राजधानी भोपाल में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम बुरी तरह प्रभावित हो गया है। पिछले एक साल में ढाई सौ से ज्यादा सिटी बसें बंद हो चुकी हैं। फिलहाल 25 रूट में से सिर्फ 95 बसें ही सड़कों पर दौड़ रही हैं। करीब 1 लाख यात्रियों को रोजाना परेशानी झेलनी पड़ रही है। इसी बीच नगर निगम का दावा है कि नए साल से 100 ई-बसें सड़कों पर उतरेंगी, जिससे आम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
ई-बस सेवा की तैयारी
- पीएम ई-बस सेवा के फेस-1 में 100 ई-बसें मिलेंगी।
- इनके लिए संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) और कस्तूरबा नगर में नए डिपो बनाए जा रहे हैं।
- नए ऑपरेटर का चयन हो चुका है।
- फेस-2 में 95 और ई-बसें आएंगी, जिनके लिए आरिफ नगर और कोलार रोड पर डिपो बनेंगे।
जिला विकास समिति की बैठक में उठा मुद्दा
मंगलवार को हुई जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में बसों की बदहाल स्थिति पर चर्चा हुई। सांसद आलोक शर्मा ने निगम कमिश्नर से सवाल किया कि आखिर 368 में से सिर्फ 95 बसें ही क्यों चल रही हैं? जबकि पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत करने की ज़रूरत है। विधायक भगवानदास सबनानी ने भी इस पर सहमति जताई।
सांसद बोले – “पब्लिक ट्रांसपोर्ट मजबूत होना चाहिए”
सांसद शर्मा ने कहा कि भोपाल का पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम मज़बूत होना चाहिए। उन्होंने बताया कि जब वे महापौर थे तो छात्रों, महिलाओं, दिव्यांगजन, सीनियर सिटीजन और कर्मचारियों को महापौर स्मार्ट पास की सुविधा दी गई थी। अगर यह योजना फिर से शुरू की जाती है तो आम जनता को बड़ा लाभ मिलेगा।
क्यों बंद हुईं बसें?
- टिकट कलेक्शन पर विवाद और पेनल्टी मामले।
- हाईकोर्ट में दायर याचिकाओं के चलते ऑपरेटर्स ने संचालन बंद किया।
- 4 एजेंसियों (मां एसोसिएट्स, एपी मोटर्स, श्री दुर्गांबा, आई-मोबिलिटी) ने बीसीएलएल के जरिए बसें चलाईं, लेकिन धीरे-धीरे सभी पीछे हट गईं।
- सबसे पहले 4 जुलाई 2024 को मां एसोसिएट्स ने 149 बसों का संचालन बंद किया।
- ‘चलो एप’ द्वारा प्रति किमी भुगतान घटाने की मांग विवाद का कारण बनी।
कितनी बसें चाहिए भोपाल को?
एक सर्वे के मुताबिक, भोपाल में 800 बसें होनी चाहिए ताकि पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम सुचारू रूप से चल सके। लेकिन वास्तविकता इसके उलट है – शहर में बसों की संख्या लगातार घट रही है और आम यात्री परेशानी झेल रहे हैं।
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