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भोपाल: शाहबानो केस पर बनी फिल्म ‘हक’ की रिलीज पर रोक नहीं लगाएगा हाईकोर्ट, याचिका खारिजकेसभोपाल: शाहबानो केस पर बनी फिल्म ‘हक’ की रिलीज पर रोक नहीं लगाएगा हाईकोर्ट, याचिका खारिज

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने गुरुवार को शाहबानो केस पर आधारित फिल्म ‘हक’ (Haq) की रिलीज पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि फिल्म किसी की निजता का हनन नहीं करती। साथ ही कोर्ट ने शाहबानो की बेटी और कानूनी वारिस सिद्दिका बेगम खान की याचिका को भी खारिज कर दिया, जिसमें फिल्म की रिलीज, प्रदर्शन और प्रमोशन पर रोक लगाने की मांग की गई थी। याचिका में क्या था दावा सिद्दिका बेगम ने कोर्ट में कहा था कि फिल्म मेकर्स ने उनकी अनुमति के बिना फिल्म बनाई है। उनका आरोप था कि फिल्म में शरिया कानून की नकारात्मक छवि दिखाई गई है, जिससे मुस्लिम समाज की भावनाएं आहत हो सकती हैं। उन्होंने फिल्म के डायरेक्टर सुपर्ण एस. वर्मा, जंगली पिक्चर्स, बावेजा स्टूडियोज, और CBFC के चेयरपर्सन को कानूनी नोटिस भी भेजा था। फिल्म 7 नवंबर को होगी रिलीज हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई 4 नवंबर को पूरी की थी और फैसला सुरक्षित रखा था। अब कोर्ट ने फिल्म ‘हक’ की रिलीज पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। फिल्म 7 नवंबर को रिलीज होने वाली है। क्या कहा याचिकाकर्ता की ओर से सुनवाई के दौरान सिद्दिका बेगम की ओर से एडवोकेट तौसीफ वारसी ने तर्क दिया कि फिल्म के टीजर और ट्रेलर में ऐसे दृश्य और डायलॉग हैं जो उनकी मां शाहबानो की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि फिल्म में दिखाए गए कई संवाद काल्पनिक हैं और वास्तविक जीवन में शाहबानो और उनके पति के बीच ऐसे संवाद कभी नहीं हुए थे। वारसी ने यह भी कहा कि फिल्म में शाहबानो के जीवन और ऐतिहासिक केस को तो दिखाया गया है, लेकिन उसमें कई बातें तोड़ी-मरोड़ी गई हैं। फिल्म में उनके परिवार के निजी अनुभव और संवेदनशील पहलू बिना अनुमति शामिल किए गए हैं। फिल्म मेकर्स का पक्ष फिल्म के निर्माता पक्ष के वकील अजय बागड़िया और हितेश मेहता ने कहा कि फिल्म में किसी भी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान नहीं पहुंचाया गया है। सभी घटनाएं सम्मानजनक और सकारात्मक दृष्टिकोण से फिल्माई गई हैं। उन्होंने कहा कि ‘हक’ समाज में महिला अधिकारों और न्याय की लड़ाई को दिखाने वाली फिल्म है। इस तरह हाईकोर्ट ने साफ किया कि फिल्म ‘हक’ की रिलीज पर कोई रोक नहीं लगाई जाएगी, और दर्शक तय करेंगे कि वह इसे किस नजरिए से देखते हैं। 👉 ऐसी और खबरों के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
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इंदौर: ऑनलाइन पैसे लेकर MD ड्रग्स सप्लाई करने वाला युवक गिरफ्तार, टीन चादर की दुकान की आड़ में चल रहा था कारोबार

इंदौर क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे युवक को गिरफ्तार किया है जो ऑनलाइन पैसे लेकर MD ड्रग्स की सप्लाई करता था। आरोपी टीन चादर की दुकान की आड़ में इस अवैध कारोबार को अंजाम दे रहा था और हर सौदे पर मोटा कमीशन कमाता था। कुछ दिन पहले क्राइम ब्रांच ने दो बदमाशों को 22 ग्राम MD ड्रग्स के साथ पकड़ा था। पूछताछ में उनका कनेक्शन परवेज खान नामक युवक से सामने आया, जिसके बाद पुलिस ने धार निवासी परवेज को गिरफ्तार कर लिया। एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने बताया कि पहले शहीम पिता सलीम खान और मोहम्मद शारिक पिता मोहम्मद शकील को गिरफ्तार किया गया था। उनके पास से बरामद ड्रग्स की कीमत लगभग 3 लाख रुपए बताई जा रही है। पूछताछ में खुलासा हुआ कि परवेज खान ही जावरा से ड्रग्स लाकर सप्लाई करवाता था। पुलिस के मुताबिक, परवेज पहले ऑनलाइन पैसा अपने खाते में मंगवाता था, फिर ड्रग्स की डिलीवरी करवाता था। इस गिरफ्तारी से MD ड्रग्स की सप्लाई चेन को तोड़ने में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। अब पुलिस उससे जुड़ी आगे की कड़ियां भी तलाश रही है। ढाई लाख रुपए की ब्राउन शुगर भी जब्त एडिशनल डीसीपी ने बताया कि अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ लगातार कार्रवाई चल रही है। इसी सिलसिले में बाणगंगा और रावजी बाजार क्षेत्रों में भी कार्रवाई की गई। दोनों से कुल ढाई लाख रुपए मूल्य की ब्राउन शुगर जब्त की गई है। पुलिस अब इनसे भी आगे की लिंक तलाशने में जुटी है। 👉 ऐसी और खबरों के लिए पढ़ते रहेंwww.deshharpal.com
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Coimbatore

Coimbatore Crime एयरपोर्ट के पास कॉलेज छात्रा से दुष्कर्म, पुलिस Encounter में तीन गिरफ्तार

