुनौतियों के बावजूद ISRO अपने महत्वाकांक्षी मिशनों पर तेजी से काम कर रहा है। इनमें शामिल हैं— इनमें सबसे महत्वपूर्ण गगनयान मिशन है, जिसके सफल होने पर भारत अपने दम पर इंसानों को अंतरिक्ष भेजने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा। विज्ञान, अंतरिक्ष और तकनीक से जुड़ी ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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विप्रो का Q1 मुनाफा 3,352 करोड़ रुपये, ₹2 प्रति शेयर डिविडेंड का ऐलान; रेवेन्यू अनुमान से रहा कम

नई दिल्ली। आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी विप्रो लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का कॉन्सोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 0.6% बढ़कर 3,352 करोड़ रुपये रहा। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी ने 3,330 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया था। तिमाही नतीजों के साथ कंपनी के बोर्ड ने ₹2 प्रति इक्विटी शेयर के अंतरिम डिविडेंड को भी मंजूरी दी है। रेवेन्यू में 10.6% की बढ़ोतरी, लेकिन अनुमान से कम पहली तिमाही में विप्रो का कॉन्सोलिडेटेड रेवेन्यू बढ़कर 24,479 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 10.6% अधिक है। हालांकि, यह आंकड़ा बाजार विश्लेषकों के अनुमान से थोड़ा कम रहा। रॉयटर्स-LSEG के अनुसार, विश्लेषकों ने कंपनी का रेवेन्यू लगभग 24,776 करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया था। तिमाही आधार (QoQ) पर कंपनी के कुल राजस्व में करीब 1% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। आईटी सर्विसेज कारोबार में मिली-जुली तस्वीर विप्रो के प्रमुख आईटी सर्विसेज बिजनेस का राजस्व 2.61 बिलियन डॉलर रहा। वहीं, कॉन्सटेंट करेंसी के आधार पर आईटी सर्विसेज रेवेन्यू में: बड़ी डील्स में 12.9% की शानदार बढ़ोतरी तिमाही के दौरान कंपनी की कुल बुकिंग 3.37 बिलियन डॉलर रही, जो पिछली तिमाही की तुलना में 2.4% कम है। हालांकि, बड़ी डील्स (Large Deals) की बुकिंग में 12.9% की वृद्धि दर्ज की गई और यह बढ़कर 1.63 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई। इसे कंपनी के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। ऑपरेटिंग मार्जिन और एट्रिशन विप्रो का आईटी सर्विसेज ऑपरेटिंग मार्जिन इस तिमाही में 16% रहा। इस दौरान कंपनी का ऑपरेटिंग कैश फ्लो 3,288 करोड़ रुपये रहा, जो शुद्ध आय (Net Income) का 98% है। वहीं, पिछले 12 महीनों का वॉलंटरी एट्रिशन रेट (स्वेच्छा से नौकरी छोड़ने वाले कर्मचारियों की दर) 13.9% दर्ज किया गया। दूसरी तिमाही के लिए कंपनी का अनुमान जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही के लिए विप्रो ने अपने आईटी सर्विसेज कारोबार का राजस्व 2.57 बिलियन डॉलर से 2.63 बिलियन डॉलर के बीच रहने का अनुमान जताया है। कंपनी के अनुसार, कॉन्सटेंट करेंसी ग्रोथ अगली तिमाही में -1.5% से 0.5% के बीच रह सकती है। क्या है कॉन्सोलिडेटेड रिजल्ट? कंपनियां आमतौर पर दो तरह के वित्तीय परिणाम जारी करती हैं— इसी वजह से निवेशक किसी कंपनी की वास्तविक वित्तीय स्थिति समझने के लिए कॉन्सोलिडेटेड परिणामों को अधिक महत्व देते हैं। कॉन्सटेंट करेंसी क्या होती है? आईटी कंपनियों को अपने विदेशी ग्राहकों से डॉलर, यूरो और अन्य विदेशी मुद्राओं में भुगतान मिलता है। विनिमय दरों (Exchange Rate) में उतार-चढ़ाव से वास्तविक प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में कॉन्सटेंट करेंसी के आधार पर आंकड़े जारी किए जाते हैं, जिसमें मुद्रा विनिमय दर को स्थिर मानकर कंपनी की वास्तविक कारोबारी वृद्धि का आकलन किया जाता है। विप्रो के बारे में विप्रो लिमिटेड भारत की प्रमुख टेक्नोलॉजी सर्विसेज और कंसल्टिंग कंपनियों में शामिल है और दुनिया के 65 देशों में अपनी सेवाएं प्रदान करती है। अजीम प्रेमजी ने वर्ष 1966 में 21 वर्ष की आयु में कंपनी की जिम्मेदारी संभाली थी। उनके नेतृत्व में विप्रो ने वनस्पति तेल के कारोबार से आगे बढ़ते हुए आईटी सेवाओं, सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस और वैश्विक कंसल्टिंग के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाई। बिजनेस, शेयर बाजार और अर्थव्यवस्था से जुड़ी ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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जापान ओपन: पीवी सिंधु क्वार्टर फाइनल में पहुंचीं, चीन की वर्ल्ड नंबर-5 हान यू को सीधे गेम में हराया

