दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार टीएस संधू ने नगर निगम आयुक्त संजीव खिरवार के साथ राजधानी की प्रमुख नागरिक सुविधाओं और समस्याओं की व्यापक समीक्षा की। बैठक में सफाई व्यवस्था, जलभराव, आवारा मवेशियों के प्रबंधन और अवैध निर्माण समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
उपराज्यपाल ने अधिकारियों को नागरिक सुविधाओं में सुधार के साथ-साथ जमीनी स्तर पर कार्रवाई के ठोस परिणाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
रोजाना की व्यवस्था बने सफाई व्यवस्था
उपराज्यपाल ने सार्वजनिक स्थानों और कॉलोनियों में नियमित सफाई सुनिश्चित करने को कहा, ताकि कहीं भी कचरा जमा न हो।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शहर की सफाई किसी विशेष अभियान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। नियमित सफाई रोजाना की व्यवस्था और निर्धारित मानक का हिस्सा होनी चाहिए।
सड़क खुदाई के बाद तत्काल हो मरम्मत
बैठक में सड़कों की बार-बार खुदाई से होने वाली परेशानी पर भी चर्चा हुई। उपराज्यपाल ने सड़क काटने वाली एजेंसियों और सड़क के स्वामित्व वाली एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि किसी भी तरह का काम पूरा होने के तुरंत बाद सड़क की मरम्मत सुनिश्चित की जाए, ताकि लंबे समय तक लोगों को आवाजाही में परेशानी न हो।
जलभराव रोकने के लिए बने प्रभावी प्लान
जलभराव की समस्या की समीक्षा करते हुए उपराज्यपाल ने नालों की गाद निकालने के समय और प्रक्रिया पर दोबारा विचार करने को कहा।
उन्होंने अधिकारियों को भविष्य में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए ठोस और प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए, ताकि बारिश के दौरान लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
आवारा मवेशियों के लिए मानवीय दृष्टिकोण
आवारा मवेशियों के प्रबंधन को लेकर उपराज्यपाल ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि आवारा मवेशियों के कारण सड़क पर दुर्घटनाओं और यातायात संबंधी समस्याओं को रोकने के लिए व्यवस्थित तरीके से काम किया जाना चाहिए।
अवैध निर्माण पर समयबद्ध कार्रवाई
अवैध निर्माण के मामलों में उपराज्यपाल ने सख्त और समयबद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अनधिकृत निर्माण पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए जिम्मेदार विभागों को तेजी से कार्रवाई करनी होगी।
नागरिकों के अनुभव से तय होगी सुशासन की सफलता
उपराज्यपाल ने MCD आयुक्त से कहा कि सुशासन की असली परीक्षा नागरिकों के जमीनी अनुभव से होती है। इसलिए केवल निर्देश जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका प्रभाव जमीन पर दिखाई देना चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के साथ-साथ लिए गए फैसलों के ठोस और मापने योग्य परिणाम सुनिश्चित करने पर जोर दिया।