तमिलनाडु (Tamil Nadu) के Coimbatore Airport के पास एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। एक निजी कॉलेज की छात्रा का अपहरण (Kidnapping) कर उसके साथ Sexual Assault किया गया। पुलिस ने इस जघन्य अपराध में शामिल तीनों आरोपियों को मुठभेड़ (Encounter) के बाद गिरफ्तार कर लिया है। पूरी घटना रविवार रात पीड़िता अपने एक पुरुष मित्र के साथ कार में जा रही थी। तभी तीन युवकों ने उनकी गाड़ी को रोका और जबरन लड़की को दूसरी कार में बैठा लिया। इसके बाद उसे सुनसान इलाके में ले जाकर यौन उत्पीड़न (Sexual Assault) किया गया। पीड़िता ने किसी तरह अपने परिवार को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। सात विशेष टीमों का गठन कर आरोपियों की तलाश शुरू की गई। Encounter में तीनों आरोपी घायल होकर गिरफ्तार मंगलवार सुबह पुलिस को आरोपियों की लोकेशन मिली। उन्हें पकड़ने की कोशिश के दौरान आरोपियों ने पुलिस पर हमला करने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई में उनके पैरों में गोली मार दी। तीनों आरोपियों की पहचान थावासी (Thavasi), कार्तिक (Karthik) और कलिस्वरन (Kaliswaran) के रूप में हुई है। तीनों स्थानीय निवासी हैं और पहले भी आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहे हैं। पुलिस जांच और पीड़िता का बयान पीड़िता ने अपने बयान में बताया कि वह अपने दोस्त के साथ कॉलेज से लौट रही थी, तभी ये तीन युवक अचानक आए और गाड़ी में जबरन बैठाकर उसे अगवा कर लिया। इसके बाद उन्होंने उसके साथ दुष्कर्म किया। पुलिस ने छात्रा का मेडिकल परीक्षण कराया है और सबूतों की जांच चल रही है। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या किसी और ने इस साजिश में मदद की थी। राज्य में बढ़ा जनाक्रोश इस घटना के बाद पूरे तमिलनाडु में लोगों का गुस्सा भड़क गया है। विपक्षी दलों ने सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग महिलाओं की सुरक्षा को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। राज्य सरकार का कहना है कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है और इस केस की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी। Women Safety पर फिर उठे सवाल कोयंबटूर जैसे विकसित शहर में इस तरह की घटना ने एक बार फिर Women Safety in Tamil Nadu पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार ने पुलिस को निर्देश दिए हैं कि महिलाओं के खिलाफ किसी भी अपराध पर तुरंत कार्रवाई की जाए। यह घटना न केवल एक छात्रा की अस्मिता पर हमला है, बल्कि समाज की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा करती है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अब ठोस कदम उठाना जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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छत्तीसगढ़ सरकार NEET-PG में 25 लाख रुपए की NOC शर्त बदल सकती है – छात्रों को मिलेगी बड़ी राहत

छत्तीसगढ़ में NEET-PG स्टेट काउंसलिंग से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्य सरकार उन नियमों में बदलाव करने पर विचार कर रही है, जिनके तहत सरकारी सेवा कर रहे डॉक्टरों को NOC के लिए 25 लाख रुपए की जमीन या FD बतौर सुरक्षा जमा करनी पड़ती है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जयसवाल ने बताया कि, “यह नियम पिछली सरकार के समय लागू किया गया था। वर्तमान सरकार इस पर गंभीरता से विचार कर रही है। छात्रों से भी इस संबंध में चर्चा हुई है। प्रक्रिया शुरू हो गई है और जल्द ही सभी के हित में समाधान निकाला जाएगा।” 25 लाख रुपए की शर्त से छात्रों की मुश्किलें बढ़ीं NEET-PG में चयनित कई सरकारी डॉक्टर इस शर्त के कारण आगे की पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। कई के पास इतनी संपत्ति या नकदी नहीं है कि वे बॉन्ड की शर्त पूरी कर सकें। डॉ लक्ष्य शर्मा, जो पिछले 7 महीने से सुकमा में ड्यूटी कर रहे हैं, ने बताया — “मेरी NEET में 20,000 रैंक आई है। मैं पीजी करना चाहता हूं, लेकिन गांव की जमीन पर पहले से लोन है और FD के लिए पैसे नहीं हैं। माता-पिता ने कह दिया कि इतनी बड़ी रकम नहीं दे सकते, इसलिए पढ़ाई छोड़ दो।” वहीं अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज की डॉ आफरीन खान ने कहा, “हम दो साल की बॉन्ड पोस्टिंग की शर्त पूरी करने को तैयार हैं। मैंने एक साल पूरा भी कर लिया है, लेकिन 25 लाख की संपत्ति जुटाना हमारे लिए असंभव है।” डॉक्टर फेडरेशन ने कहा – नियम संविधान के खिलाफ छत्तीसगढ़ डॉक्टर फेडरेशन ने इस नियम को आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के खिलाफ बताया है। संगठन का कहना है कि यह शिक्षा के अधिकार और समान अवसर के संवैधानिक सिद्धांतों के विपरीत है।फेडरेशन ने मांग की है कि आर्थिक रूप से कमजोर उम्मीदवारों के लिए नोटरी कृत एफिडेविट को वैकल्पिक दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जाए। स्वास्थ्य मंत्री ने डॉक्टरों की प्रमुख मांगों पर जरूरी कार्रवाई का आश्वासन दिया है। 🔗 For more such updates, visit:www.deshharpal.com
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ग्वालियर में आधी रात गैंगवार: रिंकू कमरिया गैंग की ताबड़तोड़ फायरिंग, हवलदार का बेटा समेत दो घायल