नई दिल्ली। भारत की दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधु ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जापान ओपन सुपर-750 बैडमिंटन टूर्नामेंट के क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली है। सिंधु ने दूसरे दौर के मुकाबले में चीन की दुनिया की पांचवें नंबर की खिलाड़ी हान यू को मात्र 35 मिनट में 21-16, 21-14 से हराकर अगले दौर में प्रवेश किया। इस जीत के साथ सिंधु ने हान यू के खिलाफ अपना दबदबा और मजबूत कर लिया है। दोनों खिलाड़ियों के बीच अब तक खेले गए मुकाबलों में सिंधु 8-1 से आगे हैं। अब क्वार्टर फाइनल में उनका सामना जापान की पूर्व विश्व चैंपियन नोजोमी ओकुहारा से होगा। ओकुहारा को दूसरे दौर में वॉकओवर मिलने के कारण बिना खेले ही क्वार्टर फाइनल का टिकट मिला है। इंग्लैंड के खिलाफ मैच के बाद गुरनूर बरार पर ICC की कार्रवाई भारत के तेज गेंदबाज गुरनूर बरार को इंग्लैंड के खिलाफ पहले वनडे में ICC आचार संहिता के उल्लंघन का दोषी पाया गया है। मैच के दौरान फील्डिंग करते समय उन्होंने गेंद बल्लेबाज की ओर खतरनाक तरीके से फेंकी थी, जिसके बाद अंपायरों ने इसकी शिकायत दर्ज की। बरार ने अपनी गलती स्वीकार कर ली, जिसके चलते औपचारिक सुनवाई की आवश्यकता नहीं पड़ी। ICC ने उन्हें लेवल-1 उल्लंघन का दोषी मानते हुए एक डिमेरिट पॉइंट और आधिकारिक चेतावनी दी है। निकोलस पूरन का तूफानी शतक, 31 गेंदों में पूरा किया सैकड़ा मेजर लीग क्रिकेट (MLC) में वेस्टइंडीज के विस्फोटक बल्लेबाज निकोलस पूरन ने इतिहास रचते हुए महज 31 गेंदों में शतक जड़ दिया। MI न्यूयॉर्क की ओर से खेलते हुए उन्होंने वॉशिंगटन फ्रीडम के खिलाफ 5 चौके और 13 छक्कों की मदद से शानदार पारी खेली। उनकी धमाकेदार बल्लेबाजी की बदौलत टीम ने 266 रन का विशाल लक्ष्य खड़ा किया। लॉस एंजिलिस नाइट राइडर्स पहली बार MLC फाइनल में मेजर लीग क्रिकेट के दूसरे मुकाबले में लॉस एंजिलिस नाइट राइडर्स ने सैन फ्रांसिस्को यूनिकॉर्न्स को 7 रन से हराकर पहली बार टूर्नामेंट के फाइनल में जगह बनाई। पहले बल्लेबाजी करते हुए नाइट राइडर्स ने 20 ओवर में 187/3 का स्कोर बनाया। जवाब में सैन फ्रांसिस्को की टीम 180/4 ही बना सकी। अब फाइनल मुकाबला 19 जुलाई को ऑकलैंड में खेला जाएगा। स्टेफानी टेलर के लगातार दूसरे शतक से वेस्टइंडीज ने किया क्लीन स्वीप वेस्टइंडीज महिला टीम ने तीसरे वनडे में आयरलैंड को 64 रन से हराकर तीन मैचों की सीरीज 3-0 से अपने नाम कर ली। टीम की कप्तान स्टेफानी टेलर ने लगातार दूसरे मैच में शतक लगाते हुए 105 रन की शानदार पारी खेली। उनकी बदौलत वेस्टइंडीज ने 257 रन का चुनौतीपूर्ण स्कोर बनाया। जवाब में आयरलैंड की पूरी टीम 193 रन पर सिमट गई। गेंदबाजी में भी रहा वेस्टइंडीज का दबदबा स्टेफानी टेलर ने इस पारी के दौरान अपने वनडे करियर का 10वां शतक भी पूरा किया। साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 10,000 रन का ऐतिहासिक आंकड़ा भी पार कर लिया। खेल जगत की ताजा खबरें, लाइव अपडेट और एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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चलती कार में लगी भीषण आग, धमाके से मची अफरा-तफरी; चालक ने कूदकर बचाई जान

ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में बुधवार देर रात गोला का मंदिर थाना क्षेत्र स्थित सूर्य मंदिर रोड पर एक चलती कार में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने पूरी कार को अपनी चपेट में ले लिया। कुछ देर बाद कार में जोरदार धमाका होने से आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। घटना के चलते कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा। चालक ने समय रहते कूदकर बचाई जान प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कार से धुआं उठता देख चालक ने तुरंत वाहन सड़क किनारे रोक दिया और बाहर निकल गया। चालक के सुरक्षित बाहर आने के कुछ ही क्षण बाद आग ने पूरी कार को अपनी गिरफ्त में ले लिया और वाहन धू-धूकर जलने लगा। चालक की सतर्कता के कारण बड़ा हादसा टल गया और किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। मौके पर पहुंची पुलिस और फायर ब्रिगेड घटना की सूचना मिलते ही गोला का मंदिर थाना पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची। दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक कार पूरी तरह जल चुकी थी। शॉर्ट सर्किट या तकनीकी खराबी की आशंका पुलिस की प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट या वाहन में तकनीकी खराबी माना जा रहा है। हालांकि, आग लगने की वास्तविक वजह का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा। जली हुई कार का पंजीयन नंबर MP-07-TH-1239 है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह वाहन ऋषभ राजपूत के नाम पर पंजीकृत बताया जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो घटना का वीडियो मौके पर मौजूद लोगों ने अपने मोबाइल फोन से रिकॉर्ड कर लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कार आग की लपटों में घिरी हुई दिखाई दे रही है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आग लगने के कारणों का पता लगाया जा रहा है। deshharpal.comमध्य प्रदेश और देश की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:
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भोपाल के 45 से अधिक इलाकों में आज बिजली कटौती, 1 से 6 घंटे तक प्रभावित रहेगी सप्लाई

भोपाल। राजधानी भोपाल के 45 से अधिक इलाकों में गुरुवार को बिजली कंपनी के निर्धारित मेंटेनेंस कार्य के चलते 1 से 6 घंटे तक बिजली आपूर्ति प्रभावित रहेगी। बिजली कंपनी ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अपने आवश्यक बिजली संबंधी कार्य पहले ही पूरे कर लें, ताकि असुविधा से बचा जा सके। कटौती से दानिशकुंज, बावड़ियाकलां, सर्वधर्म, चार इमली, नरेला शंकरी, फाइन कैंपस, भवानी धाम समेत कई प्रमुख इलाके प्रभावित होंगे। किस समय किन क्षेत्रों में रहेगी बिजली बंद? सुबह 9:00 बजे से 11:00 बजे तक सुबह 10:00 बजे से 11:00 बजे तक सुबह 10:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक सुबह 10:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक सुबह 10:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक सुबह 10:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक सुबह 11:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक बिजली कंपनी की अपील बिजली कंपनी ने बताया कि यह कटौती रखरखाव (मेंटेनेंस) कार्य के कारण की जा रही है। उपभोक्ताओं से अनुरोध है कि निर्धारित समय के अनुसार अपने जरूरी कार्य पहले ही पूरा कर लें। मौसम या तकनीकी कारणों से बिजली कटौती के समय में बदलाव भी संभव है। भोपाल, मध्य प्रदेश और देश की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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Meerut

Meerut Murder Case: सांप के काटने का नाटक पड़ा भारी, रविता को Death Penalty

उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut) में पति की हत्या को सांप के काटने से हुई मौत दिखाने के चर्चित मामले में अदालत ने रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को मौत की सजा सुनाई है। इस मामले ने उस समय सबको चौंका दिया था, जब शुरुआत में अमित कश्यप की मौत को सर्पदंश माना जा रहा था। लेकिन जांच आगे बढ़ी तो कहानी कुछ और ही निकली। पुलिस की जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और दूसरे सबूतों के आधार पर मामले की परतें खुलती चली गईं। अदालत के फैसले के बाद मेरठ का यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। Meerut Murder Case: क्या है पूरा मामला? यह मामला मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के अकबरपुर सादात गांव का है। यहां रहने