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कटनी f ग्रामीणों की जिद पर जीता न्याय: कलेक्टर ने ठेकेदार को दी सड़क की लीज, हाईकोर्ट ने लगाई फटकार

कटनी जिले की बरही तहसील के तीन गांवों — करौंदी खुर्द, कन्नौर और बिचपुरा — के लोगों के लिए राहत भरी खबर आई है। ग्रामीणों की आवाजाही रोकने वाले मामले में अब हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। दरअसल, इन गांवों को जोड़ने वाली एकमात्र सड़क को कटनी कलेक्टर ने एक ठेकेदार तिलकराज ग्रोवर को लीज पर दे दी थी। ठेकेदार ने उस रास्ते पर गिट्टी डंप करना शुरू कर दिया, जिससे ग्रामीणों का आना-जाना पूरी तरह से बंद हो गया। कलेक्टर से कई बार गुहार लगाने के बाद भी जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रामीणों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। ⚖️ कोर्ट ने जताई नाराजगी मामला हाईकोर्ट पहुंचने के बाद चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की बेंच ने सुनवाई की। कोर्ट ने पहले प्रशासन को सड़क खोलने के आदेश दिए, लेकिन आदेश के बावजूद रास्ता नहीं खोला गया। इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार, कटनी कलेक्टर और ठेकेदार तिलकराज ग्रोवर को नोटिस जारी किया और 10 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर जवाब देने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा — “अगर कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं हुआ है, तो यह गंभीर अवमानना का मामला है।” 🛣️ ग्रामीणों का एकमात्र रास्ता यह सड़क वर्षों से ग्रामीणों के लिए जीवन रेखा रही है। लोग इसी रास्ते से तहसील और शहर तक आते-जाते थे।लेकिन 1 जुलाई 2025 को कलेक्टर ने खनिज विभाग की रिपोर्ट पर ग्राम कन्नौर स्थित खसरा नंबर 861 की करीब 65 हेक्टेयर भूमि को ठेकेदार को लीज पर दे दी। महज 300 रुपये वार्षिक किराये में यह जमीन खनन डंपिंग साइट के रूप में दे दी गई। जबकि राजस्व रिकॉर्ड में यह भूमि “सार्वजनिक सड़क” के रूप में दर्ज है। 🧾 ग्रामीणों की याचिका बनी आधार कटनी निवासी संदीप जायसवाल ने 16 सितंबर को हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की।27 सितंबर और 13 अक्टूबर की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रशासन को सड़क खोलने का आदेश दिया था।लेकिन जब आदेश का पालन नहीं हुआ, तो 4 नवंबर को अवमानना याचिका दायर की गई। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अर्पण जे. पवार, अक्षत अरजरिया और चिरंजीवी शर्मा ने दलील दी कि प्रशासन ने “राजनीतिक दबाव” में आकर यह निर्णय लिया। ⚠️ कोर्ट की सख्त चेतावनी कोर्ट ने कहा कि जनता की सुविधा के लिए बनी सड़क को किसी निजी व्यक्ति या कंपनी के हित में नहीं दिया जा सकता।यदि अधिकारियों का जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो कोर्ट कड़ी कार्रवाई करेगी।फिलहाल, अदालत ने सड़क पर डंपिंग पर पूरी तरह रोक लगा दी है, जिससे ग्रामीणों को अस्थायी राहत मिली है। 📍 ग्रामीणों की एकजुटता और न्याय के प्रति भरोसे ने एक बार फिर दिखा दिया कि जनता की आवाज दबाई नहीं जा सकती। 👉 ऐसी और जनहित से जुड़ी खबरों के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
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MP में सब इंस्पेक्टर और सूबेदार भर्ती के लिए आज आखिरी मौका, रात 12 बजे तक भरें फॉर्म

मध्यप्रदेश पुलिस में नौकरी का सपना देख रहे युवाओं के लिए आज बड़ा दिन है। सब इंस्पेक्टर (SI) और सूबेदार भर्ती के लिए आवेदन भरने का आज आखिरी दिन (10 नवंबर) है। उम्मीदवार रात 12 बजे तक ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं। राज्य में कुल 500 पदों पर भर्ती हो रही है। इसके लिए मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ESB) अगले साल 9 जनवरी 2026 से भोपाल, इंदौर सहित 12 शहरों में ऑनलाइन परीक्षा आयोजित करेगा। 📝 आवेदन और संशोधन की अंतिम तिथि 💰 आवेदन शुल्क (यह शुल्क केवल मध्यप्रदेश के मूल निवासियों के लिए लागू है।) 👮 वेतनमान और योग्यता 📍 परीक्षा केंद्र भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, सागर, उज्जैन, रतलाम, खंडवा, सतना, छिंदवाड़ा और बालाघाट सहित 12 परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा होगी। यह भर्ती युवाओं के लिए सरकारी नौकरी पाने का सुनहरा अवसर है। इच्छुक उम्मीदवार आज ही अपना आवेदन मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल की आधिकारिक वेबसाइट पर पूरा करें। 🔸 For more such updates, visit www.deshharpal.com
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बिलासपुर में हाईकोर्ट वकील ने अरपा पुल से लगाई छलांग, प्रेमिका की सगाई से था दुखी