ग्वालियर में रविवार और सोमवार की दरमियानी रात को घासमंडी, कोटेश्वर रोड पर वर्चस्व की लड़ाई और 5 लाख रुपए के लेन-देन को लेकर गैंगवार हुआ। बदमाश रिंकू कमरिया गैंग ने कार सवार दो दोस्तों पर करीब 15 मिनट तक 35 से ज्यादा गोलियां दागीं। इस फायरिंग में एक हवलदार का बेटा समेत दो युवक घायल हुए। वर्चस्व और पैसे की लड़ाई में चली गोलियां पुलिस के मुताबिक, शिवनगर घोसीपुरा जनकगंज निवासी विजय सिंह गौड़, जिनके पिता मध्यप्रदेश पुलिस में हवलदार हैं, रविवार रात अपने दोस्तों बल्लू सरदार और हाकिम सिंह बघेल पाटनकर के साथ कार से घासमंडी गए थे। लौटते समय कोटेश्वर रोड पर रिंकू कमरिया, अन्नी कमरिया, छोटू कमरिया, कालू कमरिया और रमेश कमरिया ने उन्हें घेर लिया और ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। करीब 15 मिनट तक चली गोलीबारी में विजय गौड़ को पैर में तीन गोलियां और हाकिम को एक गोली लगी। घटना के बाद बदमाश हथियार लहराते हुए मौके से फरार हो गए। इलाके में देर रात दहशत फैल गई। 5 लाख के लेन-देन को लेकर विवाद घायल विजय ने पुलिस को बताया कि यह हमला 5 लाख रुपए के लेन-देन के विवाद को लेकर हुआ। रिंकू कमरिया पैसे की वसूली के बाद रकम वापस नहीं कर रहा था और धमकी दे रहा था कि “पैसा मांगा तो गोली मार दूंगा।”रिंकू कमरिया ग्वालियर थाने का लिस्टेड बदमाश है, जिस पर फायरिंग, मारपीट और हत्या के प्रयास जैसे कई केस पहले से दर्ज हैं। पुलिस ने दर्ज किया हत्या के प्रयास का मामला घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों घायलों को हजीरा सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।पुलिस ने रिंकू कमरिया गैंग के सभी बदमाशों के खिलाफ हत्या के प्रयास का केस दर्ज किया है और उनकी तलाश में दबिश दी जा रही है। सीएसपी कृष्णपाल सिंह के मुताबिक, “घायल युवकों के बयान लिए जा रहे हैं। हमलावरों की पहचान हो चुकी है और उन्हें जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।” 🔗 For more such updates, visit:www.deshharpal.com
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भोपाल में रंजिश के चलते युवक पर तलवार से हमला, चार हमलावर फरार – हालत गंभीर

भोपाल के बागसेवनिया इलाके में पुरानी रंजिश का खौफनाक नतीजा सामने आया। देर रात चार युवकों ने एक युवक को घेरकर उस पर तलवार और डंडों से हमला कर दिया। आरोपी युवक को अधमरी हालत में छोड़कर मौके से भाग निकले। राहगीरों की सूचना पर पहुंचे परिजनों ने घायल को लहूलुहान हालत में अस्पताल पहुंचाया। फिलहाल युवक का इलाज एम्स अस्पताल में चल रहा है, जहां उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है। रास्ते में घेरकर किया हमला पुलिस के मुताबिक, 26 वर्षीय रिजवान खान, निवासी पिपालिया पेंदे खां, कार धोने का काम करता है। शनिवार रात वह दुकान बंद कर घर लौट रहा था। तभी उस्मान, साहिब, अनस और उनके साथी ने रास्ते में घेरकर उस पर हमला कर दिया। आरोपियों ने पहले मारपीट की और फिर तलवार से रिजवान के सिर और हाथों पर कई वार किए। हमले के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए, जबकि रिजवान खून से लथपथ सड़क पर पड़ा रहा। बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले रिजवान का एक आरोपी से झगड़ा हुआ था — उसी का बदला लेने यह हमला किया गया। पुलिस ने दर्ज किया हत्या के प्रयास का मामला घटना की जानकारी मिलते ही परिजन और पुलिस मौके पर पहुंचे और घायल को अस्पताल पहुंचाया। पुलिस ने हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर लिया है और आरोपियों की तलाश में रविवार-सोमवार की दरमियानी रात में कई ठिकानों पर छापे मारे, लेकिन अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।पुलिस का कहना है कि आरोपियों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। 🔗 For more such updates, visit: www.deshharpal.com
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पवई

पवई Studio Hostage Case मुंबई में 17 बच्चों की जान पर बन आई, पुलिस ने ऐसे किया Rescue

मुंबई के पवई (Powai) इलाके में 30 अक्टूबर को हुआ Mumbai Hostage Case अब पूरे देश की सुर्खियों में है। इस घटना ने न सिर्फ शहर को दहला दिया बल्कि लोगों के मन में कई सवाल भी छोड़ दिए। 38 साल के Rohit Arya ने अचानक 17 बच्चों और 2 वयस्कों को बंधक बना लिया था। करीब दो घंटे तक चली हाई-वोल्टेज ड्रामा के बाद मुंबई पुलिस ने ऑपरेशन चलाकर सभी को सकुशल बचा लिया, जबकि रोहित आर्या पुलिस की गोली लगने से मारा गया। कैसे शुरू हुआ Mumbai Hostage Drama? गुरुवार को जब पवई के RA Studio में बच्चों की शूटिंग चल रही थी, तभी अचानक आरोपी रोहित आर्या वहां पहुंचा। उसने हथियार लहराते हुए सभी को अंदर बंद कर दिया और चिल्लाने लगा कि “सरकार ने मेरा पैसा नहीं दिया, जब तक इंसाफ नहीं मिलेगा, मैं किसी को नहीं जाने दूंगा।”पुलिस ने तुरंत इलाके को सील कर बातचीत शुरू की, लेकिन जब आरोपी शांत नहीं हुआ तो कमांडो टीम ने एक्शन लिया और ऑपरेशन खत्म किया। Rohit Arya का विवादित अतीत पुलिस जांच में सामने आया कि रोहित आर्या का अतीत काफी विवादों और तनावों से भरा हुआ था। वह पहले पुणे के कोथरुड इलाके में अपनी पत्नी के साथ किराए के मकान में रहता था। वहां मकान मालिक के साथ उसका किराया विवाद चल रहा था। रिपोर्ट्स के अनुसार, उसने ₹2 लाख मुआवजे की मांग की थी और कई महीनों तक किराया नहीं चुकाया। मार्च 2025 में मकान मालिक ने उसे कानूनी नोटिस भेजा, जिसके बाद ₹1.75 लाख में समझौता हुआ। लेकिन इस दौरान उसका विवादास्पद और अस्थिर व्यवहार भी लोगों के बीच चर्चा का विषय रहा। सरकारी प्रोजेक्ट पर बकाया रकम का आरोप घटना से पहले रोहित ने एक वीडियो रिकॉर्ड किया था जिसमें उसने कहा कि उसे महाराष्ट्र शिक्षा विभाग (Education Department) के प्रोजेक्ट का पेमेंट नहीं मिला, और इसी से वह आर्थिक संकट में फंस गया।हालांकि सरकार ने इन सभी दावों को झूठा और बेबुनियाद बताया है। पुलिस और पड़ोसियों के बयान मुंबई पुलिस का कहना है कि रोहित पिछले कुछ महीनों से मानसिक रूप से परेशान था और सोशल मीडिया पर अक्सर भड़काऊ बयान पोस्ट करता था।पड़ोसियों का भी कहना है कि वह अक्सर चिल्लाता था और उसका व्यवहार काफी अजीब था। समाज के लिए सबक यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं बल्कि एक Social Reminder है — कि मानसिक स्वास्थ्य, आर्थिक तनाव और सामाजिक दबाव जैसे मुद्दों को नजरअंदाज करना कितना खतरनाक हो सकता है। एक पढ़ा-लिखा इंसान आखिर कैसे इतने चरम कदम तक पहुंच गया? यह सवाल हर किसी को सोचने पर मजबूर करता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Jaipur