वाले अमित कश्यप उर्फ मिक्की की अप्रैल 2025 में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। उनका शव घर में बिस्तर पर मिला था। शुरुआती तौर पर मौत की वजह सांप का काटना मानी गई। हालांकि, मामले की जांच के दौरान कुछ ऐसे तथ्य सामने आए, जिनसे पुलिस को शक हुआ। इसके बाद घटना की गहराई से जांच शुरू की गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह दम घुटना सामने आने के बाद पुलिस ने हत्या के एंगल से जांच आगे बढ़ाई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से बदली जांच की दिशा अमित की मौत के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट अहम साबित हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी मौत सर्पदंश से नहीं, बल्कि दम घुटने से हुई थी। इसके बाद पुलिस ने घटना से जुड़े लोगों और परिस्थितियों की जांच की। जांच में अमित की पत्नी रविता और अमरदीप की भूमिका सामने आई। अभियोजन पक्ष ने अदालत में मामले से जुड़े सबूत और गवाहों के बयान पेश किए। इन्हीं तथ्यों के आधार पर अदालत ने दोनों को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई। रविता और अमरदीप को Death Penalty अदालत के फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। पति की मौत को सांप के काटने की घटना दिखाने के आरोपों से शुरू हुई जांच हत्या के मामले तक पहुंची। इस पूरे घटनाक्रम में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की जांच ने अहम भूमिका निभाई। ऐसे मामलों में फॉरेंसिक जांच, गवाहों के बयान और अन्य सबूत यह समझने में मदद करते हैं कि घटना के पीछे की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं। मेरठ में तीन दिन में चार दोषियों को फांसी की सजा की चर्चा मेरठ में हाल के दिनों में दो चर्चित हत्याकांडों में मृत्युदंड सुनाए जाने की वजह से भी चर्चा तेज हुई है। अमित कश्यप हत्याकांड के अलावा सौरभ राजपूत हत्याकांड भी सुर्खियों में रहा। सौरभ की हत्या के मामले में उसकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को भी अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी। दोनों मामलों की घटनाएं अलग-अलग हैं, लेकिन इन फैसलों ने हत्या के मामलों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर लोगों का ध्यान खींचा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

ग्वालियर के वेंकटेश्वर अपार्टमेंट में युवक का शव मिला, रजिस्टर में युवती का जिक्र; पुलिस जांच में जुटी

ग्वालियर: शहर के सिटी सेंटर स्थित वेंकटेश्वर अपार्टमेंट में गुरुवार देर रात एक युवक का शव फ्लैट के कमरे में पंखे से लटका मिला। मृतक की पहचान अंबाह निवासी संतोष शर्मा के रूप में हुई है। वह ग्वालियर की एक बीमा कंपनी में नौकरी करता था। सूचना मिलने पर विश्वविद्यालय थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। घटनास्थल से मिले एक रजिस्टर में युवती का जिक्र करते हुए कुछ पंक्तियां लिखी मिली हैं। इनमें संतोष ने युवती के साथ काफी समय बिताने और उसे अच्छा बताने की बात लिखी है। साथ ही, अपनी मौत के लिए उसे जिम्मेदार नहीं ठहराने का भी उल्लेख किया है। पुलिस इन पंक्तियों समेत सभी साक्ष्यों की जांच कर रही है। बी-ब्लॉक के जी-8 फ्लैट में मिला शव घटना वेंकटेश्वर अपार्टमेंट के बी-ब्लॉक स्थित जी-8 फ्लैट की है। गुरुवार रात करीब 11 बजे पुलिस को युवक का शव कमरे में पंखे से लटका होने की सूचना मिली। इसके बाद विश्वविद्यालय थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए। मामले की जांच के लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. कोक सिंह को भी बुलाया गया। पुलिस ने मृतक का मोबाइल फोन कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। कॉल रिकॉर्ड और चैट हिस्ट्री की पड़ताल के जरिए घटना से जुड़े तथ्यों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। युवती के साथ फ्लैट में रहने की जानकारी पुलिस के अनुसार, जिस फ्लैट में संतोष का शव मिला, वह एक युवती ने किराए पर लिया था। अपार्टमेंट में रहने वाले लोगों ने पुलिस को बताया कि युवती संतोष के साथ इसी फ्लैट में रहती थी। पुलिस ने युवती से संपर्क किया तो उसने बताया कि वह पीएचडी के काम से बाहर गई हुई है। फिलहाल पुलिस संतोष और युवती के बीच संबंधों तथा घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। ऑनलाइन गेमिंग की आदत की भी पड़ताल शुरुआती जानकारी में संतोष के ऑनलाइन गेमिंग में सक्रिय रहने की बात सामने आई है। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या ऑनलाइन गेमिंग में पैसों के लेनदेन या किसी अन्य कारण से वह तनाव में था। हालांकि, फिलहाल इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि संतोष को गेमिंग में बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ था, उस पर कर्ज था या उसकी मौत का संबंध ऑनलाइन गेमिंग से था। पुलिस सभी पहलुओं की कर रही जांच विश्वविद्यालय थाना प्रभारी रविंद्र जाटव के मुताबिक, पुलिस मामले की हर संभावित पहलू से जांच कर रही है। घटनास्थल से मिले रजिस्टर, मोबाइल फोन और अन्य साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। संबंधित लोगों से पूछताछ के आधार पर भी जानकारी जुटाई जा रही है। फिलहाल युवक की मौत के पीछे किसी एक कारण की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस जांच पूरी होने और साक्ष्य सामने आने के बाद ही घटना की परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।
Dharmendra Pradhan

Dharmendra Pradhan on CJP: राहुल गांधी पर सवाल, Regime Change को लेकर सियासत तेज

दिल्ली में CJP के विरोध प्रदर्शन को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग से शुरू हुआ यह विवाद अब राहुल गांधी, कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गया है। धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) समेत बीजेपी के नेताओं ने आंदोलन को लेकर विपक्ष की मंशा पर सवाल उठाए हैं। वहीं, प्रदर्शन से जुड़े नेताओं का कहना है कि उनकी लड़ाई चुनावी पारदर्शिता और चुनाव आयोग की जवाबदेही को लेकर है। विवाद तब और बढ़ गया, जब आंदोलन को बांग्लादेश में हुए राजनीतिक बदलाव और ‘Regime Change’ यानी सत्ता परिवर्तन की बहस से जोड़कर देखा जाने लगा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि CJP का प्रदर्शन अब केवल चुनाव सुधार तक सीमित है या इसके राजनीतिक मायने भी हैं? धर्मेंद्र प्रधान ने राहुल गांधी और CJP पर क्यों साधा निशाना? CJP के आंदोलन को लेकर बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस और राहुल गांधी की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। बीजेपी का आरोप है कि विपक्ष चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को उठाकर केंद्र सरकार के खिलाफ राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। Dharmendra Pradhan के बयान को भी इसी राजनीतिक टकराव के संदर्भ में देखा जा रहा है। बीजेपी नेताओं ने आंदोलन और बांग्लादेश के राजनीतिक घटनाक्रम के बीच समानताएं बताते हुए विपक्ष की रणनीति पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, ये राजनीतिक आरोप हैं। बांग्लादेश जैसे घटनाक्रम को भारत में दोहराने की किसी कथित योजना को स्थापित तथ्य के रूप में पेश नहीं किया जा सकता। ‘Regime Change’ बयान से क्यों शुरू हुई नई बहस? CJP आंदोलन के दौरान सत्ता परिवर्तन को लेकर दिए गए बयानों ने विवाद को नया मोड़ दिया। आंदोलन से जुड़े कुछ नेताओं की टिप्पणियों को बीजेपी ने सरकार बदलने की मंशा से जोड़कर देखा। दूसरी ओर, CJP की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग उठाई गई है। यही वजह है कि अब इस आंदोलन को लेकर दो अलग-अलग दावे सामने हैं। बीजेपी इसे राजनीतिक अभियान बता रही है, जबकि आंदोलनकारी पक्ष चुनाव आयोग की जवाबदेही का मुद्दा उठा रहा है। इन बयानों के बीच किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए संबंधित नेताओं के पूरे वक्तव्य और उपलब्ध तथ्यों को देखना जरूरी है। राहुल गांधी ने CJP आंदोलन को लेकर क्या रुख अपनाया? कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रदर्शन से जुड़े नेताओं की गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थन में बयान