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक दर्दनाक घटना सामने आई है। हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकील राहुल अग्रवाल (30) ने अरपा नदी पुल से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि राहुल अपनी प्रेमिका से शादी करना चाहता था, लेकिन उसकी सगाई किसी और से हो गई, जिससे वह मानसिक तनाव में था। यह घटना सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र की है। गुरुवार रात से लापता, शुक्रवार को नदी में मिला शव राहुल अग्रवाल भाटापारा का रहने वाला था और पिछले कई सालों से बिलासपुर की ग्रीन गार्डन कॉलोनी, मंगला में रह रहा था। गुरुवार को वह रोज़ की तरह हाईकोर्ट गया था। शाम को उसने अपने दोस्त मुकेश राठिया से मुलाकात की और दोनों ने सिरगिट्टी और ट्रांसपोर्ट नगर इलाके में साथ समय बिताया। देर रात 1.30 बजे राहुल ने घर जाने की बात कही और बाइक से निकल गया, लेकिन घर नहीं पहुंचा। सुबह जब राहुल का फोन बंद मिला तो परिजनों को शक हुआ। उन्होंने सिविल लाइन थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने तलाश शुरू की और रामसेतु ब्रिज पर राहुल की बाइक लावारिस हालत में खड़ी मिली। इसके बाद उसके नदी में कूदने की आशंका जताई गई। अरपा नदी से बरामद हुआ शव शुक्रवार की रात करीब 10.30 बजे कुछ युवकों ने अरपा नदी में एक शव देखा और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची सिटी कोतवाली पुलिस और SDRF टीम ने रात करीब 1 बजे शव को बाहर निकाला। दोस्तों ने टी-शर्ट देखकर शव की पहचान राहुल अग्रवाल के रूप में की। प्रेमिका की सगाई से टूट गया था राहुल पुलिस जांच में पता चला कि राहुल का एक लड़की से प्रेम संबंध था और वह उससे शादी करना चाहता था। लेकिन लड़की के परिवार ने उसकी सगाई किसी और जगह तय कर दी, जिससे राहुल गहरे तनाव में था।परिवार और दोस्तों का कहना है कि यही कारण हो सकता है कि उसने यह कदम उठाया। पढ़ाई और करियर राहुल ने गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई (2013–2018) की थी। कुछ साल तक वह एक महिला वकील के साथ एसोसिएट के रूप में काम करता रहा, बाद में उसने स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस शुरू की थी। पुलिस जांच जारी सिटी कोतवाली टीआई देवेश सिंह राठौर ने बताया कि शुरुआती जांच में मामला आत्महत्या का लग रहा है। शव का पोस्टमॉर्टम कराया गया है, और रिपोर्ट आने के बाद ही सटीक कारणों का पता चल सकेगा। 🔸 For more such news and updates, visit www.deshharpal.com
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गुना बायपास पर भीषण सड़क हादसा: उज्जैन जा रहे परिवार की कार को ट्रक ने मारी टक्कर, 2 की मौत, 4 गंभीर घायल

शनिवार सुबह गुना बायपास पर RTO कार्यालय के सामने एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। तेज रफ्तार ट्रक ने उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के एक परिवार की कार को जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि चार लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। परिवार उज्जैन महाकालेश्वर दर्शन के लिए जा रहा था। उज्जैन दर्शन के रास्ते हुआ हादसा जानकारी के मुताबिक, शिवलाल शुक्ला अपने परिवार के साथ कार (क्रमांक UP78-EF-9805) से उज्जैन जा रहे थे। सुबह करीब 11 बजे वे गुना बायपास पहुंचे, तभी सामने से आ रहे एक तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी कार को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भयंकर थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और मौके पर ही हाहाकार मच गया। सड़क पर एक ही लेन खुली थी, आमने-सामने की भिड़ंत बायपास पर फिलहाल सड़क का पेंचवर्क चल रहा है, जिसके कारण केवल एक लेन खुली थी। ट्रक और कार दोनों उसी रास्ते पर चल रहे थे। बताया जा रहा है कि ट्रक ने ओवरटेक करने की कोशिश की, जिससे आमने-सामने टक्कर हो गई। पुलिस ने ट्रक को जब्त कर लिया है और आगे की जांच शुरू कर दी है। दो की मौत, चार घायल — दो को ग्वालियर रेफर हादसे में शिवलाल शुक्ला और कुंज शुक्ला (10) की मौके पर ही मौत हो गई।घायलों में स्वाति शुक्ला (25), दीपा शुक्ला, रीता शुक्ला और डेढ़ साल की मान्या शुक्ला शामिल हैं।पुलिस ने सभी घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां से दो की हालत नाजुक होने पर ग्वालियर रेफर किया गया है। बाकी दो का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है। कैंट थाना प्रभारी टीआई अनूप भार्गव ने बताया कि हादसे की जांच जारी है और मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए हैं। पुलिस ट्रक चालक और दुर्घटना के सही कारणों की पड़ताल कर रही है। 🔸 For more such news and updates, visit www.deshharpal.com
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सीहोर में मेडिकल दुकानों पर औचक जांच: 6 दुकानों से दवाओं के सैंपल लैब भेजे गए

खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग (एफडीए) ने जिले में मेडिकल दुकानों का औचक निरीक्षण किया। यह कार्रवाई दवाओं की बिक्री में पारदर्शिता बनाए रखने और अनियमितताओं को रोकने के उद्देश्य से की गई। जांच टीम ने बकतरा और बुधनी क्षेत्र की कई दुकानों का दौरा किया। रिकॉर्ड और साफ-सफाई की जांच निरीक्षण के दौरान टीम ने दुकानों की साफ-सफाई, दवाओं के खरीद-बिक्री रिकॉर्ड, एक्सपायर्ड दवाओं के रख-रखाव और प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री की स्थिति की बारीकी से जांच की। 6 मेडिकल दुकानों से लिए गए सैंपल टीम ने कुल 6 मेडिकल दुकानों से दवाओं के सैंपल लेकर उन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा है। जिन दुकानों का निरीक्षण किया गया उनमें शामिल हैं –सतेंद्र मेडिकल, जीवनरक्षा मेडिकल, लक्ष्मी मेडिकल, बालाजी मेडिकल, आरके मेडिकल और पीयूष मेडिकल। प्रशासन ने बताया कि अगर जांच रिपोर्ट में कोई गड़बड़ी मिलती है, तो संबंधित दुकानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। 🔸 For more such updates, visit www.deshharpal.com
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इंदौर में भाजपा नेता सत्तन का मंच से तंज: ‘जो सेव-परमल पर जीते थे, अब राजकीय गाड़ियों में घूम रहे हैं