Jaipur Bus Accident मजदूरों से भरी Private Bus में दौड़ा करंट

राजस्थान के Jaipur जिले से एक दर्दनाक खबर सामने आई है। सोमवार सुबह मजदूरों से भरी एक Private Bus अचानक High Voltage Electric Wire की चपेट में आ गई। कुछ ही सेकंड में Bus में करंट दौड़ गया, जिससे कई मजदूर झुलस गए। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और लोग मदद के लिए दौड़ पड़े। हादसा कैसे हुआ जानकारी के अनुसार, यह बस Jaipur से मजदूरों को लेकर पास के औद्योगिक इलाके की ओर जा रही थी। रास्ते में बस का ऊपरी हिस्सा ऊपर से गुजर रहे High-Tension Electric Wire से टकरा गया। टकराते ही बस में ज़ोरदार करंट दौड़ गया और सवार यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि बस के ऊपर रखे लोहे के पाइप बिजली के तार से छू गए, जिसके कारण करंट पूरे वाहन में फैल गया। Driver ने तुरंत बस रोकी, लेकिन तब तक कई मजदूर झुलस चुके थे। मौके पर अफरा-तफरी घटना के बाद ग्रामीण और राहगीर मौके पर पहुंचे और बस में फंसे मजदूरों को बाहर निकाला। पुलिस, बिजली विभाग और एंबुलेंस की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और घायलों को नज़दीकी अस्पताल पहुंचाया गया। कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। पहले भी हो चुके ऐसे हादसे Rajasthan में यह कोई पहला मामला नहीं है जब राजस्थान में बस बिजली के तार की चपेट में आई हो। इन हादसों के बावजूद कई इलाकों में बिजली के तार अब भी सड़क के बहुत पास हैं, जो किसी भी वक्त बड़ा खतरा बन सकते हैं। प्रशासन की जांच शुरू जयपुर जिला प्रशासन ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं। बिजली विभाग से रिपोर्ट मांगी गई है कि आखिर इतने निचले स्तर पर हाई-वोल्टेज लाइन कैसे चल रही थी। वहीं, पुलिस ने बस चालक और मालिक से पूछताछ शुरू कर दी है। स्थानीय लोगों का आरोप – लापरवाही से गया हादसा घटना के बाद लोगों में गुस्सा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद बिजली विभाग ने तारों की ऊंचाई नहीं बढ़ाई। अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कब तक ऐसे हादसे मजदूरों की जान लेते रहेंगे। सुरक्षा को लेकर क्या कहना है विशेषज्ञों का सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे हादसों को रोकने के लिए बिजली विभाग और परिवहन विभाग दोनों को जॉइंट सेफ्टी ड्राइव चलानी चाहिए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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SIR

Election Commission का बड़ा फैसला 12 राज्यों में शुरू हुआ SIR Second Phase, Voter List होगी अपडेट

भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) ने एक अहम फैसला लेते हुए देश के 12 राज्यों में Special Intensive Revision (SIR) का दूसरा चरण शुरू करने की घोषणा की है। यह कदम आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूचियों को पारदर्शी और त्रुटि-मुक्त बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। क्या है SIR (Special Intensive Revision)? SIR एक विशेष प्रक्रिया है जिसके तहत मतदाता सूची की पूरी जांच और सुधार किया जाता है। इसमें— इसका मुख्य उद्देश्य है कि हर पात्र नागरिक का नाम सूची में सही ढंग से दर्ज हो, ताकि किसी का वोटिंग अधिकार प्रभावित न हो। किन 12 राज्यों में शुरू होगा दूसरा चरण चुनाव आयोग ने बताया कि दूसरे चरण की SIR प्रक्रिया 12 राज्यों में लागू की जाएगी। इन राज्यों में जिला और राज्य निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्थानीय स्तर पर बूथवार जांच करें और मतदाता सूची को अद्यतन करें। आयोग ने सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ बैठक कर यह तय किया कि कहाँ पर सूची में सबसे अधिक सुधार की आवश्यकता है। आज रात से फ्रीज़ होगी मतदाता सूची Election Commission ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन 12 राज्यों में यह प्रक्रिया लागू हो रही है, वहाँ आज रात से voter list freeze कर दी जाएगी। यानी इसके बाद कोई नया नाम जोड़ा या हटाया नहीं जा सकेगा। यह प्रक्रिया सूची को स्थिर और प्रमाणिक बनाए रखने के लिए की जा रही है। क्यों ज़रूरी है SIR प्रक्रिया SIR का उद्देश्य केवल तकनीकी सुधार नहीं बल्कि लोकतंत्र को मजबूत बनाना है। अक्सर मतदाता सूचियों में कई त्रुटियाँ पाई जाती हैं जैसे कि— ऐसी त्रुटियाँ चुनाव की सटीकता और विश्वसनीयता को प्रभावित करती हैं, इसलिए SIR इन सबको सुधारने का सबसे प्रभावी तरीका है। इतिहास: कब-कब हुई SIR प्रक्रिया भारत में 1951 से 2004 के बीच अब तक कुल 8 बार Special Intensive Revision की प्रक्रिया हो चुकी है। 2025 में यह नौवीं बार आयोजित की जा रही है, जो देशभर में मतदाता सूचियों की शुद्धता बढ़ाने का एक बड़ा अभियान है। पारदर्शी चुनावों की दिशा में मजबूत कदम Election Commission का यह फैसला आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। आयोग का लक्ष्य है कि 100% eligible voters को सूची में शामिल किया जाए और किसी भी गलत नाम को हटाया जाए। इस कदम से न केवल मतदान प्रतिशत बढ़ेगा बल्कि जनता का विश्वास और पारदर्शिता भी बनी रहेगी। Election Commission का यह कदम भारत के लोकतंत्र को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा प्रयास है। 12 राज्यों में शुरू हुई SIR की दूसरी चरण प्रक्रिया से voter list accuracy, transparency और public trust में सुधार आने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Hyderabad