दिया था। उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन और तिरंगा फहराने के अधिकार का मुद्दा उठाया। राहुल गांधी और कांग्रेस लगातार चुनावी प्रक्रिया तथा मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। वहीं, बीजेपी का कहना है कि विपक्ष इन मुद्दों का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए कर रहा है। इस तरह CJP आंदोलन को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच टकराव बढ़ता दिखाई दे रहा है। एक तरफ चुनावी पारदर्शिता की मांग है, तो दूसरी तरफ आंदोलन के राजनीतिक उद्देश्य पर सवाल उठाए जा रहे हैं। SIR विवाद क्या है और चुनाव आयोग पर क्यों उठ रहे सवाल? इस पूरे विवाद के केंद्र में मतदाता सूची का Special Intensive Revision यानी SIR भी है। यह मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा की प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य सूची को अपडेट करना और पात्र मतदाताओं का विवरण सही रखना है। विपक्ष ने इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठाए हैं। कुछ रिपोर्टों और राजनीतिक बयानों में 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने का दावा भी चर्चा में रहा है। हालांकि, ऐसे आंकड़ों को संबंधित राज्यों के आधिकारिक आंकड़ों और चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के आधार पर समझना जरूरी है। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि किसी पात्र मतदाता का नाम न छूटे। दूसरी ओर, चुनाव आयोग की प्रक्रिया और उसके फैसलों को लेकर उठाए गए राजनीतिक आरोपों का आकलन तथ्यों के आधार पर किया जाना चाहिए। Delhi CJP Protest: तिरंगा मार्च और सुरक्षा व्यवस्था पर नजर दिल्ली में CJP के प्रस्तावित तिरंगा मार्च को लेकर भी विवाद सामने आया। प्रदर्शनकारियों की योजना कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा फहराने की थी। प्रशासन ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था में बदलाव किए। प्रदर्शन स्थल, नेताओं की हिरासत और मार्च की अनुमति को लेकर भी सवाल उठे। इस बीच, अदालत में प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग से जुड़ा मामला भी चर्चा में रहा। अदालत की टिप्पणियों और पुलिस के आश्वासनों को पूरे संदर्भ में समझना जरूरी है; इन्हें प्रदर्शन के हर पहलू पर अंतिम फैसला नहीं माना जाना चाहिए। तिरंगा मार्च को लेकर विवाद ने एक बार फिर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी के बीच संतुलन का सवाल खड़ा किया है। CJP Protest पर आगे क्या होगा? फिलहाल CJP आंदोलन के साथ तीन बड़े मुद्दे जुड़े हुए हैं—SIR के तहत मतदाता सूची में बदलाव, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग और ‘Regime Change’ को लेकर बीजेपी तथा विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप। आने वाले दिनों में चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया, आंदोलनकारियों की अगली रणनीति और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर नजर रहेगी। यह भी देखना होगा कि राजनीतिक दल चुनावी पारदर्शिता से जुड़े सवालों पर किस तरह अपनी बात रखते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
अभिजीत दिपके

CJP Tiranga March: अभिजीत दिपके के घर पहुंची दिल्ली पुलिस, कनॉट प्लेस में 25 हजार जवान तैनात

दिल्ली में आज, 16 अक्टूबर को CJP के ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को लेकर माहौल गर्म है। मार्च से पहले दिल्ली पुलिस अभिजीत दिपके के घर पहुंची। वहीं, कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इलाके में करीब 25 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की तैयारी है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच अब सबकी नजर इस बात पर है कि CJP का प्रस्तावित मार्च आगे किस तरह बढ़ता है। अभिजीत दिपके के घर पहुंची दिल्ली पुलिस CJP के प्रस्तावित मार्च से पहले दिल्ली पुलिस की टीम अभिजीत दिपके के घर पहुंची। