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Iran पर बड़े हमले की तैयारी में America? Trump बोले- फैसला अभी बाकी

Iran पर बड़े हमले की तैयारी में America? Trump बोले- फैसला अभी बाकी

America और Iran के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने संकेत दिए हैं कि ईरान के खिलाफ बड़ी सैन्य कार्रवाई पर विचार किया जा रहा है। हालांकि उन्होंने साफ कहा कि अंतिम फैसला अभी नहीं लिया गया है। ट्रम्प के इस बयान के बाद ईरान ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरान का कहना है कि अगर अमेरिका ने हमला किया, तो उसे इसकी “बहुत भारी कीमत” चुकानी पड़ेगी। ईरान ने चेतावनी दी कि वह अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा। क्या बोले ट्रम्प? मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रम्प ने कहा कि ईरान को लेकर सभी विकल्प खुले हैं। उन्होंने कहा कि अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। उनके बयान से यह संकेत मिला कि अमेरिका किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। ईरान का कड़ा जवाब ट्रम्प के बयान के कुछ ही समय बाद ईरान ने सख्त लहजे में प्रतिक्रिया दी। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि यदि अमेरिका ने किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई की, तो उसका जवाब पूरी ताकत से दिया जाएगा। ईरान ने यह भी कहा कि युद्ध किसी के हित में नहीं है, लेकिन देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। दुनिया की बढ़ी चिंता अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। जानकारों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव होता है, तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। इससे वैश्विक सुरक्षा, कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी बड़ा प्रभाव पड़ सकता है। क्या आगे होगा? फिलहाल दुनिया की नजर अमेरिका के अगले कदम और ईरान की रणनीति पर टिकी हुई है। यदि दोनों देशों के बीच बातचीत का रास्ता निकलता है तो तनाव कम हो सकता है, लेकिन सैन्य कार्रवाई की स्थिति में हालात और गंभीर हो सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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जबलपुर में साले ने जीजा को मारा चाकू:पीठ में जाकर धंसा, अस्पताल पहुंचा घायल;डॉक्टर ने ऑपरेशन कर निकाला बाहर, आरोपी फरार

शहर में रिश्तों को शर्मसार करने वाली वारदात सामने आई है। 28 वर्षीय युवक पर उसके ही सगे साले ने चाकू से जानलेवा हमला कर दिया। चाकू युवक की पीठ में धंस गया, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और पीठ में धंसे चाकू के साथ घायल को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां ऑपरेशन कर डॉक्टरों ने चाकू निकालकर उसकी जान बचाई। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। रास्ते में रोका, फिर चाकू से किया हमला लॉर्डगंज थाना क्षेत्र के यादव कॉलोनी से आगे कछपुरा ओवरब्रिज के पास गुरुवार रात शिवनगर निवासी संतोष ठाकुर बाइक से घर लौट रहे थे। इसी दौरान उनके सगे साले पीयूष ने उन्हें रास्ते में रोक लिया। दोनों के बीच पहले कहासुनी और गाली-गलौज हुई। विवाद बढ़ने पर पीयूष ने चाकू निकालकर संतोष की पीठ पर वार कर दिया। हमला इतना जोरदार था कि चाकू पीठ में ही फंस गया। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। पुलिस ने तत्काल अस्पताल पहुंचाया घटना के बाद राहगीरों ने पुलिस को सूचना दी। लॉर्डगंज थाना पुलिस मौके पर पहुंची तो संतोष गंभीर रूप से घायल थे और उनकी पीठ में चाकू धंसा हुआ था। लगातार खून बह रहा था। पुलिस ने बिना देर किए घायल को जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर चाकू निकाल दिया। चिकित्सकों के अनुसार फिलहाल घायल की हालत खतरे से बाहर है। परिवारिक विवाद बनी वजह पुलिस के मुताबिक संतोष ठाकुर शिवनगर के निवासी हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि किसी पारिवारिक विवाद को लेकर साले और जीजा के बीच कहासुनी हुई थी, जिसके बाद पीयूष ने हमला कर दिया। आरोपी की तलाश जारी लॉर्डगंज थाना पुलिस ने घायल की शिकायत पर आरोपी पीयूष के खिलाफ हत्या के प्रयास सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस संभावित ठिकानों पर दबिश देकर आरोपी की तलाश कर रही है। जबलपुर में एक 28 वर्षीय युवक को उसके ही सगे साले ने चाकू से हमला कर गंभीर घायल कर दिया। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी तो मौके से फरार हो गया, पर घायल ने हिम्मत नहीं हारी और पीठ में फंसे चाकू के साथ थाने पहुंचा, जिसे पुलिस फौरन इलाज के लिए जिला अस्पताल लेकर आई, जहां आपरेशन के बाद उसके शरीर से डाक्टरों की टीम ने चाकू निकालकर उसकी जान बचाई। इधर पुलिस ने घायल की शिकायत पर हमलावर के खिलाफ मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है।
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जबलपुर में NSUI और कांग्रेस का प्रदर्शन, वाटर कैनन से खदेड़े गए कार्यकर्ता