भाजपा के वरिष्ठ नेता और कवि सत्यनारायण सत्तन ने वंदे मातरम् गीत के 150 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में मंच से बिना किसी का नाम लिए तीखा व्यंग्य किया। सत्तन ने कहा—“जो कभी चने नहीं खा सकते थे, सेव-परमल पर जिंदा थे, अब राजकीय गाड़ियों में घूम रहे हैं।” यह कार्यक्रम इंदौर के राजवाड़ा में हुआ था। जब सत्तन मंच पर बोल रहे थे, तभी कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की गाड़ी सायरन बजाते हुए पहुंची। नगर अध्यक्ष ने बताया कि “कैलाश जी आ गए”, तो सत्तन मुस्कुराए और बोले—“ये भी प्रजातंत्र का गौरव है कि जो कल तक झंडा उठाकर घूमते थे, आज गाड़ी में घूम रहे हैं। उनके आने से पहले ही ‘पी-पी-पी-पी’ की आवाज हो रही है।” सत्तन ने आगे कहा—“जो लोग कभी चने नहीं खा सकते थे, सेव-परमल पर जिंदा थे, अब आपके पुण्य प्रताप से राजकीय गाड़ियों में बैठकर आपके बीच आने का गौरव पा रहे हैं। ये सम्मान आपने दिया है, तालियां तो बनती हैं।” उनकी बातों पर पूरा पंडाल ठहाकों से गूंज उठा। पुराने कार्यकर्ताओं को याद किया सत्तन ने कहा कि आज मंच पर नई पीढ़ी के नेता हैं, लेकिन बाहर वही पुराने कार्यकर्ता खड़े हैं जिन्होंने संघर्ष के दिनों में पार्टी का झंडा थामे रखा था। आज वे खड़े होकर आत्मसंतुष्टि पा रहे हैं कि उनके संघर्ष से राष्ट्रप्रेम की मशाल जल रही है।उन्होंने कहा, “भाजपा भारत माता की जय और राष्ट्र चेतना के जागरण के लिए कार्य कर रही है।” विजयवर्गीय बोले – ‘वंदे मातरम्’ देश को फिर से खड़ा करने का मंत्र कार्यक्रम में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, “‘वंदे मातरम्’ सिर्फ गीत नहीं, बल्कि एक मंत्र है। यह भारत को फिर से विश्व गुरु बनाने की प्रेरणा देता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना है कि जब देश की आज़ादी के 100 साल पूरे हों, तब भारत दुनिया के सबसे ताकतवर देशों में गिना जाए।” भाजपा नगर अध्यक्ष बोले – ‘वंदे मातरम् एक ग्रंथ है’ भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने कहा कि “‘वंदे मातरम्’ एक ग्रंथ है, जिसने भारत की एकता और बलिदान की भावना को जन्म दिया। इसे गाते-गाते असंख्य क्रांतिकारी हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर झूल गए।” यह गीत आज भी भारत माता के प्रति श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है। 🔸 For more such news, visit deshharpal.com
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Bihar

Bihar Election 2025 बढ़ी हुई वोटिंग से नीतीश कुमार की ‘घर वापसी’ के संकेत

Bihar विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण की वोटिंग खत्म हो चुकी है और इस बार जनता का उत्साह पिछले चुनावों से कहीं अधिक देखने को मिला।चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, पहले चरण में 121 सीटों पर 64.69% मतदान हुआ है — जो कि 2020 के पहले चरण (56.1%) की तुलना में लगभग 8.6% ज्यादा है।अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह बढ़ी हुई वोटिंग नीतीश कुमार की सत्ता में वापसी का संकेत है? Voting Pattern से क्या मिल रहा है संकेत? Bihar के पिछले 20 सालों के चुनावी इतिहास में जब-जब वोटिंग में बढ़ोतरी हुई है, तब-तब नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू (JDU) ने सत्ता में वापसी की है।2005, 2010 और 2015 में मतदान प्रतिशत में उछाल आया था और हर बार नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने।विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार भी बढ़ी हुई वोटिंग NDA के लिए शुभ संकेत हो सकती है। Nitish Kumar vs Tejashwi Yadav: जनता का मूड किसके पक्ष में? वोटिंग में वृद्धि आमतौर पर जनता के अंदर बदलाव की इच्छा या सक्रिय भागीदारी को दर्शाती है।इस बार युवा वर्ग और पहली बार वोट डालने वालों की संख्या भी ज्यादा रही।राजद (RJD) नेता तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) बेरोजगारी और युवाओं के मुद्दे पर जनता से अपील कर रहे हैं, जबकि नीतीश कुमार “विकास और स्थिरता” की बात कर रहे हैं।ऐसे में यह तय करना मुश्किल है कि बढ़ी हुई वोटिंग का फायदा किसे मिलेगा — NDA को या महागठबंधन को। किस इलाकों में हुआ Record Voting पहले चरण में नालंदा, गया, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया और भागलपुर जैसे जिलों में रिकॉर्ड वोटिंग दर्ज हुई है।इनमें से कई जिले नीतीश कुमार के पारंपरिक गढ़ माने जाते हैं।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर आने वाले चरणों में भी यही ट्रेंड जारी रहा, तो Nitish Kumar की वापसी की संभावना और मजबूत हो सकती है। पिछले चुनावों से तुलना वर्ष औसत वोटिंग प्रतिशत परिणाम 2005 45.6% नीतीश कुमार पहली बार CM बने 2010 52.7% NDA की बड़ी जीत 2015 56.8% महागठबंधन की सरकार, नीतीश फिर CM 2020 57.1% एनडीए की मुश्किल जीत 2025 64.69% (पहला चरण) ट्रेंड नीतीश के हक में? Bihar Politics में नया मोड़ बढ़ी हुई वोटिंग सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि यह Bihar की राजनीति में एक नया बदलाव दर्शाती है।चाहे यह जनता की नाराजगी हो या विकास पर भरोसा — लेकिन इतना तय है कि 2025 का चुनाव नीतीश कुमार बनाम तेजस्वी यादव के बीच सीधी टक्कर बन चुका है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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खंडवा: तेज रफ्तार कार ने बाइक को मारी जोरदार टक्कर, युवक 5 फीट उछलकर सड़क पर गिरा – रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट

खंडवा शहर में गुरुवार दोपहर एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। नवचंडी मंदिर के पास सुपर मार्केट के सामने मोड़ पर एक तेज रफ्तार कार ने बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भयानक थी कि बाइक सवार युवक करीब 5 फीट हवा में उछलकर सड़क पर जा गिरा और 8-9 फीट तक लुढ़कता चला गया। घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है, जिसमें हादसे के पूरे दृश्य कैद हो गए। घायल युवक की रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोटें आई हैं और वह फिलहाल जिला अस्पताल में भर्ती है। कैसे हुआ हादसा जानकारी के अनुसार, युवक आनंद नगर की ओर जा रहा था, तभी गुर्जर अस्पताल की तरफ से एक तेज रफ्तार कार आई और तिराहे पर दोनों की भिड़ंत हो गई। टक्कर के बाद कार करीब 100 मीटर तक आगे निकल गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत युवक को अस्पताल पहुंचाया। बार-बार हो रहे हैं हादसे स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मोड़ पर अक्सर सड़क हादसे होते रहते हैं। यहां स्पीड ब्रेकर नहीं होने और मोड़ की जानकारी न होने से गाड़ियां तेज रफ्तार में आ जाती हैं। व्यवसायी रजत लाड़ ने बताया, “नगर निगम को यहां जल्द से जल्द स्पीड ब्रेकर और टर्न के चेतावनी बोर्ड लगाना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।” दो महीने पहले भी हुआ था ऐसा हादसा स्थानीय लोगों ने बताया कि दो महीने पहले भी इसी मोड़ पर एक कार ने बाइक को टक्कर मारी थी, जिसमें बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हो गया था। उस हादसे में उसके पैर की हड्डी टूट गई थी और उसे इंदौर रेफर किया गया था। लोगों की मांग है कि प्रशासन इस मोड़ को “ब्लैक स्पॉट” घोषित कर सुरक्षित व्यवस्था करे, ताकि यहां और जिंदगियां खतरे में न पड़ें। 👉 ऐसी ही खबरों के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
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जबलपुर: दिल में छेद वाली तीन दिन की बच्ची को मुख्यमंत्री एयर एम्बुलेंस से मुंबई भेजा गया, स्वास्थ्य विभाग ने छुट्टी के दिन भी खोला ऑफिस

जबलपुर जिले के सिहोरा में जन्मी एक तीन दिन की बच्ची के दिल में छेद होने की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने मानवीय संवेदनशीलता की मिसाल पेश की। गुरुवार दोपहर बच्ची को मुख्यमंत्री एयर एम्बुलेंस से मुंबई के नारायणा अस्पताल भेजा गया, जहां उसका इलाज शुरू किया जाएगा। छुट्टी के दिन खोला गया ऑफिस, डेढ़ घंटे में पूरी हुई प्रक्रिया बुधवार को गुरु नानक जयंती की छुट्टी थी, लेकिन बच्ची की गंभीर स्थिति को देखते हुए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) का ऑफिस खोला गया। अधिकारियों ने महज डेढ़ घंटे में सारे दस्तावेज़ और औपचारिकताएं पूरी कर लीं, ताकि बच्ची को तुरंत इलाज के लिए भेजा जा सके। पिता ने कहा- “भास्कर और सरकार की मदद से बची मेरी बच्ची” सिहोरा निवासी सत्येंद्र दाहिया और उनकी पत्नी शशि दाहिया ने सोमवार को जुड़वां बच्चों को जन्म दिया था। डॉक्टरों ने जांच के दौरान बताया कि बेटा पूरी तरह स्वस्थ है, लेकिन बेटी के दिल में छेद है, जिसका इलाज मुंबई में संभव है।सत्येंद्र ने कहा, “दैनिक भास्कर डिजिटल और स्वास्थ्य विभाग की बदौलत मेरी बेटी को समय पर मदद मिली, इसके लिए मैं आभारी हूं।” एयर एम्बुलेंस से मुंबई रवाना गुरुवार दोपहर करीब 1 बजे मुख्यमंत्री एयर एम्बुलेंस जबलपुर के डुमना एयरपोर्ट पर पहुंची। इस मौके पर सीएमएचओ डॉ. संजय मिश्रा, RBSK जिला प्रबंधक डॉ. सुभाष शुक्ला, स्वास्थ्य अधिकारी और सिहोरा विधायक संतोष बरकड़े मौजूद थे। बच्ची के मुंबई पहुंचते ही नारायणा अस्पताल में इलाज शुरू कर दिया गया। विधायक ने जताया आभार विधायक संतोष बरकड़े ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री मोहन यादव की संवेदनशील योजनाओं की वजह से आज जरूरतमंद परिवारों को जीवनदान मिल रहा है। जैसे ही मुझे इस केस की जानकारी मिली, मैंने तुरंत कलेक्टर और सीएमएचओ से बात की और RBSK योजना के तहत बच्ची को मुंबई भेजने की व्यवस्था कराई।” सीएमएचओ बोले- संवेदनशीलता से काम किया डॉ. संजय मिश्रा ने बताया, “हमारे स्टाफ ने छुट्टी के दिन भी सेवा भावना से काम किया। सभी ने मिलकर दस्तावेज़ तैयार किए और मुख्यमंत्री एयर एम्बुलेंस से बच्ची को सुरक्षित मुंबई रवाना किया गया।” 👉 ऐसी ही संवेदनशील और प्रेरणादायक खबरों के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
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ग्वालियर में पुलिस-डकैत मुठभेड़: थाना प्रभारी महावीर परिहार घायल, योगी गुर्जर गैंग पर शिकंजा कसने की तैयारी