Hyderabad-Bengaluru Highway वोल्वो बस में लगी आग, 32 यात्रियों की दर्दनाक मौत

आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले (Kurnool District) में शुक्रवार तड़के एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया। हैदराबाद से बेंगलुरु (Hyderabad to Bengaluru) जा रही एक निजी वोल्वो बस में आग लगने से कम से कम 32 यात्रियों की मौत हो गई। यह हादसा चिन्ना टेकुरु गांव (Chinna Tekuru Village) के पास हुआ, जब बस एक मोटरसाइकिल से टकरा गई और देखते ही देखते आग का गोला बन गई। कैसे हुआ हादसा यह बस कावेरी ट्रैवल्स (Kaveri Travels) की थी और उसमें 41 यात्री सवार थे। जैसे ही बस हाईवे पर आगे बढ़ रही थी, एक मोटरसाइकिल से उसकी टक्कर होते ही फ्यूल टैंक फट गया, और आग पूरी बस में फैल गई।प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कुछ ही सेकंड में पूरी बस आग की लपटों में घिर गई और दरवाजा जाम हो जाने की वजह से यात्री बाहर नहीं निकल पाए। कुछ यात्रियों ने खिड़कियां तोड़कर बाहर कूदकर अपनी जान बचाई, लेकिन कई अंदर ही फंस गए। बचाव कार्य और जांच (Rescue & Investigation) दमकल विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। अब फॉरेंसिक जांच (Forensic Investigation) जारी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि आग का असली कारण क्या था — फ्यूल लीक, शॉर्ट सर्किट या टक्कर का असर।पुलिस अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल 12 यात्रियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और कई गंभीर रूप से झुलसे हुए हैं। सीएम चंद्रबाबू नायडू ने जताया शोक (CM Naidu’s Reaction) आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू (N. Chandrababu Naidu) ने इस भीषण हादसे पर गहरा शोक जताया। उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा — “कुरनूल बस हादसे की खबर से अत्यंत दुखी हूं। मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं। प्रशासन को तुरंत राहत और सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।” सरकार ने मृतकों के परिवारों को मुआवजा (Compensation) देने और बस कंपनी की सुरक्षा जांच (Safety Audit) करने के आदेश जारी किए हैं। फिर उठे बस सुरक्षा पर सवाल (Bus Safety Under Question) यह हादसा एक बार फिर दिखाता है कि प्राइवेट बसों में फायर सेफ्टी (Fire Safety) को लेकर गंभीर खामियां हैं। बसों के अंदर ज्वलनशील सामग्री, कमजोर वायरिंग, और आपातकालीन दरवाजों की कमी यात्रियों के लिए घातक साबित हो रही है।कुछ दिन पहले ही राजस्थान (Rajasthan) में भी इसी तरह के बस हादसे में कई लोगों की जान गई थी। मुख्य बिंदु (Key Highlights) हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Meerut

Meerut Murder Case: सांप के काटने का नाटक पड़ा भारी, रविता को Death Penalty

उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut) में पति की हत्या को सांप के काटने से हुई मौत दिखाने के चर्चित मामले में अदालत ने रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को मौत की सजा सुनाई है। इस मामले ने उस समय सबको चौंका दिया था, जब शुरुआत में अमित कश्यप की मौत को सर्पदंश माना जा रहा था। लेकिन जांच आगे बढ़ी तो कहानी कुछ और ही निकली। पुलिस की जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और दूसरे सबूतों के आधार पर मामले की परतें खुलती चली गईं। अदालत के फैसले के बाद मेरठ का यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। Meerut Murder Case: क्या है पूरा मामला? यह मामला मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के अकबरपुर सादात गांव का है। यहां रहने वाले अमित कश्यप उर्फ मिक्की की अप्रैल 2025 में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। उनका शव घर में बिस्तर पर मिला था। शुरुआती तौर पर मौत की वजह सांप का काटना मानी गई। हालांकि, मामले की जांच के दौरान कुछ ऐसे तथ्य सामने आए, जिनसे पुलिस को शक हुआ। इसके बाद घटना की गहराई से जांच शुरू की गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह दम घुटना सामने आने के बाद पुलिस ने हत्या के एंगल से जांच आगे बढ़ाई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से बदली जांच की दिशा अमित की मौत के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट अहम साबित हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी मौत सर्पदंश से नहीं, बल्कि दम घुटने से हुई थी। इसके बाद पुलिस ने घटना से जुड़े लोगों और परिस्थितियों की जांच की। जांच में अमित की पत्नी रविता और अमरदीप की भूमिका सामने आई। अभियोजन पक्ष ने अदालत में मामले से जुड़े सबूत और गवाहों के बयान पेश किए। इन्हीं तथ्यों के आधार पर अदालत ने दोनों को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई। रविता और अमरदीप को Death Penalty अदालत के फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। पति की मौत को सांप के काटने की घटना दिखाने के आरोपों से शुरू हुई जांच हत्या के मामले तक पहुंची। इस पूरे घटनाक्रम में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की जांच ने अहम भूमिका निभाई। ऐसे मामलों में फॉरेंसिक जांच, गवाहों के बयान और अन्य सबूत यह समझने में मदद करते हैं कि घटना के पीछे की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं। मेरठ में तीन दिन में चार दोषियों को फांसी की सजा की चर्चा मेरठ में हाल के दिनों में दो चर्चित हत्याकांडों में मृत्युदंड सुनाए जाने की वजह से भी चर्चा तेज हुई है। अमित कश्यप हत्याकांड के अलावा सौरभ राजपूत हत्याकांड भी सुर्खियों में रहा। सौरभ की हत्या के मामले में उसकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को भी अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी। दोनों मामलों की घटनाएं अलग-अलग हैं, लेकिन इन फैसलों ने हत्या के मामलों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर लोगों का ध्यान खींचा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