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने उन्हें मार्च को लेकर नोटिस दिया। संगठन की ओर से इस कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। CJP का कहना है कि वह अपने नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में तिरंगा मार्च निकालना चाहता है। हालांकि, दिल्ली में लागू प्रतिबंधों और सुरक्षा व्यवस्था के चलते कार्यक्रम को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। Connaught Place में कड़ी सुरक्षा, 25 हजार जवान तैनात ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को देखते हुए कनॉट प्लेस और आसपास के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। रिपोर्ट्स में करीब 25 हजार पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों की तैनाती का जिक्र है। सेंट्रल पार्क और आसपास के प्रमुख स्थानों पर भी निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबंधात्मक कदम उठाए हैं। सेंट्रल पार्क को 16 और 17 अक्टूबर को बंद रखने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे में कनॉट प्लेस आने-जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। क्यों हो रहा है CJP का ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च? CJP ने इस मार्च का ऐलान अपने नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के विरोध में किया है। संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठा रहा है। 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान CJP समर्थकों ने बैरिकेडिंग पार कर नारेबाजी की थी। इसके बाद पुलिस ने संगठन के कुछ नेताओं को हिरासत में लिया। इसी कार्रवाई के विरोध में CJP ने तिरंगा मार्च निकालने की घोषणा की। SIR विवाद ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल इस पूरे विवाद के पीछे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) का मुद्दा भी है। CJP और कुछ विपक्षी समूहों ने मतदाता सूची में बदलावों को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया से मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। वहीं, चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची को लेकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत काम किए जाने की बात कही जाती रही है। SIR को लेकर राजनीतिक बहस लगातार जारी है और अब यह विवाद सड़कों पर हो रहे प्रदर्शनों तक पहुंच गया है। दिल्ली में Traffic Advisory, लोगों को सतर्क रहने की सलाह मार्च के चलते कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में ट्रैफिक प्रभावित होने की आशंका है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे घर से निकलने से पहले यातायात संबंधी अपडेट देख लें और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करें। दिल्ली पुलिस की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, जबकि CJP अपने विरोध प्रदर्शन को लेकर आगे बढ़ना चाहता है। ऐसे में शुक्रवार शाम का घटनाक्रम महत्वपूर्ण रहने वाला है। अब आगे क्या होगा? CJP के ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को लेकर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था सख्त है। एक तरफ संगठन अपने नेताओं की गिरफ्तारी और SIR के मुद्दे पर विरोध दर्ज कराना चाहता है, तो दूसरी तरफ प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबंध लागू कर रहा है। अब देखना होगा कि पुलिस की पाबंदियों के बीच मार्च को लेकर क्या स्थिति बनती है और CJP आगे क्या कदम उठाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Supreme Court

Supreme Court on CJP Protest: प्रदर्शन पर रोक से इनकार, ₹200 करोड़ के कारोबार पर असर का दावा

