सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट की याचिकाओं पर लगातार छठे दिन सुनवाई हुई। उद्धव गुट ने कोर्ट में दलील दी कि पहले यह तय किया जाना चाहिए कि शिवसेना के बागी विधायक अयोग्य हैं या नहीं। इसके बाद ही चुनाव आयोग को यह तय करना चाहिए कि असली शिवसेना किसकी है।
मामले की सुनवाई CJI जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच कर रही है। बेंच 2024 में दायर उद्धव ठाकरे गुट की दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। उद्धव गुट की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने पक्ष रखा।
उद्धव गुट की दलील- पहले विधायकों की अयोग्यता पर फैसला हो
कपिल सिब्बल ने कहा कि चुनाव आयोग और महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर ने कानून की गलत व्याख्या की है। उनके मुताबिक, विधायकों की संख्या में बहुमत और राजनीतिक पार्टी की सदस्यता को एक ही नहीं माना जा सकता।
उद्धव गुट का कहना है कि यदि बागी विधायकों को बाद में अयोग्य ठहराया जाता है, तो विधानसभा में उनकी संख्या को बहुमत तय करने के लिए नहीं गिना जाना चाहिए। इसलिए पहले विधायकों की अयोग्यता का फैसला होना जरूरी है और उसके बाद ही चुनाव आयोग को पार्टी की वास्तविक स्थिति पर निर्णय लेना चाहिए।
चुनाव आयोग ने शिंदे गुट को माना था असली शिवसेना
दरअसल, चुनाव आयोग ने 17 फरवरी 2023 को एकनाथ शिंदे गुट को असली शिवसेना माना था। आयोग ने शिंदे गुट को शिवसेना का नाम और धनुष-बाण चुनाव चिह्न भी आवंटित किया था। उद्धव ठाकरे गुट ने इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
मामला 39 बागी विधायकों की अयोग्यता से जुड़ा
पूरा विवाद शिवसेना के 39 बागी विधायकों से जुड़ा है। 10 जनवरी 2024 को महाराष्ट्र विधानसभा के तत्कालीन स्पीकर राहुल नार्वेकर ने इन विधायकों को अयोग्य नहीं माना था। उन्होंने विधानसभा में बहुमत के आधार पर शिंदे गुट को असली शिवसेना माना था।
सिब्बल ने इसी फैसले का हवाला देते हुए कहा कि विधायकों की संख्या और राजनीतिक दल की पहचान को अलग-अलग देखा जाना चाहिए।
सुभाष देसाई मामले का भी दिया हवाला
कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट के सुभाष देसाई मामले के फैसले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विधायी दल में विभाजन को अपने आप राजनीतिक दल में विभाजन नहीं माना जा सकता।
इससे पहले 13 अगस्त की सुनवाई में भी उद्धव गुट ने दलील दी थी कि संविधान की ऐसी व्याख्या नहीं की जा सकती, जिससे उस गलती को बढ़ावा मिले जिसे रोकने के लिए दलबदल विरोधी कानून बनाया गया था।
फिलहाल शिंदे गुट के पास शिवसेना का नाम और निशान
चुनाव आयोग के 17 फरवरी 2023 के फैसले के मुताबिक, आधिकारिक तौर पर शिवसेना का नाम और धनुष-बाण चुनाव चिह्न एकनाथ शिंदे गुट के पास है। वहीं उद्धव ठाकरे गुट शिवसेना (UBT) के नाम से राजनीति कर रहा है और उसे मशाल चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है।
मंगलवार को दोनों पक्षों की बहस पूरी नहीं हो सकी। मामले में सुप्रीम कोर्ट बुधवार को भी सुनवाई जारी रखेगा।