ग्वालियर के वेंकटेश्वर अपार्टमेंट में युवक का शव मिला, रजिस्टर में युवती का जिक्र; पुलिस जांच में जुटी

ग्वालियर: शहर के सिटी सेंटर स्थित वेंकटेश्वर अपार्टमेंट में गुरुवार देर रात एक युवक का शव फ्लैट के कमरे में पंखे से लटका मिला। मृतक की पहचान अंबाह निवासी संतोष शर्मा के रूप में हुई है। वह ग्वालियर की एक बीमा कंपनी में नौकरी करता था। सूचना मिलने पर विश्वविद्यालय थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। घटनास्थल से मिले एक रजिस्टर में युवती का जिक्र करते हुए कुछ पंक्तियां लिखी मिली हैं। इनमें संतोष ने युवती के साथ काफी समय बिताने और उसे अच्छा बताने की बात लिखी है। साथ ही, अपनी मौत के लिए उसे जिम्मेदार नहीं ठहराने का भी उल्लेख किया है। पुलिस इन पंक्तियों समेत सभी साक्ष्यों की जांच कर रही है। बी-ब्लॉक के जी-8 फ्लैट में मिला शव घटना वेंकटेश्वर अपार्टमेंट के बी-ब्लॉक स्थित जी-8 फ्लैट की है। गुरुवार रात करीब 11 बजे पुलिस को युवक का शव कमरे में पंखे से लटका होने की सूचना मिली। इसके बाद विश्वविद्यालय थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए। मामले की जांच के लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. कोक सिंह को भी बुलाया गया। पुलिस ने मृतक का मोबाइल फोन कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। कॉल रिकॉर्ड और चैट हिस्ट्री की पड़ताल के जरिए घटना से जुड़े तथ्यों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। युवती के साथ फ्लैट में रहने की जानकारी पुलिस के अनुसार, जिस फ्लैट में संतोष का शव मिला, वह एक युवती ने किराए पर लिया था। अपार्टमेंट में रहने वाले लोगों ने पुलिस को बताया कि युवती संतोष के साथ इसी फ्लैट में रहती थी। पुलिस ने युवती से संपर्क किया तो उसने बताया कि वह पीएचडी के काम से बाहर गई हुई है। फिलहाल पुलिस संतोष और युवती के बीच संबंधों तथा घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। ऑनलाइन गेमिंग की आदत की भी पड़ताल शुरुआती जानकारी में संतोष के ऑनलाइन गेमिंग में सक्रिय रहने की बात सामने आई है। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या ऑनलाइन गेमिंग में पैसों के लेनदेन या किसी अन्य कारण से वह तनाव में था। हालांकि, फिलहाल इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि संतोष को गेमिंग में बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ था, उस पर कर्ज था या उसकी मौत का संबंध ऑनलाइन गेमिंग से था। पुलिस सभी पहलुओं की कर रही जांच विश्वविद्यालय थाना प्रभारी रविंद्र जाटव के मुताबिक, पुलिस मामले की हर संभावित पहलू से जांच कर रही है। घटनास्थल से मिले रजिस्टर, मोबाइल फोन और अन्य साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। संबंधित लोगों से पूछताछ के आधार पर भी जानकारी जुटाई जा रही है। फिलहाल युवक की मौत के पीछे किसी एक कारण की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस जांच पूरी होने और साक्ष्य सामने आने के बाद ही घटना की परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।
Dharmendra Pradhan