दिल्ली में चल रहे छात्र आंदोलन के समर्थन में जबलपुर में भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर NSUI ने सांकेतिक अर्थी यात्रा निकाली, जबकि शाम को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मालवीय चौक पर प्रदर्शन कर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। दोनों प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई तथा स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। अर्थी यात्रा को पुलिस ने रोका NSUI कार्यकर्ताओं की अर्थी यात्रा सिविल लाइन स्थित साईं मंदिर से शुरू होकर महाकौशल महाविद्यालय की ओर बढ़ रही थी। पुलिस ने सिविल लाइन क्षेत्र में उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि दिल्ली में 21 दिनों से आंदोलन कर रहे छात्रों की मांगों को सरकार नजरअंदाज कर रही है और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों पर बल प्रयोग किया जा रहा है। 48 घंटे में इस्तीफे की मांग NSUI ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि 48 घंटे के भीतर इस्तीफा नहीं दिया गया तो NSUI, यूथ कांग्रेस और अन्य सहयोगी संगठन और बड़ा आंदोलन करेंगे। मालवीय चौक पर कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन शाम को मालवीय चौक पर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान शिक्षा मंत्री के विरोध में पोस्टर जलाने की कोशिश की गई, जिसे रोकने के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हो गई। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने दो बार वाटर कैनन चलाकर प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर किया। इस दौरान कुछ कार्यकर्ता मशाल लेकर अंजुमन स्कूल की ओर बढ़े, जबकि अन्य मालवीय चौक पर दोबारा एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन करते रहे। कांग्रेस ने सरकार पर लगाए आरोप कांग्रेस नेता सौरभ नाटी शर्मा ने आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज दबाने के लिए सरकार दमनात्मक रवैया अपना रही है। उन्होंने कहा कि छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है तथा शिक्षा मंत्री को बचाने के लिए सरकार विपक्ष की आवाज दबा रही है। काफी देर तक चले हंगामे के बाद पुलिस ने स्थिति पर नियंत्रण पाया, हालांकि देर रात तक प्रदर्शन जारी रहा। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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बिलासपुर के राजेश सोंथालिया बने भारत स्काउट्स एवं गाइड्स छत्तीसगढ़ के सहायक राज्य आयुक्त

बिलासपुर के वरिष्ठ स्काउटर राजेश सोंथालिया को भारत स्काउट्स एवं गाइड्स, छत्तीसगढ़ राज्य संघ का सहायक राज्य आयुक्त (Assistant State Commissioner) नियुक्त किया गया है। इस संबंध में राज्य मुख्य आयुक्त इंदरजीत सिंह खालसा ने सोमवार को नियुक्ति आदेश जारी किया। राजेश सोंथालिया की नियुक्ति राज्य के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव की अनुशंसा पर की गई है। स्काउट आंदोलन में उनकी वर्षों की सक्रिय भागीदारी, संगठनात्मक क्षमता और सेवा भावना को देखते हुए उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। निभाएंगे अहम जिम्मेदारी सहायक राज्य आयुक्त के रूप में राजेश सोंथालिया अब प्रदेशभर में स्काउट गतिविधियों के संचालन, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, संगठन के विस्तार और युवा नेतृत्व को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। सामाजिक कार्यों में रहा उल्लेखनीय योगदान राजेश सोंथालिया शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण और सामाजिक सरोकारों से जुड़े कई कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि उनके नेतृत्व में प्रदेश में स्काउट आंदोलन को नई ऊर्जा और नई दिशा मिलेगी। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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जंतर-मंतर पर CJP का प्रदर्शन जारी, अभिजीत दीपके बोले- अब सरकार खुद बातचीत के लिए आए

दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन मंगलवार को भी जारी रहा। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अभिजीत दीपके ने साफ कहा कि अब उनकी ओर से कोई प्रतिनिधि सरकार से बातचीत के लिए नहीं जाएगा। यदि सरकार बातचीत चाहती है तो उसे खुद जंतर-मंतर आना होगा। अभिजीत दीपके ने संसद मार्च के दौरान घायल हुए प्रदर्शनकारियों से माफी भी मांगी और कहा कि जिन लोगों को कानूनी सहायता की जरूरत है, वे CJP की लीगल टीम से संपर्क करें। सभी प्रभावित लोगों को हरसंभव मदद उपलब्ध कराई जाएगी। इस बीच दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के अनुसार उनमें खून की कमी के लक्षण हैं, लेकिन उनका अनशन 24वें दिन भी जारी है। विपक्षी नेताओं ने जताया समर्थन मंगलवार को जंतर-मंतर पर कई विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेता आंदोलन के समर्थन में पहुंचे। इनमें उद्धव ठाकरे, अखिलेश यादव, शरद पवार, सुप्रिया सुले, अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह सहित कई प्रमुख नेता शामिल रहे। शाम होते-होते प्रदर्शन स्थल पर भीड़ फिर बढ़ गई। धरने में वे प्रदर्शनकारी भी शामिल हुए, जो एक दिन पहले संसद मार्च के दौरान पुलिस लाठीचार्ज और आंसू गैस की कार्रवाई में घायल हुए थे। हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारी रिहा दिल्ली पुलिस ने 20 जुलाई को हिरासत में लिए गए सभी प्रदर्शनकारियों को रिहा कर दिया है। इसके बाद CJP ने पुलिस मुख्यालय के सामने प्रस्तावित धरना रद्द कर दिया। वहीं, संसद मार्च के दौरान बर्गर खाते नजर आए CJP प्रवक्ता विजेता दाहिया को संगठन ने पद से हटा दिया। इस पर दाहिया ने वीडियो जारी कर कहा कि यदि किसी को भूख लगेगी तो वह खाना जरूर खाएगा। दिनभर के प्रमुख अपडेट्स अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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राहुल गांधी की हिरासत के विरोध में रायपुर में कांग्रेस का प्रदर्शन, लोकभवन के बाहर पुलिस से धक्का-मुक्की

