गुना। पंजाबी मोहल्ला स्थित एक दो मंजिला मकान को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। हाईकोर्ट से स्टे मिलने के बावजूद शुक्रवार को प्रशासन ने तोड़फोड़ जारी रखी। याचिकाकर्ता के वकील का आरोप है कि अधिकारी स्टे आदेश की कॉपी लेने को तैयार नहीं थे, इसलिए उन्हें आदेश व्हाट्सऐप पर भेजना पड़ा। थोड़ी देर के लिए कार्रवाई रुकी, लेकिन फिर से मकान तोड़ना शुरू कर दिया गया।
कहानी विवादित मकान की
लाहोटी मार्ग पर बने ‘जग्गी भवन’ के वारिसों में लंबे समय से विवाद चल रहा था। शशि जग्गी ने अन्य वारिसों – सुनीता, विनीत, दिनेश, राजेश, विजय, ओमप्रकाश और सूरज जग्गी – के खिलाफ गुना कोर्ट में केस दायर किया था। निचली अदालत ने शशि के खिलाफ फैसला देते हुए मकान खाली कराने के आदेश दिए। इसके बाद प्रशासन ने मकान खाली कराने की कार्रवाई शुरू कर दी।
नेता परिवार से सौदा और तोड़फोड़ की रफ्तार
जानकारी के मुताबिक, शशि जग्गी को छोड़कर बाकी वारिसों ने यह बेशकीमती संपत्ति शहर के एक चर्चित नेता परिवार को बेच दी, जो जमीन और प्रॉपर्टी के कारोबार से जुड़ा है। इसी वजह से खाली कराने और तोड़फोड़ की कार्रवाई में तेजी देखी जा रही है।
हाईकोर्ट का आदेश और अवमानना का आरोप
शशि जग्गी ने निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए 13 अगस्त को हाईकोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट ने आगामी आदेश तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया। वकील कुलदीप गुर्जर का कहना है कि आदेश की कॉपी तहसीलदार और नगरपालिका सीएमओ को व्हाट्सऐप की गई थी, लेकिन थोड़ी देर रुकने के बाद भी तोड़फोड़ फिर शुरू हो गई, जो साफ तौर पर हाईकोर्ट की अवमानना है।
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