Dharmendra Pradhan on CJP: राहुल गांधी पर सवाल, Regime Change को लेकर सियासत तेज

दिल्ली में CJP के विरोध प्रदर्शन को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग से शुरू हुआ यह विवाद अब राहुल गांधी, कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गया है। धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) समेत बीजेपी के नेताओं ने आंदोलन को लेकर विपक्ष की मंशा पर सवाल उठाए हैं। वहीं, प्रदर्शन से जुड़े नेताओं का कहना है कि उनकी लड़ाई चुनावी पारदर्शिता और चुनाव आयोग की जवाबदेही को लेकर है। विवाद तब और बढ़ गया, जब आंदोलन को बांग्लादेश में हुए राजनीतिक बदलाव और ‘Regime Change’ यानी सत्ता परिवर्तन की बहस से जोड़कर देखा जाने लगा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि CJP का प्रदर्शन अब केवल चुनाव सुधार तक सीमित है या इसके राजनीतिक मायने भी हैं? धर्मेंद्र प्रधान ने राहुल गांधी और CJP पर क्यों साधा निशाना? CJP के आंदोलन को लेकर बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस और राहुल गांधी की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। बीजेपी का आरोप है कि विपक्ष चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को उठाकर केंद्र सरकार के खिलाफ राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। Dharmendra Pradhan के बयान को भी इसी राजनीतिक टकराव के संदर्भ में देखा जा रहा है। बीजेपी नेताओं ने आंदोलन और बांग्लादेश के राजनीतिक घटनाक्रम के बीच समानताएं बताते हुए विपक्ष की रणनीति पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, ये राजनीतिक आरोप हैं। बांग्लादेश जैसे घटनाक्रम को भारत में दोहराने की किसी कथित योजना को स्थापित तथ्य के रूप में पेश नहीं किया जा सकता। ‘Regime Change’ बयान से क्यों शुरू हुई नई बहस? CJP आंदोलन के दौरान सत्ता परिवर्तन को लेकर दिए गए बयानों ने विवाद को नया मोड़ दिया। आंदोलन से जुड़े कुछ नेताओं की टिप्पणियों को बीजेपी ने सरकार बदलने की मंशा से जोड़कर देखा। दूसरी ओर, CJP की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग उठाई गई है। यही वजह है कि अब इस आंदोलन को लेकर दो अलग-अलग दावे सामने हैं। बीजेपी इसे राजनीतिक अभियान बता रही है, जबकि आंदोलनकारी पक्ष चुनाव आयोग की जवाबदेही का मुद्दा उठा रहा है। इन बयानों के बीच किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए संबंधित नेताओं के पूरे वक्तव्य और उपलब्ध तथ्यों को देखना जरूरी है। राहुल गांधी ने CJP आंदोलन को लेकर क्या रुख अपनाया? कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रदर्शन से जुड़े नेताओं की गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थन में बयान दिया था। उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन और तिरंगा फहराने के अधिकार का मुद्दा उठाया। राहुल गांधी और कांग्रेस लगातार चुनावी प्रक्रिया तथा मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। वहीं, बीजेपी का कहना है कि विपक्ष इन मुद्दों का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए कर रहा है। इस तरह CJP आंदोलन को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच टकराव बढ़ता दिखाई दे रहा है। एक तरफ चुनावी पारदर्शिता की मांग है, तो दूसरी तरफ आंदोलन के राजनीतिक उद्देश्य पर सवाल उठाए जा रहे हैं। SIR विवाद क्या है और चुनाव आयोग पर क्यों उठ रहे सवाल? इस पूरे विवाद के केंद्र में मतदाता सूची का Special Intensive Revision यानी SIR भी है। यह मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा की प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य सूची को अपडेट करना और पात्र मतदाताओं का विवरण सही रखना है। विपक्ष ने इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठाए हैं। कुछ रिपोर्टों और राजनीतिक बयानों में 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने का दावा भी चर्चा में रहा है। हालांकि, ऐसे आंकड़ों को संबंधित राज्यों के आधिकारिक आंकड़ों और चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के आधार पर समझना जरूरी है। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि किसी पात्र मतदाता का नाम न छूटे। दूसरी ओर, चुनाव आयोग की प्रक्रिया और उसके फैसलों को लेकर उठाए गए राजनीतिक आरोपों का आकलन तथ्यों के आधार पर किया जाना चाहिए। Delhi CJP Protest: तिरंगा मार्च और सुरक्षा व्यवस्था पर नजर दिल्ली में CJP के प्रस्तावित तिरंगा मार्च को लेकर भी विवाद सामने आया। प्रदर्शनकारियों की योजना कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा फहराने की थी। प्रशासन ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था में बदलाव किए। प्रदर्शन स्थल, नेताओं की हिरासत और मार्च की अनुमति को लेकर भी सवाल उठे। इस बीच, अदालत में प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग से जुड़ा मामला भी चर्चा में रहा। अदालत की टिप्पणियों और पुलिस के आश्वासनों को पूरे संदर्भ में समझना जरूरी है; इन्हें प्रदर्शन के हर पहलू पर अंतिम फैसला नहीं माना जाना चाहिए। तिरंगा मार्च को लेकर विवाद ने एक बार फिर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी के बीच संतुलन का सवाल खड़ा किया है। CJP Protest पर आगे क्या होगा? फिलहाल CJP आंदोलन के साथ तीन बड़े मुद्दे जुड़े हुए हैं—SIR के तहत मतदाता सूची में बदलाव, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग और ‘Regime Change’ को लेकर बीजेपी तथा विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप। आने वाले दिनों में चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया, आंदोलनकारियों की अगली रणनीति और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर नजर रहेगी। यह भी देखना होगा कि राजनीतिक दल चुनावी पारदर्शिता से जुड़े सवालों पर किस तरह अपनी बात रखते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
अभिजीत दिपके

CJP Tiranga March: अभिजीत दिपके के घर पहुंची दिल्ली पुलिस, कनॉट प्लेस में 25 हजार जवान तैनात

दिल्ली में आज, 16 अक्टूबर को CJP के ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को लेकर माहौल गर्म है। मार्च से पहले दिल्ली पुलिस अभिजीत दिपके के घर पहुंची। वहीं, कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इलाके में करीब 25 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की तैयारी है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच अब सबकी नजर इस बात पर है कि CJP का प्रस्तावित मार्च आगे किस तरह बढ़ता है। अभिजीत दिपके के घर पहुंची दिल्ली पुलिस CJP के प्रस्तावित मार्च से पहले दिल्ली पुलिस की टीम अभिजीत दिपके के घर पहुंची। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने उन्हें मार्च को लेकर नोटिस दिया। संगठन की ओर से इस कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। CJP का कहना है कि वह अपने नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में तिरंगा मार्च निकालना चाहता है। हालांकि, दिल्ली में लागू प्रतिबंधों और सुरक्षा व्यवस्था के चलते कार्यक्रम को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। Connaught Place में कड़ी सुरक्षा, 25 हजार जवान तैनात ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को देखते हुए कनॉट प्लेस और आसपास के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। रिपोर्ट्स में करीब 25 हजार पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों की तैनाती का जिक्र है। सेंट्रल पार्क और आसपास के प्रमुख स्थानों पर भी निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबंधात्मक कदम उठाए हैं। सेंट्रल पार्क को 16 और 17 अक्टूबर को बंद रखने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे में कनॉट प्लेस आने-जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। क्यों हो रहा है CJP का ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च? CJP ने इस मार्च का ऐलान अपने नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के विरोध में किया है। संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठा रहा है। 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान CJP समर्थकों ने बैरिकेडिंग पार कर नारेबाजी की थी। इसके बाद पुलिस ने संगठन के कुछ नेताओं को हिरासत में लिया। इसी कार्रवाई के विरोध में CJP ने तिरंगा मार्च निकालने की घोषणा की। SIR विवाद ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल इस पूरे विवाद के पीछे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) का मुद्दा भी है। CJP और कुछ विपक्षी समूहों ने मतदाता सूची में बदलावों को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया से मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। वहीं, चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची को लेकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत काम किए जाने की बात कही जाती रही है। SIR को लेकर राजनीतिक बहस लगातार जारी है और अब यह विवाद सड़कों पर हो रहे प्रदर्शनों तक पहुंच गया है। दिल्ली में Traffic Advisory, लोगों को सतर्क रहने की सलाह मार्च के चलते कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में ट्रैफिक प्रभावित होने की आशंका है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे घर से निकलने से पहले यातायात संबंधी अपडेट देख लें और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करें। दिल्ली पुलिस की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, जबकि CJP अपने विरोध प्रदर्शन को लेकर आगे बढ़ना चाहता है। ऐसे में शुक्रवार शाम का घटनाक्रम महत्वपूर्ण रहने वाला है। अब आगे क्या होगा? CJP के ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को लेकर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था सख्त है। एक तरफ संगठन अपने नेताओं की गिरफ्तारी और SIR के मुद्दे पर विरोध दर्ज कराना चाहता है, तो दूसरी तरफ प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबंध लागू कर रहा है। अब देखना होगा कि पुलिस की पाबंदियों के बीच मार्च को लेकर क्या स्थिति बनती है और CJP आगे क्या कदम उठाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Supreme Court

