बड़वानी। मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले की प्रियंका सेंगर के लिए सालों का इंतजार आखिरकार नई उम्मीद में बदल गया है। बचपन में हुए हादसे के कारण एक आंख की रोशनी गंवाने वाली प्रियंका का दिल्ली में ऑपरेशन हो गया है। इलाज के बाद वह घर लौट रही हैं। दिल्ली से वापसी के दौरान उन्होंने फ्लाइट से अपना वीडियो जारी कर खुशी जाहिर की और राहुल गांधी का आभार जताते हुए लिखा- ‘थैंक्यू राहुल भैया’।
प्रियंका की कहानी कुछ महीने पहले उस समय चर्चा में आई थी, जब 19 अक्टूबर को इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के सामने अपनी परेशानी रखी थी। बातचीत के दौरान राहुल गांधी की नजर उनकी आंख पर पड़ी थी। प्रियंका ने बताया था कि महज तीन साल की उम्र में उनकी आंख में चूना चला गया था, जिसके बाद एक आंख की रोशनी चली गई।
फ्लाइट से वीडियो जारी कर जाहिर की खुशी
इलाज के बाद घर लौटते समय प्रियंका ने फ्लाइट से वीडियो जारी किया। इसमें उन्होंने अपनी खुशी जाहिर करते हुए राहुल गांधी के प्रति आभार जताया। उनके संदेश में लिखे ‘थैंक्यू राहुल भैया’ के शब्द चर्चा में हैं।
प्रियंका के लिए यह सिर्फ ऑपरेशन के बाद घर लौटने का सफर नहीं, बल्कि बचपन से देखे एक सपने की ओर बढ़ा कदम है। वह चाहती हैं कि अब दोनों आंखों से दुनिया देख सकें और अपनी पढ़ाई तथा भविष्य के सपनों को नई दिशा दे सकें।
तीन साल की उम्र में हुआ था हादसा
प्रियंका बड़वानी जिले की सेंधवा तहसील के पाडछा गांव की रहने वाली हैं। जब वह महज तीन साल की थीं, तब उनकी आंख में चूना चला गया था। इस हादसे में उनकी एक आंख की रोशनी चली गई।
12वीं कक्षा में पढ़ाई के दौरान बड़ौदा में उनकी आंख का एक ऑपरेशन कराया गया था। डॉक्टरों ने आगे एक और ऑपरेशन की जरूरत बताई थी, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण इलाज आगे नहीं बढ़ सका।
प्रियंका के पिता उदय सिंह सेंगर किसान हैं। परिवार के पास करीब तीन एकड़ जमीन है, लेकिन सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं होने से खेती से नियमित आमदनी नहीं हो पाती। ऐसे में महंगे इलाज का खर्च उठाना परिवार के लिए मुश्किल था।
‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के बाद दिल्ली से आया फोन
इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में राहुल गांधी ने प्रियंका को इलाज का भरोसा दिया था। कार्यक्रम के बाद दिल्ली से उनकी टीम की एक महिला ने प्रियंका के परिवार से संपर्क किया और इलाज के लिए दिल्ली आने को कहा।
इसके बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, समाजसेवी सरदार नरगावे और विधायक विक्रांत भूरिया की ओर से भी परिवार से संपर्क किया गया। आगे इलाज की प्रक्रिया पूरी की गई और प्रियंका को दिल्ली बुलाया गया, जहां उनका ऑपरेशन हुआ।
हॉस्टल की समस्याओं पर भी उठाई थी आवाज
‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में प्रियंका ने सिर्फ अपनी आंख की समस्या ही नहीं बताई थी, बल्कि आदिवासी क्षेत्रों के सरकारी हॉस्टलों में सीटों की कमी, भोजन और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी परेशानियां भी उठाई थीं।
उन्होंने बताया था कि कक्षा 1 से 12वीं तक सरकारी हॉस्टल में रहकर पढ़ाई की। कई बार भोजन की व्यवस्था ठीक नहीं होने पर घर से लाई लाल मिर्च की चटनी और रोटी खाकर गुजारा करना पड़ता था। उन्होंने हॉस्टल में छात्राओं से वार्डन द्वारा काम करवाए जाने का मुद्दा भी उठाया था।
प्रियंका फिलहाल इंदौर में रहकर यूजीसी-नेट की तैयारी कर रही हैं। आंख की परेशानी के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। अब ऑपरेशन के बाद उनकी जिंदगी में नई उम्मीद जगी है।








