राहुल गांधी और अन्य कांग्रेस नेताओं की दिल्ली में हिरासत के विरोध में मंगलवार रात छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने रायपुर के लोकभवन के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पूर्व विधायक विकास उपाध्याय समेत कई कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने गेट की ओर बढ़ने से रोक दिया, जिससे पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। दरअसल, दिल्ली में नीट पेपर लीक मामले और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सहित कई नेता प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठे थे। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। इसी कार्रवाई के विरोध में देशभर में कांग्रेस प्रदर्शन कर रही है। भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर जताया विरोध दिल्ली में हुए प्रदर्शन में शामिल छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दावा किया कि पुलिस उन्हें और अन्य वरिष्ठ नेताओं को बस में बैठाकर एयरपोर्ट की ओर ले गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने उनका एक जूता भी ले लिया। कांग्रेस की प्रमुख मांगें प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी और भजन-कीर्तन रायपुर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने लोकभवन के बाहर भजन-कीर्तन किया, सरकार के खिलाफ नारे लगाए और गेट तक पहुंचने की कोशिश की। पुलिस ने उन्हें रोक दिया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की हुई। हालात को देखते हुए मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। कांग्रेस नेताओं ने सरकार पर साधा निशाना पूर्व महापौर एजाज ढेबर ने कहा कि कई छात्रों ने आत्महत्या की है और छात्रों पर लाठीचार्ज जैसी घटनाएं चिंताजनक हैं। कांग्रेस नेता राकेश गुप्ता ने शिक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री से इस्तीफे की मांग की। वहीं, सुबोध हरितवाल ने कहा कि जब तक छात्रों को न्याय नहीं मिलेगा, कांग्रेस का विरोध जारी रहेगा। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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भोपाल महिला आयोग में रिश्तों के दो चौंकाने वाले मामले, पत्नी ने मांगा तलाक तो दूसरे केस में दोनों ने लगाए गंभीर आरोप

भोपाल में राज्य महिला आयोग की जनसुनवाई के दौरान वैवाहिक विवादों से जुड़े दो अलग-अलग मामलों ने सबका ध्यान खींचा। एक मामले में सरकारी विभाग में असिस्टेंट डायरेक्टर बनने के बाद पत्नी ने पति पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए तलाक की मांग की, जबकि दूसरे मामले में पति-पत्नी ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए। 20 साल बाद पत्नी ने मांगा तलाक पहले मामले में सरकारी विभाग में कार्यरत असिस्टेंट डायरेक्टर महिला ने शादी के करीब 20 साल बाद महिला आयोग में पति के खिलाफ मानसिक प्रताड़ना और आर्थिक लेनदेन से जुड़े आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई। हालांकि, सुनवाई के दौरान वह स्वयं उपस्थित नहीं हुईं। सरकारी कॉलेज में प्रोफेसर पति आयोग के सामने पेश हुए और कहा कि वह अपनी पत्नी के साथ रहना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि पत्नी बिना बताए बेटे को लेकर मायके चली गई और तब से अलग रह रही है। पति ने कहा कि दोनों का बेटा आईवीएफ तकनीक से हुआ है और यदि रिश्ते में लगातार प्रताड़ना होती तो ऐसा संभव नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि पत्नी के जाने के बाद उनकी मां को पैरालिसिस का दूसरा अटैक आया और अब इस उम्र में अकेले जीवन बिताना मुश्किल होगा। दूसरे मामले में पति-पत्नी के गंभीर आरोप दूसरे मामले में पति ने महिला आयोग के सामने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी का एक अन्य महिला के साथ अवैध संबंध है और उसे अपनी जान का खतरा महसूस होता है। उसका दावा था कि इस संबंध में वह अदालत में दस्तावेज और सबूत भी प्रस्तुत कर चुका है। वहीं, पत्नी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए पति और ससुराल पक्ष पर दहेज प्रताड़ना, मारपीट, जबरन गर्भपात कराने, निजी वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर साझा करने और मानसिक उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप लगाए। महिला ने यह भी दावा किया कि उसके पति का अपनी रिश्तेदारी की एक महिला के साथ संबंध है और ससुर ने भी उसके साथ अनुचित व्यवहार किया। महिला ने आयोग को बताया कि शादी के बाद से उसे लगातार प्रताड़ित किया गया और वर्तमान में उसका खर्च मायके वाले उठा रहे हैं। दूसरी ओर, पति ने पत्नी के सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उन्होंने स्वयं भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। दोनों मामलों में महिला आयोग ने संबंधित पक्षों के बयान दर्ज कर आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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भुवनेश्वर-दिल्ली एयर इंडिया फ्लाइट में हवा में तेज झटके, यात्री सहमे; विमान सुरक्षित दिल्ली पहुंचा

New Delhi News: ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट मंगलवार को उड़ान के दौरान तेज एयर टर्बुलेंस का सामना करने के बाद सुरक्षित दिल्ली पहुंच गई। यात्रियों के अनुसार, फ्लाइट संख्या IX1058 ने दोपहर करीब 3:30 बजे भुवनेश्वर से उड़ान भरी थी, लेकिन लगभग 30 मिनट बाद विमान अचानक तेज़ी से हिलने लगा, जिससे यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। फ्लाइट में सवार 150 से अधिक यात्रियों ने बताया कि विमान के लगातार डगमगाने से कई लोग घबरा गए। कुछ यात्रियों का दावा है कि पायलट ने स्थिति को संभालने के लिए विमान की गति बढ़ाई। इस दौरान विमान कुछ समय के लिए हरियाणा के चरखी दादरी क्षेत्र की ओर चला गया, जिसके बाद उसे वापस मोड़कर दिल्ली लाया गया। यात्रियों के मुताबिक, उड़ान के दौरान एक महिला यात्री की तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश हो गई। हालांकि विमान सुरक्षित रूप से दिल्ली एयरपोर्ट पर उतर गया। यात्रियों का यह भी कहना है कि फ्लाइट निर्धारित समय से करीब आधा घंटा पहले दिल्ली पहुंच गई। हरियाणा के कुरुक्षेत्र निवासी स्पर्श सिंगल, जो इस फ्लाइट में सफर कर रहे थे, ने बताया कि वे पुरी में भगवान श्री जगन्नाथ की रथयात्रा में शामिल होने के बाद लौट रहे थे। उन्होंने कहा कि उड़ान के शुरुआती 30 मिनट तक सब कुछ सामान्य था, लेकिन इसके बाद विमान में अचानक तेज झटके लगने लगे और कई यात्रियों में डर का माहौल बन गया। यात्रियों ने दावा किया कि दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने के बाद उन्होंने एयरलाइन अधिकारियों से घटना की जानकारी लेने की कोशिश की, लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। फिलहाल एयर इंडिया की ओर से इस घटना को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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पीएम आवास के बाहर राहुल-प्रियंका का अचानक धरना, छात्रों के मुद्दे पर कांग्रेस ने बदली रणनीति

कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के बाहर अचानक धरना देकर केंद्र सरकार पर छात्रों के मुद्दे को लेकर निशाना साधा। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि छात्रों के साथ हुई पुलिस कार्रवाई पर सरकार जवाब देने से बच रही है। करीब तीन घंटे से अधिक समय तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य नेताओं को हटाकर धरना समाप्त कराया। छात्रों के मुद्दे पर कांग्रेस का बदला रुख 20 जून से जंतर-मंतर पर चल रहे ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के आंदोलन से कांग्रेस शुरुआती दौर में दूरी बनाए हुए थी। हालांकि, मानसून सत्र के दौरान छात्रों के मुद्दे और पुलिस कार्रवाई के बाद पार्टी ने अपना रुख बदलते हुए आंदोलन का खुलकर समर्थन करना शुरू किया। 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प के बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने सरकार की आलोचना की। प्रियंका गांधी ने छात्रों पर बल प्रयोग को निंदनीय बताया, जबकि राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्री पर सवाल उठाए। गुप्त तरीके से बनाई गई धरने की योजना रिपोर्ट्स के अनुसार, कांग्रेस ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन की योजना बेहद गोपनीय रखी। पार्टी नेताओं को मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर बुलाया गया, जहां से दोपहर करीब 3:30 बजे राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य नेता पैदल पीएम आवास की ओर बढ़े और वहीं धरने पर बैठ गए। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता भी मौके पर पहुंचे। सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी से बातचीत की कोशिश की, लेकिन सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शन समाप्त कराते हुए नेताओं को वहां से हटाया। राहुल गांधी ने सरकार से मांगा जवाब धरने के बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर कहा कि वे प्रधानमंत्री से छात्रों के साथ हुई कार्रवाई पर जवाब मांगने पहुंचे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संसद में इस मुद्दे पर चर्चा से बच रही है और छात्रों के भविष्य से जुड़े सवालों पर जवाबदेही तय नहीं कर रही। राजनीतिक विश्लेषकों की राय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस अब छात्रों और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाकर अपनी राजनीतिक रणनीति को नई दिशा देने की कोशिश कर रही है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि कांग्रेस आंदोलन का केंद्र छात्रों के मुद्दे को बनाए रखना चाहती है, जबकि अन्य का मानना है कि इससे विपक्ष की राजनीति और आंदोलन दोनों की दिशा प्रभावित हो सकती है। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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कॉकरोच जनता पार्टी’ के समर्थन में मार्च कर रहे 8 सपा सांसद हिरासत में, 2 घंटे बाद रिहा

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के समर्थन में संसद से जंतर-मंतर तक पैदल मार्च कर रहे समाजवादी पार्टी (सपा) के 8 सांसदों को सोमवार को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए गए सांसदों में डिंपल यादव, इकरा हसन, प्रिया सरोज, रुचि वीरा, धर्मेंद्र यादव समेत अन्य सांसद शामिल थे। करीब दो घंटे बाद सभी को रिहा कर दिया गया। सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने बताया कि सभी सांसदों को दोपहर करीब 12:30 बजे हिरासत में लेकर संसद मार्ग स्थित पार्लियामेंट थाने में बैठाया गया, जहां लगभग दो घंटे तक रखने के बाद दोपहर करीब 2:30 बजे छोड़ दिया गया। रिहा होने के बाद सांसद डिंपल यादव ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों ने छात्रों के साथ मारपीट की और उन्हें घसीटा गया। उन्होंने दावा किया कि कुछ छात्राओं ने उनके साथ अभद्र व्यवहार और कपड़े फाड़े जाने की शिकायत भी की। डिंपल यादव ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री को हटाने की मांग दोहराई। समाजवादी पार्टी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि छात्रों की आवाज उठाने वाले सांसदों को हिरासत में लेना और प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने संसद परिसर के बाहर कहा कि एक ओर सांसदों को थाने में बैठाया गया, वहीं दूसरी ओर छात्रों पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया। इस बीच, उत्तर प्रदेश के कई शहरों में भी नीट पेपर लीक के विरोध और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के समर्थन में सपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। वाराणसी में सपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई, जबकि बीएचयू में छात्रों ने करीब दो घंटे तक प्रदर्शन किया। लखनऊ में विधानसभा घेराव के लिए जा रहे सपा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रास्ते में रोक दिया। विरोध में कई कार्यकर्ता सड़क पर लेट गए, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हटाकर इको गार्डन भेज दिया। वहीं आगरा में जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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अभिजीत दिपके

CJP Tiranga March: अभिजीत दिपके के घर पहुंची दिल्ली पुलिस, कनॉट प्लेस में 25 हजार जवान तैनात