ग्वालियर के बेहट इलाके में गुरुवार सुबह पुलिस और योगी गुर्जर गैंग के बीच मुठभेड़ हो गई। इस दौरान बेहट थाना प्रभारी महावीर परिहार गोली लगने से घायल हो गए। उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मुठभेड़ बेहट और हस्तिनापुर के बीच के जंगलों में हुई, जहां पुलिस का सामना गैंग के 3-4 सदस्यों से हुआ। बदमाशों ने पुलिस पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई के बावजूद डकैत जंगल का फायदा उठाकर भाग निकले। 9 सितंबर को किया था गर्भवती महिला का अपहरण पुलिस के मुताबिक, यही गैंग 9 सितंबर को तिघरा थाना क्षेत्र में एक परिवार पर हमला कर गर्भवती महिला अंजू गुर्जर का अपहरण कर चुका है। गैंग का सरगना योगी गुर्जर पर ₹30,000 का इनाम घोषित है। जंगल में सर्च ऑपरेशन तेज घटना के बाद पुलिस ने जंगल में सघन सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है। पांच टीमें लगातार डकैतों की तलाश में जुटी हैं, जबकि वरिष्ठ अधिकारी मौके की निगरानी कर रहे हैं। 22 दिन से पुलिस जंगल खंगाल रही करीब 10 साल बाद पुलिस को दो आईपीएस अधिकारियों के नेतृत्व में एंटी डकैत स्क्वॉड बनानी पड़ी है। पिछले 22 दिनों से पुलिस चंबल के बीहड़ों में लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही है, लेकिन अब तक योगी गुर्जर पुलिस की पकड़ से बाहर है। सूत्रों के अनुसार, योगी कभी अपनी प्रेमिका के ससुराल तो कभी उसके मायके (श्योपुर) में धमका कर पुलिस को चकमा दे रहा है। हथियारों से लैस गैंग फिर से सक्रिय लंबे समय से शांत पड़े चंबल के बीहड़ में अब एक बार फिर डकैतों की हलचल बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि योगेंद्र उर्फ योगी गुर्जर, जो कभी कुख्यात डकैत गुड्डा गुर्जर का साथी था, अब अपनी खुद की गैंग के साथ सक्रिय है। इस गिरोह में करीब 16 सदस्य हैं, जिनके पास पिस्टल, बंदूक और माउजर जैसे आधुनिक हथियार मौजूद हैं। पुलिस के लिए बना सिरदर्द ग्वालियर, मुरैना और धौलपुर के इलाकों में योगी गुर्जर का आतंक फैल गया है। अपनी प्रेमिका की शादी किसी और से होने के बाद से वह ‘सिरफिरा बागी डकैत’ बन गया है। पुलिस लगातार ऑपरेशन चला रही है और उम्मीद है कि जल्द ही गैंग को पकड़ लिया जाएगा। 👉 ऐसी ही ताज़ा और एक्सक्लूसिव खबरों के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
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Meerut

Meerut Murder Case: सांप के काटने का नाटक पड़ा भारी, रविता को Death Penalty

उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut) में पति की हत्या को सांप के काटने से हुई मौत दिखाने के चर्चित मामले में अदालत ने रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को मौत की सजा सुनाई है। इस मामले ने उस समय सबको चौंका दिया था, जब शुरुआत में अमित कश्यप की मौत को सर्पदंश माना जा रहा था। लेकिन जांच आगे बढ़ी तो कहानी कुछ और ही निकली। पुलिस की जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और दूसरे सबूतों के आधार पर मामले की परतें खुलती चली गईं। अदालत के फैसले के बाद मेरठ का यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। Meerut Murder Case: क्या है पूरा मामला? यह मामला मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के अकबरपुर सादात गांव का है। यहां रहने वाले अमित कश्यप उर्फ मिक्की की अप्रैल 2025 में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। उनका शव घर में बिस्तर पर मिला था। शुरुआती तौर पर मौत की वजह सांप का काटना मानी गई। हालांकि, मामले की जांच के दौरान कुछ ऐसे तथ्य सामने आए, जिनसे पुलिस को शक हुआ। इसके बाद घटना की गहराई से जांच शुरू की गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह दम घुटना सामने आने के बाद पुलिस ने हत्या के एंगल से जांच आगे बढ़ाई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से बदली जांच की दिशा अमित की मौत के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट अहम साबित हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी मौत सर्पदंश से नहीं, बल्कि दम घुटने से हुई थी। इसके बाद पुलिस ने घटना से जुड़े लोगों और परिस्थितियों की जांच की। जांच में अमित की पत्नी रविता और अमरदीप की भूमिका सामने आई। अभियोजन पक्ष ने अदालत में मामले से जुड़े सबूत और गवाहों के बयान पेश किए। इन्हीं तथ्यों के आधार पर अदालत ने दोनों को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई। रविता और अमरदीप को Death Penalty अदालत के फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। पति की मौत को सांप के काटने की घटना दिखाने के आरोपों से शुरू हुई जांच हत्या के मामले तक पहुंची। इस पूरे घटनाक्रम में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की जांच ने अहम भूमिका निभाई। ऐसे मामलों में फॉरेंसिक जांच, गवाहों के बयान और अन्य सबूत यह समझने में मदद करते हैं कि घटना के पीछे की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं। मेरठ में तीन दिन में चार दोषियों को फांसी की सजा की चर्चा मेरठ में हाल के दिनों में दो चर्चित हत्याकांडों में मृत्युदंड सुनाए जाने की वजह से भी चर्चा तेज हुई है। अमित कश्यप हत्याकांड के अलावा सौरभ राजपूत हत्याकांड भी सुर्खियों में रहा। सौरभ की हत्या के मामले में उसकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को भी अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी। दोनों मामलों की घटनाएं अलग-अलग हैं, लेकिन इन फैसलों ने हत्या के मामलों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर लोगों का ध्यान खींचा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

