अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारत पर लगाए गए 26% टैरिफ ने भारतीय व्यापार और अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव डाला है। इस टैरिफ के चलते भारत के export-import trade पर असर पड़ रहा है और व्यापार घाटा बढ़ रहा है। इसी बीच, चीन ने भारत को RCEP (Regional Comprehensive Economic Partnership) में शामिल होने का प्रस्ताव दिया है।
RCEP क्या है?
RCEP 15 देशों का free trade agreement है, जिसमें 10 ASEAN देश और उनके FTA पार्टनर्स—चीन, जापान, कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड शामिल हैं। इसमें ज्यादातर सामानों पर zero tariff की सुविधा है। इस समझौते से भारत को Asia-Pacific market में बड़े स्तर पर प्रवेश का अवसर मिल सकता है।
भारत की चिंताएँ और चुनौतियाँ:
- Trade Deficit: भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा 2024-25 में 99.2 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। RCEP में शामिल होने से सस्ते चीनी उत्पाद भारतीय बाजार में आ सकते हैं, जिससे domestic industries पर दबाव बढ़ सकता है।
- स्वदेशी उद्योगों की सुरक्षा: घरेलू उद्योग सस्ते विदेशी उत्पादों के मुकाबले टिक पाना मुश्किल होगा, जिससे employment और production प्रभावित हो सकते हैं।
- राष्ट्रीय हित और आत्मनिर्भरता: भारत ने Atmanirbhar Bharat नीति को प्राथमिकता दी है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में economic autonomy बनाए रखना चाहता है।
भारत के विकल्प और रणनीति:
भारत को RCEP में शामिल होने या न होने के फैसले में national interest, domestic industry protection और वैश्विक व्यापार संबंधों का संतुलन बनाए रखना होगा। यह निर्णय भारत की दीर्घकालिक economic strategy और self-reliance के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
निष्कर्ष:
ट्रम्प के टैरिफ दबाव के बीच चीन का RCEP प्रस्ताव भारत के लिए opportunity and challenge दोनों है। सही रणनीति और संतुलित निर्णय भारत की global trade presence को मजबूत कर सकते हैं और domestic industries व रोजगार को सुरक्षित रख सकते हैं।
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