मुंबई स्थित टाटा समूह के मुख्यालय बॉम्बे हाउस में 18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) स्थगित हो गई। टाटा संस के इतिहास में यह पहली बार है जब कंपनी की AGM टली है। चेयरमैन एन चंद्रशेखरन बैठक में शामिल होने के लिए सुबह ही पहुंच गए थे, लेकिन कानूनी और तकनीकी अड़चनों के चलते बैठक में कोई फैसला नहीं हो सका।
पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि AGM के लिए जरूरी कोरम पूरा नहीं हो पाया। इस पूरे घटनाक्रम का असर कंपनी के कई महत्वपूर्ण फैसलों और टाटा समूह में नेतृत्व की आगे की प्रक्रिया पर पड़ सकता है।
सवाल 1: AGM क्यों टली?
टाटा संस के नियमों के मुताबिक AGM के लिए कम से कम 5 सदस्यों की व्यक्तिगत मौजूदगी जरूरी है। साथ ही सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) की ओर से संयुक्त रूप से नामित प्रतिनिधि की मौजूदगी भी जरूरी है।
बोर्ड मीटिंग नहीं हो पाने के कारण दोनों ट्रस्ट संयुक्त प्रतिनिधि का नाम तय नहीं कर सके। यह नियम तब तक लागू है, जब तक दोनों ट्रस्टों के पास टाटा संस की कम से कम 40% हिस्सेदारी है। फिलहाल SRTT और SDTT के पास करीब 51% और पूरे टाटा ट्रस्ट्स नेटवर्क के पास करीब 66% हिस्सेदारी बताई गई है।
सवाल 2: SRTT की बैठक क्यों नहीं हो पा रही?
महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने मई में SRTT के बोर्ड गठन से जुड़ी जांच को लेकर निर्देश जारी किए थे। इसके बाद से ट्रस्ट की बैठक नहीं हो सकी है। इसी वजह से AGM के लिए संयुक्त प्रतिनिधि के नाम पर भी फैसला नहीं हो पाया।
सवाल 3: विवाद किस कानून से जुड़ा है?
मामला महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट की धारा 30A (2) से जुड़ा है। यह प्रावधान 2025 के संशोधन के जरिए लागू किया गया था। इसके तहत किसी पब्लिक ट्रस्ट के बोर्ड में लाइफटाइम या परमानेंट ट्रस्टियों की संख्या कुल ट्रस्टियों के 25% तक सीमित की गई है।
SRTT का तर्क है कि यह प्रावधान नया है और इसे पहले से की गई नियुक्तियों पर लागू नहीं किया जा सकता।
सवाल 4: AGM टलने से कौन से फैसले अटके?
AGM स्थगित होने से कंपनी के तीन अहम एजेंडे फिलहाल अटक गए हैं:
- वित्त वर्ष 2025-26 के वित्तीय विवरणों को मंजूरी देना।
- शेयरधारकों के लिए डिविडेंड की घोषणा।
- रोटेशन के तहत रिटायर हो रहे डायरेक्टर एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को मंजूरी देना।
सवाल 5: एन चंद्रशेखरन और नए चेयरमैन की स्थिति क्या है?
एन चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को स्पष्ट किया था कि वह टाटा संस के चेयरमैन पद से हट रहे हैं और अगले कार्यकाल के लिए पद पर नहीं रहेंगे। हालांकि, वह टाटा संस के डायरेक्टर भी हैं।
AGM स्थगित होने के बाद वह अगली बैठक होने तक डायरेक्टर पद पर बने रहेंगे। दूसरी ओर, नए चेयरमैन के चयन की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है। SDTT ने 13 अगस्त को नए चेयरमैन के चयन के लिए कमेटी बनाने का प्रस्ताव पारित किया था, लेकिन SRTT की बैठक नहीं होने से प्रक्रिया आगे बढ़ने में अड़चन आ सकती है।
सवाल 6: क्या AGM स्थगित करने को लेकर नियम स्पष्ट हैं?
टाटा संस के आर्टिकल 87 में कोरम पूरा नहीं होने की स्थिति में बैठक स्थगित करने का प्रावधान है। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक यदि SRTT और SDTT का संयुक्त प्रतिनिधि आगे भी नियुक्त नहीं हो पाता है, तो स्थगित AGM को किस तरह आगे बढ़ाया जाएगा, इस स्थिति को लेकर नियमों में स्पष्टता नहीं है।
सवाल 7: टाटा ट्रस्ट्स में पिछले एक साल से किन मुद्दों पर मतभेद?
पिछले एक साल में टाटा ट्रस्ट्स के ट्रस्टियों के बीच बोर्ड में प्रतिनिधित्व, नए ट्रस्टियों की नियुक्ति, टाटा संस की संभावित लिस्टिंग और एयर इंडिया, टाटा डिजिटल व टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे कारोबारों में पूंजी आवंटन को लेकर मतभेद सामने आए हैं।
इन मतभेदों के बीच कुछ बड़े इस्तीफे भी हुए हैं।
- विजय सिंह: टाटा ट्रस्ट्स के वाइस चेयरमैन विजय सिंह ने 14 अगस्त को कार्यकाल समाप्त होने से ठीक पहले SRTT से इस्तीफा दे दिया।
- मेहली मिस्त्री: दोबारा नियुक्ति पर सहमति नहीं बनने के बाद अक्टूबर में उनका कार्यकाल समाप्त हुआ। उन्होंने इस फैसले को चैरिटी कमिश्नर के समक्ष चुनौती दी है।
- वेणु श्रीनिवासन: सर्वसम्मति नहीं बन पाने के कारण उन्होंने अप्रैल में बाई हिराबाई चैरिटेबल ट्रस्ट से इस्तीफा दे दिया था।
टाटा समूह के लिए क्यों अहम है यह घटनाक्रम?
टाटा संस की AGM का पहली बार स्थगित होना सिर्फ एक कॉरपोरेट बैठक का टलना नहीं है। इसका सीधा असर कंपनी के वित्तीय फैसलों, बोर्ड में नियुक्तियों और नए चेयरमैन के चयन की प्रक्रिया पर पड़ सकता है। अब अगली बैठक कब और किस तरह होती है, इस पर टाटा संस के साथ-साथ पूरे टाटा ट्रस्ट्स की आगे की रणनीति भी निर्भर करेगी।