ग्वालियर के वेंकटेश्वर अपार्टमेंट में युवक का शव मिला, रजिस्टर में युवती का जिक्र; पुलिस जांच में जुटी

ग्वालियर: शहर के सिटी सेंटर स्थित वेंकटेश्वर अपार्टमेंट में गुरुवार देर रात एक युवक का शव फ्लैट के कमरे में पंखे से लटका मिला। मृतक की पहचान अंबाह निवासी संतोष शर्मा के रूप में हुई है। वह ग्वालियर की एक बीमा कंपनी में नौकरी करता था। सूचना मिलने पर विश्वविद्यालय थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। घटनास्थल से मिले एक रजिस्टर में युवती का जिक्र करते हुए कुछ पंक्तियां लिखी मिली हैं। इनमें संतोष ने युवती के साथ काफी समय बिताने और उसे अच्छा बताने की बात लिखी है। साथ ही, अपनी मौत के लिए उसे जिम्मेदार नहीं ठहराने का भी उल्लेख किया है। पुलिस इन पंक्तियों समेत सभी साक्ष्यों की जांच कर रही है। बी-ब्लॉक के जी-8 फ्लैट में मिला शव घटना वेंकटेश्वर अपार्टमेंट के बी-ब्लॉक स्थित जी-8 फ्लैट की है। गुरुवार रात करीब 11 बजे पुलिस को युवक का शव कमरे में पंखे से लटका होने की सूचना मिली। इसके बाद विश्वविद्यालय थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए। मामले की जांच के लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. कोक सिंह को भी बुलाया गया। पुलिस ने मृतक का मोबाइल फोन कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। कॉल रिकॉर्ड और चैट हिस्ट्री की पड़ताल के जरिए घटना से जुड़े तथ्यों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। युवती के साथ फ्लैट में रहने की जानकारी पुलिस के अनुसार, जिस फ्लैट में संतोष का शव मिला, वह एक युवती ने किराए पर लिया था। अपार्टमेंट में रहने वाले लोगों ने पुलिस को बताया कि युवती संतोष के साथ इसी फ्लैट में रहती थी। पुलिस ने युवती से संपर्क किया तो उसने बताया कि वह पीएचडी के काम से बाहर गई हुई है। फिलहाल पुलिस संतोष और युवती के बीच संबंधों तथा घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। ऑनलाइन गेमिंग की आदत की भी पड़ताल शुरुआती जानकारी में संतोष के ऑनलाइन गेमिंग में सक्रिय रहने की बात सामने आई है। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या ऑनलाइन गेमिंग में पैसों के लेनदेन या किसी अन्य कारण से वह तनाव में था। हालांकि, फिलहाल इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि संतोष को गेमिंग में बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ था, उस पर कर्ज था या उसकी मौत का संबंध ऑनलाइन गेमिंग से था। पुलिस सभी पहलुओं की कर रही जांच विश्वविद्यालय थाना प्रभारी रविंद्र जाटव के मुताबिक, पुलिस मामले की हर संभावित पहलू से जांच कर रही है। घटनास्थल से मिले रजिस्टर, मोबाइल फोन और अन्य साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। संबंधित लोगों से पूछताछ के आधार पर भी जानकारी जुटाई जा रही है। फिलहाल युवक की मौत के पीछे किसी एक कारण की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस जांच पूरी होने और साक्ष्य सामने आने के बाद ही घटना की परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।
Dharmendra Pradhan