दिल्ली में आज, 16 अक्टूबर को CJP के ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को लेकर माहौल गर्म है। मार्च से पहले दिल्ली पुलिस अभिजीत दिपके के घर पहुंची। वहीं, कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इलाके में करीब 25 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की तैयारी है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच अब सबकी नजर इस बात पर है कि CJP का प्रस्तावित मार्च आगे किस तरह बढ़ता है। अभिजीत दिपके के घर पहुंची दिल्ली पुलिस CJP के प्रस्तावित मार्च से पहले दिल्ली पुलिस की टीम अभिजीत दिपके के घर पहुंची। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने उन्हें मार्च को लेकर नोटिस दिया। संगठन की ओर से इस कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। CJP का कहना है कि वह अपने नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में तिरंगा मार्च निकालना चाहता है। हालांकि, दिल्ली में लागू प्रतिबंधों और सुरक्षा व्यवस्था के चलते कार्यक्रम को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। Connaught Place में कड़ी सुरक्षा, 25 हजार जवान तैनात ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को देखते हुए कनॉट प्लेस और आसपास के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। रिपोर्ट्स में करीब 25 हजार पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों की तैनाती का जिक्र है। सेंट्रल पार्क और आसपास के प्रमुख स्थानों पर भी निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबंधात्मक कदम उठाए हैं। सेंट्रल पार्क को 16 और 17 अक्टूबर को बंद रखने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे में कनॉट प्लेस आने-जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। क्यों हो रहा है CJP का ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च? CJP ने इस मार्च का ऐलान अपने नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के विरोध में किया है। संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठा रहा है। 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान CJP समर्थकों ने बैरिकेडिंग पार कर नारेबाजी की थी। इसके बाद पुलिस ने संगठन के कुछ नेताओं को हिरासत में लिया। इसी कार्रवाई के विरोध में CJP ने तिरंगा मार्च निकालने की घोषणा की। SIR विवाद ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल इस पूरे विवाद के पीछे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) का मुद्दा भी है। CJP और कुछ विपक्षी समूहों ने मतदाता सूची में बदलावों को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया से मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। वहीं, चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची को लेकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत काम किए जाने की बात कही जाती रही है। SIR को लेकर राजनीतिक बहस लगातार जारी है और अब यह विवाद सड़कों पर हो रहे प्रदर्शनों तक पहुंच गया है। दिल्ली में Traffic Advisory, लोगों को सतर्क रहने की सलाह मार्च के चलते कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में ट्रैफिक प्रभावित होने की आशंका है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे घर से निकलने से पहले यातायात संबंधी अपडेट देख लें और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करें। दिल्ली पुलिस की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, जबकि CJP अपने विरोध प्रदर्शन को लेकर आगे बढ़ना चाहता है। ऐसे में शुक्रवार शाम का घटनाक्रम महत्वपूर्ण रहने वाला है। अब आगे क्या होगा? CJP के ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को लेकर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था सख्त है। एक तरफ संगठन अपने नेताओं की गिरफ्तारी और SIR के मुद्दे पर विरोध दर्ज कराना चाहता है, तो दूसरी तरफ प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबंध लागू कर रहा है। अब देखना होगा कि पुलिस की पाबंदियों के बीच मार्च को लेकर क्या स्थिति बनती है और CJP आगे क्या कदम उठाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Supreme Court

Supreme Court on CJP Protest: प्रदर्शन पर रोक से इनकार, ₹200 करोड़ के कारोबार पर असर का दावा