दिल्ली में CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई के दौरान प्रदर्शन के अधिकार और व्यापारियों की रोजी-रोटी का मुद्दा चर्चा में रहा। अदालत ने फिलहाल प्रदर्शन रोकने का आदेश देने से इनकार कर दिया। वहीं, व्यापारियों की ओर से दावा किया गया कि प्रदर्शन और उससे जुड़ी पाबंदियों के कारण रोजाना करीब ₹200 करोड़ के कारोबार पर असर पड़ सकता है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के सामने यह मामला रखा गया। याचिकाकर्ताओं ने दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क और आसपास के बाजारों में कारोबार प्रभावित होने की आशंका जताई। उनका कहना था कि बाजारों में लोगों की आवाजाही बाधित होने से छोटे दुकानदारों और दूसरे कारोबारियों को परेशानी हो सकती है। CJI की टिप्पणी: किसी के लिए प्रदर्शन, किसी के लिए मूंगफली बेचना जरूरी सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रदर्शन के अधिकार और आम लोगों की आजीविका के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने टिप्पणी की कि किसी व्यक्ति के लिए प्रदर्शन करना जरूरी हो सकता है, जबकि किसी दूसरे के लिए मूंगफली बेचकर अपना परिवार चलाना महत्वपूर्ण है। CJI सूर्यकांत ने भी छोटे व्यापारियों की आर्थिक स्थिति का जिक्र किया। त्योहारों के समय दुकानदारों की कमाई बढ़ने की उम्मीद रहती है। ऐसे में यदि बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो इसका असर उनकी रोजाना की आमदनी पर पड़ सकता है। अदालत की टिप्पणियों से साफ है कि इस मामले में केवल प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि आम लोगों की आजीविका और कानून-व्यवस्था से जुड़े पहलुओं पर भी विचार किया जा रहा है। Delhi Business Loss: रोजाना ₹200 करोड़ के नुकसान का दावा व्यापारियों की ओर से अदालत में दलील दी गई कि कनॉट प्लेस और आसपास के व्यावसायिक इलाकों में प्रदर्शन के कारण रोजाना करीब ₹200 करोड़ के कारोबार पर असर पड़ सकता है। इसका प्रभाव बड़े कारोबारियों के साथ-साथ छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों, कर्मचारियों और दिहाड़ी मजदूरों पर भी पड़ सकता है। बाजार में ग्राहकों की संख्या कम होने या आवाजाही प्रभावित होने से उनकी कमाई पर असर पड़ने की आशंका जताई गई। हालांकि, ₹200 करोड़ का आंकड़ा व्यापारियों की ओर से पेश किया गया दावा है। इसे वास्तविक नुकसान का प्रमाणित आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए। Central Park को बंद करने का मुद्दा भी उठा सुनवाई के दौरान कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क को बंद करने से जुड़े प्रशासनिक फैसले का मुद्दा भी उठाया गया। याचिकाकर्ताओं ने आशंका जताई कि इस कदम से आसपास के बाजारों और व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। अदालत ने संकेत दिया कि यदि किसी प्रतिबंध के कारण कारोबार या लोगों की आजीविका को अनुचित नुकसान पहुंचता है, तो उचित राहत देने के सवाल पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, तत्काल सुनवाई में प्रदर्शन पर रोक लगाने का कोई आदेश जारी नहीं किया गया। CJP Protest: क्यों किया गया प्रदर्शन का ऐलान? CJP ने 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च और प्रदर्शन का आह्वान किया था। पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के विरोध में यह कदम उठाने की बात कही थी। प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था, बाजारों में आवाजाही और कारोबार पर संभावित असर को लेकर चिंता जताई गई। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट में भी प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की गई थी। हाईकोर्ट ने रोक लगाने से इनकार किया था, जबकि दिल्ली पुलिस ने कानून के अनुसार जरूरी कदम उठाने की बात कही थी। Supreme Court Hearing: अब आगे क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट ने मामले को तत्काल आदेश के जरिए निपटाने के बजाय दशहरा अवकाश के बाद 26 या 27 अक्टूबर को सूचीबद्ध किए जाने का संकेत दिया। फिलहाल, प्रदर्शन पर रोक लगाने का आदेश नहीं दिया गया है। आगे की सुनवाई में प्रदर्शन के अधिकार, सार्वजनिक व्यवस्था और व्यापारियों की आजीविका से जुड़े पहलुओं पर चर्चा महत्वपूर्ण रहेगी। इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि विरोध दर्ज कराने के अधिकार और आम लोगों की रोजी-रोटी के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। अदालत की अगली सुनवाई से इस मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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