Dharmendra Pradhan on CJP: राहुल गांधी पर सवाल, Regime Change को लेकर सियासत तेज

दिल्ली में CJP के विरोध प्रदर्शन को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग से शुरू हुआ यह विवाद अब राहुल गांधी, कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गया है। धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) समेत बीजेपी के नेताओं ने आंदोलन को लेकर विपक्ष की मंशा पर सवाल उठाए हैं। वहीं, प्रदर्शन से जुड़े नेताओं का कहना है कि उनकी लड़ाई चुनावी पारदर्शिता और चुनाव आयोग की जवाबदेही को लेकर है। विवाद तब और बढ़ गया, जब आंदोलन को बांग्लादेश में हुए राजनीतिक बदलाव और ‘Regime Change’ यानी सत्ता परिवर्तन की बहस से जोड़कर देखा जाने लगा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि CJP का प्रदर्शन अब केवल चुनाव सुधार तक सीमित है या इसके राजनीतिक मायने भी हैं? धर्मेंद्र प्रधान ने राहुल गांधी और CJP पर क्यों साधा निशाना? CJP के आंदोलन को लेकर बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस और राहुल गांधी की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। बीजेपी का आरोप है कि विपक्ष चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को उठाकर केंद्र सरकार के खिलाफ राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। Dharmendra Pradhan के बयान को भी इसी राजनीतिक टकराव के संदर्भ में देखा जा रहा है। बीजेपी नेताओं ने आंदोलन और बांग्लादेश के राजनीतिक घटनाक्रम के बीच समानताएं बताते हुए विपक्ष की रणनीति पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, ये राजनीतिक आरोप हैं। बांग्लादेश जैसे घटनाक्रम को भारत में दोहराने की किसी कथित योजना को स्थापित तथ्य के रूप में पेश नहीं किया जा सकता। ‘Regime Change’ बयान से क्यों शुरू हुई नई बहस? CJP आंदोलन के दौरान सत्ता परिवर्तन को लेकर दिए गए बयानों ने विवाद को नया मोड़ दिया। आंदोलन से जुड़े कुछ नेताओं की टिप्पणियों को बीजेपी ने सरकार बदलने की मंशा से जोड़कर देखा। दूसरी ओर, CJP की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग उठाई गई है। यही वजह है कि अब इस आंदोलन को लेकर दो अलग-अलग दावे सामने हैं। बीजेपी इसे राजनीतिक अभियान बता रही है, जबकि आंदोलनकारी पक्ष चुनाव आयोग की जवाबदेही का मुद्दा उठा रहा है। इन बयानों के बीच किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए संबंधित नेताओं के पूरे वक्तव्य और उपलब्ध तथ्यों को देखना जरूरी है। राहुल गांधी ने CJP आंदोलन को लेकर क्या रुख अपनाया? कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रदर्शन से जुड़े नेताओं की गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थन में बयान दिया था। उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन और तिरंगा फहराने के अधिकार का मुद्दा उठाया। राहुल गांधी और कांग्रेस लगातार चुनावी प्रक्रिया तथा मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। वहीं, बीजेपी का कहना है कि विपक्ष इन मुद्दों का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए कर रहा है। इस तरह CJP आंदोलन को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच टकराव बढ़ता दिखाई दे रहा है। एक तरफ चुनावी पारदर्शिता की मांग है, तो दूसरी तरफ आंदोलन के राजनीतिक उद्देश्य पर सवाल उठाए जा रहे हैं। SIR विवाद क्या है और चुनाव आयोग पर क्यों उठ रहे सवाल? इस पूरे विवाद के केंद्र में मतदाता सूची का Special Intensive Revision यानी SIR भी है। यह मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा की प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य सूची को अपडेट करना और पात्र मतदाताओं का विवरण सही रखना है। विपक्ष ने इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठाए हैं। कुछ रिपोर्टों और राजनीतिक बयानों में 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने का दावा भी चर्चा में रहा है। हालांकि, ऐसे आंकड़ों को संबंधित राज्यों के आधिकारिक आंकड़ों और चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के आधार पर समझना जरूरी है। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि किसी पात्र मतदाता का नाम न छूटे। दूसरी ओर, चुनाव आयोग की प्रक्रिया और उसके फैसलों को लेकर उठाए गए राजनीतिक आरोपों का आकलन तथ्यों के आधार पर किया जाना चाहिए। Delhi CJP Protest: तिरंगा मार्च और सुरक्षा व्यवस्था पर नजर दिल्ली में CJP के प्रस्तावित तिरंगा मार्च को लेकर भी विवाद सामने आया। प्रदर्शनकारियों की योजना कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा फहराने की थी। प्रशासन ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था में बदलाव किए। प्रदर्शन स्थल, नेताओं की हिरासत और मार्च की अनुमति को लेकर भी सवाल उठे। इस बीच, अदालत में प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग से जुड़ा मामला भी चर्चा में रहा। अदालत की टिप्पणियों और पुलिस के आश्वासनों को पूरे संदर्भ में समझना जरूरी है; इन्हें प्रदर्शन के हर पहलू पर अंतिम फैसला नहीं माना जाना चाहिए। तिरंगा मार्च को लेकर विवाद ने एक बार फिर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी के बीच संतुलन का सवाल खड़ा किया है। CJP Protest पर आगे क्या होगा? फिलहाल CJP आंदोलन के साथ तीन बड़े मुद्दे जुड़े हुए हैं—SIR के तहत मतदाता सूची में बदलाव, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग और ‘Regime Change’ को लेकर बीजेपी तथा विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप। आने वाले दिनों में चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया, आंदोलनकारियों की अगली रणनीति और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर नजर रहेगी। यह भी देखना होगा कि राजनीतिक दल चुनावी पारदर्शिता से जुड़े सवालों पर किस तरह अपनी बात रखते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
अभिजीत दिपके

CJP Tiranga March: अभिजीत दिपके के घर पहुंची दिल्ली पुलिस, कनॉट प्लेस में 25 हजार जवान तैनात

दिल्ली में आज, 16 अक्टूबर को CJP के ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को लेकर माहौल गर्म है। मार्च से पहले दिल्ली पुलिस अभिजीत दिपके के घर पहुंची। वहीं, कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इलाके में करीब 25 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की तैयारी है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच अब सबकी नजर इस बात पर है कि CJP का प्रस्तावित मार्च आगे किस तरह बढ़ता है। अभिजीत दिपके के घर पहुंची दिल्ली पुलिस CJP के प्रस्तावित मार्च से पहले दिल्ली पुलिस की टीम अभिजीत दिपके के घर पहुंची। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने उन्हें मार्च को लेकर नोटिस दिया। संगठन की ओर से इस कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। CJP का कहना है कि वह अपने नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में तिरंगा मार्च निकालना चाहता है। हालांकि, दिल्ली में लागू प्रतिबंधों और सुरक्षा व्यवस्था के चलते कार्यक्रम को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। Connaught Place में कड़ी सुरक्षा, 25 हजार जवान तैनात ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को देखते हुए कनॉट प्लेस और आसपास के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। रिपोर्ट्स में करीब 25 हजार पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों की तैनाती का जिक्र है। सेंट्रल पार्क और आसपास के प्रमुख स्थानों पर भी निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबंधात्मक कदम उठाए हैं। सेंट्रल पार्क को 16 और 17 अक्टूबर को बंद रखने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे में कनॉट प्लेस आने-जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। क्यों हो रहा है CJP का ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च? CJP ने इस मार्च का ऐलान अपने नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के विरोध में किया है। संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठा रहा है। 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान CJP समर्थकों ने बैरिकेडिंग पार कर नारेबाजी की थी। इसके बाद पुलिस ने संगठन के कुछ नेताओं को हिरासत में लिया। इसी कार्रवाई के विरोध में CJP ने तिरंगा मार्च निकालने की घोषणा की। SIR विवाद ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल इस पूरे विवाद के पीछे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) का मुद्दा भी है। CJP और कुछ विपक्षी समूहों ने मतदाता सूची में बदलावों को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया से मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। वहीं, चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची को लेकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत काम किए जाने की बात कही जाती रही है। SIR को लेकर राजनीतिक बहस लगातार जारी है और अब यह विवाद सड़कों पर हो रहे प्रदर्शनों तक पहुंच गया है। दिल्ली में Traffic Advisory, लोगों को सतर्क रहने की सलाह मार्च के चलते कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में ट्रैफिक प्रभावित होने की आशंका है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे घर से निकलने से पहले यातायात संबंधी अपडेट देख लें और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करें। दिल्ली पुलिस की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, जबकि CJP अपने विरोध प्रदर्शन को लेकर आगे बढ़ना चाहता है। ऐसे में शुक्रवार शाम का घटनाक्रम महत्वपूर्ण रहने वाला है। अब आगे क्या होगा? CJP के ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को लेकर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था सख्त है। एक तरफ संगठन अपने नेताओं की गिरफ्तारी और SIR के मुद्दे पर विरोध दर्ज कराना चाहता है, तो दूसरी तरफ प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबंध लागू कर रहा है। अब देखना होगा कि पुलिस की पाबंदियों के बीच मार्च को लेकर क्या स्थिति बनती है और CJP आगे क्या कदम उठाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Supreme Court