दिल्ली में CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई के दौरान प्रदर्शन के अधिकार और व्यापारियों की रोजी-रोटी का मुद्दा चर्चा में रहा। अदालत ने फिलहाल प्रदर्शन रोकने का आदेश देने से इनकार कर दिया। वहीं, व्यापारियों की ओर से दावा किया गया कि प्रदर्शन और उससे जुड़ी पाबंदियों के कारण रोजाना करीब ₹200 करोड़ के कारोबार पर असर पड़ सकता है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के सामने यह मामला रखा गया। याचिकाकर्ताओं ने दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क और आसपास के बाजारों में कारोबार प्रभावित होने की आशंका जताई। उनका कहना था कि बाजारों में लोगों की आवाजाही बाधित होने से छोटे दुकानदारों और दूसरे कारोबारियों को परेशानी हो सकती है। CJI की टिप्पणी: किसी के लिए प्रदर्शन, किसी के लिए मूंगफली बेचना जरूरी सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रदर्शन के अधिकार और आम लोगों की आजीविका के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने टिप्पणी की कि किसी व्यक्ति के लिए प्रदर्शन करना जरूरी हो सकता है, जबकि किसी दूसरे के लिए मूंगफली बेचकर अपना परिवार चलाना महत्वपूर्ण है। CJI सूर्यकांत ने भी छोटे व्यापारियों की आर्थिक स्थिति का जिक्र किया। त्योहारों के समय दुकानदारों की कमाई बढ़ने की उम्मीद रहती है। ऐसे में यदि बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो इसका असर उनकी रोजाना की आमदनी पर पड़ सकता है। अदालत की टिप्पणियों से साफ है कि इस मामले में केवल प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि आम लोगों की आजीविका और कानून-व्यवस्था से जुड़े पहलुओं पर भी विचार किया जा रहा है। Delhi Business Loss: रोजाना ₹200 करोड़ के नुकसान का दावा व्यापारियों की ओर से अदालत में दलील दी गई कि कनॉट प्लेस और आसपास के व्यावसायिक इलाकों में प्रदर्शन के कारण रोजाना करीब ₹200 करोड़ के कारोबार पर असर पड़ सकता है। इसका प्रभाव बड़े कारोबारियों के साथ-साथ छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों, कर्मचारियों और दिहाड़ी मजदूरों पर भी पड़ सकता है। बाजार में ग्राहकों की संख्या कम होने या आवाजाही प्रभावित होने से उनकी कमाई पर असर पड़ने की आशंका जताई गई। हालांकि, ₹200 करोड़ का आंकड़ा व्यापारियों की ओर से पेश किया गया दावा है। इसे वास्तविक नुकसान का प्रमाणित आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए। Central Park को बंद करने का मुद्दा भी उठा सुनवाई के दौरान कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क को बंद करने से जुड़े प्रशासनिक फैसले का मुद्दा भी उठाया गया। याचिकाकर्ताओं ने आशंका जताई कि इस कदम से आसपास के बाजारों और व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। अदालत ने संकेत दिया कि यदि किसी प्रतिबंध के कारण कारोबार या लोगों की आजीविका को अनुचित नुकसान पहुंचता है, तो उचित राहत देने के सवाल पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, तत्काल सुनवाई में प्रदर्शन पर रोक लगाने का कोई आदेश जारी नहीं किया गया। CJP Protest: क्यों किया गया प्रदर्शन का ऐलान? CJP ने 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च और प्रदर्शन का आह्वान किया था। पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के विरोध में यह कदम उठाने की बात कही थी। प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था, बाजारों में आवाजाही और कारोबार पर संभावित असर को लेकर चिंता जताई गई। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट में भी प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की गई थी। हाईकोर्ट ने रोक लगाने से इनकार किया था, जबकि दिल्ली पुलिस ने कानून के अनुसार जरूरी कदम उठाने की बात कही थी। Supreme Court Hearing: अब आगे क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट ने मामले को तत्काल आदेश के जरिए निपटाने के बजाय दशहरा अवकाश के बाद 26 या 27 अक्टूबर को सूचीबद्ध किए जाने का संकेत दिया। फिलहाल, प्रदर्शन पर रोक लगाने का आदेश नहीं दिया गया है। आगे की सुनवाई में प्रदर्शन के अधिकार, सार्वजनिक व्यवस्था और व्यापारियों की आजीविका से जुड़े पहलुओं पर चर्चा महत्वपूर्ण रहेगी। इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि विरोध दर्ज कराने के अधिकार और आम लोगों की रोजी-रोटी के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। अदालत की अगली सुनवाई से इस मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
PM Modi

PM Modi Canada Tour दिसंबर में होगी अहम बातचीत, Trade Deal से दोनों देशों को उम्मीद

PM Modi 11 दिसंबर को कनाडा के दौरे पर जा सकते हैं। इस यात्रा को भारत और कनाडा के बीच व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने के लिहाज से अहम माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच ट्रेड डील यानी व्यापार समझौते को लेकर बातचीत होने की संभावना है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों के बीच कनाडा भी अपने कारोबार के लिए नए बाजार तलाश रहा है। कनाडा लंबे समय से अमेरिकी बाजार पर काफी हद तक निर्भर रहा है। ऐसे में भारत जैसे बड़े और तेजी से बढ़ते बाजार के साथ व्यापार बढ़ाना उसके लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। दूसरी ओर, भारत की भी कोशिश है कि दूसरे देशों के साथ आर्थिक सहयोग बढ़े और भारतीय कारोबारियों को नए अवसर मिलें। India-Canada Trade Deal पर क्यों है सबकी नजर? भारत और कनाडा के बीच प्रस्तावित Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) को लेकर काफी उम्मीदें हैं। इस समझौते का मकसद दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ाना, निवेश के अवसर खोलना और कारोबार से जुड़ी बाधाओं को कम करना है। अगर ट्रेड डील पर सहमति बनती है, तो दोनों देशों की कंपनियों को एक-दूसरे के बाजार में कारोबार बढ़ाने का मौका मिल सकता है। इससे कृषि, ऊर्जा, तकनीक, शिक्षा और कई दूसरे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 70 अरब कनाडाई डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। ऐसे में प्रस्तावित समझौता इस लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभा सकता है। Trump के Tariff दबाव के बीच कनाडा क्यों खोज रहा नए बाजार? डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर अनिश्चितता बढ़ाई है। इसका असर उन देशों पर भी पड़ता है, जिनका कारोबार अमेरिकी बाजार पर ज्यादा निर्भर है। कनाडा भी अपने व्यापारिक रिश्तों में विविधता लाने और नए बाजारों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहा है। भारत इस लिहाज से कनाडा के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प बन सकता है। भारत की बड़ी आबादी, बढ़ती अर्थव्यवस्था और अलग-अलग क्षेत्रों में बढ़ती मांग कनाडाई कंपनियों को आकर्षित करती है। हालांकि, भारत के साथ व्यापार बढ़ाना केवल अमेरिका पर निर्भरता कम करने तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच निवेश और कारोबारी सहयोग बढ़ने से लंबे समय में आर्थिक रिश्तों को भी मजबूती मिल सकती है। Energy और Technology सेक्टर में भी बढ़ सकते हैं मौके भारत और कनाडा के बीच कारोबार की संभावनाएं केवल ट्रेड डील तक सीमित नहीं हैं। ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, शिक्षा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाया जा सकता है। कनाडा के पास प्राकृतिक संसाधन और ऊर्जा क्षेत्र में अनुभव है, जबकि भारत तेजी से बढ़ता हुआ बड़ा बाजार है। दोनों देश अपनी जरूरतों और क्षमताओं के आधार पर साझेदारी को आगे बढ़ा सकते हैं। व्यापार समझौते पर बातचीत आगे बढ़ने से कंपनियों और निवेशकों को भी सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं। हालांकि, वास्तविक फायदा समझौते की शर्तों और उसके लागू होने पर निर्भर करेगा। पुराने तनाव के बाद रिश्तों को नई दिशा देने की कोशिश भारत और कनाडा के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कूटनीतिक तनाव भी देखने को मिला। इस वजह से दोनों देशों के बीच भरोसे और सहयोग को लेकर कई सवाल उठे थे। अब व्यापार और आर्थिक सहयोग जैसे साझा हितों पर बातचीत बढ़ाना दोनों देशों के लिए अहम हो सकता है। प्रधानमंत्री मोदी की प्रस्तावित यात्रा इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। फिर भी, व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए कई मुद्दों पर सहमति जरूरी होगी। इसलिए इस दौरे के दौरान होने वाली बातचीत और आधिकारिक घोषणाओं पर सबकी नजर रहेगी। भारत और कनाडा के लिए क्या होंगे इसके मायने? भारत-कनाडा ट्रेड डील आगे बढ़ती है, तो इससे दोनों देशों के कारोबारियों को नए बाजार मिल सकते हैं। निवेश बढ़ने, व्यापारिक अवसर पैदा होने और अलग-अलग क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत होने की संभावना भी रहेगी। कनाडा के लिए भारत के साथ व्यापार बढ़ाना अपने आर्थिक रिश्तों में विविधता लाने का अवसर है। वहीं, भारत के लिए यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश के क्षेत्र में अपनी पहुंच मजबूत करने का एक और रास्ता हो सकता है। अब नजर 11 दिसंबर की प्रस्तावित यात्रा पर है। क्या प्रधानमंत्री मोदी और कनाडा के नेतृत्व के बीच ट्रेड डील को लेकर कोई ठोस सहमति बन पाएगी? इसका जवाब दोनों देशों की बातचीत और आगे होने वाली आधिकारिक घोषणाओं से ही साफ होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Starlink

