भारत सरकार खेलों को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्थिति मजबूत करने के लिए अगले पांच वर्षों में ₹36,441 करोड़ खर्च करेगी। भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के अनुसार, यह राशि 2026 से 2031 के बीच रिवैंप्ड खेलो इंडिया योजना के तहत खर्च की जाएगी।
सरकार ने बजट के साथ भविष्य के ओलिंपिक के लिए मेडल लक्ष्य भी तय किए हैं। भारत का लक्ष्य 2036 ओलिंपिक की मेडल टैली में टॉप-10 और 2048 ओलिंपिक में टॉप-5 देशों में जगह बनाना है।
भारत 2036 ओलिंपिक की मेजबानी की दावेदारी भी पेश करना चाहता है। वहीं, 2048 ओलिंपिक तक देश की आजादी के 100 वर्ष पूरे हो चुके होंगे। ऐसे में सरकार लंबे समय की रणनीति के तहत भारतीय खिलाड़ियों को मजबूत करने पर जोर दे रही है।
खिलाड़ियों की संख्या 10 गुना बढ़ाने की तैयारी
SAI रीजनल सेंटर मुंबई के क्षेत्रीय निदेशक पांडुरंग चाटे के मुताबिक, रिवैंप्ड खेलो इंडिया योजना का उद्देश्य अलग-अलग योजनाओं के बजाय खिलाड़ियों के लिए पूरी खेल यात्रा तैयार करना है।
योजना के बजट को करीब 8 गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही 2026 से 2031 के बीच योजना से लाभ पाने वाले खिलाड़ियों की संख्या को भी 10 गुना तक बढ़ाने की योजना है।
30 हजार खिलाड़ियों को मिलेगा फायदा
रिवैंप्ड खेलो इंडिया योजना के तहत करीब 30 हजार खिलाड़ियों को सहायता देने की योजना है। योजना में केंद्र और राज्य के बीच खर्च का अनुपात 60:40 रखा गया है।
SAI रीजनल सेंटर मुंबई ने कहा कि रिवैंप्ड खेलो इंडिया योजना महाराष्ट्र के मौजूदा स्पोर्ट्स इकोसिस्टम को और मजबूत करने का अवसर देगी।
गौरतलब है कि पेरिस ओलिंपिक 2024 में भारत ने कुल 6 पदक जीते थे और मेडल टैली में 71वें स्थान पर रहा था। अब सरकार का फोकस खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, सुविधाएं और लंबी अवधि की सहायता उपलब्ध कराकर ओलिंपिक में भारत के प्रदर्शन को नई ऊंचाई देने पर है।