Supreme Court on CJP Protest: प्रदर्शन पर रोक से इनकार, ₹200 करोड़ के कारोबार पर असर का दावा

दिल्ली में CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई के दौरान प्रदर्शन के अधिकार और व्यापारियों की रोजी-रोटी का मुद्दा चर्चा में रहा। अदालत ने फिलहाल प्रदर्शन रोकने का आदेश देने से इनकार कर दिया। वहीं, व्यापारियों की ओर से दावा किया गया कि प्रदर्शन और उससे जुड़ी पाबंदियों के कारण रोजाना करीब ₹200 करोड़ के कारोबार पर असर पड़ सकता है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के सामने यह मामला रखा गया। याचिकाकर्ताओं ने दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क और आसपास के बाजारों में कारोबार प्रभावित होने की आशंका जताई। उनका कहना था कि बाजारों में लोगों की आवाजाही बाधित होने से छोटे दुकानदारों और दूसरे कारोबारियों को परेशानी हो सकती है। CJI की टिप्पणी: किसी के लिए प्रदर्शन, किसी के लिए मूंगफली बेचना जरूरी सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रदर्शन के अधिकार और आम लोगों की आजीविका के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने टिप्पणी की कि किसी व्यक्ति के लिए प्रदर्शन करना जरूरी हो सकता है, जबकि किसी दूसरे के लिए मूंगफली बेचकर अपना परिवार चलाना महत्वपूर्ण है। CJI सूर्यकांत ने भी छोटे व्यापारियों की आर्थिक स्थिति का जिक्र किया। त्योहारों के समय दुकानदारों की कमाई बढ़ने की उम्मीद रहती है। ऐसे में यदि बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो इसका असर उनकी रोजाना की आमदनी पर पड़ सकता है। अदालत की टिप्पणियों से साफ है कि इस मामले में केवल प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि आम लोगों की आजीविका और कानून-व्यवस्था से जुड़े पहलुओं पर भी विचार किया जा रहा है। Delhi Business Loss: रोजाना ₹200 करोड़ के नुकसान का दावा व्यापारियों की ओर से अदालत में दलील दी गई कि कनॉट प्लेस और आसपास के व्यावसायिक इलाकों में प्रदर्शन के कारण रोजाना करीब ₹200 करोड़ के कारोबार पर असर पड़ सकता है। इसका प्रभाव बड़े कारोबारियों के साथ-साथ छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों, कर्मचारियों और दिहाड़ी मजदूरों पर भी पड़ सकता है। बाजार में ग्राहकों की संख्या कम होने या आवाजाही प्रभावित होने से उनकी कमाई पर असर पड़ने की आशंका जताई गई। हालांकि, ₹200 करोड़ का आंकड़ा व्यापारियों की ओर से पेश किया गया दावा है। इसे वास्तविक नुकसान का प्रमाणित आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए। Central Park को बंद करने का मुद्दा भी उठा सुनवाई के दौरान कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क को बंद करने से जुड़े प्रशासनिक फैसले का मुद्दा भी उठाया गया। याचिकाकर्ताओं ने आशंका जताई कि इस कदम से आसपास के बाजारों और व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। अदालत ने संकेत दिया कि यदि किसी प्रतिबंध के कारण कारोबार या लोगों की आजीविका को अनुचित नुकसान पहुंचता है, तो उचित राहत देने के सवाल पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, तत्काल सुनवाई में प्रदर्शन पर रोक लगाने का कोई आदेश जारी नहीं किया गया। CJP Protest: क्यों किया गया प्रदर्शन का ऐलान? CJP ने 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च और प्रदर्शन का आह्वान किया था। पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के विरोध में यह कदम उठाने की बात कही थी। प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था, बाजारों में आवाजाही और कारोबार पर संभावित असर को लेकर चिंता जताई गई। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट में भी प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की गई थी। हाईकोर्ट ने रोक लगाने से इनकार किया था, जबकि दिल्ली पुलिस ने कानून के अनुसार जरूरी कदम उठाने की बात कही थी। Supreme Court Hearing: अब आगे क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट ने मामले को तत्काल आदेश के जरिए निपटाने के बजाय दशहरा अवकाश के बाद 26 या 27 अक्टूबर को सूचीबद्ध किए जाने का संकेत दिया। फिलहाल, प्रदर्शन पर रोक लगाने का आदेश नहीं दिया गया है। आगे की सुनवाई में प्रदर्शन के अधिकार, सार्वजनिक व्यवस्था और व्यापारियों की आजीविका से जुड़े पहलुओं पर चर्चा महत्वपूर्ण रहेगी। इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि विरोध दर्ज कराने के अधिकार और आम लोगों की रोजी-रोटी के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। अदालत की अगली सुनवाई से इस मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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