Reliance-Starlink Controversy: मस्क के आरोपों पर अंबानी की कंपनी का जवाब, कहा- Competition से नहीं डरते

भारत में सैटेलाइट इंटरनेट को लेकर रिलायंस (Reliance) इंडस्ट्रीज और एलन मस्क की कंपनी Starlink के बीच चर्चा तेज हो गई है। स्टारलिंक की भारत में एंट्री में देरी को लेकर मस्क ने सवाल उठाए थे। अब मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस ने अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि वह प्रतिस्पर्धा से कभी नहीं डरी और भारत में स्टारलिंक का स्वागत करती है। Reliance के इस बयान के बाद देश के टेलीकॉम और सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में मुकाबले को लेकर चर्चा बढ़ गई है। एक तरफ एलन मस्क की स्टारलिंक भारतीय बाजार में अपनी सेवाएं शुरू करना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ जियो भी सैटेलाइट इंटरनेट के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की तैयारी कर रहा है। Reliance ने Starlink को लेकर क्या कहा? Reliance इंडस्ट्रीज ने अपने बयान में कहा कि कंपनी ने हमेशा प्रतिस्पर्धा का सामना किया है और वह नई कंपनियों के बाजार में आने से नहीं घबराती। कंपनी के मुताबिक, भारत में कारोबार करने वाली सभी कंपनियों को देश के नियमों का पालन करना चाहिए। रिलायंस ने स्टारलिंक का स्वागत करते हुए यह भी संकेत दिया कि सैटेलाइट इंटरनेट के क्षेत्र में मुकाबला ग्राहकों के लिए फायदेमंद हो सकता है। कंपनी का मानना है कि बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से सेवाओं की गुणवत्ता और ग्राहकों के अनुभव में सुधार की गुंजाइश बनती है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की शुरुआत को लेकर कई कंपनियां तैयारी कर रही हैं। Elon Musk ने Mukesh Ambani पर क्यों उठाए सवाल? एलन मस्क ने भारत में स्टारलिंक की लॉन्चिंग में हो रही देरी को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ प्रभावशाली कारोबारी हित कंपनी की भारतीय बाजार में एंट्री को मुश्किल बना रहे हैं। इस विवाद में रिलायंस और मुकेश अंबानी का नाम भी सामने आया। मस्क का कहना है कि स्टारलिंक जैसी कंपनियों को भारतीय बाजार में काम करने का अवसर मिलना चाहिए, ताकि ग्राहकों के पास इंटरनेट सेवा चुनने के अधिक विकल्प हों। हालांकि, इन आरोपों से यह साबित नहीं होता कि स्टारलिंक की लॉन्चिंग में देरी के पीछे रिलायंस की भूमिका है। इसके लिए किसी ठोस प्रमाण की जरूरत होगी। भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने के लिए कंपनियों को लाइसेंस के साथ-साथ दूसरी जरूरी मंजूरियां भी हासिल करनी होती हैं। Jio भी Satellite Internet Market में उतरने को तैयार Reliance जियो ने साल 2016 में भारतीय टेलीकॉम बाजार में कदम रखा था। सस्ते डेटा और किफायती सेवाओं के कारण कंपनी ने तेजी से ग्राहक जोड़े और देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों में अपनी जगह बनाई। अब जियो की नजर सैटेलाइट इंटरनेट बाजार पर भी है। इस तकनीक के जरिए उन इलाकों तक इंटरनेट पहुंचाने में मदद मिल सकती है, जहां सामान्य मोबाइल नेटवर्क या ब्रॉडबैंड कनेक्शन उपलब्ध कराना मुश्किल है। दूसरी तरफ, स्टारलिंक अपने सैटेलाइट नेटवर्क के जरिए भारत में इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध कराना चाहती है। ऐसे में आने वाले समय में दोनों कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है। Starlink की India Launch में देरी की वजह क्या है? भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करना केवल लाइसेंस मिलने तक सीमित नहीं है। कंपनियों को सुरक्षा मानकों, तकनीकी आवश्यकताओं और सरकारी नियमों से जुड़ी प्रक्रियाएं भी पूरी करनी होती हैं। स्टारलिंक के अलावा जियो और भारती समूह से जुड़ी Eutelsat OneWeb भी इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन कंपनियों की सेवाओं की शुरुआत जरूरी मंजूरियों और नियामकीय शर्तों पर निर्भर करती है। इसलिए स्टारलिंक की लॉन्चिंग में देरी को किसी एक कंपनी से जोड़कर देखना जल्दबाजी होगी। वास्तविक स्थिति समझने के लिए सरकारी मंजूरियों और संबंधित कंपनियों की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखना जरूरी है। आम लोगों को क्या होगा फायदा? अगर भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू होती हैं, तो इसका फायदा खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को मिल सकता है। पहाड़ी क्षेत्रों और उन जगहों पर, जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर है, यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। हालांकि, ग्राहकों के लिए सबसे अहम सवाल इंटरनेट की कीमत, स्पीड और उपलब्धता का होगा। स्टारलिंक और जियो की सेवाएं कितनी किफायती होंगी, यह उनकी व्यावसायिक योजनाओं और लॉन्च के समय घोषित किए जाने वाले प्लान पर निर्भर करेगा। अब आगे क्या? रिलायंस के बयान से साफ है कि कंपनी सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार है। वहीं, एलन मस्क की स्टारलिंक भारतीय बाजार में अपनी सेवाएं शुरू करने का इंतजार कर रही है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि जरूरी सरकारी प्रक्रियाएं कब पूरी होती हैं और कंपनियां ग्राहकों के लिए अपनी सेवाएं कब पेश करती हैं। अगर बाजार में कई कंपनियां उतरती हैं, तो भारतीय ग्राहकों को इंटरनेट के नए विकल्प मिल सकते हैं। फिलहाल, रिलायंस और स्टारलिंक के बीच जारी यह बहस भारत के तेजी से बदलते डिजिटल और टेलीकॉम बाजार की एक अहम तस्वीर पेश करती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Weather