Supreme Court on CJP Protest: प्रदर्शन पर रोक से इनकार, ₹200 करोड़ के कारोबार पर असर का दावा

दिल्ली में CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई के दौरान प्रदर्शन के अधिकार और व्यापारियों की रोजी-रोटी का मुद्दा चर्चा में रहा। अदालत ने फिलहाल प्रदर्शन रोकने का आदेश देने से इनकार कर दिया। वहीं, व्यापारियों की ओर से दावा किया गया कि प्रदर्शन और उससे जुड़ी पाबंदियों के कारण रोजाना करीब ₹200 करोड़ के कारोबार पर असर पड़ सकता है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के सामने यह मामला रखा गया। याचिकाकर्ताओं ने दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क और आसपास के बाजारों में कारोबार प्रभावित होने की आशंका जताई। उनका कहना था कि बाजारों में लोगों की आवाजाही बाधित होने से छोटे दुकानदारों और दूसरे कारोबारियों को परेशानी हो सकती है। CJI की टिप्पणी: किसी के लिए प्रदर्शन, किसी के लिए मूंगफली बेचना जरूरी सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रदर्शन के अधिकार और आम लोगों की आजीविका के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने टिप्पणी की कि किसी व्यक्ति के लिए प्रदर्शन करना जरूरी हो सकता है, जबकि किसी दूसरे के लिए मूंगफली बेचकर अपना परिवार चलाना महत्वपूर्ण है। CJI सूर्यकांत ने भी छोटे व्यापारियों की आर्थिक स्थिति का जिक्र किया। त्योहारों के समय दुकानदारों की कमाई बढ़ने की उम्मीद रहती है। ऐसे में यदि बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो इसका असर उनकी रोजाना की आमदनी पर पड़ सकता है। अदालत की टिप्पणियों से साफ है कि इस मामले में केवल प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि आम लोगों की आजीविका और कानून-व्यवस्था से जुड़े पहलुओं पर भी विचार किया जा रहा है। Delhi Business Loss: रोजाना ₹200 करोड़ के नुकसान का दावा व्यापारियों की ओर से अदालत में दलील दी गई कि कनॉट प्लेस और आसपास के व्यावसायिक इलाकों में प्रदर्शन के कारण रोजाना करीब ₹200 करोड़ के कारोबार पर असर पड़ सकता है। इसका प्रभाव बड़े कारोबारियों के साथ-साथ छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों, कर्मचारियों और दिहाड़ी मजदूरों पर भी पड़ सकता है। बाजार में ग्राहकों की संख्या कम होने या आवाजाही प्रभावित होने से उनकी कमाई पर असर पड़ने की आशंका जताई गई। हालांकि, ₹200 करोड़ का आंकड़ा व्यापारियों की ओर से पेश किया गया दावा है। इसे वास्तविक नुकसान का प्रमाणित आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए। Central Park को बंद करने का मुद्दा भी उठा सुनवाई के दौरान कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क को बंद करने से जुड़े प्रशासनिक फैसले का मुद्दा भी उठाया गया। याचिकाकर्ताओं ने आशंका जताई कि इस कदम से आसपास के बाजारों और व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। अदालत ने संकेत दिया कि यदि किसी प्रतिबंध के कारण कारोबार या लोगों की आजीविका को अनुचित नुकसान पहुंचता है, तो उचित राहत देने के सवाल पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, तत्काल सुनवाई में प्रदर्शन पर रोक लगाने का कोई आदेश जारी नहीं किया गया। CJP Protest: क्यों किया गया प्रदर्शन का ऐलान? CJP ने 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च और प्रदर्शन का आह्वान किया था। पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के विरोध में यह कदम उठाने की बात कही थी। प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था, बाजारों में आवाजाही और कारोबार पर संभावित असर को लेकर चिंता जताई गई। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट में भी प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की गई थी। हाईकोर्ट ने रोक लगाने से इनकार किया था, जबकि दिल्ली पुलिस ने कानून के अनुसार जरूरी कदम उठाने की बात कही थी। Supreme Court Hearing: अब आगे क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट ने मामले को तत्काल आदेश के जरिए निपटाने के बजाय दशहरा अवकाश के बाद 26 या 27 अक्टूबर को सूचीबद्ध किए जाने का संकेत दिया। फिलहाल, प्रदर्शन पर रोक लगाने का आदेश नहीं दिया गया है। आगे की सुनवाई में प्रदर्शन के अधिकार, सार्वजनिक व्यवस्था और व्यापारियों की आजीविका से जुड़े पहलुओं पर चर्चा महत्वपूर्ण रहेगी। इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि विरोध दर्ज कराने के अधिकार और आम लोगों की रोजी-रोटी के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। अदालत की अगली सुनवाई से इस मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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