Weather Update राजस्थान में बारिश के साथ गिरे ओले, Kedarnath-Badrinath में बर्फबारी

देश के कई हिस्सों में मौसम (Weather) का मिजाज बदल गया है। राजस्थान में तेज बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई है, जबकि उत्तराखंड के केदारनाथ, बद्रीनाथ और हेमकुंड साहिब में बर्फबारी देखने को मिली है। वहीं, उत्तर प्रदेश और बिहार समेत कई राज्यों में बारिश को लेकर अलर्ट की खबर है। मौसम में आए इस बदलाव से कहीं गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है, तो कहीं किसानों और यात्रियों की चिंता बढ़ सकती है। Rajasthan Weather: बारिश के साथ ओलावृष्टि राजस्थान के कई इलाकों में बारिश के साथ ओले गिरने से मौसम सुहावना होने के साथ ठंडा भी हो गया है। अचानक बदले मौसम का असर आम जनजीवन पर पड़ सकता है। जिन इलाकों में ओलावृष्टि हुई है, वहां खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान होने की आशंका भी रहती है। ऐसे में किसानों को स्थानीय मौसम विभाग की सलाह पर ध्यान देना चाहिए। बारिश और तेज हवाओं के दौरान लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। Kedarnath-Badrinath में बर्फबारी, पहाड़ों पर बढ़ी ठंड उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम ने अलग ही रंग दिखाया है। केदारनाथ, बद्रीनाथ और हेमकुंड साहिब में बर्फबारी के बाद ठंड बढ़ गई है। पहाड़ों पर मौसम तेजी से बदलता है, इसलिए यहां जाने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को यात्रा की तैयारी सावधानी से करनी चाहिए। खासतौर पर धार्मिक स्थलों की यात्रा करने वाले लोगों को सड़क की स्थिति, मौसम का पूर्वानुमान और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों की जानकारी लेकर ही आगे बढ़ना चाहिए। UP-Bihar Rain Alert: इन राज्यों में भी बदल सकता है मौसम राजस्थान और उत्तराखंड के अलावा उत्तर प्रदेश और बिहार समेत कई राज्यों में बारिश की संभावना को लेकर अलर्ट की खबर सामने आई है। बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं की स्थिति में लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। हालांकि, बारिश का असर हर जिले में एक जैसा नहीं होगा। इसलिए अपने इलाके के लिए मौसम विभाग की ताजा चेतावनी जरूर देखें। किसानों और आम लोगों के लिए जरूरी सलाह बदलते मौसम को देखते हुए कुछ सावधानियां बरतना जरूरी है। आंधी या बिजली चमकने के दौरान खुले मैदानों में रुकने से बचें। किसान अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए स्थानीय कृषि विशेषज्ञों की सलाह लें। वहीं, पहाड़ी इलाकों में जाने वाले यात्री मौसम और रास्तों की स्थिति की जानकारी पहले ही हासिल कर लें। Weather Update Today: आगे कैसा रहेगा मौसम? अक्टूबर के मध्य में बारिश और पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी ने मौसम का रुख बदल दिया है। राजस्थान में ओलावृष्टि और उत्तराखंड में बर्फ गिरने के बीच दूसरे राज्यों के लोगों की नजर भी बारिश के पूर्वानुमान पर है। मौसम से जुड़ी योजनाएं बनाने से पहले अपने शहर का ताजा अपडेट देखना बेहतर रहेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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